Author: Sagar Joshi [SAMDARSHI NEWS]

  • जनता की आवाज अब नहीं होगी अनसुनी: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ, 42 विभागों से जुड़ी व्यवस्था में शिकायतों की होगी 24×7 निगरानी और त्वरित कार्रवाई

    जनता की आवाज अब नहीं होगी अनसुनी: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का शुभारंभ, 42 विभागों से जुड़ी व्यवस्था में शिकायतों की होगी 24×7 निगरानी और त्वरित कार्रवाई

    यदि किसी समस्या का नहीं हो रहा समाधान, डायल करे 1076

    एक कॉल में दर्ज होगी शिकायत, मिलेगा समयबद्ध समाधान

    मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 शुरू

    फोन करके अपनी समस्याओं को सीधे पहुंचाए सरकार तक

    कलेक्टर रोहित व्यास ने अधिकारियों को दिए समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण के निर्देश

    जशपुर : प्रदेशवासियों को उनकी समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विगत दिवस मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली 1076 का शुभारंभ किया। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा, सुझाव दे सकेगा तथा शासन की योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में अपना फीडबैक भी साझा कर सकेगा। शासन की मंशा है कि प्रत्येक नागरिक की आवाज सुनी जाए और उसकी समस्या का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक अपने मोबाइल के माध्यम से आसानी से शासन तक अपनी बात पहुंचा सकेंगे। हेल्पलाइन से राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं और 1195 से अधिक श्रेणियों में शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है।

     इस प्रणाली की विशेषता यह है कि प्रत्येक शिकायत को एक यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी, जिसके माध्यम से शिकायतकर्ता अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकेगा। यदि किसी आवेदक को प्राप्त समाधान से संतोष नहीं होगा तो शिकायत स्वतः उच्च अधिकारियों के पास पुनः परीक्षण और जांच के लिए भेज दी जाएगी। इससे शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह निराकरण को सुनिश्चित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 चौबीसों घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित रहेगी। इसके संचालन के लिए तीन पालियों में कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सचिव स्तर के अधिकारी डैशबोर्ड के माध्यम से इसकी नियमित निगरानी करेंगे तथा मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा भी इसकी सतत मॉनिटरिंग की जाएगी।

     मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के शुभारंभ के बाद कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिले के सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का गंभीरता, संवेदनशीलता और प्राथमिकता के साथ निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और संतोषजनक समाधान है। किसी भी शिकायत को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर उसका प्रभावी निराकरण किया जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली राज्य के सभी विभागों को एकीकृत रूप से जोड़ने वाली आधुनिक व्यवस्था है। ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बहु-स्तरीय निगरानी और एस्केलेशन प्रणाली के माध्यम से शिकायतों के निराकरण की सतत समीक्षा की जाएगी। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान मिलेगा।

  • महिला उत्पीड़न के मामलों पर जशपुर में बड़ी सुनवाई: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की मौजूदगी में 22 जून को 11 प्रकरणों पर होगी अहम सुनवाई, पक्षकारों को किया गया तलब

    महिला उत्पीड़न के मामलों पर जशपुर में बड़ी सुनवाई: राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की मौजूदगी में 22 जून को 11 प्रकरणों पर होगी अहम सुनवाई, पक्षकारों को किया गया तलब

    जशपुर में 22 जून को लगेगी राज्य महिला आयोग की न्यायपीठ, महिला उत्पीड़न से संबंधित 11 प्रकरणों की होगी सुनवाई

    जशपुर : छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा महिलाओं के उत्पीड़न से संबंधित जशपुर जिले के प्रकरणों की सुनवाई के लिए 22 जून 2026 को न्यायपीठ का आयोजन किया जाएगा। आयोग की गठित न्यायपीठ द्वारा प्राप्त प्रकरणों की सुनवाई कर संबंधित पक्षों को न्याय दिलाने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनवाई 22 जून 2026 को प्रातः 11 बजे से कलेक्टर सभाकक्ष, जशपुर में आयोजित की जाएगी। इस दौरान महिला उत्पीड़न से संबंधित कुल 11 प्रकरणों की सुनवाई निर्धारित की गई है।

     सुनवाई आयोग की अध्यक्ष डॉ. श्रीमती किरणमयी नायक एवं सदस्य श्रीमती प्रियम्वदा सिंह जूदेव की उपस्थिति में की जाएगी। आयोग द्वारा प्रकरणों के दोनों पक्षों को सुनकर आवश्यक दिशा-निर्देश एवं कार्यवाही की जाएगी। राज्य महिला आयोग ने संबंधित पक्षकारों से निर्धारित तिथि एवं समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर अपने पक्ष प्रस्तुत करने की अपील की है, ताकि प्रकरणों का समयबद्ध एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

  • बिजली संकट की अफवाहों पर विभाग का बड़ा खुलासा: पत्थलगांव का ट्रांसफार्मर पूरी तरह सुरक्षित, करोड़ों की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन वर्षों में लगाए गए 40 से अधिक नए ट्रांसफार्मर

    बिजली संकट की अफवाहों पर विभाग का बड़ा खुलासा: पत्थलगांव का ट्रांसफार्मर पूरी तरह सुरक्षित, करोड़ों की विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन वर्षों में लगाए गए 40 से अधिक नए ट्रांसफार्मर

    पत्थलगांव की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह सुचारू, ट्रांसफार्मर में आग लगने की शिकायत पर हुई जांच

    फ्यूज से निकली चिंगारी के कारण कचरे में लगी थी आग, ट्रांसफार्मर को नहीं पहुंची कोई क्षति

    जशपुर : पत्थलगांव में ट्रांसफार्मर में आग लगने और मेंटेनेंस संबंधी प्राप्त शिकायत पर विद्युत विभाग द्वारा जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की गई है। विभागीय जांच में पाया गया कि ट्रांसफार्मर में आग लगने संबंधी जानकारी सही नहीं है। कार्यपालन यंत्री, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, पत्थलगांव द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कनिष्ठ यंत्री श्री अमृत बेक द्वारा स्थल निरीक्षण एवं जांच की गई। जांच में पाया गया कि अंबिकापुर रोड स्थित 315 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफार्मर में आग नहीं लगी थी। ट्रांसफार्मर का फ्यूज उड़ने के कारण निकली चिंगारी ट्रांसफार्मर डीपी के नीचे पड़े कचरे के ढेर पर गिर गई थी, जिससे वहां आग लग गई और उसके प्रभाव से केबल प्रभावित हुई। ट्रांसफार्मर पूरी तरह सुरक्षित रहा तथा उसे किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची।

    विभाग द्वारा तत्काल सुधार कार्य करते हुए केबल की मरम्मत की गई और उसी समय विद्युत आपूर्ति सामान्य कर दी गई थी। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि संबंधित ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त भार की कोई समस्या नहीं है तथा वर्तमान में उसकी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता भी नहीं है।

     विद्युत विभाग के कार्यपालन यंत्री ने बताया कि पत्थलगांव क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए नियमित रूप से रख-रखाव एवं मेंटेनेंस कार्य किए जाते हैं। इसी क्रम में 21 मार्च 2026 को समाचार पत्रों के माध्यम से पूर्व सूचना जारी कर 22 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक पत्थलगांव उपसंभाग के अंतर्गत 33/11 केवी उपकेंद्रों से निकलने वाले सभी फीडरों का व्यापक रख-रखाव एवं मेंटेनेंस कार्य किया गया था। इसके अतिरिक्त समय-समय पर विद्युत लाइनों एवं उपकरणों का आवश्यक अनुरक्षण भी किया जाता है। विभाग ने जानकारी दी है कि पत्थलगांव क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। प्राकृतिक कारणों जैसे आंधी-तूफान से उत्पन्न अस्थायी व्यवधानों को छोड़कर क्षेत्र में नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

     पिछले तीन वर्षों में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए क्षेत्र में 25 केवीए क्षमता के 9 नग, 63 केवीए क्षमता के 4 नग, 100 केवीए क्षमता के 7 नग तथा 200 केवीए क्षमता के 20 नए ट्रांसफार्मरों की स्थापना विभिन्न वार्डों, बस्तियों एवं कॉलोनियों में की गई है। इसके साथ ही 33/11 केवी उपकेंद्र पत्थलगांव में स्थापित 3.15 एमवीए क्षमता के पुराने पावर ट्रांसफार्मर के स्थान पर 5.00 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर विद्युत आपूर्ति प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया गया है। विद्युत विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में किसी प्रकार की बिजली कटौती संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है और न ही क्षेत्र में किसी प्रकार की नियोजित बिजली कटौती की जा रही है। विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत सेवा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

  • माँ के सम्मान में रोपा लक्ष्मीतरु का पौधा, जशपुर के मातृत्व वन में दिखी अनूठी पहल: प्रभारी सचिव अंकित आनंद ने कहा— हर पौधा बनेगा मातृत्व, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत प्रतीक

    माँ के सम्मान में रोपा लक्ष्मीतरु का पौधा, जशपुर के मातृत्व वन में दिखी अनूठी पहल: प्रभारी सचिव अंकित आनंद ने कहा— हर पौधा बनेगा मातृत्व, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत प्रतीक

    प्रभारी सचिव अंकित आनंद ने मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत किया पौधरोपण, माता के सम्मान के साथ पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

    जशपुर : जिले के प्रभारी सचिव अंकित आनंद ने अपने जशपुर प्रवास के दौरान 8 जून को जशपुर मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस परिसर में विकसित मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत अपनी माता के सम्मान में लक्ष्मीतरु का पौधा रोपित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रयास नहीं है, बल्कि यह माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक भावनात्मक माध्यम भी है। यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वनमण्डलाधिकारी श्री शशि कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार, एसडीओ वन विभाग श्री करण सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि सर्किट हाउस परिसर में लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है। यह वन पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है।

  • बारिश से तरबतर हुआ जशपुर जिला: सामान्य वर्षा के आंकड़े की ओर बढ़ा मौसम का रुख, कांसाबेल में सबसे अधिक 36.2 मिमी और 10 जून को बगीचा में सबसे ज्यादा 9.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड

    बारिश से तरबतर हुआ जशपुर जिला: सामान्य वर्षा के आंकड़े की ओर बढ़ा मौसम का रुख, कांसाबेल में सबसे अधिक 36.2 मिमी और 10 जून को बगीचा में सबसे ज्यादा 9.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड

    जशपुर : जशपुर जिले में 01 जून से अब तक 144.6 मिमी औसत वर्षा हो चुकी है। जिले में बीते 10 वर्षों की तुलना में 10 जून तक सामान्य औसत वर्षा 172.9 मिमी हुई है। बीते दिवस जिले में 33.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई है।

    भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 01 जून से अब तक तहसील जशपुर में 7.4 मिमी, मनोरा में 22.2 मिमी, कुनकुरी में 18.2 मिमी, दुलदुला में 1.5 मिमी, फरसाबहार में 18.4 मिमी, बगीचा में 14.7 मिमी, कांसाबेल में 36.2 मिमी, पत्थलगांव में 14.9 मिमी, सन्ना में 11.1 मिमी एवं बागबहार में 0.0 मिमी वर्षा हो चुकी है। सर्वाधिक वर्षा कांसाबेल तहसील में 36.2 मिमी दर्ज की गई है। 10 जून को सर्वाधिक बगीचा तहसील में 9.1 मिमी वर्षा हुई।

  • जशपुर में निर्माण कार्य नहीं होंगे प्रभावित! दो रेत खदानें चालू, भण्डारण की भी व्यवस्था

    जशपुर में निर्माण कार्य नहीं होंगे प्रभावित! दो रेत खदानें चालू, भण्डारण की भी व्यवस्था

    जशपुर : समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर “रेत नहीं मिलने से निर्माण पर लगा ब्रेक” के संबंध में खनिज शाखा ने जानकारी दी है।

    खनिज शाखा जशपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में ग्राम साईटांगरटोली रकबा 3.000 हेक्टेयर एवं ग्राम बलुवाबहार रकबा 2.000 हेक्टेयर रेत खदान स्वीकृत होकर संचालित है। इसके अतिरिक्त ग्राम साईटांगरटोली में श्री आजम हुसैन तथा ग्राम बलुवाबहार में श्री एलबेस्तर को रेत भण्डारण स्वीकृत है। रेत खदानों तथा रेत भण्डारण क्षेत्र से जिले में रेत की आपूर्ति की जाती है।

  • 60 KM दूर वनांचल में विकास की नई धारा: पुटुकेला के हर घर तक पहुंचा शुद्ध पानीजल जीवन मिशन से बदली गांव की तस्वीर, 134 परिवारों को मिला नल से नियमित पेयजल

    60 KM दूर वनांचल में विकास की नई धारा: पुटुकेला के हर घर तक पहुंचा शुद्ध पानीजल जीवन मिशन से बदली गांव की तस्वीर, 134 परिवारों को मिला नल से नियमित पेयजल

    जशपुर : जशपुर जिला मुख्यालय से लगभग 60-70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुनकुरी विकासखण्ड के ग्राम पुटुकेला एक वनांचल क्षेत्र है, जो चारों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ है। भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्राम में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ एवं विकसित किया गया है। ग्राम में स्थापित 4 उच्च स्तरीय जलागारों के माध्यम से 134 फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन द्वारा सभी परिवारों को नियमित रूप से शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।

    पाइप लाइन नेटवर्क के जरिए घर-घर नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे ग्रामीणों को अब पानी के लिए दूरस्थ स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से पूर्व ग्रामवासी पेयजल के लिए मुख्यतः कुओं तथा अन्य पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर थे। महिलाओं और बच्चों को प्रतिदिन पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे समय और श्रम दोनों की अधिक खपत होती थी। गर्मी के मौसम में जल स्रोतों में पानी की कमी हो जाती थी, जबकि वर्षा ऋतु में जल की गुणवत्ता प्रभावित होने से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन जाता था। इसके कारण जलजनित बीमारियों की आशंका भी बनी रहती थी।

    जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित जल प्रदाय व्यवस्था से ग्राम पुटुकेला में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। अब सभी परिवारों को घर पर ही नल के माध्यम से नियमित रूप से शुद्ध पेयजल प्राप्त हो रहा है। इससे महिलाओं और बच्चों के समय एवं श्रम की बचत हुई है। बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जा पा रहे हैं तथा महिलाएं घरेलू कार्यों के साथ-साथ आजीविका संबंधी गतिविधियों में भी अधिक समय दे पा रही हैं।

    शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता से ग्रामीणों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार आया है तथा जलजनित बीमारियों में कमी आई है।

    ग्रामवासियों का जीवन अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और खुशहाल हुआ है। जल जीवन मिशन के निर्धारित मानकों के अनुरूप ग्राम के सभी परिवारों को नल के माध्यम से नियमित पेयजल उपलब्ध कराए जाने के फलस्वरूप लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्राम पुटुकेला का घर जल प्रमाणीकरण भी पूर्ण किया जा चुका है। ग्राम पुटुकेला के निवासी जल जीवन मिशन से अत्यंत संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि इस योजना ने उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण सकारात्मक परिवर्तन लाया है। इससे ग्रामीणों को नियमित रूप से शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनके जीवन स्तर, स्वास्थ्य तथा दैनिक गतिविधियों में उल्लेखनीय सुधार आया है।

  • CG BREAKING : IAS रमेश कुमार शर्मा को सौंपी गई सहकारिता विभाग की कमान, बनाए गए नए आयुक्त और रजिस्ट्रार

    CG BREAKING : IAS रमेश कुमार शर्मा को सौंपी गई सहकारिता विभाग की कमान, बनाए गए नए आयुक्त और रजिस्ट्रार

    रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी श्री रमेश कुमार शर्मा को नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है. राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, अब वे सहकारिता विभाग के नए मुखिया के रूप में बागडोर संभालेंगे.

    गृह सचिव के साथ संभालेंगे नई जिम्मेदारी

    साल 2010 बैच के काबिल और अनुभवी IAS अधिकारी श्री रमेश कुमार शर्मा वर्तमान में गृह विभाग के सचिव पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. राज्य शासन ने उनके प्रशासनिक अनुभवों और कार्यकुशलता पर भरोसा जताते हुए उन्हें अस्थाई रूप से आगामी आदेश तक आयुक्त, सहकारिता एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के पद पर पदस्थ किया है.

    यह नियुक्ति राज्य में सहकारिता आंदोलन और इससे जुड़ी समितियों के कामकाज को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बेहद अहम मानी जा रही है.

  • कलयुगी बहू का खूनी खेल! घर में अकेली मिली सास को बसुला से उतारा मौत के घाट, पोते ने खोला हत्या का राज; कुनकुरी कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

    कलयुगी बहू का खूनी खेल! घर में अकेली मिली सास को बसुला से उतारा मौत के घाट, पोते ने खोला हत्या का राज; कुनकुरी कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

    कुनकुरी : रिश्तों के कत्ल और पारिवारिक मूल्यों के पतन की एक बेहद दर्दनाक और रूह कँपा देने वाली घटना में जशपुर जिले के कुनकुरी न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है । माननीय न्यायालय ने अपनी ही सास की बेरहमी से हत्या करने वाली कलयुगी बहू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा से दंडित किया है । यह फैसला समाज में पारिवारिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने और अपराध के प्रति कड़ा संदेश देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।

    न्यायालय, न्यायधीश और अभियोजन पक्ष की सशक्त भूमिका

    इस संवेदनशील और जघन्य हत्याकांड का संपूर्ण विचारण द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश (कुनकुरी, जिला जशपुर) श्री बलराम कुमार देवांगन के न्यायालय द्वारा किया गया । मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने अदालत में पुरजोर पैरवी की और समाज पर इस वीभत्स अपराध के पड़ने वाले विपरीत असर को रेखांकित करते हुए अभियुक्त को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की । वहीं, अभियुक्त मुन्नी बाई की ओर से अधिवक्ता ने यह दलील पेश की थी कि यह महिला का पहला अपराध है और उसकी उम्र को देखते हुए उस पर उदारता बरती जानी चाहिए । परंतु, दोनों पक्षों को बेहद बारीकी से सुनने के बाद न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया । माननीय न्यायाधीश ने अपने फैसले में गंभीर टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि यह घटना केवल एक साधारण अपराध नहीं है, बल्कि हमारे समाज में लगातार बढ़ती असंवेदनशीलता और पारिवारिक मूल्यों के पतन का एक जीता-जागता संकेत है, जो सामाजिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है और किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है ।

    क्या था पूरा घटनाक्रम? (खूनी दास्तान)

    इस खौफनाक वारदात की शुरुआत 20 जून 2024 की सुबह करीब 11:00 बजे तुमला थाना क्षेत्र के ग्राम कोनपारा में हुई थी । घटना के दिन मृतिका पुनो बाई का बेटा और आरोपिया का पति सहित कुमार प्रधान सुबह करीब 9:00 बजे अपने गांव के कुछ सहयोगियों—पदमन पटेल, भगीरथी सिदार और मोहर साय के साथ कुम्हारबहार स्थित अपनी पुस्तैनी जमीन का पटवारी से सीमांकन कराने के लिए गया हुआ था । उस वक्त घर पर उसकी वृद्ध मां पुनो बाई, पत्नी मुन्नी बाई और उसके दो छोटे लड़के ही मौजूद थे । दोपहर लगभग 11 से 12 बजे के बीच, जमीन नापी के काम में व्यस्त सहित कुमार के मोबाइल पर उसके छोटे बेटे का फोन आया, जिसने रोते हुए बेहद घबराए स्वर में कहा कि “दादी की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई है, आप जल्दी घर आ जाओ” ।

    बेटे की बात सुनकर चिंतित सहित कुमार दोपहर करीब 1:00 बजे जब वापस अपने घर पहुंचा, तो उसने देखा कि उसके दोनों बच्चे घर में ही सहमे हुए खड़े थे । उसके छोटे लड़के ने रोते हुए एक भयानक सच से पर्दा उठाया और बताया कि मां (मुन्नी बाई) ने दादी पर किसी धारदार हथियार से हमला कर उनकी हत्या कर दी है और वारदात को अंजाम देकर वह मौके से भाग निकली है । यह सुनते ही सहित कुमार के पैरों तले जमीन खिसक गई और वह बदहवास हालत में घर के अंदर भागा । अंदर कमरे का मंजर बेहद खौफनाक था; उसकी मां पुनो बाई पलंग के बगल में जमीन पर पूरी तरह से खून से लथपथ पड़ी हुई थीं । उनके सिर, गाल और गले पर किसी धारदार हथियार से 4-5 बार बेहद गहरे और बेरहमी से वार किए गए थे, जिसके कारण अत्यधिक खून बह जाने से उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो चुकी थी ।

    पुलिसिया जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और त्वरित कार्रवाई

    इस दिल दहला देने वाली घटना के तुरंत बाद, पीड़ित पति सहित कुमार प्रधान ने तुमला थाने जाकर मामले की मौखिक मर्ग सूचना दर्ज कराई । तत्कालीन निरीक्षक कोमल नेताम ने तत्परता दिखाते हुए मर्ग क्रमांक 21/2024 और अपराध क्रमांक 48/2024 के तहत भादसं की धारा 302 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर मामले की कमान अपने हाथों में ली । पुलिस टीम ने तत्काल घटनास्थल का मौका नक्शा तैयार किया, शव का पंचनामा कराया और पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) फरसाबहार भेजा । पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी बहू मुन्नी बाई को गिरफ्तार कर लिया ।

    विवेचना के दौरान पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में जब मुन्नी बाई का मेमोरेण्डम कथन दर्ज किया, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया । उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उसके ही घर से हत्या में प्रयुक्त लकड़ी के बेंट वाला लोहे का बसुला (कुल्हाड़ीनुमा धारदार हथियार) और घटना के समय पहनी हुई खून से सनी नीले रंग की साड़ी बरामद कर जप्त कर ली । इसके अलावा, पुलिस ने घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी और सादी मिट्टी को भी जप्त किया । जप्तशुदा तमाम साक्ष्यों को रासायनिक परीक्षण के लिए पुलिस अधीक्षक जशपुर के माध्यम से FSL अंबिकापुर भेजा गया था, जहां की फॉरेंसिक रिपोर्ट ने आरोपी महिला के कपड़ों और हथियार पर इंसानी खून होने की पुष्टि कर अभियोजन के मामले को वैज्ञानिक रूप से अकाट्य बना दिया । संपूर्ण जांच के बाद पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष चार्जशीट पेश की, जहां से मामला विचारण हेतु सत्र न्यायालय को सुपुर्द किया गया ।

    न्यायालय का अंतिम फैसला और दण्डादेश

    मामले के विचारण के दौरान आरोपी महिला मुन्नी बाई ने खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फंसाए जाने की बात कही थी, लेकिन अदालत के समक्ष पेश किए गए चश्मदीद बच्चों के बयानों, मेमोरेण्डम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के ठोस सबूतों के आगे उसकी एक न चली । द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने अपने विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि यद्यपि आरोपी महिला का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और न ही उससे समाज को कोई सीधा खतरा है, जिसके कारण यह मामला ‘विरलतम से विरल’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में नहीं आता और उसे मृत्युदंड नहीं दिया जा रहा है । परंतु, कानून के मुताबिक धारा 302 के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम सजा आजीवन कारावास ही निर्धारित है और इस घिनौने कृत्य के लिए न्यायालय के पास आरोपी को उम्रकैद से कम सजा देने का कोई कानूनी विकल्प शेष नहीं है ।

    अदालत द्वारा मुन्नी बाई को दी गई मुकम्मल सजा:

    माननीय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन के न्यायालय ने मामले के समस्त तथ्यों, साक्ष्यों और अपराध की गंभीर प्रकृति को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त मुन्नी बाई को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 302 के अंतर्गत अपनी सास की हत्या करने के अपराध में पूर्णतः दोषी ठहराया है । अदालत ने कानून के प्रावधानों के तहत मुन्नी बाई को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की कठोर सजा सुनाई है और साथ ही 1,000 रुपये के नगद अर्थदण्ड से दंडित किया है । इसके अतिरिक्त न्यायालय ने यह भी आदेशित किया है कि यदि दोषी महिला द्वारा अर्थदण्ड की राशि समय पर नहीं पटाई जाती है, तो उसे मुख्य सजा के अतिरिक्त 06 माह का पृथक से सश्रम (कठोर) कारावास भुगतना होगा ।

    न्यायालय ने अपने फैसले में संवेदनशीलता दिखाते हुए यह भी आदेशित किया कि मृतिका के पुत्र (पीड़ित परिवार) को संबल देने के लिए ‘पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना’ के प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिलाया जाए, जिसके लिए निर्णय की प्रति सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है । इस कड़े और ऐतिहासिक फैसले ने समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पारिवारिक रिश्तों को लहूलुहान करने वाले कलयुगी अपराधियों को कानून कभी नहीं बख्शता और न्याय की चौखट पर उन्हें उनके कर्मों की पूरी सजा भुगतनी ही पड़ती है।

  • सांसें थमने से पहले सिम्स के डॉक्टरों ने रचा जीवन बचाने का चमत्कार: कटी श्वासनली, गले के गहरे घाव और गंभीर चोटों के बीच दो घंटे की हाई-रिस्क सर्जरी से 26 वर्षीय युवक को मिला नया जीवन

    सांसें थमने से पहले सिम्स के डॉक्टरों ने रचा जीवन बचाने का चमत्कार: कटी श्वासनली, गले के गहरे घाव और गंभीर चोटों के बीच दो घंटे की हाई-रिस्क सर्जरी से 26 वर्षीय युवक को मिला नया जीवन

    सिम्स में डॉक्टरों ने बचाई युवक की जान : गले की कटी श्वासनली की आपातकालीन सर्जरी कर दिया नया जीवन

    दो घंटे चली जटिल सर्जरी, ईएनटी एवं एनेस्थीसिया विभाग की तत्परता से टला बड़ा खतरा

    रायपुर : छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर के चिकित्सकों ने अपनी विशेषज्ञता, त्वरित निर्णय क्षमता एवं उत्कृष्ट टीमवर्क का परिचय देते हुए एक 26 वर्षीय युवक की जान बचाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। गले में गंभीर एवं जानलेवा चोट के साथ अस्पताल पहुंचे युवक का आपातकालीन ऑपरेशन कर न केवल उसकी सांसों को सुरक्षित किया गया, बल्कि क्षतिग्रस्त श्वासनली की सफल मरम्मत भी की गई। चिकित्सकों की इस उपलब्धि ने एक बार फिर सिम्स की आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की दक्षता को सिद्ध किया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, शादाब खान (26 वर्ष) को गंभीर अवस्था में सिम्स के कैजुअल्टी विभाग में लाया गया। मरीज के गले में गहरा खुला घाव था तथा श्वासनली कट जाने के कारण सांस लेने की प्रक्रिया बाधित हो चुकी थी। घाव से हवा का स्पष्ट आवागमन हो रहा था, जो चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत गंभीर स्थिति थी। चिकित्सा विज्ञान में इस प्रकार की चोट को लैरिंगोट्रेकियल इंजरी (Laryngotracheal Injury) कहा जाता है।

    मरीज के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा था और उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. आरती पाण्डेय, सह प्राध्यापक  विद्याभूषण साहू सहायक प्राध्यापक डॉ. श्वेता मित्तल ने तत्काल स्थिति का आकलन कर मरीज को आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर ले जाने का निर्णय लिया। चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मरीज के श्वास मार्ग को सुरक्षित करना था, क्योंकि थोड़ी सी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती थी।

    ट्रेकियोस्टॉमी कर सुरक्षित किया श्वास मार्ग

    ऑपरेशन थिएटर में पहुंचते ही चिकित्सकों ने आपातकालीन ट्रेकियोस्टॉमी कर मरीज का श्वास मार्ग सुरक्षित किया और ऑक्सीजन संतृप्ति को सामान्य स्तर पर लाया गया। इसके बाद शुरू हुई अत्यंत जटिल एवं चुनौतीपूर्ण सर्जरी, जिसमें श्वासनली की मरम्मत के साथ गर्दन की अन्य क्षतिग्रस्त संरचनाओं को भी पुनर्स्थापित किया गया।

    लगभग दो घंटे तक चली इस सर्जरी में श्वासनली, उसके ऊपर की मांसपेशियों, फैशियल लेयर तथा त्वचा को क्रमशः पांच परतों में जोड़कर मरम्मत की गई। चिकित्सकों की सूक्ष्म तकनीक, अनुभव और धैर्यपूर्ण प्रयासों के परिणामस्वरूप मरीज की गर्दन की गंभीर चोट को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया गया।

    सिर में भी मिली गंभीर चोट, रायपुर किया गया रेफर

    सर्जरी के पश्चात की गई जांचों में मरीज के सिर की हड्डी में कई स्थानों पर फ्रैक्चर तथा सीटी स्कैन में मस्तिष्क के भीतर रक्तस्राव (इंट्राक्रेनियल हेमरेज) के संकेत मिले। सिम्स में न्यूरोसर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीज को प्राथमिक रूप से स्थिर करने के बाद आगे के उपचार हेतु पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, रायपुर रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

    एनेस्थीसिया विभाग की रही अहम भूमिका

    इस जटिल एवं जीवनरक्षक सर्जरी को सफल बनाने में एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. मधुमिता मूर्ति तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत कुमार पैंकरा के नेतृत्व में एनेस्थीसिया टीम ने पूरे ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को नियंत्रित एवं सुरक्षित बनाए रखा। ईएनटी, सर्जरी एवं एनेस्थीसिया विभागों के बेहतर समन्वय ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को सफलता में बदल दिया।

    ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. आरती पाण्डेय ने बताया कि मरीज जब अस्पताल पहुंचा तब उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी।

    सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सफलता पर चिकित्सकों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह मामला सिम्स के चिकित्सकों की दक्षता, समर्पण और त्वरित निर्णय क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गंभीर एवं जटिल परिस्थितियों में समय पर दिया गया उपचार मरीज के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिम्स लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं एवं विशेषज्ञ सेवाओं के माध्यम से प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।