Author: Sagar Joshi [SAMDARSHI NEWS]

  • विधानसभा में विष्णुदेव साय का बड़ा ऐलान—सुशासन, विकास और सुरक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़; होली से पहले किसानों को धान अंतर राशि, 125 दिन रोजगार और 5 लाख पीएम आवास का रिकॉर्ड

    विधानसभा में विष्णुदेव साय का बड़ा ऐलान—सुशासन, विकास और सुरक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़; होली से पहले किसानों को धान अंतर राशि, 125 दिन रोजगार और 5 लाख पीएम आवास का रिकॉर्ड

    सुशासन, विकास और सुरक्षा के संकल्प के साथ बढ़ रहे हैं आगे: मुख्यमंत्री श्री साय

    राज्य के तेज विकास, भ्रष्टाचार पर सख्ती और नक्सलवाद के अंत का संकल्प

    किसानों को धान खरीदी की अंतर की राशि होली से पहले मिलेगी

    जी राम जी योजना’ में मिलेगा 125 दिन का रोजगार

    पीएम आवास योजना में सिर्फ 10 महीनों में 5 लाख से अधिक आवासों का निर्माण

    सिंचाई सुविधा के लिए दो वर्षों में 10 हजार 700 करोड़ रुपये स्वीकृत

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि राज्य सरकार सुशासन, विकास और सुरक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़े प्रहार किए हैं और इसमें लिप्त कई लोग आज जेल के पीछे हैं। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत 7 करोड़ पेड़ लगाए गए हैं तथा उद्योग नीति के तहत काटे जाने वाले पेड़ों की भरपाई भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुझे सदन को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय वन संरक्षण देहरादून द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण एवं गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ सरकार निर्णायक लड़ाई लड़ रही है और उम्मीद जताई कि 31 मार्च तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का समूल उन्मूलन कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में जहां स्कूलों को जला दिया गया था और हथियारों की फैक्ट्रियां संचालित हो रही थीं, वहीं आज बस्तर में विकास की नई धारा बह रही है। स्कूल संचालित हो रहे हैं, अस्पताल खुल रहे हैं और लोगों का समुचित इलाज हो रहा है। पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केरल से बड़ा राज्य होने के बावजूद पूर्व में अपेक्षित विकास नहीं हुआ, लेकिन अब प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। बस्तर पंडुम में इस वर्ष 54 हजार कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। होमस्टे को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में विगत दो वर्षों में वन संरक्षण अधिनियम के तहत स्वीकृत खनन प्रकरणों में खनन कार्य हेतु एक लाख 3 हजार 855 पेड़ों की कटाई की गई है, जबकि इसके एवज में खनन एवं औद्योगिक क्षेत्रों में 30 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं। हमने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पेड़ लगाये हैं।

    नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वहां हजारों पर्यटक पहुंच रहे है और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने भी इसकी प्रशंसा की है। उन्होंने बताया कि प्रदेशवासियों को रामलला के दर्शन कराने के लिए रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की गई है, जिसका 42 हजार लोग लाभ उठा चुके हैं। मुख्यमंत्री दर्शन योजना से भी 5 हजार से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है, जिसे पिछली सरकार ने बंद कर दिया था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 10 महीनों में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 5 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए गए हैं, जो देश में सर्वाधिक है। किसानों से 21 क्विंटल तक 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी गई है और अंतर की राशि होली से पहले किसानों को प्रदान कर दी जाएगी। सिंचाई क्षेत्र में जहां पूर्व सरकार ने 5700 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे, वहीं वर्तमान सरकार ने 10700 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 32 हजार पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है और इसे सुव्यवस्थित करने के लिए नया अधिनियम लाया जाएगा। नया रायपुर में ‘अंतरिक्ष संगवारी’ का उद्घाटन भी किया गया है। शासकीय कर्मचारियों को कैशलैस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि रेलवे सेक्टर में 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य प्रगति पर हैं। ‘जी राम जी योजना’ को मनरेगा से बेहतर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें 100 के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा। सरकार की मंशा हाफ बिजली बिल से आगे बढ़कर मुफ्त बिजली बिल की दिशा में जाने की है, जिसके लिए सोलर पैनल स्थापना पर सब्सिडी दी जा रही है। राज्य के 8 नगर निगमों में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) के माध्यम से गेल और बीपीसीएल द्वारा बायोसीएनजी संयंत्रों की स्थापना की जा रही है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमने सुशासन एवं अभिसरण के रूप में एक नया विभाग ही बना दिया। इसका काम प्रचलित तरीकों से इतर नई सोच के साथ आगे बढ़ना है जिसमें तकनीक का समावेश हो, गवर्नेंस की सर्वाेत्तम पद्धतियां जिसमें शामिल हो। हमने ई-आफिस प्रणाली लागू की है, फाइलें अब कंप्यूटर के जरिए बढ़ती हैं, तय समय सीमा में अधिकारियों को अपने अभिमत लिखने होते हैं और आगे फारवर्ड करना होता है। इससे न केवल पारदर्शिता आई है अपितु समय भी बच रहा है। इस प्रणाली को हम राज्य स्तर से जिला स्तर की ओर भी ले जा रहे हैं। हम डिजिटल गवर्नेंस को सभी विभागों में लागू कर रहे हैं, ताकि काम त्वरित गति से हों और लोगों को भटकना न पड़े।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हम हाफ बिजली से मुफ्त बिजली की दिशा में बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री सौर घर मुफ्त बिजली योजना ग्रीन एनर्जी को लेकर प्रधानमंत्री जी की सार्थक पहल है। हमने छत्तीसगढ़ में अब तक 27 हजार से अधिक घरों को सौर ऊर्जा से रौशन कर दिया है। केंद्र से उपभोक्ताओं को अनुदान लाभ तो मिलता ही है, हम राज्य में भी उपभोक्ताओं को अनुदान लाभ दे रहे हैं। मैं प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि प्रधानमंत्री सौर घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लें और अगले 25 सालों तक मुफ्त बिजली का लाभ लें।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रेल यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने अमृत स्टेशन योजना के तहत प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को आधुनिकीकरण किया जा रहा है। जिसमें 05 स्टेशनों का कार्य पूरा हो चुका है। वंदेभारत एक्सप्रेस की सुविधा नागपुर और विशाखापट्नम के लिए आरंभ की गई है। प्रदेश में 51 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेल परियोजनाओं पर काम हो रहा है। रावघाट-जगदलपुर, खरसिया-परमालकसा जैसी महत्वपूर्ण रेल लाइनों के निर्माण से प्रदेश के विकास को तीव्र गति मिलेगी। आज के समय सड़कें जितनी जरूरी हैं उतनी ही जरूरी संचार कनेक्टिविटी भी है, हमारी सरकार ने 500 नये मोबाइल टावर स्वीकृत किये हैं जिससे कनेक्टिविटी की स्थिति और बेहतर होगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता की वृद्धि के लिए हम प्रदेश में 5 नये मेडिकल कालेज आरंभ कर रहे हैं। इसमें मनेंद्रगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा एवं दंतेवाड़ा जिला में भूमिपूजन हो चुका है और कुनकुरी में भूमि आवंटन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। अटल जी की संकल्पना एम्स में अब रोबोटिक सर्जरी शुरू हो गई है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत के रूप में देश में हेल्थ केयर का सबसे बड़ा प्लान दिया। इस योजना के माध्यम से 4 हजार 551 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। प्रधानमंत्री जी ने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर भी बनाये। इसकी शुरूआत भी छत्तीसगढ़ से हुई। हमने युक्तियुक्तकरण के रूप में किया। पिछली सरकार के समय दूरस्थ ग्रामीण स्कूल तो पूरी तरह से शिक्षकविहीन हो गये थे। जिन स्कूलों में शिक्षक थे भी तो वहां भी सामान्यतः प्रति सौ छात्र केवल एक शिक्षक थे। अधिकांश शिक्षक शहरी स्कूलों में आ गये थे, कुछ शहरी स्कूलों में यह अनुपात दस छात्र के पीछे एक शिक्षक का भी था। हमने इस समस्या का निराकरण युक्तियुक्तकरण के माध्यम से निकाला। अब ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में भी शिक्षकों की पदस्थापना कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत के युवा दुनिया भर में कमाल कर रहे हैं। पिछले साल मैं जापान की राजधानी टोक्यो में बस्तर के एक युवा अविनाश तिवारी से मिला। अविनाश वहां एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्य कर करता है। उगते सूरज के देश में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा का उजाला देखकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। हमारी युवा शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। प्रशासनिक प्रणाली बेहतर तरीके से चले और इसमें युवा ऊर्जा का अधिकतम उपयोग हो, इसलिए हम 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ को विकास, सुरक्षा और सुशासन के नए शिखर पर पहुंचाना है।

  • छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा हब बनाने की दिशा में पहल: छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के सेमिनार में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, उद्योग और वित्तीय संस्थानों की सहभागिता; स्टील हब भिलाई व रायगढ़ में नई संभावनाओं पर चर्चा

    छत्तीसगढ़ को स्वच्छ ऊर्जा हब बनाने की दिशा में पहल: छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के सेमिनार में ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, उद्योग और वित्तीय संस्थानों की सहभागिता; स्टील हब भिलाई व रायगढ़ में नई संभावनाओं पर चर्चा

    ऊर्जा विभाग सचिव श्री रोहित यादव ने छत्तीसगढ़ में ग्रीन हाइड्रोजन की संभावनाओं पर की चर्चा

    हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में भविष्य की योजनाओं पर अर्धदिवसीय सेमिनार आयोजित

    रायपुर : छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) द्वारा आज छत्तीसगढ़ को ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्लोबल क्लीन एनर्जी के विस्तार के उद्देश्य से अर्धदिवसीय सेमिनार का आयोजन कोर्टयार्ड बाय मैरियट में किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के ऊर्जा विभाग के सचिव श्री रोहित यादव (आईएएस) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    सचिव श्री रोहित यादव ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक परिवेश में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना तथा पारंपरिक औद्योगिक ईंधनों के स्थान पर स्वच्छ विकल्पों को अपनाने की दिशा में कार्य करना है। उन्होंने बताया कि बायोमास आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए इसे प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकेगी।

    सेमिनार में चर्चा के दौरान बताया गया कि छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, डेयरी उद्योग से उत्पन्न अपशिष्ट, फल एवं सब्जी मंडियों का जैविक कचरा तथा गोबर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। उपयुक्त तकनीक के माध्यम से इनके प्रसंस्करण द्वारा बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं।

    राज्य में स्टील एवं स्पंज आयरन उद्योग का मजबूत आधार रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्र जैसे उरला, सिलतरा, भिलाई तथा रायगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त जगदलपुर एवं बस्तर में भी औद्योगिक इकाइयाँ स्थापित हैं। इन क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग से औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा तथा राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता मिलेगी।

    ग्रीन हाइड्रोजन को औद्योगिक ईंधन के रूप में अपनाने से दोहरे लाभ होंगे—एक ओर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, वहीं बायोमास के मूल्य संवर्धन से किसानों की आय में वृद्धि होगी। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, अपशिष्ट से आय सृजन तथा नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होगी।

    ऊर्जा विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक इकोसिस्टम में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देना, भविष्य के अनुसंधान की दिशा तय करना, संभावित बाधाओं की पहचान करना तथा इसके व्यापक क्रियान्वयन के लिए मार्ग प्रशस्त करना है।

    सेमिनार में उपस्थित विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए। “Hydrogen Economy: Innovation-Led Growth in Industrial Clusters in Chhattisgarh” विषय पर भाभा परमाणु अनुसंधान रिसर्च संस्थान (बार्क) के वरिष्ठ वैज्ञानिक श्री सयाजी मैहत्रे ने बायोमास आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन पर प्रस्तुतीकरण दिया।

    “Accelerating Green Hydrogen Adoption in Chhattisgarh” विषय पर Ministry of New and Renewable Energy, भारत सरकार के विषय विशेषज्ञ श्री धर्मेन्द्र कुमार पंचार्या, भिलाई स्टील प्लांट के प्रतिनिधियों एवं अन्य उद्यमियों ने पैनल चर्चा में भाग लिया। सेमिनार में वित्तीय संस्थानों जैसे एसबीआई एवं नाबार्ड के प्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही।

    इसके अतिरिक्त नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन से डॉ. धर्मेन्द्र कुमार, शक्ति सस्टेनेबल एनर्जी फाउंडेशन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. सचिन कुमार, बार्क, सीएसएमसीआरआई भावनगर, आईआईटी भिलाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक, विभिन्न निजी औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि तथा सीबीडीए के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • रायपुर में विष्णुदेव साय से मिला कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल, बजट में कैशलैस चिकित्सा सुविधा की घोषणा पर जताया आभार

    रायपुर में विष्णुदेव साय से मिला कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल, बजट में कैशलैस चिकित्सा सुविधा की घोषणा पर जताया आभार

    मुख्यमंत्री से छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात

    बजट में अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए कैशलैस चिकित्सा सुविधा की घोषणा पर जताया मुख्यमंत्री का आभार

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य बजट में कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए कैशलैस चिकित्सा सुविधा शामिल किए जाने पर अभिनंदन करते हुए आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय से छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक श्री कमल वर्मा ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारी वर्ग एवं उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक चिंता से मुक्ति मिलना एक ऐतिहासिक एवं कर्मचारी हितैषी कदम है। उन्होंने कहा कि फेडरेशन सरकार के इस संवेदनशील निर्णय का स्वागत करता है तथा आशा करता है कि भविष्य में भी कर्मचारी हितों को इसी प्रकार प्राथमिकता दी जाती रहेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार अधिकारियों-कर्मचारियों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। कैशलैस चिकित्सा सुविधा का लाभ शासकीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा। मेडिकल लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के सरलीकरण से कर्मचारीगण अपने और अपने परिवार की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर निश्चिंत रहेंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी कार्य गुणवत्ता पर भी पड़ेगा।

    प्रतिनिधिमंडल में श्री कमल वर्मा (प्रांतीय संयोजक), श्री सुनील उपाध्याय, श्री जय कुमार साहू, श्री राजेश सिंघी, श्री संतोष कुमार वर्मा, श्री संजीत शर्मा, श्री देवाशीष दास, श्री लोकेश वर्मा, श्री अमित शर्मा, श्रीमती सोनाली तिडके, श्री आकाश त्रिपाठी, श्री जगेश्वर भट्ट, श्री दीपक सोनकर, श्री प्रवीण सिंह एवं श्रीमती निशा यादव उपस्थित रहे।

  • राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मिली नई मुस्कान: बस्तर की रंजना का सफल उपचार, चिरायु दल की पहल से परिवार को राहत और बेटी को मिला सामान्य जीवन का भरोसा

    राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मिली नई मुस्कान: बस्तर की रंजना का सफल उपचार, चिरायु दल की पहल से परिवार को राहत और बेटी को मिला सामान्य जीवन का भरोसा

    चिरायु दल ने लौटाई मासूम रंजना की मुस्कान : शासन की योजना से दूर हुई आर्थिक तंगी और बेटी के भविष्य की चिंता

    रायपुर : राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम व चिरायु योजना में शून्य से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों में जन्मजात हृदय रोग, मोतियाबिंद, कटेफटे होट, टेढेमेढे हाथ-पैर समेत 44 की गंभीर बीमारियों के इलाज का पूरा खर्च शासन द्वारा उठाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग का चिरायु दल बच्चों की स्क्रीनिंग कर शासन को रिपोर्ट भेजता हैं, जिसके आधार पर बच्चों के इलाज के लिए फंड जारी होता है। ऐसे पात्र बच्चे जिनका इलाज निःशुल्क किया जाना है l

     बस्तर जिले के बकावण्ड ब्लॉक के ग्राम जामगुड़ा (धनपुर) में रहने वाले महेश भारती के घर जब बेटी रंजना का जन्म हुआ, तो खुशियों के साथ-साथ एक गहरी चिंता ने भी दस्तक दी। मासूम रंजना जन्मजात कलेफ्ट लिप (कटे होंठ) की समस्या से ग्रसित थी। जैसे-जैसे रंजना बड़ी हो रही थी, माता-पिता के मन में अपनी बेटी के भविष्य, उसकी पढ़ाई और समाज में उसे मिलने वाली स्वीकार्यता को लेकर डर गहराता जा रहा था। सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक तंगी थी। एक साधारण परिवार के लिए निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का भारी-भरकम खर्च उठा पाना असंभव सा था, जिससे माता-पिता स्वयं को असहाय महसूस कर रहे थे।

     महेश भारती की इस मायूसी के बीच उम्मीद की पहली किरण 19 जून 2025 को तब जगी, जब चिरायु दल बकावण्ड की टीम आँगनबाड़ी केंद्र पहुँची। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टीम ने रंजना की स्थिति को पहचाना और माता-पिता को ढांढस बंधाते हुए उसे जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र रेफर किया। इसके बाद की राह जिला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से आसान होती गई। 06 नवंबर 2025 को बच्ची को रायपुर के मेडिसाईन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ विशेषज्ञों ने रंजना का सफल ऑपरेशन किया।

     सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जाँच, ऑपरेशन और अस्पताल में रहने का समस्त खर्च शासन द्वारा वहन किया गया, जिससे महेश भारती का परिवार आर्थिक बोझ से मुक्त रहा। 13 फरवरी को जब स्वास्थ्य विभाग की टीम फॉलो-अप के लिए पहुँची, तो रंजना को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। बेटी के चेहरे की बनावट में आए इस सुखद बदलाव और उसकी खिलखिलाती मुस्कान ने माता-पिता के सालों पुराने डर को खत्म कर दिया है।

     शासन की इस कल्याणकारी योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए परिजनों ने बताया कि अब वे अपनी बेटी के सुनहरे और सामान्य भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।

  • रायपुर में नेशनल ट्रेड एक्सपो 2026 के समापन पर विष्णुदेव साय का बड़ा बयान—“विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की ओर तेज़ी से बढ़ रहा प्रदेश”, व्यापार-उद्योग के लिए अनुकूल माहौल, 8 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव

    रायपुर में नेशनल ट्रेड एक्सपो 2026 के समापन पर विष्णुदेव साय का बड़ा बयान—“विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की ओर तेज़ी से बढ़ रहा प्रदेश”, व्यापार-उद्योग के लिए अनुकूल माहौल, 8 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आयोजित नेशनल ट्रेड एक्सपो 2026 के समापन समारोह में हुए शामिल

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित बीटीआई मैदान में कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आयोजित नेशनल ट्रेड एक्सपो 2026 के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में कृषि के साथ-साथ व्यापार एवं उद्योग के लिए भी अनुकूल वातावरण बना है, जिसका परिणाम है कि व्यापारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि राज्य में निवेश के लिए आगे आ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का यह तीसरा वर्ष चल रहा है और दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। पहले वर्ष प्रस्तुत बजट का थीम “ज्ञान” था, जिसमें जी का अर्थ गरीब, वाय का अर्थ युवा, ए का अर्थ अन्नदाता किसान और एन का अर्थ नारी था तथा इन सभी वर्गों के विकास पर विशेष फोकस किया गया था। दूसरे वर्ष उसी विकास को गति देने के उद्देश्य से बजट का थीम “गति” रखा गया, जबकि इस वर्ष का बजट थीम “संकल्प” है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को आत्मसात करते हुए तैयार किया गया है और पूरे प्रदेश के हित में है। उन्होंने बताया कि इस बजट में विशेष फोकस बस्तर और सरगुजा क्षेत्र पर किया गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र केरल राज्य से भी बड़ा क्षेत्र है और प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुंदर है, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जा सकता है, लेकिन चार दशक से अधिक समय तक नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र विकास से अछूता रहा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व तथा हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस के कारण नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में नक्सली सक्रिय थे, लेकिन विगत दो वर्षों में हमारे जवानों ने जिस तरह से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी है, उसमें कई बड़े माओवादी मारे गए हैं तथा बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इससे राज्य अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि माओवाद के कारण इन क्षेत्रों में समुचित विकास नहीं हो पाया था, जिसकी भरपाई के लिए अब सरकार इन क्षेत्रों के विकास पर विशेष फोकस कर रही है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि सरकार ने अबूझमाड़ और जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी के लिए बजट में प्रावधान किया है। साथ ही क्षेत्र में कृषि को बढ़ावा देने और फॉरेस्ट प्रोड्यूस के वैल्यू एडिशन पर भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा दोनों संभागों में सैकड़ों प्रकार के वन उत्पाद उपलब्ध हैं, जिनका मूल्य संवर्धन कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बजट पूरे छत्तीसगढ़ के विकास के लिए है और प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है।

    उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत 7 करोड़ पेड़ लगाए गए हैं तथा उद्योग नीति के तहत काटे जाने वाले पेड़ों की भरपाई भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण से की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है और उसी के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण भी आवश्यक है। इसके लिए राज्य सरकार ने विस्तृत विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीएसडीपी दर को आने वाले पांच वर्षों में दोगुना करने तथा वर्ष 2047 तक राज्य का जीएसडीपी 75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। नई उद्योग नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और विभिन्न बड़े शहरों में आयोजित इन्वेस्ट मीट के माध्यम से अब तक प्रदेश को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से कई परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। इनमें सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश भी शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में व्यापारी बंधुओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने नेशनल ट्रेड एक्सपो के सफल आयोजन के लिए कैट की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ट्रेड एक्सपो में विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया तथा कैट द्वारा प्रकाशित स्वदेशी पोस्टर का विमोचन भी किया।

    इस अवसर पर राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के चेयरमैन श्री सुनील सिंघी, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अमर परवानी सहित कैट छत्तीसगढ़ के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • जशपुर के सतपुरिया वनक्षेत्र में 73 हाथियों का बड़ा दल सक्रिय, वन विभाग की कड़ी निगरानी से स्थिति नियंत्रण में; ग्रामीणों को सतर्क रहने और अफवाहों से दूर रहने की अपील

    जशपुर के सतपुरिया वनक्षेत्र में 73 हाथियों का बड़ा दल सक्रिय, वन विभाग की कड़ी निगरानी से स्थिति नियंत्रण में; ग्रामीणों को सतर्क रहने और अफवाहों से दूर रहने की अपील

    सतपुरिया वनक्षेत्र में 73 हाथियों का दल सुरक्षित रूप से कर रही विचरणरत,

    वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निरंतर बरती जा रही सतर्कता, स्थिति नियंत्रण में

    जशपुर : वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार तपकरा परिक्षेत्र अंतर्गत सतपुरिया जंगल में 14 दिसम्बर 2025 से 37 हाथियों का एक दल तथा 25 फरवरी 2026 से 36 हाथियों का अन्य दल कुल 73 हाथियों का समूह विचरणरत है। वर्तमान में उक्त सभी हाथी सतपुरिया वनक्षेत्र के भीतर ही सुरक्षित रूप से विचरण कर रहे हैं। अब तक हाथियों का दल वन क्षेत्र से बाहर नहीं आया है तथा किसी प्रकार की जनहानि, जनघायल अथवा मकान क्षति की कोई घटना प्रकाश में नहीं आई है। वन क्षेत्र से बहार निकलकर फसल क्षति की घटना की जाती है। परन्तु स्थिति पूर्णतः नियंत्रण में एवं सामान्य है।

    वन विभाग द्वारा क्षेत्र में निरंतर सतर्कता बरती जा रही है। आर.आर.टी. के साथ नियमित गश्ती की जा रही है तथा हाथियों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जा रही है। इसके अतिरिक्त सतपुरिया जंगल से लगे आस-पास के ग्रामों में मुनादी, सूचना प्रसारण एवं व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से ग्रामीणों को निरंतर सतर्क किया जा रहा है। आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन क्षेत्र की ओर अनावश्यक आवागमन को प्रतिबंधित करने हेतु संवेदनशील स्थलों पर अस्थायी बेरियर लगाए गए हैं। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे विशेष रूप से रात्रि के समय अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाएँ, समूह में रहें तथा किसी भी प्रकार की हाथियों की गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।

    वन विभाग द्वारा हाथी-मानव द्वंद की संभावनाओं को न्यूनतम करने हेतु सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। आमजन से भी किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए अनुरोध किया जा रहा है।

  • जशपुर में मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग व UNICEF की संयुक्त कार्यशाला: टाइप-1 डायबिटीज की समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन पर न्यूयॉर्क से आए विशेषज्ञों ने दी अहम जानकारी

    जशपुर में मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग व UNICEF की संयुक्त कार्यशाला: टाइप-1 डायबिटीज की समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन पर न्यूयॉर्क से आए विशेषज्ञों ने दी अहम जानकारी

    मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में टाइप-1 डायबिटीज पर कार्यशाला आयोजित

    बच्चों में होने वाली टाइप-1 मधुमेह की समय पर पहचान व प्रभावी प्रबंधन पर यूनिसेफ विशेषज्ञों ने दी जानकारी

    जशपुर : मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना के अंतर्गत टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित बच्चों एवं उनके परिजनों के लिए जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में जिला चिकित्सालय में आज एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य किशोरावस्था से पूर्व बच्चों में बढ़ रहे टाइप-1 मधुमेह के मामलों, समय पर पहचान के अभाव तथा पालकों में जागरूकता की कमी के कारण होने वाली असामयिक मृत्यु को रोकना था। इस अवसर पर यूनिसेफ मुख्यालय न्यूयॉर्क से आए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के दल मिस्टर राउल बरमेजो, मिस डेवॉन कुएने तथा मिस मारियाना बेनाविड्स एली लिली एवं कंपनी यू.एस.ए. के द्वारा टाइप-1 डायबिटीज के प्रभावी प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।

     विशेषज्ञों ने बताया कि यद्यपि टाइप-1 मधुमेह की उचित प्रबंधन के माध्यम से रोगी सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी सकता है। उन्होंने इंसुलिन थेरेपी, नियमित एवं दैनिक ब्लड ग्लूकोज मॉनिटरिंग, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, योग एवं व्यायाम, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा समय-समय पर चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में रक्त शर्करा का स्तर अत्यधिक कम हो जाने पर ग्लूकोज टैबलेट अथवा टॉफी के माध्यम से तत्काल रक्त शर्करा को सामान्य स्तर तक लाने की जानकारी भी दी गई।

     मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल मधुमेह योजना का प्रमुख उद्देश्य टाइप-1 मधुमेह से ग्रसित बच्चों की शीघ्र जांच एवं पहचान सुनिश्चित करना, उन्हें निःशुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराना, आरोग्य दर में सुधार लाना तथा स्वस्थ जीवनशैली केंद्रों के माध्यम से परामर्श एवं सहयोग प्रदान करना है। इसके अतिरिक्त मधुमेह संबंधी जटिलताओं की रोकथाम, चिकित्सकों द्वारा नियमित फॉलोअप, तथा परिवार के सदस्यों को इंसुलिन देने का प्रशिक्षण प्रदान करना भी योजना के प्रमुख घटक हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से जिले एवं प्रदेश में बाल मधुमेह से होने वाली मृत्यु दर में कमी आएगी तथा आमजन में टाइप-1 मधुमेह के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। कार्यशाला के आयोजन में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ डॉ. गजेंद्र सिंह, डॉ. विवेक विरेंद्र सिंह, सुश्री अन्नपूर्णा कौल एवं सुश्री राधिका श्रीवास्तव ने न्यूयॉर्क से आए विशेषज्ञों और उपस्थित अभिभावकों के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

     स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. उदय प्रकाश भगत, डॉ. अभिषेक निकुंज, डॉ. जानकी भगत शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ. अरविंद रात्रे सहायक नोडल अधिकारी, श्री देवेंद्र राठौर, जिला सलाहकार डॉ. रूपा प्रधान, श्री जगत चक्रेश सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया। कार्यशाला के अंत में उपस्थित सभी बाल मधुमेह रोगियों के अभिभावकों को ग्लूकोमीटर एवं ग्लूकोस्ट्रिप का वितरण किया गया, ताकि वे घर पर ही नियमित रूप से बच्चों की रक्त शर्करा की जांच कर सकें और समय पर आवश्यक कदम उठा सकें।

  • ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान को तेज़ करने पर जोर: जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने 1098 हेल्पलाइन, रेस्क्यू अभियान और बाल देखरेख संस्थाओं की गतिविधियों की समीक्षा कर व्यापक जनजागरूकता के निर्देश दिए

    ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़’ अभियान को तेज़ करने पर जोर: जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने 1098 हेल्पलाइन, रेस्क्यू अभियान और बाल देखरेख संस्थाओं की गतिविधियों की समीक्षा कर व्यापक जनजागरूकता के निर्देश दिए

    मिशन वात्सल्य की समीक्षा: बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ करने कलेक्टर ने दिये निर्देश

    लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण, बाल विवाह मुक्त अभियान के व्यापक प्रचार पर जोर

    जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में मिशन वात्सल्य अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाई तथा जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक लेकर बाल संरक्षण से संबंधित व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। कलेक्टर ने बैठक में बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड हेल्पलाइन तथा बाल संप्रेषण गृह में कार्यरत परामर्शदाता, सुपरवाइजर, केस वर्कर, समन्वयक, अधीक्षक, संरक्षण अधिकारी एवं ऑपरेटरों के रिक्त एवं भरे पदों की जानकारी ली। उन्होंने रिक्त पदों की पूर्ति की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल कल्याण समिति में प्राप्त, निराकृत एवं लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने लंबित मामलों का समयबद्ध एवं संवेदनशील निराकरण करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों के हित प्रभावित न हों। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अजय शर्मा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री चंद्रशेखर यादव सहित समिति के सदस्यगण उपस्थित रहे।

    बाल देखरेख संस्थाओं की गतिविधियों की समीक्षा –

    कलेक्टर ने बाल देखरेख संस्थाओं में संरक्षित बच्चों की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली। डीपीओ ने बताया कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार नियमित रूप से खेलकूद, रंगोली, पेंटिंग, क्राफ्ट, लेखन, संगीत, नुक्कड़ नाटक एवं भाषण जैसी रचनात्मक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। साथ ही प्रत्येक माह स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी लगाए जा रहे हैं। कलेक्टर ने बाल श्रमिक, अपशिष्ट संग्राहक एवं भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों के सर्वेक्षण एवं रेस्क्यू हेतु विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। चिन्हांकित बच्चों को मिशन वात्सल्य के तहत विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने की बात कही। उन्होंने बच्चों के आधार कार्ड, बैंक खाते एवं आयुष्मान कार्ड निर्माण की प्रगति की भी जानकारी ली। छत्तीसगढ़ राज्य प्रवर्तकता कार्यक्रम तथा मुख्यमंत्री बाल उदय योजना अंतर्गत लाभान्वित बच्चों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा कर उसके सुचारू संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

    बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान पर जोर –

    बैठक में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। डीपीओ ने बताया कि जिले की 444 ग्राम पंचायतों में से 285 ग्राम पंचायतों से बाल विवाह मुक्त प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। पुलिस सत्यापन के उपरांत संबंधित ग्राम पंचायतों को प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। जिले के सभी परियोजना अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर एवं ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है।

    कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी गांवों में बाल विवाह मुक्त अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि बाल संरक्षण केवल विभागीय दायित्व नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। सभी संबंधित अधिकारी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य कर जिले को सुरक्षित एवं बाल हितैषी बनाने में योगदान दें।

  • मानदेय कटौती, ई-केवाईसी और कुपोषण पर प्रशासन गंभीर: जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने बिना नोटिस कटौती पर सख्ती दिखाई, एनआरसी में भर्ती व सुपोषण आहार वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश

    मानदेय कटौती, ई-केवाईसी और कुपोषण पर प्रशासन गंभीर: जशपुर कलेक्टर रोहित व्यास ने बिना नोटिस कटौती पर सख्ती दिखाई, एनआरसी में भर्ती व सुपोषण आहार वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर संवेदनशील पहल

    कलेक्टर ने संघ के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक

    कुपोषण मुक्त जशपुर के लिए शत प्रतिशत उपस्थिति पर जोर

    जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ के सदस्यों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं, सुझावों एवं मांगों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री अजय शर्मा, सीडीपीओ सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी – कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान संघ के प्रतिनिधियों ने विभिन्न प्रशासनिक एवं कार्य संबंधी समस्याओं को कलेक्टर के समक्ष रखा। कलेक्टर ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि जिन मुद्दों का निराकरण जिला स्तर पर संभव है, उन पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। राज्य स्तर से संबंधित विषयों को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।

    कुपोषण मुक्त जशपुर के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान –

    कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जिले को कुपोषण मुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 3 से 5 वर्ष तक के बच्चों की आंगनबाड़ी केंद्रों में शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक नाश्ता, भोजन, समुचित देखभाल एवं प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। सुपोषण आहार का नियमित वितरण कर कुपोषण की रोकथाम सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने गंभीर कुपोषित बच्चों को आवश्यक उपचार हेतु एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में भर्ती कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस कार्य में प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के विषय में जिला स्वास्थ्य समिति में चर्चा करने की बात भी कही।

    मानदेय कटौती पर स्पष्ट निर्देश –

    संघ के सदस्यों ने बिना पूर्व सूचना मानदेय कटौती की समस्या भी उठाई। इस पर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियमित रूप से केंद्र में उपस्थित रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करें और अवकाश लेने से पूर्व विधिवत सूचना दें। साथ ही उन्होंने सुपरवाइजरों को निर्देशित किया कि बिना नोटिस दिए मानदेय में कटौती न की जाए। अनावश्यक कटौती पाए जाने पर संबंधित सुपरवाइजर के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। संघ द्वारा आधार से जुड़े मोबाइल नंबर की अनुपलब्धता के कारण ई-केवाईसी में आ रही कठिनाइयों की जानकारी भी दी गई। कलेक्टर ने इस समस्या के समाधान हेतु विशेष आधार शिविर आयोजित कर छूटे हुए हितग्राहियों के आधार कार्ड बनवाने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर श्री व्यास ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शासन की योजनाओं की जमीनी क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनकी सक्रियता और समर्पण से ही बच्चों के समुचित पोषण एवं विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

  • जशपुर से प्रगतिशील पशुपालकों का दल प्रशिक्षण हेतु झारखंड रवाना: कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में आधुनिक डेयरी, नस्ल सुधार और पशु प्रबंधन तकनीकों का मिलेगा प्रशिक्षण

    जशपुर से प्रगतिशील पशुपालकों का दल प्रशिक्षण हेतु झारखंड रवाना: कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में आधुनिक डेयरी, नस्ल सुधार और पशु प्रबंधन तकनीकों का मिलेगा प्रशिक्षण

    कृषक भ्रमण सह प्रशिक्षण हेतु पशुपालक दल को हरी झंडी दिखाकर प्रशिक्षण सह अध्ययन भ्रमण के लिए भेजा गया झारखंड

    किसानों में भारी उत्साह-बताया पशुपालन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को सिखने का मिलेगा अवसर

    जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में पशुधन विकास विभाग द्वारा कृषक कौशल विकास योजना अंतर्गत कृषक भ्रमण सह प्रशिक्षण हेतु जशपुर विकासखंड के प्रगतिशील पशुपालकों के दल को छः दिवसीय प्रशिक्षण सह अध्ययन भ्रमण के लिए झारखंड भेजा गया है।

     इस अवसर पर पशुधन विकास विभाग जशपुर के उप संचालक डॉ. श्री महेश सिंह बघेल ने बताया कि इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य जशपुर के पशुपालकों को उन्नत डेयरी प्रबंधन, दुधारू गायों की नस्ल सुधार, पशुओं में सही आहार और बीमारियों से बचाव की आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराना है। इस कार्यक्रम के दौरान किसान मेधा दुग्ध डेयरी सहकारी संघ होटवार अंतर्गत आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट्स, कृषि विज्ञान केंद्र बिशुनपुर, वेटरनरी कॉलेज रांची अंतर्गत बकरी, सुकर, पोल्ट्री एवं डेयरी प्रक्षेत्रों में उन्नत नस्ल सुधार का अध्ययन करेंगे एवं वैज्ञानिकों और विषय विशेषज्ञों द्वारा उन्हें संतुलित पशु आहार प्रबंधन, रोगों से बचाव ,पशुओं में नस्ल सुधार एवं पशु फार्म व आवास के प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी ओर क्षेत्रांतर्गत प्रगतिशील पशुपालकों से भेंट कर उनके अनुभव जानेंगे।

     पशुपालकों का दल मेधा डेयरी सहकारी संघ (होटवार) में आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट्स का अवलोकन करेगा। यहाँ वे सीखेंगे कि कैसे दूध की गुणवत्ता बनाए रखी जाती है और मेधा डेयरी की तरह बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण कैसे किया जाता है। पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस भ्रमण का अंतिम उद्देश्य जशपुर के किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर व्यवसायिक पशुपालन की ओर प्रेरित करना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो और वे आत्मनिर्भर बन सकें। इस प्रशिक्षण से हमारे क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी। नवाचार की ओर बढ़ते कदम जशपुर के प्रगतिशील पशुपालकों के दल को उप संचालक डॉ. महेश सिंह बघेल एवं विभागीय अधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रांची रवाना किए।