Category: छत्तीसगढ

  • रेलवे का बड़ा फैसला: शालीमार–एलटीटी–शालीमार एक्सप्रेस में अस्थायी रूप से जोड़ा गया अतिरिक्त एसी-3 कोच, सफर होगा और अधिक आरामदायक

    रेलवे का बड़ा फैसला: शालीमार–एलटीटी–शालीमार एक्सप्रेस में अस्थायी रूप से जोड़ा गया अतिरिक्त एसी-3 कोच, सफर होगा और अधिक आरामदायक

    शालीमार-एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस में 01 अतिरिक्त एसी-3 कोच की सुविधा

    बिलासपुर : रेलवे प्रशासन द्वारा यात्रियों की बेहतर यात्रा सुविधा व अधिकाधिक यात्रियों को कंफ़र्म बर्थ उपलब्ध कराने हेतु दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से गुजरने वाली गाड़ी संख्या 18030/18029 शालीमार-एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस में एक अतिरिक्त एसी-3 कोच की सुविधा अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई जा रही है | यह सुविधा गाड़ी संख्या 18030 शालीमार-एलटीटी एक्सप्रेस में दिनांक 25 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक तथा गाड़ी संख्या 18029 एलटीटी-शालीमार एक्सप्रेस में दिनांक 27 जुलाई से 02 अगस्त 2026 तक उपलब्ध रहेगी | इस सुविधा की उपलब्धता से इस गाड़ी में यात्रा करने वाले अधिकाधिक यात्री लाभान्वित होंगे |

  • मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने पकड़ी रफ्तार: पहली बार भारत में 320 किमी/घंटा स्पीड वाली हाई-स्पीड विद्युतीकरण तकनीक का होगा इस्तेमाल

    मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने पकड़ी रफ्तार: पहली बार भारत में 320 किमी/घंटा स्पीड वाली हाई-स्पीड विद्युतीकरण तकनीक का होगा इस्तेमाल

    मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए विद्युतीकरण कार्य ने पकड़ी रफ्तार

    बिलासपुर : 508 किलोमीटर लंबे मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर सिविल निर्माण एवं ट्रैक बिछाने के कार्यों की तीव्र प्रगति के साथ-साथ विद्युतीकरण कार्य भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है ।

    भारत में अपनी तरह का पहला हाई-स्पीड रेलवे विद्युतीकरण

    MAHSR कॉरिडोर को एक उन्नत 2×25 kV ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम से लैस किया जा रहा है, जो दुनिया भर में हाई-स्पीड रेल के लिए इस्तेमाल होने वाली सबसे आधुनिक रेलवे विद्युतीकरण तकनीकों में से एक है।

    यह तकनीक भारत में पहली बार शुरू की जा रही है और इसे खासतौर पर उन ट्रेनों के लिए स्थिर और निरंतर विद्युत आपूर्ति देने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो 320 कि.मी./घंटा की गति से चलती हैं।

    राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड से बिजली की आपूर्ति विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए ग्रिड सबस्टेशनों तक की जाएगी, जहाँ से इसे कॉरिडोर के साथ रणनीतिक रूप से स्थापित 14 ट्रैक्शन सबस्टेशनों तक पहुँचाया जाएगा। पांच (5) ट्रैक्शन सबस्टेशन महाराष्ट्र (मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर और ठाणे डिपो) में स्थित हैं, जबकि शेष नौ (9) गुजरात (वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, महेमदाबाद, अहमदाबाद और साबरमती डिपो) में स्थित हैं।

    ये सब-स्टेशन रूट के अलग-अलग हिस्सों को बिजली सप्लाई करेंगे। इससे यह पक्का होगा कि जब बुलेट ट्रेन एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाएगी, तो बिजली सप्लाई में बदलाव बिना किसी रुकावट के और यात्रियों को पता चले बिना ही हो जाएगा।

    इस कॉरिडोर में 31 स्विचिंग पोस्ट भी होंगे, ताकि बिजली की सप्लाई बिना रुकावट के बनी रहे और ज़रूरत पड़ने पर फ़ॉल्ट को तुरंत अलग किया जा सके।

    बुलेट ट्रेनों को बिजली देने के अलावा, स्टेशनों, सिग्नलिंग सिस्टम, मेंटेनेंस सुविधाओं और दूसरे ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बिजली सप्लाई करने के लिए 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं।

    ओवरहेड इलेक्ट्रिकल तारों का सटीक रूप से बनाया गया नेटवर्क

    ये ट्रेनें ओवरहेड बिजली के तारों के एक सटीक नेटवर्क पर चलेंगी। यह नेटवर्क लगभग 22,000 स्टील के खंभों और 25,700 से ज़्यादा कैंटिलीवर असेंबली के सहारे टिका होगा और 1,125 ट्रैक किलोमीटर (डिपो सहित) में फैला होगा।

    10.5 से 14.5 मीटर ऊंचे—यानी लगभग तीन से चार मंज़िला इमारत जितनी ऊंचाई वाले—ये मास्ट एक एडवांस्ड कंपाउंड कैटेनरी सिस्टम को सहारा देते हैं; यह एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसे भारत में पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है।

    320 कि.मी./घंटा तक की गति पाने के लिए, इस सिस्टम में हर तार को बहुत सटीक रूप से कैलकुलेट किए गए मैकेनिकल टेंशन के साथ लगाया गया है। इससे ट्रेन का पैंटोग्राफ बिना किसी स्पार्क, रुकावट या पावर में उतार-चढ़ाव के आसानी से और लगातार बिजली ले पाता है।

    ‘मेक इन इंडिया’ को ज़बरदस्त बढ़ावा

    इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक महत्वपूर्ण विद्युत बुनियादी ढांचे का व्यापक स्वदेशीकरण है।

    हाई-स्पीड विद्युतीकरण प्रणाली के कई प्रमुख घटक अब भारत में निर्मित किए जा रहे हैं। इनमें सभी प्रमुख ट्रांसफार्मर, ओएचई मास्ट पर लगे क्रॉस आर्म्स, साथ ही ग्राउंड वायर, प्रोटेक्शन वायर और फीडर वायर शामिल हैं, जो ओवरहेड सिस्टम के शीर्ष विद्युत नेटवर्क का निर्माण करते हैं।

    इसके अलावा, ट्रैक्शन पावर सप्लाई सिस्टम, डिस्ट्रीब्यूशन पावर सिस्टम के अन्य उपकरणों और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल (E&M) कार्यों से जुड़े कई कंपोनेंट्स का भी देश में ही उत्पादन किया जा रहा है।

    यह भारतीय उद्योग को एडवांस्ड हाई-स्पीड रेलवे टेक्नोलॉजी के बड़े पैमाने पर ट्रांसफर को दर्शाता है। देश के भीतर इन सटीक इंजीनियरिंग वाले पुर्जों का निर्माण भारत की औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, खास तरह की नौकरियां पैदा कर रहा है, आयात पर निर्भरता कम कर रहा है और भविष्य के हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।

    इसलिए मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना न सिर्फ़ भारत में वर्ल्ड-क्लास टेक्नोलॉजी ला रही है, बल्कि यह भारत को उस टेक्नोलॉजी को अपने देश में बनाने में भी सक्षम बना रही है।

    भूकंप की प्रारंभिक पहचान: सुरक्षा के लिए डिज़ाइन की गई उन्नत प्रणाली

    14 ट्रैक्शन सबस्टेशनों में से प्रत्येक में प्रारंभिक भूकंप पता लगाने वाले सिस्मोमीटर लगाए जाएंगे, जो भूकंपीय गतिविधि का पता लगाने और कुछ ही सेकंड में सुरक्षा उपाय शुरू करने में सक्षम होंगे, ताकि भूकंप होने पर तुरंत ट्रेनों को रोका जा सके।

    कुल मिलाकर 28 सीस्मोमीटर लगाए जा रहे हैं—इनमें से 22 हाई-स्पीड कॉरिडोर पर ट्रैक्शन सबस्टेशन और स्विचिंग पोस्ट पर, और 6 अतिरिक्त सीस्मोमीटर महाराष्ट्र और गुजरात के भूकंप-संभावित इलाकों में लगाए जा रहे हैं।

    28 सिस्मोमीटर में से 12 महाराष्ट्र में मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, खेड़ा, रत्नागिरी, लातूर और पंगरी के पास लगाए जाएंगे, जबकि 16 गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, महेमदाबाद, अहमदाबाद, अदेसर और पुराने भुज के पास लगाए जाएंगे।

    एक स्मार्ट, लगातार मॉनिटर किया जाने वाला नेटवर्क

    पूरे इलेक्ट्रिकल नेटवर्क की निगरानी एक सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल सेंटर से रियल-टाइम में की जाएगी।

    हाई-स्पीड ट्रेन के सुरक्षित एवं विश्वसनीय परिचालन के लिए ऑटोमेटेड प्रोटेक्शन सिस्टम सेकंड के अंश मात्र में सक्रिय हो जाएँगी।

  • रेलवे का बड़ा फैसला: आंशिक रूप से रद्द साउथ बिहार एक्सप्रेस हुई रिस्टोर, बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा होगी आसान

    रेलवे का बड़ा फैसला: आंशिक रूप से रद्द साउथ बिहार एक्सप्रेस हुई रिस्टोर, बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा होगी आसान

    आंशिक रूप से रद्द की गई साउथ बिहार एक्सप्रेस को किया गया रिस्टोर |

    श्रावणी मेला के अवसर पर छत्तीसगढ़ से बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं, शिवभक्तों की यात्रा होगी और अधिक सुगम |

    दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की विशेष पहल पर पूरे अगस्त (सावन) माह में दुर्ग–आरा–दुर्ग के मध्य चलेगी साउथ बिहार एक्सप्रेस |

    बिलासपुर : श्रावणी मेला के दौरान बाबाधाम जाने एवं लौटने वाले छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की विशेष पहल पर गाड़ी संख्या 13288/13287 आरा–दुर्ग–आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस को पूर्ण मार्ग पर पुनः बहाल (रिस्टोर) करने का निर्णय लिया गया है। इससे सावन माह में यात्रा करने वाले हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा पहले की तरह सुगम एवं सुविधाजनक होगी।

    उल्लेखनीय है कि दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में कंसबहाल–धारुआडीही खंड की अप एवं डाउन लाइन पर ट्रैक अनुरक्षण एवं आधारभूत संरचना संबंधी आवश्यक कार्यों के लिए मेगा ब्लॉक लिया जा रहा है। जो कि ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन के लिए महत्वपूर्ण है। इसके कारण दक्षिण पूर्व रेलवे द्वारा साउथ बिहार एक्सप्रेस को विभिन्न तिथियों में दुर्ग–राउरकेला–दुर्ग के मध्य आंशिक रूप से रद्द किया गया था।

    श्रावणी मेला के महत्व एवं छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा विशेष पहल की गई। इसके फलस्वरूप अब साउथ बिहार एक्सप्रेस पूरे अगस्त (सावन) माह में अपने प्रारंभिक एवं अंतिम स्टेशन अर्थात आरा–दुर्ग–आरा के मध्य नियमित रूप से संचालित होगी।

    विशेष परिचालन व्यवस्था के अनुसार आरा से 06, 13, 20 एवं 27 अगस्त 2026 को रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 13288 आरा–दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस चांडिल–कांद्रा–सीनी परिवर्तित मार्ग से संचालित होगी, जबकि गाड़ी संख्या 13287 दुर्ग–आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस दिनांक 07, 14, 21 एवं 28 अगस्त 2026 को दुर्ग -आरा -दुर्ग के मध्य अपने नियमित मार्ग से संचालित होगी।

    दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की इस यात्री हितैषी पहल से छत्तीसगढ़ सहित दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे क्षेत्र के श्रद्धालुओं, शिवभक्तों एवं अन्य यात्रियों को श्रावणी मेला के दौरान निर्बाध, सुरक्षित एवं सुविधाजनक रेल यात्रा का लाभ मिलेगा।

  • यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे का बड़ा फैसला, पटना–चर्लपल्ली स्पेशल ट्रेन 18 सितंबर तक चलेगी; बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और गोंदिया में रहेगा ठहराव

    यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे का बड़ा फैसला, पटना–चर्लपल्ली स्पेशल ट्रेन 18 सितंबर तक चलेगी; बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और गोंदिया में रहेगा ठहराव

    पटना-चर्लपल्ली-पटना के मध्य चल रही स्पेशल ट्रेन के परिचालन में 14-14 फेरों के लिए विस्तार

    बिलासपुर : ट्रेनों में यात्रियों की होने वाली अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुये उन्हें कंफर्म बर्थ के साथ यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु पटना-चर्लपल्ली-पटना के मध्य स्पेशल ट्रेन का परिचालन 31 जुलाई 2026 तक किया जा रहा है । यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुये इन गाड़ियों के परिचालन में विस्तार 18 सितम्बर 2026 तक 14-14 फेरों के लिए किया जा रहा है ।

     परिचालन में विस्तार होने के बाद अब गाड़ी संख्या 03253 पटना-चर्लपल्ली स्पेशल ट्रेन, पटना से 03 अगस्त से 16 सितम्बर 2026 तक (14 फेरे) प्रत्येक सोमवार एवं बुधवार को चलेगी | इसी प्रकार गाड़ी संख्या 03254 चर्लपल्ली-पटना स्पेशल ट्रेन, चर्लपल्ली से 05 अगस्त से 16 सितम्बर 2026 तक (07 फेरे) प्रत्येक बुधवार को तथा गाड़ी संख्या 03255 चर्लपल्ली-पटना स्पेशल ट्रेन, चर्लपल्ली से 07 अगस्त से 18 सितम्बर 2026 तक (07 फेरे) प्रत्येक शुक्रवार को चलेगी |

     इन गाड़ियों का वाणिज्यिक ठहराव दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग एवं गोंदिया स्टेशनों पर है जहां से यात्रीगण इस गाड़ी में यात्रा सुविधा का लाभ उठा सकते हैं | इस स्पेशल ट्रेन में 01 पावरकार, 01 एसएलआरडी, 02 जनरल, 04 स्लीपर, 07 एसी-III, 07 एसी-III इकॉनमी सहित कुल 22 कोच की सुविधा उपलब्ध है ।

           यात्रियों से आग्रह है कि इन स्पेशल ट्रेनों की समय-सारिणी एवं ठहराव संबंधी विस्तृत जानकारी के लिए कृपया वेबसाइट www.enquiry.indianrail.gov.in पर अवलोकन कर तदनुसार यात्रा प्रारंभ करें।

  • रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर! 24 से 27 जुलाई तक हावड़ा स्टेशन पर कमीशनिंग कार्य, गीतांजलि, आजाद हिंद, दुरंतो समेत कई ट्रेनों के संचालन में बड़ा बदलाव

    रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर! 24 से 27 जुलाई तक हावड़ा स्टेशन पर कमीशनिंग कार्य, गीतांजलि, आजाद हिंद, दुरंतो समेत कई ट्रेनों के संचालन में बड़ा बदलाव

    हावड़ा स्टेशन में प्लेटफार्म कमीशनिंग कार्य के फलस्वरूप कुछ गाड़ियों का परिचालन प्रभावित ।

    बिलासपुर : पूर्व रेलवे हावड़ा मंडल के हावड़ा स्टेशन पर लिंक केबिन के साथ प्लेटफार्म संख्या 24 के कमीशनिंग कार्य को पूर्ण करने हेतु दिनाँक 24 जुलाई 2026 से 27 जुलाई 2026 तक एनआई का कार्य किया जायेगा | इसके फलस्वरूप इस दौरान दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से संबन्धित कुछ यात्री गाड़ियां हावड़ा स्टेशन के स्थान पर सांतरागाछी/शालीमार स्टेशन से प्रारम्भ/समाप्त होगी |

     विवरण इस प्रकार है :-

    👉 दिनाँक 24 व 25 जुलाई 2026 को हावड़ा से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 12834 हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस, शालीमार स्टेशन से प्रारम्भ होगी ।

    👉     दिनाँक 24 व 25 जुलाई 2026 को सीएसएमटी से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 12859 सीएसएमटी-हावड़ा गीतांजली एक्सप्रेस, सांतरागाछी स्टेशन में समाप्त होगी तथा दिनाँक 25 व 26 जुलाई 2026 को हावड़ा से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 12860 हावड़ा-सीएसएमटी गीतांजली एक्सप्रेस सांतरागाछी स्टेशन से प्रारम्भ होगी ।

    👉     दिनाँक 24 जुलाई 2026 को सीएसएमटी से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 12809 सीएसएमटी-हावड़ा मेल एक्सप्रेस, सांतरागाछी स्टेशन में समाप्त होगी तथा दिनाँक 25 व 26 जुलाई 2026 को हावड़ा से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 12810 हावड़ा-सीएसएमटी मेल एक्सप्रेस सांतरागाछी स्टेशन से प्रारम्भ होगी ।

    👉     दिनाँक 25 जुलाई 2026 को साई नगर शिरडी से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 22893 साई नगर शिरडी-हावड़ा एक्सप्रेस, सांतरागाछी स्टेशन में समाप्त होगी ।

    👉     दिनाँक 25 जुलाई 2026 को पुणे से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 12221 पुणे-हावड़ा दुरन्तो एक्सप्रेस, शालीमार स्टेशन में समाप्त होगी ।

    👉 दिनाँक 25 जुलाई 2026 को पुणे से रवाना होने वाली गाड़ी संख्या 12129 पुणे-हावड़ा आजाद हिन्द एक्सप्रेस, सांतरागाछी स्टेशन में समाप्त होगी ।

           यात्रियों से अनुरोध है कि असुविधा से बचने रेलवे द्वारा अधिकृत रेलवे पूछताछ सेवा NTES/139 से गाड़ी की सही स्थिति की जानकारी प्राप्त कर तदनुसार यात्रा प्रारंभ करें।

  • सड़क हादसों पर लगेगी लगाम, छत्तीसगढ़ सरकार और IIT मद्रास के बीच ऐतिहासिक समझौता; 10 संवेदनशील जिलों में डेटा आधारित रोड सेफ्टी मिशन शुरू

    सड़क हादसों पर लगेगी लगाम, छत्तीसगढ़ सरकार और IIT मद्रास के बीच ऐतिहासिक समझौता; 10 संवेदनशील जिलों में डेटा आधारित रोड सेफ्टी मिशन शुरू

    छत्तीसगढ़ में सड़क सुरक्षा के लिए आईआईटी मद्रास के साथ ऐतिहासिक एमओयू

    डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन कार्यक्रम शुरू

    10 संवेदनशील जिलों में होगा पहले चरण का क्रियान्वयन

    रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के परिवहन विभाग एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आज रायपुर में डेटा-आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण तथा सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप थे।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन एवं आईआईटी मद्रास CoERS के बीच कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में वैज्ञानिक एवं डेटा-आधारित दृष्टिकोण से कमी लाना है। कार्यशाला में अधिकारियों को बताया गया कि सड़क दुर्घटना डेटा का विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट एवं दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान की जाएगी हाइपरलोकल सड़क सुरक्षा उपाय और कम लागत वाले अभियांत्रिकी हस्तक्षेप किए जाएंगे। ‘संजय’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से ब्लैक स्पॉट की समय पर पहचान कर साक्ष्य-आधारित निर्णय लिए जाएंगे।

    प्रथम चरण में राज्य के सड़क दुर्घटना की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील 10 जिलों को चिन्हित किया गया है। इन जिलों में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप डेटा-आधारित सड़क सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

    परिवहन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है, जिससे प्रत्येक नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुँच सके। यह पहल सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    परिवहन विभाग के सचिव श्री एस. प्रकाश ने कहा कि संजय प्लेटफॉर्म से दुर्घटना संभावित स्थलों की वैज्ञानिक पहचान कर समयबद्ध हस्तक्षेप संभव होगा। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयास कर दुर्घटनामुक्त छत्तीसगढ़ बनाने का आह्वान किया।

    कार्यशाला में चयनित 10 जिलों के कलेक्टर, एसपी, आरटीओ, डीटीओ, एनआईसीसी के जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक तथा जिला सड़क सुरक्षा समिति के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डेटा-आधारित योजना एवं त्वरित हस्तक्षेप से सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु दर में प्रभावी कमी आएगी।

  • नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 की तत्परता : जीवन और मौत के बीच बनी पुलिस की ढाल ! मौत से मिनटों की जंग ! जहर पी चुकी महिला को डायल-112 टीम ने तत्परता से पहुंचाया अस्पताल, बच गई जान, महिला को मिला नया जीवन.

    नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 की तत्परता : जीवन और मौत के बीच बनी पुलिस की ढाल ! मौत से मिनटों की जंग ! जहर पी चुकी महिला को डायल-112 टीम ने तत्परता से पहुंचाया अस्पताल, बच गई जान, महिला को मिला नया जीवन.

    नारायणपुर पुलिस की नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा ने एक बार फिर अपनी त्वरित एवं संवेदनशील कार्यशैली का परिचय देते हुए जहर सेवन करने वाली एक महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया।

    दिनांक 22 जुलाई 2026 को प्रातः लगभग 07:30 बजे डायल-112 कंट्रोल रूम को सूचना प्राप्त हुई कि एक महिला द्वारा जहर सेवन कर लिया गया है, जिसकी हालत गंभीर थी तथा उसे तत्काल अस्पताल ले जाने की आवश्यकता थी।

    सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 की टीम बिना विलंब के घटना-स्थल के लिए रवाना हुई। दुर्गम एवं कच्चे मार्गों के बावजूद टीम ने तत्परता से मौके पर पहुंचकर महिला को सुरक्षित वाहन में बैठाया तथा तत्काल जिला अस्पताल, नारायणपुर पहुंचा कर भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों द्वारा उसका उपचार प्रारंभ किया गया।

    इस सराहनीय कार्य में आरक्षक ज्ञानदास खांडे, डीएसएफ आरक्षक अर्जुन सलाम तथा चालक नीलेश कश्यप की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई करते हुए महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उपचार उपलब्ध कराया।

  • आदिवासी ज्ञान और संस्कृति से संवरेगा नई पीढ़ी का भविष्य, ‘मूल मंथन’ में तैयार होगा छत्तीसगढ़ मॉडल; किशोर स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के लिए बनेगी नई रणनीति

    आदिवासी ज्ञान और संस्कृति से संवरेगा नई पीढ़ी का भविष्य, ‘मूल मंथन’ में तैयार होगा छत्तीसगढ़ मॉडल; किशोर स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के लिए बनेगी नई रणनीति

    आदिवासी ज्ञान और व्यवहार विज्ञान से संवरेगा किशोरों का भविष्य

    ‘मूल मंथन’ में छत्तीसगढ़ मॉडल पर विमर्श

    संस्कृति और समुदाय आधारित विकास रणनीति तैयार करने दो दिवसीय कार्यशाला

    रायपुर : प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों और किशोर-किशोरियों के स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षित भविष्य के लिए समुदाय, संस्कृति और व्यवहार विज्ञान पर आधारित योजनाएं तैयार की जाएंगी। छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में आज राजधानी रायपुर में ‘मूल मंथन आदिवासी ज्ञान से किशोरावस्था की पुनर्कल्पना’ विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस पर सहमति जताई कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा बनाए रखते हुए सामुदायिक नेतृत्व को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर ही स्थायी परिवर्तन संभव है।

    शुभारंभ सत्र में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि जनजातीय समुदायों के साथ सम्मान, संवेदनशीलता और विश्वास के आधार पर जुड़ना ही किसी भी प्रभावी नीति की सफलता का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि योजनाएं तभी सफल होंगी, जब उनका निर्माण समुदायों की वास्तविक आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर किया जाएगा।

    आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि बस्तर सहित जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और बुनियादी सेवाओं की पहुंच लगातार बढ़ रही है। उन्होंने स्थानीय भाषाओं को व्यवहार परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि विकास का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति को बदलना नहीं, बल्कि उसकी अंतर्निहित शक्ति को पहचानकर उसे समाज के हित में उपयोग करना है।

    उन्होंने प्रदेश के जनजातियों को विकास की मूलधारा में लाने के लिए केंद्र और राज्य शासन द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय इस मूलमंथन में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी रिपोर्ट के आधार पर जनजातियों के विकास के लिए योजनाओं का संचालन तथा क्रियान्वयन की प्रक्रिया अपनायी जाएगी। छत्तीसगढ़ सरकार जनजातियों के विकास के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने सभी लोगों से जनजातियों के संरक्षण-संवर्धन के साथ विकास में सहभागी बनने की अपील की।

    प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 43 प्रकार के जनजातीय है इनकी विभिन्न उप जातियां भी हैं। राज्य की आबादी के 31 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या जनजातीय समुदाय की है। वहीं यदि हम भारतवर्ष की बात करे तो लगभग 10 करोड़ के आबादी जनजातियों की है। छत्तीसगढ़ शासन जनजातियों की समृद्ध विरासत कला, संस्कृति, परंपरा को सहेजते हुए उनके विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

    श्री बोरा बताया कि जनजातीय समाज मुख्य रूप से जल-जंगल, जमीन की बात करते हैं उनकी पूजा अराधना करते हैं, प्रकृति में ही लौकिक-और-अलौकिक शक्ति मानकर अपनी संस्कृति और परंपरा में उसे शामिल भी करते है। हालांकि आधुनिकता के दौर में संस्कृति और परंपराओं को बचाये रखना चुनौती है।

    उन्होंने बताया कि पीएम जनमन योजना, धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान, एकलव्य विद्यालय के माध्यम से जनजातियों के मूलभूत सुविधाओं सहित उन क्षेत्रों का भी विकास किया जा रहा है। वहीं विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, नीट, प्रोफेसनल कोर्सेज सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु सहयोग प्रदान कर विकास की गाथा भी लिखी जा रही है। इसके बाद भी इनके संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर अखरा विकास योजना का शुभारंभ हुआ है। वहीं बैगा, गुनिया, मांझी चालकी और सिरहा को संस्कृति को बचाए रखने में उनके योगदान के लिए प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है।

    राजधानी रायपुर में आयोजित इस परामर्श में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों, विकास भागीदारों तथा युवा नेतृत्व ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के बच्चों और किशोरों के समग्र विकास के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहार परिवर्तन आधारित रणनीति तैयार करना है।

    दिनभर चले तकनीकी सत्रों में एनीमिया, कुपोषण, किशोर स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षित किशोरावस्था, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्थानीय नेतृत्व, सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त संवाद, व्यवहार विज्ञान आधारित हस्तक्षेप और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से ही दीर्घकालिक बदलाव संभव होगा।

    विशेष पैनल चर्चा में जनजातीय युवाओं, सामुदायिक प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब समुदाय स्वयं परिवर्तन की प्रक्रिया का नेतृत्व करता है, तब स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सामाजिक विकास से जुड़े कार्यक्रम अधिक प्रभावी और टिकाऊ साबित होते हैं।

    परामर्श में यह भी रेखांकित किया गया कि जनजातीय समाज की परंपराएं, सामाजिक मान्यताएं और पारंपरिक ज्ञान केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि व्यवहार परिवर्तन के प्रभावी साधन भी हैं। ’’ह्यूमन-सेंटर्ड डिजाइन’’ और ’’बिहेवियरल इनसाइट्स’’ के माध्यम से समुदायों की सोच, जरूरतों और निर्णय प्रक्रिया को समझते हुए ऐसे समाधान विकसित किए जा सकते हैं, जिन्हें लोग सहजता से अपनाएं और जिनका दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे।

    दो दिवसीय परामर्श के दूसरे दिन विषयगत समूहों की विस्तृत चर्चाओं के आधार पर राज्य के लिए व्यवहार परिवर्तन एवं सामुदायिक सहभागिता का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया जाएगा। साथ ही आदिवासी किशोर कल्याण के लिए प्राथमिक व्यवहारों की पहचान, कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों पर आधारित महत्वपूर्ण अनुशंसाएं भी तैयार की जाएंगी।

  • अमलीपदर की ऐतिहासिक रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की पूजा-अर्चना; बाल्टीजोर पुल निर्माण की घोषणा और बिजली बिल समाधान योजना को सितंबर तक बढ़ाने का ऐलान

    अमलीपदर की ऐतिहासिक रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की पूजा-अर्चना; बाल्टीजोर पुल निर्माण की घोषणा और बिजली बिल समाधान योजना को सितंबर तक बढ़ाने का ऐलान

    अमलीपदर की ऐतिहासिक रथयात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

    बाल्टीजोर नाले पर पुल निर्माण की घोषणा, बिजली बिल समाधान योजना की अंतिम तिथि सितंबर तक बढ़ाने की जानकारी दी

    गरियाबंद : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गरियाबंद जिले के अमलीपदर में आयोजित भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा महापर्व में शामिल हुए। उन्होंने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के लिए सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, राजिम विधायक श्री रोहित साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री गौरीशंकर कश्यप, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, पूर्व संसदीय सचिव श्री गोवर्धन मांझी तथा पूर्व विधायक श्री डमरूधर पुजारी भी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने संबोधित करते हुए कहा कि अमलीपदर की पावन रथयात्रा में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जनकल्याण और विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा राज्य में चहुंमुखी विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना की अंतिम तिथि, जो जून माह तक निर्धारित थी, उसे उपभोक्ताओं की सुविधा को देखते हुए तीन माह बढ़ाकर सितंबर तक कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रतिमाह महिलाओं के बैंक खातों में राशि सीधे अंतरित की जा रही है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए चौबीसों घंटे कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि किसी भी समय प्राप्त होने वाली शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है तथा वे स्वयं प्रतिदिन शिकायतों की समीक्षा करते हैं। अब तक 42 हजार से अधिक शिकायतों का सफलतापूर्वक निराकरण किया जा चुका है। उन्होंने क्षेत्रवासियों की मांग पर आवागमन सुविधा को बेहतर बनाने के लिए बाल्टीजोर नाले पर पुल निर्माण की घोषणा भी की।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि अत्यधिक वर्षा के कारण वे रथयात्रा के प्रथम दिवस पर उपस्थित नहीं हो सके थे, किंतु आज भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है और राज्य को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिली है। रथयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपना काफिला रोककर सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया। उनका उत्साहवर्धन किया तथा बच्चों के साथ सेल्फी भी ली। इस अवसर पर कलेक्टर श्री बी.एस. उईके, पुलिस अधीक्षक श्री वेदव्रत सिरमौर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रखर चंद्राकर, अपर कलेक्टर श्री पंकज डाहिरे, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्रीमती हितेश्वरी बाघे सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

  • तकनीक से बदलेगा छत्तीसगढ़ का भविष्य, डिजिटल सुशासन को मिली नई उड़ान; AI मिशन, 1273 नए मोबाइल टावर और सेवा सेतु की 564 सेवाओं से जनता को मिलेगी स्मार्ट सुविधा

    तकनीक से बदलेगा छत्तीसगढ़ का भविष्य, डिजिटल सुशासन को मिली नई उड़ान; AI मिशन, 1273 नए मोबाइल टावर और सेवा सेतु की 564 सेवाओं से जनता को मिलेगी स्मार्ट सुविधा

    इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग डिजिटल नवाचारों के माध्यम से सुशासन सशक्त

    राज्य में डिजिटल सुशासन को नई दिशा प्रदान करने के लिए निरंतर कार्यरत

    रायपुर : इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव श्री अंकित आनंद एवं सीईओ चिप्स श्री मयंक अग्रवाल ने विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर छत्तीसगढ संवाद के आडिटोरियम (अटल नगर, नवा रायपुर) में संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा डिजिटल नवाचारों के माध्यम से सुशासन सशक्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित विकास में छत्तीसगढ़ बन रहा है, अग्रणी राज्य सेवा सेतु, भारतनेट, एआई और डिजिटल कनेक्टिविटी से नागरिकों को अधिक सुगम सेवाएं मिल रही है।

     इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग राज्य में डिजिटल सुशासन को नई दिशा प्रदान करने के लिए निरंतर कार्यरत है । नागरिक-केंद्रित सेवाओं के विस्तार, डिजिटल अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, ए.आई. (AI), साइबर सुरक्षा एवं नवाचार आधारित शासन व्यवस्था के माध्यम से राज्य में तकनीक-संचालित प्रशासन को नई गति मिली है ।

    सेवा सेतु पोर्टल में 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध

     इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने प्रेस को बताया कि सेवा सेतु बना नागरिक सेवाओं का सबसे बड़ा डिजिटल मंच सेवा सेतु राज्य की सबसे बड़ी एकीकृत डिजिटल नागरिक सेवा पहल के रूप में स्थापित हुआ है। 29 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा इसका उन्नत संस्करण प्रारम्भ किया गया। वर्तमान में नागरिकों के लिए इस पोर्टल में 35 विभागों की 564 सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा विगत ढ़ाई वर्षों में 85 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए तथा 78 लाख से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्ड, विवाह पंजीयन, नल कनेक्शन आदि सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता से नागरिकों को घर के निकट ही सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं । सेवा सेतु में ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, क्यूआर कोड आधारित सत्यापन, एसएमएस एवं व्हाट्सएप सूचना तथा ऑनलाइन भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं । इन तकनीकी नवाचारों से नागरिकों को समयबद्ध एवं पारदर्शी सेवाएं सुनिश्चित हो रही हैं ।

    वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों तक मोबाइल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार

     श्री अंकित आनंद ने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही डिजिटल कनेक्टिविटी डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देते हुए राज्य के दूरस्थ, वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों तक मोबाइल कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार किया जा रहा है । भारत सरकार से वित्त पोषित डिजिटल भारत निधि DBN) के अंतर्गत आकांक्षी जिला, एल डब्लू ई फेज़ II तथा 4G सैचुरेशन योजनाओं के माध्यम से दूरस्थ गांवों में मोबाइल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है । जनवरी 2024 से अब तक 1273 मोबाइल टावर ऑन-एयर किए जा चुके हैं । इसी क्रम में भारतनेट फेज-III के माध्यम से ग्राम पंचायतों को उच्च गुणवत्ता वाले ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा । इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भारत सरकार से ₹3,928 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है । इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और फाइबर टू द होम (FTTH) कनेक्टिविटी का विस्तार होगा ।

    50 चयनित स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण

     युवाओं के लिए नई संभावनाएं राज्य में भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य के मूल निवासियों के लिए सी.एम. आईटी फेलोशिप प्रारंभ की गई है । अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), नया रायपुर के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम के अंतर्गत आरक्षण नियमों के तहत 50 चयनित स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण के साथ विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यानुभव प्रदान किया जा रहा है, जिससे राज्य के लिए दक्ष आईटी विशेषज्ञों का एक मजबूत समूह तैयार हो सके ।

    विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म से सुशासन को मिल रही है नई मजबूती

     इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव ने बताया कि तकनीक आधारित शासन को मिल रही नई मजबूती विभाग द्वारा विभिन्न विभागों के लिए विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म सुशासन को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं । खनिज ऑनलाइन 2.0 के माध्यम से जनवरी 2024 से जून 2026 के बीच ₹30,311.80 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ । एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (IWMMS) के माध्यम से औद्योगिक अपशिष्ट के परिवहन एवं निस्तारण की ऑनलाइन निगरानी सुनिश्चित की गई है । वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 में 19 विभागों की 151 सेवाओं का एकीकरण कर निवेशकों को एकीकृत एवं समयबद्ध ऑनलाइन अनुमोदन उपलब्ध कराया जा रहा है । पारस पोर्टल के माध्यम से राज्य की बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है । बस्तर मुन्ने पोर्टल के माध्यम से नक्सल मुक्त जिलों (बस्तर संभाग के 07 जिले एवं अन्य 3 जिले) में पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का प्रभावी लाभ दिलाने हेतु मॉनिटरिंग की जा रही है । वहीं डिजिटल द्वार के माध्यम से सभी विभागों के बीच सुरक्षित एवं मानकीकृत डेटा आदान-प्रदान की व्यवस्था विकसित की जा रही है ।

    ए.आई. आधारित कौशल विकास एवं अनुसंधान को बढ़ावा

     भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभाग ने ए.आई. को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है । छत्तीसगढ़ एआई मिशन (CG-AIM) के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप एवं शासकीय अधिकारियों के लिए ए.आई. आधारित कौशल विकास एवं अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा । राज्य में ए.आई. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ए.आई. डेटा लैब की स्थापना की जा रही है, जिससे नवाचार एवं रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे ।

    चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन

     साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार की संस्था सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के मध्य राशि रूपये 105.3 करोड़ की लागत से राज्य में चार सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना के लिए एमओयू किया गया है, जिसमें केंद्र एवं राज्य शासन दोनों के द्वारा बराबर राशि रुपये व्यय किये जायेंगे । प्रस्तावित सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वन एवं औषधीय उत्पाद आधारित मेडटेक, स्मार्ट सिटी समाधान तथा स्मार्ट कृषि जैसे चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नवाचार और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन दिया जायेगा।

    क्लाउड फर्स्ट नीति से मजबूत होगा डिजिटल इकोसिस्टम

     डिजिटल गवर्नेंस को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार क्लाउड फर्स्ट नीति लागू कर रही है, जिसके माध्यम से सुरक्षित क्लाउड आधारित सेवाओं, डेटा सुरक्षा तथा संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर मिली उल्लेखनीय पहचान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की इन पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापक सराहना मिली है। आधार सेवाएं, जीआईएस परियोजना, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-प्रगति पोर्टल, एकीकृत अपशिष्ट मॉनिटरिंग एवं प्रबंधन प्रणाली, वन क्लिक-सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 तथा कोर्ट केस मॉनिटरिंग सिस्टम को विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

    छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध

     प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद ने कहा कि डिजिटल तकनीक केवल शासन की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी साधन है । हमारी सरकार ए.आई., डिजिटल कनेक्टिविटी और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य

     छत्तीसगढ़ शासन का उद्देश्य तकनीक को केवल सुविधा का माध्यम बनाना नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, समावेशी विकास और नागरिक सशक्तिकरण का आधार बनाना है । इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग इसी संकल्प के साथ डिजिटल नवाचार को जनहित से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल राज्यों में स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है ।