Author: Sagar Joshi [SAMDARSHI NEWS]

  • ‘हर घर जल’ को बचाने का मास्टर प्लान! अरुण साव ने 100 महिला सरपंचों को दिया बड़ा संदेश—जल संरक्षण नहीं किया तो भविष्य में बढ़ेगी पानी की चुनौती

    ‘हर घर जल’ को बचाने का मास्टर प्लान! अरुण साव ने 100 महिला सरपंचों को दिया बड़ा संदेश—जल संरक्षण नहीं किया तो भविष्य में बढ़ेगी पानी की चुनौती

    जलापूर्ति योजनाओं के दीर्घकालीन सुचारू संचालन के लिए जल संचय और जल संरक्षण जरूरी –अरुण साव

    जलापूर्ति योजनाओं के संचालन व रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री

    पीएचई द्वारा यूनिसेफ और एसीई के सहयोग से हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए कार्यशाला का आयोजन

    रायपुर : उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव आज जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों के लिए ग्रामीण पाइपलाइन जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रखरखाव पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में आयोजित कार्यशाला में महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जल आपूर्ति की योजनाओं के लंबे समय तक सुचारू संचालन के लिए बारिश के पानी का संचय और जल संरक्षण आवश्यक है। यह भूजल को रिचार्ज करने के साथ ही दीर्घ काल तक जल स्रोतों में जल की उपलब्धता बनाए रखेगा।

    उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यशाला में सरपंचों से गांवों में हर घर नल से जल पहुंचने के बाद ग्रामीणों, खासकर महिलाओं के जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली। उन्होंने नल जल योजनाओं के संचालन-संधारण के लिए पंचायतों द्वारा की गई व्यवस्था के बारे में पूछा। उन्होंने गांवों में जलस्रोतों, जल की गुणवत्ता के नियमित परीक्षण तथा रखरखाव शुल्क की भी जानकारी ली। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा यूनिसेफ और एसीई (Action for Community Development) संस्था के सहयोग से इस एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इसमें करीब 100 महिला सरपंच शामिल हुईं।

    कार्यशाला में हर घर जल प्रमाणित गांवों में नल जल योजनाओं के संचालन, संधारण और मरम्मत पर व्यापक विचार-विमर्श और बेस्ट प्रेक्टिसेस पर गहन चर्चा की गई। महिला सरपंचों ने इस दौरान जल जीवन मिशन के तहत अपनी-अपनी पंचायतों में जल आपूर्ति की व्यवस्था तथा नल जल योजना के संचालन-संधारण के अनुभव साझा किए। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने महिला सरपंचों को नल जल योजनाओं के सफल, निर्बाध और दीर्घकालीन संचालन के गुर बताए।

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यशाला में कहा कि जल आपूर्ति के लिए उपयोग हो रहे जल स्रोतों की देखभाल और सावधानीपूर्वक उपयोग जरूरी है। इसके टिकाऊपन (Sustainability) पर ही योजना की दीर्घकालीन सफलता निर्भर है। उन्होंने कहा कि नल जल योजनाओं के काम पूर्ण होने तथा पंचायतों को इसके हस्तांतरण के बाद इसका संचालन व संधारण ग्राम पंचायतों को करना है। जल जीवन मिशन हमारे घर और हमारे गांव के लिए योजना है। ग्राम पंचायतों को गांववालों के साथ मिलकर जल आपूर्ति की व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना है। श्री साव ने जल स्तर बनाए रखने तथा भू-जल स्रोतों को रिचार्ज करने स्टॉपडैम बनाने और बारिश के पानी को संग्रहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव के अवरोधों व अतिक्रमणों को हटाकर तालाबों को अच्छे से भरने की व्यवस्था सभी गांवों को करना चाहिए।

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान की निदेशक सुश्री रूबी मुखर्जी और यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ सुश्री श्वेता पटनायक ने भी कार्यशाला को संबोधित किया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता श्री समीर गौड़ भी कार्यशाला में मौजूद थे।

  • “शिक्षा बदल सकती है पूरी जिंदगी!” वित्त मंत्री ओपी चौधरी का बड़ा संदेश, मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, 50 लाख के शिक्षा भवन का भूमिपूजन और नवप्रवेशी बच्चों का भव्य स्वागत

    “शिक्षा बदल सकती है पूरी जिंदगी!” वित्त मंत्री ओपी चौधरी का बड़ा संदेश, मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, 50 लाख के शिक्षा भवन का भूमिपूजन और नवप्रवेशी बच्चों का भव्य स्वागत

    शिक्षा जीवन बदलने की सबसे बड़ी ताकत : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

    जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत

    कक्षा 10वीं एवं 12वीं के 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

    50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन का हुआ भूमिपूजन

    पुसौर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित हुआ जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव

    रायपुर : रायगढ़ जिले के नगर पंचायत पुसौर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गुरुवार को जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव-2026 उत्साह, उल्लास और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने 50 लाख रुपये की लागत से बनने वाले विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन का भूमिपूजन किया। साथ ही नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया तथा उन्हें पाठ्यपुस्तकें, गणवेश और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री वितरित की।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि विद्यालय में पहला कदम किसी भी बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत होता है। शिक्षा केवल व्यक्ति का जीवन ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की दिशा और दशा बदलने की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासित जीवन और सतत मेहनत के बल पर उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन का लक्ष्य अभी से निर्धारित करने और उसी दिशा में समर्पित होकर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह तय होना चाहिए कि जीवन में किस क्षेत्र में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के द्वार खुले हैं और ऐसे अवसरों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुँचाना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय संस्थानों में चयनित होने वाले विद्यार्थियों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

    मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार प्रतिभाशाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को आईएएस सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली भेज रही है, जहाँ उनके अध्ययन और आवास का संपूर्ण व्यय सरकार वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के मार्ग में आर्थिक अभाव कभी बाधा नहीं बन सकता।

    मंत्री श्री चौधरी ने शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए शिक्षकों और विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान जिन शिक्षकों के बच्चे शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, उनका मंच से सम्मान भी किया गया। उन्होंने प्राचार्यों और शिक्षकों का आह्वान किया कि वे ऐसे उत्कृष्ट शासकीय विद्यालय विकसित करें, जहाँ अभिभावक स्वयं अपने बच्चों का प्रवेश दिलाने के लिए उत्सुक हों। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी कड़ी में पुसौर में नर्सिंग कॉलेज और नालंदा परिसर का निर्माण भी किया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी।

    कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य केवल नए विद्यार्थियों का प्रवेश सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि विद्यालय को बच्चों के लिए आनंददायक और प्रेरणादायी बनाना है। उन्होंने अभिभावकों से घर में बच्चों के अध्ययन के लिए एक अलग स्थान निर्धारित करने और प्रतिदिन उनसे विद्यालय में सीखी गई नई बातों पर चर्चा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और आत्मीयता विकसित होगी।

    मेधावी विद्यार्थियों, दिव्यांग छात्रा एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान

    कार्यक्रम में कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। पूर्ण दृष्टिबाधित छात्रा कामिनी यादव को 86 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर विशेष सम्मान प्रदान किया गया। इसके अलावा विद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी सम्मान किया गया।

    इस अवसर पर छात्राओं को साइकिल तथा नवप्रवेशी विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, गणवेश एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम में न्योता भोज का आयोजन भी किया गया। जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों की बड़ी सहभागिता ने शाला प्रवेशोत्सव को एक जनउत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

    कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चौहान, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मानी मोहित सतपथी, जिला पंचायत सदस्य श्री ब्रजेश गुप्ता, श्रीमती भाग्यवती डोलनारायण नायक एवं श्रीमती लक्ष्मी जीवन पटेल, नगर पंचायत पुसौर के उपाध्यक्ष श्री उमेश साव, जनपद पंचायत पुसौर की उपाध्यक्ष श्रीमती खीरमती चौहान, पूर्व विधायक श्री विजय अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी कर्मचारी, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • भारी बारिश पर सरकार एक्शन मोड में! मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पूरे प्रदेश को किया हाई अलर्ट, कलेक्टर-SP को साफ निर्देश—जन सुरक्षा में लापरवाही बिल्कुल नहीं

    भारी बारिश पर सरकार एक्शन मोड में! मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पूरे प्रदेश को किया हाई अलर्ट, कलेक्टर-SP को साफ निर्देश—जन सुरक्षा में लापरवाही बिल्कुल नहीं

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारी वर्षा को देखते हुए सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के दिए निर्देश

    रेड एवं येलो अलर्ट वाले जिलों में विशेष सतर्कता बरतने, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी और समय पर राहत-बचाव सुनिश्चित करने के निर्देश

    जन सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, तैयारियों में किसी प्रकार की लापरवाही न हो : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में लगातार हो रही वर्षा तथा मौसम विभाग द्वारा कई जिलों के लिए जारी रेड एवं येलो अलर्ट को देखते हुए सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उच्च सतर्कता (हाई अलर्ट) पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे संभावित बाढ़ एवं जलभराव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखें तथा संवेदनशील स्थानों की पहचान कर आवश्यक एहतियाती कदम तत्काल उठाएं। जिन क्षेत्रों में आवश्यकता हो, वहां लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि की संभावना न रहे।

    मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में राहत एवं बचाव की समुचित तैयारियां पहले से सुनिश्चित की जाएं। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों, प्राथमिक उपचार, बिजली, स्वच्छता तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध रहे। साथ ही वृद्धजनों, महिलाओं, बच्चों तथा दिव्यांगजनों जैसे संवेदनशील वर्गों की विशेष देखभाल सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), पुलिस, होमगार्ड, नगर सेना, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत वितरण कंपनी तथा अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता बनाए रखें। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधनों, उपकरणों, नावों तथा राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी परिस्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिला एवं राज्य स्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए तथा मौसम की स्थिति, जलाशयों के जलस्तर, नदी-नालों की स्थिति और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की नियमित समीक्षा की जाए। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लेते हुए राहत एवं बचाव कार्य तत्काल प्रारंभ किए जाएं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से भी अपील की है कि वे मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, अनावश्यक रूप से नदी-नालों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन को दें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन की सतर्कता, समयबद्ध कार्रवाई और जनसहयोग से किसी भी संभावित आपदा का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।

  • बस्तर से सरगुजा तक दौड़ेगी विकास की रेल! मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दिल्ली में बड़ी पहल, कई नई रेल परियोजनाओं को जल्द मंजूरी मिलने के संकेत

    बस्तर से सरगुजा तक दौड़ेगी विकास की रेल! मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दिल्ली में बड़ी पहल, कई नई रेल परियोजनाओं को जल्द मंजूरी मिलने के संकेत

    छत्तीसगढ़ में बस्तर से सरगुजा तक रेल संपर्क मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ में प्रमुख रेल परियोजनाओं को गति देने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से की विस्तृत चर्चा

    रेल नेटवर्क का विस्तार छत्तीसगढ़ के संतुलित और समावेशी विकास का मजबूत आधार बनेगा : मुख्यमंत्री श्री साय

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विस्तार, नई रेल परियोजनाओं तथा लंबित रेल लाइनों की प्रगति के संबंध में विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू तथा राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री संतोष पांडे उपस्थित थे।

    बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के औद्योगिक, खनिज एवं कृषि दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। प्रदेश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार केवल यातायात सुविधा का विषय नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, व्यापार, पर्यटन, कृषि विपणन, जनजातीय अंचलों के विकास तथा क्षेत्रीय संतुलित प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेल अधोसंरचना के अभूतपूर्व विस्तार का लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिल रहा है और राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ पूर्ण समन्वय के साथ कार्य कर रही है।

    बैठक में कटघोरा-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन परियोजना पर विशेष रूप से चर्चा हुई। बैठक में बताया गया कि लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का विकास रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त उपक्रम (ज्वाइंट वेंचर) के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए दोनों संस्थाओं की साझेदारी में एक स्पेशल परपज़ व्हीकल (SPV) का गठन किया जाएगा। यह रेल लाइन कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक पहुंचेगी तथा ऐसे अनेक क्षेत्रों को पहली बार रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी, जहां अब तक रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी, उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा लाखों नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।

    बैठक में रावघाट-जगदलपुर रेलवे लाइन परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 140 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यक कार्यवाही पूरी की जा चुकी है तथा रेलवे द्वारा निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होने से बस्तर अंचल की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश की तीन अन्य महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं – सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा (301 किलोमीटर) तथा अंबिकापुर-बरवाडीह (200 किलोमीटर) – को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की रेल संपर्क व्यवस्था सुदृढ़ होगी तथा व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इस पर रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

    बैठक के दौरान किरंदुल-कोत्तागुडेम (180 किलोमीटर) तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) (490 किलोमीटर) नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वे कार्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सर्वे कार्य शीघ्र पूर्ण कर आगामी कार्यवाही प्रारंभ करने का अनुरोध किया, जिससे बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो सके तथा विकास एवं सुरक्षा से जुड़े प्रयासों को गति मिले।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के नए अध्याय लिखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई रेल परियोजनाएं प्रदेश के औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही, पर्यटन संवर्धन और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ का रेल नेटवर्क आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति मिलेगी।

  • महानदी पर सुलह की नई शुरुआत! वर्षों पुराने जल विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया साझा जल प्रबंधन का फॉर्मूला

    महानदी पर सुलह की नई शुरुआत! वर्षों पुराने जल विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिया साझा जल प्रबंधन का फॉर्मूला

    महानदी विवाद नहीं, छत्तीसगढ़-ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार बने : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल की पहल पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक

    रायपुर : महानदी जल बंटवारे से जुड़े विषयों के सौहार्दपूर्ण एवं स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में एक महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद के सम्बन्ध में बैठक आयोजित हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया।

    बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों राज्यों की साझा जीवनरेखा है। इसका जल किसानों की आजीविका, पेयजल व्यवस्था, औद्योगिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को किसी विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच संवाद और सहयोग का जो वातावरण बना है, वह भविष्य में स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मजबूत आधार बनेगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ओडिशा की सिंचाई, पेयजल तथा हीराकुंड परियोजना से जुड़ी आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करती है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी अंचलों, सूखा प्रभावित क्षेत्रों तथा राज्य की भविष्य की विकास आवश्यकताओं को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं और समाधान भी ऐसा होना चाहिए जिससे किसी भी पक्ष के हित प्रभावित न हों।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञ उपलब्ध जल की मात्रा तथा उससे जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन कर चुके हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर भविष्य उन्मुख एवं व्यवहारिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि कम वर्षा वाले सालों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार की जाए, जिससे किसी भी राज्य को कठिनाई का सामना न करना पड़े। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित किया जाए, जो समय-समय पर जल उपलब्धता, उपयोग और आवश्यकताओं की समीक्षा करता रहे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि प्रशासनिक एवं तकनीकी स्तर पर अधिकतम विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत महत्व के विषयों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर विचार के लिए लाया जाए। उन्होंने कहा कि इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल तथा केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने तथा दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की सकारात्मक पहल दोनों राज्यों के बीच विश्वास को और मजबूत करेगी तथा समाधान की प्रक्रिया को गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद और राज्यों के बीच समन्वय की भावना ने वर्षों से लंबित जटिल विषयों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण तथा भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बने।

    बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • मलेरिया पर सरकार का निर्णायक वार! स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा ऐलान—‘एक भी मौत नहीं होने देंगे’, 34 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच से बस्तर में बदली स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर

    मलेरिया पर सरकार का निर्णायक वार! स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा ऐलान—‘एक भी मौत नहीं होने देंगे’, 34 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच से बस्तर में बदली स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर

    मलेरिया पर निर्णायक प्रहार जारी, एक भी मृत्यु न हो यही हमारा लक्ष्य : स्वास्थ्य मंत्री

    प्रदेश में एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से 34 लाख से अधिक लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच

    रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बस्तर अंचल में संचालित मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसके माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंची हैं तथा गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हुआ है।

    रायपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34.29 लाख से अधिक नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जो लक्षित आबादी का लगभग 99 प्रतिशत है। अभियान के दौरान मलेरिया, टीबी, सिकल सेल, कुष्ठ रोग, मुख कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर उपचार प्रारंभ किया गया। वहीं 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया तथा 10,938 उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी और उपचार सुनिश्चित किया गया।

    उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मलेरिया के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी सतर्कता के साथ कार्य कर रहा है। प्रदेश के स्वास्थ्य कार्यकर्ता, मितानिन, एएनएम और मैदानी अमला गांव-गांव पहुंचकर जांच, उपचार, सर्वेक्षण और जनजागरूकता गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है। इसके लिए समय पर जांच, त्वरित उपचार, सतत निगरानी और सामुदायिक जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि रणनीतिक कार्ययोजना, सतत निगरानी और जनसहभागिता के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत रह गई है। वहीं राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 5.21 से घटकर 0.90 तक पहुंच गया है। यह उपलब्धि मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग के सतत प्रयासों को दर्शाती है।

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि विगत ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.89 लाख से अधिक संस्थागत प्रसव सम्पन्न हुए हैं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित विशेषज्ञ जांच, उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।

    आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रदेश में 375 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एम्बुलेंस संचालित की गई हैं। जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच 6.50 लाख से अधिक नागरिकों को समयबद्ध आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे दुर्घटना, प्रसूति एवं अन्य आपात परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सकी।

    स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं को आमजन तक पहुंचाने के लिए HLL Lifecare Limited के सहयोग से राज्य के 1,051 स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक पैथोलॉजी जांच सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हब एंड स्पोक मॉडल, आईटी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली एवं गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी विश्वसनीय और समयबद्ध जांच सुविधियां उपलब्ध हो रही हैं।

    उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेश के सभी 10 मेडिकल कॉलेजों में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य संस्थानों के लिए आवश्यक तकनीकी एवं पैरामेडिकल मानव संसाधन उपलब्ध होंगे तथा प्रदेश के युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी शिक्षा एवं प्रशिक्षण के नए अवसर प्राप्त होंगे।

    प्रेस कांफ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश में एनॉलॉग पनीर के उपयोग एवं विक्रय पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • जशपुर में मानसून का बड़ा अपडेट! जिले में सामान्य का 75% बारिश रिकॉर्ड, मनोरा ने तोड़ा रिकॉर्ड, बागबहार में अब भी बारिश का इंतजार

    जशपुर में मानसून का बड़ा अपडेट! जिले में सामान्य का 75% बारिश रिकॉर्ड, मनोरा ने तोड़ा रिकॉर्ड, बागबहार में अब भी बारिश का इंतजार

    जशपुर जिले में सामान्य से 75 प्रतिशत वर्षा दर्ज : मनोरा में औसत से 24 प्रतिशत अधिक बारिश, बागबहार में अब तक सबसे कम वर्षा

    जशपुर : जिले में मानसून की गतिविधियां जारी हैं।भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त वर्षा जानकारी के अनुसार 30 जुलाई 2026 तक जिले में 1 जून से अब तक औसतन 391.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों की इसी अवधि की औसत वर्षा 521.9 मिलीमीटर का 75.1 प्रतिशत है। गुरुवार को जिले में औसतन 10.3 मिलीमीटर दैनिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। जिले में मानसूनी वर्षा की नियमित निगरानी की जा रही है तथा संबंधित विभागों को आवश्यक सतर्कता एवं तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

     प्रतिवेदन के अनुसार जिले में सर्वाधिक 22.0 मिलीमीटर दैनिक वर्षा पत्थलगांव तहसील में दर्ज की गई। इसके बाद जशपुर में 18.0 मिमी., काँसाबेल में 13.5 मिमी., मनोरा में 12.8 मिमी., फरसाबहार में 12.2 मिमी., बगीचा में 8.1 मिमी., सन्ना में 5.9 मिमी., कुनकुरी में 5.3 मिमी., दुलदुला में 3.9 मिमी. तथा बागबहार में 1.5 मिमी. वर्षा दर्ज की गई। 1 जून से 30 जुलाई 2026 तक की प्रगामी वर्षा के अनुसार मनोरा तहसील में 662.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य वर्षा का 124.1 प्रतिशत है और जिले में सबसे अधिक है। वहीं काँसाबेल में 418.1 मिमी. (98.4 प्रतिशत) तथा सन्ना में 485.5 मिमी. (89.7 प्रतिशत) वर्षा दर्ज की गई है। अन्य तहसीलों में जशपुर में 398.8 मिमी. (74.7 प्रतिशत), कुनकुरी में 461.9 मिमी. (73.8 प्रतिशत), पत्थलगांव में 421.4 मिमी. (74.4 प्रतिशत), दुलदुला में 302.3 मिमी. (59.9 प्रतिशत), बगीचा में 320.0 मिमी. (59.1 प्रतिशत), फरसाबहार में 232.9 मिमी. (61.1 प्रतिशत) तथा बागबहार में 216.1 मिमी. (38.2 प्रतिशत) वर्षा दर्ज की गई है।

  • देश के सर्वोच्च मंच पर गूंजा बस्तर का गौरव! राष्ट्रपति भवन में मिला ऐतिहासिक सम्मान, राष्ट्रपति बोलीं—‘बस्तर आना चाहती हूं’, अमित शाह ने कहा—पहली बार देखा ऐसा अद्भुत दृश्य

    देश के सर्वोच्च मंच पर गूंजा बस्तर का गौरव! राष्ट्रपति भवन में मिला ऐतिहासिक सम्मान, राष्ट्रपति बोलीं—‘बस्तर आना चाहती हूं’, अमित शाह ने कहा—पहली बार देखा ऐसा अद्भुत दृश्य

    राष्ट्रपति भवन के विशेष अतिथि बने बस्तर के मांझी-चालकी : बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और जनजातीय प्रतिनिधियों का हुआ विशेष सम्मान

    बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है : राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु

    राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की जनजातीय संस्कृति का ऐसा वैभव देखने को मिला : केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह

    राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर किया उनका सम्मान

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने जताई बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुँचा 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल, राष्ट्रपति को भेंट की 300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की अनुपम कलाकृति

    रायपुर : बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली विरासत ने आज राष्ट्रपति भवन में इतिहास रच दिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया।

    इस अवसर पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और आत्मीय दृश्य तब देखने को मिला, जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस सहज आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया।

    प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री श्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व के प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियाँ, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कलाकारों और जनजातीय प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश का दायित्व है।

    राष्ट्रपति ने जताई बस्तर आने की इच्छा

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भविष्य में बस्तर दशहरा एवं बस्तर पंडुम में सम्मिलित होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। राष्ट्रपति ने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा तथा बस्तर दशहरा की अद्वितीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका बस्तर दशहरा से विशेष आत्मीय संबंध रहा है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का हिस्सा हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की सशक्त आधारशिला है।

    बस्तर पंडुम ने संस्कृति को दिलाई नई पहचान

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने बस्तर की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करते हैं।

    राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के कलाकार, शिल्पकार और युवा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को सुरक्षित रखते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

    बस्तर विकास और शांति की नई पहचान बन रहा है

    राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया यह सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।

    उन्होंने मांझी एवं चालकी की भूमिका की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि वे समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हुए सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

    पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा बस्तर का ऐसा वैभव – केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह

    इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक अवसरों पर राष्ट्रपति भवन आए हैं, किंतु पहली बार उन्होंने राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने कहा कि यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री बोले – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएँ और सांस्कृतिक विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है तथा स्थानीय कलाकारों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को नया मंच प्रदान किया है।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय समाज और उसकी संस्कृति से गहरा आत्मीय जुड़ाव है। उनके अनुभव, स्नेह और मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी तथा जनजातीय समाज का उत्साह और बढ़ेगा।

    प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया तथा भारत की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत हुआ।

    राष्ट्रपति को भेंट की गई बस्तर की 300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की अनुपम कलाकृति

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न स्वरूप भेंट की। यह कलाकृति बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्रेम, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है।

    लोकमान्यता के अनुसार कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने प्रेम, त्याग और समर्पण की ऐसी अमिट मिसाल प्रस्तुत की कि उन्हें देवतुल्य सम्मान प्राप्त हुआ। आज भी बस्तर अंचल में झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ तथा मिटकी को ‘गप्पा देई’ के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, विशेष सचिव श्री रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त श्री डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक श्री संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • ‘मुस्कुराता बस्तर’ से दुनिया देखेगी नई तस्वीर! मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन को कार्टून कला देगी नई पहचान, देश के दिग्गज कलाकार जगदलपुर में देंगे प्रशिक्षण

    ‘मुस्कुराता बस्तर’ से दुनिया देखेगी नई तस्वीर! मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन को कार्टून कला देगी नई पहचान, देश के दिग्गज कलाकार जगदलपुर में देंगे प्रशिक्षण

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन को रेखांकित करेगी ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कार्यशाला

    मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर जगदलपुर में होगी कार्टून कार्यशाला

    स्कूली विद्यार्थियों को मिलेगा वरिष्ठ कार्टूनिस्टों से प्रशिक्षण

    बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और विकास की सकारात्मक तस्वीर को कार्टून कला के माध्यम से मिलेगी नई अभिव्यक्ति

    रायपुर : छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के सहयोग से देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका कार्टून वॉच द्वारा जगदलपुर में स्कूली विद्यार्थियों के लिए ‘मुस्कुराता बस्तर’ थीम पर विशेष कार्टून कार्यशाला आयोजित की जाएगी। कार्यशाला में विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर कला का प्रशिक्षण देने के साथ बस्तर की संस्कृति, पर्यटन और लोकजीवन को रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

     मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर आज विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रहा है। बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यटन स्थलों के कारण देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा अन्य लोकपर्व बस्तर की समृद्ध विरासत के प्रतीक हैं। कार्टून वॉच के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने बताया कि कार्यशाला की थीम ‘मुस्कुराता बस्तर’ इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्ति देना है।

     इस कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट श्री माधव जोशी तथा पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार श्री शुभम जिंदे लाइव डेमो के माध्यम से ऑन-द-स्पॉट कार्टून और कैरिकेचर बनाने का प्रशिक्षण देंगे। साथ ही विद्यार्थियों को कार्टून कला के सामाजिक, रचनात्मक और रोजगारपरक पक्षों से भी परिचित कराया जाएगा।

     कार्यशाला के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिलेगा और बस्तर की सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से देशभर तक पहुंचाया जा सके। ‘मुस्कुराता बस्तर’ अभियान नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, लोक परंपराओं और प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का रचनात्मक प्रयास है।

  • दुख की घड़ी में प्रशासन बना सहारा! जशपुर के 5 प्रभावित परिवारों को मिलेगा 20 लाख रुपये का राहत पैकेज, कलेक्टर रोहित व्यास ने जारी की आर्थिक सहायता

    दुख की घड़ी में प्रशासन बना सहारा! जशपुर के 5 प्रभावित परिवारों को मिलेगा 20 लाख रुपये का राहत पैकेज, कलेक्टर रोहित व्यास ने जारी की आर्थिक सहायता

    जशपुर : छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के प्रावधानों के अंतर्गत प्राकृतिक आपदा एवं नैसर्गिक विपत्तियों से होने वाली जनहानि पर प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इसी के तहत प्राकृतिक आपदाओं में हुई मृत्यु के 5 प्रकरणों में कलेक्टर श्री रोहित व्यास द्वारा कुल 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है।

    अपर कलेक्टर प्रदीप साहू से प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसील पत्थलगांव के ग्राम बटुराबहार निवासी स्व. पुषोबाई पति श्री विष्णु प्रसाद की 2 फरवरी 2025 को पानी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण में मृतिका के निकटतम वैध वारिस उनके पति श्री विष्णु प्रसाद को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार तहसील पत्थलगांव के ग्राम कटंगजोर निवासी स्व. भोजराम नाग पिता श्री रूंजा राम की 9 फरवरी 2025 को कुएं के पानी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। मृतक की निकटतम वैध वारिस उनकी पत्नी श्रीमती उषा बाई नाग को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। तहसील सन्ना के ग्राम कुरकुरिया निवासी स्व. शिवकली पिता श्री ललु राम नाग की 12 मई 2025 को भण्डारकोना तालाब के पानी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण में मृतिका के निकटतम वैध वारिस उनके माता-पिता श्री ललु राम नाग एवं श्रीमती शांति को संयुक्त रूप से 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। तहसील बगीचा के ग्राम कलिया निवासी स्व. विष्णु दास महंत पिता श्री जितेन्द्र दास की 8 मार्च 2026 को तालाब के पानी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। मृतक के निकटतम वैध वारिस उनके पिता श्री जितेन्द्र दास को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसी प्रकार तहसील जशपुर के ग्राम गम्हरिया निवासी स्व. कमलावती बाई पति स्व. सुखनाथ की 25 अक्टूबर 2025 को कुएं के पानी में डूबने से मृत्यु हो गई थी। इस प्रकरण में मृतिका की निकटतम वैध वारिस उनकी माता श्रीमती रंथी बाई को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा प्राकृतिक आपदा एवं आकस्मिक जनहानि के प्रकरणों में प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता के साथ की जा रही है।