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  • अम्बिकापुर में चोरी का बड़ा खुलासा : पड़ोसियों पर था भरोसा, वही निकले चोर ! घर से जेवर और बाइक लेकर हुए फरार, दारू-मुर्गा पार्टी ने खोल दी चोरों की पोल, दो आरोपी गिरफ्तार कर भेजे गये न्यायिक अभिरक्षा में.

    अम्बिकापुर में चोरी का बड़ा खुलासा : पड़ोसियों पर था भरोसा, वही निकले चोर ! घर से जेवर और बाइक लेकर हुए फरार, दारू-मुर्गा पार्टी ने खोल दी चोरों की पोल, दो आरोपी गिरफ्तार कर भेजे गये न्यायिक अभिरक्षा में.

    डीआईजी एवं एसएसपी श्री राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के दिशा निर्देशन पर सरगुजा पुलिस द्वारा थाने में दर्ज प्रकरणों में संलिप्त आरोपियों की धरपकड़/गिरफ्तारी की कार्यवाही लगातार जारी है, इसी क्रम में थाना कोतवाली पुलिस द्वारा चोरी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रकरण का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 23 मई 2026 को प्रार्थिया फुलेश्वरी कुजूर पति स्व. महेश्वर कुजूर निवासी बौरी तालाब काली मंदिर के पास अम्बिकापुर के द्वारा थाना कोतवाली में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि दिनांक 20 मई 2026 को अपने घर में ताला बंद कर अपने लड़के के साथ जमशेदपुर, झारखण्ड गई हुई थी। दिनांक 23 मई 2026 को जब वह झारखण्ड से वापस अपने घर पहुंची, तो देखी कि घर का सामान बिखरा पड़ा था और प्रथम तल का बालकनी के पास का दरवाजा का कुण्डी टूटा हुआ था। अपने घर का सामान चेक करने पर अलमारी में रखा 01 सोने का मंगलसूत्र, नाक का नग, 02 सेट चांदी का पायल, 01 नग चांदी का सिक्का, 8000/-रूपये नगद राशि व पैशन प्रो मोटर साइकिल वाहन क्रमांक सीजी 15 डीपी 2058 नहीं था, आसपास व पड़ोस में पता-तलाश किये जाने पर पता नहीं चला। जिसकी रिपोर्ट पर थाना कोतवाली अम्बिकापुर में अपराध क्रमांक 338/2026 धारा 331(4), 305(ए) बीएनएस पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

    प्रकरण पंजीबद्ध होने के उपरांत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में अज्ञात आरोपी/चोर की पता-तलाश लगातार की जा रही थी। इसी दौरान दिनांक 24 मई 2026 को मुखबीर से पता चला कि प्रार्थिया के पड़ोसी संजय पटेल तथा अभिषेक चेरवा विगत 2-3 दिन से अपने पास खूब सारा पैसा रखे हैं व दारू मुर्गा बकरा खा पी रहे हैं एवं आपस में सोना-चांदी को बेचने के लिये ग्राहक खोजने की बात कर रहे हैं। इसी आधार पर संदेही संजय पटेल व अभिषेक चेरवा को पुलिस अभिरक्षा में लेकर पूछताछ किया गया, जो घटना दिनांक समय को फुलेश्वरी कुजुर के मकान से सोना-चांदी एवं नगदी रकम तथा मोटर सायकल चोरी करना स्वीकार किये। आरोपी अभिषेक चेरवा के मेमोरेण्डम के आधार पर चोरी गई संपत्ति सोने का मंगलसूत्र 01 नग, सोने का लॉकेट 02 नग, सोने का टप्स 02 नग चांदी का पायल 02 जोड़ी नगदी रकम 70/-रूपये गवाहों के समक्ष विधिवत् रूप से जप्त किया गया, तथा आरोपी संजय पटेल के मेमोरेण्डम के आधार पर गौरी मंदिर पुलिस लाईन के पास से चोरी गई मोटर सायकल पैशन प्रो सीजी 15 डीपी 2058 को गवाहों के समक्ष विधिवत् रूप से जप्त किया गया है। जिनके विरूद्ध अपराध सबूत पाये जाने पर गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।

    उपरोक्त प्रकरण में गिरफ्तार आरोपीगण – (01) अभिषेक चेरवा उम्र 24 वर्ष निवासी बौरीबांध काली मंदिर के पास अम्बिकापुर, थाना कोतवाली, जिला सरगुजा छत्तीसगढ़, (02) संजय पटेल उम्र 35 वर्ष, निवासी बौरीबांध काली मंदिर के पास अम्बिकापुर, थाना कोतवाली, जिला सरगुजा छत्तीसगढ़।

  • नौकरी का सपना दिखाकर की ठगी ! आबकारी विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी नियुक्ति-पत्र बनाने वाला पहुंचा जेल, कोर्ट ने सुनाई तीन साल कारावास और अर्थदंड की सजा.

    नौकरी का सपना दिखाकर की ठगी ! आबकारी विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी नियुक्ति-पत्र बनाने वाला पहुंचा जेल, कोर्ट ने सुनाई तीन साल कारावास और अर्थदंड की सजा.

    दिनांक 10 जुलाई 2018 को प्रार्थी अशोक दास द्वारा थाना प्रेमनगर में रिपोर्ट दर्ज करायी गई थी कि हेमंत महंत द्वारा आबकारी विभाग में भृत्य (चपरासी) की नौकरी लगाने के नाम पर 1 लाख रूपये लिया तथा फर्जी नियुक्ति आदेश तैयार कर उसे दिया गया। प्रार्थी संबंधित विभाग में पता करने पहुंचा तो उक्त नियुक्ति आदेश फर्जी होना पाया गया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर् अपराध क्रमांक 53/18 धारा 420, 467, 468, 471 भारतीय दण्ड संहिता का पंजीबद्ध किया गया एवं आरोपी हेमंत महंत पिता सुन्दर दास सोनवानी ग्राम चंदननगर थाना प्रेमनगर को गिरफ्तार किया गया। मामले के विवेचक निरीक्षक बसंत लाल सिंह द्वारा प्रकरण में पुख्ता साक्ष्य संकलित कर आरोप-पत्र माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय सूरजपुर में पेश किया गया। अभियोजन की ओर से पैरवी एडीपीओ राजेश सिंह व पंकज कुमार बागड़े के द्वारा की गई।

  • जशपुर पुलिस का बड़ा एक्शन : जशपुर में मानवता शर्मसार, मानसिक रूप से कमजोर युवती से दरिंदगी, आरोपी संतोष राम गिरफ्तार, बेजुबान पीड़िता के साथ हुई बर्बरता का हिसाब बराबर, हैवान को भेजा जेल….. पढ़ें पूरा समाचार !

    जशपुर पुलिस का बड़ा एक्शन : जशपुर में मानवता शर्मसार, मानसिक रूप से कमजोर युवती से दरिंदगी, आरोपी संतोष राम गिरफ्तार, बेजुबान पीड़िता के साथ हुई बर्बरता का हिसाब बराबर, हैवान को भेजा जेल….. पढ़ें पूरा समाचार !

    मिली जानकारी के अनुसार प्रकरण का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 23 मई 2026 को थाना सिटी कोतवाली जशपुर क्षेत्रांतर्गत एक ग्राम की प्रार्थिया जो कि पीड़िता की छोटी बहन है ने थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी बड़ी बहन पीड़िता जिसकी उम्र 32 वर्ष है, जिसकी करीबन 15-16 वर्ष पूर्व से दिमागी हालत ठीक नहीं है, जो कि अपने पिताजी व बहन के साथ ही रहती है, बात चीत नहीं करती है, चुपचाप रहती है। दिनांक 21 मई 2026 की शाम करीबन 06:00 बजे वे लोग घर में ही थे, उसकी बड़ी बहन पीड़िता घर के आंगन में बैठी हुई थी, शाम करीबन 07:00 बजे प्रार्थिया घर के आंगन में बैठी अपनी मानसिक रूप से कमजोर बड़ी बहन को खाना खाने हेतु बुलाने गई तो वह घर के आंगन में नहीं थी, जिस पर वह व उसके परिजन चिंतित होकर गांव में ही, उसकी मानसिक रूप से कमजोर बड़ी बहन को ढूंढने लगे। इसी दौरान करीबन 07:30 बजे के लगभग, जब वे आरोपी संतोष राम के घर के बगल से गुजर रहे थे, तभी उन्हें अपनी बड़ी बहन की खांसने की आवाज सुनाई दी, जिस पर वे लोग आरोपी के घर के अंदर जाकर देखे तो पाया कि आरोपी संतोष राम, उसकी मानसिक रूप से कमजोर बड़ी बहन के साथ आपत्तिजनक अवस्था में था, जो कि उन्हें देखकर घर से भाग गया, उनके द्वारा अपनी मानसिक रूप से कमजोर पीड़िता बड़ी बहन को घर लेकर वापस लाया गया। आरोपी संतोष राम के द्वारा उसकी बड़ी बहन के साथ मानसिक रूप से कमजोर, जानते हुए भी दुष्कर्म किया गया है।

    विवेचना के दौरान पुलिस के द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए आरोपी संतोष राम को उसके घर से हिरासत में लिया गया। पुलिस की पूछताछ पर आरोपी संतोष राम के द्वारा अपराध स्वीकार करने व पर्याप्त सबूत पाए जाने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर दिनांक 24 मई 2026 को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।

  • पद्मश्री सम्मान से अलंकृत गोडबोले दंपति की निस्वार्थ सेवा को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया छत्तीसगढ़ का गौरव

    पद्मश्री सम्मान से अलंकृत गोडबोले दंपति की निस्वार्थ सेवा को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया छत्तीसगढ़ का गौरव

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई, कहा – सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता राष्ट्र निर्माण का श्रेष्ठ उदाहरण

    बस्तर के सुदूर वनांचलों में दशकों से स्वास्थ्य सेवा, जागरूकता और मानवता की अलख जगा रहे हैं डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर के सुदूर जनजातीय अंचलों में दशकों से निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा और मानवता की मिसाल प्रस्तुत करने वाले डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे समूचे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बताया है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा गोडबोले दंपति को यह सम्मान प्रदान किया जाना जनसेवा, समर्पण और संवेदनशीलता के मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गोडबोले दंपति ने वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़कर अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। बस्तर के बारसूर जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम वनांचल में रहकर उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित लोगों तक निःशुल्क उपचार, स्वास्थ्य जागरूकता और जनविश्वास का प्रकाश पहुँचाया। कुपोषण मुक्ति, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण-जनजातीय समाज में स्वास्थ्य के प्रति चेतना विकसित करने में उनका योगदान अत्यंत अनुकरणीय और प्रेरणादायी रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि  सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जिस प्रतिबद्धता के साथ समाज के सबसे दूरस्थ और जरूरतमंद लोगों के बीच कार्य किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर डॉ. रामचंद्र गोडबोले एवं श्रीमती सुनीता गोडबोले को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सेवा भावना समाज में करुणा, दायित्वबोध और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा को और मजबूत करेगी।

  • मानसून पूर्व तैयारियां तेज, मुख्य सचिव ने ली बाढ़ नियंत्रण हाई पावर कमेटी की बैठक : 1 जून से कलेक्टर्स देंगे प्रतिदिन रिपोर्ट, संवेदनशील क्षेत्रों और बड़े जलाशयों पर रखी जाएगी चौबीसों घंटे नजर

    मानसून पूर्व तैयारियां तेज, मुख्य सचिव ने ली बाढ़ नियंत्रण हाई पावर कमेटी की बैठक : 1 जून से कलेक्टर्स देंगे प्रतिदिन रिपोर्ट, संवेदनशील क्षेत्रों और बड़े जलाशयों पर रखी जाएगी चौबीसों घंटे नजर

    रायपुर : आगामी मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राज्य शासन के विभिन्न विभागों द्वारा की गई तैयारियों की गहन समीक्षा की गई। राहत शिविरों के प्रबंधन से लेकर आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं पर व्यापक रणनीति तैयार की गई। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य स्तरीय उच्च स्तरीय बाढ़ नियंत्रण समिति की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।

    कलेक्टर्स को कड़े निर्देश- 1 जून से शुरू होगी दैनिक मॉनिटरिंग

     मुख्य सचिव ने राज्य के सभी जिला कलेक्टर्स एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्षों को मानसून 2026 के मद्देनजर सुरक्षा और राहत व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। सभी कलेक्टर्स को आगामी 1 जून से प्रतिदिन वर्षा की स्थिति और उससे होने वाली संभावित क्षति की जानकारी अनिवार्य रूप से शासन को भेजनी होगी। प्रत्येक जिले में बाढ़ नियंत्रण के लिए विशेष नोडल अधिकारियों की नियुक्ति तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    राज्य और जिला स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित

     बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में जून माह में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। आपदा के समय त्वरित सहायता और समन्वय के लिए राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) क्रियाशील कर दिया गया है। महत्वपूर्ण संपर्क सूत्र (स्टेट कंट्रोल रूम) राज्य स्तर पर दूरभाष क्रमांक 0771-2223471, 0771-2221242 ओर फैक्स क्रमांक 0771-2223472 इसके साथ ही सभी जिला मुख्यालयों में भी जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जा चुके हैं। बैठक में मुख्य सचिव ने बाढ़ और अतिवृष्टि की स्थिति में जनहानि को शून्य रखने के लिए विभागों को उनकी जिम्मेदारी दी है।

    खाद्य, स्वास्थ्य एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग

     पहुंचविहीन और संवेदनशील क्षेत्रों में राशन, नमक, केरोसिन और जीवन रक्षक दवाओं का अग्रिम भंडारण अभी से सुनिश्चित किया जाए। बाढ़ संभावित क्षेत्रों के लिए विशेष चिकित्सा दलों का गठन किया जाए। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    जल संसाधन, नगर सेना और नागरिक सुरक्षा

     हर साल बाढ़ से प्रभावित होने वाले निचले इलाकों की पहचान कर वहां चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए। बाढ़ से बचाव के उपकरणों और मोटरबोट्स की तत्काल मरम्मत करा ली जाए। नगर सेना और नागरिक सुरक्षा अमले को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है। बड़े बांधों का जलस्तर बढ़ने पर जल निकासी (पानी छोड़ने) से कम से कम 12 घंटे पहले निचले जिलों और सीमावर्ती राज्यों को अलर्ट जारी करना अनिवार्य होगा।

    लोक निर्माण, वन और नगरीय प्रशासन विभाग

     प्रदेश के जर्जर व कमजोर हो चुके पुल-पुलियों, रपटों और सरकारी इमारतों की पहचान कर तत्काल मरम्मत कराई जाए। दुर्घटनाजन्य स्थलों पर बैरियर और सूचना पटल लगाए जाएं। बाढ़ प्रभावितों के मकान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में वन विभाग नजदीकी डिपो में बांस-बल्ली का पर्याप्त भंडारण रखे।

    नगरीय निकायों को मानसून के दौरान शहरों की सभी छोटी-बड़ी नालियों की निरंतर सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जलभराव की स्थिति न बने।

    कृषि विभाग और मौसम केंद्र

     मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी भारी वर्षा की चेतावनियों को समय पर जिला कंट्रोल रूम और आम जनता तक पहुँचाया जाए। किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से मौसम का पूर्वानुमान भेजा जाए।

    बाढ़ से फसलों को होने वाले नुकसान का सर्वे राजस्व, कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से करेंगे और त्वरित रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे।

    जर्जर भवनों और आपदा प्रबंधन ऐप्स पर विशेष जोर

     मुख्य सचिव ने नगरीय क्षेत्रों में स्थित जर्जर और खतरनाक भवनों की लगातार निगरानी करने तथा वहां रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए। नागरिकों की सुरक्षा के लिए विभिन्न आपदा प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान मोबाइल ऐप्स का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया गया। उच्च स्तरीय बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री सारांश मित्तर, वित्त विभाग की विशेष सचिव श्रीमती शीतल शाश्वत वर्मा सहित गृह, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, खाद्य, जनसम्पर्क, रेलवे, दूरदर्शन, रेडक्रॉस सोसाइटी और भारत संचार निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव विकासशील

    सड़क दुर्घटनाएं नहीं हों, इसके लिए हर जरूरी कदम उठाएं : मुख्य सचिव विकासशील

    ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश, प्रदेश में 150 स्थानों पर लगे ईव्ही चार्जिंग स्टेशन

    रायपुर : मुख्य सचिव श्री विकासशील ने विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए सभी समुचित और ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव आज मंत्रालय में सड़क सुरक्षा को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।

    ब्लैक स्पॉट सुधारने पर विशेष जोर

     मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए चिन्हित ब्लैक स्पॉट की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और वहां आवश्यक सुधार कार्य तत्काल किए जाएं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को आपसी समन्वय से सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए ताकि हादसों की आशंका खत्म हो सके।

     सुप्रीम कोर्ट और केंद्र की योजनाओं की समीक्षा

     बैठक में राज्य सड़क सुरक्षा कोष, माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा फलोदी एवं रंगा रेड्डी सड़क दुर्घटना मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम राहत योजना और पीएम ई-ड्राईव योजना की प्रगति की जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने सर्वाेच्च न्यायालय की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सड़क दुर्घटना रेस्क्यू से संबंधित एसओपी के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई।

    ईव्ही चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने के निर्देश

     मुख्य सचिव ने पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन की स्थापना में तेजी लाने को कहा। उन्होंने परिवहन विभाग को निर्धारित स्थलों पर तत्काल ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में अब तक 150 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। इन स्टेशनों पर पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत सब्सिडी भी दी जाती है।

    घायलों को मिलेगा कैशलेस इलाज

     मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित उपचार मिलना सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत घायलों का अस्पताल में कैशलेस उपचार किया जाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, गृह-पुलिस, परिवहन तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत अब तक 282 सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के उपचार के लिए पंजीकरण किया गया है। मुख्य सचिव ने इस योजना के क्रियान्वयन की विस्तार से समीक्षा की और इसे और प्रभावी बनाने को कहा।

     बैठक में परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त श्री एस. प्रकाश, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता सहित पुलिस, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • खरीफ की तैयारी में किसानों को नहीं होगी परेशानी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खेती-किसानी के लिए मिलेगा पर्याप्त डीजल

    खरीफ की तैयारी में किसानों को नहीं होगी परेशानी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर खेती-किसानी के लिए मिलेगा पर्याप्त डीजल

    ट्रैक्टरों से जुताई और सिंचाई पंपों के लिए किसानों को आवश्यकता अनुसार डीजल उपलब्ध कराने के निर्देश

    ड्रम और जरीकेन में डीजल वितरण पर प्रतिबंध में किसानों को दी गई छूट

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए किसानों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। राज्य में पेट्रोल एवं डीजल की उपलब्धता की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टरों तथा सिंचाई पंपों हेतु किसानों को आवश्यकता अनुसार डीजल की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि खेती-किसानी के कार्य प्रभावित न हों।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा है कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और खरीफ सीजन की तैयारी में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने खाद्य विभाग, जिला प्रशासन तथा ऑयल कंपनियों को निर्देशित किया है कि किसानों को  डीजल समय पर और बिना किसी कठिनाई के उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा है कि आगामी खरीफ सीजन में खेती के लिए किसानों को डीजल सुगमता से प्राप्त हो, इसका ध्यान सभी ऑयल कंपनी और जिला प्रशासन द्वारा विशेष रूप से रखा जाये।

    उल्लेखनीय है कि खाद्य विभाग द्वारा 22 मई 2026 को जारी निर्देशानुसार पेट्रोल एवं डीजल के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से प्रदेश के 2516 पेट्रोल-डीजल पंपों से ड्रम एवं जरीकेन में ईंधन प्रदाय पर प्रतिबंध लगाया गया है।हालांकि किसानों की जरूरतों और खरीफ सीजन की तैयारियों को देखते हुए इस व्यवस्था में आवश्यक छूट प्रदान की गई है, ताकि खेतों की जुताई, बोवाई और सिंचाई कार्य बाधित न हों।

    खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोल एवं डीजल की उपलब्धता पर्याप्त है। वर्तमान में प्रदेश में 4 करोड़ 03 लाख लीटर पेट्रोल तथा 5 करोड़ 55 लाख लीटर डीजल का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं, 24 मई 2026 को राज्य को 23 लाख 33 हजार लीटर पेट्रोल तथा 62 लाख 40 हजार लीटर डीजल प्राप्त हुआ है। राज्य में आवश्यकतानुसार पेट्रोल एवं डीजल की नियमित आपूर्ति जारी है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों विशेषकर किसानों को आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार खरीफ सीजन के दौरान खेती-किसानी की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को खेतों की जुताई, बोवाई और सिंचाई के लिए किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित एजेंसियों को आवश्यक समन्वय और सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल : नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के समग्र विकास के लिए शुरू होगी ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल : नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के समग्र विकास के लिए शुरू होगी ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’

    पहले चरण में 32 नगरीय निकायों का चयन, शहरी अधोसंरचना और जन सुविधाओं को मिलेगी नई गति

    मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में छोटे शहरों और कस्बों को भी मिलेगा आधुनिक विकास का नया मॉडल

    200 करोड़ रुपए के प्रावधान के साथ कार्यों के चयन के लिए संभाग स्तरीय समितियों का गठन, 15 दिनों में मांगी गई कार्ययोजना

    आदर्श शहर समृद्धि योजना से छोटे और मध्यम शहरों को मिलेगा व्यवस्थित विकास का नया आधार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    प्रदेश के छोटे शहरों को भी मिलेगा आधुनिक शहरी विकास का नया मॉडल :  उपमुख्यमंत्री अरुण साव

    रायपुर :  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश के नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते नगरों और कस्बों को भी आधुनिक शहरी सुविधाओं से सुसज्जित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ प्रारंभ की जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप यह योजना पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगमों के लिए प्रारंभ हुई मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना की तर्ज पर नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अधोसंरचना को मजबूत करने, जन सुविधाओं का विस्तार करने तथा विकास कार्यों को गति देने का माध्यम बनेगी। योजना के जरिए छोटे और मध्यम शहरों में भी सुव्यवस्थित शहरी विकास की नई आधारशिला रखी जाएगी।

    राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने आज योजना के प्रथम चरण के लिए प्रदेशभर के 32 नगरीय निकायों का चयन कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। योजना के तहत कार्यों के चयन, स्थल निरीक्षण और प्राथमिकता निर्धारण के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय (संभागीय) कार्यालयों के संयुक्त संचालकों की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समितियों का गठन भी किया गया है। समितियों को आगामी 15 दिनों के भीतर कार्यों का चिन्हांकन, स्थल निरीक्षण कर प्राथमिकता के क्रम में सूची तैयार करते हुए अनुमानित राशि की जानकारी शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देशानुसार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और समन्वय के लिए पांचों राजस्व संभागों में कार्यों के चयन एवं मॉनिटरिंग हेतु संचालनालय के यांत्रिकी प्रकोष्ठ के मुख्य अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, ताकि कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।

    पहले चरण में प्रदेश के 32 नगरीय निकायों को मिला अवसर

    आदर्श शहर समृद्धि योजना के पहले चरण में प्रदेश के 32 नगरीय निकायों को शामिल किया गया है। इनमें बस्तर, सरगुजा और रायपुर संभाग के छह-छह, बिलासपुर संभाग के नौ तथा दुर्ग संभाग के पांच निकाय शामिल हैं।

    बस्तर संभाग के अंतर्गत सुकमा नगर पालिका के साथ भोपालपटनम, गीदम, केशकाल, पखांजूर और नरहरपुर नगर पंचायत को शामिल किया गया है। दुर्ग संभाग में पंडरिया और खैरागढ़ नगर पालिका के साथ गुरूर, घुमका और छुईखदान नगर पंचायतों का चयन किया गया है।

    रायपुर संभाग के अंतर्गत कुरूद, महासमुंद, आरंग और बलौदाबाजार नगर पालिका तथा पिथौरा एवं चंदखुरी नगर पंचायत को योजना में शामिल किया गया है। वहीं सरगुजा संभाग में सूरजपुर, पत्थलगांव और मनेंद्रगढ़ नगर पालिका के साथ लखनपुर, कोतबा और कुनकुरी नगर पंचायतों को शामिल किया गया है।

    बिलासपुर संभाग के अंतर्गत तखतपुर, मुंगेली, लोरमी, जांजगीर-नैला और सक्ती नगर पालिका के साथ बिल्हा, घरघोड़ा, पुसौर और सरिया नगर पंचायत को योजना के प्रथम चरण में शामिल किया गया है।

    सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज से स्मार्ट सुविधाओं तक होगा समग्र विकास

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सोच के अनुरूप आदर्श शहर समृद्धि योजना केवल आधारभूत निर्माण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि नागरिक जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में समग्र विकास मॉडल के रूप में कार्य करेगी। योजना के अंतर्गत सड़क, ड्रेनेज, जलापूर्ति, परिवहन, पार्क, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक सेवाएं, रोजगार, व्यापार, उद्यमिता प्रोत्साहन, ई-गवर्नेंस, स्मार्ट ट्रैफिक, सुरक्षा प्रणाली, हरित क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, सुझाव, शिकायत निवारण तथा रिपोर्टिंग प्रणाली जैसे कार्य प्रमुखता से किए जाएंगे।

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से होंगे कार्यों का चयन

    योजना के तहत शहरों की स्थानीय आवश्यकताओं और जन अपेक्षाओं के अनुरूप विकास कार्यों का चयन किया जाएगा। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त संचालक की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समितियां गठित की गई हैं। नगर पालिका अथवा नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी को समिति का सदस्य-सह-सचिव बनाया गया है।

    रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर तथा सरगुजा संभाग के लिए गठित पांच सदस्यीय समितियों में दो-दो कार्यपालन अभियंता और एक सहायक अभियंता सदस्य होंगे, जबकि बस्तर संभाग की चार सदस्यीय समिति में एक कार्यपालन अभियंता तथा एक सहायक अभियंता सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। निकाय अध्यक्षों, पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के समन्वय से शहरों की आवश्यकता के अनुसार प्राथमिकता तय कर कार्यों का चयन किया जाएगा।

    “हमारी सुशासन सरकार बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते नगरों और कस्बों के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आदर्श शहर समृद्धि योजना के माध्यम से नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अधोसंरचना, जन सुविधाओं और रोजगार के नए अवसरों को सुनियोजित ढंग से विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार छोटे शहरों को भी बड़े शहरों की तरह सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा यह योजना प्रदेश के शहरी विकास को नई गति और नई दिशा देने का काम करेगी – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    “आदर्श शहर समृद्धि योजना राज्य के छोटे और मध्यम शहरों के व्यवस्थित विकास की महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के माध्यम से सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज, स्मार्ट सुविधाओं, हरित क्षेत्र और नागरिक सेवाओं को मजबूत किया जाएगा। कार्यों के चयन के लिए संभाग स्तरीय समितियों का गठन कर प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया गया है तथा सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के हर नगर में नागरिकों को बेहतर अधोसंरचना और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है – उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव

  • विशेष लेख : 25 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र की सुरक्षा में ‘फायर अलर्ट सिस्टम’ बना मजबूत सुरक्षा कवच

    विशेष लेख : 25 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र की सुरक्षा में ‘फायर अलर्ट सिस्टम’ बना मजबूत सुरक्षा कवच

    तकनीक, त्वरित कार्रवाई और जनसहभागिता से सुरक्षित हो रहे कवर्धा के हरित वन

    धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक)

    अशोक कुमार चंद्रवंशी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

    रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के कवर्धा परियोजना मंडल में वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का बेहद प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। अत्याधुनिक ‘फायर अलर्ट सिस्टम’ के माध्यम से अब 25 हजार 436 हेक्टेयर वन क्षेत्र की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। इस तकनीक की बदौलत जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण पाना संभव हुआ है, जिससे शासन की तकनीक-आधारित वन सुरक्षा व्यवस्था को एक नई मजबूती मिली है।

    एफएमआईएस प्रणाली से मैदानी अमला हुआ हाईटेक

     कवर्धा परियोजना मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी 25 बीटों में फैले विशाल वन क्षेत्र की निगरानी के लिए वन विभाग ने एफएमआईएस (फॉरेस्ट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) को सक्रिय किया है। इस डिजिटल प्रणाली से सभी मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे जोड़ा गया है।

     रियल-टाइम अलर्ट जैसे ही उपग्रह (सैटेलाइट) या किसी अन्य माध्यम से वन क्षेत्र में आग लगने की प्रारंभिक सूचना मिलती है, संबंधित बीट के कर्मचारियों के मोबाइल पर तुरंत अलर्ट पहुंच जाता है। इसके चलते बिना समय गंवाए वन कर्मी तत्काल मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लेते हैं।

    जमीनी स्तर पर मुस्तैद अग्नि सुरक्षा श्रमिक

     वनों को आग की विभीषिका से बचाने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फायर सीजन (गर्मी के मौसम) की शुरुआत से पहले ही संवेदनशील वन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर फायर लाइन की सफाई और तैयारी कर ली गई थी, ताकि आग को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में फैलने से रोका जा सके।

    अत्याधुनिक संसाधन

     प्रत्येक बीट में विशेष अग्नि सुरक्षा श्रमिकों की तैनाती की गई है। साथ ही सभी परिक्षेत्रों के अमले को आधुनिक फायर ब्लोअर उपलब्ध कराए गए हैं, जो हवा के तेज झोंकों से आग को तुरंत बुझाने में बेहद मददगार साबित हो रहे हैं।

    सोशल मीडिया और जनसहभागिता का अनूठा मॉडल

     सामूहिक प्रयासों से सुरक्षारू सूचनाओं के त्वरित और निर्बाध आदान-प्रदान के लिए विशेष सोशल मीडिया समूह (व्हाट्सएप ग्रुप आदि) बनाए गए हैं, जहां आग से जुड़ी छोटी सी खबर भी तुरंत उच्चाधिकारियों और मैदानी अमले के बीच साझा हो जाती है। इसके अतिरिक्त, वन क्षेत्रों के आसपास बसे गांवों में सघन जागरूकता अभियान चलाकर स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण अब वन विभाग के श्कान और आंखश् बनकर काम कर रहे हैं, जिससे वनों की सुरक्षा एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है।

    कार्यों में पारदर्शिता और ऐतिहासिक परिणाम

     वन विभाग द्वारा किसी भी क्षेत्र में आग पर नियंत्रण पाने के बाद, उस घटना की पूरी केस रिपोर्ट, प्रभावित क्षेत्र और की गई कार्रवाई की जानकारी विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इस डिजिटल रिकॉर्डिंग से कार्यों में पूरी पारदर्शिता बनी हुई है।

    सकारात्मक परिणाम 23 अग्नि प्रकरण पर पूरी तरह नियंत्रण

     इन समन्वित तकनीकी और व्यावहारिक प्रयासों का ही नतीजा है कि मार्च 2026 तक कवर्धा परियोजना मंडल में केवल 23 अग्नि प्रकरण सामने आए, जिन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड समय में पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। इस प्रभावी और मुस्तैद व्यवस्था से बहुमूल्य वन संपदा, जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने में बड़ी सफलता मिली है। तकनीक, सतर्कता और जनसहभागिता का यह कवर्धा मॉडल आज पूरे प्रदेश में वन संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है।

  • विशेष लेख : सुशासन से संवरता छत्तीसगढ़- विकसित भारत का नया रोल मॉडल

    विशेष लेख : सुशासन से संवरता छत्तीसगढ़- विकसित भारत का नया रोल मॉडल

    विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

    रायपुर : छत्तीसगढ़ की माटी में इन दिनों विकास और सुशासन की एक नई बयार बह रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य ने प्रगति की एक ऐसी छलांग लगाई है, जो न केवल छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल रही है, बल्कि इसे देश के नक्शे पर विकसित भारत का एक चमकता हुआ रोल मॉडल भी बना रही है। केंद्र की दूरदर्शी नीतियों और राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति के मेल से छत्तीसगढ़ में आज डबल इंजन की सरकार धरातल पर साफ महसूस की जा रही है। विकास की इस नई इबारत में समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की खुशहाली सबसे ऊपर है।

    गरीब का अपना घर:पहली प्राथमिकता, ठोस कदम

     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभालते ही सबसे पहला और ऐतिहासिक फैसला समाज के सबसे कमजोर तबके के हक में लिया किया वह था हर गरीब को अपना पक्का मकान देना। सरकार बनते ही प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को जो रफ्तार मिली, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। हाल ही में मुख्यमंत्री के विशेष प्रयासों से एक ही क्लिक में 3 लाख लाभार्थियों के खातों में 1,200 करोड़ रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की गई। सिर्फ गाँव ही नहीं, बल्कि PMAY-U 2.0 के जरिए शहरी और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को भी बड़ी राहत दी गई है। पुरानी विसंगतियों और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए पूरी व्यवस्था में MIS Integration (प्रशासनिक और तकनीकी सुधार) लागू किया गया है, ताकि बिना किसी बिचौलिए और देरी के हर हकदार को उसका घर मिल सके।

    केंद्र का साथ और छत्तीसगढ़ को ऐतिहासिक सौगात

     मुख्यमंत्री साय के रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर केंद्र सरकार ने भी अपनी मुहर लगाई है। बेहतर वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शी शासन का ही नतीजा है कि केंद्र ने छत्तीसगढ़ को 4,400 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मंजूर की है, जो देश के किसी भी राज्य को मिली अब तक की सबसे बड़ी प्रोत्साहन राशि है। इसके साथ ही, केंद्रीय बजट 2026-27 में छत्तीसगढ़ के लिए करीब 52 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय सहयोग की घोषणा की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4,500 करोड़ रुपये अधिक है। यह भारी आवंटन राज्य के बुनियादी ढांचे के कायाकल्प के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल कनेक्टिविटी का स्वर्णिम युग

     छत्तीसगढ़ आज सड़कों, ऊर्जा और डिजिटल क्रांति के एक नए दौर से गुजर रहा है। राज्य में सड़कों का जाल बिछता जा रहा है। राज्य में 3,153 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण तेजी से चल रहा है। लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से रायपुर-विशाखापत्तनम और रायपुर-रांची जैसे इकोनॉमिक कॉरिडोर पर काम युद्ध स्तर पर जारी है। साथ ही केंद्रीय सड़क निधि (CRIF) से 664 करोड़ रुपये की लागत से जिला मार्गों को सुधारा जा रहा है।

    ऊर्जा और डिजिटल हाईवे

     दूरदराज के अंचलों में सौर ऊर्जा और माइक्रो-ग्रिड के माध्यम से निर्बाध बिजली पहुँचाई जा रही है। वहीं, डिजिटल इंडिया के तहत बस्तर जैसे संवेदनशील और सुदूर क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड और बीएसएनएल (BSNL)नेटवर्क का जाल बिछाया गया है, जिससे गाँवों में भी शिक्षा, बैंकिंग और ई-कॉमर्स की सुविधाएं आम हो गई हैं।

    राष्ट्रीय पटल पर छत्तीसगढ़ का गौरव

     साय सरकार के जमीन से जुड़े कामकाज की गूंज देश की राजधानी तक सुनाई दे रही है। राज्य को उसकी उत्कृष्ट योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ को एक साथ 12 राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार दिए गए हैं, जिनमें प्रतिष्ठित “दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार” भी शामिल है। मनरेगा, स्वास्थ्य और लघु वनोपज संग्रहण जैसे क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन के लिए राज्य ने 10 अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करते हुए आयुष्मान भारत योजना को और प्रभावी बनाया गया है, साथ ही राज्य के 5 जिलों में नए मेडिकल कॉलेजों के जरिए चिकित्सा तंत्र को आधुनिक रूप दिया जा रहा है।

    निवेश, उद्योग और युवाओं की नई उड़ान

     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उद्योग-अनुकूल नीतियों और सिंगल-विंडो सिस्टम ने निवेशकों में एक नया भरोसा जगाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राज्य को 34,427 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी गई है। स्टील और माइनिंग के पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ अब छत्तीसगढ़ में खाद्य-प्रसंस्करण (Food Processing) और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भारी निवेश आ रहा है। यह नया औद्योगिक माहौल राज्य के युवाओं के लिए केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि उनके हुनर के मुताबिक कौशल-युक्त और स्थायी रोजगार के नए रास्ते खोल रहा है।

    एक समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़

     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज सिर्फ खनिज और उद्योगों की रीढ़ नहीं रह गया है, बल्कि यह अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति के उदय) की भावना को सच करने वाला राज्य बन चुका है। तमाम प्रशासनिक चुनौतियों को मात देते हुए साय सरकार ने ग्रामीण आत्मनिर्भरता, शहरी आधुनिकता और युवाओं के सपनों को एक नया आसमान दिया है। केंद्र सरकार के मजबूत सहयोग और मुख्यमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर छत्तीसगढ़ आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के अग्रणी राज्य के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।