दीपावली पर चिंतन आलेख : मिट्टी के दिए से मनाएं दीपावली !

मिट्टी का दीपक जलते हुए संदेश देता है कि सदैव दूसरों की जिंदगी में आए अंधेरे को दूर करने हाथ बढ़ाना चाहिए ! समदर्शी न्यूज डेस्क, मिट्टी से निर्मित वस्तुओं का मनुष्य के जीवन में जन्मजात नाता जुड़ा होता है। अत्याधुनिक युग आने के बावजूद मिट्टी से निर्मित सुराही के पानी का स्वाद मंहगे फ्रिज का ठंडा पानी नहीं दे पाता। ग्रीष्म काल के आते ही जैसे मिट्टी से निर्मित मटकी की मांग बढ़ जाती है, उसी तरह दीपावली के आगमन के साथ ही मिट्टी के दीए की पूछ परख…

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25 सितंबर को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर विशेष आलेख : पं. दीनदयाल के अंत्योदय से नए भारत का उदय- अशोक बजाज

समदर्शी न्यूज डेस्क अदभूत प्रतिभा के धनी पं. दीनदयाल उपाध्याय उत्कृष्ट लेखक, विचारक, महान राष्ट्र चिंतक एवं 20 वी सदी के आदर्श राजनेता थे। उन्होने देखा कि देश में अमीरी व गरीबी के बीच की खाई दिनों दिन गहरी होती जा रही है। एक ओर जहां बहुसंख्यक लोग गरीबी, बेकारी और भुखमरी से जूझ रहे हैं तो दूसरी ओर समाज में ऐसे भी लोग हैं जिसके पास बेशुमार धन सम्पदा है। देश में एक बड़ा तबका ऐसा भी है जिसकी कमाई सीमित है, अपनी दैनंदिनी की आवश्यकता की आपूर्ति उसके…

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गणेश चतुर्थी पर चिंतन आलेख : रोते गणेश को हंसाएं कैसे

विगत कई सप्ताह से गणेश स्थापना हेतु मंच एवं पण्डाल के निर्माण एवं सजावट कार्य में जुटे-जुटे थक कर चूर-चूर हो गया था।गणेश जी की स्थापना के उपरान्त थकान मिटाने के लिए घोड़ा बेचकर  गहरी नींद में सो रहा था। तभी रात्रि दो बजे के करीब किसी के सिसक-सिसक कर रोने की आवाज से मेरी नींद उचट गई।मैं आंख मलते रोने की आवाज की दिशा में चल पड़ा।आगे जाकर मैंने देखा कि हमारे पण्डाल में विराजे गणेश जी रो रहे हैं।रो-रोकर उन्होंने अपनी आंख और सूंड़ को लाल कर डाला…

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9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष आलेख : “आदिवासी भाईयों के मिजाज लाजवाब है,गणित की किताब में वे रखते गुलाब है’’

समाजशास्त्रियों ने भी समाज में बढ़ती हिंसा का बड़ा कारण विकृत होती संस्कृति को बताया है समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर पूरे विश्व में आदिवासियों की एक बहुत बड़ी आबादी निवास करती है अनेक विचारक इन्हें मूल निवासी भी कहते हैं। इनकी प्राचीन कला संस्कृति और मूल अधिकार के संरक्षण की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए पहली बार 09 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र संघ (यू.एन.ओ) की बैठक हुई। इसमें आदिवासियों के हित और विकास को लेकर ब्यापक विचार-विमर्श किया गया। आगे वर्ष 1993 में जिनेवा (स्विटजरलैंड ) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय…

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नागपंचमी पर विशेष आलेख : मानव मित्र होते हैं सर्प

समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर पर्वों की विविधता भी भारत की विशेष पहचान है। यहां के अधिकांस पर्व प्रकृति और प्राणियों से सम्बद्ध हैं, तथा मानव समुदाय को इनके भक्षक होने के बजाय संरक्षक बनने का संदेश देते हैं।ऐसे ही पर्वों में से एक पर्व नागपंचमी भी है।प्रति वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नांग पंचमी का पर्व देशभर में मनाया जाता है। इस पर्व पर नाग सांपों की पूजन की परम्परा है। सर्पों के प्रति संवेदना दयालुता को बनाये रखने का संदेश यह पर्व देता है।अनाज…

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“प्रकृति की धुली हुई हरियाली का स्वागत करना ही है – हरेली”

समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर विशेष लेख श्रावण माह की अमावस्या एक ऐसा दिन जो विशेष भी है और महत्वपूर्ण भी। इस दिन से छत्तीसगढ़ महतारी के आंगन में त्यौहारों का आगमन शुरू हो गया है। अगर आपका बचपन छत्तीसगढ़ की मिट्टी में गुजरा है तो आज के दिन का महत्व आपने जरूर देखा और समझा होगा लेकिन अगर आप आज के इस विशेष दिन के बारे में नहीं जानते हैं तो आज आपका परिचय छत्तीसगढ़ के पहले त्यौहार  ‘हरेली तिहार’ से होगा।हरेली एक कृषि त्यौहार है और हरियाली शब्द से…

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श्री अमरनाथ बर्फानी बाबा की सात वर्ष पुरानी यात्रा- कथा : बाबा के भक्त एक तीर्थ यात्री की कलम से…..!

मरे मौत अकाल का,  जो काम करे चाण्डाल का। काल उसका क्या बिगाड़े,  जो भक्त हो महाकाल का। समदर्शी न्यूज डेस्क इन पंक्तियों को जब-जब सुनता-पढ़ता, तब-तब अमरनाथ बर्फानी बाबा के दर्शन की अभिलाषा व्याग्र हो उठती थी। इस अभिलाषा को साकार करने का एक सुनहरा अवसर जुलाई 2015 में प्राप्त हुआ। अमरनाथ यात्रा पर जाने के पूर्व जिला चिकित्सालय से स्वास्थ्य प्रमाणपत्र लेने तथा पंजाब नेशनल बैंक में पंजीयन कराने की अनिवार्य प्रक्रिया को यथा समय पूर्ण किया। यात्रा की तैयारी में जुटे थे तभी यात्रा तिथि के दो…

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अटल प्रतिज्ञा का परिणाम है छत्तीसगढ़ राज्य- अशोक बजाज

समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर जनता के ह्रदय की धड़कन को बखूबी समझने वाले राष्ट्रनायक, पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न अटलबिहारी वाजपेयी की संकल्प शक्ति का ही परिणाम है कि 21 वर्ष पूर्व 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य का उदय हुआ. उन्होंने 1998 में सप्रेशाला रायपुर के मैदान में जनता के नब्ज को टटोल कर वादा किया था कि यदि आप लोकसभा की 11 में से 11 सीटो में भाजपा को जितायेंगे तो मैं आपको छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा. हालाँकि चुनाव में भाजपा को 11 में से 8 सीटें ही मिली लेकिन…

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