रायपुर : राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के महानिदेशक श्री सुब्रत साहू के नेतृत्व में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने सौजन्य भेंट की।
राज्यपाल श्री डेका ने परिवीक्षाधीन अधिकारियों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी और कहा कि अपना कर्तव्य भली-भांति निभाते हुए देश और समाज की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहें और मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्य करें। आम आदमी को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता दें साथ ही अपने अधीनस्थों के प्रति भी संवेदनशील रहें।
इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, संचालक छत्तीसगढ प्रशासनिक अकादमी श्री टी सी महावर, प्रशिक्षण निदेशक श्री प्रणव सिंह सहित परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी श्री गोकुल आर. के., श्री वदथ्यवथ यशवंत नाइक एवं श्री इशांत जायसवाल उपस्थित थे।
रायपुर : केंद्रीय न्यासी बोर्ड, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, छत्तीसगढ़ की क्षेत्रीय 27वीं बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता ने की। श्री गुप्ता ने निर्देश दिए है कि मृत्यु प्रकरणों में तेजी से ईएसआईसी के साथ समन्वय कर उद्योगों में होने वाले आकस्मिक मृत्यु प्रकरणों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देकर तत्काल निपटाया जाए। सचिव ने कहा कि निष्क्रिय भविष्य निधि खातों के लाभार्थियों की पहचान कर उनका भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में प्रत्येक माह की 27 तारीख को आयोजित निधि आपके निकट कार्यक्रम में जिला कलेक्टर, ईएसआईसी सहायक श्रम आयुक्त, उप श्रम आयुक्त एवं संबंधित राज्य सरकार के विभागों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए।
बैठक का संचालन सदस्य सचिव एवं क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री जयवदन इंगले द्वारा किया गया। क्षेत्रीय भ.नि. आयुक्त श्री जयवदन इंगले ने बैठक में संगठन की व्याप्ति, न्यायालयीन प्रकरणों, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, कर्मचारी पंजीकरण योजना 2025, प्रयास, तत्पर, कन्वर्जेंस बैठक तथा नवीन साइट्स प्रोजेक्ट की प्रगति पर जानकारी दी। उन्होंने सभी सदस्यों से अपील की कि वे नियोक्ताओं एवं पीएफ सदस्यों को निधि आपके निकट कार्यक्रम में भाग लेकर समस्याओं का समाधान कराने हेतु प्रोत्साहित करें।उल्लेखनीय है कि कर्मचारी भविष्य निधि क्षेत्रीय समिति प्रत्येक राज्य में सांविधिक प्रावधानों के तहत गठित एक महत्वपूर्ण परामर्शदात्री समिति है। बैठक में छत्तीसगढ़ में ईपीएफ अधिनियम के अनुपालन, सामाजिक सुरक्षा लाभों के विस्तार तथा कार्यालय की उपलब्धियों एवं चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में उप केंद्रीय श्रमायुक्त श्री बिधान चंद्र नायक, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के उप निदेशक श्री एन.के. पटनायक एवं श्री रत्नेश राजन्या उपस्थित रहे। नियोक्ता पक्ष से छ.ग. उद्योग महासंघ के अध्यक्ष श्री महेश कक्कड़ और उरला इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री अश्विन गर्ग सम्मिलित हुए। कर्मचारी प्रतिनिधि के रूप में श्री राधेश्याम जायसवाल, श्री ईश्वर चंदेल, श्री शंख ध्वनि सिंह एवं श्री एच.एस. मिश्रा ने भाग लिया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर की ओर से क्षेत्रीय भ.नि. आयुक्त- श्री जयवदन इंगले, क्षेत्रीय भ.नि. आयुक्त श्री गौरव डोगरा एवं श्री देबाशीष चांद तथा सहायक भ.नि. आयुक्त श्री आकाश अग्रवाल उपस्थित थे। पॉवर प्वाइंट प्रस्तुति श्री गौरव डोगरा ने दी।
राजस्व मंत्री का कड़ा रुख : 15 अगस्त तक पूरा करें नगरीय पट्टा वितरण सर्वे
3 साल से जमे तहसीलदारों व पटवारियों की सूची तलब
रायपुर : राजस्व एवं आपदा प्रबंधन तथा पुनर्वास मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने आज अपने निवास कार्यालय में विभाग के आला अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में आम जनता को राहत देने और शासकीय योजनाओं में तेजी लाने के लिए मंत्री श्री वर्मा ने कड़े तेवर दिखाते हुए कई बड़े फैसले किए। इस बैठक में सचिव सुश्री शम्मी आबिदी, संचालक श्री विनीत नंदनवार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
डिजिटल भू-अभिलेखों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
जमीन संबंधी रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या साइबर खतरे को रोकने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। बैठक में मंत्री श्री वर्मा ने डिजिटल भू-अभिलेखों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के लिए एक अभेद्य कार्ययोजना तैयार करने की बात कही, जिससे जनता का डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे।
ई-एचआरएमएस पोर्टल से रखी जाएगी नजर
राजस्व विभाग के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को ट्रैक करने के लिए EHRMS(इलेक्ट्रॉनिक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम) पोर्टल बनाया जाएगा। इस पोर्टल पर उनकी पदस्थापना, अवकाश, विभागीय जांच, गोपनीय प्रतिवेदन और अचल संपत्ति की पूरी जानकारी हर वक्त अपडेट रहेगी।
राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए मंत्री श्री वर्मा ने प्रदेश भर के जिलों में 3 वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अधीक्षक/सहायक अधीक्षक (भू-अभिलेख) और राजस्व निरीक्षकों की सूची तलब की है. इसके साथ ही, एक ही हल्का में 3 साल से ज्यादा समय से जमे पटवारियों का भी पूरा ब्यौरा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
15 अगस्त तक हर हाल में पूरा हो पट्टा वितरण सर्वे
नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और पात्र हितग्राहियों को पट्टा देने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने समय-सीमा तय कर दी है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए हैं कि नगरीय क्षेत्रों में पात्र हितग्राहियों को पट्टा वितरण करने हेतु सभी आवश्यक सर्वे कार्य आगामी 15 अगस्त तक अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं, ताकि समय पर उन्हें मालिकाना हक मिल सके।
शासकीय लीज नवीनीकरण से बढ़ेगा राजस्व
बैठक में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने शासकीय जमीनों के प्रबंधन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन शासकीय भूमियों की लीज समाप्त हो चुकी है, तत्काल नवीनीकरण की प्रकिया हेतु संबंधित को सूचित किया जाए। इसके साथ ही, शासन द्वारा लीज पर दी गई जमीनों की समीक्षा कर नियमों के तहत उचित शुल्क निर्धारण करने को कहा गया, जिससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी। इसके साथ ही एजेंडे में जमीन आबंटन, आकाशीय बिजली से बचाव, रायगढ़ के घरघोड़ा में SECL भू-अर्जन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
एग्रीस्टेक और किसानों से जुड़े अन्य अहम फैसले
मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने प्रदेश में जियोरिफ्रेसिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के कार्यों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व अदालतों एसडीएम और तहसीलदार कोर्ट में लंबित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और त्रुटि सुधार के मामलों को जिलेवार समीक्षा कर जल्द सुलझाने को कहा। बैठक में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना और स्वामित्व योजना के तहत कार्ड वितरण की स्थिति की भी गहन समीक्षा की गई।
बस्तर में दूध, खेतों तक पानी, युवाओं को काम और गांवों को नई पहचान देने की तैयारी
नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रखा विकसित छत्तीसगढ़ का विजन
बस्तर में आमदनी दोगुनी करने का बड़ा संकल्प: तीन साल में हर परिवार की आय 30 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंचाने का लक्ष्य
नई दिल्ली : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में नक्सलवाद से मुक्त बस्तर की नई तस्वीर देश के सामने रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक हिंसा की मार झेलने वाला बस्तर अब आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास का मॉडल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में बस्तर के आदिवासी परिवारों की आय दोगुनी करने, दुग्ध क्रांति लाने, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, पर्यटन को बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने तथा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की व्यापक कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। वहां दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, गांवों में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अगले तीन वर्षों में बस्तर के परिवारों की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में बस्तर के लगभग 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार खेती, पशुपालन, वन उपज, छोटे उद्योग और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में “डेयरी मॉडल” को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य गांवों में स्थायी आय का स्रोत तैयार करना है। इस पहल से महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा गांवों में डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी नई आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले दो बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं से 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से खेती बेहतर होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान धान के साथ-साथ सब्जियां, फल तथा अन्य नकदी फसलें भी उगा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तथा डॉक्टरों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलेगा।
उन्होंने बताया कि बस्तर में बने लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चित्रकोट और बौद्ध धर्म से जुड़े तीर्थस्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी जैसी गतिविधियों का विस्तार किया जा रहा है, जबकि सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है। पर्यटकों के आने से होटल, परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प, दुकानदारों और स्थानीय उद्यमियों को रोजगार मिलता है। बस्तर को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने से हजारों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार निवेश, सुशासन और तकनीक आधारित विकास को तेजी से आगे बढ़ा रही है। राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं और सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत बनाकर निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और डिजिटल तकनीक के जरिए विकास का नया मॉडल तैयार किया जा रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके साथ ही 341 पीएमश्री स्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के माध्यम से बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार ने एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन शुरू किए हैं। इन मिशनों से युवाओं को रोजगार, तकनीक और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ को नवाचार और निवेश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के तहत छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और निर्यात को नई गति मिली है। खेल सामग्री, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायो-एथेनॉल, गारमेंट और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन इंडस्ट्रीज को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना से राज्य के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक 761.76 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जिसमें खुशबूदार चावल का सबसे बड़ा योगदान रहा। इससे किसानों, कारीगरों और उद्यमियों की आय में वृद्धि हो रही है।
श्री राम गोपाल गर्ग पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज द्वारा रेंज में पदस्थ नव-नियुक्त सब-इंस्पेक्टरों की ली गई समीक्षा बैठक.
नव-नियुक्त सब-इंस्पेक्टरों (PSI) के लिए जारी किए गए मुख्य दिशा-निर्देश.
रायगढ़ :बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग ने नव-नियुक्त प्रशिक्षु उप निरीक्षकों (PSI) को स्पष्ट संदेश दिया है कि आने वाले 20-25 वर्षों में छत्तीसगढ़ पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक में आईजी ने अनुशासन, तकनीकी दक्षता, निष्पक्ष विवेचना, जनसंवेदनशीलता और विभागीय नियमों के पालन को पुलिस सेवा की सफलता का मूल मंत्र बताया। बैठक में युवा अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग के साथ-साथ जनता का भरोसा जीतने पर विशेष जोर दिया गया।
दिनांक 10 जून 2026 को श्री राम गोपाल गर्ग पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज द्वारा जिले में पदस्थ नव प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के लिये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ली गई। समीक्षा बैठक का आयोजन रक्षित केन्द्र बिलासपुर स्थित चेतना भवन में किया गया। समीक्षा बैठक में श्री रजनेश सिंह उमनि एवं वरि० पुलिस अधीक्षक जिला बिलासपुर, श्री पंकज पटेल अति० पुलिस अधी० बिलासपुर, श्रीमति मधुलिका सिंह, अति० पुलिस अधी० बिलासपुर, श्रीराम गोपाल करियारे अति० पुलिस अधीक्षक बिलासपुर यातायात, श्रीमति मंजूलता केरकेट्टा उप पुलिस अधीक्षक बिलासपुर, श्री विवेक शर्मा उप पुलिस अधीक्षक पु०म०नि० कार्या० बिलासपुर एवं नव नियुक्त प्रशिक्षु उप निरीक्षकगण उपस्थ्ति रहे तथा विडियों कांन्फ्रेसिंग के माध्यम से रेंज के सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे।
श्री राम गोपाल गर्ग पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज एवं श्री रजनेश सिंह उमनि एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर द्वारा रेंज में पदस्थ नव प्रशिक्षु उप निरीक्षकों के लिये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत समीक्षा की गई और महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी साझा की गई –
1. सार्वजनिक आचरण और कड़ा अनुशासन –
• विभाग का प्रतिनिधित्व : वर्दी पहनने के बाद अधिकारी का आचरण व्यक्तिगत नहीं रहता, वह पूरे विभाग को दर्शाता है। वे हमेशा जनता की निगरानी में रहते हैं।
• कदाचार पर रोक : पुलिस जनता के रक्षक होते है, जो मयार्दित रहकर कानून का पालन करना तथा ऐसा कोई कार्य ना करें जिससे पुलिस की छवि धूमिल हो।
• नियमों का पालन: जनता के सामने उदाहरण पेश करने के लिए पुलिस अधिकारियों को स्वयं यातायात नियमों (जैसे हेलमेट पहनना) का कड़ाई से पालन करना होगा।
2. तकनीकी दक्षता और डिजिटलाइजेशन –
• आत्मनिर्भरता: CCTNS (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) में प्रविष्टियां (Entries) खुद करनी होंगी, और अपने कर्त्तव्य के प्रति हमेशा तत्पर रहनी होगी।
• ऐप्स का उपयोग: विभाग के तकनीकी ऐप्स जैसे ‘सशक्त’, ‘ई-साक्ष्य’, I/O Mitan और ‘समाधान’ का शत-प्रतिशत उपयोग अनिवार्य है।
• अनिवार्य योग्यता : कंप्यूटर का ज्ञान साथ ही सोशल मीडिया, सायबर संबंधी जानकारी के बारे में अच्छा पकड् रखना होगा।
3. व्यावहारिक प्रशिक्षण और विवेचना (Investigation) कौशल –
• फील्ड वर्क : व्यावहारिक चुनौतियों को समझने के लिए प्रत्येक प्रशिक्षु सब-इंस्पेक्टर को न्यूनतम 5 समन और 5 वारंट तामील करने होंगे।
• सीखने की प्रक्रिया : पुरानी एफआईआर और चार्जशीट का अध्ययन करना होगा। केस सुलझाने और कानूनी साक्ष्य तैयार करने के लिए थाने के मोहर्रिर और अनुभवी विवेचकों से काम सीखना होगा।
4. जनता के प्रति संवेदनशीलता –
• धैर्यपूर्ण व्यवहार : थाने में आने वाले पीड़ितों की समस्याओं को अत्यंत धैर्यपूर्वक सुनना होगा।
• भरोसा जीतना : शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या को समझकर उन्हें कानून सम्मत कार्रवाई का पूरा भरोसा दिलाना पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य है।
5. विभागीय नियम और दैनिक डायरी –
• आचरण नियमों (Conduct Rules) का पालन: आई जी श्री गर्ग ने नव नियुक्त प्रशिक्षु उप निरीक्षक गणों को विभागीय नियमावली का पालन करने के साथ साथ सदाचार का पालन करने संबंधी जानकारी साझा की गई।
• डेली डायरी : सभी सब-इंस्पेक्टरों को अपनी ‘डेली डायरी’ अनिवार्य रूप से मेन्टेन करनी होगी, जिसकी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कभी भी औचक जांच (Surprise Inspection) की जा सकती है।
बैठक के अंत में आईजी श्री राम गोपाल गर्ग ने रेंज के सभी जिलो में पदस्थ नव प्रशिक्षु उप निरीक्षको को बधाई देते हुये आने वाले 20-25 वर्षों तक छत्तीसगढ़ पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली की जिम्मेदारी इसी नए बैच पर है, इसलिए उन्हें पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करने के निर्देश दिए गए।
नारायणपुर का मॉडल बना मिसाल, किसानों के खेतों में फलदार क्रांति
बासीन ग्राम में मनरेगा का असर: 99% पौधे जीवित, किसानों के लिए नई उम्मीद
रायपुर : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत नारायणपुर जिले के ओरछा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों की आय बढ़ाने और हरित विकास को बढ़ावा देने की एक उल्लेखनीय पहल सामने आई है। यहां किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार वृक्षों में लगभग 99 प्रतिशत पौधे जीवित एवं स्वस्थ पाए गए हैं, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
किसानों के दीर्घकालिक लाभ, पर्यावरण संरक्षण के लिए लगाए फलदार वृक्ष
मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार किए गए और वित्तीय वर्ष 2025-26 में चयनित किसानों के खेतों में उनका रोपण कराया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ उपलब्ध कराना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में फलदार वृक्षों का विस्तार करना है।
पौधों के संरक्षण-संवर्धन के लिए रखरखाव व्यवस्था की गई सुनिश्चित
योजना के तहत केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक वर्ष तक रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। साथ ही उद्यान विभाग द्वारा किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) का लाभ दिया गया, जिससे पौधों को नुकसान से बचाया जा सका। किसानों ने भी सिंचाई और देखभाल में सक्रिय भूमिका निभाई।
किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय से हुई 99 प्रतिशत जीवितता दर
हाल ही में किए गए क्षेत्रीय निरीक्षण में लगाए गए पौधों की 99 प्रतिशत जीवितता दर दर्ज की गई, जो किसानों की भागीदारी, विभागीय समन्वय और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का परिणाम माना जा रहा है। इस पहल से आने वाले वर्षों में किसानों को आम उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। ग्राम बासीन का यह मॉडल अब अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
“रोजगार के साथ हरियाली और आय वृद्धि” की अवधारणा को साकार करती यह पहल ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है।
मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति व जनजाति विद्यार्थी योजना: 6वीं में प्रवेश के लिए 05 जुलाई को परीक्षा, 20 जून तक आवेदन
जशपुर : अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिभावान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित ’मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति व जनजाति विद्यार्थी योजना‘ के तहत कक्षा 6वीं में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। योजना के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को राज्य के निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क शिक्षा, आवास और भोजन की सुविधा दी जाएगी।
योजनांतर्गत्् पात्रता की श्रेणी में आने वाले विद्यार्थियों को छत्तीसगढ़ का मूल निवासी, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग का छात्र होना होगा। इसके साथ ही कक्षा 5वीं में पढ़ रहा हो और कक्षा 4 में 80 प्रशित से अधिक अंक, माता-पिता की सभी स्रोतों से वार्षिक आय रूपए 2.50 लाख से कम, ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी व अनुदानित स्कूल में पढ़ रहा हो पात्र होगें। यदि शहरी और नगर निगम क्षेत्र के छात्र पात्र नहीं होगें। इसके साथ ही पीव्हीटीजी वर्ग के लिए 2 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेगी।
विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदन की अंतिम तिथि 20 जून 2026, शुक्रवार तक निर्धारित है। जिसका प्रवेश परीक्षा 05 जुलाई 2026, रविवार को सुबह 12.00 से 2.00 बजे तक, जशपुर जिला मुख्यालय में होगा। इच्छुक छात्र अपने स्कूल के प्रधानाचार्य के माध्यम से विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग, कलेक्टरेट जशपुर या वेबसाइटhttp://www.tribal.cg.gov.in पर संपर्क करें। कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम नियमों में बड़ा बदलाव
24 घंटे में मिलेगा पंजीयन प्रमाणपत्र
पूरी प्रक्रिया हुई ऑनलाइन
स्व-घोषणा आधारित व्यवस्था लागू
रायपुर : राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना (नियोजन एवं सेवा की शर्तों का विनियमन) नियम, 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए व्यापारियों, दुकानदारों और प्रतिष्ठानों के लिए पंजीयन प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं पारदर्शी बना दिया है। श्रम विभाग द्वारा 3 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार नियम 4, नियम 5 तथा प्रपत्र-2 को पूर्णतः प्रतिस्थापित कर नए प्रावधान लागू किए गए हैं। नए संशोधनों का उद्देश्य व्यवसायों को त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना, मानवीय हस्तक्षेप कम करना तथा ऑनलाइन शासन व्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है।
संशोधित नियम 4 के तहत अब नियोक्ता द्वारा ऑनलाइन आवेदन, आवश्यक दस्तावेज तथा ई-चालान के माध्यम से शुल्क जमा करने के बाद 24 घंटे के भीतर वेब पोर्टल से श्रम पहचान संख्या का पंजीयन प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। पहले पंजीयन प्रक्रिया में विभागीय स्तर पर अधिक समय लगता था, जब कि अब समयबद्ध सेवा का स्पष्ट प्रावधान कर दिया गया है।
संशोधन के अनुसार दुकानों और प्रतिष्ठानों का रिकॉर्ड श्रम विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर संधारित किया जाएगा। इससे कागजी कार्रवाई में कमी आएगी तथा विभागीय अभिलेखों का डिजिटलीकरण होगा। नए नियमों के तहत वेब पोर्टल के माध्यम से जारी श्रम पहचान संख्या प्रमाणपत्र अधिनियम एवं नियमों के अंतर्गत पूर्णतः वैध माना जाएगा। यदि आवेदन में दी गई जानकारी, तथ्य या दस्तावेज भ्रामक, त्रुटिपूर्ण अथवा असत्य पाए जाते हैं तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी नियोक्ता की होगी। इससे स्व-घोषणा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। अब प्रत्येक दुकान एवं स्थापना संचालक को प्रतिष्ठान के प्रमुख एवं स्पष्ट दिखाई देने वाले स्थान पर पंजीयन प्रमाणपत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
यदि नियोक्ता या भागीदार का नाम, पता, कर्मचारियों की संख्या, प्रतिष्ठान का पता अथवा व्यवसाय की प्रकृति में परिवर्तन होता है, तो अब इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। प्रमाणपत्र में किसी प्रकार के परिवर्तन या संशोधन के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसका भुगतान ई-चालान के माध्यम से करना होगा। संशोधन आवेदन प्राप्त होने के बाद नया या संशोधित पंजीयन प्रमाणपत्र भी 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन जारी करने का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने पुराने प्रपत्र-2 को पूरी तरह हटाकर नया प्रपत्र लागू किया है। इसमें पहले की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारियां शामिल की गई हैं। नई जानकारी जो दर्ज करनी होगी, उसमें श्रम पहचान संख्या एवं दिनांक, प्रतिष्ठान का पूरा पता, ई-मेल एवं मोबाइल नंबर, व्यवसाय, व्यापार का स्वरूप, निजी अथवा सार्वजनिक स्थापना का विवरण, संगठन का प्रकार (प्रोपराइटर, पार्टनरशिप, एलएलपी, कंपनी, ट्रस्ट, सहकारी संस्था आदि), ईएसआई एवं ईपीएफ पंजीयन की जानकारी, नियोक्ता एवं प्रबंधक का विवरण, मुख्यालय की जानकारी, कर्मचारियों का वर्गवार विवरण, साप्ताहिक अवकाश का उल्लेख, कर्मचारियों का विस्तृत विवरण शामिल है।
राजपत्र के अनुसार पुराने नियम 4, नियम 5 और प्रपत्र-2 को यथावत संशोधित नहीं किया गया, बल्कि उन्हें पूर्णतः प्रतिस्थापित कर दिया गया है। अर्थात पुराने प्रावधान अब प्रभावी नहीं रहेंगे और उनकी जगह नए नियम लागू होंगे।
श्रमायुक्त श्री हिम शिखर गुप्ता का कहना है कि यह संशोधन राज्य में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस‘ को बढ़ावा देगा। ऑनलाइन पंजीयन, 24 घंटे की समय-सीमा, स्व-घोषणा आधारित प्रमाणपत्र तथा संशोधन की डिजिटल व्यवस्था से छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और सेवा प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिलेगी। विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, राज्य सरकार ने श्रम विभाग की सेवाओं को डिजिटल, समयबद्ध और स्व-प्रमाणन आधारित बनाकर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक बना दिया है।
रायपुर : जिस तरह विभिन्न धर्मों के पालन करने वालों का सपना होता है कि वे जिंदगी में कभी न कभी एक बार अपने ईष्टदेव के लिए प्रसिद्ध स्थल को प्रत्यक्ष रूप से देख सके या भ्रमण कर सके या वहां जाकर धार्मिक रस्म अदा कर सके। ठीक उसी तरह फुटबाल खिलाड़ी के लिए फीफा विश्व कप जीतना, बैडमिंटन खिलाड़ी के लिए आल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियन बनना, अपने पसंदीदा खेलों में विश्वकप जीतना एक लक्ष्य, उद्देश्य, चाहत या स्वप्न होता है. वैसे ही टेनिस में चार ग्रेंड स्लेम में सबसे अधिक महत्वपूर्ण विंबल्डन (1877) का चैंपियन बनना या अन्य तीन ग्रेंड स्लेम फ्रेंच ओपन (1891), ऑस्ट्रेलियन ओपन (1905), यू.एस. ओपन 1881 विजेता बनने की इच्छा प्रत्येक विश्व स्तरीय टेनिस खिलाड़ी में हेाती है। इन्हीं उम्मीदों को लेकर जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरिव ने 2013 में अपने जीवन को टेनिस के लिए समर्पित कर दिया। हेमबर्ग जर्मनी में 2013 में जब उनकी उम्र सिर्फ 16 वर्ष की थी तब उन्होंने टेनिस के पेशवर खिलाड़ी के रूप में दमखम दिखाना शुरू किया। 20 अप्रैल 1997 को जन्में ज्वेरिव 6 फीट 6 इंच ऊंचे हैं। कद काठी में तगड़े इस जवान ने 11वर्ष पूर्व जैसे ही टेनिस कोर्ट में कदम रखा तो टेनिस जगत में चारों तरफ चर्चा होने लगी कि अब एक और प्रतिभाशाली टेनिस खिलाड़ी मैदान में आ चुके हैं जो उस समय के प्रमुख तीन खिलाडिय़ों को चुनौती देने में सक्षम हैं। 2012 से 2021 तक के दौर में नोवोक जोकोविच, रोजर फेडरर, राफेल नाडाल जैसे खिलाड़ी ग्रेंड स्लेम के बादशाह होते थे। 2013 से 2023 तक उपरोक्त तीनों खिलाडिय़ों ने टेनिस जगत में अपना साम्राज्य बनाए रखा। इस दौर में इतिहास के पन्नों पर नजर डालने से स्पष्ट हो जाता है कि चौथे खिलाड़ी को ग्रेड स्लेम के फाइनल तक पहुंचने का अवसर नहीं मिलता था फिर कोविड 19 महामारी के पश्चात जेनिक सीनर और कार्लोस अल्काराज उभरकर आये। एक बात और उल्लेखनीय है कि ज्वेरिव के दौर में ही एक और प्रतिभाशाली खिलाड़ी रूस के डेनिएल मेदवेदेव भी हुए। उनका जन्म 11 फरवरी 1996 को हुआ. ये दोनों खिलाड़ी लगभग एक साथ उभरकर आए परंतु दुर्भाग्यशाली रहे. 2020 तक उनका सपना पूरा नहीं हो सका। डेनिएल की विश्व रैंकिंग तो अब नौ है और उन्होंने सिर्फ एक यूएस ग्रैंड स्लेम 2021 में जीता। दूसरी तरफ ज्वेरिव ने भी हिम्मत नहीं हारी और 2013 से लगातार टैनिस में सक्रिय रहते हुए आखिरकार हाल ही में सम्पन्न 2026 के दूसरे ग्रेंड स्लेम फ्रेंच ओपन में पुरुष एकल का खिताब जीत लिया। इस प्रकार उनका ग्रैंड स्लेम जीतने का सपना पूरा हो गया जिसके लिए ज्वेरिव ने पिछले 11 वर्ष तक तपस्या की थी। फिलहाल अपने खेल जीवन में वे विश्व में तीसरे स्थान पर हैं। अभी तक 25 कैरियर टाइटिल जीता है। जहां तक पुरस्कार राशि की बात है ज्वेरिव ने अब तक 627.91 करोड़ रुपये जीते हैं जो कि विश्व में किसी टेनिस खिलाड़ी द्वारा अर्जित राशि के अनुसार चौथा है। ज्वेरिव जैसे टेनिस खिलाड़ी से आज की पीढ़ी के खिलाडिय़ों को सबक लेना चाहिए कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्हें लगातार कोशिश करते रहना चाहिए। हमेशा सकारात्मक सोच के साथ खेल जारी रखना चाहिए और अपने आप पर भरोसा रखना चाहिए कि वे निरंतर मेहनत करेंगे, प्रयास करते रहेंगे तो एक दिन मंजिल तक पहुंच जाएंगे। ज्वेरिव ने कठोर अनुशासन, परिश्रम के साथ ईमानदारी से अपनी कोशिश जारी रखी आखिरकार वे विजेता बने। अत: हिम्मत ना हार चल चला चल के लय पर प्रत्येक खिलाड़ी को आगे बढऩा चाहिए। आज की युवा पीढ़ी के लिए ज्वेरिव की सफलता जीवन में कभी भी निराश नहीं होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल : 28 अधिकारियों के तबादले, कई जिलों में नए डीईओ पदस्थ
रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक कसावट और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 28 अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, सहायक संचालकों एवं प्राचार्यों को विभिन्न जिलों और कार्यालयों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक लागू रहेगा।
अवर सचिव छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण सूची के अनुसार महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर, नारायणपुर और बालोद सहित अनेक जिलों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गई हैं। वहीं लोक शिक्षण संचालनालय, संयुक्त संचालक कार्यालयों तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों में भी अधिकारियों की नई तैनाती की गई है।
जारी आदेश के अनुसार प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय श्री बी.एल. देवांगन को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद बनाया गया है। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर श्री हिमांशु भारतीय को प्रभारी उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय में पदस्थ किया गया है। सहायक संचालक श्री एम.जी. सतीश कुमार को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर तथा प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर श्री विजय कुमार ताण्डे के स्थान पर श्री रमेश्वर जायसवाल को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर की जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायगढ़, गरियाबंद, धमतरी, बेमेतरा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों में भी नए प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। कई विकासखंड शिक्षा अधिकारियों एवं सहायक संचालकों को पदोन्नत दायित्व सौंपते हुए जिला स्तर की जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को संचालनालय और संभागीय कार्यालयों में स्थानांतरित किया गया है।
स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पुनर्संरचना विभागीय कार्यों में गति लाने, शैक्षणिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जिलों में प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। आदेश के बाद राज्य के शिक्षा प्रशासन में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा।