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  • रायपुर-कवर्धा हाइवे पर डिप्टी CM का अचानक एक्शन : मारपीट और एक्सीडेंट की फर्जी कॉल कर परखी नेक्स्ट जेन डायल-112 सेवा, मौके पर पहुंची पुलिस टीम की हुई कड़ी जांच

    रायपुर-कवर्धा हाइवे पर डिप्टी CM का अचानक एक्शन : मारपीट और एक्सीडेंट की फर्जी कॉल कर परखी नेक्स्ट जेन डायल-112 सेवा, मौके पर पहुंची पुलिस टीम की हुई कड़ी जांच

    हाइवे पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया नेक्स्ट जेन डायल-112 सेवा का किया औचक परीक्षण

    हाइवे में रुक कर पीड़ित बन दर्ज कराई शिकायत, 112 वाहन आने पर सभी उपकरणों का किया परीक्षण

    रायपुर : रायपुर से कवर्धा जाते समय उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बेमेतरा के पास हाईवे में रुककर डायल-112 नेक्स्ट जेन सेवा की कार्यप्रणाली का औचक परीक्षण किया। सेवा की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और रिस्पॉन्स टाइम को परखने के लिए उन्होंने स्वयं डायल-112 पर कॉल कर मारपीट और सड़क दुर्घटना का पीड़ित बनकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज कराने के बाद वे नजदीक स्थित ढाबा के पास रुककर पुलिस वाहन के पहुंचने का इंतजार करते रहे। निर्धारित समय में डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद उप मुख्यमंत्री ने वाहन एवं उससे जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।

     निरीक्षण के दौरान उन्होंने वाहन में उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं, संचार व्यवस्था, रिस्पांस सिस्टम तथा आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी अधिकारियों से ली। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को आम नागरिकों को त्वरित एवं प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने वाहन में लगे लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की कार्यप्रणाली सहित हेल्पलाइन की सहायता प्रक्रिया और उनके द्वारा दिए जाने वाली जानकारियों का भी निरीक्षण किया।

     उल्लेखनीय है कि विगत 18 मई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 400 नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। नई तकनीक से लैस ये वाहन प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की पहुंच और रिस्पांस टाइम को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इस नए और उन्नत चरण के तहत संपूर्ण व्यवस्था को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और त्वरित बनाते हुए सुरक्षा मानकों और सहायता क्षमता को मजबूत करने के लिए डायल 112 सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्थान पहचान तकनीक को जोड़ा गया है। महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस व्यवस्था में पैनिक बटन और विशेष निगरानी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे पुलिस सहायता, एम्बुलेंस, अग्निशमन सेवा तथा महिला सहायता हेल्पलाइन को एकीकृत मंच पर उपलब्ध कराया जा सकेगा।

  • लाल किले से उठी जनजातीय स्वाभिमान की हुंकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले— प्रकृति संग जीने की कला दुनिया को सिखा सकता है आदिवासी समाज

    लाल किले से उठी जनजातीय स्वाभिमान की हुंकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले— प्रकृति संग जीने की कला दुनिया को सिखा सकता है आदिवासी समाज

    लाल किला मैदान से गूंजा जनजातीय गौरव का स्वर

    राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले – जनजातीय समाज दुनिया को सिखा सकता है प्रकृति संग विकास

    भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर राष्ट्रीय समागम में देशभर से जुटे हजारों जनजातीय प्रतिनिधि

    जनजातीय भाषा, संस्कृति और पहचान के संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने दिया विशेष जोर

    जनजातीय समाज भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप – मुख्यमंत्री श्री साय

    नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री श्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री श्री केदार कश्यप एवं श्री रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।

    कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में  लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान  मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

  • रायपुर में ‘ड्रग्स नेटवर्क’ का खुलासा : कार में बैठकर हो रही थी ड्रग्स डील ! रायपुर पुलिस ने एम.डी.एम के साथ ग्राहक तलाश रहे आरोपी शशांक तांडेकर को रंगे हाथ किया गिरफ्तार.

    रायपुर में ‘ड्रग्स नेटवर्क’ का खुलासा : कार में बैठकर हो रही थी ड्रग्स डील ! रायपुर पुलिस ने एम.डी.एम के साथ ग्राहक तलाश रहे आरोपी शशांक तांडेकर को रंगे हाथ किया गिरफ्तार.

    पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) श्री मयंक गुर्जर के दिशा-निर्देश में नशे के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही हेतु मादक पदार्थाे की तस्करी रोकने के साथ ही अवैध रूप से उनकी खरीदी-बिक्री करने वाले लोगों के संबंध में पतासाजी कर कार्यवाही करने निर्देशित किया गया है। जिसके तारतम्य में नॉर्थ जोन के समस्त पुलिस राजपत्रित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों द्वारा इस संबंध में सूचना संकलन कर मुखबीर लगाने के साथ ही अन्य माध्यमों से भी जानकारी एकत्रित किए जा रहे है।

    इसी क्रम में दिनांक 23मई 2026 को सूचना प्राप्त हुई थी कि गुढ़ियारी क्षेत्रांतर्गत कलिंग नगर स्थित सी.एस.ई.बी. मैदान के पास चारपहिया वाहन में 01 व्यक्ति अपने पास एम.डी.एम ड्रग्स रखा है तथा बिक्री की फिराक में ग्राहक की तलाश कर रहा है। जिसपर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) श्री आकाश मरकाम एवं सहायक पुलिस आयुक्त उरला सुश्री पूर्णिमा लामा द्वारा थाना प्रभारी गुढ़ियारी को आरोपी को एम.डी.एम ड्रग्स के साथ पकड़ने निर्देशित किया गया। जिस पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन तथा थाना प्रभारी गुढ़ियारी के नेतृत्व में थाना गुढ़ियारी पुलिस की टीम द्वारा उक्त स्थान पर जाकर मुखबीर द्वारा बताये चारपहिया वाहन को चिन्हांकित कर रेड कार्यवाही किया गया। रेड कार्यवाही के दौरान चारपहिया वाहन में 01 व्यक्ति उपस्थित था। पूछताछ में व्यक्ति ने अपना नाम शशांक तांडेकर निवासी गुढ़ियारी रायपुर का होना बताया। टीम के सदस्यों द्वारा शशांक तांडेकर की तलाशी लेने पर उसके पास एम.डी.एम ड्रग्स रखा होना पाया गया।

    जिस पर आरोपी शशांक तांडेकर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 2.69 ग्राम एम.डी.एम ड्रग्स तथा घटना में प्रयुक्त 01 नग चारपहिया वाहन एवं 01 मोबाईल फोन जुमला कीमत लगभग 2,50,000/- रूपये जप्त कर आरोपी के विरूद्ध थाना गुढ़ियारी में अपराध क्रमांक 220/26 धारा 22बी नारकोटिक एक्ट का अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गयी।

    गिरफ्तार आरोपी – शशांक तांडेकर पिता बाबूलाल तांडेकर उम्र 28 साल निवासी आदर्श नगर गली नं. 03 पहाड़ी चौक गुढ़ियारी थाना गुढ़ियारी रायपुर।

  • रायपुर पुलिस के ‘हीरोज’ आए सामने : चंद घंटों में अपराधियों को पकड़ने वाली पुलिस टीमों का बड़ा सम्मान — रायपुर पुलिस कमिश्नर ने किया सम्मानित ! शानदार कार्रवाई करने वाले 70 अधिकारी-कर्मचारियों को मिला सम्मान !

    रायपुर पुलिस के ‘हीरोज’ आए सामने : चंद घंटों में अपराधियों को पकड़ने वाली पुलिस टीमों का बड़ा सम्मान — रायपुर पुलिस कमिश्नर ने किया सम्मानित ! शानदार कार्रवाई करने वाले 70 अधिकारी-कर्मचारियों को मिला सम्मान !

    पुलिस कमिश्नर रायपुर डॉ संजीव शुक्ला द्वारा दिनांक 23 मई 2026 को कमिश्नरेट रायपुर के एसीसीयू, उत्तर जोन, मध्य जोन एवं कार्यालय पुलिस कमिश्नर में पदस्थ पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके द्वारा किए गए सराहनीय, उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

    मध्य जोन क्षेत्रांतर्गत थाना सिविल लाईन में मोबाईल फोन की झपटमारी करने वाले आरोपी को चंद घंटे के भीतर पकड़ने के फलस्वरूप थाना सिविल लाईन में पदस्थ 07 अधिकारी कर्मचारियो को सम्मानित किया। उत्तर जोन क्षेत्रांतर्गत थाना खम्हारडीह क्षेत्रांतर्गत लक्ष्य ज्वेलर्स में लाखों रूपये सोने चांदी के जेवरात चोरी करने आरोपियों को चंद घंटे में पकड़ने के फलस्वरूप क्राईम तथा थाना खम्हारडीह पुलिस की संयुक्त टीम के 50 अधिकारी/कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया। पुलिस कमिश्नर कार्यालय में कार्यालयीन कार्य का सुचारू रूप से संचालन, शिकायतों के निकाल एवं अन्य महत्वपूर्ण कार्य में उल्लेखनीय योगदान देने के फलस्वरूप पुलिस कमिश्नर कार्यालय के 13 अधिकारी/कर्मचारी कुल 70 अधिकारी/कर्मचारियों को सम्मानित किया गया है।

    इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अमित कांबले सहित डीसीपी नार्थ श्री मयंक गुर्जर, डीसीपी क्राइम श्री स्मृतिक राजनाला, डीसीपी मध्य श्री उमेश गुप्ता, अतिरिक्त डीसीपी मुख्यालय डॉ. अर्चना झा एवं एसीपी मुख्यालय श्रीमती नंदिनी ठाकुर भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान पुलिस कमिश्नर ने सम्मानित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी समर्पण, निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित किया।

  • 8848 मीटर ऊंची एवरेस्ट चोटी पर तिरंगा लहराने वाली अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य को लेकर राज्य सरकार अलर्ट, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा—हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा

    8848 मीटर ऊंची एवरेस्ट चोटी पर तिरंगा लहराने वाली अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य को लेकर राज्य सरकार अलर्ट, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा—हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा

    माउंट एवरेस्ट विजेता अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य लाभ हेतु राज्य सरकार सजग : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

    रायपुर : जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

  • पहाड़ी कोरवा महिला रोन्ही की जिंदगी में प्रशासन ने भरी नई उम्मीद, जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर में मिला आयुष्मान कार्ड, टूटी इलाज की चिंता की बेड़ियां

    पहाड़ी कोरवा महिला रोन्ही की जिंदगी में प्रशासन ने भरी नई उम्मीद, जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर में मिला आयुष्मान कार्ड, टूटी इलाज की चिंता की बेड़ियां

    जनजातीय गरिमा उत्सव ने बदली पहाड़ी कोरवा रोन्ही की जिंदगी

    शिविर में मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच, आयुष्मान कार्ड मिलने से दूर हुई इलाज की चिंता

    जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान से वनांचल के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रही सुशासन की रोशनी

    रायपुर : शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल कागजी सुविधा नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव की एक नई सुबह लेकर आती हैं, जिनमें पात्र व्यक्तियों को आधार पंजीयन, बैंकिंग सेवाएं, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं से जोड़ने के लिये पात्रता परीक्षण, आवेदन एवं मौके पर निराकरण की कार्रवाई की जा रही है। शिविर के माध्यम से स्थानीय समस्याओं का अवलोकन, ग्रामीणों के साथ बैठक एवं योजनाओं का प्रचार-प्रसार, पात्र हितग्राहियों की पहचान, स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम, जन सुनवाई तथा शिकायतों के निराकरण के लिये विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इसका एक प्रत्यक्ष और जीवंत उदाहरण बलरामपुर-रामानुजगंज जिले की श्रीमती रोन्ही पहाड़ी कोरवा हैं, जिनके जीवन में प्रशासन की एक संवेदनशील पहल से बेहद सकारात्मक परिवर्तन आया है।

    सीमित संसाधन और अंधविश्वास के बीच बीत रही थी जिंदगी

     विकासखंड राजपुर के सुदूर ग्राम पंचायत पतरापारा की निवासी श्रीमती रोन्ही अपने परिवार के साथ बेहद सीमित संसाधनों में जीवनयापन करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की समुचित जानकारी और संसाधनों के अभाव में, कई बार मजबूरीवश उन्हें उपचार के लिए स्थानीय बैगा-गुनिया के सहारे रहना पड़ता था।बीमारी बढ़ने की स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना और शहर जाकर इलाज कराना उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से अत्यंत कष्टकारी साबित होता था। अस्पताल आने-जाने और महंगी दवाइयों में उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता था, जिससे परिवार की रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी दूभर हो जाता था।

    चौपाल पर मिला आयुष्मान का वरदान

     श्रीमती रोन्ही के जीवन के इस ढर्रे को बदलने का माध्यम बना जिला प्रशासन द्वारा संचालित ?जनभागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान। इसके तहत पतरापारा में आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रोन्ही की समस्या को समझा और मौके पर ही उनका श्आयुष्मान भारत कार्डश् बनाकर उन्हें सौंप दिया। आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद अब रोन्ही और उनके पूरे परिवार को इलाज पर होने वाले भारी-भरकम खर्च की चिंता से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है। अब वे किसी भी आपातकालीन स्थिति या बीमारी में अनुबंधित अस्पतालों में जाकर निःशुल्क एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगी।

    शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार

     अपनी खुशी साझा करते हुए श्रीमती रोन्ही बताती हैं, पहले हमारे लिए बीमारी का मतलब सिर्फ मानसिक चिंता और कर्ज का बोझ होता था। लेकिन अब यह आयुष्मान कार्ड हमारे पास है, जिससे हमें एक बड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा का एहसास हुआ है। अब मैं अपने परिवार के स्वास्थ्य और उनके भविष्य को लेकर पूरी तरह निश्चिंत हूँ। उन्होंने जनजातीय गरिमा उत्सव शिविर को दूरस्थ अंचल के ग्रामीणों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और जीवनदायिनी पहल बताते हुए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।

  • पहाड़ी कोरवा अंचल में सुशासन की नई मिसाल, जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों से पतरापारा और बराहनगर में ग्रामीणों को मिला एक ही छत के नीचे सरकारी योजनाओं का त्वरित लाभ

    पहाड़ी कोरवा अंचल में सुशासन की नई मिसाल, जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों से पतरापारा और बराहनगर में ग्रामीणों को मिला एक ही छत के नीचे सरकारी योजनाओं का त्वरित लाभ

    जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों से वनांचल में सुशासन- पतरापारा और बराहनगर के ग्रामीणों को मिला बड़ा लाभ

    जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवारों को मिली बड़ी राहत

    एक ही छत के नीचे जुटे सभी विभाग, दर्जनों प्रमाण पत्र जारी, सैकड़ों ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण

    रायपुर : सबसे दूर सबसे पहलेष् एक प्रमुख प्रशासनिक और सामाजिक अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य सबसे दुर्गम, सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों (विशेष रूप से जनजातीय और आदिवासी बहुल गांवों) तक सरकारी सुविधाओं और विकास योजनाओं को सबसे पहले पहुँचाना है। दूरस्थ जनजातीय अंचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जन भागीदारी सबसे दूर सबसे पहले अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों के माध्यम से जनजातीय समुदायों को स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, राजस्व और किसान हितैषी योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड राजपुर के ग्राम पतरापारा और विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम बराहनगर में विशेष शिविरों का सफल आयोजन किया गया, जहां अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण की पहल की।

    पतरापारा शिविर-विशेष पिछड़ी जनजातियों को चौपाल पर राहत

     जनपद पंचायत सीईओ श्री संजय दुबे के नेतृत्व में ग्राम पंचायत पतरापारा में आयोजित शिविर में पतरापारा सहित डिगनगर, अमदरी, चंद्रगढ़ एवं करजी से बड़ी संख्या में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार पहुंचे। शिविर की मुख्य उपलब्धियां रहीं स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम द्वारा 71 ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाइयां दी गईं। गंभीर बीमारियों के निःशुल्क इलाज के लिए मौके पर ही 21 पात्र नागरिकों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में 11 स्थानीय किसानों का एग्री स्टैक पोर्टल पर डिजिटल पंजीयन किया गया।

    बराहनगर शिविर- राजस्व और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से सीधा लाभ

     रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम बराहनगर में जनपद सीईओ श्री रणवीर साय के नेतृत्व में आयोजित शिविर में ग्रामीणों को विभिन्न विभागीय सेवाओं से सीधा लाभान्वित किया गया। राजस्व एवं नागरिक सेवाएं के तहत राजस्व विभाग द्वारा मौके पर ही 6 जाति, 6 आय और 6 निवास प्रमाण पत्रों सहित कुल 27 जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए। खाद्य एवं श्रम विभाग के द्वारा खाद्य विभाग द्वारा 37 पात्र परिवारों को नए राशन कार्ड वितरित किए गए तथा श्रम विभाग के अंतर्गत 10 श्रमिकों के श्रम कार्ड बनाए गए।

     पशुधन एवं कृषि कल्याण विभाग द्वारा पशुधन विकास विभाग द्वारा 68 पशुपालकों को निःशुल्क पशु दवाओं का वितरण किया गया। कृषि विभाग ने पीएम किसान सम्मान निधि के 6 लंबित प्रकरणों का सुधार किया, 2 किसानों का एग्री स्टैक पंजीयन किया तथा 1 मृदा परीक्षण सैंपल लिया। शिविर में 157 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर 2 नए आयुष्मान कार्ड जारी किए गए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा के तहत 2 हितग्राहियों को पेंशन तथा 1 हितग्राही को परिवार सहायता योजना की राशि स्वीकृत की गई।

    दूरस्थ क्षेत्रों तक शासन की पहुंच सुनिश्चित- जिला प्रशासन

     गौरतलब है कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में इन शिविरों का संपादन किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य फोकस पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों को मुख्यधारा से जोड़ना है। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से जिले के अत्यंत दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सुशासन की पहुंच सुनिश्चित हो सकी है।

  • बलौदाबाजार में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर प्रकृति संरक्षण का महाअभियान, संगोष्ठी, पौधरोपण और सीड बॉल निर्माण से गूंजे वनांचल क्षेत्र

    बलौदाबाजार में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर प्रकृति संरक्षण का महाअभियान, संगोष्ठी, पौधरोपण और सीड बॉल निर्माण से गूंजे वनांचल क्षेत्र

    अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन, जनसहभागिता से गूंजा बलौदाबाजार

    जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को लेकर वनमण्डल अंतर्गत परिक्षेत्रों में हुए आयोजन

    संगोष्ठी, चित्रकला, शपथ ग्रहण और सीड बॉल निर्माण के जरिए आमजन को दी गई सीख

    रायपुर : अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस (22 मई) पर पूरे देश में प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। बलौदाबाजार के वनमण्डलाधिकारी ने कहा कि हम सभी जैव विविधता के संरक्षण व संवर्धन का सामूहिक संकल्प लें और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर एक टिकाऊ एवं समावेशी भविष्य का निर्माण करें। अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर बलौदाबाजार वनमण्डल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों एवं अभयारण्य क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता और सहभागिता आधारित कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर संगोष्ठी, शपथ ग्रहण, चित्रकला प्रतियोगिता, सीड बॉल निर्माण, पौधरोपण, जन-जागरूकता कार्यशालाओं और सांस्कृतिक मंचन के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन के महत्व को आमजन तक पहुँचाया गया।

    जैव विविधता हमारे जीवन और पर्यावरण का आधार- डीएफओ

     कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बलौदाबाजार के वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने कहा, जैव विविधता केवल प्रकृति की बाह्य सुंदरता नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन और संपूर्ण पर्यावरण संतुलन का मूल आधार है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने हेतु आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को प्रकृति के संरक्षण से जोड़ना आज के समय की महती आवश्यकता है।

    विभिन्न वन परिक्षेत्रों में आयोजित हुए प्रमुख कार्यक्रम

     बल्दाकछार एवं सोनाखान परिक्षेत्ररू वन परिवृत्त परसदा (ठाकुरदिया) और कोशमसरा में विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें जैव विविधता प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, सरपंच, पंच, वन प्रबंधन समिति के सदस्यों, स्थानीय ग्रामीणों, शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस दौरान ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों, वन्यजीवन और वृक्षों से होने वाले प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई।

     बलौदाबाजार परिक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस उत्साहपूर्ण और संगीतमय कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। वन परिक्षेत्र अधिकारी डॉ. एकता कर ने धमनी, सलोनी, खैरी और जोराडबरी के ग्रामीणों को जैव विविधता संरक्षण की सामूहिक शपथ दिलाई। ग्राम अर्जुनी के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए चित्रकला प्रतियोगिता एवं सीड बॉल निर्माण कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों और वनकर्मियों ने मिलकर हिस्सा लिया।

    चित्रकला, शपथ ग्रहण और सीड बॉल निर्माण, सघन पौधरोपण

     बारनवापारा अभयारण्य अन्तर्गत ग्राम हरदी में आयोजित कार्यशाला में जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ श्मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व के नियंत्रण और प्रबंधन के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक किया गया। देवपुर नेचर कैंप में जैव विविधता के संवर्धन को लेकर शपथ ग्रहण, सीड बॉल निर्माण और सघन पौधरोपण कार्यक्रम चलाया गया। इस दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य के अधीक्षक श्री कृषानू चन्द्राकार, परिक्षेत्र अधिकारी सुश्री रूपेश्वरी दीवान, परिक्षेत्र सहायक श्री गीतेश बंजारे,देवपुर परिक्षेत्र अधिकारी श्री संतोष पैंकरा, महिला स्व-सहायता समूह एवं स्थानीय समितियां उपस्थित रहीं।

  • देवपुर नेचर कैंप में बच्चों ने सीखा जंगल और जीवन का अनोखा रिश्ता, ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग और एडवेंचर गतिविधियों से गूंजा अभयारण्य

    देवपुर नेचर कैंप में बच्चों ने सीखा जंगल और जीवन का अनोखा रिश्ता, ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग और एडवेंचर गतिविधियों से गूंजा अभयारण्य

    देवपुर में समर कैंप का आयोजन- बच्चों ने प्रकृति के सानिध्य में सीखा टीम भावना और रोमांच का पाठ

    बारनवापारा अभयारण्य के देवपुर नेचर कैंप में छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल

    जंगल ट्रेक, बर्ड वाचिंग, सिरपुर का ऐतिहासिक भ्रमण और पारंपरिक औषधीय ज्ञान बना मुख्य आकर्षण

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के वारनवापारा अभ्यारण्य के पास देवपुर में बच्चों के लिए विशेष नेचर कैंप का आयोजन किया गया है। नौतपा से पहले आयोजित इस समर नेचर कैंप में बच्चों ने रोमांच के साथ-साथ पक्षी दर्शन (बर्ड वॉचिंग) और पर्यावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की। बच्चों को प्रकृति के करीब लाने, पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देने और स्थानीय वन्यजीवों व पक्षियों के बारे में रोमांचक तरीके से सिखाने के लिए इस विशेष कैंप का आयोजन किया जाता है।

     वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर के दिशा-निर्देशानुसार बारनवापारा अभयारण्य अंतर्गत देवपुर नेचर कैंप में एक विशेष समर कैंप का सफल आयोजन किया गया। 16 मई से 22 मई तक चले इस अनूठे कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर प्रकृति के बीच व्यावहारिक रूप से सीखने, समझने और नए अनुभवों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करना था।

    छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागी हुए शामिल

     इस समर कैंप में वन विभाग के मैदानी स्टाफ के बच्चों सहित छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के 65 से अधिक प्रतिभागियों ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया। सभी बच्चों ने प्रकृति की गोद में रहकर साहसिक व रचनात्मक गतिविधियों का आनंद लिया और इस कैंप को अपने लिए बेहद यादगार बताया। पढ़ाई के तनाव से दूर बच्चों को कला और खेल-कूद के माध्यम से रचनात्मक बनाया जाता है।

    जंगल ट्रेकिंग, बर्ड वाचिंग और एडवेंचर एक्टिविटीज

     कैंप के दौरान बच्चों के बौद्धिक और शारीरिक विकास के लिए प्रतिदिन सुबह कई प्रकार की गतिविधियां आयोजित की गईं । बच्चों को प्रतिदिन सुबह जंगल ट्रेक और बर्ड वाचिंग (पक्षियों को देखने) के लिए ले जाया जाता था, जहां उन्होंने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, जंगल की अनूठी संरचना और विभिन्न पक्षियों को करीब से पहचाना। टेंट कैंपिंग, आउटडोर एडवेंचर गेम्स और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आपसी टीम भावना, आत्मविश्वास और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का विकास किया गया।

    बारनवापारा सफारी और सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण

     बच्चों के ज्ञानवर्धन के लिए उन्हें बारनवापारा अभयारण्य में वाइल्डलाइफ सफारी कराई गई, जिससे वे वन्यजीवों की दुनिया से रूबरू हो सके। इसके अतिरिक्त, अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों से परिचित कराने के लिए उन्हें ऐतिहासिक नगरी सिरपुर का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। बच्चों को कम्युनिटी एंगेजमेंट (सामुदायिक सहभागिता) गतिविधियों से भी जोड़ा गया, जिससे वे स्थानीय वनांचल समुदायों और प्रकृति के गहरे अंतर्संबंधों को समझ सके।

    विश्व जैव विविधता दिवस पर जाना औषधीय पौधों का महत्व

     कैंप के दौरान विश्व जैव विविधता दिवस के विशेष अवसर पर बच्चों को बायोडायवर्सिटी ट्रेल (जैव विविधता पथ) पर ले जाया गया। यहाँ स्थानीय पारंपरिक वैद्यों द्वारा बच्चों को वनों में पाए जाने वाले दुर्लभ औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की लाइव जानकारी दी गई। इस गतिविधि ने बच्चों को हमारे पारंपरिक ज्ञान, जैव विविधता के संरक्षण और प्रकृति के महत्व से गहराई से अवगत कराया गया।

  • ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीक ने बदली किसान की किस्मत, ग्राफ्टेड बैंगन से प्रति एकड़ 155 क्विंटल उत्पादन कर लाखों कमा रहे नवीन साव

    ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीक ने बदली किसान की किस्मत, ग्राफ्टेड बैंगन से प्रति एकड़ 155 क्विंटल उत्पादन कर लाखों कमा रहे नवीन साव

    कृषि में नवाचार की मिसाल- ग्राफ्टेड बैगन की खेती से लाखों की आय अर्जित कर रहे कृषक नवीन

    परंपरागत धान के बदले उद्यानिकी को अपनाया, प्रति एकड़ उत्पादन 21 क्विंटल से बढ़कर हुआ 155 क्विंटल

    राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के समन्वय से बदली किसान की तकदीर

    रायपुर : ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है। इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20-30 प्रतिशत तक अधिक मिलती है। कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं, इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान श्री नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

    धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का शुद्ध लाभ

     कृषक श्री नवीन साव ने बताया कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था। अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन प्राप्त हुआ।

    सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में भारी मांग

     ग्राफ्टेड बैंगन की फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके एक पौधे से 50 किलो तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक हो सकता है। नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया। सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है।

    विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी जिज्ञासा से मिली सफलता

     श्री साव अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं के समय पर मिले लाभ और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी रखते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं। कच्चापाल और बोहारपार के आसपास के क्षेत्र के किसान अब लगातार उनके प्रक्षेत्र (फार्म) का भ्रमण कर इन आधुनिक तकनीकों को बारीकी से समझ रहे हैं। नवीन साव की इस आर्थिक प्रगति को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।