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  • डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

    डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, त्याग और संकल्प का प्रेरक उदाहरण : वित्त मंत्री ओपी चौधरी

    राष्ट्रनिर्माण के लिए युवाओं को लक्ष्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनानी होगी : श्री चौधरी

    वित्त मंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान में युवाओं से किया संवाद

    करियर, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर साझा किए प्रेरक विचार

    रायपुर : देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रखर पुरोधा, प्रखर शिक्षाविद्  डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय में व्याख्यान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारत माता एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया तथा उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को नमन किया।

    वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, शिक्षा, सिद्धांतों के प्रति अटूट निष्ठा और अदम्य साहस का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को सर्वोच्च स्थान दिया और भारतीय लोकतंत्र तथा राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। इस अवसर पर उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के राष्ट्र के प्रति योगदान का भी स्मरण किया।

    सकारात्मक सोच, स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन ही सफलता की कुंजी

    युवाओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि स्पष्ट लक्ष्य, अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच से प्राप्त होती है। व्यक्ति जैसा सोचता है, वैसा ही बनता है। उन्होंने कहा कि किसी भी निर्णय से पहले उसके परिणामों पर विचार करना चाहिए तथा अपने निर्णयों की जिम्मेदारी स्वयं स्वीकार करनी चाहिए। असफलताओं के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय आत्ममंथन और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आधुनिकता के साथ अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करने का भी आह्वान किया।

    युवा संवाद में विद्यार्थियों के सवालों का दिया जवाब

    कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए प्रशासनिक सेवा, प्रतियोगी परीक्षाओं, महिला सशक्तिकरण, व्यक्तित्व विकास एवं स्वास्थ्य से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रशासनिक सेवा में करियर संबंधी प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम है। इसके लिए दृढ़ संकल्प, अनुशासित अध्ययन और निरंतर परिश्रम आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी के लिए विशेष योजना के तहत दिल्ली भेज रही है, जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का बेहतर अवसर मिल सके।

    प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। समय का सदुपयोग, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, आत्मअनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत संकल्प रखने वाले व्यक्ति की राह नहीं रोक सकतीं।

    बेटियों को आगे बढ़ने के लिए अवसरों का लाभ उठाना होगा

    महिला सशक्तिकरण पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में वित्त मंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बेटियां आत्मविश्वास के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपने सपनों को साकार करें।

    स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन सफलता की पहली शर्त

    स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हुए श्री चौधरी ने युवाओं को नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और व्यायाम अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन ही किसी भी बड़ी सफलता की पहली शर्त हैं।

    कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय चौहान, महापौर श्री जीवर्धन चौहान, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हेमलता चौहान, नगर निगम सभापति श्री डिग्री लाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना के उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को सम्मानित किया गया तथा विश्वविद्यालय परिवार द्वारा अतिथियों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया गया।

  • सिर्फ ₹11,400 अंशदान पर ₹91,200 के तसर बीज का लाभ! राज्य शासन की सब्सिडी से तसर पालन को मिली नई उड़ान, लाखों कोसों के उत्पादन की उम्मीद

    सिर्फ ₹11,400 अंशदान पर ₹91,200 के तसर बीज का लाभ! राज्य शासन की सब्सिडी से तसर पालन को मिली नई उड़ान, लाखों कोसों के उत्पादन की उम्मीद

    कोसा बीज केंद्र मोदकपाल से 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण

    रेशम विभाग की योजना से हितग्राहियों को 79,800 रुपए की सब्सिडी, तसर पालन से बढ़ेगी आय

    रायपुर : राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत बीजापुर जिले में रेशम विभाग द्वारा संचालित कोसा बीज केंद्र, मोदकपाल में तसर पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हितग्राहियों को 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण किया गया।

    इन डिम्ब समूहों की कुल लागत 91,200 रुपए रही। इसमें राज्य शासन ने 79,800 रुपए की सब्सिडी प्रदान की, जबकि हितग्राहियों से केवल 11,400 रुपए का अंशदान लिया गया। इससे कम लागत में गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराकर तसर पालन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

    इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के लोगों की आय बढ़ाना तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए गुणवत्तायुक्त स्वस्थ डिम्ब समूहों से बेहतर उत्पादन की संभावना है। इससे हितग्राही वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन कर अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

    रेशम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, वितरित डिम्ब समूहों से लगभग 2 लाख कोसों का उत्पादन होने का अनुमान है। इससे न केवल हितग्राहियों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में तसर उत्पादन को भी नई गति मिलेगी।

    रेशम विभाग ने बताया कि राज्य शासन की अनुदान आधारित योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग भी लगातार दिया जाएगा, ताकि तसर पालन को बढ़ावा मिले और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।

  • मानसून में भी नहीं रुकेगा पर्यटन! बारनावापारा अभयारण्य 31 अक्टूबर तक बंद, लेकिन नया ‘बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट’ बनेगा प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद

    मानसून में भी नहीं रुकेगा पर्यटन! बारनावापारा अभयारण्य 31 अक्टूबर तक बंद, लेकिन नया ‘बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट’ बनेगा प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद

    मानसून में भी पर्यटन का आनंद: बारनावापारा अभयारण्य 31 अक्टूबर तक बंद

    बफर क्षेत्रों में शुरू हुआ नया पर्यटन सर्किट

    रायपुर : वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया जाता है।

    हालांकि, इस दौरान पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ने “बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड” की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राजधानी रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    इस पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, कोडार जलाशय सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। यहां पर्यटक हरियाली, झरनों, पहाड़ियों, वन क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

    मानसून के मौसम में पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम के प्रमुख आकर्षण होंगे।

    इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

    वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के दौरान भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।

  • मानसून में बिजली से ज़रा-सी लापरवाही पड़ सकती है भारी! छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी ने जारी की सुरक्षा गाइडलाइन, खतरे से बचने के लिए तुरंत अपनाएं ये उपाय

    मानसून में बिजली से ज़रा-सी लापरवाही पड़ सकती है भारी! छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी ने जारी की सुरक्षा गाइडलाइन, खतरे से बचने के लिए तुरंत अपनाएं ये उपाय

    बारिश के मौसम में करंट से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने विद्युत कंपनी ने जारी की एडवाइजरी

    रायपुर : बारिश का मौसम शुरू होते ही विद्युत करंट से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के खंभों, एचटी लाइनों, टूटे तारों तथा विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से हर वर्ष कई हादसे होते हैं, जिनमें कई बार लोगों की जान तक चली जाती है। इन दुर्घटनाओं से बचाव के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने आम नागरिकों के लिए सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी करते हुए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

           कंपनी ने कहा है कि थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्य विद्युत उपकरणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें। यदि आंधी-तूफान या बारिश के दौरान बिजली के खंभे, तार अथवा अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त दिखाई दें, तो इसकी सूचना तत्काल कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1912, मोर बिजली ऐप अथवा निकटतम वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में दें।

           बारिश के दौरान बिजली के खंभों, तारों और ट्रांसफार्मरों से दूर रहें। जहां विद्युत तार या उपकरण मौजूद हों, वहां पानी में करंट फैलने की संभावना रहती है। ऐसे स्थानों पर पानी में चलने या तैरने से बचें। विद्युत उपकरणों का उपयोग करते समय हाथ-पैर सूखे रखें तथा रबर या प्लास्टिक के जूते-चप्पलों का उपयोग करें। विभाग ने बताया कि बारिश से पहले सभी फीडरों, ट्रांसफार्मरों एवं विद्युत लाइनों का निरीक्षण और आवश्यक रखरखाव किया जा चुका है। इसके बावजूद नागरिकों की सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

    दुर्घटनाओं से बचने के लिए इन सावधानियों का रखें-

           घरों, खेतों एवं अन्य स्थानों पर केवल गुणवत्तापूर्ण विद्युत उपकरणों का उपयोग करें। खेत या बाड़ी की बाड़ तथा कंटीले तारों में बिजली प्रवाहित न करें। यह अवैध होने के साथ-साथ जानलेवा भी हो सकता है तथा संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

           विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों या अन्य उपकरणों में खराबी आने पर स्वयं सुधार करने का प्रयास न करें। बिजली की लाइनों के नीचे अथवा उनके समीप स्थायी या अस्थायी निर्माण न करें तथा सुरक्षित दूरी बनाए रखें। यदि कोई विद्युत तार टूटकर जमीन, नदी, नाले या तालाब में गिरा हुआ मिले, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित लाइनमैन, कनिष्ठ अभियंता अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर सूचना देकर विद्युत प्रवाह बंद कराएं।

           बिजली की लाइनों से हुकिंग कर अनाधिकृत रूप से बिजली का उपयोग न करें। कपड़े सुखाने के लिए बिजली के खंभों या स्टे वायर का उपयोग न करें तथा कपड़े सुखाने वाले तार को विद्युत लाइनों से पर्याप्त दूरी पर रखें। अस्थायी विद्युत कनेक्शन के लिए कटे-फटे तारों का उपयोग न करें तथा बच्चों को विद्युत उपकरणों एवं लाइनों के आसपास खेलने से रोकें।

    यदि कोई व्यक्ति करंट की चपेट में आ जाए तो यह करें-

    सबसे पहले मुख्य स्विच बंद कर विद्युत प्रवाह तत्काल रोकें। यदि स्विच बंद करना संभव न हो, तो सूखी लकड़ी, सूखी रस्सी या सूखे कपड़े की सहायता से पीड़ित को बिजली के स्रोत से अलग करें। सीधे हाथ लगाने का प्रयास न करें। पीड़ित को सूखी जगह पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दें, आवश्यकता होने पर कृत्रिम श्वास दें तथा तत्काल निकटतम अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करें।

           छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेशक श्री ए.के. अंबस्थ ने कहा कि भीषण गर्मी, आंधी-तूफान और बारिश के दौरान विद्युत व्यवस्था बनाए रखना बिजली कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। ऐसे मौसम में फॉल्ट ढूंढ़ने और उसे सुधारने के लिए कर्मचारियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में लगातार कार्य करना पड़ता है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर घबराने के बजाय 5 से 10 मिनट प्रतीक्षा करें और आवश्यकता होने पर टोल-फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, लाइन कर्मचारियों को सुधार कार्य में सहयोग दें तथा विद्युत लाइनों एवं उपकरणों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।

           उन्होंने कहा कि विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं सुचारु संचालन में उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर न केवल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है, बल्कि लोगों के जीवन और संपत्ति की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है जान है तो जहान है।

  • झमाझम बारिश से खिल उठे किसानों के चेहरे: समय पर खाद-बीज और मानसून की मेहरबानी से खरीफ खेती ने पकड़ी रफ्तार

    झमाझम बारिश से खिल उठे किसानों के चेहरे: समय पर खाद-बीज और मानसून की मेहरबानी से खरीफ खेती ने पकड़ी रफ्तार

    झमाझम बारिश से दूर हुई किसानों की चिंता

    समय पर खाद-बीज ने बढ़ाया अन्नदाताओं का विश्वास

    मानसून की मेहरबानी और शासन की तैयारी से खेती को मिली नई रफ्तार, खेतों में लौटी रौनक

    रायपुर : जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। आसमान में बादलों की आवाजाही तो थी, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूने पड़े थे। खरीफ फसलों की बुआई, धान की रोपाई और बेहतर उत्पादन को लेकर किसान चिंतित थे। हर दिन आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते अन्नदाता अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे थे। आखिरकार पिछले कुछ दिनों से हुई झमाझम बारिश ने किसानों की चिंता को खुशी में बदल दिया। तपती धूप से तपी धरती पर जैसे ही वर्षा की बूंदें बरसीं, केवल मिट्टी ही नहीं महकी, बल्कि किसानों के मन में भी नई उम्मीद और आत्मविश्वास के अंकुर फूट पड़े।

    मानसून की यह दस्तक केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आई है। दूर-दूर तक फैले खेतों में अब पानी लबालब दिखाई दे रहा है। गांवों में फिर से चहल-पहल लौट आई है। खेतों में ट्रैक्टरों की गूंज, कृषि यंत्रों की आवाज, धान की रोपाई में जुटे किसान परिवार और प्रकृति का नव श्रृंगार ग्रामीण जीवन की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। कहीं खेतों की जुताई अंतिम चरण में है तो कहीं किसान पूरे उत्साह के साथ धान की रोपाई में जुट गए हैं। वर्षा की हर बूंद मानो किसानों की मेहनत को नई शक्ति प्रदान कर रही है। यही वह समय है, जब धरती और अन्नदाता का अटूट रिश्ता सबसे अधिक सजीव दिखाई देता है। किसान पूरे विश्वास के साथ खेतों में उतरता है, क्योंकि उसे पता है कि आज की मेहनत ही आने वाले कल की समृद्धि की नींव बनेगी।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने खरीफ सीजन की तैयारियां समय रहते पूरी कर किसानों की खेती को मजबूत आधार प्रदान किया है। कृषि विभाग द्वारा मानसून से पहले ही गुणवत्तायुक्त बीज एवं उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई थी। इसका लाभ अब किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है। जैसे ही वर्षा ने रफ्तार पकड़ी, किसान बिना किसी विलंब के खेती के कार्यों में जुट गए। समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता के कारण बुआई और रोपाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    कोरबा जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को अनुदानित दरों पर खाद एवं बीज सहजता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को न तो बाजार में भटकना पड़ रहा है और न ही आवश्यक उर्वरकों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अनुकूल वर्षा ने किसानों के उत्साह को नई उड़ान दी है।

    इसका उदाहरण करतला स्थित आदिवासी सेवा सहकारी समिति में देखने को मिला। ग्राम कछार निवासी कृषक श्री घनश्याम राठिया, जो लगभग साढ़े छह एकड़ भूमि पर खेती करते हैं, ने समिति से 12 बोरी यूरिया, 6 बोरी डीएपी तथा 4 बोरी सुपर फास्फेट प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें न लाइन में लगना पड़ा और न ही किसी प्रकार का इंतजार करना पड़ा। समिति में सभी व्यवस्थाएं सुचारु हैं, जिससे किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो रहा है। शासन द्वारा रियायती दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक मिलने से खेती की लागत कम हुई है और छोटे एवं मध्यम किसानों को बड़ी राहत मिली है।

    श्री राठिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने और अच्छी बारिश होने से इस वर्ष खेती की शुरुआत बेहद अच्छी हुई है। अब पूरे परिवार के साथ धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है और उन्हें इस वर्ष अच्छी पैदावार की पूरी उम्मीद है। छत्तीसगढ़ की धरती पर बरसती यह वर्षा केवल खेतों को ही नहीं सींच रही, बल्कि किसानों के सपनों, उनकी मेहनत और समृद्ध भविष्य की आशाओं को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रकृति की अनुकंपा और शासन की दूरदर्शी व्यवस्था का यह प्रभावी समन्वय खेती-किसानी को नई गति दे रहा है। समय पर उपलब्ध खाद-बीज, अनुकूल मौसम और किसानों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया है कि इस खरीफ सीजन में अन्नदाता आत्मविश्वास के साथ समृद्धि की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

  • लगातार बारिश के बीच किसानों के लिए बड़ी सलाह: अधिक जलभराव की स्थिति में लेही पद्धति से करें धान की बुआई, उत्पादन रहेगा सुरक्षित

    लगातार बारिश के बीच किसानों के लिए बड़ी सलाह: अधिक जलभराव की स्थिति में लेही पद्धति से करें धान की बुआई, उत्पादन रहेगा सुरक्षित

    अधिक वर्षा की स्थिति में किसान लेही पद्दति से धान की करें बुआई

    मानसूनी वर्षा की वर्तमान स्थिति के दृष्टिगत किसानों को कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

    रायपुर :  छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र के मार्ग से सामान्यतः 14 जून के आसपास मानसून वर्षा का आगमन होता है, किन्तु इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण बस्तर में लगभग 10 दिन विलंब से मानसून आया है। वर्तमान में प्रदेश के समस्त कृषि जलवायु क्षेत्रों जैसे बस्तर का पठार, छत्तीसगढ़ का मैदान एवं छत्तीसगढ के उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र में मानसून पहुंच गया है। सामान्यतः जून के माह में छत्तीसगढ़ में लगभग 21 से.मी. वर्षा होती है, किन्तु इस वर्ष जून के माह में 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। आगामी 8 जुलाई तक पूरे राज्य में व्यापक वर्षा होने का आसार हैं। वर्तमान में बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग को छोड़कर पूरे प्रदेश में लगभग सामान्य वर्षा दर्ज की गई है। विगत पांच दिनों में उपरोक्त दोनों संभागों को छोड़कर शेष क्षेत्रों में व्यापक वर्षा हुई है। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि मानसून के देरी से आने के पश्चात् भी विगत 1 जुलाई से 6 जुलाई तक छत्तीसगढ का मैदानी भाग एवं बस्तर का पठार में अधिक वर्षा होने के कारण मानसून का अब तक का कोटा लगभग पूरा हो चुका है। अतः इस प्रकार लगातार हो रही वर्षा को देखते हुए किसान बन्धुओं को सलाह दी जाती है कि खेतों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता होने पर मचाई कर नर्सरी उपलब्ध होने पर रोपाई करें अथवा नर्सरी की अनुपलब्धता पर लेही विधि से अंकुरित बीजों को मचाई किये हुए खेतों में ड्रम सीडर एवं छिटकवा विधि से बुवाई करें। साथ ही नर्सरी एवं बीजों को कवकनाशी (कार्बेन्डाजिम) एवं जैव उर्वरकों से उपचारित कर रोपाई एवं बुवाई करें।

           इस वर्ष अषाढ़ माह 1 जुलाई से प्रारंभ हुआ है। अषाढ़ माह से प्रारंभ होकर सावन मास की हरियाली अमावस्या अर्थात हरेली तिहार तक हम खरीफ फसल की बुआई एवं रोपाई कर सकते हैं। इस बार हरेली 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जो किसान भाई धान की सीधी बुआई करते हैं उन्हें परामर्श है कि जमीन में बतर की स्थिति में 15 जुलाई तक धान की बुआई कर लेवें। रोपाई एवं बियासी पद्धति से धान की खेती करने वाले किसान भाई 30 जुलाई तक रोपाई एवं बियासी का कार्य कर लेवें। किसी असामान्य परिस्थिति के कारण विलंब होने से यदि आप हरेली तक भी बुआई रोपाई का कार्य करते हैं तो फसल के उत्पादन में ज्यादा नुकसान नहीं होगा

           चूंकि इस बार मानसून विलंब से आया है इसलिए किसान भाईयों को सलाह दी जाती है कि इस वर्ष धान की शीघ्र एवं मध्यम अवधि में पकने वाली प्रजातियाँ जो कि 125-130 दिन तक पक जाती है जैसे- इन्द्रावती धान, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एम.टी.यू. 1010, एम.टी.यू. 1153, एम.टी.यू. 1156, एम.टी.यू. 1001, विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया आदि का उपयोग करें। एक एकड़ में सीधी बुआई एवं बियासी के लिए 30 कि.ग्रा., रोपा पद्धति में 20 कि.ग्राम तथा हाइब्रिड प्रजाति के लिए 6 कि.ग्रा. बीज का उपयोग करें। जिन खेतों में अधिक जल भराव हो गया है तथा वर्षा रुक नहीं रही हो तो लेही पद्धति से धान की बोआई करें। इस विधि में धान के अंकुरित बीजों की खेत में बुआई की जाती है

           बुआई के पूर्व बीज को कार्बेन्डाजिम या किसी अन्य कवकनाशी दवा से उपचारित कर लें। 1 किलो बीज के लिए ढाई ग्राम दवा का प्रयोग करें। भूमि में नाइट्रोजन फास्फोरस एवं पोटेशियम की पूर्ति के लिए जैव उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। धान में एजोस्पाइरिलम, पी.एस.बी., के.एस.बी. का उपयोग करना चाहिए। इन तीनों तरल जैव उर्वरकों की 2-2 मि.ली. मात्रा अर्थात 6 मि.ली. तरल पदार्थ 4 मि.ली. पानी में मिला लें। इस प्रकार तैयार 10 मि.ली. के घोल से 1 कि.ग्रा. धान बीज को उपचारित कर दें। यह उपचार पौधों को लगभग 12 कि.ग्रा. नाइट्रोजन 8 कि.ग्रा. फास्फोरस एवं 5 कि.ग्रा. पोटेशियम प्रति एकड़ प्रदान करेगा।

           वर्तमान परिपेक्ष्य में लगातार वर्षा की स्थिति में धान की लेही विधि से बुवाई- वर्तमान परिपेक्ष्य में उन क्षेत्रों में लगातार वर्षा की स्थिति निर्मित होने के कारण धान की लेही विधि से बुवाई करना उपयुक्त रहेगा। इस हेतु धान के खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध होने पर खेत की रोपा पद्धति की ही तरह अच्छी तरह से मचाई कर अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर अथवा छिटकवॉं विधि से बुवाई करें। इस विधि में मध्यम अवधि में पकने वाली (120-130 दिन लगभग) उपयुक्त किस्मों (विक्रम टी.सी.आर., छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान, महामाया, एम.टी.यू. 1001) का चयन करें एवं इस हेतु बीज दर 40 किलों ग्राम प्रति एकड़ उपयोग करते हुए बीजों को 8-10 घंटे पानी में भिगोना चाहिए फिर इन भीगे हुए बीजों का पानी निथार दें, इसके बाद इन बीजों को पक्के फर्स पर रखकर बोरे से ठीक से ढ़क देना चाहिए। लगभग 24-30 घंटे में बीज अंकुरित हो जायेंगे। अब बोरे को हटाकर बीज को छाया में फैलाकर रखें एवं इन अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर यंत्र उपलब्ध होने पर पंक्ति में बोवाई करें अथवा छिटकवॉं विधि से बुुवाई करें।

    छत्तीसगढ़ में लगभग 26 लाख हेक्टेयर में धान की सीधी बुआई एवं 12 लाख हेक्टेयर में रोपाई की जाती है। सीधी बुआई में खरपतवार एक प्रमुख समस्या है एवं यदि इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल में 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। फसल बोने के 40 दिन बाद तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना आवश्यक है। मानव श्रम उपलब्ध होने पर बोने के 20 दिन एवं 40 दिन बाद हाथ अथवा पैडी वीडर से निंदाई करना उचित होगा। रासायनिक दवाई से भी संकरी पत्ती एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारो का प्रभावकारी निंदा नियंत्रण किया जा सकता है। इसके विकल्प निम्नानुसार है-

    अंकुरण पूर्व निंदानाशक (व्यवसायिक नाम- पेन्डीमेथीलीन स्टाम्प, पेंडीगोल्ड, पेंडीलीन, धानुटांप, पेनिडा, पेंडीहबे आदि की 1000 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ में बुआई के 0 से 3 दिन के बीच छिड़काव करें। पाइरेजोसल्फूरान (व्यवसायिक नाम- साथी, सेवक, पाइरोसल्फ, लाठी आदि की 80 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में मिलाकर बोने के 0 से 3 दिन बाद तक एक एकड़ खेत में छिड़काव करें। बिसपायरी बेक सोडियम (व्यवसायिक नाम- नोमीनी गोल्ड, एडोरा, स्ट्राइडर, बिसफोर्स आदि की 100 मि.ली. मात्रा) को 150 लीटर पानी में मिलाकर 1 एकड़ खेत में बोने अथवा रोपाई के 20 से 25 दिन के बाद छिड़काव करें अथवा क्लोरीम्यूरान इथाइल़$मेटसल्फ्यूरान मिथाइल (व्यवसायिक नाम- आलमिक्स, धारमिक्स, दिग्गज आदि की 8 मि.ली. दवा) को 150 लीटर पानी मिलाकर 1 एकड़ खेत में बोने अथवा रोपाई के 20 से 25 दिन के बाद छिड़काव करें।

    बाजार में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण रसायनों का उपयोग भी किया जा सकता है। किन्तु उपयोग के पूर्व वैज्ञानिकों अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से परामर्श लें। खरपतवार नियंत्रण के लिए हाथ से निंदाई, मशीन से निंदाई अथवा रासायनिक दवा नियंत्रण में एक हजार से डेढ़ हजार रू. प्रति एकड़ तक खर्च आता है, किन्तु यदि समय पर खरपतवारों को नियंत्रण नहीं किया गया तो 20 हजार रू. प्रति एकड़ की हानि हो सकती है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्राथमिक सहकारी सोसायटी में पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डी.ए.पी., एन.पी.के., सिंगल सुपरफास्फेट एवं पोटाश उर्वरकों का भंडारण कर दिया गया है। पिछले वर्ष के समान मात्रा में किसानों को उर्वरक देने के निर्देश जारी किए जा चुके है। रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ हरी खाद एवं नील हरित काई के उपयोग से एक एकड़ में 1 बोरी यूरिया के बराबर नाइट्रोजन प्राप्त होती है तथा मिट्टी की संरचना में भी सुधार होता है।

    एक एकड़ भूमि में अधिकतम 2 बोरी यूरिया एवं 1 बोरी डी.ए.पी. का उपयोग करें। किसान भाई डी.ए.पी. की पूरी मात्रा को बुआई या रोपाई के पूर्व दे दे। 1 बोरी यूरिया को बोने या रोपाई के 30-35 दिन बाद एवं 1 बोरी यूरिया को बोने या रोपाई के 60-70 दिन बाद दिया जावे। जुलाई एवं अगस्त माह में धान की खेती में आने वाले कार्यों जैसे बुआई, रोपाई, उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन के लिए यह परामर्श जारी किए जा रहे है। सभी कृषि अनुसंधान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों में कृषक सलाह केन्द्र स्थापित किए गए हैं। किसी भी प्रकार की कठिनाइयों के निराकरण के लिए अपने निकटस्थ कृषि अनुसंधान केन्द्रों, कृषि विज्ञान केन्द्रों, कृषि महाविद्यालयों एवं कृषि विभाग से सम्पर्क करें।

  • पर्यटन के मानचित्र पर चमकेगा बलौदाबाजार: छुइहा जलाशय से गिरौदपुरी धाम तक होगा ऐतिहासिक विकास, स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

    पर्यटन के मानचित्र पर चमकेगा बलौदाबाजार: छुइहा जलाशय से गिरौदपुरी धाम तक होगा ऐतिहासिक विकास, स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

    पर्यटन के नए दौर की ओर बढ़ा बलौदाबाजार जिला, छुइहा जलाशय से गिरौदपुरी धाम तक होगा व्यापक विकास

     जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय, स्थानीय रोजगार, पर्यटन सुविधाओं और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण पर रहेगा विशेष फोकस

    रायपुर : बलौदाबाजार-भाटापारा जिले को पर्यटन की दृष्टि से नई पहचान दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए पर्यटन विकास की व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। कलेक्टर श्री कुलदीप शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित जिला पर्यटन विकास समिति की बैठक में जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के सुनियोजित विकास, पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

    बैठक में कलेक्टर श्री शर्मा ने कहा कि जिले में प्राकृतिक, धार्मिक और पारिस्थितिक पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं का समुचित उपयोग करते हुए पर्यटन स्थलों का चरणबद्ध विकास किया जाएगा, जिससे जिले की पहचान मजबूत होने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि चिन्हित पर्यटन स्थलों के विकास कार्यों में तेजी लाते हुए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

    बैठक में शहर के निकट स्थित छुइहा जलाशय के सौंदर्यीकरण और समग्र विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी गई। कलेक्टर ने इसे जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए। जलाशय क्षेत्र में पर्यटकों के लिए आकर्षक वातावरण, आवश्यक आधारभूत सुविधाएं तथा मनोरंजन के अवसर विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही जलाशय की भूमि पर हुए अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए जल संसाधन विभाग को तत्काल कार्रवाई करने तथा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।

    बैठक में खोरसी नाला पर नवीन कृषि उपज मंडी के समीप चेक डेम निर्माण और व्यापक वृक्षारोपण, सोनबरसा जंगल सफारी में पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, गिरौदपुरी धाम के विकास तथा गिधौरी के समीप महानदी तट के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इन परियोजनाओं के माध्यम से जिले में प्रकृति, धार्मिक और इको-टूरिज्म को नई पहचान देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हीरा स्व-सहायता समूह द्वारा छुइहा जलाशय में बोटिंग संचालन के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। समिति ने सुरक्षा मानकों और आवश्यक सुविधाओं का परीक्षण कराने के बाद इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।

    बलौदाबाजार जिले में पर्यटन स्थलों के व्यवस्थित विकास से जिले में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, आतिथ्य सेवाओं, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन, नौकायन और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और स्थानीय उत्पादों को भी व्यापक बाजार प्राप्त होगा।

    जिला पर्यटन विकास समिति की यह पहल बलौदाबाजार-भाटापारा को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और स्थानीय संस्कृति को एकीकृत करते हुए विकसित की जा रही यह कार्ययोजना आने वाले समय में जिले को पर्यटन के उभरते हुए केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष श्री अशोक जैन, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री दिव्या अग्रवाल, समिति के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  • किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर! गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में पीएम किसान योजना ने पकड़ी रफ्तार, हर पात्र किसान तक सम्मान निधि पहुंचाने का अभियान तेज

    किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर! गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में पीएम किसान योजना ने पकड़ी रफ्तार, हर पात्र किसान तक सम्मान निधि पहुंचाने का अभियान तेज

    गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले ने हासिल किया पीएम किसान सम्मान निधि योजना का 80 प्रतिशत लक्ष्य

    32 हजार 865 किसानों तक पहुंची सम्मान निधि की सहायता

    शेष पात्र किसानों को जोड़ने के लिए अभियान तेज, हर पात्र किसान तक योजना का लाभ पहुंचाने का संकल्प

    रायपुर : प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में किसान कल्याण को नई मजबूती मिल रही है। जिले ने योजना के क्रियान्वयन में 80 प्रतिशत प्रगति हासिल कर यह साबित किया है कि किसानों तक केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने से खेती-किसानी के लिए आवश्यक कृषि निवेश आसान हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है।

    30 जून 2026 की स्थिति के अनुसार जिले के कुल 40 हजार 850 किसानों में से 33 हजार 59 किसानों का प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पंजीयन किया जा चुका है। इनमें से 32 हजार 865 किसान योजना के अंतर्गत नियमित रूप से लाभ प्राप्त कर रहे हैं। योजना के माध्यम से पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जाती है। यह राशि किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक सहित अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।

    जिला प्रशासन शेष पात्र किसानों को भी योजना से जोड़ने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। इसके तहत ई-केवाईसी, आधार सत्यापन, बैंक खाते के प्रमाणीकरण तथा नए पंजीयन की प्रक्रिया निरंतर जारी है, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे। प्रशासन का उद्देश्य जिले के प्रत्येक पात्र किसान तक योजना का लाभ सुनिश्चित करना है।

    शेष 20 प्रतिशत प्रकरणों में शासकीय सेवक, आयकरदाता, मृत किसान अथवा अन्य अपात्र श्रेणी के मामले तथा लंबित पंजीयन शामिल हैं। ऐसे मामलों का नियमानुसार निराकरण किया जा रहा है, वहीं पात्र किसानों के दस्तावेजों का शीघ्र सत्यापन कर उन्हें योजना में शामिल करने के प्रयास भी जारी हैं।

    जिला प्रशासन ने सभी पात्र किसानों से अपील की है कि जिन्होंने अभी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पंजीयन नहीं कराया है अथवा ई-केवाईसी, आधार और बैंक खाते से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं की हैं, वे शीघ्र ही कृषि विभाग, जनपद पंचायत या लोक सेवा केंद्र के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करें। इससे वे योजना का लाभ समय पर प्राप्त कर सकेंगे और खेती-किसानी को आर्थिक संबल मिलेगा।

    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन जिले में किसान हितैषी शासन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल रही है, बल्कि कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और ग्रामीण विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।

  • ​सहकारिता से समृद्धि: रायपुर में ‘सहकारी सप्ताह’ का भव्य समापन : सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का किया अनावरण

    ​सहकारिता से समृद्धि: रायपुर में ‘सहकारी सप्ताह’ का भव्य समापन : सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का किया अनावरण

    रायपुर : भारत सरकार द्वारा गठित ‘सहकारिता मंत्रालय’ की स्थापना के सफल 5 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित “सहकारी सप्ताह” का भव्य समापन जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक रायपुर के प्रांगण में हुआ। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के सहकारिता एवं वन मंत्री श्री केदार कश्यप उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों द्वारा बैंक के संस्थापक पं. वामन बलीराम लाखे के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर समारोह की शुरुआत की गई। इसके साथ ही बैंक परिसर में ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ की प्रतिमा का गरिमामय अनावरण भी किया गया।

    ​केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के उद्बोधन का सीधा प्रसारण

    ​समारोह के दौरान देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के भाषण का यूट्यूब चैनल के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया। अपने संबोधन में श्री शाह ने सहकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों का जिक्र किया, जिनमें

    ​50,000 पैक्स (PACS) को ई-पैक्स में बदलना,​त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय की स्थापना,​दुनिया की सबसे बड़ी अन्न गोदाम श्रृंखला का निर्माण,​सहकारी समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) बनाना और देश भर में भारत टैक्सी सेवा की शुरुआत आदि कार्य शामिल हैं।

    ​रायपुर जिला सहकारी बैंक को 216 करोड़ रूपए का ऐतिहासिक लाभ

    ​बैंक की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्रीमती अपेक्षा व्यास ने प्रगति प्रतिवेदन पढ़ते हुए बैंक की शानदार उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष (31 मार्च 2026) की स्थिति में बैंक को 216 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक सकल लाभ हुआ है।

    ​केंद्र सरकार की ‘सहकार से समृद्धि’ योजना के तहत बैंक द्वारा किए जा रहे प्रमुख कार्य हैं जिसमें

    माइक्रो एटीएम: बैंक से जुड़ी 682 सहकारी समितियों और 98 डेयरी समितियों में माइक्रो एटीएम का संचालन।

    कॉमन सर्विस सेंटर: समितियों के माध्यम से नागरिकों को 32 जरूरी सेवाएं दी जा रही हैं।

    जन औषधि केंद्र: 12 प्राथमिक सहकारी समितियों द्वारा सस्ते इलाज के लिए जन औषधि केंद्रों का संचालन।

    उज्ज्वला योजना: दुर्गम क्षेत्रों की 10 सहकारी समितियों के माध्यम से एलपीजी गैस का वितरण।

    ​इसके साथ ही पैक्स का कंप्यूटरीकरण और 132 नवीन सहकारी समितियों का गठन किया गया है।

    ​क्वांटिटी नहीं, क्वॉलिटी खेती पर दें जोर: मंत्री श्री केदार कश्यप

    ​ सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में सफल कार्यक्रम के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पैक्स, डेयरी और मत्स्य पालन जैसी लगभग 1300 सहकारी समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करें और जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाएं। उन्होंने कहा कि किसानों को “क्वांटिटी (मात्रा) के स्थान पर क्वॉलिटी (गुणवत्ता)” वाली खेती पर ध्यान देना चाहिए।

    ​अन्नदाता को कर्ज मुक्त बनाने का संकल्प

    ​विशिष्ट अतिथि और सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री श्री कनीराम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना से 2021 में सहकारिता मंत्रालय बना, जिसने इस क्षेत्र को नई मजबूती दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें इस दिशा में काम करना होगा ताकि हमारे अन्नदाता (किसानों) को कभी कर्ज लेने की आवश्यकता ही न पड़े। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री केदार नाथ गुप्ता ने भी सहकारिता के क्षेत्र में पारदर्शिता और कृषि नवाचार पर अपने विचार रखे।

    ​वरिष्ठ जनप्रितिनिधियों की रही गरिमामय उपस्थिति

    ​कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला सहकारी बैंक रायपुर के अध्यक्ष श्री निरंजन सिन्हा ने सहकारिता मंत्री का आभार व्यक्त किया, वहीं उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

    ​इस भव्य समारोह में जिला सहकारी बैंक दुर्ग के अध्यक्ष श्री प्रीतपाल बेलचंदन, राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रवीण दुबे, जिला पंचायत रायपुर के अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, उपाध्यक्ष श्री संदीप यदु सहित सहकारिता विभाग की संयुक्त आयुक्त श्रीमती किरण गुप्ता, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री के.एन. कांडे और बड़ी संख्या में सहकारी संस्थाओं के अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती अनुराधा शुक्ला द्वारा और आभार प्रदर्शन बैंक के वरिष्ठ अधिकारी श्री एस.पी. चंद्राकर द्वारा किया गया।

  • लोयोला कॉलेज कुनकुरी की अनोखी पहल: नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क स्पोकन इंग्लिश क्लास शुरू, अब वनांचल के युवा करेंगे ग्लोबल मंच पर दमदार प्रदर्शन

    लोयोला कॉलेज कुनकुरी की अनोखी पहल: नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क स्पोकन इंग्लिश क्लास शुरू, अब वनांचल के युवा करेंगे ग्लोबल मंच पर दमदार प्रदर्शन

    वनांचल के विद्यार्थियों को महानगरों की टक्कर का बनाने के लिए कॉलेज की अनोखी और निःशुल्क पहल

    कुनकुरी | लोयोला महाविद्यालय कुनकुरी में प्रतिवर्ष की परंपरा को निभाते हुए, इस वर्ष भी नवप्रवेशित विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य के लिए निःशुल्क स्पोकन इंग्लिश क्लास का भव्य शुभारम्भ किया गया। कॉलेज प्रशासन का यह कदम दूरस्थ अंचलों से आने वाले छात्र-छात्राओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

    मुख्य बिंदु: कार्यक्रम की बड़ी बातें

    • लक्ष्य समूह: स्नातक प्रथम सेमेस्टर (UG 1st Semester) के नवप्रवेशित विद्यार्थी।
    • उद्देश्य: भाषाई बाधाओं को दूर कर विद्यार्थियों को देश-विदेश के मंचों पर सफलता दिलाना।
    • विशेषता: पूरी तरह से निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण।

    दिग्गजों का मार्गदर्शन: “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं”

    कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के वरिष्ठ नेतृत्व ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का मंत्र दिया:

    NEP 2020 पर विज़न

    नई शिक्षा नीति (NEP 2020) विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। स्पोकन इंग्लिश जैसी कौशल विकास कक्षाएं इस नीति को धरातल पर उतारने का काम कर रही हैं।”डॉ. फादर तेलेस्फोर लकड़ा (प्राचार्य, लोयोला महाविद्यालय)

    करियर में अंग्रेजी का महत्व

    आज के दौर में अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि करियर में ऊंची उड़ान भरने का माध्यम है। हमारा उद्देश्य है कि वनांचल का कोई भी बच्चा महानगरों के बच्चों से पीछे न रहे। सफलता के लिए कठोर परिश्रम, निरंतरता, समर्पण और सेवा की भावना बेहद जरूरी है।”फादर मार्टिन मंगल तिर्की (उपप्राचार्य एवं कार्यक्रम संचालक)

    क्यों खास है लोयोला कॉलेज की यह पहल?

    लोयोला महाविद्यालय कुनकुरी का यह प्रयास हर साल नए सत्र की शुरुआत में देखने को मिलता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के भीतर के संकोच को दूर करना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें और राष्ट्र व विश्व की सेवा में अपना अमूल्य योगदान दे सकें।

    इस गरिमामयी अवसर पर कॉलेज के समस्त शैक्षणिक सहायक प्राध्यापकगण, स्टाफ और भारी संख्या में नवप्रवेशित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरा परिसर विद्यार्थियों के उत्साह और नई ऊर्जा से सराबोर नजर आया।