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  • छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का 86वाँ मंडल सम्मेलन सम्पन्न : विभिन्न आवासीय एवं अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

    छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का 86वाँ मंडल सम्मेलन सम्पन्न : विभिन्न आवासीय एवं अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति

    जीएसटी भुगतान प्रणाली में एकरूपता, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत सीधी भर्ती तथा पुनरीक्षित महंगाई भत्ता के प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी

    रायपुर : छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने बताया कि सम्मेलन में कई नई आवासीय परियोजनाओं एवं प्रशासनिक प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई है, जिनसे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण आवास और अधोसंरचना विकास को नई गति मिलेगी। अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव की अध्यक्षता में मंडल का 86 वाँ मंडल सम्मेलन आज मंडल मुख्यालय, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया गया। सम्मेलन में राज्य में आवासीय एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार कर अनुमोदन प्रदान किया गया।

    तीन प्रमुख आवासीय परियोजनाओं को मिली मंजूरी

     दीनदयाल आवास कॉलोनी, कोहका (तिल्दा), जिला रायपुर- दीनदयाल आवास कॉलोनी, कोहका में व्यावसायिक सह आवासीय प्रकोष्ठ भवनों के निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना के अंतर्गत कुल 76 आवासीय एवं व्यावसायिक इकाइयों का निर्माण किया जाएगा। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 10.37 करोड़ रुपये है।

     स्ववित्तीय अटल विहार योजना, गिनाबहार, जिला जशपुर – गिनाबहार में 6 एमआईजी, 64 एलआईजी और 27 ईडब्ल्यूएस सहित कुल 97 आवासीय भवनों तथा 7 एकड़ भूमि के विकास कार्य के लिए स्वीकृति दी गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 17.51 करोड़ रुपये है।

     स्ववित्तीय योजना, सारधा (लोरमी), जिला मुंगेली दृ सारधा में 200 ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण तथा 5 एकड़ भूमि के बाह्य विकास कार्य हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 16.94 करोड़ रुपये है। इन तीनों परियोजनाओं के लिए कुल मिलाकर लगभग 44.82 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।

    प्रशासनिक एवं नीतिगत प्रस्तावों को भी मंजूरी

     सम्मेलन में निर्माण कार्यों के लिए जीएसटी भुगतान प्रणाली तथा रॉयल्टी क्लीयरेंस प्रमाण पत्र संबंधी प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने हेतु समान मानक प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सीधी भर्ती में दिव्यांगजनों के आरक्षण हेतु पदों के चिन्हांकन को समाज कल्याण विभाग की 25 फरवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार मंडल में यथावत लागू करने का निर्णय लिया गया। मंडल के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राज्य शासन के कर्मचारियों के अनुरूप पुनरीक्षित महंगाई भत्ता देने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

    क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के संचालन हेतु पीपीपी मोड में एजेंसी नियुक्ति को मंजूरी

     सम्मेलन में क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन एवं रखरखाव के लिए लाइसेंस आधारित पीपीपी मॉडल के अंतर्गत एजेंसी चयन हेतु निविदा दस्तावेज एवं लाइसेंस अनुबंध प्रारूप का अनुमोदन भी किया गया।

    वर्ष 2026 के प्रथम चार महीनों में 317 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विक्रय

     सम्मेलन में सदस्यों को अवगत कराया गया कि मंडल ने वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में लगभग 317 करोड़ रुपये मूल्य की 1,647 संपत्तियों का सफल विक्रय किया है। यह उपलब्धि मंडल की योजनाओं के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

     86वें मंडल सम्मेलन में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण, आवास एवं पर्यावरण विभाग के विशेष सचिव श्री डी.एस. भारद्वाज, लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधि श्री जी.आर. रावटे, वित्त विभाग के प्रतिनिधि श्री निखिल अग्रवाल, हुडको के प्रतिनिधि श्री हितेश बरोट सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • छत्तीसगढ़ विधानसभा होगी पूरी तरह ‘पेपरलेस’ : तकनीकी व्यवस्थाओं में तेजी लाने लोक निर्माण सचिव ने अधिकारियों को दिए निर्देश

    छत्तीसगढ़ विधानसभा होगी पूरी तरह ‘पेपरलेस’ : तकनीकी व्यवस्थाओं में तेजी लाने लोक निर्माण सचिव ने अधिकारियों को दिए निर्देश

    विधानसभा को ‘पेपरलेस’ करने के कार्यों में आएगी तेजी

     लोक निर्माण विभाग के सचिव ने विधानसभा भवन का किया निरीक्षण

    पर्याप्त पार्किंग के साथ सर्वसुविधायुक्त ड्राइवर-रूम बनाने के दिए निर्देश

    निर्माणाधीन नए ‘लोकभवन’ के कार्यों को भी देखा, अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को काम में तेजी लाने कहा

    रायपुर : लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज नवा रायपुर में निर्माणाधीन लोकभवन (राजभवन) के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने पूरे परिसर का भ्रमण कर ले-आउट और फ्लोर-प्लान जाना। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। श्री बंसल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के नए भवन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने विधानसभा को ‘पेपरलेस’ बनाने के लिए तकनीकी कार्यों औऱ व्यवस्थाओं में तेजी लाने लोक निर्माण विभाग और चिप्स को बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता श्री टी.आर. कुंजाम, अधीक्षण अभियंता श्री डी.के. नेताम और कार्यपालन अभियंता श्री अभिनव श्रीवास्तव भी इस दौरान मौजूद थे।

    लोक निर्माण विभाग के सचिव ने ‘लोकभवन’ का निर्माण राज्यपाल की गरिमा के अनुरूप उत्कृष्टता से करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूरे परिसर के सौंदर्य, सूरज की रोशनी और पूर्ण उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने को कहा। उन्होंने भवन की सभी बारीकियों पर पुख्ता काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यक्रमों के आयोजन के लिए यहां बन रहे सभा-भवनों और कार्यालयीन कक्षों की बैठक व्यवस्था पहले से ही निर्धारित कर उनके अनुरूप कार्यों को अंजाम देने को कहा। उन्होंने भवन के निर्माण कार्य में लगे अलग-अलग एजेंसियों से कार्य प्रगति की जानकारी लेकर यथाशीघ्र सभी कार्य पूर्ण कर इसे लोक निर्माण विभाग को हैंड-ओवर करने को कहा। 

    लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री बंसल ने नए विधानसभा भवन में प्रवेश द्वार, सदन, अधिकारी दीर्घा, लॉबी, डाइनिंग एरिया, मीडिया ब्रीफिंग एरिया, समिति कक्ष, मुख्यमंत्री कार्यालय, विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय, उप मुख्यमंत्रियों तथा मंत्रियों के कार्यालयों, ऑफिसर लाउंज और मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों के कार्यालयों का सघन निरीक्षण किया। उन्होंने सभी कार्यालयीन कक्षों में समुचित फर्नीचर और बैठक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नए भवन में वर्तमान व्यवस्था की कमियों और खामियों को आगामी मानसून सत्र के पहले दूर करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

    विभागीय सचिव ने विधानसभा को ‘पेपरलेस’ करने तकनीकी व्यवस्थाओं को तेजी से पूर्ण करने को कहा। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और चिप्स के अधिकारियों के साथ इसके लिए जरूरी इंतजामों, उपकरणों, हार्डवेयर्स और सॉफ्टवेयर्स की भी समीक्षा की। उन्होंने बेहतर समन्वय और तेजी से काम करते हुए इस साल के शीतकालीन सत्र तक सभी तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने हर पखवाड़े इसकी प्रगति की समीक्षा करने भी कहा।

    श्री बंसल ने विधानसभा परिसर में गाड़ियों के पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था के साथ वाहन चालकों के लिए सर्वसुविधायुक्त कक्ष भी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विधानसभा भवन के प्रवेश द्वार क्रमांक-3 में पास-काउंटर के पास आगंतुकों के लिए बनने वाले प्रतीक्षालय कक्ष के साथ ही विधानसभा ड्यूटी करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए कैन्टीन बनाने का भी सुझाव दिया।

  • हर ग्रामीण घर तक पहुंचेगा शुद्ध पानी : मुख्य सचिव ने जल जीवन मिशन की समीक्षा में नियमित जलापूर्ति और गुणवत्ता जांच के दिए सख्त निर्देश

    हर ग्रामीण घर तक पहुंचेगा शुद्ध पानी : मुख्य सचिव ने जल जीवन मिशन की समीक्षा में नियमित जलापूर्ति और गुणवत्ता जांच के दिए सख्त निर्देश

    पेयजल की नियमित जलापूर्ति और शुद्धता की जांच जरूरी- मुख्य सचिव

    राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की बैठक संपन्न

    वर्ष 2028 तक हर ग्रामीण घर में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य

    रायपुर : मुख्य सचिव श्री विकासशील ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में नियमित जलापूर्ति और पेयजल की शुद्धता की निरंतर जांच कराने के कड़े निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आज यहाँ मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।

     बैठक में जल जीवन मिशन 2.0 के क्रियान्वयन की कार्ययोजना, पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों में पेयजल व्यवस्था, आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण, जनभागीदारी, जल संरक्षण तथा सुजलम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही, भू-जल के विवेकपूर्ण उपयोग और जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए श्जल अर्पणश् की नई पहल पर भी विचार-विमर्श किया गया।

    बुनियादी ढांचे के बाद अब सुचारू संचालन और मॉनिटरिंग पर जोर

     मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न गांवों और बसाहटों में पानी की टंकियां तथा नल लगाने का काम पूरा होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नियमित जलापूर्ति और पानी की गुणवत्ता बनाए रखना है।

    ग्राम पंचायतों को नल-जल योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए गठित समितियों में महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य किया गया है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ग्राम पंचायतों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर सहयोग करने के निर्देश दिए। नल-जल योजनाओं की निरंतर और प्रभावी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सीधे जिला कलेक्टरों की होगी।

    वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल ट्रैकिंग के कड़े निर्देश

     मुख्य सचिव ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत गाइडलाइंस के अनुरूप पूर्ण वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड का उपयोग केवल स्वीकृत मदों में ही किया जाए। पानी की सप्लाई चौन में किसी भी प्रकार की खराबी को तुरंत सुधारने के लिए उन्होंने सुजलम भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म और पीएम गति शक्ति ऐप के माध्यम से रियल-टाइम ट्रैकिंग करने के निर्देश दिए।

     इसके अलावा, उन्होंने एलडब्ल्यूई (नक्सल) प्रभावित एवं दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में स्वीकृत योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्यों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने निर्देशित किया कि वर्ष 2028 की समय-सीमा से पहले छत्तीसगढ़ के शत-प्रतिशत ग्रामीण घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाई जाए।

    सिंगल विलेज और बल्क वॉटर स्कीम की प्रगति

     बैठक में अधिकारियों ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत रिफॉर्म प्लान की प्रगति की जानकारी दी। सिंगल विलेज स्कीम के तहत इस विकेंद्रीकृत योजना के तहत गांवों में ही उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग कर पाइपलाइन के जरिए हर घर में नल कनेक्शन दिया जाता है। राज्य के विभिन्न गांवों में ऐसी 29 हजार 90 योजनाएं बनाई गई हैं। दूर-दराज के क्षेत्रों, शहरों या कई गांवों के समूहों तक भारी मात्रा में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए 70 योजनाएं संचालित हैं, जिनमें पानी को दूरस्थ स्रोतों से लाकर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध किया जाता है।

     पीएम जनमन कार्यक्रम के तहत पीवीटीजी बसाहटों में पेयजल व्यवस्था के तहत 1,531 गांवों के अंतर्गत आने वाले (20 परिवारों से कम वाली) करीब 920 बसाहटों और एलडब्ल्यूई क्षेत्रों के छूटे हुए परिवारों के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम जारी है।

     बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, वित्त विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह, इसके साथ ही भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में वर्चुअली व प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।

  • कृषि सुधारों में छत्तीसगढ़ बना देश का रोल मॉडल : भुवनेश्वर कॉन्फ्रेंस में मंत्री रामविचार नेताम ने गिनाईं उपलब्धियां, केंद्र सरकार ने की जमकर सराहना

    कृषि सुधारों में छत्तीसगढ़ बना देश का रोल मॉडल : भुवनेश्वर कॉन्फ्रेंस में मंत्री रामविचार नेताम ने गिनाईं उपलब्धियां, केंद्र सरकार ने की जमकर सराहना

    छत्तीसगढ़ बना कृषि सुधारों का राष्ट्रीय मॉडल: मंत्री श्री नेताम

    भुवनेश्वर जोनल कॉन्फ्रेंस में मंत्री रामविचार नेताम ने रखी राज्य की उपलब्धियां, केंद्र ने की सराहना

    रायपुर : कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 19 मई को आयोजित राष्ट्रीय जोनल कॉन्फ्रेंस में छत्तीसगढ़ को कृषि नवाचार, किसान कल्याण और टिकाऊ खेती के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय वृद्धि, कृषि विविधीकरण और ग्रामीण समृद्धि को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने तिलहन मिशन के तहत पूर्वोत्तर पांच राज्यों में छत्तीसगढ़ द्वारा लक्ष्य पूरा करने में पहले स्थान प्राप्त करने पर बधाई और शुभकामनाएं दी।

     मंत्री श्री नेताम ने बताया कि राज्य में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो देश में धान के लिए सबसे पारदर्शी और ऐतिहासिक समर्थन व्यवस्था मानी जा रही है। पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने 437 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी कर किसानों के खातों में लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपये का सीधा भुगतान किया है।

    भूमिहीन मजदूरों से लेकर डिजिटल खेती तक, छत्तीसगढ़ का व्यापक कृषि विजन

    सम्मेलन में मंत्री श्री नेताम ने कहा कि राज्य सरकार केवल बड़े किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर योजना के तहत 5 लाख से अधिक परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता सीधे बैंक खातों में दी जा रही है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ तेजी से बागवानी और वैकल्पिक खेती के केंद्र के रूप में उभर रहा है। बस्तर में कॉफी, अनासपाती और जशपुर में चाय की खेती आदिवासी क्षेत्रों में नई आर्थिक संभावनाएं खोल रही हैं।

    कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने जोनल कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में कृषि के क्षेत्र में 128 हाईटेक नर्सरी, 71 कोल्ड स्टोरेज, 63 पैकहाउस और 428 सोलर ड्रायर विकसित किए गए हैं। ऑयल पाम, बांस मिशन, प्राकृतिक खेती, दलहन-तिलहन विस्तार तथा कृषि वानिकी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग 4.89 लाख किसानों को 854 करोड़ रुपये से अधिक की दावा राशि वितरित की गई है। श्री परदेशी ने कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में एआई, ड्रोन तकनीक और एकीकृत किसान पोर्टलों के माध्यम से कृषि व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने की छत्तीसगढ़ की सराहना

    राष्ट्रीय जोनल कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने एग्रीस्टेक पोर्टल, दलहन-तिलहन विस्तार, पीएम आशा योजना, प्राकृतिक खेती और तिलहन मिशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना की। उन्होंने पूर्वाेत्तर एवं पूर्वी भारत के 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के बीच तिलहन मिशन में लक्ष्य प्राप्ति पर छत्तीसगढ़ को प्रथम स्थान हासिल करने के लिए बधाई दी।

    इस अवसर पर 5 राज्यों के कृषि मंत्री सहित छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त एवं विभागीय सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि श्री राहुल देव, संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश चन्द्राकर और संयुक्त संचालक कृषि श्री गयाराम उपस्थित थे।

  • अबूझमाड़ में महुआ प्रसंस्करण के लिए बनेगा जनजातीय सहकारी मॉडल, संग्राहकों को हो रहा है सीधा ऑनलाइन भुगतान

    अबूझमाड़ में महुआ प्रसंस्करण के लिए बनेगा जनजातीय सहकारी मॉडल, संग्राहकों को हो रहा है सीधा ऑनलाइन भुगतान

    आदिवासी समुदाय की अतिरिक्त आय हेतु लघु वनोपज संघ की बैठक में विचार-विमर्श

    रायपुर : अबूझमाड़ क्षेत्र के विकास और वहां जनजातीय (आदिवासी) नेतृत्व में महुआ प्रसंस्करण (च्तवबमेेपदह) के लिए एक प्रभावी सहकारी मॉडल विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में समर्थन मूल्य पर तेंदूपत्ता संग्रहण तथा आदिवासियों की आय बढ़ाने के लिए वन धन योजना और श्ट्राईफेडश् के तहत महुआ प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने की कार्ययोजना पर भी विमर्श किया गया। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहाँ मंत्रालय (महानदी भवन) में श्छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी लघु वनोपज संघश् की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई।

    वन धन समितियों द्वारा तैयार हो रहे हैं महुआ के कई उत्पाद

     बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वन धन सहकारी समितियों द्वारा महुआ के फूलों से विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं। महुआ लड्डू और कुकीज, महुआ स्क्वैश (शरबत), महुआ का अचार और महुआ उत्पादों की प्रोसेसिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने हेतु स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया गया।

    तेंदूपत्ता संग्राहकों के हितों का संरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता

     बैठक में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य की भी समीक्षा की गई। इस दौरान संग्रहण से जुड़े व्यापार में सरकार को वित्तीय हानि से बचाने और संग्राहकों को अधिक से अधिक लाभांश पहुंचाने की रणनीतियों पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा वर्तमान में संग्राहकों को पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था के तहत सीधे ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए एक आधुनिक सिस्टम विकसित किया गया है, जिससे भुगतान की राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में जमा हो रही है।

     इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए जिनमें प्रमुख हैं-वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, गृह विभाग सचिव श्रीमती नेहा चंपावत, पीसीसीएफ श्रीनिवास राव इसके साथ ही वन विभाग तथा लघु वनोपज संघ के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

  • लाल आतंक से विकास की ओर बढ़ता दारेली : चार दशक बाद पहली बार गांव पहुंचा प्रशासन, जनगणना कार्य संपन्न

    लाल आतंक से विकास की ओर बढ़ता दारेली : चार दशक बाद पहली बार गांव पहुंचा प्रशासन, जनगणना कार्य संपन्न

    नक्सल भय को पीछे छोड़ बदलाव और विश्वास की नई कहानी लिख रहा बीजापुर का सुदूर अंचल

    रायपुर : लंबे समय तक नक्सली प्रभाव और भय के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा रहा बीजापुर जिले का दारेली गांव, अब बदलाव और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है। पिछले चार दशकों से इस क्षेत्र में कोई भी प्रशासनिक गतिविधि नहीं हो पाई थी, यहाँ तक कि वर्ष 2011 की राष्ट्रीय जनगणना से भी यह गांव वंचित रह गया था, लेकिन अब इतिहास बदलते हुए पहली बार जिला प्रशासन की टीम सीधे दारेली गांव पहुंची और वहां सुचारू रूप से जनगणना का कार्य संपन्न कराया।

     मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं अब उन सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले विकास की कल्पना करना भी बेहद कठिन था।

    प्रशासनिक अमले का ऐतिहासिक दौरा और आत्मीय स्वागत

     इसी कड़ी में कलेक्टर बीजापुर श्री विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे, जनगणना प्रभारी अधिकारी श्री मुकेश देवांगन तथा उसूर एसडीएम श्री भूपेंद्र गावरे ने दारेली गांव का सघन दौरा किया। प्रशासनिक अधिकारियों को अपने बीच पाकर ग्रामीणों ने उनका आत्मीय और भावुक स्वागत किया। ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज उन्हें पहली बार यह महसूस हुआ है कि शासन-प्रशासन उनके द्वार तक पहुंचा है। इस दौरान गांव में हुए जनगणना कार्य को ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक और सुखद पहल बताया।

    शिविर लगाकर बुनियादी दस्तावेज बनाने के निर्देश

     कलेक्टर बीजापुर ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और जमीन के पट्टे, आधार कार्ड, बैंक खाते तथा राशन कार्ड जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की उपलब्धता की समीक्षा की। कई ग्रामीणों के दस्तावेज अपूर्ण पाए जाने पर उन्होंने मातहत अधिकारियों को निर्देशित किया कि गांव में विशेष शिविर का आयोजन किया जाए, ताकि सभी पात्र ग्रामीणों का शत-प्रतिशत सैचुरेशन (दस्तावेजीकरण) सुनिश्चित हो सके।

    मौके पर ही संवेदनशील संज्ञानरू किसान की समस्या का त्वरित समाधान

     भ्रमण के दौरान एक स्थानीय किसान ने कलेक्टर को अपनी व्यथा सुनाई कि उसके पिता के निधन के बाद भी लंबे समय से जमीन का नामांतरण नहीं हो पाया है। इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद राजस्व अधिकारियों को नामांतरण प्रक्रिया तुरंत पूरी करने के कड़े निर्देश दिए और कहा कि वे स्वयं इस मामले की निगरानी करेंगे। प्रशासन की इस त्वरित कार्यप्रणाली को देखकर किसान भावुक हो गया और उसने अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    जनकल्याणकारी योजनाओं और छात्रवृत्ति की घोषणा

     कलेक्टर ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शासन की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत दारेली के सभी स्कूली बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर छात्रवृत्ति का लाभ दिलाने के भी निर्देश दिए। जो दारेली गांव कभी भय, उपेक्षा और सन्नाटे का प्रतीक माना जाता था, वह आज विकास, आपसी विश्वास और नई उम्मीदों की राह पर कदम बढ़ा चुका है। प्रशासन की इस संवेदनशील पहल ने ग्रामीणों के भीतर शासन के प्रति भरोसे को और अधिक मजबूत किया है।

  • वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पुलिस लाइन उर्दना में अत्याधुनिक पुलिस जिम का किया लोकार्पण

    वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पुलिस लाइन उर्दना में अत्याधुनिक पुलिस जिम का किया लोकार्पण

    आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में फिटनेस और वेलनेस को प्राथमिकता देना बेहद आवश्यक — वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी

    पुलिसकर्मियों, उनके परिवारों और स्थानीय युवाओं को मिलेगा आधुनिक जिम सुविधा का लाभ

    रायपुर : वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने आज पुलिस लाइन उर्दना, रायगढ़ में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित पुलिस जिम का लोकार्पण किया। उन्होंने रिबन काटकर जिम का शुभारंभ किया और जिम कक्ष में स्थापित भगवान हनुमान जी के चित्र पर पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, स्वास्थ्य और सुरक्षा की कामना की।

    इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने जिम में स्थापित आधुनिक फिटनेस उपकरणों का अवलोकन किया और कहा कि वर्तमान समय की व्यस्त जीवनशैली में शारीरिक फिटनेस और मानसिक वेलनेस दोनों को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने सभी को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम के लिए समय निकालने की सलाह दी।

    उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे जनसेवा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उनका शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है। यह आधुनिक जिम न केवल पुलिसकर्मियों बल्कि उनके परिवारजनों और स्थानीय युवाओं के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा तथा स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली को बढ़ावा देगा।

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने बताया कि पुलिसकर्मियों को तनावमुक्त रखने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए रायगढ़ पुलिस द्वारा योग, खेल और फिटनेस गतिविधियों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इसी उद्देश्य से पुलिस जिम का उन्नयन कर इसमें अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से पुलिसकर्मी नियमित व्यायाम कर अपनी फिटनेस बनाए रख सकेंगे, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनके स्वास्थ्य और कार्य प्रदर्शन दोनों पर पड़ेगा।

    कार्यक्रम में महापौर श्री जीवर्धन चौहान, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी,  सभापति श्री डिग्रीलाल साहू सहित  जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ को मिली 16 अत्याधुनिक डायल-112 ईआरवी वाहनों को दिखाई हरी झंडी

    वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ को मिली 16 अत्याधुनिक डायल-112 ईआरवी वाहनों को दिखाई हरी झंडी

    छत्तीसगढ़ डायल-112 फेज-2 नेक्स्ट जेनरेशन के तहत रायगढ़ जिले को मिली बड़ी सौगात

    अब पुलिस, मेडिकल, फायर, आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल सुरक्षा सहित सभी आपात सेवाएं एक ही नंबर 112 पर उपलब्ध

    आधुनिक तकनीक से लैस वाहनों से आपात स्थितियों में और तेज होगी पुलिस की प्रतिक्रिया

    रायपुर/रायगढ़ : सुरक्षा, सेवा और सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में रायगढ़ जिले को छत्तीसगढ़ डायल-112 (फेज-2 नेक्स्ट जेनरेशन) के तहत 16 अत्याधुनिक इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल (ERV) की सौगात मिली है। वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने आज पुराना पुलिस लाइन, रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में इन आधुनिक आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों की सुरक्षा और त्वरित सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सड़क दुर्घटना, चिकित्सा आपातकाल, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा सहित किसी भी संकट की स्थिति में अब रायगढ़वासियों को तेज, सुरक्षित और प्रभावी सहायता मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि “डायल-112  एक्के नम्बर, सब्बो बर” की अवधारणा के साथ यह सेवा पूरे छत्तीसगढ़ में संचालित की जा रही है। राज्यभर में 400 से अधिक आधुनिक वाहन तैनात किए गए हैं, जिनमें से रायगढ़ जिले को 16 वाहन प्रदान किए गए हैं।

    कानून-व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

    वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने पुलिस व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया है। इससे पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ेगी, आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम होगा और कानून-व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि यह योजना शासन के बड़े निर्णयों का धरातल पर दिखाई देने वाला परिणाम है, जिससे पुलिस को कार्य करने में सुविधा होगी और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

    अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं नए वाहन

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने बताया कि डायल-112 योजना वर्ष 2018 से संचालित है, जिसे अब फेज-2 नेक्स्ट जेनरेशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों तक विस्तारित किया गया है। उन्होंने बताया कि नए ईआरवी वाहनों में PTZ कैमरा, डैश कैमरा, GPS सिस्टम, मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) और स्मार्ट मोबाइल फोन जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध है, जिससे घटनास्थल पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

    अब एक ही नंबर पर सभी आपात सेवाएं

    नई डायल-112 प्रणाली के तहत पुलिस, एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, आपदा प्रबंधन, चाइल्ड हेल्पलाइन, महिला हेल्पलाइन और नेशनल हाईवे सहायता सेवाओं को एकीकृत किया गया है। रायपुर स्थित अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (C4) के माध्यम से इन सेवाओं का संचालन किया जाएगा।

    कार्यक्रम में महापौर श्री जीवर्धन चौहान, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे,  सहित जनप्रतिनिधि, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • नारायणपुर के वनांचल में थमी भटकन, संताय पोटाई को शिविर में ही मिला नया राशन कार्ड

    नारायणपुर के वनांचल में थमी भटकन, संताय पोटाई को शिविर में ही मिला नया राशन कार्ड

    रायपुर : छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार द्वारा राज्य में सुशासन की नई परिभाषा लिखी जा रही है। इसका जीता-जागता उदाहरण ‘सुशासन तिहार 2026’ के रूप में सामने आ रहा है, जो ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के नागरिकों के लिए एक बड़ा राहत का माध्यम बन चुका है। जिले के दूरस्थ अंचलों में आयोजित समाधान शिविरों के जरिए प्रशासन सीधे जनता के द्वार पहुँच रहा है, जिससे वर्षों से लंबित समस्याओं का मौके पर ही निपटारा हो रहा है।

     इसी कड़ी में नारायणपुर के ग्राम भाटपाल से एक सुखद तस्वीर सामने आई है। यहाँ के ग्रामीण संताय पोटाई के लिए यह सुशासन तिहार उनके जीवन में एक नई सुबह लेकर आया, जब उन्हें शिविर में ही उनका नया राशन कार्ड तैयार कर सौंप दिया गया।

    वर्षों का इंतजार मिनटों में खत्म

     संताय पोटाई ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि लंबे समय से राशन कार्ड न होने के कारण उनका परिवार जनवितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले रियायती खाद्यान्न से वंचित था। उन्होंने पहले भी कई प्रयास किए, लेकिन भौगोलिक दूरी और प्रक्रियाओं के चलते बात नहीं बन पा रही थी। इस पर उन्होंने कहा कि मैं थक चुका था, लेकिन सुशासन तिहार के शिविर ने मेरी चिंता दूर कर दी। मैंने अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी और देखते ही देखते त्वरित कार्रवाई करते हुए मेरा नया राशन कार्ड मेरे हाथों में सौंप दिया गया। अब हमारे घर में भी नियमित रूप से सरकारी राशन आएगा।

    मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का जताया आभार

     नया राशन कार्ड मिलने से संताय पोटाई और उनके परिवार के चेहरे खिल उठे हैं। अब उन्हें शासन द्वारा निर्धारित रियायती दर पर चावल, शक्कर और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री नियमित रूप से मिल सकेगी। इस त्वरित न्याय के लिए संताय ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान सचमुच ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जहाँ दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय सरकार खुद गांव आकर काम कर रही है।

    ‘सुशासन तिहार’ से गढ़बो नवा छत्तीसगढ़

     जिला प्रशासन नारायणपुर के मार्गदर्शन में इन शिविरों का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य कागजी कार्रवाई को सरल बनाकर अंतिम व्यक्ति तक लोकतंत्र और विकास का लाभ पहुँचाना है। प्रशासन के इस रुख से न केवल आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो रहा है, बल्कि शासकीय योजनाओं की पहुँच भी शत-प्रतिशत सुनिश्चित हो रही है।

  • विशेष लेख : संकट से सुरक्षा तक- छत्तीसगढ़ का बजटीय सुरक्षा कवच और भूमिहीनों का स्वर्णिम संबल

    विशेष लेख : संकट से सुरक्षा तक- छत्तीसगढ़ का बजटीय सुरक्षा कवच और भूमिहीनों का स्वर्णिम संबल

    विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

    रायपुर :  एक संवेदनशील और दूरदर्शी सरकार की असली पहचान संकट के समय उसकी त्वरित तत्परता और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से होती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार का हालिया बजट इसी लोक-कल्याणकारी सोच का जीवंत प्रमाण है। यह बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि राज्य के विकास का एक ऐसा विज़न डॉक्यूमेंट है जहाँ एक तरफ प्राकृतिक आपदाओं से नागरिकों को बचाने के लिए करोड़ों का अभेद्य वित्तीय सुरक्षा कवच तैयार किया गया है, वहीं दूसरी तरफ भूमिहीन मजदूरों और ग्रामीणों को स्थायी आर्थिक संबल देने के लिए सरकार ने अपनी तिजोरी के द्वार खोल दिए हैं।

    आपदा प्रबंधन का त्रिपल-लेयर अभेद्य किला

     बाढ़, सूखा, और आकाशीय बिजली जैसी अनिश्चित प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को पूरी तरह निष्प्रभावी करने के लिए साय सरकार ने देश के सामने आपदा प्रबंधन का एक बेहतरीन और अत्याधुनिक मॉडल पेश किया है। सरकार ने इसके लिए तीन स्तरों पर भारी-भरकम फंड अलॉट कर सुरक्षा चक्र को मजबूत किया है। जिसमे राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष ( SDRF) के लिए 588 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड आवंटन, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य तुरंत और बिना किसी वित्तीय बाधा के शुरू हो सकें।

     राज्य आपदा शमन कोष (SDMF) के लिए 147 करोड़ रुपए का प्रावधान, जिसका मुख्य उद्देश्य आपदाओं के खतरों को पहले ही कम करना है। इसके साथ ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के लिए 50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मजबूती शामिल है।

     इस बजट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह राशि केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा पूर्व चेतावनी प्रणालियों को अत्याधुनिक बनाने में खर्च होगा। तकनीक के इस अपग्रेडेशन से छत्तीसगढ़ में अब किसी भी आपदा की सटीक जानकारी समय रहते मिल जाएगी, जिससे जान-माल का नुकसान शून्य करने के संकल्प को पूरा किया जा सके। यह कदम राज्य को आपदा प्रबंधन के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में है।

    भूमिहीनों को 10 हज़ार रुपए की सम्मान राशि और स्वामित्व का नया सवेरा

     इस बजट का सबसे संवेदनशील और मानवीय चेहरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने वाली योजनाओं में दिखाई देता है। सरकार ने समाज के सबसे कमजोर वर्ग को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए दो बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाए हैं। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के लिए सरकार ने 605 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट आरक्षित किया है। इसके अंतर्गत राज्य के हर पात्र भूमिहीन मजदूर परिवार को प्रतिवर्ष 10 हज़ार रुपए की सीधी आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि न केवल गरीब परिवारों को सम्मान से जीने का हक देगी, बल्कि ग्रामीण बाजारों में तरलता बढ़ाकर छत्तीसगढ़ की आंतरिक अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करेगी।

     स्वामित्व योजना ग्रामीण सशक्तीकरण के नए युग के रूप में देखा जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए सरकार ने 10 लाख 50 हजार हितग्राहियों को उनकी जमीन और मकान का मालिकाना हक सौंपने का विशाल लक्ष्य रखा है। यह कदम ग्रामीण भारत से वर्षों पुराने संपत्ति विवादों को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि अब गांव के लोग भी अपने घरों पर आसानी से बैंक लोन ले सकेंगे, जिससे स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता के नए रास्ते खुलेंगे।

    विज़न से हकीकत तक-सजग प्रशासन, सुदृढ़ छत्तीसगढ़

     निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ सरकार के पास इस विकास यात्रा के लिए पुख्ता नीति, आधुनिक तकनीक और पर्याप्त फंड तीनों मौजूद हैं। बस्तर से लेकर सरगुजा के वनांचलों तक इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार करने, ग्रामीणों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाने और नवगठित जिलों के प्रशासनिक अमले को हाई-टेक प्रशिक्षण देने के लिए सरकार युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है।

     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह बजटीय सुरक्षा कवच और कल्याणकारी संबल न केवल छत्तीसगढ़ के अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ रहा है, बल्कि सुशासन की एक ऐसी नई इबारत लिख रहा है जो आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय रोल मॉडल साबित होगी। यह बजट विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक युगांतकारी और ठोस कदम है।