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  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की नई पहल : ई-श्रम साथी ऐप से श्रमिकों और नियोक्ताओं को मिलेगा सीधा डिजिटल प्लेटफॉर्म, रोजगार तलाशना हुआ आसान

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की नई पहल : ई-श्रम साथी ऐप से श्रमिकों और नियोक्ताओं को मिलेगा सीधा डिजिटल प्लेटफॉर्म, रोजगार तलाशना हुआ आसान

    ई-श्रम साथी ऐप : छत्तीसगढ़ के श्रमिकों और नियोक्ताओं के लिए नई डिजिटल सौगात

    रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा प्रदेश के निर्माण श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण और उन्हें रोजगार के सुलभ अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से ई-श्रम साथी (eShram Sathi) मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल विजन और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का मुख्य ध्येय निर्माण श्रमिक न हो हताश, ई-श्रम साथी ऐप में करे काम की तलाश के संकल्प को चरितार्थ करना है।

    यह ऐप विशेष रूप से उन श्रमिकों के लिए बनाया गया है जो अपने कौशल के अनुरूप उपयुक्त कार्य की तलाश में रहते हैं, ताकि वे बिचौलियों के बिना सीधे काम पा सकें। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिकों को बहुआयामी लाभ प्राप्त होंगे, जिसमें वे अपने निवास स्थान के निकटतम उपलब्ध कार्यों की त्वरित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। ऐप पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क और उपयोग में सरल रखी गई है, जिससे श्रमिक स्वयं अपना डेटा दर्ज कर सकते हैं और अपनी दक्षता के अनुसार कार्य का चयन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह ऐप श्रमिकों को शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की सटीक जानकारी और उनका सीधा लाभ दिलाने में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

    नियोक्ताओं के लिए भी यह ऐप एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है, जहाँ वे अपनी आवश्यकतानुसार कुशल और अकुशल श्रमिकों की खोज कर सकते हैं। यह एक तेज़ और भरोसेमंद डिजिटल माध्यम है जो पंजीकृत एवं विभाग द्वारा सत्यापित श्रमिकों तक सीधी पहुंच प्रदान करता है, जिससे नियोक्ताओं के समय और भर्ती प्रक्रिया की लागत में महत्वपूर्ण बचत होगी। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल (श्रम विभाग) ने सभी पात्र नागरिकों से इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने की अपील की है। किसी भी तकनीकी समस्या या विस्तृत जानकारी हेतु विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 0771-3505050 और निकटतम श्रम कार्यालय से संपर्क करने का परामर्श दिया है।

  • जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना नामुमकिन था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर में स्वास्थ्य क्रांति पर दिल्ली में बड़ा मंथन, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

    जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना नामुमकिन था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर में स्वास्थ्य क्रांति पर दिल्ली में बड़ा मंथन, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

    जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी सपना था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर के जंगलों तक पहुंची स्वास्थ्य क्रांति

    दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

    पुराने सुरक्षा शिविर अब बन रहे जन सुविधा केंद्र

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा उपस्थित थे।

    बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं।

    उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

    केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

    उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास संभावित है।

  • किसानों के लिए बड़ी तैयारी : खरीफ सीजन से पहले कृषि विभाग की हाई लेवल समीक्षा बैठक, नकली खाद-बीज पर कार्रवाई और जल संरक्षण आधारित खेती पर जोर

    किसानों के लिए बड़ी तैयारी : खरीफ सीजन से पहले कृषि विभाग की हाई लेवल समीक्षा बैठक, नकली खाद-बीज पर कार्रवाई और जल संरक्षण आधारित खेती पर जोर

    खरीफ विपणन 2026 की तैयारियों को लेकर कृषि विभाग की समीक्षा बैठक सम्पन्न

    बीज-उर्वरक की गुणवत्ता और अवैध भंडारण पर निगरानी के दिए निर्देश

    जशपुर : जिला पंचायत जशपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार ने आज आगामी खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों को लेकर कृषि विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक ली। बैठक में उप संचालक कृषि, सहायक संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक उपस्थित रहे।

    ’बैठक के मुख्य रूप से खरीफ सीजन हेतु बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों की उपलब्धता, गुणवत्ता, नैनो यूरिया उपयोग’ और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई। किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त आदान उपलब्ध कराने तथा अवैध भंडारण एवं कालाबाजारी पर नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए।

    खरीफ सीजन से पहले उर्वरक, बीज व कीटनाशकों के सैंपल शीघ्र लेने और गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित करने को कहा गया। उर्वरक निरीक्षकों को लक्ष्य अनुसार नियमित निरीक्षण व सैंपलिंग के निर्देश दिए गए। उर्वरक नियंत्रण आदेश, सैंपलिंग प्रक्रिया, गुणवत्ता परीक्षण एवं प्रवर्तन कार्रवाई पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए। सभी उर्वरक निरीक्षकों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया।

    खरीफ 2026 में दलहन, तिलहन, मोटे अनाज व अन्य वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई। आरएईओ वार उच्च धान रकबा वाले गांवों व कृषकों की सूची तथा धान रकबा का मैप तैयार करने के निर्देश दिए गए। किसानों को जल संरक्षण आधारित खेती का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया। विकासखंड कांसाबेल में कम फील्ड कवरेज पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को क्षेत्रीय भ्रमण और किसानों से सीधा संपर्क बढ़ाने को कहा गया।

    कृषक उन्नति योजना के तहत 11,000 प्रति एकड़ आदान सहायता के वितरण, पात्र किसानों का पंजीयन व सत्यापन समय पर करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पीएम धन-धान्य कृषि योजना, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक-प्राकृतिक खेती, कृषि यांत्रिकीकरण’ एवं ’दलहन-तिलहन विस्तार’ कार्यक्रमों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

  • छत्तीसगढ़ में सुशासन का मेगा प्लान तैयार : आंगनबाड़ी, स्कूल, स्वास्थ्य और तकनीकी मॉनिटरिंग पर मुख्य सचिव की बड़ी समीक्षा बैठक, विकास कार्यों में तेजी लाने प्रशासन को मिला अलर्ट

    छत्तीसगढ़ में सुशासन का मेगा प्लान तैयार : आंगनबाड़ी, स्कूल, स्वास्थ्य और तकनीकी मॉनिटरिंग पर मुख्य सचिव की बड़ी समीक्षा बैठक, विकास कार्यों में तेजी लाने प्रशासन को मिला अलर्ट

    मुख्य सचिव ने की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा, डेटा आधारित निगरानी पर जोर

    अंतिम छोर के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुँचाने के निर्देश

    आंगनबाड़ी और स्कूल भवनों के बुनियादी ढांचे में सुधार की प्राथमिकता

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में विभिन्न विभागों की जनोन्मुखी और महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने पांचवें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन की अनुशंसाओं पर हुई कार्रवाई की जानकारी ली और अधिकारियों को विकास कार्यों में गति लाने के निर्देश दिए।

    डेटा आधारित निगरानी और सुशासन

     मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने डेटा आधारित निगरानी प्रणाली (Data-driven Monitoring System) को और मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में सुशासन और प्रौद्योगिकी के माध्यम से क्षमता विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का प्रस्तुतिकरण भी दिया गया।

    शिक्षा और आंगनबाड़ी बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

     शिक्षा और बच्चों के पोषण को प्राथमिकता देते हुए मुख्य सचिव ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिन क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवनों की समस्या है, वहां प्राथमिक शालाओं के अतिरिक्त कक्षों में आंगनबाड़ी संचालित करने के निर्देश दिए गए। इसके लिए उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कलेक्टरों के साथ समन्वय करने को कहा। समग्र शिक्षा के तहत जिन स्कूलों में कमरों की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

    विभागीय प्रगति की विस्तृत समीक्षा

     बैठक के दौरान स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, कौशल विकास, खेल एवं युवा कल्याण, तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी, आदिम जाति विकास, पर्यटन, ऊर्जा और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों की परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया गया। उच्च स्तरीय बैठक में गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक, विधि विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, आदिम जाति विकास के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार सहित स्कूल शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन, और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • जहां हरियाली असंभव थी, वहां उग रहे सघन वन : मियावकी मॉडल से छत्तीसगढ़ बना पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी उदाहरण, गेवरा डंप क्षेत्र में तैयार हो रहा हरित भविष्य

    जहां हरियाली असंभव थी, वहां उग रहे सघन वन : मियावकी मॉडल से छत्तीसगढ़ बना पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायी उदाहरण, गेवरा डंप क्षेत्र में तैयार हो रहा हरित भविष्य

    मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम

    कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा

    धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

    अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

    रायपुर : वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।

     छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है।

    राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण

     छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया।

    वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी

     वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।

    पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ

     विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है।

    बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल

     छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।

    जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल

     कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है।

    वैज्ञानिक तरीके से किया गया पौधारोपण

     डंप क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग किया गया। जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए तथा 3 से 4 फीट ऊंचाई वाले स्वस्थ पौधों का रोपण किया गया। इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भी उपयुक्त आवास बन सकेगा।

    निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता

     शुरुआती 2-3 वर्षों की देखभाल के बाद, यह वन पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाता है और इसे किसी उर्वरक या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। रोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, निंदाई-गुड़ाई, घास कटाई और सुरक्षा का कार्य लगातार किया जा रहा है। मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से 2029 तक पांच वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड गेवरा को सौंपा जाएगा।

    हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल

     कम जगह में घने जंगल बनाकर शहरों में प्रदूषण (धूल और ध्वनि) को कम करने में सहायक होते हैं। ये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। गेवरा की यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर प्रयासों से बंजर और पत्थरीली भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सघन हरित वन और जैव विविधता से भरपूर मानव निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।

  • पीएम सूर्य घर योजना : सूरज की रोशनी बनी आत्मनिर्भरता की ताकत ; राजपुर की अरूना कश्यप ने अपनाई सौर ऊर्जा, बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

    पीएम सूर्य घर योजना : सूरज की रोशनी बनी आत्मनिर्भरता की ताकत ; राजपुर की अरूना कश्यप ने अपनाई सौर ऊर्जा, बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश

    अरूना के घर अब सूरज की रोशनी से रोशन, बिजली बिल की चिंता से मिली मुक्ति

    3 किलोवाट के सोलर प्लांट ने बदली राजपुर निवासी अरूना की जिंदगी, बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश

    रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर पैनल स्थापित करना और हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करना है। इस योजना का लाभ उठाकर कोई भी अपने घर में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित कर सकता है। बढ़ती महंगाई के दौर में बिजली का भारी-भरकम बिल किसी भी मध्यमवर्गीय परिवार के लिए चिंता का विषय हो सकता है। लेकिन बलरामपुर जिले के राजपुर विकासखंड की श्रीमती अरूना कश्यप ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना को अपनाकर अरूना न केवल अपना बिजली बिल शून्य करने की ओर बढ़ रही हैं, बल्कि वे क्षेत्र के अन्य परिवारों के लिए भी एक मिसाल बन गई हैं।

    बढ़ते खर्चों के बीच सोलर बना सहारा

     अरूनाकश्यप साझा करती हैं कि बढ़ती जरूरतों के साथ हर महीने आने वाला भारी बिजली बिल उनके घरेलू बजट को बिगाड़ देता था। वे कहती हैं, पहले बिजली का खर्च लगातार बढ़ रहा था, जिससे घर का तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन जब मुझे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और उस पर मिलने वाली केंद्र व राज्य सरकार की सब्सिडी के बारे में पता चला, तो लगा कि यह हमारे लिए सबसे अच्छा समाधान है।

    3 किलोवाट का प्लांट राहत की नई किरण

     अरूना ने विभागीय सहयोग से अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट लगवाया है। शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह प्रक्रिया जटिल होगी, लेकिन शासन की सहायता और मार्गदर्शन से यह काम आसान हो गया। लगने के बाद बिजली बिल में भारी गिरावट आई है। अब घर के सभी जरूरी उपकरण बिना किसी तनाव के सौर ऊर्जा से चल रहे हैं। अरूना का मानना है कि सौर ऊर्जा न केवल पैसों की बचत है, बल्कि यह पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में भी एक बड़ा योगदान है।

    आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

     श्रीमती अरूना ने शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम परिवारों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने का सबसे सशक्त माध्यम है। सब्सिडी के प्रावधान ने इस तकनीक को आम आदमी की पहुँच में ला दिया है। श्रीमती अरूना कश्यप कहती हैं कि अगर हर घर सौर ऊर्जा अपनाए, तो न केवल बिजली की बचत होगी बल्कि हमारा पर्यावरण भी प्रदूषण मुक्त रहेगा।

    योजना का लाभ

     प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को सोलर प्लांट की स्थापना पर आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। इससे आम नागरिक अपनी छत का उपयोग कर स्वयं बिजली पैदा कर सकते हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं।

  • LEADS 2025 में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग : बेहतर सड़क, तेज़ परिवहन और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था से बना देश का ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य

    LEADS 2025 में छत्तीसगढ़ की बड़ी छलांग : बेहतर सड़क, तेज़ परिवहन और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था से बना देश का ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य

    बेहतर सड़क, तेज़ परिवहन और बढ़ते रोजगार से आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़

    LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य बना छत्तीसगढ़, आमजन और उद्योगों दोनों को मिलेगा लाभ

    सुशासन, मजबूत कनेक्टिविटी और जनहितकारी योजनाओं का दिख रहा सकारात्मक असर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    रायपुर : छत्तीसगढ़ ने विकास और सुशासन की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी LEADS 2025 रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य का दर्जा मिला है। यह उपलब्धि राज्य में बेहतर सड़क, परिवहन, व्यापार सुविधा और मजबूत लॉजिस्टिक्स व्यवस्था के कारण मिली है, जिसका सीधा लाभ आम जनता, किसानों, व्यापारियों और युवाओं को मिल रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल उद्योगों का विकास नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन को आसान बनाना है। बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से किसानों की उपज तेजी से बाजार तक पहुंच रही है, व्यापार को गति मिल रही है और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और तेज़ निर्णय प्रक्रिया के कारण निवेश बढ़ रहा है। राज्य सरकार गांव से शहर तक कनेक्टिविटी मजबूत करने, वेयरहाउसिंग सुविधाएं बढ़ाने और उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने पर लगातार काम कर रही है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

    उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य में लॉजिस्टिक्स और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। इससे उद्योगों को सुविधा मिलने के साथ-साथ छोटे व्यापारियों, किसानों और स्थानीय उद्यमियों को भी लाभ मिल रहा है।

    उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई लॉजिस्टिक्स नीति 2025 के तहत परिवहन लागत कम करने, माल परिवहन को तेज़ बनाने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दिए जाने से रोजगार और निवेश की नई

    संभावनाएं तैयार हो रही हैं।

    रायपुर के लिए तैयार किए गए सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान से शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और माल परिवहन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। वहीं OneClick Single Window Portal के माध्यम से उद्योगों को अनुमति प्रक्रिया आसान बनाई गई है, जिससे निवेशकों को तेजी से सुविधाएं मिल रही हैं।

    वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आधुनिक और तकनीक-सक्षम लॉजिस्टिक्स व्यवस्था विकसित कर रहा है। इससे प्रदेश में व्यापार, उद्योग और रोजगार को नई गति मिल रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को देश के उभरते औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में नई पहचान दिला रही है।

    कुल मिलाकर LEADS 2025 में ‘हाई परफॉर्मर’ राज्य के रूप में मिली यह पहचान केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में तेज़ी से विकसित हो रही अधोसंरचना, सुशासन और जनहितकारी विकास मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर मिली स्वीकृति है। बेहतर सड़क, मजबूत परिवहन व्यवस्था, बढ़ते निवेश और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ अब आमजन की सुविधाओं और आर्थिक समृद्धि को केंद्र में रखकर विकास की नई दिशा तय कर रहा है।

  • रात के अंधेरे में बुजुर्ग महिला पर टूटा दरिंदगी का कहर, जशपुर में शर्मनाक वारदात ! धमकी देकर बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म, फरार आरोपी को पुलिस ने घेराबंदी कर पहुंचाया सलाखों के पीछे.

    रात के अंधेरे में बुजुर्ग महिला पर टूटा दरिंदगी का कहर, जशपुर में शर्मनाक वारदात ! धमकी देकर बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म, फरार आरोपी को पुलिस ने घेराबंदी कर पहुंचाया सलाखों के पीछे.

    मिली जानकारी के अनुसार मामले का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 10 मई 2026 को थाना कांसाबेल क्षेत्रांतर्गत एक ग्राम की 72 वर्षीय बुजुर्ग पीड़िता ने थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दिनांक 09 मई 2026 को उसके गांव में ही एक पड़ोस के घर में, एक सामाजिक कार्यक्रम चल रहा था, पीड़ित प्रार्थिया भी उक्त कार्यक्रम में गई हुई थी, जहां से खाना खा पी कर रात्रि करीबन 09:00 बजे अपने घर वापस आ कर सोने की तैयारी करते हुए,घर का दरवाजा बंद करने जा रही थी। इसी दौरान आरोपी जबरन घर में घुस गया, व पीड़िता के साथ गलत नियत से छेड़-छाड़ कर,  मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी देकर,  उसके साथ अनाचार किया, इसी दौरान पीड़िता किसी तरह आरोपी के चंगुल से छुटकर, चिल्लाते हुए घर के बाहर निकली। उक्त आरोपी गांव के ही एक व्यक्ति का  डेढ़ साला था, जो कि अपनी बहन व बहनोई के घर आया हुआ था। पीड़िता के द्वारा घटना के संबंध में आरोपी की बहन व बहन के पति को सूचित किया गया। आरोपी के द्वारा पीड़िता के साथ जबरन दुष्कर्म किया गया है।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बुजुर्ग पीड़िता की रिपोर्ट पर तत्काल थाना कांसाबेल में आरोपी के विरुद्ध बीएनएस की धारा 64(1),115(2),332(बी) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच विवेचना में लिया गया।

    आरोपी महिमा प्रकाश मिंज घटना दिनांक से फरार था, पुलिस लगातार उसकी पतासाजी कर रही थी, इसी दौरान पुलिस को मुखबीर व पुलिस की टेक्निकल टीम की मदद से पता चला कि आरोपी जिला रायगढ़ के कापू थाना क्षेत्रांतर्गत अपने गृह ग्राम में है। जिस पर डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के द्वारा विशेष पुलिस टीम गठित कर आरोपी की धर-पकड़ हेतु आरोपी के गृह ग्राम रवाना की गई। पुलिस टीम के द्वारा कार्यवाही करते हुए, आरोपी की घर की घेराबंदी कर उसे हिरासत में लेकर वापस लाया गया।

    पुलिस की पूछताछ पर आरोपी महिमा प्रकाश मिंज के द्वारा अपराध स्वीकार करने व पर्याप्त सबूत पाए जाने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर दिनांक 13 मई 2026 को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

  • “छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा” : केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने सेरीखेड़ी में महिला समूहों के नवाचारों की जमकर सराहना

    “छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा” : केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने सेरीखेड़ी में महिला समूहों के नवाचारों की जमकर सराहना

    छत्तीसगढ़ का आजीविका मॉडल देशभर के लिए प्रेरणादायी-केंद्रीय राज्य मंत्री श्री पासवान

    केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान सेरीखेड़ी में अजा परियोजना और पिंक दीदी नवाचारों का किया निरीक्षण

    महिला समूहों के आर्थिक स्वावलंबन की सराहना

    रायपुर : केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने आज रायपुर जिले के सेरीखेड़ी स्थित मल्टी यूटिलिटी सेंटर का दौरा किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित इस केंद्र में उन्होंने महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे नवाचारों और आजीविका गतिविधियों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संचालित अजा (AJA) परियोजना और बेहतर बाजार लिंकेज की प्रशंसा करते हुए इसे देशभर के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया।

    अजा परियोजना वैज्ञानिक पशुपालन और सशक्त बाजार लिंकेज

     मंत्री श्री पासवान ने एकीकृत बकरी पालन मॉडल अजा के क्रियान्वयन को बारीकी से देखा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ा रही है, बल्कि वैज्ञानिक पशुपालन को भी नई दिशा दे रही है। आधुनिक शेड, नियमित टीकाकरण, पशु बीमा, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जैविक खाद निर्माण जैसी व्यवस्थाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने समूहों द्वारा तैयार उत्पादों के लिए बाजार की सुलभ उपलब्धता को अन्य राज्यों के लिए भी सीखने योग्य बताया।

    पिंक दीदी और बिजनेस दीदी आत्मनिर्भर भारत की नई पहचान

     निरीक्षण के दौरान मंत्री ने नवा रायपुर में संचालित ई-ऑटो सेवा “प्रोजेक्ट पिंक दीदी” की सराहना की। उन्होंने हितग्राही महिलाओं से संवाद कर उनके अनुभव जाने और कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है। एकीकृत बकरी पालन परियोजना, कृषि आधारित आजीविका गतिविधियों, आजीविका सेवा केंद्र, के अलावा उन्होंने बिजनेस दीदी, मशरूम उत्पादन और कृषि आधारित अन्य गतिविधियों का भी अवलोकन किया।

    घर संभालने वाली महिलाएं अब बनीं बोर्ड ऑफ डायरेक्टर

     मंत्री श्री पासवान ने कृषक उत्पादक समूह की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर महिलाओं से आत्मीय चर्चा की। इस दौरान दीदियों ने साझा किया कि कैसे वे घर की चारदीवारी से निकलकर आज एक संगठित व्यवसाय का नेतृत्व कर रही हैं। मंत्री ने महुआ कुकीज का स्वाद लिया और समूह की दीदियों के कौशल की प्रशंसा करते हुए कहा कि असंगठित क्षेत्र को संगठित कर लाभ अर्जित करना ही वास्तविक सशक्तिकरण है।

    अधिकारियों को योजनाओं के विस्तार के निर्देश

     केंद्रीय राज्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ के आजीविका मॉडल को अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए अधिकारियों को इन योजनाओं के और अधिक विस्तार पर जोर देने को कहा। केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आजीविका मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकते हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं महिला समूहों को बेहतर कार्य के लिए बधाई देते हुए योजनाओं के और विस्तार पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान पंचायत सचिव श्री भीम सिंह, कलेक्टर श्री गौरव सिंह, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिस्वरांजन सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

     केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान ने मल्टी यूटिलिटी सेंटर, सेरीखेड़ी (रायपुर) अजा परियोजना, पिंक दीदी ई-ऑटो, बिजनेस दीदी, एफपीओ से संवाद की और कहा कि छत्तीसगढ़ का ग्रामीण आजीविका मॉडल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है।

  • विशेष लेख : मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 ; आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, आसान हुआ पुराने बिजली बिलों का भुगतान

    विशेष लेख : मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 ; आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, आसान हुआ पुराने बिजली बिलों का भुगतान

    धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

    सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक

    रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए एक राहत पहल है। इसके तहत पुराने बकाये पर सरचार्ज में छूट मिल रही है। बकाया बिजली बिल पर लगने वाला पूरा सरचार्ज (ब्याज) माफ या मूल बकाया राशि एकमुश्त या किस्तों में जमा करने की सुविधा। यह योजना बीपीएल, सामान्य घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को लंबे समय से लंबित बिजली बिलों के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए लाई गई है।

     मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान देने के लिए लगातार जनहितकारी निर्णय ले रही है। इसी कड़ी में शुरू की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी है जो पुराने बकाया बिजली बिल और बढ़ते सरचार्ज के कारण आर्थिक दबाव में थे।

    क्या है मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026

    मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के पुराने और लंबित बिजली बिलों का सरल समाधान उपलब्ध कराना है। योजना के तहत बकाया बिजली बिलों पर लगने वाले सरचार्ज को पूरी तरह माफ किया जा रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को शेष राशि का भुगतान एकमुश्त या आसान किस्तों में करने की सुविधा भी दी गई है। पात्र श्रेणियों के उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि पर भी विशेष छूट का लाभ मिल रहा है।

    28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को मिल चुकी है राहत

    राज्य शासन के अनुसार इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपए से अधिक के सरचार्ज माफ होंगे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना न केवल व्यापक स्तर पर लागू की गई है, बल्कि लाखों परिवारों के लिए वास्तविक आर्थिक सहायता का माध्यम भी बनी है।

    किन उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ

    इस योजना का लाभ मुख्य रूप से बीपीएल परिवारों, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं और कृषि उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। ऐसे उपभोक्ता जिनके बिजली बिल लंबे समय से बकाया हैं और जो एकमुश्त भुगतान करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, वे इस योजना के माध्यम से अपने बकाया का समाधान कर सकते हैं।

    योजना से होने वाले प्रमुख फायदे

    सरचार्ज की पूरी माफी, पुराने बकाया बिलों पर लगने वाला सरचार्ज अक्सर मूल राशि से भी अधिक हो जाता है। इस योजना के तहत सरचार्ज की पूर्ण माफी से उपभोक्ताओं को तत्काल बड़ी राहत मिलती है।

    आसान किस्तों में भुगतान

     बड़ी राशि एक साथ जमा करने की बाध्यता समाप्त हो जाती है। उपभोक्ता अपनी सुविधा और आर्थिक क्षमता के अनुसार किस्तों में भुगतान कर सकते हैं। घरेलू बजट पर कम दबाव और सरचार्ज माफी और किस्त सुविधा से परिवारों को अपने मासिक खर्चों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलती है।

    बिजली विच्छेदन का खतरा कम

     बकाया राशि के कारण बिजली कटने की आशंका रहती है। योजना का लाभ लेने से उपभोक्ता नियमित भुगतान व्यवस्था में लौट सकते हैं। इससे किसानों को सीधा लाभ हो रहा है। कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के बोझ से राहत मिलती है, जिससे सिंचाई और खेती का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सकता है।

    मानसिक तनाव से राहत

     लंबित बिलों की चिंता से मुक्ति मिलने पर परिवार आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। जो उपभोक्ता लंबे समय से भुगतान नहीं कर पा रहे थे, उन्हें फिर से नियमित भुगतान प्रणाली से जुड़ने का अवसर मिलता है।

    योजना का लाभ कैसे प्राप्त करें

     योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1912 पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विस्तृत जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देशों के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है।

    योजना की अवधि

     मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं से समय रहते योजना का लाभ लेने की अपील की है।

    जनहित और सुशासन का प्रभावी उदाहरण

     मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की संवेदनशील और जनोन्मुखी सोच का उदाहरण है। यह योजना केवल बकाया बिलों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों को आर्थिक राहत, मानसिक संतोष और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का अवसर भी प्रदान करती है।

     मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 उन उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभकारी है जो पुराने बिजली बिलों के बोझ से परेशान हैं। सरचार्ज माफी, मूल राशि पर छूट और आसान किस्तों जैसी सुविधाएं इसे एक प्रभावी और जनहितकारी योजना बनाती हैं। यह योजना आम नागरिकों को राहत देने के साथ-साथ उन्हें नियमित भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेशवासियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने लंबित बिजली बिलों का समाधान करें और आर्थिक राहत प्राप्त करें।