Category: छत्तीसगढ

  • छत्तीसगढ़ के विकास को मिली नई रफ्तार! सेमिकॉन 2.0, यूरिया नीति और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग योजना से निवेश, उद्योग और लाखों रोजगार के खुलेंगे नए द्वार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल का जताया आभार

    छत्तीसगढ़ के विकास को मिली नई रफ्तार! सेमिकॉन 2.0, यूरिया नीति और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग योजना से निवेश, उद्योग और लाखों रोजगार के खुलेंगे नए द्वार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल का जताया आभार

    डबल इंजन सरकार के संकल्प को नई गति: केंद्र के ऐतिहासिक निर्णयों से छत्तीसगढ़ को मिलेगा औद्योगिक और कृषि विकास का नया आधार

    सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 और मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना से निवेश, रोजगार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) तथा मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) को स्वीकृति दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आत्मनिर्भरता, नवाचार और अत्याधुनिक विनिर्माण के नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। केंद्र सरकार के ये तीनों महत्वपूर्ण निर्णय देश की औद्योगिक क्षमता, कृषि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले सिद्ध होंगे। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ₹1,27,500 करोड़ की सेमिकॉन 2.0 योजना देश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी नई औद्योगिक नीति, बेहतर अधोसंरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और कौशल विकास के माध्यम से उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय पहल से राज्य में भी निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित होंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 देश में उर्वरकों की उपलब्धता को सुदृढ़ करेगी तथा किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायक होगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को मिलेगा और कृषि उत्पादन को नई मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारतीय ब्रांडों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा स्थानीय विनिर्माण को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी औद्योगिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी तथा उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए जा रहे ऐसे दूरदर्शी निर्णय विकसित भारत के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी नई गति प्रदान करेंगे। नवाचार, निवेश, तकनीकी आत्मनिर्भरता, आधुनिक विनिर्माण और कृषि सशक्तिकरण पर आधारित यह विकास मॉडल आने वाले वर्षों में देश और प्रदेश दोनों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • लोकतंत्र के मंदिर में गौरव का नया अध्याय! छत्तीसगढ़ विधानसभा को मिला अत्याधुनिक प्रेक्षागृह, उत्कृष्ट जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों का हुआ भव्य सम्मान

    लोकतंत्र के मंदिर में गौरव का नया अध्याय! छत्तीसगढ़ विधानसभा को मिला अत्याधुनिक प्रेक्षागृह, उत्कृष्ट जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों का हुआ भव्य सम्मान

    छत्तीसगढ़ विधानसभा उत्कृष्ट कार्य संस्कृति और स्वस्थ संसदीय परंपरा का जीवंत उदाहरण : राज्यपाल रमेन डेका

    प्रदेश के विकास और जनहित के संकल्पों को साकार करने का सशक्त मंच है विधानसभा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    छत्तीसगढ़ विधानसभा ने स्थापित की उत्कृष्ट संसदीय परंपराएं, लोकतांत्रिक मूल्यों को किया सशक्त – विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह

    राज्यपाल रमेन डेका ने विधानसभा परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का किया लोकार्पण

    रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा ने अपने गठन के बाद से लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय गरिमा और अनुशासन की ऐसी उत्कृष्ट परंपराएं विकसित की हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होती है। यह प्रसन्नता का विषय है कि 1 नवंबर 2025 को यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण किया गया था और आज उसी परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण राज्यपाल श्री रमेन डेका के करकमलों से संपन्न हुआ है। यह विधानसभा की संस्थागत क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित प्रेक्षागृह में आज उत्कृष्टता अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और उत्कृष्ट जनप्रतिनिधित्व को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विधानसभा परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया।

    कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट संसदीय कार्य के लिए बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक तथा अकलतरा विधायक श्री राघवेंद्र कुमार सिंह को उत्कृष्ट विधायक अलंकरण से सम्मानित किया गया। पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए दैनिक पत्रिका के संवाददाता श्री संतराम साहू को उत्कृष्ट संसदीय पत्रकार अलंकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए आईबीसी-24 के श्री सौरभ सिंह परिहार एवं डॉ. राजेश राज को उत्कृष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रिपोर्टर अलंकरण प्रदान किया गया।

    राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा लोकसेवा का वह केन्द्र है जहां जनसेवक संसदीय सदन में लोक कल्याण का पावन अनुष्ठान संपादित करते हैं और इसलिए लोकतंत्र में संसदीय सदन को मंदिर की संज्ञा दी गयी है और इस मंदिर की प्रतिष्ठा सभी सदस्यों के आचरण व्यवहार और विचार पर निर्भर करती है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की गणना देश की श्रेष्ठ विधानसभाओं के उदाहरण के रूप में होती है। इस विधानसभा में पक्ष-प्रतिपक्ष के मध्य जो समन्वय है, सामन्जस्य है, और समादर का भाव है, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय और अनुकरणीय है।

    राज्यपाल श्री डेका ने अपने संबोधन में सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों एवं पत्रकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता के प्रति उत्तरदायी रहते हुए समर्पण भाव से कार्य करें। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि सभी प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश के विकास के लिए कार्य करें, तभी राज्य निरंतर प्रगति करेगा। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से संवाद, स्वच्छता अभियान में सहभागिता तथा समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में किसी विधायक के प्रवेश करते ही वे स्वतः निलंबित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि आत्मानुशासन, संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। ऐसी विशिष्ट संसदीय परंपराओं ने छत्तीसगढ़ विधानसभा को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को जनता से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही, जनहित के मुद्दों और लोकतांत्रिक विमर्श को निष्पक्ष एवं तथ्यपरक ढंग से जनता तक पहुँचाने में संसदीय पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सम्मानित पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाती है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मानित विधायकों की सराहना करते हुए कहा कि श्री धरमलाल कौशिक का सार्वजनिक जीवन अत्यंत समृद्ध और अनुभवपूर्ण रहा है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए संसदीय परंपराओं को समृद्ध किया है। वहीं श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने प्रथम बार विधायक निर्वाचित होने के बावजूद सदन में तथ्यपूर्ण, अध्ययनशील एवं प्रभावी ढंग से अपनी बात रखकर एक सकारात्मक पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि दोनों जनप्रतिनिधियों का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों और उत्कृष्ट संसदीय आचरण के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण के बाद आज नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण विधानसभा के विकास की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की षष्ठम विधानसभा अपने कार्यकाल में उत्कृष्ट संसदीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पक्ष और प्रतिपक्ष राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रदेशहित के विषयों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा करते हैं। यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।

    डॉ. रमन सिंह ने कहा कि उत्कृष्टता अलंकरण केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की सर्वोत्तम परंपराओं को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है। ऐसे सम्मान जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक उत्तरदायी तथा उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।

    समारोह के सांस्कृतिक आयोजन में देश के प्रख्यात भजन गायक श्री अनूप जलोटा ने अपने लोकप्रिय भजनों की मनोहारी प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। उनकी मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे प्रेक्षागृह को आध्यात्मिक वातावरण से अनुप्राणित कर दिया और कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

    कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, नेता प्रतिपक्ष श्री चरणदास महंत, विधायकगण, विधानसभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

  • विशेष लेख : विश्व युवा कौशल विकास दिवस, कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

    विशेष लेख : विश्व युवा कौशल विकास दिवस, कौशल से सशक्त युवा, विकसित छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम

    •   लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक

    रायपुर : “कौशल ही आज के समय की सबसे बड़ी पूंजी है। जिस युवा के पास हुनर है, उसके लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।” इसी सोच को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं उद्योगों की मांग के अनुरूप आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की विशा में लगातार कार्य कर रही है।

    विश्व युवा कौशल विकास दिवस के अवसर पर यह कहना सार्थक होगा कि छत्तीसगढ़ ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

    लगभग पांच लाख युवाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण

    मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के प्रारंभ से अब तक प्रदेश के 4 लाख 94 हजार 330 युवाओं को विभिन्न रोजगारपरक ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 2 लाख 74 हजार 934 युवाओं को रोजगार से जोड़ा जा चुका है। वर्तमान में योजना के अंतर्गत राज्यभर में 375 व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रवाता (199 शासकीय एवं 176 अशासकीय) के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (NSQF) के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण संचालित किए जा रहे हैं।

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 9 हजार 418 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 7 हजार 528 युवाओं को रोजगार प्राप्त हो चुका है, जबकि 6 हजार 679 युवा वर्तमान में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

    बदलते दौर के अनुरूप आधुनिक पाठ्यक्रम

    राज्य सरकार ने युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण में व्यापक बदलाव किए हैं। अब पारंपरिक ट्रेडों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मेंटेनेंस, ड्रोन ऑपरेटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग (AI-ML), साइबर सुरक्षा, सूर्यमित्र (सौर ऊर्जा) जैसे 21 वीं सदी के अत्याधुनिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

    इस वर्ष विशेष रूप से जल वितरण संचालक (Water Distribution Operator) कोर्स प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत 2,770 युवाओं को मल्टी-स्किल प्रशिक्षण देकर सीधे रोजगार से जोड़ने की कार्ययोजना बनाई गई है।

    गुणवत्ता पर विशेष जोर

    छत्तीसगढ़ में कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

    अब प्रत्येक प्रशिक्षक के लिए शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के साथ प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (Training of Trainers-TOT) प्रमाणन अनिवार्य किया गया है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए मूल्यांकन से पहले कम से कम सात दिवस का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (OJT) अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो सके।

    प्रशिक्षण केंद्रों में फेस आधारित ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है। साथ ही सभी प्रशिक्षण केंद्रों में आई.पी. आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से प्रशिक्षण गतिविधियों की सतत निगरानी की जा रही है। इन व्यवस्थाओं से पारदर्शिता बढ़ी है तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता और अनुशासन में सुधार हुआ है।

    प्रशिक्षण के साथ रोजगार की भी गारंटी

    मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रशिक्षण संचालन की अनुमति देने से पहले प्रत्येक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण के बाद ही प्रशिक्षण संचालन की अनुमति प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षण केंद्रों को मिलने वाली राशि का 60 प्रतिशत भुगतान तभी किया जाता है, जब प्रशिक्षित युवाओं का नियोजन सुनिश्चित हो जाता है। यह व्यवस्था प्रशिक्षण संस्थानों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण देने के लिए प्रेरित करती है।

    बस्तर के युवाओं तक पहुंच रहा कौशल विकास

    प्रदेश के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं तक कौशल विकास पहुंचाने के लिए बस्तर संभाग के प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की कार्यवाही की जा रही है। जिला बीजापुर में असिस्टेंट मेसन कोर्स प्रारंभ किया जा चुका है। वहीं बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, कांकेर एवं बीजापुर सहित छह पुनर्वास केंद्रों का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीयन किया गया है तथा अन्य केंद्रों को भी शीघ्र जोड़ा जा रहा है।

    उद्योगों के साथ साझेवारी से बढ़ रही रोजगार क्षमता

    राज्य सरकार ने उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ ट्रैक्टर मैकेनिक प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत अब तक 101 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं तथा 60 युवा प्रशिक्षणरत हैं।

    साइरोनिक्स टेक्नोलॉजी प्रा. लि. के सहयोग से रायपुर के लाईवलीहुड कॉलेज में इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी के पांच जॉब रोल में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है।

    नांदी फाउंडेशन के सहयोग से सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 1,142 युवा प्रशिक्षित हो चुके हैं।

    पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में व लॉन्ड्री बैग के साथ साझेदारी कर लॉन्ड्री सुपरवाइजर एवं अन्य रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रारंभ किए गए हैं।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में श्री सत्य साई हेल्थ एवं एजुकेशन ट्रस्ट के सहयोग से कार्डियक एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित उन्नत कौशल प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए जा रहे हैं।

    लाईवलीहुड कॉलेज बने कौशल विकास के सशक्त केंद्र

    प्रदेश के जिलों में संचालित लाईवलीहुड कॉलेज आज युवाओं के लिए कौशल विकास का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। वर्ष 2013 से अब तक इन कॉलेजों में 68 हजार 552 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इनमें से 28 हजार 820 युवाओं को रोजगार तथा 10 हजार 632 युवाओं को स्वरोजगार प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल 39 हजार 452 युवा आजीविका से जुड़ चुके हैं। वर्तमान में 2 हजार 413 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत वर्ष 2024 से अब तक 13 हजार 188 युवाओं को लाईवलीहुड कॉलेजों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है।

    आधुनिक अधोसंरचना का विस्तार

    राज्य के 26 जिलों में लाईवलीहुड कॉलेज भवन पूर्ण होकर संचालित हैं। नवीन जिलों में भी भवन निर्माण एवं भूमि आबंटन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश में 26 बालिका छात्रावास तथा 20 बालक छात्रावास पूर्ण होकर संचालित हैं। शेष छात्रावासों का निर्माण एवं भूमि आबंटन कार्य प्रगति पर है।

    नवा रायपुर में बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

    छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।

    नवा रायपुर में लाईवलीहुड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी, जहां अत्याधुनिक मशीनों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, विशेष कार्यशालाओं तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप इंजीनियरिंग एवं गैर-इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए भूमि लीज अनुबंध हेतु 2 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

    कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की नई विशा

    विश्व युवा कौशल विकास दिवस पर छत्तीसगढ़ का अनुभव यह दर्शाता है कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और रोजगारयुक्त बनाने का सशक्त अभियान है। नई तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योगों के साथ साझेदारी, रोजगार सुनिश्चित करने की व्यवस्था तथा आधुनिक अधोसंरचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ वेश में कौशल विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। आने वाले वर्षों में यह पहल न केवल लाखों युवाओं के जीवन में परिवर्तन लाएगी, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान

    प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 19 कौशल ट्रेडों में आयोजित जिला एवं राज्य स्तरीय इंडिया स्किल प्रतियोगिता में 3,327 युवाओं ने भाग लिया, जिनमें से 381 प्रतिभागी राज्य स्तर तक पहुंचे। ईस्ट जोन क्षेत्रीय प्रतियोगिता, भुवनेश्वर में छत्तीसगढ़ के 38 प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 01 स्वर्ण, 02 रजत, 05 कांस्य एवं 04 मेडल ऑफ एक्सीलेंस सहित कुल 12 पदक अर्जित किए।

    वहीं राष्ट्रीय स्तर की इंडिया स्किल प्रतियोगिता में राज्य के 03 प्रतिभागियों ने प्रतिनिधित्व किया, जिनमें से 01 प्रतिभागी ने मेडल ऑफ एक्सीलेंस प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं सफल आयोजन के लिए भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को प्रशस्ति पत्र से भी सम्मानित किया गया।

  • छत्तीसगढ़ का ‘शिमला’ बना किसानों की समृद्धि का नया मॉडल! मैनपाट की नाशपाती से लाखों की आय, एग्री-टूरिज्म ने खोले कमाई के नए द्वार

    छत्तीसगढ़ का ‘शिमला’ बना किसानों की समृद्धि का नया मॉडल! मैनपाट की नाशपाती से लाखों की आय, एग्री-टूरिज्म ने खोले कमाई के नए द्वार

    मैनपाट में नाशपातीकी मिठास

    एग्री-टूरिज्म का नया गढ़ बना छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट

    नाशपाती से चमकी किसान मनोज यादव की किस्मत

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के शिमला के रूप में मशहूर पर्यटन स्थल मैनपाट अब एग्री-टूरिज्म (कृषि पर्यटन) के एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहाँ की अनुकूल जलवायु और राज्य शासन के उद्यानिकी विभाग की कल्याणकारी नीतियां स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। पारंपरिक खेती को छोड़कर यहाँ के प्रगतिशील किसान अब फलोद्यान की ओर रुख कर सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक सफलता की कहानी मैनपाट के ग्राम बारिमा निवासी कृषक मनोज यादव की है, जिन्होंने ग्राम कुदारीडीह (मेहता पॉइंट के पास) में नाशपाती का सफल बागान तैयार कर शानदार मुनाफा कमाया है।

    सरकारी मदद से बंजर जमीन पर खड़े किए 170 फलदार वृक्ष

     कृषक मनोज यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017-18 में मैनपाट के कमलेश्वरपुर स्थित शासकीय उद्यान रोपणी से नाशपाती के पौधे हासिल किए थे। उन्होंने अपनी 0.500 हेक्टेयर गोड़ा जमीन (पठारी और खाली पड़ी भूमि) पर लगभग 200 पौधे रोपे थे। कुछ पौधे प्राकृतिक कारणों से नष्ट जरूर हुए, लेकिन वर्तमान में उनके पास 170 पूरी तरह से फलदार पेड़ मौजूद हैं। मनोज ने अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग को देते हुए बताया कि कमलेश्वरपुर उद्यान विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय-समय पर बागान का निरीक्षण करते हैं और खाद की मात्रा से लेकर पौधों के रखरखाव के लिए निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

    मौसम की मार के बाद भी कमाया 1.5 लाख का शुद्ध मुनाफा

     इस वर्ष ओलावृष्टि और बाजार में बिक्री में हुई थोड़ी देरी के बावजूद, मनोज यादव के बागान से लगभग 2.5 पिकअप (करीब 260 कैरेट) नाशपाती का थोक उत्पादन हुआ। प्रति पिकअप 100 से 110 कैरेट की औसत से 500 रुपये प्रति कैरेट की दर पर थोक बाजार में फसल बेची गई, जिससे लगभग 1,30,000 रुपये की आय हुई। इसके अलावा खुले बाजार और पर्यटकों को सीधे फल बेचकर 25 से 30 हजार रुपये कमाए गए। इस तरह इस सीजन में उन्हें कुल 1.5 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। मनोज यादव ने बताया कि पिछले वर्ष अनुकूल मौसम के दौरान इसी बागान से उन्हें 2.5 से 3 लाख रुपये की बंपर कमाई हुई थी।

    एग्री-टूरिज्म का हॉटस्पॉट बना कुदारीडीह

     यह बागान अब केवल फल उत्पादन का जरिया नहीं रहा, बल्कि पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण केंद्र बन चुका है। लालमाटी के नाम से मशहूर इस खूबसूरत स्थान से रायगढ़ क्षेत्र का बेहद मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यहाँ रोजाना करीब 100 से 250 पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती का लुत्फ उठाने पहुँचते हैं। पर्यटक यहाँ आकर न केवल 50 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से ताजी नाशपाती खरीदते हैं, बल्कि खुद अपने हाथों से पेड़ों से फल तोड़ने का रोमांचक अनुभव भी लेते हैं। पर्यटकों के इस सीधे जुड़ाव से किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे अपनी उपज बेचने का एक बेहतरीन मंच मिल रहा है।

    युवाओं और अन्य किसानों के लिए बने मिसाल

     प्रगतिशील किसान मनोज यादव ने क्षेत्र के युवाओं और किसानों से अपील की है कि वे अपनी खाली पड़ी अनुपयोगी भूमि पर पारंपरिक खेती के साथ-साथ नाशपाती, लीची और अन्य फलदार पौधों की बागवानी अपनाएं। इससे कम रकबे में भी अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है और पर्यटन क्षेत्रों के पास होने के कारण सीधे उपभोक्ताओं को फसल बेचकर अतिरिक्त लाभ भी लिया जा सकता है।

     जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग द्वारा वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को फलोद्यान विकास, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास लगातार जारी है। मनोज यादव जैसे किसान इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से बागवानी को एक बेहद मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।

  • छत्तीसगढ़ के लाखों शासकीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! सामान्य भविष्य निधि (GPF) की 2025-26 वार्षिक लेखा पर्ची हुई जारी, अब वेबसाइट और DigiLocker से तुरंत करें डाउनलोड

    छत्तीसगढ़ के लाखों शासकीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! सामान्य भविष्य निधि (GPF) की 2025-26 वार्षिक लेखा पर्ची हुई जारी, अब वेबसाइट और DigiLocker से तुरंत करें डाउनलोड

    अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सामान्य भविष्य निधि लेखा 2025-26 प्रधान महालेखाकार की वेबसाइट पर उपलब्ध

    वार्षिक लेखा विवरण डीजीलाकर्स (Digilocker) प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध

    रायपुर : उप महालेखाकार पेंशन एवं निधि रायपुर ने सामान्य भविष्य निधि के वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लेखा जारी कर दी है। उन्होंने बताया कि सभी अभिदातागण अपनी भविष्य निधि की वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक लेखा पर्ची राज्य शासन से प्राप्त आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।

     उप महालेखाकार पेंशन एवं निधि रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों व अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के सामान्य भविष्य निधि वित्तीय वर्ष 2025-26 की वार्षिक लेखा पर्ची कार्यालय प्रधान महालेखाकार छत्तीसगढ़ रायपुर की विभागीय वेबसाइट http://cag.gov.in/ae/chhattisgarh/en एवं राज्य शासन की वेबसाइट e-Kosh www.treasury.cg.nic.in पर अपलोड कर दिया गया है, इसे डाउनलोड कर अवलोकन किया जा सकता है। इसके अलावा वार्षिक लेखा विवरण 2025-26 डीजीलाकर्स (Digilocker) प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध कराया गया है।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के संकल्प को मिली नई उड़ान, प्रगतिशील किसान भानुप्रताप ने जुगाड़ तकनीक से तैयार की सीड ड्रिल

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कृषि नवाचार को बढ़ावा देने के संकल्प को मिली नई उड़ान, प्रगतिशील किसान भानुप्रताप ने जुगाड़ तकनीक से तैयार की सीड ड्रिल

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना से मिली गुणवत्ता युक्त बीज की सौगात

    कृषि विभाग के सहयोग से कम लागत में आधुनिक बुवाई का सफल मॉडल बना किसानों के लिए प्रेरणा

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार खेती को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी का सकारात्मक परिणाम गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम दरमोहली में देखने को मिला, जहां प्रगतिशील किसान एवं स्थानीय लोक कलाकार श्री भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला ने अपनी सूझबूझ और नवाचार से पारंपरिक कृषि उपकरण को जुगाड़ तकनीक के माध्यम से सीड ड्रिल में परिवर्तित कर मूंगफली की वैज्ञानिक बुवाई का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ-ऑयल) योजना के अंतर्गत कृषि विभाग से प्राप्त 80 किलोग्राम गुणवत्तायुक्त मूंगफली बीज का उपयोग करते हुए श्री भानुप्रताप लगभग दो एकड़ क्षेत्र में बुवाई कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय संसाधनों और अपनी तकनीकी समझ का उपयोग करते हुए कम लागत में सीड ड्रिल तैयार की, जिससे कम समय में समान दूरी पर व्यवस्थित बुवाई संभव हो सकी। इस नवाचार से श्रम की बचत होने के साथ-साथ बीज का संतुलित उपयोग और बेहतर अंकुरण की संभावना भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशा के अनुरूप कृषि विभाग किसानों को केवल योजनाओं का लाभ ही नहीं पहुंचा रहा, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों और स्थानीय नवाचारों को अपनाने के लिए भी प्रेरित कर रहा है। कृषि विभाग का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना है। ग्राम दरमोहली के किसान का यह प्रयास इस सोच को साकार करने वाला प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। उप संचालक कृषि श्री सत्यजीत कंवर ने बताया कि स्थानीय स्तर पर विकसित ऐसे नवाचार खेती को अधिक किफायती और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ ऐसे उपयोगी स्थानीय प्रयोगों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि कम संसाधनों में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन योजना के अंतर्गत जिले में किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन तथा आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे तिलहनी फसलों का रकबा और उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।

    जिला प्रशासन और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से संचालित योजनाएं अब किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही हैं। प्रगतिशील किसान श्री भानुप्रताप उर्फ भानु रंगीला का यह नवाचार इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ, किसानों की रचनात्मक सोच और स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग मिलकर कृषि को नई दिशा दे सकते हैं। यह मॉडल अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है और आत्मनिर्भर एवं समृद्ध कृषि की ओर बढ़ते छत्तीसगढ़ की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करता है।

  • विशेष लेख : अकादमिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कर्मचारी हितों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़

    विशेष लेख : अकादमिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कर्मचारी हितों के साथ आगे बढ़ता छत्तीसगढ़

    362 सहायक प्राध्यापक बने प्रोफेसर, 152 प्रोफ़ेसर हुए प्राचार्य पदोन्नति, शैक्षणिक नेतृत्व को मिली नई मजबूती

    595 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, 700 नए पदों की मंजूरी, युवाओं के लिए सरकारी सेवा के बड़े अवसर

    72 सहायक प्राध्यापकों को 37.23 करोड़ रुपये एरियर्स, 935 की परिवीक्षा अवधि समाप्त

    सेवा सुरक्षा को मिला मजबूत आधार, 34 अनुकंपा नियुक्तियां, 118 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान, कर्मचारी कल्याण को मिली संवेदनशील दिशा

     विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

    रायपुर : किसी भी राज्य की प्रगति का वास्तविक पैमाना उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है और इसकी गुणवत्ता केंद्र में खड़े शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारियों की सक्षमता, सुरक्षा और सम्मान पर निर्भर करती है। जब उच्च शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत मानव संसाधन को पदोन्नति, सेवा सुरक्षा, वित्तीय सम्मान और शोध के अवसर एक साथ मिलते हैं, तब शिक्षा राज्य के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की सबसे मजबूत धुरी बन जाती है। छत्तीसगढ़ का उच्च शिक्षा विभाग इन दिनों इसी व्यापक और समग्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।

     राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग को केवल भवनों, पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं तक सीमित न रखकर उसे अकादमिक गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता, रोजगार सृजन, शोध संवर्धन और कर्मचारी कल्याण से जोड़ा है। हाल के महीनों में लिए गए निर्णय इस बात के प्रमाण हैं कि सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों को भविष्य के ज्ञान-केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पदोन्नतियों की लंबित फाइलों को गति देना, नई भर्तियां, वेतनमान व एरियर्स का निराकरण, तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति, शोध को प्रोत्साहन और अनुकंपा नियुक्ति जैसे कदमों से विभाग ने हर मोर्चे पर ठोस और संवेदनशील पहल की है।

    पदोन्नति से संस्थागत नेतृत्व को नई शक्ति

     उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता का एक बड़ा आधार उनका नेतृत्व होता है। जब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में योग्य और अनुभवी शिक्षकों को समय पर पदोन्नति मिलती है, तो उसका सीधा असर संस्थान की कार्यसंस्कृति और प्रशासनिक क्षमता पर दिखाई देता है। लंबित पदोन्नति प्रक्रियाओं को गति देकर राज्य सरकार ने एक निर्णायक पहल की है।

     वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 362 सहायक प्राध्यापकों को पदोन्नत कर प्राध्यापक (प्रोफेसर) बनाया गया है। इसके साथ ही 152 पदोन्नत प्राध्यापकों को स्नातक प्राचार्य तथा 07 स्नातक प्राचार्यों को स्नातकोत्तर (PG) प्राचार्य के पद पर पदोंन्नत किया गया है। इन निर्णयों से महाविद्यालयों की कमान अनुभवी हाथों में पहुँची है, जिससे संस्थागत निर्णय क्षमता, शैक्षणिक अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत होगी।

    सीधी भर्ती से युवाओं के लिए खुले अवसरों के नए द्वार

     गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था के लिए संस्थानों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक और विशेषज्ञ अनिवार्य हैं। राज्य सरकार ने रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश के बड़े अवसर निर्मित किए हैं। शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापकों के 595 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुकी है।

     इसके अतिरिक्त, विभागीय संरचना को सशक्त बनाने के लिए कुल 700 पदों पर सीधी भर्ती को मंजूरी दी गई है। इनमें 625 पद सहायक प्राध्यापक, 50 पद ग्रंथपाल और 25 पद क्रीड़ाधिकारी के शामिल हैं। सहायक प्राध्यापकों की भर्ती से विषयवार अध्यापन की गुणवत्ता बेहतर होगी, ग्रंथपालों से पुस्तकालय अकादमिक संसाधनों के प्रभावी केंद्र बनेंगे और क्रीड़ाधिकारियों से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होगा। यह अभियान प्रदेश के योग्य युवाओं को सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराने का सशक्त माध्यम बनने जा रहा है।

    CG-SET: युवा अकादमिक प्रतिभाओं के लिए बड़ी उम्मीद

     राज्य में सहायक प्राध्यापक बनने की आकांक्षा रखने वाले हजारों युवाओं के लिए राज्य पात्रता परीक्षा (CG-SET) एक महत्वपूर्ण अवसर है। विभाग द्वारा CG-SET का आयोजन 04 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है l सरकार नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को अकादमिक करियर में आगे बढ़ाने के लिए गंभीर है। यह परीक्षा छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक परिदृश्य और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में अपनी जगह बनाने का अवसर देती है।

    प्रयोगशालाओं और तकनीकी तंत्र को मिला नया आधार

     विज्ञान, प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक विषयों के लिए प्रयोगशालाएं, उपकरण और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ उतने ही आवश्यक हैं जितने कक्षा और कक्ष। वर्ष 2025-26 के दौरान प्रयोगशाला तकनीशियन के 260 रिक्त पदों के विरुद्ध 247 अभ्यर्थियों तथा प्रयोगशाला परिचारक के 429 रिक्त पदों के विरुद्ध 399 अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी किए जा चुके हैं। तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता से प्रयोगशालाओं का नियमित संचालन और विद्यार्थियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।

    वेतनमान, एरियर्स और सेवा सुरक्षा: कर्मचारियों का बढ़ा भरोसा

     विभागीय मजबूती का सबसे बड़ा आधार कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, न्यायपूर्ण वेतन संरचना और लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान है। आपातकालीन रूप से अचयनित रहे 72 सहायक प्राध्यापकों को उनकी प्रथम नियुक्ति तिथि से वरिष्ठ, प्रवर श्रेणी और पे-बैंड-4 की स्वीकृति देकर 37.23 करोड़ रुपये की एरियर्स राशि उनके खातों में अंतरित की गई है, जो संस्थागत न्याय का प्रतीक है।

     इसी तरह, वर्ष 2021 और 2022 में नियुक्त लगभग 1168 सहायक प्राध्यापकों में से रिकॉर्ड 935 नवनियुक्त प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं। परिवीक्षा समाप्त होना कर्मचारियों के लिए स्थायित्व और पेशेवर सुरक्षा का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिससे विभाग के भीतर प्रतिबद्ध शैक्षणिक कार्यबल तैयार हुआ है।

    शोध, अनुसंधान और गैर-अकादमिक स्टाफ का कल्याण

     उच्च शिक्षा व्यवस्था में शोध और नवाचार की भूमिका को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा 577 सहायक प्राध्यापकों को पीएचडी करने की अनुमति देना एक दूरदर्शी निर्णय है। अधिक शिक्षक जब शोध से जुड़ेंगे, तो कक्षा में अद्यतन ज्ञान पहुंचेगा और महाविद्यालयों में बौद्धिक विमर्श का स्तर ऊपर उठेगा।

     शिक्षकों के साथ-साथ तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी व्यवस्था की रीढ़ हैं। दिसंबर 2023 से अब तक दिवंगत कर्मचारियों के 34 आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है, जो संकटग्रस्त परिवारों को जीवन संभालने का संबल देती है। इसके अतिरिक्त, 324 कर्मचारियों को उच्चतर समयमान वेतनमान प्रदान किया गया है और वर्ष 2024-25 की पदोन्नति संबंधी समस्त कार्यवाहियां समय सीमा में पूर्ण कर ली गई हैं।

    उच्च शिक्षा में समग्र सुधार का उभरता मॉडल

     उच्च शिक्षा विभाग के ये फैसले मिलकर एक व्यापक परिवर्तनकारी मॉडल की रचना करते हैं, जहां नेतृत्व सुदृढ़ीकरण, नई भर्ती, सेवा सुरक्षा, कर्मचारी कल्याण, तकनीकी संसाधन और शोध संवर्धन एक साथ आगे बढ़ते हैं। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन आज दिखाई दे रहे हैं, वे केवल विभागीय उपलब्धियों की सूची नहीं, बल्कि एक ऐसी नीति-दृष्टि हैं जिसमें शिक्षा को राज्य के भविष्य निर्माण का केंद्रीय माध्यम माना गया है। आने वाले समय में ये प्रयास छत्तीसगढ़ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को ज्ञान, शोध, नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन के सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे।

  • बैंकॉक में गूंजा छत्तीसगढ़ का नाम! HNLU ने 20 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया ऐतिहासिक MoU, अब दुनिया के साथ होगा रिसर्च और इनोवेशन

    बैंकॉक में गूंजा छत्तीसगढ़ का नाम! HNLU ने 20 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया ऐतिहासिक MoU, अब दुनिया के साथ होगा रिसर्च और इनोवेशन

    एचएनएलयू रायपुर ने बैंकॉक में रचा इतिहास : वैश्विक नवाचार और अनुसंधान के लिए 20 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया महा-समझौता

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान, एचएनएलयू ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

     इस ऐतिहासिक समझौते पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 20 अग्रणी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम उच्च शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    बैंकॉक के आईकॉनसियाम में हुआ वैश्विक समागम

     यह समझौता 9-10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित “AUAP – WURI इम्पैक्ट समिट 2026” के दौरान हुआ। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार-नीति, तंत्र और प्रभाव था, जिसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, नवाचार विशेषज्ञों और जाने-माने शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

    कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया ‘R-HaS’ मॉडल

     कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया ‘R-HaS’ मॉडल शिखर सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने विश्वविद्यालय के अभिनव रिसर्च हब एंड स्पोक (R-HaS) मॉडल पर आधारित एक केस स्टडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने एचएनएलयू के अंतर्विषयी अनुसंधान तंत्र, बाह्य वित्तपोषित (एक्सटर्नली फंडेड) शोध परियोजनाओं तथा समाज के प्रति जवाबदेह एवं प्रभावकारी अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया, जिसकी उपस्थित विशेषज्ञों ने काफी सराहना की।

     इस रणनीतिक कामयाबी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रसारित करने की दिशा में प्रभावशाली प्रगति कर रहा है। यह बहुपक्षीय समझौता हमारे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सम्मेलन के दौरान AUAP के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय (फैकल्टी) व छात्र विनिमय (एक्सचेंज) कार्यक्रमों पर भी बेहद सार्थक चर्चा हुई है।

    समझौते के तहत इन क्षेत्रों में होगा साझा काम

     बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी संस्थान भविष्य में मिलकर काम करेंगे। इसके तहत आपसी सहयोग से वैश्विक महत्व की नवाचार व शोध परियोजनाओं का संचालन, संकाय (फैकल्टी), शोधार्थियों और छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों, कार्यशालाओं और केस स्टडीज का विकास करना शामिल है।

    इन संगठनों के सहयोग से हुआ शिखर सम्मेलन

     AUAP (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक): यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक बेहद प्रतिष्ठित और पुराना विश्वविद्यालय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर लाकर शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना है।

     WURI (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सिर्फ पारंपरिक किताबी या शोध मानकों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे नवाचारों के आधार पर करती है। एचएनएलयू अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण इस रैंकिंग में लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

     हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। अपने विशिष्ट ‘R-HaS’ मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपेरिमेंटल लर्निंग) और लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के दम पर यह संस्थान विधि शिक्षा के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

  • साइबर ठगों के खिलाफ सूरजपुर पुलिस का महाअभियान : एक दिन में 171 स्थानों पर साइबर सुरक्षा का महासंकल्प, 40 हजार लोगों ने ली शपथ, डिजिटल अपराधियों को कड़ा संदेश, हजारों लोगों ने ठगी से बचने का लिया प्रण.

    साइबर ठगों के खिलाफ सूरजपुर पुलिस का महाअभियान : एक दिन में 171 स्थानों पर साइबर सुरक्षा का महासंकल्प, 40 हजार लोगों ने ली शपथ, डिजिटल अपराधियों को कड़ा संदेश, हजारों लोगों ने ठगी से बचने का लिया प्रण.

    डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों से आमजन को सुरक्षित रखने तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला पुलिस सूरजपुर द्वारा संचालित साइबर कॉप जनजागरूकता महाअभियान के अंतर्गत मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को जिलेभर में व्यापक स्तर पर साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। डीआईजी व एसएसपी सूरजपुर के निर्देशन में संचालित इस अभियान के दौरान जिले के थाना-चौकी की पुलिस द्वारा 171 स्थानों पर 40 हजार से अधिक नागरिकों, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, शासकीय कर्मचारियों एवं विभिन्न वर्गों के लोगों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई।

    डीआईजी व एसएसपी सूरजपुर श्री प्रशांत कुमार ठाकुर स्वयं इस अभियान की मॉनिटरिंग करते रहे और शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सूरजपुर जाकर साइबर कॉप अभियान के तहत साइबर सुरक्षा की शपथ स्कूली छात्राओं व शिक्षकों को दिलाई। उन्होंने शपथ दिलाई कि साइबर प्रहरी के रूप में साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करेंगे, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करेंगे, ओटीपी, बैंक खाते, एटीएम, यूपीआई पिन अथवा अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करेंगे, सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करेंगे तथा साइबर अपराध से संबंधित किसी भी घटना की जानकारी तत्काल पुलिस एवं साइबर हेल्पलाइन 1930 पर देंगे। साथ ही वे अपने परिवार, मित्रों एवं समाज के अन्य लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगे।

    मंगलवार को जिले के सभी थाना-चौकी की पुलिस टीमों के द्वारा विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों, शासकीय कार्यालयों, ग्राम पंचायतों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर नागरिकों, स्कूली छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने साइबर ठगी के नए तरीकों, डिजिटल फ्रॉड से बचाव, सुरक्षित ऑनलाइन लेन-देन, सोशल मीडिया सुरक्षा तथा साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।

    इस अवसर पर डीआईजी/एसएसपी ने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश अपराध डिजिटल माध्यमों से किए जा रहे हैं। ऐसे में तकनीकी जानकारी और जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है। यदि प्रत्येक नागरिक सतर्क रहकर साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करे और दूसरों को भी जागरूक करे, तो साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि साइबर कॉप अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को साइबर सुरक्षा का जिम्मेदार प्रहरी बनाना है।

    सूरजपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश, लिंक अथवा ऑनलाइन लेन-देन के झांसे में न आएं। किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। इस अभियान में निरीक्षक जावेद मियादाद की भी सराहनीय भूमिका रही।

    जिले में साइबर कॉप, साइबर सुरक्षा जनजागरूकता महाअभियान के अंतर्गत सर्वाधिक संख्या में नागरिकों एवं छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाने वाले थाना एवं चौकी प्रभारियों को पुरस्कृत किया गया। डीआईजी/एससएसपी सूरजपुर ने अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्रथम स्थान प्राप्त करने पर चौकी बसदेई, द्वितीय स्थान पर थाना झिलमिली तथा तृतीय स्थान पर चौकी लटोरी के प्रभारियों को पुरस्कृत कर उनके कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम में जनजागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है तथा इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों का सम्मान अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी प्रेरणादायक है।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनहितकारी पहल का असर : सीएम हेल्पलाइन 1076 ने 24 घंटे में दिलाया न्याय, सेवक राम के परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनहितकारी पहल का असर : सीएम हेल्पलाइन 1076 ने 24 घंटे में दिलाया न्याय, सेवक राम के परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान

    लंबे समय से लंबित जाति प्रमाण पत्र की समस्या का हुआ त्वरित समाधान

     मुख्यमंत्री की सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की प्रतिबद्धता हुई साकार

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्थापित पारदर्शी, जवाबदेह और जनकेंद्रित प्रशासनिक व्यवस्था का सकारात्मक प्रभाव प्रदेशभर में दिखाई दे रहा है। आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संचालित सीएम हेल्पलाइन 1076 आज लोगों के लिए भरोसे का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा विकासखंड के ग्राम पतगवा के निवासी श्री सेवक राम की सफलता की कहानी इसी सुशासन का प्रेरणादायक उदाहरण है। श्री सेवक राम  अपने बच्चों के जाति एवं आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लंबे समय से संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे थे। आवेदन करने के बावजूद विभिन्न कारणों से उनके बच्चों के प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे थे। इससे बच्चों को शैक्षणिक सुविधाओं, शासकीय योजनाओं तथा अन्य आवश्यक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लगातार प्रयासों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से परिवार चिंतित था।

    आखिरकार श्री सेवक राम ने अपनी समस्या सीएम हेल्पलाइन 1076 में दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही संबंधित विभाग ने गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ तत्काल कार्रवाई की। परिणामस्वरूप मात्र 24 घंटे के भीतर उनके बच्चों का जाति प्रमाण पत्र स्वीकृत कर जारी कर दिया गया। वर्षों से लंबित समस्या का इतने कम समय में समाधान होने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।

    अपनी समस्या के त्वरित निराकरण से भावुक हुए श्री सेवक राम  ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतना शीघ्र समाधान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले कई प्रयासों के बावजूद काम नहीं हो पाया था, लेकिन सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने के बाद प्रशासन ने गंभीरता से कार्रवाई करते हुए समयबद्ध राहत प्रदान की।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सीएम हेल्पलाइन 1076 केवल शिकायत दर्ज करने का मंच नहीं, बल्कि आम लोगों की उम्मीदों को पूरा करने वाला एक प्रभावी सुशासन तंत्र बन चुका है, जो प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को लगातार मजबूत कर रहा है।