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  • बस्तर की जैविक खेती को मिलेगी वैश्विक पहचान: यूरोप तक पहुंचेंगे यहां के ऑर्गेनिक उत्पाद, किसानों की आय 3 से 4 गुना बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार की बड़ी पहल

    बस्तर की जैविक खेती को मिलेगी वैश्विक पहचान: यूरोप तक पहुंचेंगे यहां के ऑर्गेनिक उत्पाद, किसानों की आय 3 से 4 गुना बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार की बड़ी पहल

    बस्तर की जैविक खेती को मिलेगा वैश्विक बाजार, यूरोप तक पहुंचेंगे जैविक उत्पाद : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

    नक्सल मुक्त गांवों की प्राकृतिक खेती बनेगी नई पहचान

    एपीडा, कृषि एवं पंचायत विभाग के साथ बनी कार्ययोजना, बस्तर संभाग में होगा विशेष सर्वे और परीक्षण

    रायपुर : बस्तर संभाग के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बड़े बाजारों तक पहुंचाने तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बस्तर के उन गांवों की पहचान कर उनका जैविक प्रमाणन कराने के निर्देश दिए, जहां आज तक किसानों ने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांव छत्तीसगढ़ की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और इनकी जैविक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए।

    बस्तर प्रवास के अनुभव से बनी नई पहल

     उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि हाल ही में नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त हुए ग्रामों के अपने बस्तर प्रवास के दौरान अनेक किसानों ने उन्हें जानकारी दी थी कि उन्होंने अपने खेतों में कभी भी रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़ा जाए, ताकि उनके उत्पादों का विधिवत जैविक प्रमाणन कराया जा सके और उन्हें देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ यूरोप सहित अन्य विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सके।

    जैविक प्रमाणन से किसानों की आय में होगा बड़ा इजाफा

     श्री शर्मा ने कहा कि जैविक प्रमाणन के बाद बस्तर के किसानों को उनके उत्पादों का वर्तमान मूल्य की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा तथा बस्तर की विशिष्ट कृषि पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

    यूरोपीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए बनेगी रणनीति

     बैठक में बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी), सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के अंतर्गत आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए ताकि बस्तर के उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकें। इसके लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों का निर्माण कर उत्पादन का हर किसी को भागीदार बनाया जाएगा।

    बस्तर के जिलों में जाएंगे संयुक्त दल, होगी टेस्टिंग

     उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक श्री अश्विनी देवांगन के साथ दो संयुक्त दल गठित कर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का दौरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये दल एपीडा और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जैविक क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेंगे तथा जैविक उत्पादों के लिए आवश्यक परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके द्वारा पूरे ग्राम पंचायतों को जैविक प्रमाणन दिलाकर बस्तर के उत्पादों को बिहान के छत्तीसकला ब्रांड द्वारा एक्सपोर्ट किया जाएगा।

    जैविक प्रमाणन में ली जाएगी छूट

     उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एनपीओपी प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन सालों की अवधि की आवश्यकता को बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए छूट देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त वनोत्पादों को प्रमाणन की आवश्यकता ना होने से उसे भी एक्सपोर्ट रेडी करने के लिए तैयारी करने को कहा ताकि बस्तर के लोगों को वनोत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

    प्रमाणन संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग

     उप मुख्यमंत्री ने जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया को गति देने के लिए छत्तीसगढ़ की प्रमाणन संस्थाओं की सेवाएं लेने तथा सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी कदम शीघ्र उठाने के निर्देश भी दिए। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, सचिव श्री भीम सिंह, सचिव श्री धर्मेश साहू, प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक श्री तारन प्रकाश सिन्हा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक श्री अश्विनी देवांगन, एपीडा के अधिकारी, कृषि विभाग के अधिकारी तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिली नई मजबूती: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी की, 66 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में डीबीटी से पहुँचे ₹626.25 करोड़

    महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मिली नई मजबूती: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी की, 66 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में डीबीटी से पहुँचे ₹626.25 करोड़

    आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन रही है महतारी वंदन योजना : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री ने जारी की महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त, 66 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में डीबीटी से 626.25 करोड़ रुपये अंतरित

    29 किश्तों में अब तक 18,805.83 करोड़ रुपये सीधे महिलाओं के खातों में पहुंचे

    लखपति दीदी’ सहित विभिन्न योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को मिल रही नई मजबूती

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 29वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 66 लाख से अधिक माताओं-बहनों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 626.25 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन की नई पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आज की किश्त के साथ योजना के अंतर्गत अब तक 29 किश्तों में कुल 18,805.83 करोड़ रुपये की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में नारी शक्ति के सशक्तिकरण का जो व्यापक अभियान चल रहा है, छत्तीसगढ़ सरकार उसी संकल्प को पूरी प्रतिबद्धता के साथ धरातल पर उतार रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रवास के दौरान माताएं और बहनें स्वयं उन्हें बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अनेक महिलाओं ने इस राशि से छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं, कई ने सिलाई-कढ़ाई एवं स्वरोजगार अपनाया है, जबकि बड़ी संख्या में परिवारों ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में इसका उपयोग किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के ये अनुभव इस योजना की वास्तविक सफलता और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभाव के प्रमाण हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महतारी वंदन योजना के साथ-साथ ‘लखपति दीदी’ जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से भी महिलाओं की आय बढ़ाने, उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-केवाईसी की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर शत-प्रतिशत पात्र महिलाओं तक योजना का लाभ सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से बस्तर संभाग में इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश भी दिए।

    उल्लेखनीय है कि महतारी वंदन योजना 1 मार्च 2024 से प्रदेश में लागू की गई है। योजना के तहत 21 वर्ष या उससे अधिक आयु की पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने के साथ परिवार के पोषण, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण एवं एनीमिया की रोकथाम तथा स्वरोजगार जैसी गतिविधियों को भी नई मजबूती मिली है।

  • जशपुर में बढ़ी हाथियों की गतिविधि: कई गांवों के आसपास 32 हाथियों का दल सक्रिय, वन विभाग ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

    जशपुर में बढ़ी हाथियों की गतिविधि: कई गांवों के आसपास 32 हाथियों का दल सक्रिय, वन विभाग ने जारी की सुरक्षा एडवाइजरी

    जशपुर वनमण्डल के चार वन परिक्षेत्रों में 32 हाथियों का विचरण, वन विभाग सतर्क ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील

    जशपुर : जशपुर वनमण्डल अंतर्गत विभिन्न वन परिक्षेत्रों में वर्तमान में लगभग 32 हाथियों का दल सक्रिय रूप से विचरण कर रहा है। वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखते हुए हाथी-मानव द्वंद की किसी भी संभावित घटना की रोकथाम हेतु व्यापक सुरक्षा एवं सतर्कता संबंधी उपाय किए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र दुलदुला अंतर्गत ग्राम धुरीअम्बा, करडेगा, केन्दापानी, धांधअम्बा, बुकना, मधुटोली एवं कोहड़ापहरी, वन परिक्षेत्र पत्थलगांव अंतर्गत ग्राम खाडामाचा, हरदीझरिया, पीठाआमा, राजाआमा, खमगढ़ा, महेशपुर, काडरो एवं झिमकी, वन परिक्षेत्र कांसाबेल अंतर्गत ग्राम चेटबा, नारायणबहली, मड़ियाझरिया एवं सोनाजोरी, तथा वन परिक्षेत्र बगीचा अंतर्गत ग्राम झिक्की, खंताडांड, टटकेला, परसाडांड, पेटा, कुरडेग, बिमड़ा, सामरबार, दुर्गापारा, सुईकोना, मैनी, बुचीढांड, जुजगु एवं कुरडेग के आसपास हाथियों का दल विचरण कर रहा है।

    वनमण्डलाधिकारी ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर आर.आर.टी. तथा वन विभाग का मैदानी अमला चौबीसों घंटे सतत निगरानी रखे हुए है। हाथियों की लोकेशन का नियमित रूप से पता लगाकर आसपास के ग्रामों में तत्काल सूचना पहुंचाई जा रही है, जिससे ग्रामीण समय रहते सतर्क रह सकें। इसके अतिरिक्त प्रभावित क्षेत्रों में लगातार मुनादी कर लोगों को हाथियों की उपस्थिति एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी जा रही है।

    वन विभाग द्वारा ग्रामीणों से विशेष अपील की गई है कि हाथियों के वन क्षेत्र में विचरण के दौरान लकड़ी, चारा अथवा अन्य निस्तार कार्यों के लिए जंगल में प्रवेश न करें। साथ ही किसी भी परिस्थिति में हाथियों के समीप जाने, उन्हें उकसाने, उनका पीछा करने अथवा उनके साथ सेल्फी या वीडियो बनाने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे गंभीर दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है। विभाग द्वारा ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों, वन सुरक्षा समितियों तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से हाथियों की गतिविधियों की जानकारी निरंतर साझा की जा रही है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। वन विभाग का उद्देश्य हाथियों एवं ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानव-हाथी द्वंद की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोकना है। वन विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि हाथियों की सूचना मिलने पर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें तथा केवल वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें। यदि किसी क्षेत्र में हाथियों की उपस्थिति दिखाई दे अथवा उनकी गतिविधियों की जानकारी प्राप्त हो, तो इसकी सूचना तत्काल निकटस्थ वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी अथवा आर.आर.टी. को दें।

    वन विभाग ने पुनः सभी ग्रामीणों से अनुरोध किया है कि वे विभाग द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, रात्रि के समय अनावश्यक रूप से जंगल अथवा हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में न जाएं तथा किसी भी आपात स्थिति में वन विभाग से तत्काल संपर्क करें। विभाग ने विश्वास व्यक्त किया है कि ग्रामीणों की सतर्कता, सहयोग एवं समय पर सूचना देने की सक्रिय सहभागिता से हाथी-मानव द्वंद की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।

  • हरियाली का जनआंदोलन बना ‘एक पेड़ माँ के नाम’: जशपुर में हजारों हाथ बढ़े पर्यावरण संरक्षण की ओर

    हरियाली का जनआंदोलन बना ‘एक पेड़ माँ के नाम’: जशपुर में हजारों हाथ बढ़े पर्यावरण संरक्षण की ओर

    वन महोत्सव के तहत जशपुर वनमण्डल में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को मिल रहा जनसमर्थन, विद्यार्थियों एवं जनप्रतिनिधियों ने किया वृहद वृक्षारोपण

    जशपुर : वन महोत्सव के अवसर पर जशपुर वनमण्डल अंतर्गत वन परिक्षेत्र पत्थलगांव एवं वन परिक्षेत्र बगीचा में ‘एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। वन परिक्षेत्र पत्थलगांव अंतर्गत शासकीय प्रताप उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, वन परिक्षेत्र बगीचा अंतर्गत बालक आश्रम बिमड़ा परिसर एवं वन परिक्षेत्र कांसाबेल अन्तर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र लमडांड तथा प्राथमिक स्कूल केन्दुटोला में आयोजित इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों, वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, वन सुरक्षा समितियों, स्व-सहायता समूहों तथा स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर पौधारोपण किया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज में वृक्षों के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा प्रत्येक नागरिक को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प दिलाना है। इस अवसर पर विभिन्न प्रजातियों के छायादार, फलदार एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधों का रोपण किया गया।

    कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के जीवन चक्र का आधार हैं। बढ़ते पर्यावरणीय संकट, जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता संरक्षण की चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम अभियान केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, मातृत्व के सम्मान और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का जनआंदोलन है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को वृक्षों के पर्यावरणीय, सामाजिक एवं वैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी गई। उन्हें पौधों की नियमित देखभाल, जल संरक्षण तथा हरित वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। विद्यार्थियों ने लगाए गए पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प भी लिया। वन विभाग द्वारा वन महोत्सव के दौरान जशपुर वनमण्डल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में “एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत लगातार वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में विद्यालयों, ग्राम पंचायतों, वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवा मंडलों तथा स्थानीय नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर इसे जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाना है।

    वनमण्डलाधिकारी ने बताया कि अभियान के तहत लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण एवं नियमित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे केवल पौधारोपण तक सीमित न रहें, बल्कि पौधों को वृक्ष बनने तक उनकी सुरक्षा एवं संवर्धन का दायित्व भी निभाएँ। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे, तो यह अभियान हरित एवं समृद्ध भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने पर्यावरण संरक्षण, अधिकाधिक वृक्षारोपण तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित पर्यावरण के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संदेश दिया।

  • कलेक्टर रोहित व्यास की अभिनव पहल: विज्ञान शिक्षकों को मिला हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, अब प्रयोग आधारित होगी पढ़ाई

    कलेक्टर रोहित व्यास की अभिनव पहल: विज्ञान शिक्षकों को मिला हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग, अब प्रयोग आधारित होगी पढ़ाई

    कलेक्टर रोहित व्यास की पहल और इनोवेशन एंड साइंस प्रमोशन फाउंडेशन के सहयोग से विज्ञान शिक्षकों के लिए आयोजित हुआ विशेष प्रायोगिक प्रशिक्षण

    पुणे से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रचेता मलिक ने शिक्षकों को विज्ञान के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित प्रयोगों का कराया व्यावहारिक प्रशिक्षण

    जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास की पहल एवं इनोवेशन एंड साइंस प्रमोशन फाउंडेशन के सहयोग से स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम विद्यालय जशपुर में कक्षा नवी एवं दसवीं में विज्ञान विषय पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए विशेष प्रायोगिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया।

    इन्नोवेशन एंड साइंस प्रमोशन फाऊंडेशन के फाउंडर और वैज्ञानिक, डॉ. प्रचेता मलिक और उनकी चार सदस्यीय टीम ने शिक्षकों को कई वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित प्रयोग कराए।

    ज्वाइंट कलेक्टर प्रशांत कुशवाहा के मार्गदर्शन में इस बार जिले के सभी शासकीय हाई और हायर सेकेंडरी विद्यालयों में प्रयोग आधारित अध्ययन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से प्रयोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम कराए जा रहे हैं।

    पुणे से आए डॉ. प्रचेता‌ मलिक के साथ उनकी टीम के सदस्यों रोबिन पुष्प, ऋतिक झा, हेमंत मुदलियार और सुश्री रुचि सिंह ठाकुर ने सभी शिक्षकों को प्रयोग कराएं। जिसमें मुख्य रूप से शिक्षकों ने डीआईवाई एक्टिविटी के माध्यम से पैराशूट , बैटरी, माइक्रोस्कोप , रेस्पिरोमीटर और स्ट्रा प्रोपेलर बनाना सीखा। इसके साथ ही एसिड बेस न्यूट्रलाइजेशन रिएक्शन , ज्यामिति की विभिन्न आकृतियों को पेपर के माध्यम से बनाना आदि भी शामिल रहा। भौतिकी, रसायन एवं जीवविज्ञान से जुड़े इन प्रयोगों का प्रशिक्षण स्थल पर व्यावहारिक प्रदर्शन हुआ।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत एक्सपीरियंशियल लर्निंग, एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग और कंपिंटेंसी बेस्ड लर्निंग को समझाते हुए एक्टिविटीज के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के विषय में भी बताया गया। शिक्षकों को डिजिटल रूप से अन्य एक्सपेरिमेंट्स का मैन्युअल भी उपलब्ध कराया जाएगा , जिसमें स्वयं करके देखें गतिविधि के माध्यम से इलेक्ट्रोप्लेटिंग , मैग्नेटिक पेन स्टैंड, वाइब्रेटिंग मेंबरेंन्स, क्रोमेटोग्राफी, सेंट्रीफ्यूज, डाइजेशन स्टार्च, सॉइल इरोजिन मॉडल और मैग्नेटिक फील्ड लाइन शामिल है।

    प्रशिक्षण में एबीईओ टुमनू गोसाई, यशस्वी जशपुर से अवनीश पांडेय, संजय दास सहयोगी मास्टर ट्रेनर प्रभात मिश्रा, दीपक ग्वाला, श्रीमती मनीषा भगत सहित सभी हाई और हायर सेकंडरी विद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे।

  • जशपुर में मृदा स्वास्थ्य सुधार पर विशेष अभियान: हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने की अपील

    जशपुर में मृदा स्वास्थ्य सुधार पर विशेष अभियान: हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और मृदा परीक्षण आधारित खेती अपनाने की अपील

    मृदा स्वास्थ्य सुधार और जैविक कार्बन बढ़ाने के लिए जिले में सतत प्रयास जारी

    हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद के उपयोग के लिए किसानों को किया जा रहा प्रोत्साहित

    मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक उपयोग पर कृषि विभाग का विशेष जोर

    जशपुर : जिले में मृदा स्वास्थ्य सुधार, भूमि की उर्वराशक्ति बनाए रखने और मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा लगातार विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। किसानों को हरी खाद, जैविक खाद और मृदा परीक्षण आधारित संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए नियमित रूप से प्रोत्साहित एवं जागरूक किया जा रहा है। उप संचालक कृषि जशपुर ने 9 जुलाई 2026 को एक दैनिक समाचार पत्र में “उत्पादन बढ़ाने रासायनिक खाद का उपयोग, मिट्टी में कम हुआ ऑर्गेनिक कार्बन, घट रही उर्वरक क्षमता” शीर्षक से प्रकाशित समाचार के संबंध में विभागीय तथ्य स्पष्ट करते हुए बताया कि कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। समाचार में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने के लिए किए जा रहे इन सतत प्रयासों का समुचित उल्लेख नहीं किया गया है।

    हरी खाद से बढ़ेगा जैविक कार्बन, सुधरेगी मिट्टी की उर्वराशक्ति –

    कृषि विभाग द्वारा किसानों को हरी खाद के रूप में ढैंचा, सनई सहित अन्य उपयुक्त फसलों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थों और जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाने में सहायता मिलती है। इसके साथ ही भूमि की संरचना एवं उर्वराशक्ति में सुधार होता है और लंबे समय में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है। वर्तमान में राज्य शासन द्वारा संचालित हरी खाद कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को हरी खाद अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाना, भूमि की उत्पादन क्षमता को बनाए रखना तथा टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।

    गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और फसल अवशेषों के उपयोग पर जोर –

    विभाग द्वारा किसानों को गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक खादों के अधिकाधिक उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेतों में समावेशित करने के संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़े और भूमि की उर्वराशक्ति दीर्घकाल तक बनी रहे। कृषि विभाग द्वारा नियमित रूप से प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को संतुलित और मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग के संबंध में जानकारी दी जा रही है। विभाग का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि जैविक एवं रासायनिक स्रोतों के वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग के माध्यम से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करना है।

    मृदा स्वास्थ्य कार्ड से किसानों को खेतवार मिल रही उर्वरक उपयोग की अनुशंसा –

    जिले में मृदा परीक्षण के आधार पर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए जाते हैं। इसमें संबंधित खेत की मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों की स्थिति के अनुसार उर्वरकों एवं अन्य पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग की अनुशंसा की जाती है। इससे किसान आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग कर सकते हैं और अनावश्यक अथवा असंतुलित उपयोग से बच सकते हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को यह समझने में भी सहायता मिलती है कि उनके खेत की मिट्टी को किन पोषक तत्वों की आवश्यकता है। इस वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है।

    कृषि विभाग की किसानों से अपील—संतुलित उर्वरक के साथ जैविक खाद का करें अधिकाधिक उपयोग –

    कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण और कृषि विशेषज्ञों की अनुशंसा के आधार पर ही करें। साथ ही हरी खाद, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, अन्य जैविक खादों तथा फसल अवशेषों के समुचित उपयोग को प्राथमिकता दें। विभाग ने कहा है कि मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण केवल वर्तमान फसल के बेहतर उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि की उर्वराशक्ति सुरक्षित रखने के लिए भी आवश्यक है। संतुलित पोषण और जैविक खादों के अधिकाधिक उपयोग से भूमि की उत्पादन क्षमता को दीर्घकाल तक बनाए रखने के साथ टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि को बढ़ावा दिया जा सकता है।

  • जशपुर प्रशासन की अहम चेतावनी: गरज-चमक और आकाशीय बिजली के दौरान बरतें विशेष सावधानी, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    जशपुर प्रशासन की अहम चेतावनी: गरज-चमक और आकाशीय बिजली के दौरान बरतें विशेष सावधानी, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    आकाशीय बिजली से बचाव के लिए जिला प्रशासन की अपील, बारिश और गरज-चमक के दौरान बरतें विशेष सावधानी

    प्रभावित व्यक्ति को तुरंत 108 एम्बुलेंस या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं

    जशपुर : वर्षा ऋतु के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में संभावित वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने जिलेवासियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। नागरिकों से कहा गया है कि मौसम खराब होने, तेज गरज-चमक या बिजली कड़कने की स्थिति में लापरवाही न करें और तुरंत किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

    गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, खेत, पहाड़ी क्षेत्र, नदी-तालाब एवं अन्य जलाशयों के आसपास जाने से बचें। साथ ही पेड़ों के नीचे खड़े न हों, क्योंकि आकाशीय बिजली गिरने का खतरा अधिक रहता है। ऐसी स्थिति में किसी पक्के भवन या पूरी तरह बंद वाहन में शरण लेना सुरक्षित उपाय है। मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी चेतावनियों का पालन करें तथा अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें। यदि कोई व्यक्ति खुले स्थान पर फँस जाए और तत्काल सुरक्षित स्थान तक पहुँचना संभव न हो, तो दोनों पैरों को आपस में मिलाकर नीचे झुक जाएँ, सिर नीचे रखें तथा हाथ घुटनों पर रखें। इस दौरान जमीन पर पूरी तरह न लेटें और अन्य लोगों से उचित दूरी बनाए रखें, ताकि संभावित खतरे को कम किया जा सके।

    आकाशीय बिजली से प्रभावित व्यक्ति तुरंत लें चिकित्सकीय सहायता

    स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि आकाशीय बिजली से प्रभावित व्यक्ति को छूना पूरी तरह सुरक्षित होता है। ऐसी स्थिति में बिना समय गंवाए 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दें अथवा प्रभावित व्यक्ति को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाएं। यदि व्यक्ति की सांस या नाड़ी नहीं चल रही हो, तो प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा तुरंत सीपीआर शुरू करें और गंभीर स्थिति में शीघ्र अस्पताल पहुँचाने की व्यवस्था की जाए। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वर्षा ऋतु में मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें और सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक सावधानियों का पालन करें। प्रशासन का संदेश है कि जब गरज सुनाई दे, तो तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाएँ। आपकी सतर्कता ही आपका जीवन बचा सकती है।

  • अब पंजीयन के बिना नहीं मिलेगा योजनाओं का लाभ: मत्स्य विभाग ने एनएफडीपी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की

    अब पंजीयन के बिना नहीं मिलेगा योजनाओं का लाभ: मत्स्य विभाग ने एनएफडीपी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की

    मत्स्य कृषक एनएफडीपी पोर्टल पर पंजीयन कर विभागीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करें

    राज्य पोषित योजनाओं एवं प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन अनिवार्य

    जशपुर : मछली पालन विभाग द्वारा संचालित राज्य पोषित योजनाओं एवं प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए मत्स्य कृषकों का एनएफडीपी पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है। विभाग ने बताया कि मछली पालन से जुड़े व्यक्ति, समूह, समिति एवं अन्य हितग्राही कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से अथवा स्वयं एनएफडीपी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन करा सकते हैं। सीएससी के माध्यम से पंजीयन कराने पर निर्धारित शुल्क में से 20 रुपये सीएससी संचालक को तथा 80 रुपये हितग्राही को प्राप्त होंगे। एनएफडीपी पोर्टल पर पंजीयन के लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर एवं बैंक खाता होना आवश्यक है।

    पंजीयन से संबंधित विकासखंड के मत्स्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया जा सकता है

    पत्थलगांव में सहायक मत्स्य अधिकारी श्री रविशंकर, मोबाइल: 9244520073, कुनकुरी एवं दुलदुला में सहायक मत्स्य अधिकारी कु. शीला मिंज, मोबाइल: 7746839457, जशपुर में सहायक मत्स्य निरीक्षक श्री अरविंद डनसेना, मोबाइल: 9887299753, मनोरा में मत्स्य निरीक्षक कु. इन्द्राणी साह मोबाइल:9827890842, बगीचा में मत्स्य निरीक्षक श्री अभिनीत कुमार सिंह, मोबाइल: 7999565025, कांसाबेल में मत्स्य निरीक्षक कु. अम्बिका पैंकरा मोबाइल: 8224835485, फरसाबहार में मत्स्य निरीक्षक कु. श्वेता प्रधान, मोबाइल: 7247071600। मछली पालन विभाग ने जिले के सभी पात्र मत्स्य कृषकों से अपील की है कि वे शीघ्र एनएफडीपी पोर्टल पर पंजीयन कराकर विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करें।

  • जशपुर में सीएम हेल्पलाइन का असर: दिव्यांग प्रफुल्ल बेक की मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल हुई दुरुस्त, समय पर मिला समाधान

    जशपुर में सीएम हेल्पलाइन का असर: दिव्यांग प्रफुल्ल बेक की मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल हुई दुरुस्त, समय पर मिला समाधान

    सीएम हेल्पलाइन बनी दिव्यांगों के लिए सहारा : बाबू सजबहार के प्रफुल्ल बेक की समस्या का हुआ त्वरित समाधान

    जशपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है।

    इसी क्रम में जशपुर जिले के बाबू सजबहार निवासी प्रफुल्ल बेक, जो दिव्यांग होने के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं, उनकी समस्या का भी समय पर निराकरण किया गया।

    प्रफुल्ल बेक को बीते वर्ष समाज कल्याण विभाग द्वारा मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई थी, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उनकी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल पिछले चार माह से बंद पड़ी थी। उन्होंने 28 जून 2026 को सीएम हेल्पलाइन में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत प्राप्त होते ही समाज कल्याण विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल की मरम्मत के लिए संबंधित एजेंसी को उनके निवास पर भेजा गया। कुछ ही दिनों में उनकी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल ठीक कर दी गई।

    प्रफुल्ल बेक ने बताया कि मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल खराब होने के कारण उन्हें कहीं भी आने-जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था और उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। उन्होंने कहा कि दिव्यांग होने के कारण वे स्वयं चल-फिर नहीं सकते हैं। यह मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उनके लिए पैरों की तरह काम करती है। इसके खराब हो जाने से वे काफी परेशान और हताश हो गए थे।

    उन्होंने बताया कि सीएम हेल्पलाइन उनके लिए बहुत ही लाभदायक साबित हुई। उनकी समस्या का समय-सीमा से पहले ही निराकरण हो गया। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी का तहेदिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दोबारा ठीक हो जाने से मैं फिर से आत्मनिर्भर हो पाया हूँ। यह हमारे मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील पहल की वजह से ही संभव हो सका है।”

  • पिछड़ा वर्ग आयोग की अहम सुनवाई: मलार समाज ने ओबीसी में शामिल होने सौंपा आवेदन, कई मामलों का हुआ निराकरण

    पिछड़ा वर्ग आयोग की अहम सुनवाई: मलार समाज ने ओबीसी में शामिल होने सौंपा आवेदन, कई मामलों का हुआ निराकरण

    छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सुनवाई-कई मामलों का हुआ निराकरण

    मलार समाज ने ओबीसी में शामिल होने सौंपा आवेदन

    रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में आज विभिन्न जिलों से प्राप्त गंभीर शिकायतों और आवेदनों पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई आयोग कार्यालय में आयोजित की गई। आयोग के अध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा) श्री नेहरू राम निषाद, उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) श्रीमती चन्द्रकान्ति वर्मा एवं आयोग के सचिव श्री संकल्प साहू की उपस्थिति में मामलों की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान सभी संबंधित पक्षकारों को निष्पक्ष एवं पारदर्शी रूप से अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

    मलार समाज को ओबीसी में शामिल करने की मांग

     सुनवाई के दौरान सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर एवं जशपुर जिलों से आए मलार समाज के लगभग 50 से 60 प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रतिनिधियों ने समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किए जाने के संबंध में एक सामूहिक आवेदन प्रस्तुत किया। समाज के लोगों ने एकमत होकर इस प्रक्रिया के प्रति अपना लिखित समर्थन दर्ज कराया, जिस पर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने प्रकरण का अवलोकन कर अधिकारियों को नियमानुसार आगामी त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

    प्रमुख मामलों पर हुई सुनवाई और निर्देश

     आवेदक श्री हरिशंकर साहू द्वारा सामाजिक बहिष्कार किए जाने की शिकायत पर जिला गरियाबंद के ग्रामीण साहू संघ (मुरमुरा) के पदाधिकारी आयोग के समक्ष हाजिर हुए। पदाधिकारियों ने बताया कि आवेदक को समाज की मुख्यधारा में पुनः ससम्मान शामिल कर लिया गया है। इस संबंध में आयोग के पदाधिकारियों के समक्ष प्रमाण-पत्र भी प्रस्तुत किया गया।

     श्री जागेश्वर यदु द्वारा भू-अधिग्रहण के बदले मिली नौकरी से सेवा समाप्त किए जाने की शिकायत पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, रायपुर के अधिकारियों ने अपना पक्ष रखा। अधिकारियों ने अवगत कराया कि यह सेवा संबंधी विवाद होने के कारण केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस पर आयोग ने आवेदक को आवश्यक विधिक कार्रवाई हेतु कैट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने की उचित जानकारी दी।

     श्री प्रदीप जायसवाल ने छत्तीसगढ़ विद्युत कंपनी में पदों की समतुल्यता निर्धारण और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण संबंधी विषयों से आयोग को अवगत कराया। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष ने अन्य पिछड़ा वर्ग क्रीमीलेयर पर समतुल्यता निर्धारण के संबंध में छत्तीसगढ़ शासन को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।

     आवेदक श्री रामसुन्दर का बयान दर्ज किया गया, परंतु अनावेदक की अनुपस्थिति के कारण उसे आगामी तिथि पर पुनः तलब किया गया है। चूंकि यह मामला आपसी विवाद और मारपीट से संबंधित था, इसलिए आयोग ने आवेदक को संबंधित पुलिस थाने में नियमानुसार शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी है। सुनवाई के दौरान श्री अंबिका प्रसाद, श्री फगुन दास और श्रीमती जोगेश्वरी वर्मा के अनुपस्थित रहने के कारण आयोग ने उन्हें आगामी पेशी तिथि में दोबारा उपस्थित होने हेतु निर्देशित किया है।

    संवेदनशीलता से काम करने की हिदायत

     सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा के बाद अध्यक्ष श्री नेहरू राम निषाद एवं उपाध्यक्ष श्रीमती चन्द्रकान्ति वर्मा ने उपस्थित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि पिछड़ा वर्ग से जुड़े सभी प्रकरणों का त्वरित और पूरी संवेदनशीलता के साथ समय-सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।