Category: छत्तीसगढ

  • मंत्रालय में हाई लेवल समीक्षा बैठक! मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस, आधार अटेंडेंस, पीएम सूर्यघर सहित सभी प्रमुख योजनाओं की प्रगति पर मांगा जवाब, दिए सख्त निर्देश

    मंत्रालय में हाई लेवल समीक्षा बैठक! मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस, आधार अटेंडेंस, पीएम सूर्यघर सहित सभी प्रमुख योजनाओं की प्रगति पर मांगा जवाब, दिए सख्त निर्देश

    मुख्य सचिव श्री विकासशील ने सचिवों की ली उच्च स्तरीय बैठक, योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की

    रायपुर : मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा है कि सेवा निवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के विभिन्न प्रकरणों के निराकरण की प्रक्रिया दो वर्ष से ही प्रारंभ कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए है कि सेवा निवृत्त होने वाले अधिकारी कर्मचारियों की सूची विभागावार अद्यतन कर ली जाए।

    मुख्य सचिव ने विभागीय सचिवों को उनके विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, आधार बेस अटेंडेंस, लोक सेवा गारंटी, सूचना के अधिकार, सुघ्घर छत्तीसगढ़, नियद नेल्लानार योजना, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि आई-गॉट के तहत विभागवार चिन्हित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग की जाये। अधिकारी-कर्मचारियों को आई-गॉट के तहत विभाग की आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण दिलाने कहा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि सभी विभागों की योजनाओं एवं सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए।

    बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं खनिज विभाग के सचिव श्री पी.दयानंद, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह, गृह विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, परिवहन विभाग के सचिव श्री एस.प्रकाश, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव श्री बसवराजु एस., राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री मयंक अग्रवाल सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

  • रायपुर में कल होगी साय सरकार की हाई-वोल्टेज कैबिनेट बैठक! किसानों, युवाओं, महिलाओं और विकास परियोजनाओं को लेकर हो सकते हैं महत्वपूर्ण फैसले

    रायपुर में कल होगी साय सरकार की हाई-वोल्टेज कैबिनेट बैठक! किसानों, युवाओं, महिलाओं और विकास परियोजनाओं को लेकर हो सकते हैं महत्वपूर्ण फैसले

    रायपुर में 22 जुलाई को साय कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक, कई अहम प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

    रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में 22 जुलाई 2026 को विष्णुदेव साय सरकार की एक अहम मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) बैठक आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक पूर्वान्ह 11:30 बजे मंत्रालय के मुख्य कैबिनेट हॉल में शुरू होगी।

    इस बैठक में राज्य के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं, और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

    बैठक के संभावित मुख्य बिंदु:

    • विकास कार्यों की समीक्षा: राज्य में चल रही प्रमुख अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) और विकास परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया जाएगा।
    • जनहितकारी नीतियां: किसानों, युवाओं और महिलाओं से जुड़ी प्रमुख सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और नए प्रस्तावों को मंजूरी दी जा सकती है।
    • प्रशासनिक एवं नीतिगत निर्णय: विभिन्न विभागों के पेंडिंग प्रस्तावों और आगामी बजट प्राथमिकताओं पर चर्चा हो सकती है।

    बैठक में राज्य मंत्रिमंडल के सभी सम्पादित मंत्री, मुख्य सचिव तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे। बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की आधिकारिक जानकारी मीडिया के साथ साझा की जाएगी।

  • नारायणपुर में रेशम क्रांति! कोसापालन से बदली वनांचल की तस्वीर, महिलाओं और युवाओं को गांव में ही मिला लाखों का रोजगार

    नारायणपुर में रेशम क्रांति! कोसापालन से बदली वनांचल की तस्वीर, महिलाओं और युवाओं को गांव में ही मिला लाखों का रोजगार

    नारायणपुर में रेशम से बुना जा रहा आत्मनिर्भरता का ताना-बाना, कोसापालन ने बदली वनांचल के ग्रामीणों की तकदीर

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले नारायणपुर में रेशम विकास एवं विस्तार योजनाएं ग्रामीणों के जीवन में एक स्वर्णिम बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। जिला प्रशासन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में संचालित मलबरी और टसर रेशम योजनाओं ने न केवल स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए द्वार खोले हैं, बल्कि महिलाओं और युवाओं को अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है।

     आज नारायणपुर में रेशम उत्पादन केवल कृषि-सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।

    मलबरी रेशम: स्व-सहायता समूहों के लिए आय का स्थायी जरिया

     नारायणपुर और कुसरतराई में स्थित दो मलबरी केंद्रों में लगभग 22.5 एकड़ क्षेत्र में पौधारोपण विकसित किया गया है। यहाँ महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्य उन्नत तकनीकों से रेशम कृमिपालन कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित 4,400 किलोग्राम ककून उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले 4,180 किलोग्राम का सफल उत्पादन हासिल किया गया। इस गतिविधि से जुड़े 47 हितग्राहियों के बैंक खातों में 7.72 लाख रूपए से अधिक की राशि सीधे अंतरित की गई। कृमिपालन के साथ-साथ पौधारोपण संरक्षण और निराई-गुड़ाई जैसे कार्यों ने ग्रामीणों को पूरे साल रोजगार से जोड़े रखा।

    टसर रेशम: लक्ष्य से परे जाकर रचा नया कीर्तिमान

     जिले के चार प्रमुख टसर केंद्रों—नारायणपुर, कुसरतराई, गोटाजुन्हरी और एडका के 62 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित टसर कृमिपालन ने इस वर्ष सफलता के नए आयाम छुए हैं। वर्ष 2025-26 में 8.52 लाख कोसाफल उत्पादन के लक्ष्य के मुकाबले 9.73 लाख से अधिक कोसाफल का बम्पर उत्पादन दर्ज किया गया। इस उल्लेखनीय उपलब्धि से जुड़े 64 हितग्राहियों को लगभग 36.97 लाख रूपए की सीधी आय अर्जित हुई।

    प्रशिक्षण, पारदर्शिता और विश्वास: सफलता के तीन स्तंभ

     रेशम विभाग द्वारा ग्रामीणों को सिर्फ संसाधन ही नहीं, बल्कि सही समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।कृमियों को बीमारियों से बचाने और गुणवत्तापूर्ण ककून तैयार करने के लिए सतत तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।उत्पादन का सीधा और पारदर्शी भुगतान सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों का भरोसा मजबूत हुआ है। इसी तरह स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने इस पूरी प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाकर अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति को संवारा है।

     नारायणपुर का यह मॉडल यह साबित करता है कि यदि स्थानीय संसाधनों का सही उपयोग, प्रशासनिक मार्गदर्शन और ग्रामीणों की मेहनत एक साथ मिल जाए, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी विकास और आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी जा सकती है।आने वाले समय में इन योजनाओं का विस्तार न केवल अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को गरीबी से बाहर निकालेगा, बल्कि नारायणपुर को राज्य के रेशम मानचित्र पर एक विशिष्ट और गौरवशाली पहचान भी दिलाएगा।

  • ग्रामीणों को मिला मालिकाना हक का कानूनी प्रमाण: डॉ. रमन सिंह ने 150 हितग्राहियों को सौंपे स्वामित्व कार्ड

    ग्रामीणों को मिला मालिकाना हक का कानूनी प्रमाण: डॉ. रमन सिंह ने 150 हितग्राहियों को सौंपे स्वामित्व कार्ड

    स्वामित्व कार्ड ग्रामीणों के आत्मसम्मान एवं आत्मनिर्भरता की चाबी : विधानसभा अध्यक्ष

    विधानसभा अध्यक्ष स्वामित्व योजनांतर्गत स्वामित्व पट्टा वितरण कार्यक्रम में हुए शामिल

    स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिला मालिकाना हक का कानूनी प्रमाण

    विधानसभा अध्यक्ष ने 150 हितग्राहियों को वितरित किए प्रॉपर्टी कार्ड

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने एम्बुलेंस एवं स्वच्छता वाहन को दिखाई हरी झंडी

    प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिकाधिक लाभ लेने की अपील

    राजनांदगांव : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज स्पीकर निवास में आयोजित स्वामित्व योजना अंतर्गत स्वामित्व पट्टा वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम ईरा, मनकी, आरला, बांकल एवं कुसमी के 150 हितग्राहियों को स्वामित्व पट्टों का वितरण किया। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस एवं स्वच्छता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।     

           विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि स्वामित्व कार्ड केवल कागज का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीणों के आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता की चाबी है। उनके कानूनी अधिकार का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि वर्षों से ग्रामीण आबादी की भूमि का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 24 अप्रैल 2020 को प्रारंभ की गई स्वामित्व योजना के माध्यम से अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को उसकी आवासीय भूमि का प्रमाणित अभिलेख उपलब्ध कराया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक ड्रोन सर्वे एवं डिजिटल मैपिंग के माध्यम से गांवों की आबादी भूमि का सर्वेक्षण किया गया है। अब प्रत्येक मकान एवं भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का विधिवत स्वामित्व प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि जिले के अनेक गांवों में सर्वे एवं अंतिम प्रकाशन की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है तथा चरणबद्ध तरीके से सभी गांवों में शिविर लगाकर स्वामित्व कार्ड वितरित किए जाएंगे।

           विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि स्वामित्व कार्ड मिलने से ग्रामीण अपनी संपत्ति का विधिक प्रमाण प्राप्त करेंगे। इसके आधार पर बैंकों से ऋण प्राप्त करना भी आसान होगा, जिससे ग्रामीण आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह योजना गांवों के विकास एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों से अधिक से अधिक संख्या में अपने घरों की छतों पर सोलर संयंत्र स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा सोलर संयंत्र स्थापना पर आकर्षक अनुदान दिया जा रहा है। इससे बिजली का बिल शून्य होने के साथ अतिरिक्त बिजली उत्पादन से आय अर्जित करने का अवसर भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिन हितग्राहियों को स्वामित्व कार्ड प्राप्त हुआ है, वे इस दस्तावेज के आधार पर बैंक से ऋण लेकर भी सोलर संयंत्र स्थापित कर सकते हैं और योजना का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।

           कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल 2020 को प्रारंभ की गई स्वामित्व योजना ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार प्रदान करने वाली ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत ड्रोन तकनीक से गांवों का सर्वे कर डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है तथा संपत्ति का अधिकार अभिलेख प्रदान किया जाता है। कलेक्टर ने बताया कि राजनांदगांव जिले के 654 ग्रामों में प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए जाने हैं। इनमें से 186 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन किया जा चुका है। पूर्व में 24 ग्रामों के 1 हजार 283 हितग्राहियों को प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं तथा शेष ग्रामों में अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि आज 5 ग्रामों के 150 हितग्राहियों को प्रॉपर्टी कार्ड प्रदान किए गए। कलेक्टर ने कहा कि स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार मिलेगा, बैंक से ऋण प्राप्त करने में सुविधा होगी, भूमि संबंधी विवादों में कमी आएगी तथा पंचायतों के पास गांवों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि संपत्ति कार्ड में पति-पत्नी दोनों का नाम दर्ज किए जाने से महिलाओं को भी संपत्ति में समान अधिकार और सशक्तिकरण का अवसर मिलेगा।

           इस अवसर पर छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री योगेश दत्त मिश्रा, जिला सहकारी केन्द्र बैंक मार्यादित के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, जनपद पंचायत राजनांदगांव की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, अध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्रीमती पूर्णिमा साहू, श्री कोमल सिंह राजपूत, श्री भरत वर्मा, श्री संतोष अग्रवाल, श्री रमेश पटेल, श्री सौरभ कोठारी, श्रीमती रेखा मेश्राम, सीईओ जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शीतल बंसल, एसडीएम श्री श्रीकांत कोराम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, हितग्राही उपस्थित थे।

  • राजनांदगांव बनेगा सोलर पावर का मॉडल जिला: डॉ. रमन सिंह बोले- प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से 1200 से अधिक घरों का बिजली बिल हुआ शून्य

    राजनांदगांव बनेगा सोलर पावर का मॉडल जिला: डॉ. रमन सिंह बोले- प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से 1200 से अधिक घरों का बिजली बिल हुआ शून्य

    प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से राजनांदगांव को बनाएंगे प्रदेश में अग्रणी : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह

     विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सूर्यसभा एवं शून्य बिजली बिल वाले हितग्राहियों के सम्मान समारोह में हुए शामिल

    विधानसभा अध्यक्ष ने सूर्यसभा में शून्य बिजली बिल वाले हितग्राहियों को किया सम्मानित

    जिले में 1200 से अधिक घरों का हो गया बिजली बिल शून्य

    जिले में 4 हजार 117 से अधिक घरों के छत पर लगा रूफटॉप सोलर प्लांट

     50 प्रतिशत घरों में सोलर पैनल लगाने वाले वार्ड एवं ग्राम पंचायत को अतिरिक्त 10 लाख रूपए के विकास कार्यों की घोषणा

    राजनांदगांव : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज स्पीकर हाऊस राजनांदगांव में आयोजित प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत सूर्यसभा एवं शून्य बिजली बिल वाले हितग्राहियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत शून्य बिजली बिल प्राप्त करने वाले शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के हितग्राहियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया तथा जिलेवासियों से अधिक से अधिक सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कर स्वच्छ एवं नि:शुल्क ऊर्जा की दिशा में आगे बढऩे की अपील की।

           विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना केवल बिजली बचत की योजना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में सूर्य को ऊर्जा और जीवन का स्रोत माना गया है। आज आधुनिक तकनीक के माध्यम से सूर्य की यही ऊर्जा प्रत्येक घर को रोशन कर रही है। उन्होंने कहा कि सोलर पैनलों के नियमित रखरखाव करने से उनकी कार्यक्षमता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत एक किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर 45 हजार रूपए, 2 किलोवाट पर 90 हजार रूपए तथा 3 किलोवाट क्षमता पर एक लाख 8 हजार रूपए तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। शेष राशि के लिए बैंकों के माध्यम से आसान वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

           विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि राजनांदगांव जिले के लिए 13 हजार 500 सोलर संयंत्र स्थापना का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 8 हजार 300 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं तथा 4 हजार 117 हितग्राहियों को योजना का लाभ दिया जा चुका है। इनमें 1200 से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य हो गया है। उन्होंने कहा कि यह जिले के लिए गर्व का विषय है तथा आने वाले महीनों में राजनांदगांव को इस योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश का अग्रणी जिला बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोयले से बिजली उत्पादन के कारण कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे समय में सौर ऊर्जा स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है। सौर ऊर्जा के अधिकाधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

           विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जनप्रतिनिधियों से अभियान के रूप में योजना का प्रचार-प्रसार करने कहा। उन्होंने कहा कि जिस नगर निगम वार्ड के 50 प्रतिशत घरों में सोलर संयंत्र स्थापित हो जाएंगे, उस वार्ड को 10 लाख रूपए के अतिरिक्त विकास कार्यों की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार जिस ग्राम पंचायत के 50 प्रतिशत घरों में सोलर संयंत्र लगाए जाएंगे, उस ग्राम पंचायत को भी 10 लाख रूपए के अतिरिक्त विकास कार्यों की स्वीकृति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, पत्रकार, सामाजिक संगठन तथा योजना से लाभान्वित हितग्राही स्वयं इस योजना के ब्रांड एम्बेसडर बनकर अधिक से अधिक लोगों को सोलर अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास से राजनांदगांव प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ का अग्रणी जिला बनेगा।

           महापौर श्री मधुसूदन यादव ने कहा कि नगर निगम, विद्युत विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में योजना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन हितग्राहियों का बिजली बिल शून्य हो गया है, वे अपने अनुभव साझा कर अन्य लोगों को भी योजना से जोडऩे के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि नगर निगम क्षेत्र के लगभग 44 हजार मकानों में इस वित्तीय वर्ष के दौरान अधिक से अधिक सोलर संयंत्र स्थापित कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल बिजली बिल में बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और तापमान नियंत्रण में भी सकारात्मक योगदान मिलेगा।

           जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी योजना है। उन्होंने कहा कि शून्य बिजली बिल प्राप्त करने वाले हितग्राही समाज के लिए प्रेरणा बनेंगे। उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी अपने गांव में जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के सहयोग से लोगों को सोलर संयंत्र लगाने के लिए प्रेरित कर रही हैं तथा स्वयं भी शीघ्र सोलर संयंत्र स्थापित करेंगी।

           पद्मश्री श्रीमती फूलबासन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस जनहितैषी योजना की सराहना करते हुए कहा कि जिला प्रशासन, विद्युत विभाग एवं सभी संबंधित विभागों के संयुक्त प्रयासों से योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नीर और नारी अभियान जनसहभागिता से सफल हुआ, उसी प्रकार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना भी जनआंदोलन बनेगी। उन्होंने स्वयं अपने घर में सोलर संयंत्र स्थापित करने की बात कही। उन्होंने सभी नागरिकों से इस योजना का लाभ लेने का आग्रह किया।

           कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा पिछले आठ माह से विशेष अभियान चलाकर गांव-गांव और शहरों में शिविर आयोजित किए गए, जिससे योजना की प्रक्रिया को सरल बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार के लिए ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और सौर ऊर्जा अपनाकर नागरिक आगामी 24-25 वर्षों तक बिजली बिल के खर्च से मुक्त हो सकते हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा तीन किलोवाट तक के संयंत्र पर 1 लाख 8 हजार रूपए तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे आम नागरिकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

           कलेक्टर ने कहा कि सौर ऊर्जा का उपयोग केवल परिवार की बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि जिन हितग्राहियों के घरों में सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं, उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और कई हितग्राही अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देकर आय भी अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने ग्राम मुसरा की एक महिला हितग्राही का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले उनका मासिक बिजली बिल 4 से 5 हजार रुपए आता था, जबकि सोलर संयंत्र लगने के बाद अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और अगले 25 वर्षों में लगभग 15 से 16 लाख रूपए की बचत होगी, जिसका उपयोग परिवार की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यकताओं में किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजनांदगांव जिला प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश में पांचवें स्थान पर है, जबकि जिले में इससे कहीं अधिक संभावनाएं हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से अपने आसपास के लोगों को योजना से जोडऩे की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से अगले एक वर्ष में जिले में 20 हजार सोलर कनेक्शन स्थापित करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

           कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से प्राप्त लाभों की जानकारी साझा की। हितग्राहियों ने बताया कि सोलर संयंत्र स्थापित होने के बाद उनका बिजली बिल शून्य हो गया है तथा अतिरिक्त बिजली उत्पादन से भविष्य में आय अर्जित करने का अवसर भी प्राप्त होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री योगेश दत्त मिश्रा, जिला सहकारी केन्द्र बैंक मार्यादित के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, जनपद पंचायत राजनांदगांव की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर, अध्यक्ष राजगामी संपदा न्यास श्रीमती पूर्णिमा साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती किरण साहू, जिला पंचायत सदस्य श्री देवकुमारी साहू, श्री खूबचंद पारख, श्री कोमल सिंह राजपूत, विधायक प्रतिनिधि श्री रूपचंद भिमनानी, श्री संतोष अग्रवाल, श्री रमेश पटेल, श्री सौरभ कोठारी, वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन, सीईओ जिला पंचायत श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, एसडीएम राजनांदगांव श्री श्रीकांत कोराम, विद्युत विभाग के अधिकारी सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

  • स्मार्ट मीटर से बदलेगी बिजली व्यवस्था: अब हर यूनिट की सटीक जानकारी, पारदर्शी बिलिंग और उपभोक्ता के हाथ में पूरा नियंत्रण

    स्मार्ट मीटर से बदलेगी बिजली व्यवस्था: अब हर यूनिट की सटीक जानकारी, पारदर्शी बिलिंग और उपभोक्ता के हाथ में पूरा नियंत्रण

    लेखस्मार्ट मीटर : बिजली मीटर के विकास का अगला स्वाभाविक कदम

    रायपुर : आज के दौर में सूचना ही सबसे बड़ी शक्ति है। जिसके पास सही और समय पर जानकारी होती है, वह बेहतर निर्णय ले सकता है। स्मार्ट मीटर भी बिजली उपभोक्ता को यही क्षमता देता है। यह उसे अपनी बिजली खपत को समझने, उसका विश्लेषण करने और आवश्यकता के अनुसार नियंत्रित करने का अवसर प्रदान करता है।

    मुझे अपनी पुरानी मारुति 800 कार याद आती है। उसमें किलोमीटर मीटर के साथ केवल पेट्रोल इंडिकेटर होता था। उससे केवल इतना पता चलता था कि गाड़ी कितनी चली और कितना पेट्रोल बचा है। लेकिन आज की कारों के स्मार्ट डिजिटल डैशबोर्ड हर पल बताते हैं कि गाड़ी कितनी माइलेज दे रही है, किस गति पर ईंधन की खपत बढ़ रही है और कितनी दूरी तक चल सकती है। जानकारी बढ़ी है, इसलिए वाहन पर नियंत्रण भी पहले से बेहतर हुआ है।

    ठीक ऐसा ही सफर बिजली मीटर का भी है। उन्नीसवीं सदी में जब पहली बार बिजली लोगों के घरों तक पहुंची, तब कई स्थानों पर उपभोक्ताओं से बल्बों की संख्या के आधार पर शुल्क लिया जाता था। बाद में मेकेनिकल बिजली मीटर विकसित हुए। भारत में लंबे समय तक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल मीटरों का व्यापक उपयोग हुआ। इनमें घूमने वाली डिस्क होती थी, जो बिजली की खपत दर्ज करती थी। एक जमाना था जब बिजलीकर्मी डायरी लेकर घर-घर जाते और रीडिंग नोट करते थे। यह व्यवस्था अपने समय के लिए उपयोगी थी, लेकिन मानवीय त्रुटियों की संभावना बनी रहती थी।

    इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक मीटर आए, जिनमें छेड़छाड़ की संभावना काफी कम हुई। फिर मल्टी-फंक्शन डिजिटल मीटर विकसित हुए, जो बिजली खपत के साथ वोल्टेज, अधिकतम मांग (मैक्सिमम डिमांड) जैसी तकनीकी जानकारियां भी दर्ज करने लगे। तुरंत बिल तैयार करने की व्यवस्था भी विकसित हुई। इसके बावजूद एक कमी बनी रही। उपभोक्ता को महीने के अंत में ही पता चलता था कि उसने कितनी बिजली खर्च की। प्रतिदिन अपनी खपत जानने और उसे नियंत्रित करने का अवसर उसके पास नहीं था।

    यहीं से स्मार्ट मीटर की आवश्यकता महसूस हुई। वर्ष 2001 में इटली ने बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर का उपयोग शुरू किया। आज दुनिया के अधिकांश विकसित और अनेक विकासशील देशों में स्मार्ट मीटर बिजली व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

    पारंपरिक मीटर और स्मार्ट मीटर के बीच सबसे बड़ा अंतर सूचना के प्रवाह का है। स्मार्ट मीटर से डेटा कंपनी के सर्वर तक पहुंच जाता है। जहां यह सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ता भी मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी बिजली खपत का विवरण देख सकता है। अर्थात अब बिजली की जानकारी केवल बिजली कंपनी के पास ही नहीं रहती, बल्कि उपभोक्ता के हाथ में भी आ गई है।

    स्मार्ट मीटर पहली बार उपभोक्ता को अपनी बिजली खपत को नियमित रूप से देखने और समझने का अवसर देता है। इससे बिलिंग प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होती है और आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता स्वयं भी अपनी खपत का मिलान कर सकता है। उसे केवल महीने के अंत में आने वाले बिल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

    भारत सरकार ने वर्ष 2021 में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) प्रारंभ की, जिसके अंतर्गत देशभर में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2023-24 से इसका क्रियान्वयन प्रारंभ हुआ। आज प्रदेश के लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं में से 41 लाख से अधिक घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।

    स्मार्ट मीटर का कार्य केवल उपभोक्ता की वास्तविक बिजली खपत को दर्ज करना है। उपभोक्ताओं की शंकाओं के समाधान के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने चार हजार से अधिक घरों में समानांतर चेक मीटर लगाकर दोनों मीटरों की खपत का परीक्षण किया। जांच में दोनों मीटरों की दर्ज खपत समान पाई गई।

    वर्तमान में बिजली बिल बढ़ने की शिकायतों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली की खपत बढ़ जाती है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस वर्ष अप्रैल, मई और जून में अधिक गर्मी दर्ज की गई। ऐसे में अनेक उपभोक्ताओं की बिजली खपत बढ़ी, जिसका सीधा प्रभाव उनके बिजली बिल पर पड़ा। कई उपभोक्ता 400 यूनिट की सीमा पार कर एम-ऊर्जा (हाफ बिजली) योजना के दायरे से बाहर हो जाते हैं। वहीं कुछ मामलों में स्वीकृत भार से अधिक लोड उपयोग करने पर अधिकतम मांग (मैक्सिमम डिमांड) से संबंधित प्रभार भी बिल में जुड़ जाता है। इन परिस्थितियों को स्मार्ट मीटर से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

    स्मार्ट मीटर होने से ही उपभोक्ता अपने छतों पर लगे सोलर प्लांट से उत्पादित बिजली की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से रूफटॉप सोलर अपनाकर उपभोक्ता अपनी बिजली आवश्यकता का बड़ा हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं। इससे बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और कई मामलों में यह लगभग शून्य तक भी पहुंच सकता है।

    आज आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक विकास का आधार विश्वसनीय विद्युत व्यवस्था है। बिजली केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था का सुदृढ़ होना आवश्यक है। बिजली की चोरी और दुरुपयोग का नुकसान अंततः पूरे समाज को उठाना पड़ता है। पारदर्शी और उत्तरदायी विद्युत व्यवस्था हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

    स्मार्ट मीटर केवल एक मीटर नहीं, बल्कि पारदर्शी और जवाबदेह बिजली व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह वास्तविक बिजली खपत का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध कराता है और उपभोक्ता को अपनी खपत समझने में सहायता करता है। यह उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की सूचना प्रदान करने का सशक्त माध्यम है, यह बिजली की सूचना का अधिकार प्रदान करता है, क्योंकि सही सूचना ही आज सबसे बड़ी शक्ति है।

    गोविन्द पटेल (उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क), छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़, रायपुर)

  • सरकारी पैसे में गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन! चार पूर्व सरपंचों के खिलाफ सिविल जेल वॉरंट, कार्रवाई की आहट मिलते ही 22 लाख रुपये से ज्यादा की राशि तत्काल जमा

    सरकारी पैसे में गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन! चार पूर्व सरपंचों के खिलाफ सिविल जेल वॉरंट, कार्रवाई की आहट मिलते ही 22 लाख रुपये से ज्यादा की राशि तत्काल जमा

    पंचायती राज अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई, चार पूर्व सरपंचों के विरुद्ध सिविल जेल वॉरंट जारी

    कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर एसडीएम आरंग ने की बड़ी कार्रवाई

    कार्रवाई के बाद दो पूर्व सरपंचों ने जमा की 22 लाख रुपये से अधिक की बकाया राशि

    रायपुर : कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर आरंग एसडीएम श्रीमती अभिलाषा पैकरा ने शासकीय राशि की वसूली के प्रकरणों में चार पूर्व सरपंचों के विरुद्ध वॉरंट जारी किया है। जारी वॉरंट के तहत केंद्रीय जेल अधीक्षक को संबंधित पूर्व सरपंचों को अधिकतम 30 दिनों की अवधि तक अथवा बकाया राशि पूर्ण रूप से जमा किए जाने तक सिविल कारागार में सुपुर्द किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें ग्राम पंचायत नगरपुरा की पूर्व सरपंच राजकुमारी साहू, ग्राम पंचायत नकटा के पूर्व सरपंच गोपाल चतुर्वेदी, ग्राम पंचायत देवदा के पूर्व सरपंच रोशन मिश्रा तथा ग्राम पंचायत राखी की पूर्व सरपंच चितरेखा साहू शामिल हैं।

    एसडीएम श्रीमती पैकरा ने बताया कि पंचायती राज अधिनियम के तहत संबंधित पूर्व सरपंचों को शासकीय राशि की वसूली के आदेश पारित किए गए थे। इसके तहत राजकुमारी साहू से 4.09 लाख रुपए, गोपाल चतुर्वेदी से 18 लाख 23 हजार 880 रुपए, रोशन मिश्रा से 18 लाख 84 हजार 773 रुपए तथा 50 हजार 300 रुपए और चितरेखा साहू से 2 लाख 9 हजार 324 रुपए की वसूली के आदेश जारी किए गए थे। सभी सरपंचों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन उनके द्वारा संतोषजनक एवं वैधानिक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद उनके विरुद्ध वॉरंट जारी करने की कार्रवाई की गई। वॉरंट जारी होने के पश्चात पूर्व सरपंच गोपाल चतुर्वेदी और चितरेखा साहू ने 22 लाख 33 हज़ार 204 रुपये बकाया राशि जमा कर दी है।

    उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत नगरपुरा की पूर्व सरपंच राजकुमारी साहू के प्रकरण में मुक्तिधाम शेड निर्माण, ग्राम पंचायत नकटा के पूर्व सरपंच गोपाल चतुर्वेदी के प्रकरण में आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1, पक्की नाली निर्माण, पेवर ब्लॉक सड़क निर्माण एवं मशरूम शेड निर्माण से संबंधित कार्य शामिल थे। इसी प्रकार ग्राम पंचायत देवदा के पूर्व सरपंच रोशन मिश्रा के प्रकरण में बिना प्रस्ताव के 14वें वित्त की राशि 10 लाख 82 हजार 785 रुपए, स्वच्छ भारत मिशन की राशि 6 लाख 69 हजार 988 रुपए नगर तथा बिना शौचालय निर्माण के हितग्राहियों की 1 लाख 32 हजार रुपए के कार्य, हैंडपंप, बोर खनन, सोखता गड्ढा एवं स्वच्छता संबंधी कार्यों एवं ग्राम पंचायत राखी की पूर्व सरपंच चितरेखा साहू के प्रकरण में मंदिर स्ट्रक्चर निर्माण सहित अन्य कार्य शामिल थे। संबंधित कार्यों के पूर्ण नहीं होने के कारण वसूली के आदेश जारी किए गए थे।

  • गधीया आर्द्रभूमि में प्रकृति का दुर्लभ संगम: एक साथ दिखीं स्पॉट-बिल्ड डक और लेसर व्हिस्लिंग डक, पक्षी प्रेमियों ने कैमरे में कैद किया मनमोहक नज़ारा

    गधीया आर्द्रभूमि में प्रकृति का दुर्लभ संगम: एक साथ दिखीं स्पॉट-बिल्ड डक और लेसर व्हिस्लिंग डक, पक्षी प्रेमियों ने कैमरे में कैद किया मनमोहक नज़ारा

    गधीया आर्द्रभूमि में एक साथ दिखीं स्पॉट-बिल्ड डक और लेसर व्हिस्लिंग डक

    पक्षी प्रेमियों ने कैमरे में कैद किया प्रकृति का मनोहारी दृश्य

    रायपुर : रायपुर जिले के धरसींवा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गोढ़ी की गधीया आर्द्रभूमि इन दिनों पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हाल ही में यहां स्पॉट-बिल्ड डक और लेसर व्हिस्लिंग डक को एक साथ आर्द्रभूमि के किनारे विचरण करते हुए देखा गया।

    पक्षी प्रेमियों ने सुबह के शांत वातावरण में दोनों प्रजातियों को बिना किसी हलचल के प्राकृतिक परिवेश में विश्राम और भोजन की तलाश करते हुए कैमरे में कैद किया। यह दृश्य आर्द्रभूमि की शांति और जैव विविधता को दर्शाता है।

    पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही आर्द्रभूमि में विभिन्न पक्षी प्रजातियों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण पक्षियों के लिए अनुकूल है। गधीया आर्द्रभूमि में उपलब्ध प्राकृतिक वनस्पति, जल और सुरक्षित परिवेश स्थानीय पक्षियों को आश्रय एवं भोजन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    ऐसे दृश्य स्थानीय आर्द्रभूमियों के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुदाय के सहयोग से इन आर्द्रभूमियों का संरक्षण जारी रहा, तो भविष्य में यहां और भी अनेक स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति देखने को मिल सकती है।

    गधीया आर्द्रभूमि में दिखाई देने वाले यह दुर्लभ दृश्य जिले की पारिस्थितिकी समृद्धि को दर्शाते हैं और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को बल देते हैं।

  • ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले— जनभागीदारी से ही बनेगा गौ संरक्षण जनआंदोलन, 1.64 लाख विद्यार्थियों ने दिया संस्कृति और वैज्ञानिक सोच का संदेश

    ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले— जनभागीदारी से ही बनेगा गौ संरक्षण जनआंदोलन, 1.64 लाख विद्यार्थियों ने दिया संस्कृति और वैज्ञानिक सोच का संदेश

    गौ संरक्षण जनभागीदारी से ही बनेगा जनआंदोलन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ, गौ विज्ञान परीक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित

    1.64 लाख से अधिक विद्यार्थियों की सहभागिता को बताया नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक सोच का सकारात्मक संकेत

    सुरभि गौधाम योजना, गौशालाओं को बढ़ी सहायता और डेयरी विकास से गौपालन को मिलेगा नया विस्तार

    रायपुर : गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशव्यापी ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।

    नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टि का सुंदर समन्वय

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण समृद्धि की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में गाय के वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की समझ विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा अत्यंत सराहनीय पहल है।

    उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष प्रदेश के स्कूलों एवं महाविद्यालयों के 1 लाख 64 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की सहभागिता यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और प्रकृति संरक्षण के प्रति सजग हो रही है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि वे समाज में गौ संरक्षण और संवर्धन के प्रभावी दूत बनेंगे।

    गौ संरक्षण को जनभागीदारी से मिलेगा स्थायी आधार

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौ संरक्षण के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवारों और आसपास के लोगों को गौसेवा एवं गौ संरक्षण के प्रति जागरूक करें तथा इस अभियान को घर-घर तक पहुंचाएं।

    न्योता भोज जैसी पहल सामाजिक सहभागिता का उदाहरण

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए शिक्षा सत्र के साथ प्रदेश में शाला प्रवेश उत्सव और न्योता भोज जैसी अभिनव पहल संचालित की जा रही हैं। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा माता-पिता की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर विद्यालयों में बच्चों के साथ भोजन कराने की परंपरा समाज और विद्यालय के बीच आत्मीय संबंध मजबूत कर रही है। इससे बच्चों को अतिरिक्त पोषण भी प्राप्त हो रहा है तथा समाज की भागीदारी भी बढ़ रही है।

    गोबर आधारित उत्पाद बन रहे रोजगार का नया माध्यम

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गाय से प्राप्त दूध, दही, गोबर और गोमूत्र सहित प्रत्येक उत्पाद मानव जीवन के लिए उपयोगी है। आज गोबर से अनेक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करेगी, जिससे गौपालन आय का सशक्त माध्यम बन सके।

    गौ संरक्षण के लिए सरकार के प्रभावी कदम

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पंजीकृत गौशालाओं में प्रति गाय चारे के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। साथ ही सुरभि गौधाम योजना के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौधाम विकसित किए जा रहे हैं, जहां पशु चिकित्सक, चरवाहे तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    बस्तर में डेयरी विकास का नया अध्याय

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त होने के साथ अब विकास का नया दौर प्रारंभ हुआ है। कृषि एवं पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से देसी गाय उपलब्ध कराने की योजना प्रारंभ की गई है।उन्होंने कहा कि इस योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब सरकार इस योजना का लाभ अन्य इच्छुक पशुपालकों, विशेषकर यादव समाज के लोगों तक भी पहुंचाने पर विचार कर रही है, जिससे डेयरी क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।

    गौ सेवा से संस्कृति और मूल्यों से जुड़ रही नई पीढ़ी : स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव

    स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा के माध्यम से हजारों बच्चों ने गौमाता के महत्व को समझा है। यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गौ संरक्षण के लिए गौ अभ्यारण्य विकसित कर रही है, जहां गौवंश के लिए पर्याप्त चारा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। देसी गाय के शुद्ध दूध के उत्पादन को बढ़ावा देकर आर्थिक स्वावलंबन के साथ जनस्वास्थ्य को भी मजबूती मिलेगी।

    भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचय करा रही है गौ विज्ञान परीक्षा

    गौ सेवा गतिविधि के अखिल भारतीय संयोजक श्री अजीत महापात्र ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को गाय के वैज्ञानिक महत्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो रहा है।

    गौ विज्ञान परीक्षा के विजेताओं का हुआ सम्मान

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गौ विज्ञान परीक्षा के तीनों वर्गों के विजेताओं को सम्मानित किया। प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 51 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 31 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह परीक्षा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

    इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन जी महाराज, छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष श्री सुधीर गौतम, श्री चंद्रशेखर देवांगन, श्री आत्मबोध अग्रवाल, श्री मनोज पांडेय, श्री गोपाल यादव सहित छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के पदाधिकारी, प्रदेशभर से आए गौ विज्ञान परीक्षा के प्रतिभागी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • डिजिटल पुलिसिंग को मिलेगी नई रफ्तार: CCTNS समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने कमजोरियों पर जताई सख्ती, समयबद्ध चालान और ई-एविडेंस पर विशेष जोर

    डिजिटल पुलिसिंग को मिलेगी नई रफ्तार: CCTNS समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने कमजोरियों पर जताई सख्ती, समयबद्ध चालान और ई-एविडेंस पर विशेष जोर

    मुख्य सचिव श्री विकास शील ने गृह विभाग की राष्ट्रीय अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम संबंधी बैठक ली

    छत्तीसगढ़ के CCTNS डैशबोर्ड स्कोर में सुधार के दिए कड़े निर्देश

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकास शील ने आज मंत्रालय महानदी भवन में गृह विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) के डैशबोर्ड की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में राज्य के कमजोर बिंदुओं को चिन्हित कर उनमें त्वरित सुधार करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के डीजीपी श्री अरुण देव गौतम भी विशेष रूप से मौजूद थे।

    स्टेट स्कोरकार्ड में मिले 64.97 अंक, प्रशासनिक सुधार में पूर्ण अंक

     बैठक के दौरान अधिकारियों द्वारा जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी नवीनतम स्टेट स्कोरकार्ड में छत्तीसगढ़ को 100 में से 64.97 अंक प्राप्त हुए हैं। हालांकि राज्य ने ‘प्रशासनिक सुधार’ और ‘मेडलीगल रिपोर्ट पोर्टल’ के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पूर्ण अंक हासिल किए हैं।

    जीरो एफआईआर और ई-चार्जशीट को सुदृढ़ करने पर जोर

     मुख्य सचिव श्री विकास शील ने कानून व्यवस्था और डिजिटल पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया कि जीरो एफआईआर और ई-चार्जशीट की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनाया जाए। न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ‘न्याय श्रुति प्रणाली’ को शीघ्र अति शीघ्र प्रारंभ किया जाए। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए निर्धारित 60 एवं 90 दिवस के भीतर हर हाल में न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जाए। डिजिटल साक्ष्यों की महत्ता को देखते हुए ई-साक्ष्य (E-Evidence) के उपयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

     डैशबोर्ड की समीक्षा के दौरान पुलिस और गृह विभाग के समन्वय पर विशेष बल दिया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक में गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, गृह विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता सहित कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।