Category: छत्तीसगढ

  • तिरंगे की शान में एकजुट हुआ सारंगढ़! मंत्री टंक राम वर्मा ने किया घर-घर तिरंगा फहराने का आह्वान, ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंजे शहर के रास्ते

    तिरंगे की शान में एकजुट हुआ सारंगढ़! मंत्री टंक राम वर्मा ने किया घर-घर तिरंगा फहराने का आह्वान, ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंजे शहर के रास्ते

    घर-घर आन-बान और शान से फहराएं तिरंगा- मंत्री टंक राम वर्मा

    सारंगढ़ में गूंजे देशभक्ति के नारे

    मंत्री श्री टंक राम वर्मा की अगुवाई में निकली भव्य तिरंगा यात्रा

    रायपुर : देशभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने और स्वच्छता के प्रति जनचेतना को सशक्त बनाने के लिए तिरंगा रैली में नागरिक बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे है। उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा की अगुवाई में आज सारंगढ़ में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। भारत माता की पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुई यह यात्रा भारत माता चौक, नंदा चौक और अटल परिसर से होते हुए रानी लक्ष्मी बाई कॉम्प्लेक्स पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान हजारों स्कूली बच्चों के ‘भारत माता की जय’ और ‘जय जवान, जय किसान’ के ओजस्वी नारों से पूरा शहर देशभक्ति के रंग में रंग गया।

     तिरंगा यात्रा के समापन अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने नागरिकों से अपने-अपने घरों पर शान से तिरंगा लहराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। तिरंगा हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान है, जिसकी रक्षा के लिए लाखों देशभक्तों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इसका चक्र हमारे देश और प्रदेश की निरंतर प्रगति का प्रतीक है। जब बात तिरंगे की आती है, तो हम सभी जाति, पात और धर्म से ऊपर उठकर एक हो जाते हैं। उन्होंने झांसी की रानी, मंगल पांडे और भगत सिंह जैसे अमर बलिदानियों को नमन करते हुए उनके पदचिह्नों पर चलने की प्रेरणा दी।

     कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष,पूर्व विधायक श्रीमती केराबाई मनहर, पूर्व सैनिकगण, जनप्रतिनिधि, कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक,गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित थे।

  • ड्रोन सर्वे से बदलेगी गांवों की तस्वीर! ग्रामीणों को मिलेगा कानूनी संपत्ति अधिकार, छत्तीसगढ़ में 10 लाख स्वामित्व कार्ड बांटने का बड़ा लक्ष्य, सारंगढ़ में मंत्री टंक राम वर्मा ने बांटे अधिकार अभिलेख

    ड्रोन सर्वे से बदलेगी गांवों की तस्वीर! ग्रामीणों को मिलेगा कानूनी संपत्ति अधिकार, छत्तीसगढ़ में 10 लाख स्वामित्व कार्ड बांटने का बड़ा लक्ष्य, सारंगढ़ में मंत्री टंक राम वर्मा ने बांटे अधिकार अभिलेख

    स्वामित्व योजना से बदलेगी गांवों की तस्वीर: मंत्री टंक राम वर्मा ने

    सारंगढ़ में वितरित किए अधिकार अभिलेख; 10 लाख कार्ड वितरण का लक्ष्य

    रायपुर : स्वामित्व योजना ड्रोन तकनीक और आधुनिक मैपिंग के जरिए ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रही है। इसके तहत छत्तीसगढ़ समेत देशभर के गांवों में आबादी क्षेत्र की संपत्तियों का सटीक सर्वेक्षण कर ग्रामीणों को कानूनी मालिकाना हक वाला प्रॉपर्टी कार्ड दिया जा रहा है, जिससे भूमि विवाद कम हो रहे हैं और बैंक ऋण मिलना आसान हुआ है।

    राज्य सरकार द्वारा स्वामित्व योजना 10 लाख के कार्ड वितरण का लक्ष्य

     राज्य के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने सारंगढ़ स्थित मंडी प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में श्स्वामित्व योजनाश् के अंतर्गत नागरिकों को अधिकार अभिलेख (स्वामित्व कार्ड) प्रदान किए। इस अवसर पर मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब तक स्वामित्व योजना के तहत 4 लाख अधिकार अभिलेखों का वितरण किया जा चुका है। राज्य सरकार ने 10 लाख कार्ड वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे आगामी वर्ष तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नवगठित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में अब तक 15 हजार स्वामित्व कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। मंत्री वर्मा ने नागरिकों से अपने स्वामित्व कार्ड को सुरक्षित रखने का आग्रह किया।

    वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी राज्य बनाने प्रतिबद्ध

     मंत्री श्री वर्मा ने राज्य सरकार की उपलब्धियों और विकास प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार सबका साथ, सबका विकास के ध्येय वाक्य पर निरंतर कार्य कर रही है। पदभार संभालते ही सरकार ने 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए हैं। इसके अलावा महतारी वंदन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन से राज्य में प्रगति के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त कराने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। सरकार विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

     इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य,पूर्व विधायक श्रीमती केराबाई मनहर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक व ग्रामीण उपस्थित थे।

  • हरेली पर किसानों को बड़ा तोहफा! औषधीय पौधों की खेती के लिए ₹54.36 लाख की अग्रिम प्रोत्साहन राशि, कम लागत में बढ़ेगी किसानों की कमाई

    हरेली पर किसानों को बड़ा तोहफा! औषधीय पौधों की खेती के लिए ₹54.36 लाख की अग्रिम प्रोत्साहन राशि, कम लागत में बढ़ेगी किसानों की कमाई

    औषधि पौधों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम: वन मंत्री केदार कश्यप

    हरेली तिहार पर किसानों को बड़ा उपहार: औषधि पौधों की खेती के लिए 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित

    रायपुर : पारंपरिक फसलों की तुलना में औषधीय पौधों की खेती में कम लागत, कम पानी और कम रासायनिक खादों की आवश्यकता होती है, जबकि राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उच्च मांग के कारण किसानों को कई गुना अधिक मुनाफा मिलता है। अश्वगंधा, शतावर, एलोवेरा, तुलसी और लेमनग्रास जैसी फसलें कम जोस और खर्च में किसानों की आय बढ़ाने का बेहतरीन विकल्प हैं।

     हरेली तिहार की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ शासन ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया। वन विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा आयोजित कार्यक्रम में नारायणपुर (अबूझमाड़) और धमतरी जिले के किसानों तथा स्व-सहायता समूहों को कुल 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की गई।

     वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप आज राजधानी स्थित राज्य वन अनुसंधान भवन जीरो पॉइंट में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने की और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला तथा विधायक श्री अनुज शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

    किसानों को औषधि पौधों की खेती के लिए अग्रिम राशि देना हरेली तिहार का उपहार

     कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि औषधि पौधों की खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक लाभ वाला विकल्प बनकर उभर रही है। इसमें पानी की आवश्यकता कम होती है, कीटनाशकों पर खर्च नहीं के बराबर होता है और खेत की मेड़ों पर औषधीय पौधे लगाकर अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन और कृषि संस्कृति से जुड़ा पर्व है। इस अवसर पर किसानों को औषधि पौधों की खेती के लिए अग्रिम राशि देना वास्तव में हरेली तिहार का उपहार है, जो किसानों को नई आर्थिक ताकत देगा। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप का स्वागत बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला और बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार खुमरी की माला और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।

    दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य

     कार्यक्रम में बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बोर्ड वनौषधियों के संरक्षण, संवर्धन, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, वैद्यों के क्षमता विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी लगभग 50 दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य भी प्रारंभ किया गया है।

    हमारी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली का आधार वनौषधि

     बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने कहा कि वनौषधियों का महत्व हमारी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणाली का आधार है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग प्राकृतिक औषधीय पौधों का उपयोग करते हैं और यही हमारी स्वास्थ्य परंपरा की सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम में बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि बोर्ड औषधीय पौधों की खेती को मिशन मोड में बढ़ावा दे रहा है। किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं और उपज की खरीद की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाती है, जिससे उन्हें खेती में किसी प्रकार की विपणन कठिनाई का सामना न करना पड़े।

     कार्यक्रम में नारायणपुर (अबूझमाड़) के 25 किसान, धमतरी जिले के 18 किसान और 43 स्व-सहायता समूहों को कुल 54.36 लाख रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। यह राशि बोर्ड द्वारा अनुबंधित संस्थाओं मेसर्स स्टीविया और इंस्टा हर्ब्स के माध्यम से दी गई, ताकि किसान बिना आर्थिक कठिनाई के औषधीय पौधों की खेती शुरू कर सकें। यह पहल न केवल औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपराओं को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

  • कल से गूंजेगा बस्तर दशहरा का जयघोष! 75 दिनों तक निभेंगी सदियों पुरानी परंपराएं, मां दंतेश्वरी मंदिर में पाट जात्रा पूजा से होगा भव्य आगाज

    कल से गूंजेगा बस्तर दशहरा का जयघोष! 75 दिनों तक निभेंगी सदियों पुरानी परंपराएं, मां दंतेश्वरी मंदिर में पाट जात्रा पूजा से होगा भव्य आगाज

    विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व, पाट जात्रा पूजा विधान के साथ कल से शुरू होगा

    75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक पर्व में निभाई जाएंगी पारंपरिक रस्में, दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में होगा आयोजन

    रायपुर : बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर प्रांगण में कल बुधवार, 12 अगस्त को हरेली अमावस्या के पावन अवसर पर पाट जात्रा पूजा विधान के साथ विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का आगाज होने जा रहा है। इस दौरान पारंपरिक मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और सेवादार रथ निर्माण के लिए औजार बनाने की श्ठुरलू खोटलाश् रस्म अदा करेंगे। बस्तर दशहरा समिति ने सभी सेवादारों, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों को इस पूजा विधान में शामिल होने का आग्रह किया है।

     75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा का मुख्य कार्यक्रम जारी किया गया है, जिसके तहत 12 अगस्त बुधवार से पाट जात्रा पूजा विधान दशहरा पर्व का शुभारंभ, 24 सितम्बर गुरूवार को डेरी गड़ाई पूजा विधान, 10 अक्टूबर शनिवार को काछनगादी पूजा विधान, 11 अक्टूबर रविवार को कलश स्थापना पूजा विधान, 12 अक्टूबर सोमवार को जोगी बिठाई पूजा विधान के रस्म का आयोजन किया जाएगा। इसी प्रकार 13 अक्टूबर से 18 अक्टूबर को प्रतिदिन नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा पूजा विधान, 18 अक्टूबर रविवार को सुबह 11 बजे बेल पूजा विधान, 19 अक्टूबर सोमवार को महाअष्टमी पूजा विधान एवं निशा जात्रा पूजा विधान, 20 अक्टूबर मंगलवार को कुंवारी पूजा विधान, जोगी उठाई पूजा विधान एवं मावली परघाव का आयोजन किया जाएगा।

     21 अक्टूबर बुधवार को भीतर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा, 22 अक्टूबर गुरूवार को बाहर रैनी पूजा विधान एवं रथ परिक्रमा, 23 अक्टूबर शुक्रवार को सुबह काछन जात्रा पूजा विधान, दोपहर में ऐतिहासिक मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। 24 अक्टूबर शनिवार कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई, 27 अक्टूबर मंगलवार मावली माता की डोली की विदाई पूजा विधान के साथ पर्व का औपचारिक समापन किया जाएगा। मां दंतेश्वरी को समर्पित यह 75 दिवसीय दशहरा पर्व अपनी अनूठी लोक-परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और भव्य रस्मों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

  • आधार की गलती से अटकी छात्रवृत्ति, बैंक खाता भी नहीं खुल रहा था! सेवा सेतु केंद्र ने किया समाधान, डॉली गंधर को मिली बड़ी राहत

    आधार की गलती से अटकी छात्रवृत्ति, बैंक खाता भी नहीं खुल रहा था! सेवा सेतु केंद्र ने किया समाधान, डॉली गंधर को मिली बड़ी राहत

    सेवा सेतु केंद्र से डॉली गंधर की आधार संबंधी समस्या का हुआ समाधान

    नाम में त्रुटि सुधरने से बैंक खाता खुलने और छात्रवृत्ति प्राप्त करने की राह हुई आसान

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नागरिक सेवाओं को सरल, सुलभ और सुविधाजनक बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का लाभ आम लोगों को मिल रहा है। सेवा सेतु केंद्रों के माध्यम से दस्तावेज संबंधी समस्याओं के निराकरण सहित विभिन्न शासकीय सेवाओं से जुड़ी सुविधाएं नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे लोगों को शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में आ रही कठिनाइयों का स्थानीय स्तर पर समाधान मिल रहा है।

    इसी क्रम में सरगुजा जिले के अम्बिकापुर निवासी सुश्री डॉली गंधर के आधार कार्ड में दर्ज नाम की त्रुटि का निराकरण सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से किया गया। आधार कार्ड में नाम गलत दर्ज होने के कारण उन्हें बैंक खाता खुलवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। बैंक खाता नहीं होने से छात्रवृत्ति का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही थी।

    अपनी समस्या के समाधान के लिए डॉली गंधर ने सेवा सेतु केंद्र में आवेदन प्रस्तुत किया। आवश्यक दस्तावेजों एवं निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर उनके आधार कार्ड में नाम संबंधी त्रुटि को सुधारा गया। नाम में सुधार होने के बाद अब उनके लिए बैंक खाता खुलवाने की प्रक्रिया आसान हो गई है। साथ ही छात्रवृत्ति प्राप्त करने में आ रही दस्तावेज संबंधी बाधा भी दूर हो गई है।

    डॉली गंधर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आधार कार्ड में नाम की त्रुटि के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही थी। बैंक खाता नहीं खुल पाने के कारण छात्रवृत्ति का लाभ लेने में भी दिक्कत आ रही थी। सेवा सेतु केंद्र में आवेदन देने के बाद उनकी समस्या का समाधान हो गया है। अब वे आसानी से बैंक खाता खुलवा सकेंगी और छात्रवृत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा सकेंगी। उन्होंने सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से समस्या का समाधान होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा से नागरिकों को दस्तावेज संबंधी समस्याओं के निराकरण में काफी मदद मिल रही है। उन्होंने सेवा सेतु केंद्र की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

    दस्तावेज संबंधी समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका

    सेवा सेतु केंद्र नागरिकों के लिए विभिन्न शासकीय सेवाओं तक आसान पहुंच का माध्यम बन रहे हैं। दस्तावेजों में त्रुटि के कारण बैंकिंग, छात्रवृत्ति और अन्य शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में आने वाली कठिनाइयों के समाधान में इन केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। डॉली गंधर का मामला इसका उदाहरण है, जहां आधार कार्ड में नाम की त्रुटि सुधरने के बाद उनके लिए बैंक खाता और छात्रवृत्ति से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाने का मार्ग सुगम हुआ है।

    छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप सेवा सेतु केंद्र नागरिकों को सुविधाजनक, पारदर्शी और सुलभ सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। डिजिटल और नागरिक-केंद्रित सेवा व्यवस्था के विस्तार से आमजन को शासकीय सेवाओं का लाभ लेने में समय और परेशानी दोनों से राहत मिल रही है।

  • सब्जियों की खेती छोड़ मक्का ने बदली शुभम दुबे की राह! उन्नत बीज, खाद और तकनीकी मदद से बढ़ी उम्मीद, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन बना नई ताकत

    सब्जियों की खेती छोड़ मक्का ने बदली शुभम दुबे की राह! उन्नत बीज, खाद और तकनीकी मदद से बढ़ी उम्मीद, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन बना नई ताकत

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन का कमाल : उन्नत मक्का बीज और कृषि सहायता से संवरी कृषक शुभम दुबे की राह

    रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत राज्य के कृषकों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और आवश्यक कृषि आदान (उर्वरक व दवाएं) उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर नजर आने लगे हैं।

    मक्का की खेती से शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह

     राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अधिक उत्पादन देने वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की खुशहाली को नई गति मिल रही है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कृष्णापुर निवासी कृषक शुभम दुबे की जिंदगी में नया उत्साह देखने को मिल रहा है। शुभम दुबे ने अपनी लगभग दो एकड़ भूमि पर मक्का की खेती की है। कृषि विभाग की ओर से उन्हें उन्नत किस्म के मक्का बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण के लिए आवश्यक दवाएं प्रदान की गई थीं।

    सब्जियों से मक्का की ओर रुख, बढ़ी उत्पादन और आय की उम्मीद

     कृषक शुभम दुबे ने बताया कि पहले वे अपने खेत में पारंपरिक रूप से सब्जियों की खेती किया करते थे, लेकिन उससे अपेक्षित उत्पादन और लाभ नहीं मिल पाता था। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन से जुड़कर जब उन्होंने उन्नत किस्म के बीज और पोषण प्रबंधन के साथ मक्का लगाया, तो पौधों का विकास काफी तेजी से हुआ। खरपतवार नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाओं के इस्तेमाल से फसल को पनपने का पूरा अवसर मिला। शुभम दुबे का कहना है कि फसल समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ तैयार हो रही है, जिससे उन्हें बाजार में सही समय पर उपज बेचकर अच्छा दाम मिलने की पूरी उम्मीद है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

    मुख्यमंत्री एवं शासन का जताया आभार

     कृषि विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन और समय पर प्राप्त सहायता से उत्साहित होकर शुभम दुबे ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ शासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से छोटे और पारंपरिक किसानों को खेती की नई दिशा मिल रही है और उनका कृषि के प्रति भरोसा बढ़ा है।

  • केंद्र की योजनाओं पर मुख्य सचिव का बड़ा एक्शन! लाभार्थियों और वेंडर्स का भुगतान समय पर करने के निर्देश, फंड ट्रांसफर में तेजी और पारदर्शिता पर जोर

    केंद्र की योजनाओं पर मुख्य सचिव का बड़ा एक्शन! लाभार्थियों और वेंडर्स का भुगतान समय पर करने के निर्देश, फंड ट्रांसफर में तेजी और पारदर्शिता पर जोर

    रायपुर : मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में विभिन्न विभागों के अंतर्गत संचालित की जा रही केंद्र प्रवर्तित योजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के लाभार्थियों और विभिन्न वेंडर्स को समय पर भुगतान हो इसके लिए सभी जरूरी कार्य करें। योजनाओं के अंतर्गत सभी जरूरी स्वीकृतियां निर्धारित समयावधि में लेना चाहिए, इसके लिए सिस्टमैटिक सिस्टम होना चाहिए। योजनाओं का इंपलिमेंनटेशन हो इसकी मॉनिटरिंग अधिकारी करें।

     बैठक में विभिन्न विभागों के अंतर्गत केंद्र प्रयोजित योजनाओं (सीएसएस) के लिए एस. एन. ए. स्पर्श ऑन बोर्डिंग स्थिति की समीक्षा की गई। एस. एन. ए. एक डिजिटल प्रणाली है जो केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों में संचालित की जा रही है, जिसमें मनरेगा समेत कई केंद्रीय योजनाओं के तहत फंड ट्रांसफर किया जाता है। यह प्रणाली फंड के दुरुपयोग को रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसी तरह से योजनाओं की मातृ स्वीकृतियों और लंबित परिचालन की समीक्षा हुई। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को योजनाओं की ऑन बोर्डिंग करने के लिए निर्धारित कार्यवाही पूर्ण करने एवं योजनाओं के अंतर्गत सभी भुगतानों प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सभी विभागों को कार्ययोजना बनाने कहा है। वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के संबंध में विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया।

     बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, उद्योग एवं वाणिज्य एवं सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव श्री भूवनेश यादव, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, विशेष सचिव वित्त श्री चंदन कुमार सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

  • पानी के बर्तनों का सफर थमा, नलों से शुरू हुई नई जिंदगी! जल जीवन मिशन ने बदली सेवैयाकला की तस्वीर, ₹81.52 लाख की योजना से 185 घर हुए ‘हर घर जल’ से जुड़े

    पानी के बर्तनों का सफर थमा, नलों से शुरू हुई नई जिंदगी! जल जीवन मिशन ने बदली सेवैयाकला की तस्वीर, ₹81.52 लाख की योजना से 185 घर हुए ‘हर घर जल’ से जुड़े

    जब आंगन में छलका पानी बदल गई जिंदगानी

    गलियों में पानी के बर्तनों का सफर थमा, अब हर सुबह नल की धार से शुरू होती है कहानी

    रायपुर :. सुबह के वक्त अब सेवैयाकला की गलियों में पानी का बर्तन लिए महिलाओं की कतारें दिखाई नहीं देतीं। घरों के आंगन में लगे नल खुलते हैं और साफ पानी की धार बहने लगती है। बच्चों के हाथों में अब पानी से भरी बाल्टियां नहीं, स्कूल का बस्ता है। यह बदलाव अचानक नहीं आया। यह उस योजना का परिणाम है, जिसने पानी को सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान और राहत से जोड़ दिया है।

    महासमुंद के पिथौरा विकासखंड के ग्राम पंचायत टेका के आश्रित गांव सेवैयाकला ने इस साल जून में ‘हर घर जल’ का लक्ष्य हासिल कर लिया। जल जीवन मिशन के तहत अब गांव के सभी 185 घरों तक नियमित रूप से नल से स्वच्छ पेयजल पहुंच रहा है। गांववालों के लिए यह केवल एक सरकारी उपलब्धि नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में आया ऐसा बदलाव है, जिसे वे हर सुबह महसूस करते हैं।

    गांव की देविका साहू मुस्कराते हुए कहती हैं, “पहले पानी लाना ही सबसे बड़ा काम था। गर्मी में तो कई बार आधा दिन इसी में निकल जाता था। अब नल खोलते ही पानी मिल जाता है। समय भी बचता है और चिंता भी खत्म हो गई है।” उनकी बात सुनते हुए आसपास खड़ी महिलाएं भी सहमति में सिर हिलाती हैं। गांव में शायद ही कोई ऐसा परिवार हो, जिसकी दिनचर्या इस बदलाव से अछूती रही हो।

    दरअसल, पानी केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं होता। गांवों में यह महिलाओं के श्रम, बच्चों के समय और पूरे परिवार के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है। सेवैयाकला में नल से जल पहुंचने के बाद यही बदलाव सबसे स्पष्ट दिखाई देता है। सुबह के जिन घंटों में पहले पानी की जद्दोजहद होती थी, अब वही समय बच्चों की पढ़ाई, खेती-किसानी और घरेलू कामों में लग रहा है।

    इस बदलाव के पीछे जल जीवन मिशन के तहत 81 लाख 52 हजार रुपए की लागत से तैयार की गई जलापूर्ति व्यवस्था है। गांव में 40 किलोलीटर क्षमता की ऊंची पानी टंकी बनाई गई है। 3825 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन पहुंचाया गया है। प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र को भी इसी व्यवस्था से जोड़ा गया है, जिससे बच्चों को भी स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

    सरपंच श्रीमती कमली बसंत और सचिव श्रीमती हेमलता साहू के नेतृत्व में योजना को समय पर पूरा किया गया। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि गांव ने इसे केवल सरकारी योजना मानकर नहीं छोड़ा। इसके संचालन और रखरखाव के लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति बनाई गई है। जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन-संधारण के लिए हर परिवार 60 रुपए प्रतिमाह दे रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में भी निर्बाध पानी मिलता रहे। गांव के मिथिलेश बसंत प्रतिदिन तय समय पर पंप संचालन कर पूरे गांव तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

    सेवैयाकला की कहानी बताती है कि विकास केवल आंकड़ों में नहीं दिखता, वह लोगों की बदली हुई दिनचर्या में दिखाई देता है। जब किसी महिला को पानी के लिए कई किलोमीटर नहीं चलना पड़ता, जब बच्चे पानी ढोने की जगह समय पर स्कूल पहुंचते हैं और जब हर घर में बिना चिंता के स्वच्छ पानी उपलब्ध होता है, तभी किसी योजना की असली सफलता दिखाई देती है।

    आज सेवैयाकला में बहता पानी केवल नलों से नहीं आ रहा, बल्कि वह ग्रामीण जीवन में सुविधा, स्वास्थ्य और सम्मान का नया भरोसा भी लेकर आया है। जल जीवन मिशन की यह सफलता केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलाव की जीवंत मिसाल है।

  • अब कांकेर की खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच! फुटबॉल-क्रिकेट से लेकर बैडमिंटन और कुश्ती तक आधुनिक सुविधाओं से सजा मिनी स्टेडियम-इनडोर हॉल, अरुण साव ने किया शुभारंभ

    अब कांकेर की खेल प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच! फुटबॉल-क्रिकेट से लेकर बैडमिंटन और कुश्ती तक आधुनिक सुविधाओं से सजा मिनी स्टेडियम-इनडोर हॉल, अरुण साव ने किया शुभारंभ

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बहुउद्देशीय मिनी स्टेडियम और इनडोर हॉल का किया लोकार्पण

    नगरवासियों को मिलेंगी खेल एवं अन्य गतिविधियां संचालित करने की सुविधा

    उप मुख्यमंत्री विद्यार्थियों से हुए रू-ब-रू, कहा वीर शहीदों की शहादत व उनके सपनों को संजोकर रखने की जिम्मेदारी आप सब की

    रायपुर : उप मुख्यमंत्री तथा कांकेर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने आज कांकेर में तिरंगा यात्रा के समापन अवसर पर मेलाभाठा के समीप नवनिर्मित मिनी स्टेडियम एवं बहुउद्देशीय इनडोर हॉल का लोकार्पण किया। उन्होंने फुटबॉल को किक कर गोल दागकर खेल मैदान का शुभारंभ किया। श्री साव ने कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तिरंगा यात्रा देश की स्वाधीनता, आत्मनिर्भरता और महान क्रांतिकारियों के अमर बलिदानों का पर्याय है। उनके सपनों को संजोकर व सहेजकर रखने की जिम्मेदारी आप सभी के कंधों पर है।

    उप मुख्यमंत्री श्री साव ने नवनिर्मित मिनी स्टेडियम एवं बहुउद्देशीय इनडोर हॉल परिसर में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में कहा कि जिन महान देशभक्तों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को वर्षों की गुलामी से आजादी दिलाई, उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। क्रांतिवीरों के बलिदान से मिली आजादी के बाद देश को आत्मनिर्भर, विश्व गुरू और सोने की चिड़िया बनाने में निश्चित तौर पर विद्यार्थियों की बड़ी भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि इस मल्टीपरपज मिनी स्टेडियम के निर्माण से स्थानीय खेल प्रतिभाओं को व्यापक सुविधाएं मुहैया होंगी, साथ ही युवक-युवतियों को एक बेहतर प्लेटफॉर्म भी मिलेगा।

    श्री साव ने बताया कि हाल ही में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने वेट-लिफ्टिंग में रजत पदक हासिल किया, जो पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उम्मीद है कि कांकेर जिले की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं के लिए यह मिनी स्टेडियम एक बेहतर प्लेटफॉर्म साबित होगा। विधायक श्री आशाराम नेताम ने कार्यक्रम में नगरवासियों को बधाई देते हुए खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने तथा नगर को स्वच्छ व सुंदर बनाने की अपील की। कांकेर जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी तथा नगर पालिका के अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक ने भी नवनिर्मित मिनी स्टेडियम एवं इनडोर हॉल के लोकार्पण की बधाई देते हुए इसे कांकेर शहर के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर भी लोकार्पण कार्यक्रम में मौजूद थे।

    7 करोड़ की लागत से मल्टीपरपज मिनी स्टेडियम, 2.40 करोड़ से बना है बहुउद्देशीय इनडोर हॉल

    कांकेर में लगभग 7 करोड़ रुपए की लागत से इस मल्टीपरपज मिनी स्टेडियम तथा 2.40 करोड़ रुपए से बहुउद्देशीय इनडोर हॉल का निर्माण किया गया है। मिनी स्टेडियम में फुटबॉल ग्राउण्ड, क्रिकेट बॉक्स, बास्केटबॉल ग्राउण्ड, रनिंग ट्रैक सहित विभिन्न खेलों के नेट प्रैक्टिस की सुविधा है। इसी तरह मल्टीपरपज इनडोर हॉल में बैडमिंटन कोर्ट, टेबल टेनिस, कुश्ती सहित अलग-अलग खेलों के इनडोर अभ्यास की सुविधा है। आउटडोर जिम की भी सुविधा यहां है। इसके निर्माण से नगरवासियों को स्थानीय स्तर पर आधुनिक खेल मैदान एवं बेहतर तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    मिनी स्टेडियम परिसर में रोपे नारियल के पौधे

    उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और विधायक श्री आशाराम नेताम ने नवनिर्मित मिनी स्टेडियम एवं बहुउद्देशीय इनडोर हॉल परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत नारियल के पौधे लगाए। अन्य अतिथियों ने भी परिसर में पौधे रोपकर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया।

  • बस्तर में गूंजेगा तिरंगे का जयघोष! उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की मौजूदगी में दुर्गम इलाकों तक पहुंचेगी बाइक रैली, शहीद स्थलों पर होगा श्रद्धांजलि कार्यक्रम

    बस्तर में गूंजेगा तिरंगे का जयघोष! उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की मौजूदगी में दुर्गम इलाकों तक पहुंचेगी बाइक रैली, शहीद स्थलों पर होगा श्रद्धांजलि कार्यक्रम

    बस्तर तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा होंगे शामिल

    नक्सल प्रभाव से बाहर आए गांवों तक पहुंचेगी बाइक रैली

    महिला बाइकर्स भी होंगी सहभागी, शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि के साथ स्मृति के लिए मिट्टी का होगा संग्रहण

    रायपुर : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 से 15 अगस्त तक प्रस्तावित इस तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी शामिल होंगे। मोटरसाइकिलों के माध्यम से आयोजित होने वाली यह यात्रा बस्तर के उन क्षेत्रों और ग्रामों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं और अब शांति, सुरक्षा एवं विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं गौरव की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।

    बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है

     यात्रा का उद्देश्य बस्तर की बदलती तस्वीर को देश-दुनिया के सामने रखना, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना तथा नक्सल हिंसा में शहीद हुए वीर जवानों और नागरिकों के सर्वाेच्च बलिदान को नमन करना है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि बस्तर अब अमन, विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा माध्यम से अब तिरंगा बस्तर के कोने कोने तक फहराया जायेगा और भारत का संविधान भी राज्य के कोने कोने में लागू होने का संदेश सभी को दिया जाएगा।

    शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि, शहीद परिवारों का सम्मान

     तिरंगा यात्रा के दौरान उन स्थानों पर विशेष रूप से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां बड़े नक्सली हमले हुए अथवा व्यापक जनहानि हुई थी। प्रत्येक शहीद स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ दो मिनट का मौन रखा जाएगा तथा शहीद परिवारों का सम्मान किया जाएगा।

    आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें

     इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में शहीदों की शहादत वाले स्थानों की मिट्टी को श्रद्धापूर्वक संग्रहित एवं संरक्षित किया जाएगा। इस पवित्र मिट्टी को भविष्य में शहीदों के लिए निर्मित किए जाने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें। यह पहल शहीदों की स्मृति को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का भावनात्मक और ऐतिहासिक माध्यम बनेगी।

    महिला बाइकर्स की विशेष भागीदारी

     बस्तर तिरंगा यात्रा में वुमन बाइकर्स रैली की विशेष भागीदारी रहेगी। प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर शामिल होंगे और महिला बाइकर्स भी तिरंगा हाथ में लेकर इस यात्रा का हिस्सा बनेंगी। यात्रा में स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी।

    तीन दिनों में बस्तर के दुर्गम इलाकों तक पहुंचेगी तिरंगा यात्रा

     बस्तर तिरंगा यात्रा 12 अगस्त को यात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसूर और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा। 13 अगस्त को यात्रा दंतेवाड़ा से कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-टाड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी। बीजापुर में रात्रि विश्राम होगा। 14 अगस्त को यात्रा बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टालु पहाड़ी पहुंचेगी, जहां यात्रा के अंतिम पड़ाव पर कभी माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले कुर्रेगुट्टालु की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया जाएगा।

    ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ से होंगे पौधरोपण

     इस यात्रा के प्रत्येक घटना स्थल पर ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत स्थल पर जितने लोग शहीद हुए हैं उतने ही पौधों का पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं, विद्यार्थियों और खेल प्रतिभाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा के प्रति भी जागरूकता का संदेश दिया जाएगा।

    बस्तर की संस्कृति और विकास की झलक भी दिखेगी

     तिरंगा यात्रा के दौरान सांस्कृतिक संध्याओं में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। पुनर्वासित युवाओं की सफलता की कहानियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    बस्तर की वादियों में होगी शांति की दौड़

     प्रत्येक जिला मुख्यालय में बस्तर की वादियों के मध्य बस्तर शांति दौड़ का भी आयोजन किया जाएगा। विशाल तिरंगा मार्च, राष्ट्रगान, शहीद सम्मान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

    तिरंगा यात्रा बनेगी नए बस्तर की पहचान

     ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि शहादत को नमन, युवाओं को प्रेरित करने, सामाजिक एकता मजबूत करने और बस्तर की नई पहचान को देश के सामने रखने का अभियान है। तिरंगे के साथ बस्तर के गांवों और उन स्थानों तक पहुंचने वाली यह यात्रा उन इलाकों में विश्वास का संदेश लेकर जाएगी, जहां कभी हिंसा और भय का साया था।