Category: छत्तीसगढ

  • धमतरी का धमाकेदार परचम: मंदरौद ग्राम पंचायत बनी पूरे छत्तीसगढ़ में नंबर-1—गरीबी मुक्त आजीविका मॉडल से रचा इतिहास, पंचायत विकास का नया राष्ट्रीय मानक स्थापित

    धमतरी का धमाकेदार परचम: मंदरौद ग्राम पंचायत बनी पूरे छत्तीसगढ़ में नंबर-1—गरीबी मुक्त आजीविका मॉडल से रचा इतिहास, पंचायत विकास का नया राष्ट्रीय मानक स्थापित

    धमतरी का डंका: पंचायत विकास सूचकांक में मंदरौद ग्राम पंचायत प्रदेश में अव्वल

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण के क्षेत्र में धमतरी जिले ने एक नया इतिहास रचा है। राज्य सरकार द्वारा जारी पंचायत विकास सूचकांक (PDI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, धमतरी जिले की ग्राम पंचायतों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसमें सबसे बड़ी उपलब्धि कुरूद विकासखंड की मंदरौद ग्राम पंचायत के नाम रही है, जिसने ‘गरीबी मुक्त एवं आजीविका संवर्धन’ (थीम-1) में 94.4 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

    सतत विकास के मॉडर्न मॉडल के रूप में उभरा धमतरी

     PDI रैंकिंग में केवल मंदरौद ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य पंचायतों ने भी अपनी छाप छोड़ी है। ‘स्वस्थ पंचायत’, ‘जल संपन्न पंचायत’ और ‘स्वच्छ एवं हरित पंचायत’ जैसी श्रेणियों में जिले की कई पंचायतों ने A+ और A ग्रेड प्राप्त कर यह साबित किया है कि यहाँ शासन की योजनाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मजबूती से उतर रही हैं।

     “पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा”

     इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राज्य के नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन ने हर्ष व्यक्त किया है।उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री श्री विजय शर्मा मंत्री ने मंदरौद पंचायत को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है। मंदरौद की सफलता प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणास्रोत और नवाचार का मॉडल बनेगी।विधायक श्री अजय चंद्राकर ने इस जीत का श्रेय सामूहिक प्रयासों को देते हुए कहा कि बयह स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत अमले और जागरूक ग्रामीणों की मेहनत का फल है। धमतरी विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। कलेक्टर ने इस उपलब्धि को पारदर्शी प्रशासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, और यह रैंकिंग उसी दिशा में एक मील का पत्थर है।

    सफलता के पीछे के मुख्य कारक

     मंदरौद और धमतरी की अन्य पंचायतों की इस सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ रहे हैं। सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाना। विकास कार्यों में ग्रामीणों की सक्रिय जनभागीदारी सुनिश्चित करना और आजीविका पर फोकस करते हुए गरीबी उन्मूलन के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के साधनों का संवर्धन करना रहा।धमतरी जिले की यह गौरवपूर्ण उपलब्धि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सशक्तिकरण और समग्र विकास की एक नई इबारत लिख रही है।

  • 30 साल की सेवा का सम्मान : देवसाय तिर्की की विदाई बनी चर्चा का विषय ! “सेवानिवृत्ति नहीं, नई शुरुआत” – एसएसपी के इस बयान ने समारोह को बना दिया यादगार!

    30 साल की सेवा का सम्मान : देवसाय तिर्की की विदाई बनी चर्चा का विषय ! “सेवानिवृत्ति नहीं, नई शुरुआत” – एसएसपी के इस बयान ने समारोह को बना दिया यादगार!

    जिला पुलिस रायगढ़ से सेवानिवृत्त हुए प्रधान आरक्षक देवसाय तिर्की को कल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विभागीय परंपरा अनुसार सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। श्री देवसाय तिर्की ने 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरांत दिनांक 30 अप्रैल को जिला पुलिस रायगढ़ से प्रधान आरक्षक पद से सेवानिवृत्ति प्राप्त की। इस अवसर पर पुलिस कार्यालय में सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों तथा उनके परिवारजनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    कार्यक्रम में डीएसपी श्री सुशांतो बनर्जी ने उनके सेवाकाल की जानकारी साझा करते हुए बताया कि श्री देवसाय तिर्की मूलतः सीतापुर, सरगुजा के निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 1998 में जबलपुर, मध्यप्रदेश में आरक्षक पद पर पुलिस विभाग में भर्ती होकर अपने सेवा जीवन की शुरुआत की थी। सेवाकाल के दौरान पदोन्नति प्राप्त कर प्रधान आरक्षक बने और उन्होंने जिला रायगढ़ में रक्षित केंद्र, थाना चक्रधरनगर, धरमजयगढ़, घरघोड़ा, भूपदेवपुर तथा पुलिस चौकी जोबी सहित विभिन्न स्थानों पर अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं।

    सम्मान समारोह में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने श्री तिर्की के लंबे और समर्पित सेवाकाल के लिए विभाग की ओर से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, सुखद और सफल जीवन की शुभकामनाएं दीं। एसएसपी ने कहा कि विभाग में सेवा के दौरान कई व्यक्तिगत कार्य पीछे छूट जाते हैं, जिन्हें अब वे निश्चिंत होकर पूरा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी विभाग के अनुभव का महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं और उनका मार्गदर्शन एवं फीडबैक विभाग के लिए हमेशा अहम रहेगा।

    कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं परिवारजनों ने श्री देवसाय तिर्की को पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। समारोह भावनात्मक और गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ।

  • 6 साल का ‘गूगल बॉय’ बना छत्तीसगढ़ का गौरव: रमेन डेका ने लोक भवन में रुद्र शर्मा को किया सम्मानित—यूपीएससी स्तर के सवालों के जवाब देकर सबको किया हैरान

    6 साल का ‘गूगल बॉय’ बना छत्तीसगढ़ का गौरव: रमेन डेका ने लोक भवन में रुद्र शर्मा को किया सम्मानित—यूपीएससी स्तर के सवालों के जवाब देकर सबको किया हैरान

    रायपुर : राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में जिला दुर्ग के 6 वर्षीय ‘गूगल बॉय ‘ रुद्र शर्मा ने अपने पालकों के साथ मुलाकात की।अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति से उसने हैरान कर दिया। राज्यपाल श्री डेका से मुलाकात के दौरान रुद्र ने सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों के सटीक उत्तर देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

     कक्षा पहली के छात्र रुद्र को यूपीएससी और पीएससी स्तर के प्रश्नों के उत्तर भी याद हैं। मुलाकात के दौरान राज्यपाल ने उससे छत्तीसगढ़ के गठन, राज्य की विशेषताओं और भारतीय संविधान से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका रुद्र ने बिना झिझक तुरंत सही जवाब दिया।

     रुद्र की तेज स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर राज्यपाल ने उसकी सराहना की। उन्होंने लोक भवन की ओर से रुद्र को प्रमाण पत्र प्रदान किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

     इस अवसर पर रुद्र के माता श्रीमती पायल शर्मा के साथ उसके नाना श्री विनोद शर्मा भी उपस्थित थे, जिन्होंने उसकी उपलब्धि पर खुशी जाहिर की।

  • नारी शक्ति को समर्पित ऐतिहासिक पहल: विष्णुदेव साय का बड़ा संदेश—एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को मिला व्यापक समर्थन, छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र बना महिला सशक्तिकरण का मील का पत्थर

    नारी शक्ति को समर्पित ऐतिहासिक पहल: विष्णुदेव साय का बड़ा संदेश—एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को मिला व्यापक समर्थन, छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र बना महिला सशक्तिकरण का मील का पत्थर

    मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण हेतु विशेष सत्र: एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को मिला व्यापक समर्थन

    महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री श्री साय

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।

    उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।

  • “लोगों को सुनें, उन्हें सुनाएं नहीं” — विष्णुदेव साय का सख्त संदेश: शालीनता और संवेदनशीलता से ही बनेगा सुशासन, अब अधिकारियों के व्यवहार पर होगी सीधी निगरानी

    “लोगों को सुनें, उन्हें सुनाएं नहीं” — विष्णुदेव साय का सख्त संदेश: शालीनता और संवेदनशीलता से ही बनेगा सुशासन, अब अधिकारियों के व्यवहार पर होगी सीधी निगरानी

    आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी – मुख्यमंत्री

    लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश

    शालीनता और संवेदनशीलता – यही हो प्रशासनिक अधिकारी की पहचान: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो।

    उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है।

    उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज, सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।

  • वरिष्ठ खेल पत्रकार व टीवी कमेंटेटर जसवंत क्लॉडियस का बड़ा आह्वान: “फिटनेस और खेल संस्कृति को अपनाए बिना 21वीं सदी में भारत का भविष्य अधूरा”—वैश्विक खेल अर्थव्यवस्था और बढ़ती इनामी राशि के बीच देशवासियों को जागरूक होने की जरूरत

    वरिष्ठ खेल पत्रकार व टीवी कमेंटेटर जसवंत क्लॉडियस का बड़ा आह्वान: “फिटनेस और खेल संस्कृति को अपनाए बिना 21वीं सदी में भारत का भविष्य अधूरा”—वैश्विक खेल अर्थव्यवस्था और बढ़ती इनामी राशि के बीच देशवासियों को जागरूक होने की जरूरत

    21वीं सदी उनकी जो शारीरिक रूप से फिट अतः खेलें, करें मदद

    प्रतियोगिताओं में बढ़ती पुरस्कार राशि और आपसी योगदान का महत्व

    आलेख .., जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर.

    रायपुर : भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों और मध्यपूर्व के देशों में क्रिकेट मुकाबले के दौरान दर्शकों की जितनी भीड़ होती है वह किसी भी अन्य खेल में नहीं पाई जाती है। दुनिया में बहुखेल टूर्नामेंट जैसे आधुनिक ओलंपिक खेलों, महाद्वीपीय याने एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों में दर्शकों की कुल उपस्थिति को छोड़ दिया जाए तो फुटबाल, टेनिस, बास्केटबाल, मुक्केबाजी, रग्बी, बेसबाल, व्हालीबाल, बैडमिंटन के टूर्नामेंट को प्रत्यक्ष रूप से मैदान में जाकर देखने वालों की संख्या बहुत कम होती है। एक आकलन के अनुसार फुटबाल के बाद सबसे अधिक दर्शक उपस्थिति वाला खेल टेनिस है। टेनिस में चार ग्रेंड स्लेम प्रतियोगिताओं को सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है। इसमें विंबल्डन की शुरुवात लंदन में 1877 में हुई, यूएस ओपन न्यूयार्क में 1881, फ्रेंच ओपन 1891 में फ्रांस में जबकि ऑस्ट्रेलियन ओपन 1906 से आरम्भ हुई। अगर हम टेनिस के उपरोक्त चैंपियनिशिप के कोर्ट की सतह और स्टेडियम में दर्शकों की उपस्थिति की बात करें तो विंबल्डन के कोर्ट की सतह ग्रास की, दर्शक क्षमता 14949, यूस ओपन की हार्डकोर्ट, दर्शक क्षमता 23971, फ्रेंच ओपन व ऑस्ट्रेलियन ओपन के मैच हार्डकोर्ट में खेले जाते हैं जिसमें दर्शक क्षमता क्रमश: 15000 तथा 14800 है।

    आगामी 24 मई से आरंभ होने वाली फ्रेंच ओपन के लिए इस वर्ष इनामी राशि को दस प्रतिशत बढ़ाई गई है और अब कुल 677 करोड़ रुपये की राशि पुरस्कार के तौर पर प्रतिभागियों को दी जाएगी। इसमें महिला व पुरुष एकल के विजेताओं को 30.75 करोड़ की बराबरी की राशि दी जाएगी। आम तौर पर जब दर्शक हो, टेनिस प्रेमी हो या खेल प्रेमी हो जब 677 करोड़ की राशि वितरित किए जाने की बात सुनते हैं तो आश्चर्य लगता है, लेकिन यह सब राशि मीडिया के प्रसारण अधिकार, स्टैडियम में मैच देखने वालों व कुछ अन्य से श्रोतों से प्राप्त हो जाता है। हमारे देश में क्रिकेट मैच से होने वाली आय और खिलाडिय़ो, प्रशिक्षकों, स्टाफ आदि को पुरस्कार स्वरूप दी जाने वाली राशि सबसे बड़ी होती है।जबकि प्रति टिकट दर चालीस हजार दर्शकों में तीन हजार से अधिक शायद ही होती होगी। 677 करोड़ की धनराशि को इनाम स्वरूप दिए जाने के लिए विंबल्डन के आरंभिक मैच से प्रति टिकिट दर 15 से 25 हजार रूपए तक होती है। इसी तरह यूएस ओपन की टिकिट पांच हजार से 22 हजार, फ्रेंच ओपन की 06 हजार से 21 हजार तथा आस्ट्रेलियाई ओपन की 03 हजार से 20 हजार तक प्रति मैच होती है। टूर्नामेंट आगे बढऩे से टिकिट की दर बढ़ते जाती है।हाल ही में टेनिस इतिहास का सबसे महंगा टिकिट बिक्री वाला मुकाबला यूस ओपन में 2026 में हुआ जब मुकाबला जोकविच और अलकाराज के बीच gफाइनल हुआ। इसमें समय स्थिति थी कि एक टिकिट 12 लाख रुपए की बिकी।

    उपरोक्त सभी जानकारी देने का तात्पर्य यह बताना है कि विदेश में खेल को पूरी तरह मनोरंजन के रूप में देखा जाता है। प्रत्येक खेल प्रेमी भले ही हर खेल को प्रत्यक्ष रूप से ना देखे लेकिन वह पसंद के किसी एक खेल को देखता है तो फिर उसके प्रवेश टिकिट के लिए पैसा जमा करने की शुरुआत कर देता है। विदेशियों की जीवन शैली पूरी तरह व्यवस्थित रहती है। हमें उपरोक्त आकलन से लेनी सीख लेनी चाहिए ताकि हम खेल व खिलाडिय़ों को समृद्धि बनाने में मददगार हो सके।सिर्फ किसी एक खेल को बढ़ावा न देकर हमें कम से कम ओलंपिक के 28 गेम्स में से किसी एक को बढ़ावा अपने सोच व आर्थिक सहयोग द्वारा देना चाहिए। भारत को खेलमय बनाने के लिए केंद्र सराकर अब विभिन्न खेलों में क्लबों के गठन और उनके बीच स्पर्धा कराने प्रसासरत है। यह सबकुछ इसलिए क्योंकि खेलकूद स्वस्थ्य जीवन का मूलमंत्र है और 21वीं सदी के अपाधापी भरी जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए भारत के प्रत्येक कामगार को स्वस्थ व चुस्त दुरुस्त होना अति आवश्यक है। अत: 21वीं सदी में आवश्यक है कि भारतवासियों के सोच में खेल के प्रति सकारात्मक भाव उत्पन्न हो।

  • विलुप्ति से वैभव तक: वैज्ञानिक रणनीति, जनभागीदारी और सख्त संरक्षण ने रचा इतिहास—बारनवापारा में 200 के करीब पहुंचे काले हिरण, देशभर के लिए मिसाल

    विलुप्ति से वैभव तक: वैज्ञानिक रणनीति, जनभागीदारी और सख्त संरक्षण ने रचा इतिहास—बारनवापारा में 200 के करीब पहुंचे काले हिरण, देशभर के लिए मिसाल

    विशेष लेख : पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल – बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी’

    रायपुर : मन की बात’ से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।

     छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।

     विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।

     वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में ‘सॉफ्ट रिलीज’ पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।

     प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) श्री धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है।

    रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक ‘केस स्टडी’ बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।

     भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ‘लिविंग लैबोरेटरी’ (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।

    धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

    अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

  • मातृशक्ति को मिलेगा निर्णायक अधिकार: विष्णुदेव साय का बड़ा संकल्प—नारी शक्ति वंदन से संसद-विधानसभाओं में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी, ‘डबल इंजन सरकार’ सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

    मातृशक्ति को मिलेगा निर्णायक अधिकार: विष्णुदेव साय का बड़ा संकल्प—नारी शक्ति वंदन से संसद-विधानसभाओं में बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी, ‘डबल इंजन सरकार’ सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

    मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए डबल इंजन सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में  संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान, समग्र विकास और सशक्तिकरण के लिए संसद और सभी विधानसभाओं में उनके लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुदृढ़ करेगी, बल्कि समाज में समान अवसर और संतुलित प्रतिनिधित्व की दिशा में भी एक नई ऊर्जा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रयासों से देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में सशक्त भूमिका मिलेगी और विकास अधिक समावेशी एवं प्रभावी बनेगा।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह पावन धरती माता शबरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया की भूमि है, जहां नारी को सदैव शक्ति के रूप में सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति की आधारशिला है। नवरात्रि में जिस शक्ति की हम पूजा करते हैं, वही शक्ति समाज में मातृरूप में विद्यमान है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे शास्त्रों में वर्णित “या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता…” केवल एक श्लोक नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन का मूल तत्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर भक्त माता कर्मा, तीजन बाई, उषा बारले जैसी विभूतियों ने अपनी प्रतिभा और समर्पण से प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया है। साथ ही, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती और अवंती बाई जैसी वीरांगनाओं के योगदान को भी उन्होंने प्रेरणास्रोत बताया। आधुनिक युग में कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने देश का गौरव वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व का विस्तार समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के कार्यक्षेत्र के विस्तार और जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए समय-समय पर व्यवस्थागत सुधार और संतुलन पर विचार करना महत्वपूर्ण है, जिससे शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी और जनसरोकारों के अनुरूप बन सके।

    उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश में महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। स्वच्छता, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन, शिक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में योजनाओं के माध्यम से महिलाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है। इन प्रयासों ने महिलाओं की गरिमा और आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देना और उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता, स्वरोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार हुआ है, बल्कि वे समाज की मुख्यधारा से भी अधिक मजबूती से जुड़ रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास, पेयजल, आजीविका और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं, जो समाज में सकारात्मक

    परिवर्तन का संकेत है।

    उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत बनाने का एक सशक्त उदाहरण है। बड़ी संख्या में महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में नेतृत्व कर रही हैं और स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को परिवार और समाज में सशक्त बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक पहल की जा रही हैं, जिससे वे निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तिकरण केवल एक नीति का विषय नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का आधार है। उन्होंने सभी वर्गों से इस दिशा में सहयोग और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया, ताकि एक समतामूलक, सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण किया जा सके।

  • युवाओं के लिए खुशखबरी : खेल क्रांति की ओर बड़ा कदम! राजनांदगांव में बनेगा आधुनिक स्पोर्ट्स हब, क्रिकेट अकादमी और खेल मैदान से बदलेगी तस्वीर

    युवाओं के लिए खुशखबरी : खेल क्रांति की ओर बड़ा कदम! राजनांदगांव में बनेगा आधुनिक स्पोर्ट्स हब, क्रिकेट अकादमी और खेल मैदान से बदलेगी तस्वीर

    विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के पश्चात राजनांदगांव के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से उनके विधान-सभा स्थित कक्ष में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में राजनांदगांव के खेल विकास को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय पर विस्तार से चर्चा हुई।

    कैबिनेट द्वारा आधुनिक खेल मैदान एवं क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु जिला क्रिकेट एसोसिएशन राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा अंतर्गत दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आवंटित करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया।

  • बदलेगा शासन का चेहरा: 01 मई से शुरू ‘सुशासन तिहार 2026’, 10 जून तक प्रदेशभर में समाधान शिविर—विष्णुदेव साय के निर्देश पर हर शिकायत का समयबद्ध निपटारा, जनता को मिलेगा त्वरित न्याय

    बदलेगा शासन का चेहरा: 01 मई से शुरू ‘सुशासन तिहार 2026’, 10 जून तक प्रदेशभर में समाधान शिविर—विष्णुदेव साय के निर्देश पर हर शिकायत का समयबद्ध निपटारा, जनता को मिलेगा त्वरित न्याय

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” की शुरुआत आज से होने जा रही है। यह अभियान 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में चलाया जाएगा, जिसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे।

     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण ही सुशासन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आमजन को पारदर्शी, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    पहले चरण में लंबित मामलों के निराकरण पर जोर

     अभियान के पूर्व चरण में ही कलेक्टरों को निर्देशित किया गया है कि 30 अप्रैल तक सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से समाधान सुनिश्चित करें। इसमें—

    * नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरण

    * मनरेगा के लंबित मजदूरी भुगतान

    * हितग्राहीमूलक योजनाओं के लंबित भुगतान

    * आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र

    * बिजली, ट्रांसफार्मर और पेयजल (हैंडपंप) समस्याएं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान रखा जाएगा, साथ ही पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    प्रदेशभर में लगेंगे समाधान शिविर

    सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून तक लगेंगे शिविर

    * ग्रामीण क्षेत्रों में 15–20 ग्राम पंचायतों के समूह में शिविर

    * शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर आधारित आयोजन

    * मौके पर ही आवेदन स्वीकार और लाभ वितरण

    * अधिकतम एक माह में आवेदनों का निराकरण

     शिविरों में शासन की योजनाओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी और प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति की जानकारी दी जाएगी।

    जनप्रतिनिधियों की भागीदारी और सीधा संवाद

     अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आम नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे।

    CM करेंगे औचक निरीक्षण और समीक्षा

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर—

    * विकास कार्यों का औचक निरीक्षण

    * हितग्राहियों से सीधा फीडबैक

    * जिला स्तर पर समीक्षा बैठकें करेंगे

     निरीक्षण के बाद वे प्रेसवार्ता के माध्यम से जानकारी साझा करेंगे और नागरिकों व सामाजिक संगठनों से सुझाव भी लेंगे।

    व्यापक प्रचार से बनेगा जन आंदोलन

     जनसम्पर्क विभाग और जिला प्रशासन को निर्देशित किया गया है कि अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। डिजिटल, प्रिंट और स्थानीय माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा