Category: अन्य

अन्य

  • सिम्स बिलासपुर को बड़ी उपलब्धि: 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता बरकरार, नए सत्र में दाखिले का रास्ता साफ

    सिम्स बिलासपुर को बड़ी उपलब्धि: 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता बरकरार, नए सत्र में दाखिले का रास्ता साफ

    सिम्स बिलासपुर को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण

    एनएमसी ने जारी किया लेटर ऑफ रिन्यूअल, प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

    रायपुर : राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड (यूजीएमईबी) द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण (लेटर ऑफ रिन्यूअल) जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही आगामी शैक्षणिक सत्र में 150 विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

    यह उपलब्धि सिम्स में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, आधुनिक आधारभूत संरचना, अनुभवी संकाय तथा मरीजों को प्रदान की जा रही उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। एनएमसी द्वारा जारी यह नवीनीकरण संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता, गुणवत्ता मानकों के सफल अनुपालन एवं निरंतर प्रगति की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि करता है।

    सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण पूरे सिम्स परिवार के लिए गौरव का विषय है। यह संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, समर्पित शिक्षकों, आधुनिक संसाधनों और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं को मिली राष्ट्रीय मान्यता है। उन्होंने कहा कि सिम्स को मध्य भारत के अग्रणी चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, आधुनिक अधोसंरचना तथा उत्कृष्ट नैदानिक प्रशिक्षण की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

    उन्होंने बताया कि सिम्स चिकित्सालय बिलासपुर संभाग का सबसे बड़ा शासकीय चिकित्सा संस्थान है, जहाँ प्रतिदिन लगभग 2,000 से 2,500 मरीज बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में उपचार के लिए पहुँचते हैं तथा लगभग 900 मरीज विभिन्न वार्डों में भर्ती रहकर उपचार प्राप्त करते हैं। संस्थान में 24 घंटे संचालित ब्लड बैंक, अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर एवं विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों के माध्यम से उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों के कारण मेडिकल विद्यार्थियों को समृद्ध व्यावहारिक एवं नैदानिक प्रशिक्षण प्राप्त होता है, जिससे वे दक्ष एवं संवेदनशील चिकित्सक बनने की दिशा में तैयार होते हैं। यह मान्यता प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगी।

    उल्लेखनीय है कि सिम्स छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में से एक है। संस्थान में थैलेसीमिया एवं सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों को निःशुल्क रक्त एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में संस्थान ने 10,043 यूनिट रक्त संग्रह कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में सिम्स निरंतर नए मानक स्थापित कर रहा है तथा प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का यह नवीनीकरण केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, दक्ष चिकित्सकों के निर्माण और आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

  • आकाशीय बिजली को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट: बारिश में ये लापरवाही पड़ सकती है जानलेवा

    आकाशीय बिजली को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट: बारिश में ये लापरवाही पड़ सकती है जानलेवा

    वर्षाकाल में आकाशीय बिजली से बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग ने जारी की जन-जागरूकता अपील

    रायपुर : वर्षाकाल में आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने की अत्यधिक संभावनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आमजन से सतर्कता बरतने एवं सुरक्षा संबंधी उपायों का पालन करने की अपील की गई है।

    स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आकाशीय बिजली एक प्राकृतिक आपदा है, जिससे थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर जनहानि एवं गंभीर दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। मौसम खराब होने, बादल गरजने या बिजली चमकने की स्थिति में नागरिकों को खुले मैदान, खेत, पहाड़ी, जलाशय, पेड़ के नीचे तथा ऊँचे स्थानों पर रुकने से बचना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी पक्के भवन अथवा बंद चारपहिया वाहन में सुरक्षित आश्रय लेना चाहिए।

    बिजली कड़कने के दौरान नदी, तालाब अथवा अन्य जल स्रोतों से दूर रहें तथा धातु के कृषि उपकरण, लोहे की रॉड, तार अथवा अन्य धातु की वस्तुओं के साथ खुले स्थान पर न रहें। साथ ही, मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी चेतावनियों का पालन करें।

    यदि कोई व्यक्ति खुले में फँस जाए तो जमीन पर पूरी तरह लेटने के बजाय दोनों पैरों को साथ रखकर नीचे झुक जाए, सिर नीचे रखें तथा अन्य लोगों से कुछ दूरी बनाए रखें। इससे आकाशीय बिजली गिरने की स्थिति में जोखिम कम किया जा सकता है।

    यदि किसी व्यक्ति पर आकाशीय बिजली गिर जाए तो घबराएँ नहीं। प्रभावित व्यक्ति को छूना पूरी तरह सुरक्षित होता है। उसे तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाएँ तथा 108 एम्बुलेंस सेवा अथवा निकटतम स्वास्थ्य संस्थान से तुरंत संपर्क करें तथा तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाएं।

     यदि व्यक्ति श्वास नहीं ले रहा हो अथवा नाड़ी नहीं चल रही हो तो प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा सीपीआर (CPR) प्रारंभ किया जा सकता है तथा शीघ्र अस्पताल पहुँचाना चाहिए।

    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वर्षाकाल के दौरान स्वयं सुरक्षित रहें, अपने परिवार एवं आसपास के लोगों को भी आकाशीय बिजली से बचाव के उपायों की जानकारी दें तथा मौसम संबंधी चेतावनियों का गंभीरता से पालन करें।

    “जब गरज सुनाई दे, तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएँ। आपकी सतर्कता ही आपका जीवन बचा सकती है।”

  • सर्वाइकल कैंसर से बचाव की मुहिम में बड़ी सफलता: बलरामपुर-रामानुजगंज ने एचपीवी टीकाकरण में पूरे प्रदेश में मारी बाजी

    सर्वाइकल कैंसर से बचाव की मुहिम में बड़ी सफलता: बलरामपुर-रामानुजगंज ने एचपीवी टीकाकरण में पूरे प्रदेश में मारी बाजी

    राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान में बलरामपुर-रामानुजगंज बना छत्तीसगढ़ का अग्रणी जिला

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अभियान को मिली बड़ी सफलता, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनस्वास्थ्य संकल्प को मिला बल

    90 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण, अब शत-प्रतिशत टीकाकरण पर विशेष जोर

    रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को प्रारंभ किए गए राष्ट्रव्यापी निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। महिलाओं को भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान में जिले ने 8,785 लक्ष्य आबादी के विरुद्ध 7,931 बालिकाओं का टीकाकरण कर 90 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में अग्रणी स्थान हासिल किया है।

    कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा मैदानी अमले के समन्वित प्रयासों से अभियान को व्यापक जनसहभागिता मिली। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित किया गया।

    कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने इस उपलब्धि पर सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए शत-प्रतिशत एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए छूटी हुई प्रत्येक पात्र बालिका तक पहुंच बनाने के निर्देश दिए हैं।

    दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों वाला बलरामपुर-रामानुजगंज जिला आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनकल्याणकारी विजन, मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं।

  • सरकारी योजना और वैज्ञानिक खेती ने बदली कमार किसान की किस्मत, खीरे की फसल से बनी लाखों की राह

    सरकारी योजना और वैज्ञानिक खेती ने बदली कमार किसान की किस्मत, खीरे की फसल से बनी लाखों की राह

    उद्यानिकी विभाग की योजना से बदली कमार कृषक की तकदीर, खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदान

    रायपुर : खीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। व्यावसायिक खेती में खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों का सहारा देकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, गलते नहीं हैं और उनका आकार, रंग और चमक शानदार रहती है, जिससे बाजार में बेहतरीन भाव मिलता है। बुवाई के 45-50 दिनों बाद फल तोड़ने योग्य हो जाते हैं। मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है।

     सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे फायदे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक श्री खीमांशु गजेसिंग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

    4 एकड़ में खीरे की व्यावसायिक खेती

     श्री गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और पौध संरक्षण जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया।

    पारंपरिक से वैज्ञानिक खेती का सफर

     पहले पारंपरिक ढर्रे पर खेती करने के कारण श्री गजेसिंग के लिए कृषि की लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद पासा पलट गया। वैज्ञानिक तरीके से की गई इस खेती के कारण खीरे की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके खीरे की भारी मांग है। उपज का सही और उचित मूल्य मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

    भविष्य की योजनाएं और संदेश

     अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए श्री खीमांशु गजेसिंग ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग से मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला। इस सफलता से प्रेरित होकर अब मैं भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाने की योजना बना रहा हूँ।

     उद्यानिकी विभाग भी लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। श्री गजेसिंग की यह उपलब्धि साबित करती है कि वैज्ञानिक नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कृषि को टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

  • कम लागत, ज्यादा उत्पादन: छत्तीसगढ़ में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को बढ़ावा, लाखों बोतलों का वितरण

    कम लागत, ज्यादा उत्पादन: छत्तीसगढ़ में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को बढ़ावा, लाखों बोतलों का वितरण

    नैनो उर्वरकों के उपयोग से लागत में कमी और उत्पादन में होती है वृद्धि

    किसानों को नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किया जा रहा जागरूक

    राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण

    नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 1.14 लाख बोतलों का वितरण

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए राज्य में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।

    कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के दौरान सहकारी समितियों के माध्यम से नैनो उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। 26 जून 2026 की स्थिति में राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है, जिसमें से 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है तथा 1.14 लाख बोतलों से अधिक का वितरण किसानों को किया जा चुका है। शेष मात्रा समितियों में उपलब्ध है, जिससे आगामी कृषि कार्यों के लिए किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

    राज्य सरकार किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया पारंपरिक ठोस रासायनिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। इनका उपयोग करने से उर्वरकों की मात्रा कम लगती है, पौधों द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है, उत्पादन लागत घटती है तथा फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के किसान वैज्ञानिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकें।

    कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने निकटतम सहकारी समिति एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी प्राप्त करें तथा इन आधुनिक उर्वरकों का अधिक से अधिक उपयोग कर कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में सहभागी बनें।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा फैसला: यूरिया के लिए अब नहीं लगाने पड़ेंगे बार-बार चक्कर, किसानों को मिलेगा पूरा कोटा

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का बड़ा फैसला: यूरिया के लिए अब नहीं लगाने पड़ेंगे बार-बार चक्कर, किसानों को मिलेगा पूरा कोटा

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से किसानों को बड़ी राहत

    खरीफ 2026 में पूर्व वर्ष की तरह मिलेगा एकमुश्त यूरिया, 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्त

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने और खेती को अधिक सुगम बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। इसी क्रम में खरीफ सीजन 2026 के लिए जांजगीर-चांपा जिले के किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया वितरण पर लागू 80 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर दी गई है। अब किसानों को खरीफ 2025 की भांति उनकी पात्रता के अनुसार एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।

    उप संचालक कृषि श्री राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के अनुरूप यूरिया वितरित किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो किसानों को एकमुश्त यूरिया प्रदान किया जाएगा। किसी समिति में स्टॉक की कमी होने पर शेष मात्रा यूरिया उपलब्ध होते ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी।

    उन्होंने बताया कि शासन के इस निर्णय से किसानों को बार-बार समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और खरीफ सीजन में आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होने से कृषि कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे। इससे किसानों को खेती की तैयारी में सुविधा मिलेगी तथा समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल उत्पादन को भी गति मिलेगी।

    राज्य सरकार का यह निर्णय किसान हितों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शासन का उद्देश्य किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाना है।

  • विशेष लेख : जशपुर बन रहा छत्तीसगढ़ का नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट, झरने, पहाड़ और प्राकृतिक शिवलिंग खींच रहे देशभर के पर्यटक

    विशेष लेख : जशपुर बन रहा छत्तीसगढ़ का नया टूरिस्ट हॉटस्पॉट, झरने, पहाड़ और प्राकृतिक शिवलिंग खींच रहे देशभर के पर्यटक

    जशपुर पर्यटन के क्षेत्र में बना रही अलग पहचान

    प्राकृतिक सौंदर्य और सुकुन के पल बिताने पर्यटक हो रहे आकर्षित

    श्रीमती नूतन सिदार जिला जनसंपर्क अधिकारी जशपुर

    जशपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में जशपुर जिला तेजी से एक उभरते पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है।

    जशपुर अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, हरि भरी वादियां नदी, पहाड़ झरने आदिवासी संस्कृति रहन-सहन लोक संस्कृति से परिपूर्ण। शहरों के भागदौड़ की जिन्दगी से दूर सुकुन बिताने के जशपुर लोगों को अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है। पर्यटन की बात करें तो जशपुर में ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं जहां आकर मन को एक अलग सुकुन की अनुभूति कराता है।

    जशपुर जिले में देश देखा,रानीदाह‌ जलप्रपात ,चाय बगान,दमेरा, कुनकुरी विकास खंड में मयाली नेचर कैम्प विश्व सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़, बगीचा विकास खंड में खुडिया रानी, राजपुरी‌ जलप्रपात दनगरी जलप्रपात कैलाश गुफा सहित अन्य पर्यटन स्थल का आनंद लिया जा सकता है।

    बगीचा विकास खंड में कैलाश गुफा घने जंगलों के बीच बनी यह एक अद्भुत प्राकृतिक गुफा है। जहां भगवान शिव का मंदिर और संत गहिरा गुरु का आश्रम भी है। यह स्थान अध्यात्मिक और शान्ती के लिए प्रसिद्ध है।

    जशपुर विकास खंड में रानीदाह जलप्रपात जशपुर शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित यह जलप्रपात हरी भरी पहाड़ियों और जंगलों से घिरा हुआ है। पिकनिक का आनंद उठाने के लिए बेहतरीन पर्यटन स्थल में शामिल हैं।

    बगीचा विकास खंड में राजपुरी जलप्रपात यह जलप्रपात पर्यटकों को अपनी ओर सहज ही आकर्षित करता है। कुनकुरी विकास खंड में मयाली नेचर कैम्प एडवेंचर और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहतरीन जगह है। यहां बोटिंग और शानदार नजारों का आनंद लिया जा सकता है। कुनकुरी विकास खंड के मयाली में विश्व का सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में जाना जाता है।

    इस विशालकाय प्राकृतिक पर्वत को लार्जेस्ट नेचुरल शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। मधेश्वर पहाड़ प्राकृतिक रूप से हुबहू शिवलिंग के आकार में दिखाई देता है। यह लोगों की आस्था से भी जुड़ा हुआ है।

    कोतेबिरा : फरसाबहार विकास खंड में ईब नदी के किनारे का यह प्राकृतिक स्थल अपनी मनोरम चट्टानों और शांत पहाड़ी श्रंखलाओं के लिए जाना जाता है।

    खुडिया रानी गुफा : बगीचा विकास खंड में यह गुफा ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का स्थान है। जशपुर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से सीधे पहुंच सकते हैं।

    निकट का रेल्वे स्टेशन रांची झारखंड , और झारसुगुड़ा उड़ीसा है इसके साथ ही रांची झारखंड बीरसा मुंडा एयरपोर्ट तक हवाई मार्ग से आ सकते हैं और झारसुगुड़ा उड़ीसा तक ट्रेन और हवाई मार्ग से आया जा सकता है।

    तत्पश्चात रांची झारखंड राज्य से लगभग 3 घंटे की दूरी में जशपुर सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं।

    उड़ीसा राज्य में झारसुगुड़ा तक ट्रेन में सफर करके जशपुर सड़क मार्ग से लगभग 3 घंटे में जशपुर पहुंच सकते हैं।

    इसी प्रकार रायगढ़, सरगुजा, बिलासपुर से भी सड़क मार्ग से जशपुर आसानी से पहुंच सकते हैं।

    जशपुर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 5 होमस्टे स्थापित किए हैं तथा स्थानीय ग्रामीणों को होमस्टे प्रबंधन एवं अतिथि सेवा का समुचित प्रशिक्षण प्रदान किया है।

     जिला प्रशासन ने केरे गांव को एक भरोसेमंद और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • विशेष लेख : जशपुर का छिपा हुआ स्वर्ग ‘रानीदाह’; जहां प्रकृति की खूबसूरती और लोककथा का अनोखा संगम मिलता है

    विशेष लेख : जशपुर का छिपा हुआ स्वर्ग ‘रानीदाह’; जहां प्रकृति की खूबसूरती और लोककथा का अनोखा संगम मिलता है

    प्रकृति और सुंदर झरनों का आनंद लेने एक बार प्रसिद्ध पर्यटन स्थल रानीदाह का भ्रमण जरूर करें

    जशपुर : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की हरी-भरी पहाड़ियों और घने साल के जंगलों के बीच स्थित रानीदाह जलप्रपात जशपुर की प्राकृतिक सुंदरता का एक अद्भुत प्रतीक है। यह झरना जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ख़ूबसूरत सड़कों से होकर जब कोई इस स्थल तक पहुँचता है, तो सामने फैली हरियाली, चट्टानों से गिरता दूधिया जल और पक्षियों की आवाज़ें मिलकर एक अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत करती हैं। बरसात के मौसम में रानीदाह अपने पूरे वैभव पर होती है, जब पानी कई धाराओं में बँटकर ऊँची चट्टानों से नीचे गिरता है। गर्मी के मौसम में जल प्रवाह भले थोड़ा कम हो जाए, लेकिन आसपास की प्राकृतिक शांति और वातावरण का सौंदर्य हमेशा समान रूप से मनमोहक रहता है।

    रानीदाह जलप्रपात केवल प्राकृतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि अपनी लोककथाओं और रहस्यमयी कहानियों के कारण भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले ओडिशा की एक राजकुमारी, रानी शिरोमणि जशपुर की इन पहाड़ियों में आ पहुँची थीं। जब उसके पिता और पाँच भाई उनका पीछा करते हुए यहाँ पहुँचे, तो रानी ने अपमान और जबरन विवाह से बचने के लिए इसी गहरी खाई में छलांग लगा दी और अपने प्राण त्याग दिए। उसी समय से यह झरना “रानीदाह” के नाम से जाना जाने लगा, जिसका अर्थ है “रानी का जलप्रपात।” कहा जाता है कि झरने के पास स्थित कुछ चट्टानें “पाँच भैया” के नाम से जानी जाती हैं, जो रानी के भाइयों के प्रतीक माने जाते हैं। यह कथा आज भी स्थानीय लोगों के बीच पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती है और इस स्थल को एक रहस्यमयी और भावनात्मक पहचान देती है।

    पर्यटकों के लिए रानीदाह जलप्रपात एक शांत और मनोरम पिकनिक स्थल है।

  • ‘एक भी बच्चा न छूटे’ संकल्प के साथ जशपुर में पल्स पोलियो अभियान शुरू, 1.15 लाख से अधिक बच्चों को मिलेगी सुरक्षा

    ‘एक भी बच्चा न छूटे’ संकल्प के साथ जशपुर में पल्स पोलियो अभियान शुरू, 1.15 लाख से अधिक बच्चों को मिलेगी सुरक्षा

    जशपुर जिले में राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ

    विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाकर किया अभियान का शुभारंभ

    जशपुर : जिले में राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ आज जिला चिकित्सालय जशपुर से किया गया। विधायक श्रीमती रायमुनी भगत ने नवजात बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाकर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे का स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि “एक भी बच्चा छूटा, सुरक्षा चक्र टूटा” के संदेश को ध्यान में रखते हुए 0 से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं।

     कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा, सिविल सर्जन डॉ. कपिल कश्यप, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गौरव सिंह, बीईटीओ श्रीमती मनीषा कुजूर, एएनएम श्रीमती अरुणा सिंह, जिला वैक्सीन मैनेजर श्री एस.एल. सारथी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान के सफल संचालन, प्रभावी सुपरविजन एवं सतत मॉनिटरिंग के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के साथ पंचायत, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, परिवहन तथा विद्युत विभाग को समन्वय स्थापित कर अभियान को सफल बनाने के निर्देश दिए हैं।

     28 से 30 जून तक संचालित होगा राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान

     राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान तीन दिनों तक संचालित किया जाएगा। प्रथम दिवस 28 जून को जिले के सभी पोलियो बूथों पर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जा रही है। वहीं 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर ऐसे बच्चों को पोलियो की दवा पिलाएगी, जो पहले दिन किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों को पोलियो बूथ बनाया गया है। अभियान के संचालन के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मितानिनों की टीम गठित की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी.एस. जात्रा ने बताया कि जिले की भौगोलिक परिस्थितियों एवं क्षेत्रीय आवश्यकता को देखते हुए इस वर्ष पोलियो बूथों की संख्या बढ़ाई गई है।

     जिले में कुल 1,205 पोलियो बूथ बनाए गए हैं। इनमें पत्थलगांव में 192, फरसाबहार में 147, कांसाबेल में 84, बगीचा में 219, कुनकुरी में 152, दुलदुला में 92, मनोरा में 146 तथा जशपुर विकासखंड में 173 बूथ शामिल हैं। अभियान के संचालन के लिए 4,464 दलकर्मियों (स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिन) की तैनाती की गई है, जबकि 224 सुपरवाइजर बूथों एवं गृह भ्रमण की निगरानी करेंगे। इसके अतिरिक्त जिले के 11 मेला एवं बाजार स्थलों का चिन्हांकन कर वहां विशेष व्यवस्था की गई है। बस स्टैंड, ईंट-भट्ठों तथा अन्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों को कवर करने के लिए 8 ट्रांजिट टीम एवं 9 मोबाइल टीमों का गठन किया गया है, जो प्रवासी एवं छूटे हुए बच्चों तक पहुंचकर उन्हें पोलियो की खुराक पिलाएंगी।

     1,15,726 बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की खुराक

    जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. गौरव सिंह ने बताया कि जिले में 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 1,15,726 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विकासखंडवार लक्षित बच्चों की संख्या में पत्थलगांव 26,089, फरसाबहार 14,673, कांसाबेल 10,273, बगीचा 23,446, कुनकुरी 12,984, दुलदुला 6,926, मनोरा 8,285 तथा जशपुर 13,049 बच्चे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 27 मार्च 2014 को भारत को पोलियो मुक्त देश का प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ था। इस उपलब्धि को बनाए रखने तथा पोलियो वायरस की पुनः एंट्री रोकने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में इस वर्ष भी जिले में व्यापक स्तर पर अभियान संचालित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाकर इस जनस्वास्थ्य अभियान को सफल बनाएं।

  • पोलियो मुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में जुटने का किया आह्वान

    पोलियो मुक्त भारत की ओर बड़ा कदम: मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में जुटने का किया आह्वान

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से की राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील

    0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद दवा अवश्य पिलाने का किया आग्रह

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के अवसर पर प्रदेशवासियों, विशेषकर माता-पिता एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने 0 से 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दो बूंद दवा अवश्य पिलाएं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा कि जब बात बच्चों के भविष्य की हो, तो हमारी छोटी-सी सावधानी भी बड़ा बदलाव ला सकती है। पोलियो की दो बूंद केवल एक दवा नहीं, बल्कि बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की सुरक्षा का संकल्प है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए प्रत्येक अभिभावक की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने आसपास भी यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा पोलियो की दो बूंद से वंचित न रहे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम सभी के सामूहिक प्रयासों से ही पोलियो मुक्त भारत के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने का आह्वान किया।