Category: छत्तीसगढ

  • मानवता की मिसाल बनी डायल-112 टीम—मानसिक तनाव में जान देने उतरे युवक का त्वरित रेस्क्यू, आरक्षक हिमांशु जंघेल व चालक धर्मेंद्र देशमुख सम्मानित

    मानवता की मिसाल बनी डायल-112 टीम—मानसिक तनाव में जान देने उतरे युवक का त्वरित रेस्क्यू, आरक्षक हिमांशु जंघेल व चालक धर्मेंद्र देशमुख सम्मानित

    मोहन नगर ओवरब्रिज से रेलवे ट्रैक पर कूदे युवक को डायल-112 टीम ने सुरक्षित बचाया

    त्वरित रेस्क्यू कर युवक को उपचार हेतु तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया

    समय पर सहायता से युवक की जान सुरक्षित

    सराहनीय कार्य हेतु दोनों आरक्षकों को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया

    आपात स्थिति में 112 पर संपर्क करने की अपील

    दुर्ग : दिनांक 03.02.2026 को मोहन नगर–धमधा नाका ओवरब्रिज क्षेत्र में एक युवक द्वारा मानसिक तनाव एवं नशे की स्थिति में ओवरब्रिज से नीचे रेलवे ट्रैक की ओर कूदने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डायल-112 मोहन नगर की टीम तत्काल मौके पर पहुंची तथा त्वरित एवं संवेदनशील रेस्क्यू कार्रवाई करते हुए युवक को सुरक्षित बाहर निकाला। तत्पश्चात युवक को उपचार हेतु शासकीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां समय पर उपचार मिलने से उसकी जान बचाई जा सकी।

    घटनास्थल :

    मोहन नगर–धमधा नाका ओवरब्रिज के नीचे रेलवे ट्रैक क्षेत्र, दुर्ग

    व्यक्ति का विवरण :

    भानुप्रताप देशमुख, उम्र 30 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 13, जेवर सिरसा, दुर्ग

    (नगर निगम भिलाई में सफाई कर्मचारी)

    सराहनीय भूमिका :

    उक्त रेस्क्यू कार्यवाही में डायल-112 मोहन नगर में पदस्थ आरक्षक क्रमांक 1077 हिमांशु जंघेल एवं चालक क्रमांक 273 धर्मेंद्र देशमुख की त्वरित, सतर्क एवं मानवीय भूमिका सराहनीय रही। उनके इस उत्कृष्ट एवं कर्तव्यनिष्ठ कार्य के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा दोनों कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

    दुर्ग पुलिस की अपील :

    दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि मानसिक तनाव या आपात स्थिति में कोई भी गलत कदम न उठाएं तथा तत्काल सहायता हेतु 112 पर संपर्क करें। समय पर सूचना एवं सहयोग से अमूल्य जीवन बचाया जा सकता है।

  • नक्सल साजिश पर करारा प्रहार—नारायणपुर के ओरछा जंगल में पुलिस-आईटीबीपी की संयुक्त सर्च कार्रवाई, IED निर्माण में प्रयुक्त प्रेशर कुकर, वायर, बैटरी सहित विस्फोटक सामग्री बरामद

    नक्सल साजिश पर करारा प्रहार—नारायणपुर के ओरछा जंगल में पुलिस-आईटीबीपी की संयुक्त सर्च कार्रवाई, IED निर्माण में प्रयुक्त प्रेशर कुकर, वायर, बैटरी सहित विस्फोटक सामग्री बरामद

    नक्सलियों द्वारा छिपाई गई  IED   सामग्री बरामद, नारायणपुर पुलिस और आईटीबीपी की संयुक्त कार्रवाई

    @ गुप्त सूचना पर नारायणपुर पुलिस व आईटीबीपी की संयुक्त टीम की सर्च कार्रवाई

    @ जंगल क्षेत्र से नक्सली उपयोग की सामग्री बरामद

    @ प्रकरण दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई प्रारंभ

    नारायणपुर : दिनांक 02.02.2026 को प्राप्त विश्वसनीय सूचना के आधार पर जिला नारायणपुर अंतर्गत थाना ओरछा क्षेत्र के कांगाली–मंडोली–आसनार–ओरछा जंगल में नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखी गई सामग्री की जानकारी मिली। सूचना की पुष्टि उपरांत नारायणपुर पुलिस एवं आईटीबीपी 29वीं वाहिनी की संयुक्त टीम द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

    सर्च के दौरान जंगल क्षेत्र से नक्सलियों के उपयोग में आने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री बरामद की गई, जिनमें प्रेशर कुकर, रस्सी, बिजली वायर, चार्जर, बैटरियां, पेंसिल सेल, पाइप, इंजन ऑयल जैसी  IED बनाने की सामग्री सहित अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएँ शामिल हैं। उक्त सामग्री को विधिवत जप्त कर पंचनामा तैयार किया गया।

    बरामद सामग्री को सुरक्षित रूप से थाना ओरछा लाकर प्रस्तुत किया गया है। इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    नारायणपुर पुलिस एवं केंद्रीय बलों के द्वारा क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान लगातार प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है।

  • वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की पहचान को मिलेगा नया विस्तार—27-28 मार्च को रायपुर में होगा ‘प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव’, विभिन्न देशों में बसे छत्तीसगढ़ी जुटेंगे राज्य के विकास के साझा संकल्प के लिए

    वैश्विक मंच पर छत्तीसगढ़ की पहचान को मिलेगा नया विस्तार—27-28 मार्च को रायपुर में होगा ‘प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव’, विभिन्न देशों में बसे छत्तीसगढ़ी जुटेंगे राज्य के विकास के साझा संकल्प के लिए

    रायपुर में जुटेंगे विभिन्न देशों में बसे छत्तीसगढ़ी, 27-28 मार्च को प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव

    नॉर्थ अमेरिका छत्तीसगढ़ एसोसिएशन के सहयोग से होगा आयोजन

    रायपुर : प्रदेश के विकास में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों की सहभागिता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 27 एवं 28 मार्च को राजधानी रायपुर में “प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव” का आयोजन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव उत्तर अमेरिका छत्तीसगढ़ प्रवासी संघ (North America Chhattisgarh Association – NACHA) तथा छत्तीसगढ़ एनआरआई संघ (NRI Association of Chhattisgarh) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

    इस दो दिवसीय आयोजन में/1भारत से बाहर विभिन्न देशों में निवासरत छत्तीसगढ़ के रहवासी सहभागिता करेंगे। इस कॉनक्लेव के लिए पंजीयन जल्द शुरू होगा।

    कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं उद्योग विकास स्टार्टअप विकास जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही, प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के अनुभव एवं संसाधनों के माध्यम से राज्य के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा होगी।

    इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश और प्रवासी छत्तीसगढ़ी समाज के बीच संवाद को सुदृढ़ करना तथा सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशना है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

    कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि “विदेश में रहकर काम कर रहे छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश के माध्यम से राज्य के विकास को नई गति दे सकते हैं। सरकार चाहती है कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश के औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।”

  • छत्तीसगढ़ बनेगा नवाचार और उद्यमिता का नया हब—कैबिनेट ने दी 2025-30 की नई स्टार्टअप नीति को मंजूरी, सीड फंड से लेकर 100 करोड़ के कैपिटल फंड और 50 करोड़ के क्रेडिट रिस्क फंड से स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा संबल

    छत्तीसगढ़ बनेगा नवाचार और उद्यमिता का नया हब—कैबिनेट ने दी 2025-30 की नई स्टार्टअप नीति को मंजूरी, सीड फंड से लेकर 100 करोड़ के कैपिटल फंड और 50 करोड़ के क्रेडिट रिस्क फंड से स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा संबल

    छत्तीसगढ़ में स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा सपोर्ट

    कैबिनेट ने/1वर्ष 2025-30 की नई स्टार्टअप नीति को दी मंजूरी

    सीड फंड से लेकर 100 करोड़ का कैपिटल फंड

    रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को नवाचार और स्टार्टअप के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30 को मंजूरी दी गई। इस नीति के लागू होने से राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और युवाओं को उद्यमिता से जुड़ने के नए अवसर प्राप्त होंगे।

    सरकार का कहना है कि अमृतकाल : छत्तीसगढ़ विज़न @2047 के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए राज्य में नवाचार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना आवश्यक है। अब तक औद्योगिक नीतियों के अंतर्गत स्टार्टअप पैकेज की व्यवस्था थी, लेकिन पृथक स्टार्टअप नीति नहीं होने से इन्क्यूबेशन, निवेश और नवाचार को अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही थी। इसके साथ ही भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में भी पृथक नीति का अभाव राज्य के लिए चुनौती बना हुआ था। नई नीति के माध्यम से इस कमी को दूर किया जाएगा।

    नई स्टार्टअप नीति के तहत केवल राज्य शासन से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप इकाइयों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को मजबूत करने के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट वाले स्टार्टअप्स को मिनिमम वायबल प्रोडक्ट विकसित करने हेतु 10 लाख रुपये/1तक का सीड फंड दिया जाएगा। इसके अलावा राज्य में निवेश की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 100 करोड़ रुपये का छत्तीसगढ़ स्टार्टअप (कैपिटल) फंड बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से SEBI-पंजीकृत ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स के जरिए स्टार्टअप्स में निवेश किया जाएगा।

    स्टार्टअप्स को बैंकिंग सहायता से जोड़ने के लिए ₹50 करोड़ का क्रेडिट रिस्क फंड भी बनाया जाएगा, जिसके तहत स्टार्टअप इकाइयों को बैंकों से एक करोड़ रुपये तक के संपार्श्विक-मुक्त ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को अधिकतम 50 रुपये लाख तक के सावधि ऋण या कार्यशील पूंजी पर पांच वर्षों तक 75 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ दिया जाएगा।

    स्टार्टअप्स के विस्तार और बाजार तक पहुंच को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप केंद्रित आयोजनों में भाग लेने पर यात्रा, पंजीकरण और बूथ शुल्क सहित कुल खर्च का 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन के लिए किए गए खर्च की भी प्रतिपूर्ति की जाएगी। सफलतापूर्वक निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप्स को फंडरेजिंग पर भी अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन मिलेगा।

    नई नीति में स्टार्टअप्स को सरकारी खरीद में छूट, भूमि और भवन से जुड़े दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क में छूट तथा इन्क्यूबेशन सेंटर या किराये के भवन में संचालित इकाइयों को तीन वर्षों तक किराया अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही स्थायी पूंजी निवेश, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, पेटेंट, परियोजना प्रतिवेदन और सरकारी अनुसंधान संस्थानों से तकनीक क्रय पर भी अनुदान दिया जाएगा।

    रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। दस से अधिक स्थायी रोजगार देने वाले स्टार्टअप्स को महिला कर्मचारियों के लिए 6,000 रुपये प्रति माह और पुरुष कर्मचारियों के लिए 5,000 रुपये प्रति माह तक की सहायता दी जाएगी। वहीं दिव्यांगजनों, सेवानिवृत्त अग्निवीरों और नक्सल प्रभावित अथवा पीड़ित व्यक्तियों को रोजगार देने वाले स्टार्टअप्स को उनके वेतन का 40 प्रतिशत तक अनुदान पांच वर्षों तक मिलेगा।

    राज्य सरकार का मानना है कि छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30 के लागू होने से राज्य में निवेश बढ़ेगा, नए स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। यह नीति छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • छत्तीसगढ़ को मिलेगा स्टार्टअप बूस्टर—‘छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30’ को कैबिनेट की मंजूरी, पाँच वर्षों में 5,000 से अधिक स्टार्टअप्स को वित्त, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन का व्यापक समर्थन

    छत्तीसगढ़ को मिलेगा स्टार्टअप बूस्टर—‘छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30’ को कैबिनेट की मंजूरी, पाँच वर्षों में 5,000 से अधिक स्टार्टअप्स को वित्त, मेंटरशिप और इनक्यूबेशन का व्यापक समर्थन

    छत्तीसगढ़ की नई स्टार्टअप नीति को मिली मंज़ूरी, पाँच साल में 5 हज़ार स्टार्टअप को मिलेगा बूस्टर

    रायपुर : छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30 को मंत्रिपरिषद की स्वीकृति छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद ने आज “छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-30” को स्वीकृति प्रदान की। इस नीति का उद्देश्य राज्य में एक सशक्त, समावेशी एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप इकोसिस्टम का निर्माण करना है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिले, रोजगार सृजन हो तथा सतत आर्थिक विकास को गति प्राप्त हो। यह नीति राज्य के युवाओं को नवाचार एवं उद्यमिता की दिशा में प्रेरित एवं सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    नई स्टार्टअप नीति के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 5,000 से अधिक नए क्च्प्प्ज्-पंजीकृत स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नीति के माध्यम से वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, मेंटरशिप, बाजार संपर्क, क्षमता निर्माण तथा प्रौद्योगिकी एवं बौद्धिक संपदा समर्थन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    नीति में 100 करोड़ रूपए के छत्तीसगढ़ स्टार्टअप (कैपिटल) फंड, 50 करोड़ रूपए के क्रेडिट रिस्क फंड, सीड फंड सहायता (10 लाख रूपए तक), ब्याज अनुदान, किराया अनुदान, पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान, रोजगार सृजन सब्सिडी सहित कई महत्वपूर्ण प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांगजन, सेवानिवृत्त सैनिक, नक्सल प्रभावित व्यक्तियों तथा पब्लिक वेलफेयर एवं सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन भी नीति का प्रमुख हिस्सा हैं।

    उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि राज्य में हब-एंड-स्पोक मॉडल के अंतर्गत इनक्यूबेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके तहत राज्य में उन्नत सुविधाओं से युक्त मेगा इनक्यूबेटर्स (हब इनक्यूबेटर्स) स्थापित किए जाएंगे, जो स्टार्टअप्स को अधोसंरचना, मेंटरशिप, तकनीकी सहायता, एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। साथ ही राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्पोक इनक्यूबेटर्स के माध्यम से नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रत्येक जिले में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने हेतु आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जाएगी।

    यह नीति “अमृतकाल-छत्तीसगढ़ विज़न/2047” के लक्ष्यों के अनुरूप है और राज्य को नवाचार-आधारित उद्यमिता का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

    स्टार्टअप्स के लिए प्रमुख आर्थिक सहायता

    नीति में स्टार्टअप्स को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की अनुदान और छूट का प्रावधान किया गया है,-

    ’ सीड फंड सहायता – नए स्टार्टअप को प्रोडक्ट विकसित करने के लिए 10 लाख रूपए तक सहायता।

    ’ स्टार्टअप कैपिटल फंड – निवेश उपलब्ध कराने हेतु 100 करोड़ रूपए का फंड।

    ’ क्रेडिट रिस्क फंड – बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने हेतु 50 करोड़ रूपए का फंड।

    ’ ब्याज अनुदान – 50 लाख तक के ऋण पर 5 वर्षों तक 75 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान ।

    ’ किराया अनुदान – 3 वर्षों तक भुगतान किये गए किराए का 50 प्रतिशत (अधिकतम 15,000 रूपए प्रति माह)।

    ’ स्थायी पूंजी निवेश अनुदान – मशीनरी एवं उपकरण पर 35 प्रतिशत तक (अधिकतम 35 लाख

    रूपए )।

    ’ पेटेंट एवं गुणवत्ता प्रमाणन सहायता – राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पेटेंट एवं प्रमाणन पर 75 प्रतिशत तक अधितम 10 लाख प्रतिपूर्ति।

    ऽराष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों में भागीदारी हेतु यात्रा, पंजीयन एवं स्टॉल व्यय पर 50 प्रतिशत अनुदान सहित कई महत्वपूर्ण प्रोत्साहनों का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांगजन, सेवानिवृत्त सैनिक, नक्सल प्रभावित व्यक्तियों तथा पब्लिक वेलफेयर एवं सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन भी नीति का प्रमुख हिस्सा हैं।

    इनक्यूबेशन इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा

    नई नीति के अंतर्गत राज्य में हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित इनक्यूबेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके तहत मेगा इनक्यूबेटर (हब इनक्यूबेटर) स्थापित किए जाएंगे, जो स्टार्टअप्स को अधोसंरचना, मेंटरशिप, निवेश से जुड़ाव एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर स्पोक इनक्यूबेटर्स नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देंगे।

    इनक्यूबेटर एवं एक्सेलेरेटर के लिए वित्तीय सहायता

    ’ शासकीय इनक्यूबेटर्स को परियोजना लागत का 75 प्रतिशत तक अनुदान ।

    ’ निजी इनक्यूबेटर्स को 50 प्रतिशत अनुदान (अधिकतम 3 करोड़ रूपए)।

    ’ बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों में स्थापित इनक्यूबेटर्स को 10 प्रतिशत अतिरिक्त सहायता।

    इनक्यूबेटर उन्नयन एवं संचालन सहायता

    स्थापित इनक्यूबेटर्स द्वारा अधोसंरचना या क्षमता में 25 प्रतिशत वृद्धि करने पर उन्हें भी अनुदान की पात्रता होगी।

    कार्यक्रम एवं एक्सेलेरेशन सहायता

    ’ मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर्स को राज्य स्तरीय नवाचार कार्यक्रमों के आयोजन हेतु 1 लाख रूपए प्रति कार्यक्रम (अधिकतम 4 लाख रूपए वार्षिक)।

    ’ न्यूनतम 8 सप्ताह के एक्सेलेरेशन प्रोग्राम आयोजित करने पर 15 लाख रूपए तक व्यय प्रतिपूर्ति।

    कॉलेज इनोवेशन एवं स्टार्टअप सेल

    राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र नवाचार को बढ़ावा देने हेतु कॉलेज इनोवेशन एवं स्टार्टअप सेल स्थापित किए जाएंगे। चयनित कॉलेजों को इसके संचालन हेतु 5 लाख रूपए प्रति वर्ष तक सहायता प्रदान की जाएगी।

    यह नीति “अमृतकाल – छत्तीसगढ़ विज़न /2047” के लक्ष्यों के अनुरूप है और राज्य को नवाचार आधारित उद्यमिता का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

     वर्जन

    छत्तीसगढ़ की नई स्टार्टअप नीति से प्रदेश स्टार्टअप इनोवेशन का उभरता हुआ हब बनेगा। तकनीक और नवाचार के नए मानचित्र पर छत्तीसगढ़ की मजबूत उपस्थिति दर्ज होगी प्रोत्साहित करने हेतु नए स्टार्टअप नीति में बहुत से महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

    माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में स्टार्टअप इंडिया अभियान ने बीते 10 वर्षों में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम वाला देश बन चुका है।

    इसी उद्देश्य के साथ माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में भी स्टार्टअप नीति के माध्यम से इनोवेशन, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देते हुए यह नीति लाई गई है।

    श्री लखन लाल देवांगन

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, छग

  • खनन परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सर्वोपरि—मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक में दिए कड़े निर्देश, अवैध खनन पर ड्रोन और आईटी तकनीक से निगरानी के आदेश

    खनन परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सर्वोपरि—मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक में दिए कड़े निर्देश, अवैध खनन पर ड्रोन और आईटी तकनीक से निगरानी के आदेश

    खनन परियोजनाओं का हो गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध क्रियान्वयन- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक में हुए शामिल

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 21वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल्स सहित कई अनेक खनिजों के प्रचुर भंडार उपलब्ध हैं। राज्य में चल रही सभी खनन परियोजनाओं का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध रूप क्रियान्वयन किया जाए। 

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खनिजों के अवैध परिवहन एवं उत्खनन पर विशेष टॉस्क फोर्स के माध्यम से की जा रही निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए आईटी एवं ड्रोन जैसे आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाये। तकनीक के द्वारा अवैध गतिविधियों पर बेहतर एवं सतत निगरानी की जा सकेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने पीएमकेकेकेवाई के अंतर्गत खनिज 2.0 पोर्टल के माध्यम से व्यय एवं कार्यो के प्रगति की निगरानी के विषय में जानकारी ली। उन्होंने कार्यो के गुणवत्ता एवं परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के लिए जिला खनिज न्यास अधिनियम के अंतर्गत राज्य स्तरीय केन्द्रीय कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई की स्थापना के माध्यम से डीएमएफ कार्यों की बेहतर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिये।

    बैठक में परिवहन नेटवर्क (रेलमार्ग) के अंतर्गत चिरमिरी-नागपुर रेल्वे लाईन हेतु कुल 328 करोड़ एवं छत्तीसगढ़ रेल्वे कॉरीडोर निर्माण हेतु, 1-ईस्ट कॉरीडोर एवं 3-ईस्ट वेस्ट कॉरीडोर के लिए राशि रूपये 60.10 करोड़ एवं क्वासी इक्विटी के रूप में 24.10 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया ।

    बैठक में खनिज विकास निगम लिमिटेड (सीएमडीसी) को एनएमडीसी-सीएमडीसी कंपनी लिमिटेड (एनसीएल) संयुक्त उपक्रम में सीएमडीसी की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में विभिन्न परियोजनाओं के विकास हेतु 112.70 करोड़ एवं सीएमडीसी को विभागीय कार्य हेतु अतिरिक्त राशि रूपये 10 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया ।

    बैठक में संचालनालय, भौमिकी तथा खनिकर्म के अंतर्गत खनिज ब्लॉकों की नीलामी, खनिज ऑनलाईन 2.0 के भुगतान, भौमिकी के अंतर्गत सर्वेक्षण, पूर्वेक्षण एवं विभिन्न परियोजनाओं के भुगतान एवं बाह्य स्त्रोतों से विभिन्न तकनीकी कार्यों के संपादन, मुख्य एवं गौण खनिजों के अवैध परिवहन निगरानी हेतु आईटी एवं ड्रोन तकनीक से नियंत्रण, जिला खनिज न्यास अधिनियम के अंतर्गत डीएमएफ से संबंधित कार्यों की निगरानी हेतु केन्द्रीय कार्यक्रम प्रबंधन ईकाई (सीपीएमयू) सहित विभागीय कार्य हेतु 138.17 करोड़ का समिति द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया ।

    बैठक में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निधि सलाहकार समिति की 20वीं बैठक में संपन्न कार्यों के क्रियान्वयन के विषय में जानकारी दी गई।

    बैठक में वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव सह सचिव वित्त श्री मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव सह सचिव खनिज साधन विभाग श्री पी दयानंद, संचालक खनिज श्री रजत बंसल सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।

  • आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ ‘बस्तर पण्डुम 2026’—54 हजार से अधिक पंजीयन के साथ रचा इतिहास, बस्तर की माटी की खुशबू और जनजातीय परंपराएँ 7 से 9 फरवरी तक विश्व पटल पर बिखेरेंगी सांस्कृतिक रंग

    आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ ‘बस्तर पण्डुम 2026’—54 हजार से अधिक पंजीयन के साथ रचा इतिहास, बस्तर की माटी की खुशबू और जनजातीय परंपराएँ 7 से 9 फरवरी तक विश्व पटल पर बिखेरेंगी सांस्कृतिक रंग

    आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ बस्तर पण्डुम 2026

    बस्तर की माटी की खुशबू और समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार

    इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों के पंजीयन ने रचा नया इतिहास

    रायपुर : बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है। जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागी बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।

    इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन

     इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है। बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

    समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार

     बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन ।

     65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे

     प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा।

    संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन

     इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।

  • विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पर्यावरणीय संदेश—‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान के पोस्टर का विमोचन, जल-स्रोत संरक्षण में मातृशक्ति की भूमिका को बताया निर्णायक

    विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पर्यावरणीय संदेश—‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान के पोस्टर का विमोचन, जल-स्रोत संरक्षण में मातृशक्ति की भूमिका को बताया निर्णायक

    मुख्यमंत्री ने किया ‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान के पोस्टर का विमोचन

    विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर जल-स्रोत संरक्षण का संदेश

    रायपुर : विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर बीते दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में ‘वुमेन फॉर वेटलैण्ड्स ’ अभियान के पोस्टर का अनावरण किया,इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आर्द्रभूमि एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण हेतु चलाए जा रहे इस अभियान की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल ही जीवन है और आर्द्रभूमियां मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति को इस पवित्र अभियान से जोड़ना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी कदम है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि “नदियां, तालाब, कुएं, पोखर और आर्द्रभूमियां केवल जल-स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी प्रकृति की पहचान हैं। इन्हें बचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।”

    प्रज्ञा निर्वाणी चला रहीं व्यापक जन-जागरण अभियान

    ‘वूमेन फॉर वैटलैंड्स ’ अभियान की संस्थापक एवं महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रज्ञा निर्वाणी द्वारा प्रदेशभर में आर्द्रभूमि संरक्षण हेतु निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, इस अभियान के अंतर्गत तालाब, नहर, कुएं, नदियों एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण के लिए महिलाओं को संगठित किया जा रहा है। प्रज्ञा निर्वाणी ने मुख्यमंत्री को नवागढ़ स्थित गिधवा-परसदा-नगधा पक्षी विहार क्षेत्र को रामसर साइट घोषित करने हेतु ज्ञापन भी सौंपा,

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “महिलाएं प्रकृति की प्रथम संरक्षक हैं,यदि मातृशक्ति आगे आएगी तो जल-स्रोतों का संरक्षण जन-आंदोलन बन जाएगा।” पोस्टर अनावरण कार्यक्रम के दौरान प्रसन्ना अवस्थी, प्राची शर्मा, प्रणीता शर्मा, आरविका अवस्थी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

  • धमतरी, बलौदाबाजार और गरियाबंद में संपत्ति खरीदार-विक्रेताओं को राहत—स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित गाइडलाइन दरें 4 फरवरी से होंगी प्रभावी, केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने दी मंजूरी

    धमतरी, बलौदाबाजार और गरियाबंद में संपत्ति खरीदार-विक्रेताओं को राहत—स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित गाइडलाइन दरें 4 फरवरी से होंगी प्रभावी, केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने दी मंजूरी

    धमतरी, बलौदाबाजार और गरियाबंद में संशोधित गाइडलाइन दरें 4 फरवरी से लागू

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में 20 नवंबर 2025 से लागू की गई नवीन गाइडलाइन दरों के अंतर्गत आवश्यकतानुसार पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राज्य शासन द्वारा पूर्व में जिला मूल्यांकन समितियों को यह निर्देश जारी किए गए थे कि यदि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप गाइडलाइन दरों में संशोधन की आवश्यकता हो, तो उसके प्रस्ताव केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजे जा सकते हैं।

    शासन के इन निर्देशों के अनुपालन में धमतरी, बलौदाबाजार और गरियाबंद जिलों की जिला मूल्यांकन समितियों से संशोधन संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों पर विचार करने के लिए महानिरीक्षक पंजीयन की अध्यक्षता में केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक आयोजित की गई, जिसमें तीनों जिलों से प्राप्त प्रस्तावित गाइडलाइन दरों का गहन परीक्षण किया गया। बैठक में समग्र रूप से विचार-विमर्श के बाद धमतरी, बलौदाबाजार और गरियाबंद जिलों की जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा भेजे गए गाइडलाइन दर संशोधन प्रस्तावों को अनुमोदन प्रदान किया गया।

    केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित संशोधित गाइडलाइन दरें धमतरी, बलौदाबाजार और गरियाबंद जिलों में 4 फरवरी 2026 से प्रभावशील होंगी। आम नागरिकों, संपत्ति क्रेता-विक्रेता तथा अन्य संबंधित हितधारकों को इन नवीन दरों की जानकारी संबंधित जिला पंजीयन कार्यालयों एवं विभाग की आधिकारिक वेबसाइट में उपलब्ध है।

    राज्य शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अन्य जिलों की जिला मूल्यांकन समितियों से प्राप्त होने वाले संशोधित गाइडलाइन दरों के प्रस्तावों पर भी शीघ्र कार्रवाई करते हुए उन्हें क्रमशः जारी किया जाएगा। यह प्रक्रिया प्रदेश में संपत्ति मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, युक्तिसंगत और जनोपयोगी बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद बैठक में बड़े और दूरगामी फैसले—नशे के खिलाफ 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, सुरक्षा के लिए एसओजी, स्टार्टअप व क्लाउड फर्स्ट नीति को मंजूरी

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद बैठक में बड़े और दूरगामी फैसले—नशे के खिलाफ 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, सुरक्षा के लिए एसओजी, स्टार्टअप व क्लाउड फर्स्ट नीति को मंजूरी

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, सुरक्षा सुदृढ़ीकरण और डिजिटल भविष्य की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कई दूरगामी और जनहितकारी निर्णय लिए गए। महानदी भवन मंत्रालय में हुई इस बैठक में जहां मादक पदार्थों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और एसओजी के गठन को मंजूरी दी गई, वहीं युवाओं के लिए पायलट प्रशिक्षण, स्टार्टअप को बढ़ावा देने, डिजिटल गवर्नेंस को सशक्त करने और नगरीय सुविधाओं के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। ये निर्णय न केवल कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करेंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ को नवाचार, तकनीक और समावेशी विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ाने में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

    मंत्रिपरिषद के निर्णय

    1.           मादक पदार्थाें की रोकथाम की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के गठन हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में प्रावधानित 100 नवीन पदों की  स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव एवं कोरबा जिला शामिल हैं।

    2.           मंत्रिपरिषद की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा अंतर्गत एस.ओ.जी. (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन के लिए प्रावधानित 44 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है। एसओजी का काम किसी भी बड़ी या अचानक हुई घटना में तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को संभालना और आतंकी हमला या गंभीर खतरे को जल्दी खत्म करना होता है। एसओजी एक खास तरह की प्रशिक्षित टीम होती है, जिसे ऐसे खतरनाक कामों के लिए तैयार किया जाता है।

    3.           मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न एयरपोर्ट एवं हवाई पट्टियों में उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) की स्थापना का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया तथा इसके संचालन के दिशा-निर्देशों का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ में पायलट प्रशिक्षण की सुविधा के लिए राज्य में उड़ान प्रशिक्षण संगठन की स्थापना की जाएगी। विमानन क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह संस्थान उपयोगी होगा। इससे एयरक्राफ्ट रिसाइकिलिंग, हेलीकॉप्टर बंकिंग तथा एयरो स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित होगी। फ्लाइट ट्रेनिग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना निजी सहभागिता से किया जाएगा।

    4.           मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-26 का अनुमोदन किया गया। इस नीति से स्टार्टअप ईको सिस्टम के साथ-साथ इन्क्यूबेटर्स एवं अन्य हितधारकों का विकास होगा। छत्तीसगढ़ को देश में एक प्रमुख नवाचार केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में सुधार होने से राज्य में निवेश का आकर्षण बढ़ेगा।

    5.           मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इन कॉलोनियों में खुले भू-खंड, उद्यान और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी। हालांकि, आवासीय, व्यावसायिक और अर्द्धसार्वजनिक बिक्री योग्य संपत्तियां इसमें शामिल नहीं होंगी।

    अभी इन कॉलोनियों का हस्तांतरण नहीं होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को कई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कॉलोनियों के रखरखाव के लिए निवासियों को दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा है। एक ओर वे नगर निगम को संपत्ति कर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गृह निर्माण मंडल को भी रखरखाव शुल्क देना पड़ता है। इन कॉलोनियों के हस्तांतरण से नगरीय निकायों द्वारा यहां पानी, बिजली, सड़क, सफाई जैसी सुविधाएं दी जा सकेंगी और कॉलोनीवासियों को अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से राहत मिलेगी।

    6.           मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय विभागों तथा निगम मंडल के कार्यालयों के लिए नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा एक वृहद बहुमंजिला भवन बनाने का निर्णय लिया गया है और यहां विभागों को स्पेस आबंटित किया जाएगा, ताकि भूमि का पूर्ण उपयोग किया जा सके।

    7.           मंत्रिपरिषद द्वारा सिरपुर एवं अरपा क्षेत्र में सुनियोजित विकास और विकास कार्यों को गति देने के लिए संबंधित क्षेत्र में शासकीय भूमि के आबंटन का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को प्रदान किया गया है।

    गौरतलब है कि सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का उद्देश्य संबंधित नदी तटीय क्षेत्रों का योजनाबद्ध और समग्र विकास करना है। इसके लिए मास्टर प्लान के क्रियान्वयन, भूमि नियोजन एवं नगर विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है। विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय भूमि का आबंटन जरूरी था। वर्तमान में दोनों प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए शासकीय भूमि का आबंटन रु. 1/- प्रीमियम एवं भू-भाटक पर किए जाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, भूमि आबंटन के अधिकार संबंधित जिला कलेक्टरों को दिया गया है।

    8.           मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति‘‘ को प्रदेश में लागू किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया।

    छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति के अनुसार राज्य शासन के सभी विभाग, उपक्रम एवं स्वायत्त संस्थाएं केवल भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनुमोदित क्लाउड सेवा प्रदाताओं या भारत में स्थित सुरक्षित डेटा सेंटर एवं डिजास्टर रिकवरी सेंटर से ही क्लाउड सेवाएं लेंगी। किसी विशेष या असाधारण आवश्यकता के लिए राज्य क्लाउड परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

    नीति के तहत कम प्राथमिकता वाले एप्लिकेशन एवं आर्काइव डेटा का क्लाउड माइग्रेशन वर्ष 2027-28 तक तथा उच्च प्राथमिकता सेवाओं का माइग्रेशन 2029-30 तक किया जाएगा। सभी नए एप्लिकेशन क्लाउड-नेटिव तकनीक पर विकसित किए जाएंगे।

    कैबिनेट ने इस नीति में भविष्य में आवश्यक संशोधन करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को अधिकृत किया है। इस नीति से आईटी ढांचे में लागत में कमी, संचालन में दक्षता, बेहतर साइबर सुरक्षा, आपदा के समय सेवाओं की निरंतरता तथा नागरिक सेवाओं की 24×7 उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रैकिंग व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

    9.           मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विस्तार देने के लिए मोबाइल टावर योजना का अनुमोदन किया गया है। भौगोलिक विषमता और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित होने से शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित हो रहा है। इस योजना से मोबाइल टावर स्थापना हेतु चयनित सेवा प्रदाताओं को अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाएगा।

    मोबाइल टावर योजना के अंतर्गत चयनित मोबाइल नेटवर्क विहीन बसाहटों में टावर की स्थापना की जाएगी। डिजिटल कनेक्टिविटी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, ई गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार होगा सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। योजना से सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार होगा विशेष कर वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में संचार सुविधा उपलब्ध होने से प्रशासनिक कार्य में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। मोबाइल टावर योजना के लागू होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आपातकालीन सेवाएं डायल 112 जैसी योजनाओं की पहुंच दूरस्थ इलाकों के नागरिकों तक सुगमता से होगी।