Category: छत्तीसगढ

  • ग्रामीण बच्चों के लिए तकनीक की नई उड़ान! मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने AI, रोबोटिक्स और ड्रोन सिखाने वाली मोबाइल साइंस लैब को दिखाई हरी झंडी

    ग्रामीण बच्चों के लिए तकनीक की नई उड़ान! मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने AI, रोबोटिक्स और ड्रोन सिखाने वाली मोबाइल साइंस लैब को दिखाई हरी झंडी

    ग्रामीण विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ को दिखाई हरी झंडी

    ग्रामीण विद्यार्थियों तक पहुँचेगी एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की शिक्षा

    एक वर्ष में 5,000 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण: विज्ञान और नवाचार को मिलेगी नई उड़ान

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज विधानसभा परिसर से ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों तक पहुँचकर विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ड्रोन, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), एयरोमॉडलिंग तथा ऑगमेंटेड एवं वर्चुअल रियलिटी (AR/VR) जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए आवश्यक है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी आधुनिक विज्ञान और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ केवल एक मोबाइल लैब नहीं, बल्कि ग्रामीण विद्यार्थियों के सपनों को नई उड़ान देने वाली अभिनव पहल है। यह बच्चों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार, आत्मविश्वास और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज पूरी दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ड्रोन, डेटा साइंस और डिजिटल तकनीकों की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में यह आवश्यक है कि ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों को भी इन उभरती हुई तकनीकों का ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि अवसरों में किसी प्रकार की असमानता न रहे और गाँव का बच्चा भी भविष्य की तकनीकों में उतना ही सक्षम बने जितना किसी महानगर का विद्यार्थी होता है।

    उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य भी विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, प्रयोगधर्मिता और रचनात्मक सोच का विकास करना है। यह मोबाइल लैब उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जो बच्चों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं सिखाएगी, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के निर्माण और नवाचार की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है तथा बच्चों को समय के साथ नई तकनीकों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘भावना दीदी की साइंस पाठशाला’ जैसी अभिनव पहल ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी वही अवसर उपलब्ध कराएगी, जो बड़े शहरों के विद्यार्थियों को मिलते हैं। इससे बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ेगी, नवाचार की सोच विकसित होगी और वे आधुनिक तकनीकों को समझने के साथ उनका व्यावहारिक उपयोग भी सीख सकेंगे।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मोबाइल लैब के माध्यम से विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि स्वयं ड्रोन उड़ाने, रोबोट संचालित करने, 3डी मॉडल तैयार करने और आधुनिक उपकरणों पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण प्रतिभाओं को नई दिशा देने के साथ-साथ भविष्य के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मजबूत नींव तैयार करेगी।

    उन्होंने पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा की सराहना करते हुए कहा कि वे अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा, नवाचार और युवा प्रतिभाओं के विकास के लिए निरंतर नए प्रयास कर रही हैं। यह मोबाइल साइंस लैब भी उनकी दूरदर्शी सोच और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है, जो आने वाले समय में हजारों विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएगी।

    मोबाइल लैब की तकनीकी सुविधाओं का किया अवलोकन

    कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब का अवलोकन किया। प्रशिक्षकों ने उन्हें लैब में उपलब्ध विभिन्न उपकरणों, प्रशिक्षण मॉड्यूल और शिक्षण प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विशेष रुचि लेते हुए एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य तकनीकी उपकरणों का स्वयं निरीक्षण किया तथा यह जाना कि विद्यार्थी किस प्रकार इन तकनीकों को व्यवहारिक रूप से सीखेंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण प्रतिभाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने वाला अभिनव और प्रेरणादायी प्रयास बताया। उन्होंने लैब में प्रदर्शित विभिन्न तकनीकी मॉड्यूल का अवलोकन करते हुए प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण प्रक्रिया की जानकारी ली और बच्चों को मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रयोग आधारित शिक्षा विद्यार्थियों में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ाती है।

    एक वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँचेगी तकनीकी शिक्षा

    उल्लेखनीय है कि यह मोबाइल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के शासकीय विद्यालयों तथा सरस्वती शिशु मंदिरों में जाकर प्रशिक्षण प्रदान करेगी। पाँच अनुभवी प्रशिक्षकों की टीम प्रत्येक विद्यालय में तीन से पाँच दिनों की कार्यशाला आयोजित करेगी, जिसमें विद्यार्थियों को AI, रोबोटिक्स, ड्रोन एवं एयरोमॉडलिंग, 3डी प्रिंटिंग, कोडिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स तथा AR/VR जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत पहले वर्ष में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों तक तकनीकी शिक्षा पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि आगामी चरणों में अन्य कक्षाओं के विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिलेगा।

    इस मोबाइल लैब की सबसे बड़ी विशेषता इसकी हैंड्स-ऑन लर्निंग पद्धति है। विद्यार्थी स्वयं ड्रोन उड़ाना, रोबोट संचालित करना, कोडिंग करना, 3डी मॉडल तैयार करना तथा AI और AR/VR जैसी तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें तकनीकी समझ, रचनात्मकता, समस्या समाधान क्षमता और नवाचार की भावना का विकास होगा।

    कार्यक्रम के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मोबाइल लैब में स्थापित फीडबैक बोर्ड पर अपने विचार भी लिखे और इस अभिनव पहल की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, विधायक श्री सुशांत शुक्ला, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।

  • छत्तीसगढ़ ने कर दिया हैरान! झरने, जंगल, जनजातीय संस्कृति और प्राचीन धरोहर देख पूर्व पर्यटन महानिदेशक बोलीं— ‘यह राज्य हर पर्यटक की पहली पसंद होना चाहिए’

    छत्तीसगढ़ ने कर दिया हैरान! झरने, जंगल, जनजातीय संस्कृति और प्राचीन धरोहर देख पूर्व पर्यटन महानिदेशक बोलीं— ‘यह राज्य हर पर्यटक की पहली पसंद होना चाहिए’

    छत्तीसगढ़ की मनोहारी पर्यटन छटा से अभिभूत हुए, पूर्व पर्यटन महानिदेशक, भारत सरकार

    छत्तीसगढ़ भारत के सबसे समृद्ध, मौलिक और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर गंतव्यों में से एक, हर पर्यटक की यात्रा सूची में होना चाहिए यह राज्य – श्रीमती मीनाक्षी शर्मा

    14 दिवसीय पर्यटन यात्रा में विरासत, प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, आध्यात्मिक धरोहर और रोमांचक पर्यटन स्थलों का किया विस्तृत भ्रमण

    रायपुर : भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का विस्तृत भ्रमण कर प्रदेश के पर्यटन वैभव, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आत्मीय आतिथ्य की मुक्त कंठ से सराहना की। अपनी 14 दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का अवलोकन किया और कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पर्यटन गंतव्य है, जहां प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिकता और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह प्रदेश देश के प्रत्येक पर्यटक की यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद उन्हें पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला और यह यात्रा उनके लिए अत्यंत सुखद एवं अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने उन्हें सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित किया। यहां की प्राकृतिक संपदा, घने वन, विशाल जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय लोगों का आत्मीय व्यवहार इसे देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन राज्यों में स्थान दिलाता है।

    श्रीमती शर्मा ने अपनी यात्रा की शुरुआत रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन एवं जनजातीय संग्रहालय से की, जहां उन्होंने प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखा। इसके बाद उन्होंने कबीरधाम जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल तथा आसपास के वन क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक परिवेश में स्थित भोरमदेव परिसर भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है।

    यात्रा के अगले चरण में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा उद्गम स्थल, सायंकालीन आरती, कलचुरीकालीन मंदिर समूह, दूधधारा एवं कपिलधारा जलप्रपात, राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा तथा जैन मंदिर का भ्रमण किया। उन्होंने इस क्षेत्र को आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का अद्वितीय संगम बताया। वापसी के दौरान उन्होंने रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन कर प्रदेश की समृद्ध धार्मिक परंपराओं का अनुभव प्राप्त किया।

    बस्तर प्रवास के दौरान श्रीमती शर्मा ने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर एवं तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया तथा चित्रकोट में नौकायन का आनंद भी लिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती है।

    उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन मंदिरों के नगर बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल तथा स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस एवं लकड़ी की कलाकृतियों को स्थानीय संस्कृति की जीवंत पहचान बताते हुए कहा कि यहां का हस्तशिल्प विश्व स्तर पर विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

    कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग तथा केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और साहसिक पर्यटन के प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार तथा कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया, जिससे बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का अवसर मिला।

    अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान को देखने का माध्यम नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुड़ने का अवसर भी होता है। इस दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहां आने वाला पर्यटक भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून, आध्यात्मिक शांति और जनजातीय जीवन की मौलिकता का वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां के विशिष्ट और अपेक्षाकृत कम चर्चित पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह राज्य देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने प्रदेश में विकसित हो रही पर्यटन अधोसंरचना, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी सराहना की।

    श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने देश-विदेश के पर्यटकों से छत्तीसगढ़ आने का आग्रह करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति एक बार छत्तीसगढ़ आएगा, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन धरोहरों, जनजातीय जीवन, आत्मीय आतिथ्य और अविस्मरणीय अनुभवों की यादें हमेशा अपने साथ लेकर जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ अपनी मौलिक पहचान, अद्वितीय पर्यटन संसाधनों और सतत पर्यटन विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों के बल पर आने वाले वर्षों में भारत के सर्वाधिक आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

  • सीएम हेल्पलाइन की एक शिकायत पर बड़ा एक्शन, अवैध रेत-गिट्टी परिवहन में 6 ट्रैक्टर जब्त, खनिज माफियाओं में मचा हड़कंप

    सीएम हेल्पलाइन की एक शिकायत पर बड़ा एक्शन, अवैध रेत-गिट्टी परिवहन में 6 ट्रैक्टर जब्त, खनिज माफियाओं में मचा हड़कंप

    सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर खनिज विभाग का सख्त एक्शन, अवैध रेत और गिट्टी परिवहन में 6 ट्रैक्टर जब्त

    रायपुर : सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण की दिशा में लगातार की जा रही कार्रवाई का एक और प्रभावी उदाहरण सामने आया है। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में ना नवपदस्थ कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार जिला खनिज विभाग ने अवैध खनिज परिवहन के विरुद्ध विशेष अभियान चलाते हुए रेत एवं गिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त छह ट्रैक्टरों को जब्त किया। यह कार्रवाई सीएम हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर-1076) में प्राप्त शिकायत के आधार पर तत्काल जांच के बाद की गई।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने जिला खनिज विभाग को त्वरित जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देशों के पालन में जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में सघन जांच अभियान चलाया। इस दौरान कोलबिर्रा एवं रुमगा क्षेत्र से रेत से भरे तीन ट्रैक्टर, खंता एवं पिपरिया क्षेत्र से रेत से भरे दो ट्रैक्टर तथा सधवानी क्षेत्र से गिट्टी से भरा एक ट्रैक्टर अवैध परिवहन करते हुए पकड़ा गया। सभी छह वाहनों को मौके पर जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

    खनिज विभाग ने संबंधित वाहन स्वामियों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अर्थदंड एवं समझौता राशि खनिज मद में जमा किए जाने के बाद ही नियमानुसार जब्त वाहनों को मुक्त किया जाएगा। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त प्रत्येक शिकायत का गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश भी दिए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ शासन के राजस्व हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

    उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनिज उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सतत निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध खनिज गतिविधियों की जानकारी मिलने पर सीएम हेल्पलाइन अथवा संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि तत्काल कार्रवाई कर नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जा सके।

    इस कार्रवाई में सहायक खनि अधिकारी श्री आदित्य मानकर, खनि निरीक्षक श्री सुजीत कंवर, खनिज सिपाही श्री शिवकुमार लहरे तथा नगर सैनिक श्री सतीश साहू की सक्रिय भूमिका रही।

  • हर महीने मिलने वाली सरकारी राशि ने किया चमत्कार! महतारी वंदन योजना से महिला हुई आत्मनिर्भर, ‘तुपकी’ निर्माण से बढ़ी आय और बची बस्तर की सांस्कृतिक विरासत

    हर महीने मिलने वाली सरकारी राशि ने किया चमत्कार! महतारी वंदन योजना से महिला हुई आत्मनिर्भर, ‘तुपकी’ निर्माण से बढ़ी आय और बची बस्तर की सांस्कृतिक विरासत

    महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक संबल की राशि, बस्तर की परंपरा और महिलाओं की आत्मनिर्भरता को मिल रही नई ताकत

    गोंचा पर्व की तैयारियों में तुपकी निर्माण से बढ़ी आजीविका, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी बन रहा माध्यम

    रायपुर : महतारी वंदन योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि उनकी पारंपरिक आजीविकाओं और स्थानीय संस्कृति को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रदेश के बस्तर अंचल में इसका एक प्रेरक उदाहरण देखने को मिला है, जहां बस्तर जिला के जगदलपुर विकासखंड के ग्राम मांझीगुड़ा की श्रीमती चंदा ने योजना से प्राप्त राशि का उपयोग गोंचा पर्व में उपयोग होने वाली पारंपरिक तुपकी के निर्माण में किया है। इससे न केवल उनके परिवार की आय बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।

    बस्तर का प्रसिद्ध गोंचा पर्व धार्मिक आस्था, लोक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। पर्व की तैयारियों के बीच चंदा अपने पति श्री चिगडू और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में तुपकी तैयार कर रही हैं। गोंचा पर्व के दौरान इन तुपकियों की विशेष मांग रहती है, जिससे परिवार को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

    तुपकी बांस से बनाया जाने वाला बस्तर का पारंपरिक यंत्र है, जिसमें मलाग्नी वृक्ष के बीज (पेंगू) का उपयोग कर बन्दूक जैसी ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान श्रद्धालु इसी तुपकी से पारंपरिक सलामी देते हैं। यह परंपरा वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है और आज भी पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

    श्रीमती चंदा बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से प्रत्येक माह मिलने वाली राशि ने उन्हें आर्थिक आत्मविश्वास दिया। इसी सहायता से उन्होंने तुपकी निर्माण के लिए आवश्यक बांस और अन्य सामग्री खरीदी। अब पूरा परिवार इस कार्य में जुटा है और गोंचा पर्व के दौरान अच्छी आय होने की उम्मीद है।

    उनका कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने और अपनी पारंपरिक कला एवं कौशल को आजीविका से जोड़ने का अवसर भी है। इससे परिवार की आय बढ़ रही है और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी हो रहा है।

    गौरतलब है कि योजना के प्रारंभ से अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये

    से अधिक की राशि महिलाओं को सीधे उनके खातों में उपलब्ध कराई जा चुकी है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

  • 8 ग्रामीणों की रहस्यमयी मौत का पुलिस ने खोला सबसे बड़ा राज! शराब में सुहागा (ज़हर) मिलाकर रची गई थी सामूहिक हत्या की साजिश, कब्र से शव निकलवाकर जुटाए वैज्ञानिक सबूत, शातिर आरोपी पहुंचा सलाखों के पीछे; अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने वाली 26 सदस्यीय पुलिस टीम सम्मानित

    8 ग्रामीणों की रहस्यमयी मौत का पुलिस ने खोला सबसे बड़ा राज! शराब में सुहागा (ज़हर) मिलाकर रची गई थी सामूहिक हत्या की साजिश, कब्र से शव निकलवाकर जुटाए वैज्ञानिक सबूत, शातिर आरोपी पहुंचा सलाखों के पीछे; अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने वाली 26 सदस्यीय पुलिस टीम सम्मानित

    ​शराब में सुहागा (जहर) मिलाकर 8 ग्रामीणों की खौफनाक हत्या करने वाले शातिर आरोपी का पुलिस ने किया था पर्दाफाश! ​कब्र से शवों को निकालकर (शव उत्खनन) पुलिस ने जुटाए थे वैज्ञानिक साक्ष्य, कड़ियां जोड़कर खोला था मौत का रहस्य!

    ​पुलिस अधीक्षक श्री ओ.पी. शर्मा ने कसडोल में पूरी जांबाज टीम को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित! ​दिन-रात एक कर लगन और मेहनत से अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाने वाले 26 पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों का बढ़ा उत्साह!

    बलौदाबाजार-भाटापारा : जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में घटित अत्यंत संवेदनशील और सनसनीखेज अपराधों की गुत्थी सुलझाने वाली पुलिस टीम का मनोबल बढ़ाने के लिए आज दिनांक 14.07.2026 को पुलिस अधीक्षक श्री ओ.पी. शर्मा द्वारा कसडोल में एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक महोदय ने थाना कसडोल के अंतर्गत बहुचर्चित ‘ग्राम पुराना खर्वे सुहागा जहर कांड’ में उत्कृष्ट एवं अत्यंत सूक्ष्म विवेचना करने वाली पूरी पुलिस टीम को प्रशस्ति पत्र तथा नकद पुरस्कार से सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया।

    ​क्या था मामला- आरोपी रामसहाय जायसवाल (निवासी पुराना खर्वे) ने पुरानी रंजिश और द्वेष की भावना के चलते एक सोची-समझी साजिश के तहत गांव के 8 ग्रामीणों को शराब में सुहागा (जहर) मिलाकर पिला दिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी और परिजनों द्वारा शवों का कफन-दफन भी कर दिया गया था। ​परिजनों द्वारा हत्या की आशंका जताने पर कसडोल पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए शवों को कब्र से बाहर निकालने (शव उत्खनन) की अनुमति प्राप्त की, शवों का विधिवत पंचनामा व पी.एम. कराया और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित किए। पुलिस की मुस्तैदी से आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया।

    ​पुलिस अधीक्षक श्री ओ.पी. शर्मा द्वारा सम्मान व सराहना: ​इस बेहद पेचीदा और अंधे कत्ल के मामलों में कसडोल पुलिस की टीम ने दिन-रात एक कर, अत्यंत लगन, पेशेवर रुख और कड़ी मेहनत से कार्य करते हुए साक्ष्य संकलित किए थे। अधिकारियों व कर्मचारियों के इसी उत्कृष्ट कार्य और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री ओ.पी. शर्मा ने स्वयं कसडोल पहुंचकर पूरी टीम के उत्साहवर्धन हेतु उन्हें नगद इनाम व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि ऐसी सूक्ष्म और वैज्ञानिक विवेचना से न केवल अपराधियों में खौफ पैदा होता है, बल्कि आम जनता का पुलिस और न्याय व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होता है।

    ​सम्मानित होने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों की सूची: ​इस गौरवमयी उपलब्धि के लिए पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा कुल 26 पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को सम्मानित किया गया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

    1. ​श्री कौशल किशोर वासनिक (उप पुलिस अधीक्षक, कैम्प कसडोल)

    2. ​निरीक्षक प्रवीण भीम (थाना प्रभारी कसडोल)

    3. ​निरीक्षक प्रणाली वैद्य (प्रभारी सायबर सेल)

    4. ​उनि अश्वनी पडवार (चौकी प्रभारी गिरौदपुरी)

    5. ​प्र.उनि उमेश कुमार टण्डन (थाना कसडोल)

    6. ​प्र.उनि रुपेश कुमार चन्द्रा (थाना कसडोल)

    7. ​सउनि जगदीश सोनवानी (चौकी प्रभारी करही बाजार)

    8. ​सउनि संजीव सिंह राजपूत (थाना कसडोल)

    9. ​सउनि अग्नि प्रधान (रक्षित केन्द्र बलौदाबाजार)

    10. ​प्र.आर. 958 समीर शुक्ला (थाना कसडोल)

    11. ​प्र.आर. 223 अंशुमान पाण्डेय (थाना कसडोल)

    12. ​प्र.आर. 249 ऋषिकेश भोई (थाना कसडोल)

    13. ​आरक्षकगण: चंद्रहास धनुसेवक, डिलेश्वर वर्मा, चुन्नी लाल साहू, विक्की वर्मा, गोवर्धन राय, कुबेर कुमार वर्मा, भारत पैकरा, शिवकुमार लहरी, अजय कुमार बंजारे, शैलेन्द्र पैकरा, नंद कुमार कुर्रे, राजकुमार पटेल, रामलाल कैवर्त्य, एवं दिनेश कुमार साहू (सभी थाना कसडोल व उपपुअ कैम्प कसडोल)।

  • चारदीवारी नहीं, भरोसे की निगरानी! बेमेतरा में खुलेगी हाईटेक खुली जेल, बंदियों को मिलेगा रोजगार और नई जिंदगी

    चारदीवारी नहीं, भरोसे की निगरानी! बेमेतरा में खुलेगी हाईटेक खुली जेल, बंदियों को मिलेगा रोजगार और नई जिंदगी

    बेमेतरा में खुलेगी प्रदेश की आधुनिक खुली जेल, जेल सुधार और पुनर्वास की दिशा में ऐतिहासिक कदम

    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के अनुमोदन के बाद अधिसूचना जारी

    बंदियों के सुधार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को मिलेगा नया आयाम

    खुली जेल में कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और परिवार के साथ बेहतर सामाजिक जुड़ाव की होगी व्यवस्था

    रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने जेल सुधार एवं बंदियों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल करते हुए जिला बेमेतरा के ग्राम पथर्रा में खुली जेल की स्थापना का आदेश जारी कर दिया है। उप मुख्यमंत्री एवं जेल मंत्री श्री विजय शर्मा के अनुमोदन के पश्चात आज जेल विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि जेल विभाग अपनी मूल अवधारणा के अनुरूप बंदियों के सुधार, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करेगा।

     महानिदेशक जेल श्री हिमांशु गुप्ता ने बताया कि बेमेतरा स्थित खुली जेल का मुख्य उद्देश्य बंदियों का पुनः सामाजिक समावेशन, मानवाधिकारों की रक्षा तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। यह पहल भारतीय न्याय व्यवस्था की उस सोच को साकार करेगी, जिसमें सजा के साथ-साथ अपराधी के सुधार और पुनर्वास को भी समान महत्व दिया गया है।

    200 बंदियों की क्षमता वाली होगी आधुनिक खुली जेल

     ग्राम पथर्रा में 10.20 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 200 बंदियों की आवास क्षमता वाली आधुनिक खुली जेल विकसित की गई है। यहां अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ गुणवत्तापूर्ण आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, मनोरंजन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जेल एवं सुरक्षा कर्मियों के लिए भी आवासीय क्वार्टर एवं बैरक की समुचित व्यवस्था की गई है।

    चारदीवारी नहीं, विश्वास और जिम्मेदारी के साथ होगा पुनर्वास

     खुली जेल की अवधारणा के तहत बंदियों को पारंपरिक जेलों की तरह चारदीवारी में बंद नहीं रखा जाएगा, बल्कि सीमित निगरानी में सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा। वे गौशाला, डेयरी, सब्जी उत्पादन, स्क्रीन प्रिंटिंग, एलईडी बल्ब एवं ट्यूब लाइट निर्माण, फैब्रिकेशन, भवन निर्माण, काष्ठ कला, सिलाई, मुर्गी पालन तथा अन्य कुटीर उद्योगों से जुड़कर रोजगारपरक गतिविधियों में भाग लेंगे। हालांकि उन्हें जेल विभाग द्वारा निर्धारित सभी नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

    अच्छे आचरण वाले आजीवन कारावास के बंदियों को मिलेगा अवसर

     प्रारंभिक चरण में ऐसे बंदियों को खुली जेल में रखा जाएगा, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई है तथा जिन्होंने जेल में उत्कृष्ट आचरण के साथ 11 वर्ष अथवा उससे अधिक की सजा पूरी कर ली है। केवल उन्हीं बंदियों का चयन किया जाएगा, जिन्होंने अनुशासन बनाए रखा हो, जिनके पुनः गंभीर अपराध करने की संभावना न हो तथा जिनकी सामाजिक पृष्ठभूमि सकारात्मक हो। पात्रता का अंतिम निर्णय महानिदेशक जेल की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी।

    रोजगार, स्वरोजगार और सामाजिक पुनर्वास का बनेगा केंद्र

     खुली जेल में बंदियों को मछली पालन, कुक्कुट पालन, पशुपालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन, काष्ठ कला, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सिलाई, बुनाई, बुक बाइंडिंग, प्रिंटिंग तथा कंप्यूटर संचालन सहित अनेक रोजगारपरक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उन्हें जीविकोपार्जन के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। रिहाई के बाद स्वरोजगार शुरू करने के लिए इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ हुए एमओयू के तहत ऋण सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

    आस्था कैफे और एंपोरियम से जुड़ेगा समाज

     बेमेतरा-सिमगा मुख्य मार्ग पर जिला प्रशासन के सहयोग से ‘आस्था कैफे’ और ग्रॉसरी शॉप का संचालन किया जाएगा, जहां बंदी कार्य कर सकेंगे। वहीं खुली जेल परिसर के मुख्य द्वार के समीप स्थापित एंपोरियम में बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों का विक्रय किया जाएगा, जिससे उन्हें आय अर्जित करने के साथ समाज से सकारात्मक जुड़ाव का अवसर मिलेगा।

    मानवीय और सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

     खुली जेल व्यवस्था से बंदियों को खुले वातावरण में जीवन जीने, परिवार के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने, मानसिक स्वास्थ्य में सुधार तथा जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में पुनः स्थापित होने का अवसर मिलेगा।

  • पुदुचेरी में शिक्षा व्यवस्था की बड़ी समीक्षा! सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने NEP, रिक्त पदों और उच्च शिक्षा की चुनौतियों पर उठाए अहम मुद्दे

    पुदुचेरी में शिक्षा व्यवस्था की बड़ी समीक्षा! सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने NEP, रिक्त पदों और उच्च शिक्षा की चुनौतियों पर उठाए अहम मुद्दे

    रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्ययन दौरे पर पुदुचेरी पहुंचे

    उच्च शिक्षण संस्थानों की चुनौतियों और नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन पर अधिकारियों और कुलपतियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की

    छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक विकास और स्थानीय युवाओं के हितों को ध्यान में रखकर साझा किए अनुभव

    पुदुचेरी/रायपुर : रायपुर सांसद और छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल मंगलवार को शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के आधिकारिक अध्ययन दौरे पर पुदुचेरी पहुंचे। सांसद श्री अग्रवाल ने देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) के प्रमुखों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में भाग लिया।

    इस उच्च स्तरीय बैठक में पुदुचेरी सरकार के उच्च शिक्षा निदेशालय (Directorate of Higher Education), भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (उच्च शिक्षा विभाग), ऑरोविले फाउंडेशन (Auroville Foundation), पुदुचेरी विश्वविद्यालय, पुदुचेरी तकनीकी विश्वविद्यालय और एनआईटी (NIT) पुदुचेरी के प्रतिनिधि व कुलपति विशेष रूप से उपस्थित रहे।

    उच्च शिक्षण संस्थानों की चुनौतियों पर गहन मंथन

    बैठक के दौरान सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के समक्ष आ रही व्यावहारिक और प्रशासनिक चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। जिसमें संस्थानों में बजट की उपलब्धता, रिक्त पदों (Staffing Vacancies) को भरने की स्थिति और संविदा कर्मचारियों (Contractual Staff) से जुड़े विषयों पर समीक्षा की गई।

     साथ ही शिक्षण संस्थानों में आरक्षण नीतियों के सही क्रियान्वयन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को जमीनी स्तर पर लागू करने में आ रही दिक्कतों व उनकी प्रगति पर चर्चा हुई।

     बैठक में संस्थानों के सुचारू संचालन में आ रही प्रशासनिक, शासकीय और स्थान संबंधी (Location-based) समस्याओं के समाधान तलाशे गए।

    ऑरोविले फाउंडेशन के कामकाज की समीक्षा

    समिति ने ऑरोविले फाउंडेशन के वर्तमान कामकाज और उसकी विभिन्न गतिविधियों के अपडेट पर भी विस्तृत चर्चा की, ताकि इस वैश्विक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के विकास को और गति दी जा सके।

    बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व शिक्षा मंत्री के रूप में अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव को साझा करते हुए सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुखी और गुणवत्तापूर्ण बनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ में हमने जिस तरह स्थानीय युवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करने का प्रयास किया है, उसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर भी सभी राज्यों के समन्वय से एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। पुदुचेरी के इन शीर्ष संस्थानों के अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों का लाभ हम छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक विकास और वहां के युवाओं के स्वर्णिम भविष्य के लिए भी सुनिश्चित करेंगे।

    बैठक से पूर्व सांस्कृतिक और शैक्षणिक केंद्रों का अवलोकन

    दौरे की शुरुआत में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने संसदीय समिति के अध्यक्ष श्री मुकुल वासनिक जी एवं अन्य साथी सदस्यों के साथ ऑरोविले फाउंडेशन परिसर का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान समिति ने इस वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के विभिन्न प्रकल्पों को देखा और इसके वर्तमान कामकाज का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय पारंपरिक युद्ध कला और संस्कृति के जीवंत प्रतीक ‘कलरिपयट्टू सेंटर’ (Kalaripayattu Center) तथा ऑरोविले के प्रसिद्ध प्रायोगिक शिक्षण संस्थान ‘लास्ट स्कूल’ (Last School) का भी दौरा किया। यहाँ समिति के सदस्यों ने वहाँ की अनूठी व नवोन्मेषी शिक्षा पद्धति, कला, खेल और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों का बारीकी से अवलोकन किया। छत्तीसगढ़ के पूर्व खेल और युवा कल्याण मंत्री रह चुके श्री अग्रवाल ने इस दौरान पारंपरिक विधाओं और खेल को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की सराहना की।

    इस अध्ययन दौरे में समिति अध्यक्ष श्री मुकुल वासनिक के साथ ही सदस्यगण श्रीमती टी सुमति, श्रीमती रेखा शर्मा, श्रीमती स्वाति मालीवाल, श्रीमती शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया, श्री जितेंद्र कुमार दोहरे, श्री कामाख्या प्रसाद तासा, श्री जियाउर रहमान, श्री कांस्टैंडाइन रविंद्रन, श्री भीम सिंह, श्री सिकंदर कुमार, श्री दर्शन सिंह चौधरी भी उपस्थित रहे।

  • बिजली बिल विवाद वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! कोर्ट से केस वापस लेते ही मिलेगा समाधान योजना का लाभ

    बिजली बिल विवाद वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! कोर्ट से केस वापस लेते ही मिलेगा समाधान योजना का लाभ

    समाधान योजना में बिजली के न्यायालयीन प्रकरणों का भी होगा त्वरित निराकरण

    न्यायालय से प्रकरण वापस लेकर पात्र उपभोक्ता उठा सकेंगे योजना का लाभ

    रायपुर : मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के अंतर्गत अब न्यायालयों में लंबित बिजली बिल संबंधी प्रकरणों का भी निराकरण किया जाएगा। इसके लिए उपभोक्ताओं को न्यायालयों में लंबित प्रकरण वापस लेना होगा।

    छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीम सिंह कंवर ने बताया कि उपभोक्ताओं से मिल रहे उत्साहजनक प्रतिसाद को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही अब योजना का दायरा बढ़ाते हुए न्यायालयों में लंबित बिजली बिल संबंधी प्रकरणों को भी इसमें शामिल किया गया है।

    उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल संबंधी प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं, वे न्यायालय से अपना प्रकरण वापस लेकर योजना के अंतर्गत आवेदन कर सकते हैं। नियमानुसार आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने के बाद उन्हें उपलब्ध छूट एवं अन्य लाभ प्रदान किए जाएंगे। प्रबंध निदेशक श्री कंवर ने पात्र उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने निकटतम वितरण केंद्र अथवा संबंधित कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त करें तथा निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर योजना का लाभ उठाते हुए अपने बिजली बिल संबंधी लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कराएं।

    मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 के तहत निम्नदाब घरेलू, बीपीएल एवं कृषि श्रेणी के अशासकीय उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल की मूल राशि एवं अधिभार में नियमानुसार छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। अब तक 8 लाख 61 हजार 38 सक्रिय उपभोक्ताओं का पंजीयन हुआ है, जिन पर 1,493 करोड़ रुपये की कुल बकाया राशि थी, उन्हें कुल 745.61 करोड़ रुपये की छूट प्रदान की गई है तथा 85.22 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ है। वहीं 1 लाख 42 हजार 799 उपभोक्ताओं ने अपने प्रकरणों का संपूर्ण समाधान प्राप्त किया, जिनके लिए मूल राशि में 28.28 करोड़ रुपये तथा अधिभार में 50.60 करोड़ रुपये की छूट दी गई और 58.96 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ।

    इसके अतिरिक्त 3.58 लाख निष्क्रिय उपभोक्ताओं को मूल राशि में 124.31 करोड़ रुपये तथा अधिभार में 40.76 करोड़ रुपये, अर्थात कुल 165.07 करोड़ रुपये की छूट प्रदान की गई तथा उनसे 2.52 करोड़ रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ। पूर्व में यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील थी। योजना की अवधि बढ़ने से ऐसे पात्र उपभोक्ताओं को तीन माह का अतिरिक्त अवसर मिलेगा, जो अब तक किसी कारणवश इसका लाभ नहीं ले सके हैं।

  • दशकों तक नक्सल हिंसा ने विकास, शिक्षा और जनजीवन को किया प्रभावित, अब बस्तर शांति और विश्वास के नए दौर की ओर अग्रसर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    दशकों तक नक्सल हिंसा ने विकास, शिक्षा और जनजीवन को किया प्रभावित, अब बस्तर शांति और विश्वास के नए दौर की ओर अग्रसर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसहयोग और पुनर्वास नीति से मिली निर्णायक सफलता – मुख्यमंत्री

    दूरस्थ अंचलों तक पहुंचीं सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और जनकल्याण की योजनाएं, शासन पर बढ़ा लोगों का विश्वास – मुख्यमंत्री श्री साय

    बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय संभाग बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : मुख्यमंत्री

    बस्तर रोडमैप 2.0 के माध्यम से पर्यटन, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के समग्र विकास पर विशेष फोकस – मुख्यमंत्री श्री साय

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार के ऐतिहासिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने दशकों तक नक्सल हिंसा के रूप में एक गंभीर चुनौती का सामना किया है। अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा बस्तर की जनता के विश्वास और सहयोग से प्रदेश इस चुनौती से निर्णायक रूप से मुक्त होकर शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अनेक वर्षों के सतत प्रयासों, सुनियोजित रणनीति, सुरक्षा बलों के पराक्रम तथा आम नागरिकों के सहयोग का परिणाम है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला पुलिस बल, विशेष सुरक्षा इकाइयों तथा अभियान में सहभागी सभी सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और व्यावसायिक दक्षता की सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए समन्वित सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति अपनाई। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा अभियानों की सतत समीक्षा, संसाधनों की उपलब्धता तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया गया, जिससे अभियान को अपेक्षित गति मिली।

    उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में आयोजित नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई। इसके अनुरूप सुरक्षा अभियानों को गति देने के साथ-साथ विकास कार्यों का भी समानांतर विस्तार किया गया।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी अभियान की नियमित समीक्षा की। स्वयं उन्होंने बस्तर क्षेत्र का लगातार दौरा कर सुरक्षा बलों का उत्साहवर्धन किया तथा विभिन्न गांवों में पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ समाज के उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया, जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की इच्छा व्यक्त की। इसी उद्देश्य से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए व्यापक और मानवीय नीति लागू की गई।

    उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए गए। इससे बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति का अभियान केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है, वहां शासन की योजनाएं और बुनियादी सुविधाएं भी तेजी से पहुंचें, ताकि लोगों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन आए।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब राज्य सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है। इसके लिए ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय संभाग के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ तथा ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के अंतर्गत 31 योजनाओं एवं 14 सामुदायिक सुविधाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे 5 हजार 542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और शासन की सेवाएं अंतिम छोर तक पहुंचेंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को अब बहुआयामी सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन्हें ‘शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करते हुए नागरिक सुविधाओं, जनसेवाओं और आजीविका गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत बस्तर के 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। इससे नागरिकों को समयबद्ध एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘नियद नेल्ला नार’ योजना इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। इस योजना के अंतर्गत सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 525 गांवों में 17 विभागों की 43 व्यक्तिगत एवं सामुदायिक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। इससे ग्रामीणों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा प्रशासन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

    उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। इसके परिणामस्वरूप 6 लाख 79 हजार परिवारों के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। बस्तर संभाग में 17 लाख लोगों के जनधन खाते खोले जा चुके हैं। 24 लाख 66 हजार लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। 22 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। 1 लाख 18 हजार लोगों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। साथ ही 3 लाख 89 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जा चुके हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में 1 लाख 76 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग के 240 नक्सल प्रभावित गांवों में पूर्व में बंद पड़े 458 विद्यालयों में से 421 विद्यालयों का पुनः संचालन प्रारंभ किया गया है तथा 36 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में आधारभूत अधोसंरचना के विस्तार को भी तेज गति से आगे बढ़ा रही है। 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर कार्य जारी है, जिससे बस्तर की रेल संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में हवाई सेवाओं का भी विस्तार किया गया है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर हुई है।

    उन्होंने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण में है। यह परियोजना बस्तर को देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि खेल एवं संस्कृति के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजन किए गए। इन आयोजनों में 4 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता हुई, जिससे सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और जनभागीदारी को नई मजबूती मिली।

    उन्होंने गृहमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप और जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव के नक्सल उन्मूलन की लड़ाई में योगदान की सराहना की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की एकीकृत रणनीति के माध्यम से बस्तर आज विश्वास, अवसर और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग को मिली नई नेतृत्वकर्ता, डॉ. ममता साहू ने अध्यक्ष पद संभालते हुए महिला सशक्तिकरण का लिया संकल्प

    छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग को मिली नई नेतृत्वकर्ता, डॉ. ममता साहू ने अध्यक्ष पद संभालते हुए महिला सशक्तिकरण का लिया संकल्प

    डॉ. ममता साहू ने संभाली छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की कमान

    महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, त्वरित न्याय और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प

    रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नियुक्त डॉ. ममता साहू ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया।

     शास्त्री चौक स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में उन्होंने कार्यभार संभालते हुए महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण, उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण तथा महिला सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

    पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. ममता साहू ने आयोग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया और सभी से समर्पण, पारदर्शिता तथा संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपेक्षा की। उन्होंने आयोग के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण कर कार्यालयीन व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया।

    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग महिलाओं को न्याय दिलाने, उनकी शिकायतों के प्रभावी एवं समयबद्ध निराकरण तथा उनके सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि आयोग महिलाओं के हितों से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करेगा।

    कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया, नगर निगम रायपुर के पार्षद महेश ध्रुव, दुर्गेश राव, श्रीमती रजनी शेंगडे, जितेन्द्र साहू, कृष्णा साहू, श्रीमती सीमा डहरिया, गीतेश साहू सहित आयोग के सचिव, सहायक संचालक, लेखाधिकारी एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।