Category: छत्तीसगढ

  • नैनो उर्वरकों से खेती में आ रही नई क्रांति, कम लागत में बढ़ रहा उत्पादन; मिट्टी की उर्वरता बचाते हुए किसान बना रहे कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ

    नैनो उर्वरकों से खेती में आ रही नई क्रांति, कम लागत में बढ़ रहा उत्पादन; मिट्टी की उर्वरता बचाते हुए किसान बना रहे कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ

    नैनो उर्वरकों से बढ़ रहा उत्पादन, मिट्टी संरक्षण को भी मिल रही मजबूती

    आधुनिक कृषि तकनीकों से किसान बना रहे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ

    रायपुर : कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो कम मात्रा में अधिक दक्षता के साथ फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध करा रहे हैं।

    सरगुजा जिले के ग्राम भगवानपुर के प्रगतिशील किसान श्री सत्यनारायण ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से प्राप्त अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों से वे अपनी लगभग तीन एकड़ कृषि भूमि में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार इस तकनीक से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है तथा उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

    श्री सत्यनारायण ने बताया कि नैनो उर्वरकों का उपयोग पर्णीय छिड़काव (फोलियर स्प्रे) के रूप में किया जाता है, जिससे पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं और उनका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। इससे फसलों को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है।

    उन्होंने कहा कि पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जबकि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्वों का अनावश्यक अपव्यय कम होता है। इससे मिट्टी की उर्वरता और उत्पादक क्षमता को बनाए रखने में सहायता मिलती है, जो टिकाऊ कृषि के लिए महत्वपूर्ण है।

    कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरकों की उपयोग दक्षता अधिक होने के कारण किसानों को कम मात्रा में बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है। यही कारण है कि प्रदेश में किसानों का रुझान नैनो उर्वरकों की ओर लगातार बढ़ रहा है।

    राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण, प्रदर्शन और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी देकर उन्हें कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

    श्री सत्यनारायण ने अन्य किसानों से भी नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग कर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ-साथ अपनी कृषि भूमि की उर्वरता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। इससे खेती अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बन सकती है।

  • खून की कुछ बूंदें नहीं, जीवन का सबसे बड़ा उपहार है रक्तदान; दुर्घटना, कैंसर, थैलेसीमिया और आपात स्थितियों में बनता है जीवन और मृत्यु के बीच उम्मीद की आखिरी डोर

    खून की कुछ बूंदें नहीं, जीवन का सबसे बड़ा उपहार है रक्तदान; दुर्घटना, कैंसर, थैलेसीमिया और आपात स्थितियों में बनता है जीवन और मृत्यु के बीच उम्मीद की आखिरी डोर

    विश्व रक्तदान दिवस 14 जून पर विशेष

    आपकी रगों में बहता हुआ खून किसी के बुझते हुए घर के चिराग को दोबारा रोशन कर सकता है

    जीवन का उपहार: रक्तदान

    धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

    रायपुर : “रक्तदान महादान” — यह केवल एक नारा नहीं है, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा प्रमाण है। जब आप रक्तदान करते हैं, तो आप केवल खून की कुछ बूंदें नहीं दे रहे होते, बल्कि किसी को मुस्कुराने का, जीने का और अपने परिवार के साथ रहने का एक और मौका दे रहे होते हैं। हर साल 14 जून को पूरी दुनिया में ‘विश्व रक्तदान दिवस’ मनाया जाता है। आपकी रगों में बहता हुआ खून किसी के बुझते हुए घर के चिराग को दोबारा रोशन कर सकता है। इस बार सिर्फ स्टेटस न लगाएं, आगे आएं और रक्तदान करें!

           दुनिया में कई तरह के दान किए जाते हैं— अन्नदान, वस्त्रदान, धनदान और विद्यादान। ये सभी दान सम्मानीय हैं, लेकिन रक्तदान इन सबसे ऊपर है। इसका कारण यह है कि बाकी सभी दान व्यक्ति की सुख-सुविधाओं को पूरा करते हैं, जबकि रक्तदान किसी मरते हुए व्यक्ति को जीवनदान देता है। जब कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार होता है, किसी बड़ी सर्जरी से गुजरता है, या थैलेसीमिया और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहा होता है, तब उसके पास जिंदगी और मौत के बीच बहुत कम समय होता है। उस वक्त आपकी दी हुई खून की एक यूनिट (लगभग 350-450 मिलीलीटर) किसी का बुझता हुआ घर का चिराग दोबारा रोशन कर सकती है।

           अत्याधुनिक युग में भी, विज्ञान आज तक प्रयोगशाला में कृत्रिम खून (Artificial Blood) नहीं बना पाया है। इसका सीधा और कड़वा सच यह है कि किसी इंसान की रगों में बहता खून ही किसी दूसरे इंसान की जान बचा सकता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति और समाज में रक्तदान को ‘महादान’ का दर्जा दिया गया है।

    जब आप एक बार रक्तदान करते हैं, तो आप केवल एक नहीं, बल्कि तीन लोगों की जान बचा सकते हैं।ब्लड बैंक में आपके द्वारा दिए गए रक्त को तीन मुख्य घटकों (Components) में अलग किया जाता है:

    1.     लाल रक्त कणिकाएं (Red Blood Cells – RBC): एनीमिया या अत्यधिक खून बह जाने पर काम आती हैं।

    2.     प्लाज्मा (Plasma): जलने के मामलों या लीवर की गंभीर बीमारियों में उपयोग होता है।

    3.     प्लेटलेट्स (Platelets): डेंगू, कैंसर या कीमोथेरेपी के मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होती हैं।

    रक्तदान का लाभ:-

    रक्तदान करने से शरीर हार्ट अटैक का खतरा कम: रक्तदान करने से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है, जिससे खून का थक्का जमने की संभावना कम होती है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा काफी घट जाता है।

     कैंसर से बचाव: शरीर में आयरन का स्तर नियंत्रित रहने से कुछ प्रकार के कैंसर (जैसे लीवर, फेफड़े और कोलन कैंसर) का जोखिम कम होता है।

    नई ऊर्जा का संचार: रक्तदान के बाद शरीर 48 घंटों के भीतर तरल पदार्थ की कमी पूरी कर लेता है और अगले कुछ हफ्तों में नई रक्त कोशिकाएं (New Blood Cells) बनाता है, जिससे शरीर में स्फूर्ति आती है।

     फ्री मिनी-हेल्थ चेकअप: रक्तदान से पहले डोनर के हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, पल्स और वजन की जांच की जाती है। साथ ही रक्त की HIV, हेपेटाइटिस बी और सी, तथा मलेरिया जैसी गंभीर बीमारियों के लिए मुफ्त जांच होती है।

    रक्तदान क्यों है बेहद ज़रूरी?

    चिकित्सा विज्ञान ने आज आसमान छू लिया है, हम कृत्रिम अंग बना सकते हैं, जटिल से जटिल सर्जरी कर सकते हैं, लेकिन आज तक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में कृत्रिम खून (Artificial Blood) नहीं बना पाए हैं। इसका मतलब साफ है कि इंसान की जान बचाने के लिए केवल इंसान का खून ही काम आ सकता है।

    इन परिस्थितियों में होती है रक्त की सबसे ज्यादा जरूरत:

    •      दुर्घटनाएं और इमरजेंसी: सड़क हादसों या अन्य दुर्घटनाओं में अत्यधिक खून बह जाने पर।

    •      गंभीर बीमारियाँ: थैलेसीमिया, कैंसर, और हीमोफिलिया जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को नियमित रूप से खून की जरूरत होती है।

    •      प्रसव के दौरान: कई बार डिलीवरी के वक्त महिलाओं को अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) के कारण खून चढ़ाना पड़ता है।

    •      बड़ी सर्जरी: दिल का ऑपरेशन, ऑर्गन ट्रांसप्लांट आदि में।

    “अगर आप किसी के चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते हैं, तो पहले अपनी बाहें आगे बढ़ाएं।”

    रक्तदान केवल एक सामाजिक या नैतिक कर्तव्य नहीं है, यह विशुद्ध रूप से मानवता का उत्सव है। धर्म, जाति, रंग और ऊंच-नीच की दीवारों को तोड़कर जब एक इंसान का खून दूसरे इंसान की रगों में दौड़ता है, तो वही सच्ची इंसानियत होती है। आइए, इस महादान का हिस्सा बनें। स्वयं भी रक्तदान करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। याद रखें, आपका थोड़ा सा रक्त किसी के लिए पूरा जीवन बन सकता है।

  • देवपुर के जंगलों में सहेजा गया वनौषधियों का खजाना, बॉटनाइजेशन कार्यशाला में 80 से अधिक औषधीय प्रजातियों की पहचान; वैद्यों, वनकर्मियों और छात्रों ने सीखे प्रकृति के अनमोल रहस्य

    देवपुर के जंगलों में सहेजा गया वनौषधियों का खजाना, बॉटनाइजेशन कार्यशाला में 80 से अधिक औषधीय प्रजातियों की पहचान; वैद्यों, वनकर्मियों और छात्रों ने सीखे प्रकृति के अनमोल रहस्य

    देवपुर में औषधीय वनस्पतियों पर एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला

    80 से अधिक प्रजातियों की पहचान, वैद्यों और छात्रों ने ली भागीदारी

    रायपुर : बलौदाबाजार- भाटापारा जिले के वनमंडल बलौदाबाजार के देवपुर परिक्षेत्र में शुक्रवार को औषधीय वनस्पतियों की पहचान और महत्व पर केंद्रित एक दिवसीय बॉटनाइजेशन कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई।

     कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्र में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान कराना, छाल, पत्ती, तना, जड़, फल एवं फूल के आधार पर वर्गीकरण सिखाना तथा उनके औषधीय महत्व की जानकारी देना था।

    80 से अधिक प्रजातियों की पहचान

     कार्यक्रम में अर्जुन, आंवला, बहेड़ा, बेल, काली मुसली, हाथीपांव, दूधी, भुईनीम, सतावर, खरहर, ठेलका, नरनारी, गरुड़ सहित लगभग 80 औषधीय वनस्पति प्रजातियों की पहचान कराई गई। विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों के पर्यावरणीय व्यवहार, संरक्षण की आवश्यकता और फल, फूल, पत्ती, जड़ आदि के माध्यम से विभिन्न रोगों के उपचार में उपयोग की विस्तृत जानकारी दी। स्वस्थ, निरोग और दीर्घायु जीवनशैली के लिए प्रकृति आधारित ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

    वैद्यों से लेकर छात्रों तक की भागीदारी

     कार्यशाला में वनमंडल बलौदाबाजार, वनमंडल कवर्धा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इसके साथ ही पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान रखने वाले वैद्यगण, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, बारनवापारा के गाइड्स और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

     वन मंडल अधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि कार्यशाला का मकसद केवल औषधीय ज्ञान का प्रसार नहीं था, इसका उद्देश्य इस ज्ञान को समाज के अधिक लोगों तक पहुंचाकर वृक्षों एवं वनस्पतियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण में जनसहभागिता को प्रोत्साहित करना भी है।

  • ढाई वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार, दूरस्थ अंचलों तक पहुंचीं बेहतर सेवाएं; मुख्यमंत्री बोले— स्वस्थ और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय

    ढाई वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक विस्तार, दूरस्थ अंचलों तक पहुंचीं बेहतर सेवाएं; मुख्यमंत्री बोले— स्वस्थ और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय

    ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार से स्वास्थ्य सेवाएं हुई सुदृढ़ : मुख्यमंत्री श्री साय

    एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री

    प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में एनएचएम कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण

    मुख्यमंत्री ने एनएचएम कर्मचारियों को दी बड़ी सौगात, 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारी संघ के प्रदेश स्तरीय महासम्मेलन में शामिल होकर एनएचएम कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस दौरान एनएचएम कर्मियों के 33 दिनों की हड़ताल अवधि का वेतन दिए जाने की घोषणा की। उन्होंने एनएचएम कर्मचारियों को स्वास्थ्य सेवाओं की “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री साय ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के निर्माण में एनएचएम कर्मियों का योगदान अतुलनीय है और सरकार उनके कार्यों का सम्मान करती है।

     मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा निभाई गई भूमिका को याद करते हुए कहा कि जब पूरी दुनिया संकट में थी, तब एनएचएम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की सेवा में जुटे रहे। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में स्वास्थ्य कर्मियों ने मानवता की मिसाल पेश की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी प्रदेश के ऐसे क्षेत्रों में, जहां सड़कें और परिवहन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, स्वास्थ्य कर्मी पैदल चलकर, नदी-नाले पार कर लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में संचालित “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही है और अब तक लगभग 90 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।

     मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा सुरक्षा बलों के साहसिक प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद का उन्मूलन हुआ है। अब वहां विकास और जनकल्याण की नई संभावनाएं खुल रही हैं, जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक विस्तार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने से लेकर डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती से स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी है और सभी के सहयोग से विकसित एवं स्वस्थ छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों से इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।

     इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि जशपुर से लेकर सुकमा तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में एनएचएम कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि “स्वस्थ बस्तर अभियान” का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कर्मचारियों के लिए की गई विभिन्न घोषणाओं और सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एनएचएम कर्मचारियों की कई मांगें पूरी की जा चुकी हैं तथा स्थानांतरण नीति भी जारी कर दी गई है।उन्होंने कहा कि अब एनएचएम कर्मचारी भी कैशलेस उपचार योजना के दायरे में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि एनएचएम कर्मियों के लिए जीवन बीमा सुविधा लागू की गई है, जिसके तहत सामान्य मृत्यु की स्थिति में 6 लाख रुपये, दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 करोड़ 40 लाख रुपये तथा स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 1 करोड़ 40 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। श्री जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में लगातार कमी आई है और नर्सों की भर्ती प्रक्रिया जारी है। शिशु और मातृ मृत्यु दर में कमी के लिए विशेषीकृत 116 नए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए स्थानों का चयन किया जा चुका है।

     सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा हड़ताल अवधि का वेतन देने की घोषणा के बाद एनएचएम कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने गजमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी तथा एनएचएम कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

  • छत्तीसगढ़ की बेटी महक नरवासे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान बनीं; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित

    छत्तीसगढ़ की बेटी महक नरवासे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान बनीं; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित

    श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान बनीं महक नरवासे : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया सम्मानित

    महक की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजनांदगांव जिले की प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर सुश्री महक नरवासे ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह तथा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम के आगामी श्रीलंका दौरे के लिए टी-20 एवं वनडे दोनों टीमों का उपकप्तान नियुक्त किए जाने पर सुश्री महक नरवासे को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर महक का सम्मान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महक नरवासे की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार या राजनांदगांव जिले की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही हैं। महक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायी है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महक आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम गौरवान्वित करेंगी। उन्होंने महक को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “खूब खेलो, आगे बढ़ो और नई ऊंचाइयों को छुओ। आपकी सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगी।”

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महक नरवासे का भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान के रूप में चयन प्रदेश में विकसित हो रहे खेल वातावरण और खिलाड़ियों को मिल रहे अवसरों का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    सुश्री महक नरवासे ने सम्मान एवं शुभकामनाओं के लिए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उनके पिता श्री राधेश्याम नरवासे, महापौर श्री मधुसूदन यादव, कोच श्री मनोज तिवारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • केंद्र-राज्य की मजबूत साझेदारी से तेज़ होगा विकास का पहिया, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की मुलाकात में जनकल्याण व विकास को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

    केंद्र-राज्य की मजबूत साझेदारी से तेज़ होगा विकास का पहिया, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की मुलाकात में जनकल्याण व विकास को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

    केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

    केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी।

    इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।

  • फिल्में समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले— सकारात्मक सिनेमा से जागरूकता और संस्कारों का होता है निर्माण, छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को मिलेगा नया विस्तार

    फिल्में समाज परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले— सकारात्मक सिनेमा से जागरूकता और संस्कारों का होता है निर्माण, छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को मिलेगा नया विस्तार

    फिल्में समाज में सकारात्मक बदलाव की सशक्त माध्यम हैं – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    कला, संस्कृति और सिनेमा के संरक्षण-संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री श्री साय

    गिधनी पाठ (छुरा) में विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये तथा धमतरी में सेन समाज भवन हेतु 10 लाख रुपये की घोषणा

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर में संस्कृति विभाग एवं छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माताओं, कलाकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली व्यक्तित्वों के सम्मान समारोह में शामिल हुए।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और संवेदनाओं को दिशा देने वाली सशक्त विधा हैं। एक अच्छी फिल्म समाज में जागरूकता पैदा करती है और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय सिनेमा ने समय-समय पर सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मदर इंडिया जैसी फिल्मों ने भारतीय समाज में नैतिक मूल्यों, त्याग और आत्मसम्मान की भावना को सुदृढ़ किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ी सिनेमा का गौरवशाली इतिहास रहा है। पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म कही देबे संदेश ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सार्थक संदेश दिया था। आज छालीवुड की फिल्में मनोरंजन के साथ-साथ व्यावसायिक सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल और ओटीटी प्लेटफॉर्म के विस्तार से फिल्मों की पहुंच समाज के हर वर्ग तक हुई है, ऐसे में जिम्मेदार, सकारात्मक और मूल्याधारित सिनेमा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी फिल्म उद्योग को नई पहचान दिलाने और स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम को पुनः सक्रिय किया गया है। उन्होंने बताया कि इसी वर्ष जनवरी में 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली चित्रोत्पला फिल्म सिटी तथा ट्राइबल एवं कल्चरल कन्वेंशन सेंटर का भूमिपूजन किया गया है। इस परियोजना से राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, हजारों कलाकारों, तकनीशियनों एवं श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा फिल्म पर्यटन को नई गति मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम एवं संस्कृति विभाग को बधाई देते हुए कहा कि प्रदेश की कला, संस्कृति और सिनेमा को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह सराहनीय पहल है। ऐसे सम्मान समारोह कलाकारों और रचनाकारों का मनोबल बढ़ाने के साथ नई पीढ़ी को भी प्रेरित करते हैं।

    कार्यक्रम में 11 देशों में सम्मानित छत्तीसगढ़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्म “छत्तीसगढ़ का भीम – चिंताराम” का विशेष प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन को जन्मदिवस की शुभकामनाएं भी दीं।

    इस अवसर पर उन्होंने गरियाबंद जिले के छुरा क्षेत्र स्थित गिधनी पाठ में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 20 लाख रुपये तथा धमतरी में सेन समाज भवन निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की घोषणा की।

    इस अवसर पर सर्व सेन समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री पुनीत सेन, वरिष्ठ फिल्म निर्माता श्री मोहन सुंदरानी, छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग से जुड़े निर्माता, निर्देशक, कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • रेशम, खादी और हथकरघा क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुनकरों की आय 5 लाख रुपये सालाना तक पहुंचाने के लिए बनाई नई रणनीति

    रेशम, खादी और हथकरघा क्षेत्र में आएगा बड़ा बदलाव: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुनकरों की आय 5 लाख रुपये सालाना तक पहुंचाने के लिए बनाई नई रणनीति

    रेशम, खादी और हथकरघा क्षेत्र को नई दिशा: केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

    बुनकरों और शिल्पियों की आय बढ़ाने के लिए डिजाइन प्रशिक्षण एवं नवाचार पर जोर

    उद्यमियों को 5 लाख रुपये तक वार्षिक आय दिलाने विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश

    रेशम उत्पादन, प्राकृतिक रंगों और निर्यात संवर्धन को मिलेगा बढ़ावा

    रायपुर : केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने रेशम उत्पादन बढ़ाने पर विशेष बल देते हुए विभागीय अधिकारियों को प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हथकरघा बुनकरों, शिल्पियों एवं कारीगरों को डिजाइन विकास संबंधी नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि उनके उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़े तथा उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

      केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह की अध्यक्षता में राज्य अतिथि गृह (पहुना) में आज आयोजित समीक्षा बैठक में रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन संघ के अध्यक्ष श्री भोजराज देवांगन, ग्रामोद्योग विभाग के सचिव श्री राजेश सिंह राणा, छत्तीसगढ़ माटी कला एवं हस्तशिल्प बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री जयप्रकाश मौर्य, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की प्रबंध संचालक श्रीमती लीना कमलेश मंडावी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

      केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण एवं कुटीर उद्योग क्षेत्र के उद्यमियों की वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों को निर्यात एजेंसियों से जोड़ा जाए तथा उनके उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे उन्हें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिल सके।

      बैठक में सिल्क एवं कॉटन उत्पादों में अन्य प्राकृतिक रेशों के समावेश के माध्यम से नवीन उत्पाद विकसित करने तथा बाजार विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

      केंद्रीय मंत्री ने रेशम केंद्रों में रेशम पौधों के साथ फ्लोरीकल्चर एवं सब्जी उत्पादन की मिश्रित खेती को बढ़ावा देने के निर्देश दिए, जिससे कृमिपालकों एवं कीटपालकों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सके।

    उन्होंने वस्त्र निर्माण में प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए हल्दी, कत्था, मेहंदी तथा विभिन्न पुष्पों से प्राप्त रंगों के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता बताई। साथ ही हथकरघा क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक डिजाइन एवं उत्पाद विकास को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के सहयोग से कार्य करने के निर्देश भी दिए।

      बैठक में खादी, ग्रामोद्योग, हथकरघा, हस्तशिल्प एवं रेशम क्षेत्र के समग्र विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के विभिन्न उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।

  • छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बड़ा बदलाव: अब हर दिन राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत और भोजन मंत्र के साथ होगी पढ़ाई, शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

    छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बड़ा बदलाव: अब हर दिन राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत और भोजन मंत्र के साथ होगी पढ़ाई, शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त निर्देश

    छत्तीसगढ़ के स्कूलों में अब गूंजेंगे राष्ट्रगान, राज्यगीत और भोजन मंत्र; शिक्षा विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश

    नए शिक्षा सत्र 2026-27 से लागू होगी व्यवस्था- सुबह की प्रार्थना से लेकर छुट्टी के समय तक का शेड्यूल तय, अधिकारियों को रोजाना मॉनिटरिंग के निर्देश

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के सरकारी और निजी स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, राष्ट्रीय चेतना और भारतीय संस्कृति से गहराई से जोड़ा जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने नवीन शिक्षा सत्र 2026-27 से प्रदेश की सभी शालाओं में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत सहित विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के नियमित व अनिवार्य संचालन के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

      मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) से जारी इस आदेश के तहत सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को अपने-अपने क्षेत्रों में इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    तीन सत्रों में बंटा होगा शेड्यूल- सुबह से शाम तक का पूरा टाइम-टेबल

      विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में अब प्रतिदिन तीन अलग-अलग समय पर निर्धारित क्रम में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रातःकालीन सत्र स्कूल प्रारंभ होने पर सुबह की प्रार्थना सभा में एक तय क्रम के अनुसार ये प्रस्तुतियां अनिवार्य होंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में क्रमशः राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा। इसी प्रकार मध्यान्ह भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा भोजन मंत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय संध्या सत्र में राज्यगीत, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का सामूहिक वाचन कराया जाएगा।

    बौद्धिक और नैतिक विकास है मुख्य उद्देश्य

      स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों के नियमित और प्रभावी संचालन से छात्रों में न केवल राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का भी सही विकास होगा। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराने में मील का पत्थर साबित होगी।

    लापरवाही पर होगी कार्रवाई

      शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रतिदिन स्कूलों का औचक निरीक्षण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं। निर्धारित क्रम में अवहेलना पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या प्राचार्यों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

  • अब नहीं चलेगी मनमानी: शिक्षा विभाग में ऑफलाइन छुट्टी पूरी तरह खत्म, बायोमेट्रिक और VSK App से होगी निगरानी, नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई

    अब नहीं चलेगी मनमानी: शिक्षा विभाग में ऑफलाइन छुट्टी पूरी तरह खत्म, बायोमेट्रिक और VSK App से होगी निगरानी, नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई

    छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव- 16 जून से ऑनलाइन हाजिरी और लीव जरूरी, लापरवाही पर रुकेगा जून का वेतन

    लोक शिक्षण संचालनालय का कड़ा रुख- ऑफलाइन छुट्टी आवेदन पूरी तरह बैन, बायोमेट्रिक और टैज्ञ ऐप से दर्ज होगी उपस्थिति

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में अब ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। लोक शिक्षण संचालनालय ने अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति (हाजिरी) और ऑनलाइन अवकाश (छुट्टी) आवेदन व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक, आगामी 16 जून 2026 से सभी के लिए डिजिटल उपस्थिति अनिवार्य होगी। नियमों की अनदेखी करने पर जून महीने का वेतन रोक दिया जाएगा।

    स्कूलों के लिए VSK App और कार्यालयों के लिए AEBAS अनिवार्य

    शासन ने विभाग के हर स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए दो अलग-अलग डिजिटल माध्यम तय किए हैं। शासकीय विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र (टैज्ञ) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से दर्ज की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के तहत कार्यालयों में पदस्थ अधिकारियों और बाबुओं को आधार सक्षम बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS)के जरिए अपनी हाजिरी लगानी होगी।

    हाजिरी नहीं तो वेतन नहीं

      यदि 16 जून से किसी भी कर्मचारी की उपस्थिति VSK App या बायोमेट्रिक प्रणाली में दर्ज नहीं पाई जाती है, तो उसकी उपस्थिति को शून्य माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित कर्मचारी का जून माह का वेतन जारी नहीं किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDOs) की होगी।

    ऑफलाइन छुट्टी पर पूर्ण प्रतिबंध, मनमर्जी करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज

      संचालनालय ने साफ किया है कि शिक्षा विभाग के कर्मियों के अवकाश आवेदन और उसकी स्वीकृति के लिए ‘HRMIS पोर्टल’ की व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर अब भी ऑफलाइन (कागज पर) आवेदन लिए जा रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब ऑफलाइन अवकाश आवेदनों को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। अब सभी प्रकार की छुट्टियां केवल ऑनलाइन माध्यम से ही ली और मंजूर की जा सकेंगी। यदि किसी अधिकारी ने ऑफलाइन आवेदन स्वीकार या मंजूर किया, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    अधिकारियों को प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

      लोक शिक्षण संचालनालय ने राज्य के सभी संयुक्त संचालकों (JDs), जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और आहरण व संवितरण अधिकारियों (DDOs) को पत्र जारी कर इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस नई व्यवस्था से विभाग में लेटलतीफी और बिना सूचना गायब रहने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह से लगाम कसने की उम्मीद है।