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  • छत्तीसगढ़ में जनजातीय उत्थान का नया अध्याय, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा— विकास, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आदिवासी समाज को मिल रही नई पहचान

    छत्तीसगढ़ में जनजातीय उत्थान का नया अध्याय, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा— विकास, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आदिवासी समाज को मिल रही नई पहचान

    छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास को मिल रही अभूतपूर्व गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास के जनदर्शन हॉल में आयोजित भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने नवनियुक्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और छत्तीसगढ़ में जनजातीय विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संघ का नवगठित राज्य बोर्ड आदिवासी समाज के उत्थान, उनके अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के अध्यक्ष श्री प्रकाश कुमार उइके, श्रीमती कौशल्या साय, श्री राजेश मालवीय, श्री कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा सहित संघ के सदस्यगण एवं विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है, जहां विशेष पिछड़ी जनजातियों सहित अनेक जनजातीय समुदाय अपनी समृद्ध परंपराओं, संस्कृति और जीवन मूल्यों के साथ निवास करते हैं। ऐसे राज्य में भारतीय आदिम जाति सेवक संघ के छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड का गठन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संघ का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है और यह संस्था लंबे समय से देशभर में आदिवासी समाज के कल्याण एवं उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की ऐतिहासिक भूमिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके प्रथम अध्यक्ष रहे, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री श्री मोरारजी देसाई ने भी इस प्रतिष्ठित संस्था का नेतृत्व किया। उन्होंने नवनियुक्त राज्य बोर्ड के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए देश के विभिन्न राज्यों से आए संघ के पदाधिकारियों का छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर आत्मीय स्वागत किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। आज बस्तर क्षेत्र विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, विद्युत, संचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। पर्यटन के क्षेत्र में भी बस्तर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। यहां की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और परंपराओं को जानने-समझने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं तथा स्थानीय होमस्टे में ठहरकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत चार दशकों में बस्तर के अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से वंचित रहे और लगभग 400 गांवों का विधिवत सर्वेक्षण तक नहीं हो पाया था। वर्तमान सरकार ने इन गांवों का सर्वे कर विकास कार्यों को गति दी है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत 500 से अधिक गांवों तक सड़क, पेयजल सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। इन क्षेत्रों में लोगों के राशन कार्ड बनाए जा रहे हैं, नई उचित मूल्य की दुकानों का संचालन प्रारंभ हुआ है तथा शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी तेजी से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना के अंतर्गत घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों को समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसके साथ ही बस्तर मुन्ने कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिसका अर्थ है ‘अग्रणी बस्तर’। इस पहल के माध्यम से सुदूर वनांचलों तक शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और जीवन मूल्यों का संरक्षण करते हुए उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आजीविका और आर्थिक अवसरों से जोड़ना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ का छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए जनजातीय विकास के प्रयासों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेगा।

  • महिलाओं के नाम बढ़ रहा संपत्ति का अधिकार, पंजीयन शुल्क में 50% छूट से आई ऐतिहासिक बढ़ोतरी, 45% अधिक रजिस्ट्रियां और ₹50 करोड़ से ज्यादा का सीधा लाभ

    महिलाओं के नाम बढ़ रहा संपत्ति का अधिकार, पंजीयन शुल्क में 50% छूट से आई ऐतिहासिक बढ़ोतरी, 45% अधिक रजिस्ट्रियां और ₹50 करोड़ से ज्यादा का सीधा लाभ

    संपत्ति में बढ़ी महिलाओं की भागीदारी, सशक्त हो रही नारी शक्ति

    पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट का दिख रहा सकारात्मक प्रभाव

    महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, 50.14 करोड़ रुपये का मिला प्रत्यक्ष लाभ

    महिलाओं का संपत्ति स्वामित्व बढ़ाना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में बड़ा कदम: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट की पहल के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    विभाग द्वारा 06 मई 2026 से 30 जून 2026 की अवधि का पिछले वर्ष की समान अवधि से तुलनात्मक विश्लेषण करने पर पाया गया कि वर्ष 2025 में महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। इसी अवधि में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 14,668 से बढ़कर 21,292 हो गई, जो लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।

    राज्य के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जांजगीर-चांपा, बलोद, कोरिया, रायपुर तथा कांकेर सहित अनेक जिलों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है।

    महिलाओं को प्रदान की गई पंजीयन शुल्क में छूट के परिणामस्वरूप इस अवधि में नागरिकों को लगभग 50.14 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है। इससे न केवल महिलाओं के नाम पर संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिला है, बल्कि परिवारों को भी आर्थिक राहत मिली है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। संपत्ति पर महिलाओं का स्वामित्व उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ परिवार और समाज में अधिक सम्मान एवं निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में परिवार लाभान्वित हुए हैं और महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हमारी सरकार ऐसी नीतियों को लगातार बढ़ावा दे रही है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकास यात्रा की समान भागीदार बनाएं।

    वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई यह उल्लेखनीय वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। जब किसी महिला के नाम संपत्ति होती है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, परिवार में उसकी निर्णयात्मक भूमिका सुदृढ़ होती है और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

    मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं, बल्कि महिलाओं को संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर उन्हें वास्तविक अर्थों में सशक्त बनाना है। प्रारंभिक परिणाम बताते हैं कि यह पहल अपने उद्देश्य की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही है।

    मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी एवं समावेशी पंजीयन व्यवस्था के निर्माण के लिए निरंतर सुधार कर रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए जा रहे सुधारों एवं प्रोत्साहनात्मक उपायों का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।

  • डिजिटल सुशासन की नई क्रांति से बदल रहा छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 435 प्रशासनिक सुधारों ने बनाया शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पूरी तरह नागरिक-केंद्रित

    डिजिटल सुशासन की नई क्रांति से बदल रहा छत्तीसगढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 435 प्रशासनिक सुधारों ने बनाया शासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पूरी तरह नागरिक-केंद्रित

    पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ का आधार है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    डिजिटल सुशासन से छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    नागरिक केंद्रित शासन व्यवस्था ही सुशासन की वास्तविक पहचान है: मुख्यमंत्री

    प्रशासनिक सुधारों से बदल रहा छत्तीसगढ़: प्रशासनिक सुधारों से शासन हुआ अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित

    डिजिटल सुशासन के मॉडल के रूप में उभर रहा छत्तीसगढ़

    उत्कृष्ट भूमि सुधार एवं एग्रीस्टैक के लिए केंद्र सरकार ने दिए ₹598 करोड़

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

    डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

    मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु

    सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।

    मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।

    सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ

    राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘सेवा सेतु’ को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय,

    सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।

    औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण

    राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।

    इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

    पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

    संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा ‘सुगम’ एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।

    राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।

    भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा

    भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।

    विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।

  • सेवा से संवर रहा मासूमों का कल, आईएमए ने 15 कुपोषित बच्चों को लिया गोद, प्रशासन के साथ मिलकर 30 बच्चों को स्वस्थ बनाने का संकल्प

    सेवा से संवर रहा मासूमों का कल, आईएमए ने 15 कुपोषित बच्चों को लिया गोद, प्रशासन के साथ मिलकर 30 बच्चों को स्वस्थ बनाने का संकल्प

    कुपोषण के खिलाफ: आईएमए और प्रशासन की जुगलबंदी से संवर रहा 30 बच्चों का बचपन

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में कुपोषण मुक्ति का संकल्प अब एक जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। मुख्यमंत्री के मंशानुरूप और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की संयुक्त पहल ने सारंगढ़ विकासखंड में उम्मीद की एक नई किरण जगाई है।

     हाल ही में आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य शिविर के माध्यम से न केवल 30 कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, बल्कि उनके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक की जिम्मेदारी भी उठाई गई है। यह कहानी शासकीय संकल्प और सामाजिक सहभागिता के उस बेहतरीन समन्वय की है, जो राज्य के लिए एक मिसाल बन रही है।

    डॉक्टर्स डे पर आईएमए का अनूठा उपहार: 15 बच्चों को लिया गोद

     अक्सर उत्सवों को औपचारिकताओं में मनाया जाता है, लेकिन आईएमए की जिला इकाई ने इस बार ‘चिकित्सक दिवस’ (Doctors’ Day) को सेवा की नई परिभाषा दी। आईएमए के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ग्राम छुहीपाली के 15 कुपोषित बच्चों को गोद लेने का संवेदनशील निर्णय लिया। इन बच्चों के संपूर्ण इलाज, आवश्यक दवाइयों और विशेष पोषण आहार का पूरा खर्च अब एसोसिएशन द्वारा वहन किया जाएगा।

     शिविर में जांच और त्वरित रेस्क्यू

     शुक्रवार को सारंगढ़ विकासखंड में आयोजित इस विशेष शिविर में ग्राम छुहीपाली के 15 बच्चों सहित कुल 30 कुपोषित बच्चों की गहन स्वास्थ्य जांच की गई। जिला चिकित्सालय की शिशु रोग विशेषज्ञ ने बच्चों का बारीकी से परीक्षण किया। जांच के दौरान जिन बच्चों में गंभीर कुपोषण (SAM) के लक्षण पाए गए, उन्हें तत्काल पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराने की सलाह दी गई, ताकि उन्हें चौबीसों घंटे चिकित्सकीय देखरेख मिल सके।

    सतत निगरानी का बना ‘एक्शन प्लान’

     यह अभियान केवल एक दिन के शिविर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए एक मुस्तैद फॉलो-अप प्लान तैयार किया गया है।स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हर सप्ताह बच्चों के वजन और शारीरिक वृद्धि (Growth Monitoring) की कड़ाई से निगरानी करेंगी। ठीक एक महीने बाद स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और आईएमए की संयुक्त टीम दोबारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी, ताकि यह देखा जा सके कि बच्चों की सेहत में कितना सुधार हुआ है। कुपोषण के खिलाफ यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जब डॉक्टर्स और प्रशासन हाथ मिला लें, तो कोई भी बच्चा अस्वस्थ नहीं रहेगा।

    टीम वर्क से मिलेगी कुपोषण को मात

     इस मानवीय पहल को जमीन पर उतारने में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO), ईएनटी विशेषज्ञ, जन औषधि केंद्र व आशा निकेतन के संचालक और एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • हर महीने की सहायता बनी महिलाओं की नई ताकत, महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त से बालोद की माताओं-बहनों को मिली राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार को मिला मजबूत सहारा

    हर महीने की सहायता बनी महिलाओं की नई ताकत, महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त से बालोद की माताओं-बहनों को मिली राहत, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार को मिला मजबूत सहारा

    महतारी वंदन योजना: बालोद जिले की महिलाओं को मिली 29वीं किस्त की सौगात

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का महिलाओं ने जताया आभार

    रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजना की 29वीं किस्त की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की। राशि प्राप्त होने के बाद बालोद जिले की लाभार्थी महिलाओं में खुशी का माहौल है। महिलाओं ने योजना को आर्थिक संबल देने वाली महत्वपूर्ण पहल बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

     बालोद जिले के विभिन्न ग्रामों की महिलाओं ने बताया कि योजना के माध्यम से प्रतिमाह मिलने वाली राशि उनके परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, घरेलू आवश्यकताओं और छोटे-छोटे स्वरोजगार संबंधी कार्यों में आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाया है।

    दवाइयों, स्कूल फीस, दैनिक खर्च में बनी मददगार

     ग्राम बघमरा की श्रीमती देवकी विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें 29वीं किस्त की राशि प्राप्त हो चुकी है। वे इस राशि का उपयोग घर के दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों की खरीद तथा सिलाई-कढ़ाई के कार्यों में करती हैं। ग्राम जगन्नाथपुर की श्रीमती जामवंती विश्वकर्मा ने कहा कि हर महीने मिलने वाली यह सहायता उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा बन गई है। वहीं ग्राम ओरमा की श्रीमती राधिका सोनवानी ने बताया कि योजना से मिलने वाली राशि से वे अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा कर पा रही हैं, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली है।

    विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन का बनी मजबूत आधार

     लाभार्थी महिलाओं ने अपने मोबाइल पर प्राप्त राशि का संदेश दिखाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और विपरीत परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए मजबूत आधार प्रदान कर रही है।

  • अब मशीन करेगी धान की रोपाई, भरदाकला में पैडी ट्रांसप्लांटर बना किसानों की नई ताकत, श्रम, समय और लागत में बड़ी बचत के साथ खेती हुई अधिक लाभकारी

    अब मशीन करेगी धान की रोपाई, भरदाकला में पैडी ट्रांसप्लांटर बना किसानों की नई ताकत, श्रम, समय और लागत में बड़ी बचत के साथ खेती हुई अधिक लाभकारी

    पैडी ट्रांसप्लांटर से भरदाकला के किसानों की आसान हुई रोपाई, किसानों को मिल रही बड़ी राहत

    बालोद के भरदाकला में आधुनिक कृषि तकनीक बनी मिसाल, कम समय में बेहतर गुणवत्ता से धान की रोपाई

    रायपुर : छत्तीसगढ़ में कृषि के आधुनिकीकरण की दिशा में किसानों का बढ़ता रुझान खेती को नई गति दे रहा है। आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से खेती अधिक वैज्ञानिक, समयबद्ध और लागत प्रभावी बन रही है। इसी कड़ी में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम भरदाकला के किसान एवं सरपंच श्री क्रांति भूषण साहू ने अपने खेतों में पैडी ट्रांसप्लांटर (धान रोपाई मशीन) का सफल उपयोग कर क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

     लगभग 35 से 40 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले श्री साहू ने इस वर्ष 10 से 12 एकड़ क्षेत्र में पैडी ट्रांसप्लांटर मशीन से धान की रोपाई कराई। उन्होंने बताया कि जहां पारंपरिक तरीके से मजदूरों के माध्यम से रोपाई करने में 20 से 25 दिन तक का समय लग जाता था, वहीं इस मशीन की सहायता से रोपाई का कार्य बहुत कम समय में सटीक और व्यवस्थित ढंग से पूरा हो गया। मशीन से पौधों की रोपाई निश्चित दूरी और सीधी कतारों में होने से फसल का विकास बेहतर होता है तथा बाद में निंदाई-गुड़ाई जैसे कृषि कार्य भी आसानी से किए जा सकते हैं।

     श्री साहू ने बताया कि कृषि सीजन में मजदूरों की कमी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे समय में पैडी ट्रांसप्लांटर जैसी आधुनिक तकनीक श्रम और समय दोनों की बचत करते हुए खेती को अधिक लाभकारी बनाती है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में ट्रे आधारित नर्सरी तैयार करने सहित कुछ अतिरिक्त लागत आती है, लेकिन बड़े रकबे की खेती के लिए यह तकनीक लंबे समय में अधिक किफायती और लाभदायक सिद्ध होती है।

     उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में श्रमिकों की उपलब्धता में कमी और समयबद्ध खेती की आवश्यकता को देखते हुए कृषि मशीनीकरण ही बेहतर विकल्प है। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में क्षेत्र के अनेक किसान भी अब पैडी ट्रांसप्लांटर तकनीक को समझने और अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे समय पर रोपाई, बेहतर फसल प्रबंधन और उत्पादन में वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।

  • गांव में विकास की नई धारा, जुंगेरा में पक्की नाली निर्माण से जलभराव, गंदगी और आवागमन की परेशानी होगी दूर, ग्रामीणों के जीवन स्तर को मिलेगा नया आधार

    गांव में विकास की नई धारा, जुंगेरा में पक्की नाली निर्माण से जलभराव, गंदगी और आवागमन की परेशानी होगी दूर, ग्रामीणों के जीवन स्तर को मिलेगा नया आधार

    विकसित भारत जी राम जी: पक्की नाली निर्माण से जुंगेरा के ग्रामीणों को मिलेगी जलभराव की समस्या से स्थायी राहत

    ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी, बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण से बढ़ेगा ग्रामीणों का जीवन स्तर

    रायपुर : ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करते हुए विकसित भारत जी राम जी के तहत प्रदेश के गांवों में विकास कार्यों को गति मिल रही है। इसी कड़ी में बालोद जिले की ग्राम पंचायत जुंगेरा में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान के लिए पक्की नाली का निर्माण कराया जा रहा है। इस कार्य के पूरा होने से बरसात के दौरान जलजमाव, गंदगी और आवागमन की परेशानी से ग्रामीणों को स्थायी राहत मिलेगी, वहीं गांव में स्वच्छता और बेहतर जल निकासी व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी।

     ग्राम पंचायत जुंगेरा की सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने बताया कि गांव में लंबे समय से कच्ची नाली होने के कारण बरसात के दिनों में पानी गलियों और घरों तक पहुंच जाता था। इससे लोगों का जनजीवन प्रभावित होने के साथ घरेलू सामानों को भी नुकसान उठाना पड़ता था। पंचायत द्वारा कई वर्षों से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे थे, जो अब साकार हो रहे हैं।

     उन्होंने कहा कि पक्की नाली के निर्माण से न केवल जल निकासी की व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि गांव में स्वच्छ वातावरण का निर्माण होगा और लोगों का जीवन भी अधिक सुविधाजनक बनेगा। ग्रामीणों में इस विकास कार्य को लेकर उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान होने से बरसात के मौसम में होने वाली परेशानियों से हमेशा के लिए राहत मिलेगी।

     सरपंच श्रीमती नीलम कोठारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी सोच और विकासोन्मुखी नीतियों के कारण आज गांवों में ऐसे स्थायी और जनहितकारी विकास कार्य तेजी से धरातल पर उतर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों के जीवन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो रहा है।

  • ‘सिर्फ पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी’—पर्यावरण संरक्षण को जनअभियान बनाने के लिए उद्योगों से मंत्री ओ.पी. चौधरी की बड़ी अपील

    ‘सिर्फ पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी’—पर्यावरण संरक्षण को जनअभियान बनाने के लिए उद्योगों से मंत्री ओ.पी. चौधरी की बड़ी अपील

    उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी: आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी

    केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी : मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी

    स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी

    31 जुलाई तक वृक्षारोपण लक्ष्य पूरा करने और 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण पर जोर

    हर उद्योग में 33 प्रतिशत ग्रीन बेल्ट, प्रति हेक्टेयर 2,500 पौधे तथा देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने के निर्देश

    रायपुर : राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।

    बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

    मंत्री श्री चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।

    उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

    मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को “पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध (Sendh) लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक “बर्ड आइलैंड” (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।

    आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष श्री अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।

    सचिव श्री आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।

    छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।

    उन्होंने सभी उद्योगों को ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता का वास्तविक पैमाना लगाए गए पौधों की संख्या नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और जीवित रहना है।

    बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट एवं डायरेक्टर स्तर के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

  • स्कूल की स्वास्थ्य जांच ने बचाई 10 वर्षीय त्रिशांत की जिंदगी, आरबीएसके और ‘चिरायु’ योजना से हुआ निःशुल्क सफल हृदय ऑपरेशन, परिवार की लौटी मुस्कान

    स्कूल की स्वास्थ्य जांच ने बचाई 10 वर्षीय त्रिशांत की जिंदगी, आरबीएसके और ‘चिरायु’ योजना से हुआ निःशुल्क सफल हृदय ऑपरेशन, परिवार की लौटी मुस्कान

    चिरायु’ की सतर्कता से थमी नहीं त्रिशांत के दिल की धड़कन; आरबीएसके ने मासूम को दिया नया जीवन

     धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन

    लाडले को स्वस्थ देख परिजनों की आंखों में छलके खुशी के आंसू

    रायपुर : कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित ‘चिरायु योजना’ धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का दर्द झेलने से भी बचा लिया।

    स्कूल में जांच के दौरान खुली बीमारी की परत

     धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला छात्र त्रिशांत रोज की तरह स्कूल जाता था। माता-पिता को अंदाजा भी नहीं था कि उनके लाडले के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease – CHD) पनप रहा है। तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में असमानता महसूस की। टीम ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।

    जिला अस्पताल से रायपुर तक त्वरित एक्शन

     चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात समस्या है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।

     मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को इतनी तेजी से पूरा किया कि बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।

    पहचान से लेकर घर वापसी तक

     इस पूरी सफलता की कहानी को चिरायु टीम ने इन पांच चरणों में अमलीजामा पहनाया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ‘चिरायु टीम’ की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इसकी शुरुआत समय पर पहचान से होती है, जहाँ टीम के डॉक्टर स्कूलों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों के दौरान बच्चों के भीतर छिपे शुरुआती लक्षणों को पूरी सतर्कता से पकड़ते हैं। बीमारी की आशंका होते ही टीम त्वरित परामर्श का मोर्चा संभालती है और परिजनों को बिना डराए, बेहद आत्मीयता के साथ बीमारी की गंभीरता समझाकर उन्हें आगे के इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करती है।

     परिजनों की सहमति मिलते ही शुरू होता है निःशुल्क रैफरल का सिलसिला, जिसके तहत धमतरी से लेकर रायपुर तक के इलाज की पूरी रूपरेखा तैयार की जाती है और तमाम कागजी औपचारिकताओं का पूरा जिम्मा चिरायु टीम खुद उठाती है, ताकि गरीब परिवार पर कोई बोझ न पड़े। इसी तत्परता का सुखद परिणाम 8 जुलाई 2026 को सफल सर्जरी के रूप में सामने आया, जब रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा मासूम का पूर्णतः निःशुल्क और कामयाब हार्ट ऑपरेशन किया गया। चिरायु का यह मिशन अस्पताल तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि ऑपरेशन के बाद सतत फॉलो-अप के जरिए डिस्चार्ज के बाद भी बच्चे की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की जाती है और उसके पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक सेहत की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है।”

    लाखों का इलाज मुफ़्त हुआ, सरकार ने बचा ली हमारे घर की खुशियां

     त्रिशांत के माता-पिता भावुक होकर बताते हैं कि हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता। हम मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग को कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।

    सिर्फ जांच नहीं, स्वस्थ भविष्य की गारंटी है ‘आरबीएसके’

     धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जीवंत उदाहरण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या जांच तक सीमित नहीं हैं। यह कार्यक्रम बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों की पहचान करने से लेकर उनके पूर्णतः ठीक होने तक एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की मजबूत बुनियाद रख रहा है।

  • तकनीकी बाधाएं बनीं अवसर, प्रशासन की त्वरित पहल से एग्रीस्टेक पंजीयन हुआ आसान, नारायणपुर के किसानों को समय पर मिला खाद-बीज और नई उम्मीद

    तकनीकी बाधाएं बनीं अवसर, प्रशासन की त्वरित पहल से एग्रीस्टेक पंजीयन हुआ आसान, नारायणपुर के किसानों को समय पर मिला खाद-बीज और नई उम्मीद

    डिजिटल क्रांति से बदली नारायणपुर के किसानों की तकदीर: एग्रीस्टेक पंजीयन ने दूर की खाद-बीज की चिंता

    रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन की डिजिटल पहल ‘एग्रीस्टेक किसान पंजीयन’ बस्तर अंचल के किसानों के लिए खेती-किसानी को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। शुरुआत में तकनीकी दिक्कतों के कारण कुछ किसानों को पंजीयन में परेशानी जरूर हुई, लेकिन नारायणपुर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की तत्परता ने इस चुनौती को एक मिसाल में बदल दिया। प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण अब अंदरूनी क्षेत्रों के किसान बिना किसी बाधा के समय पर खाद-बीज और अन्य कृषि सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।

    चिंता के बादल छंटे, समय पर मिला खाद-बीज

     ग्राम कुकड़ाझोर के निवासी किसान बीरसिंह पिता माहरू के लिए इस साल का खरीफ सीजन शुरुआत में चिंताओं भरा था। तकनीकी कारणों से उनका एग्रीस्टेक पंजीयन नहीं हो पा रहा था, जिसकी वजह से उन्हें सहकारी समिति से खाद और बीज मिलने में दिक्कत आ रही थी। खेती का समय निकला जा रहा था और बीरसिंह लगातार प्रयासों के बाद भी तकनीकी त्रुटि के कारण पंजीयन नहीं करा पा रहे थे।परेशान होकर बीरसिंह ने नारायणपुर तहसील कार्यालय का दरवाजा खटखटाया।अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराकर त्रुटियों को दूर किया। कुछ ही समय में बीरसिंह का पंजीयन सफलतापूर्वक पूर्ण हो गया। श्री बीरसिंह ने कहा कि अगर प्रशासन समय पर मेरी मदद नहीं करता, तो इस साल मेरी पूरी खेती पिछड़ जाती। अधिकारियों की त्वरित पहल से मेरी चिंता दूर हो गई और अब मुझे समय पर खाद-बीज मिल गया है।

    वीरू और सगराम की भी दूर हुई परेशानी

     यह राहत केवल बीरसिंह तक सीमित नहीं रही। डिजिटल पंजीयन की इस सुलभता का लाभ जिले के अन्य किसानों को भी मिला। ग्राम बोरण्ड के किसान वीरू भी इसी तरह की तकनीकी समस्या से जूझ रहे थे, जिसका प्रशासन ने त्वरित निराकरण किया। इसी तरह ग्राम कोचवाही के किसान सगराम पोटाई का पंजीयन भी प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराया गया, जिससे उन्हें समय पर कृषि इनपुट (खाद-बीज) मिल सका।

    प्रशासनिक तालमेल और संवेदनशीलता की मिसाल

     एग्रीस्टेक जैसी आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को खत्म करना और सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाना है। नारायणपुर जिले में तकनीकी समस्याओं का जिस तेजी से समाधान किया गया, वह यह साबित करता है कि यदि प्रशासन और किसानों के बीच बेहतर समन्वय हो, तो सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ जमीनी स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।

     प्रशासन की इस मुस्तैदी से न केवल नारायणपुर के किसानों का डिजिटल प्रणालियों पर भरोसा बढ़ा है, बल्कि बस्तर में खेती को अधिक सशक्त, सरल और लाभकारी बनाने का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है।