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  • जन्मजात होंठ की विकृति से मिली नई जिंदगी: जिला अस्पताल बीजापुर में सफल सर्जरी के बाद भीमे हेमला के चेहरे पर लौटी मुस्कान

    जन्मजात होंठ की विकृति से मिली नई जिंदगी: जिला अस्पताल बीजापुर में सफल सर्जरी के बाद भीमे हेमला के चेहरे पर लौटी मुस्कान

    सफल सर्जरी से भीमे हेमला के चेहरे पर लौटी मुस्कान

    जन्मजात होंठ की विकृति का हुआ सफल उपचार, अब सामान्य जीवन जी रही हैं 22 वर्षीय युवती

    रायपुर : होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) एक आम समस्या है, जिसमें बच्चे के ऊपरी होंठ या तालू के ऊतक गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं। यह दरार केवल होंठ पर हो सकती है या नाक तक जा सकती है। सर्जरी द्वारा इसे 90ः से 100ः तक ठीक किया जा सकता है।

     बीजापुर जिले के दूरस्थ बासागुड़ा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय भीमे हेमला जन्म से होंठ की जन्मजात विकृति (क्लेफ्ट लिप) से पीड़ित थीं। इस कारण उन्हें भोजन करने, निगलने और स्पष्ट रूप से बोलने में काफी परेशानी होती थी। यह समस्या उनके आत्मविश्वास और दैनिक जीवन को भी प्रभावित करती थी।

     उपचार के लिए भीमे हेमला ने जिला अस्पताल बीजापुर में संपर्क किया। यहां कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विशेषज्ञ डॉ. विभू तिवारी के नेतृत्व में स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत उनकी सफल सर्जरी की गई। ऑपरेशन थिएटर के चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों के समन्वित प्रयास से यह जटिल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक पूरी हुई।

     सर्जरी के बाद भीमे हेमला के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब उन्हें बोलने, निगलने और सामान्य रूप से भोजन करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती। सफल उपचार से उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है और वे अब सामान्य एवं सम्मानजनक जीवन जीने की ओर आगे बढ़ रही हैं।

     जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर श्री विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री नम्रता चौबे के सहयोग से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी.आर. पुजारी और सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के नेतृत्व में जिला अस्पताल बीजापुर में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसका लाभ अब दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही जिले में मिल रहा है।

     जिला अस्पताल बीजापुर में इस तरह की जटिल सर्जरी का सफल होना जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती क्षमता और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सुविधाओं का प्रमाण है। इससे मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता कम हो रही है और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो रहा है।

    हितग्राही की प्रतिक्रिया

     भीमे हेमला, बासागुड़ा निवासी ने बताया कि वो जन्म से इस समस्या से परेशान थी। जिला अस्पताल बीजापुर में मेरा सफल इलाज हुआ। अब मैं आसानी से बोल सकता हूं और खाना खा सकती हूं। मेरे चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है। इसके लिए मैं छत्तीसगढ सरकार एवं डॉ. विभू तिवारी, जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्य कर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।

  • ऑयल पाम के साथ मूंगफली की खेती ने बदली किसान की तकदीर: सिर्फ ₹30 हजार की लागत में हुआ ₹70 हजार का शुद्ध मुनाफा

    ऑयल पाम के साथ मूंगफली की खेती ने बदली किसान की तकदीर: सिर्फ ₹30 हजार की लागत में हुआ ₹70 हजार का शुद्ध मुनाफा

    ऑयल पाम के साथ मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती से चमकी किसान की किस्मत

    कमाया 70 हजार रूपए का अतिरिक्त लाभ

    रायपुर : देश और राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों के बीच श्राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजनाश् छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। बीजापुर जिले के भोपालपटनम विकासखंड के ग्राम कचनूर से एक बेहद प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है, जहाँ एक किसान ने सूझबूझ दिखाते हुए ऑयल पाम के साथ मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती (प्दजमतबतवचचपदह) अपनाकर शानदार अतिरिक्त लाभ कमाया है।

    खाली पड़ी जमीन का किया सटीक सदुपयोग

     ग्राम कचनूर के प्रगतिशील किसान श्री पोटाम गणेश ने अपनी 2.20 हेक्टेयर कृषि भूमि पर ऑयल पाम के पौधे लगाए हैं। चूँकि ऑयल पाम के पौधों को पूरी तरह विकसित होकर फल देने में कुछ वर्षों का समय लगता है, तब तक पौधों के बीच की जमीन खाली रहती है। इस खाली भूमि का सही उपयोग करने के लिए उन्होंने उद्यानिकी विभाग की सलाह पर बीच में मूंगफली की अंतरवर्तीय खेती करने का स्मार्ट फैसला लिया।

    30 हजार रूपए की लागत में 70 हजार रूपए का शुद्ध मुनाफा

     पोटाम गणेश का यह निर्णय आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हुआ। मूंगफली की इस अंतरवर्तीय फसल से उन्हें जो परिणाम मिला उससे वह उत्साहित है। कुल उत्पादन मूल्य लगभग एक लाख रुपए मिला किन्तु खेती में लागत मात्र 30 हजार रुपये लगा और शुद्ध मुनाफा 70 हजार रुपये मिला।

    शुरुआती वर्षों में किसानों को संबल देती है यह तकनीक

     अपनी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हितग्राही पोटाम गणेश ने कहा, ऑयल पाम के शुरुआती वर्षों में जब तक मुख्य फसल तैयार नहीं होती, तब तक अंतरवर्तीय फसल लेने से हमारी नियमित आय बनी रहती है। इससे खेती की लागत निकालना बहुत आसान हो जाता है और आर्थिक मजबूती मिलती है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य साथी किसानों से भी अपील की है कि वे इस आधुनिक खेती पद्धति को अपनाएं।

    राष्ट्रीय मिशन से मिल रहा है तकनीकी मार्गदर्शन

     उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयलदृऑयल पाम योजना के अंतर्गत जिला स्तर पर किसानों को लगातार तकनीकी मार्गदर्शन, आवश्यक सहयोग और उन्नत खेती के तौर-तरीकों की जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना न केवल किसानों की व्यक्तिगत आय को बढ़ा रही है, बल्कि खाद्य तेलों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

  • ऑपरेशन शंखनाद में जशपुर पुलिस की बड़ी सफलता : फरार वाहन स्वामी गिरफ्तार, जनवरी से अब तक 852 गौ-वंश मुक्त, 66 आरोपी गिरफ्तार, जशपुर पुलिस का गौ तस्करों के खिलाफ बड़ा अभियान जारी.

    ऑपरेशन शंखनाद में जशपुर पुलिस की बड़ी सफलता : फरार वाहन स्वामी गिरफ्तार, जनवरी से अब तक 852 गौ-वंश मुक्त, 66 आरोपी गिरफ्तार, जशपुर पुलिस का गौ तस्करों के खिलाफ बड़ा अभियान जारी.

    जशपुर पुलिस द्वारा गौ-वंश तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत निरंतर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में जिले भर में गौ तस्करी में संलिप्त अपराधियों, वाहन मालिकों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध सतत अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में थाना लोदाम क्षेत्र में गौ-वंश तस्करी के एक प्रकरण में घटना के बाद से फरार चल रहे तस्करी में प्रयुक्त बोलेरो पिक-अप वाहन के स्वामी मो. इम्तियाज (उम्र 40 वर्ष) को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

    जशपुर पुलिस गौ-वंश तस्करी जैसे अपराधों को लेकर अत्यंत संवेदनशील है। डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन में संचालित ऑपरेशन शंखनाद के अंतर्गत जनवरी 2026 से अब तक 852 गौ-वंशों को तस्करों के चंगुल से सकुशल मुक्त कराया गया है। इस दौरान 71 प्रकरणों में 66 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है तथा तस्करी में प्रयुक्त 26 वाहनों को जब्त किया गया है। पुलिस द्वारा गौ तस्करी में संलिप्त प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध साक्ष्य के आधार पर लगातार वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

    दिनांक 14 अप्रैल 2026 को थाना लोदाम पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि ग्राम भलमंडा स्थित नेशनल हाईवे से एक बोलेरो पिक-अप वाहन क्रमांक JH-01-FP-3193 में गौ-वंशों को अवैध रूप से तस्करी हेतु ले जाया जा रहा है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने वाहन को घेर लिया। पुलिस को देखकर तस्कर मौके से फरार हो गए, जबकि वाहन से 09 नग गौ-वंशों को सकुशल मुक्त कराया गया।

    घटना के संबंध में थाना लोदाम में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई। जांच के दौरान जब्त पिक-अप वाहन के आधार पर उसके स्वामी मो. इम्तियाज की पहचान की गई, जो घटना के दिन से ही लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही थी तथा मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय रखा गया था।

    इसी दौरान दिनांक 10 जुलाई 2026 को पुलिस को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि फरार आरोपी जशपुर क्षेत्र में घूम रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया। पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

    डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह के नेतृत्व में जशपुर पुलिस ने 01 जुलाई 2026 से 10 जुलाई 2026 के बीच गौ तस्करी के चार अलग-अलग प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 57 नग गौ-वंशों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया तथा 05 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

    01 जुलाई 2026 को थाना बागबहार क्षेत्र में गौ-वंश वध के मामले में 04 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

    03 जुलाई 2026 को चौकी दोकड़ा क्षेत्र में 10 नग मवेशियों को तस्करों से मुक्त कराते हुए पैदल हांक कर ले जा रहे 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मामले के मास्टरमाइंड की पहचान कर ली गई है तथा उसकी तलाश जारी है।

    04 जुलाई 2026 को चौकी मनोरा क्षेत्र के डहुकोना जंगल से 26 नग गौ-वंशों को सकुशल मुक्त कराया गया तथा 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

    08 जुलाई 2026 को चौकी मनोरा क्षेत्र के ग्राम डडगांव में 21 नग गौ-वंशों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया। इस दौरान आरोपी जंगल का लाभ उठाकर फरार हो गए, जिनकी तलाश लगातार जारी है।

  • बंदूक से बिजनेस तक: सुकमा के 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण से चुनी आत्मनिर्भरता की राह

    बंदूक से बिजनेस तक: सुकमा के 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण से चुनी आत्मनिर्भरता की राह

    सुकमा में मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण बना आत्मनिर्भरता की नई राह

    25 आत्मसमर्पित युवाओं को मिला स्वरोजगार

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में राज्य सरकार की पुनर्वास और कौशल विकास नीति के तहत एक सराहनीय पहल की गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आत्मसमर्पित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा में मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

    15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम संपन्न

     कृषि विज्ञान केंद्र सुकमा और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस 15 दिवसीय कौशल विकास कार्यक्रम में 25 आत्मसमर्पित युवाओं ने हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इन युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें समाज में एक सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।

    विशेषज्ञों ने सिखाए वैज्ञानिक खेती के गुर

     प्रशिक्षण के दौरान कृषि विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) कराया गया। युवाओं को बेहद सरल तरीके से तकनीकी जानकारियां दी गईं, जिसके तहत धान के पुआल (पैरा) की तैयारी और उपचार रकने के बाद मशरूम के स्पॉन (बीज) का सही उपयोग कर पॉलीबैग तैयार करना और नमी का संतुलन बनाए रखना, फसल की वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई, पैकेजिंग और स्थानीय बाजार में उसकी बिक्री करना शामिल था ।

    कम लागत और कम समय में अधिक मुनाफा

     कृषि विशेषज्ञों ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि मशरूम उत्पादन एक ऐसा लाभकारी व्यवसाय है जिसे बहुत कम लागत, कम जगह और बेहद कम समय में शुरू किया जा सकता है। विशेषकर ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से इसे अपनाकर युवा हर महीने एक नियमित और अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।

    बाजार में बढ़ती मांग और सेहत के लिए फायदेमंद

     प्रशिक्षण में मशरूम के पोषक तत्वों की जानकारी देते हुए बताया गया कि यह एक अत्यंत पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी तथा कई आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कम वसा (लो फैट) और कम कैलोरी होने के कारण आज के समय में बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्वरोजगार का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहा है।

     इस पहल से न केवल आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि वे एक नए आत्मविश्वास के साथ समाज की मुख्यधारा में अपना जीवन बिता सकेंगे।

  • 46,840 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात: खातों में पहुंचने लगे ₹17.43 करोड़ बोनस, ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

    46,840 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात: खातों में पहुंचने लगे ₹17.43 करोड़ बोनस, ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

    तेन्दूपत्ता संग्राहकों के खातों में पहुंचने लगी बोनस राशि

    धरमजयगढ़ जिला यूनियन के 46 हजार 840 संग्राहकों को मिलेंगे 17.43 करोड़ रुपये बोनस राशि

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) का वितरण शुरू हो गया है। राज्य स्तरीय सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत धरमजयगढ़ जिला वनोपज सहकारी यूनियन के संग्राहकों के बैंक खातों में 17 करोड़ 43 लाख रुपये ऑनलाइन अंतरित किए जा रहे हैं।

    58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस

     वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक, जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित धरमजयगढ़ ने बताया कि जिला यूनियन की 58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों में बोनस वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2023 के संग्रहण सीजन में जिला यूनियन की 59 समितियों के माध्यम से 70,945.485 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया था। इसके लिए 46,840 संग्राहकों को कुल 17.43 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया जा रहा है।

    जिला यूनियन की प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति बोरो को सबसे अधिक 4,710.58 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से बोनस मिला है। इसके बाद प्राथमिक समिति रायमेर को 4,616.76 रुपये प्रति मानक बोरा का प्रोत्साहन पारिश्रमिक प्राप्त हुआ है।

    ऑनलाइन भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता

     वन विभाग द्वारा बोनस राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में ऑनलाइन भेजी जा रही है। इससे भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और आसान बनी है तथा संग्राहकों को समय पर राशि मिल रही है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों ने बताया कि इस बोनस राशि से वे खेती-किसानी, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकेंगे। समय पर मिली आर्थिक सहायता से न केवल संग्राहकों को राहत मिली है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

  • डिजिटल सुशासन की मिसाल: सेवा सेतु से आसान हुआ विवाह पंजीयन, अंकिता ओयम को समय पर मिला प्रमाण-पत्र

    डिजिटल सुशासन की मिसाल: सेवा सेतु से आसान हुआ विवाह पंजीयन, अंकिता ओयम को समय पर मिला प्रमाण-पत्र

    डिजिटल सुशासन पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी

    सेवा सेतु से आसान हुआ विवाह पंजीयन, अंकिता ओयम को समय पर मिला प्रमाण-पत्र

    रायपुर :  शासन की महत्वाकांक्षी श्सेवा सेतुश् पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन की मजबूत मिसाल बन रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से लोगों को अब शासकीय सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। आय, जाति, निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक प्रमाण-पत्र अब सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रहे हैं।

    डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया होने के कारण अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी

     बीजापुर जिले के ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर की निवासी अंकिता ओयम को भी सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से समय पर विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र प्राप्त हुआ। उन्होंने तहसील कार्यालय उसूर स्थित सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन किया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका शीघ्र निराकरण किया गया और उन्हें समय पर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया। प्रमाण-पत्र का वितरण सेवा सेतु केन्द्र की मैनेजर श्रीमती मंजुलता दुर्गम एवं श्री शंकर मोडियम द्वारा किया गया। पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी होने के कारण अंकिता को किसी प्रकार की अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ी।

    सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधाजनक

     अंकिता बताती हैं कि पहले विवाह पंजीयन जैसे कार्यों के लिए कई बार अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। लेकिन सेवा सेतु केन्द्र में आवेदन करना आसान रहा और निर्धारित समय के भीतर उन्हें प्रमाण-पत्र मिल गया। इससे उनके जरूरी कार्य भी बिना किसी परेशानी के पूरे हो सके। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र ग्रामीण लोगों के लिए बेहद उपयोगी सुविधा है। इससे शासकीय सेवाएं घर के नजदीक, पारदर्शी और समय पर मिल रही हैं, जिससे लोगों का शासन-प्रशासन पर भरोसा भी बढ़ा है।

    डिजिटल प्रशासन को मजबूत और पारदर्शी बनाने प्रभावी

     राज्य शासन द्वारा संचालित सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से आय, जाति, स्थानीय निवास, विवाह पंजीयन सहित अनेक शासकीय सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिकों को सरल, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है।

    हितग्राही की प्रतिक्रिया

     अंकिता ओयम, ग्राम भुसापुर, तहसील उसूर निवासी ने बताया कि सेवा सेतु केन्द्र में विवाह पंजीयन की पूरी प्रक्रिया बहुत आसान रही। मुझे समय पर प्रमाण-पत्र मिल गया, जिससे मेरे सभी जरूरी काम बिना किसी परेशानी के पूरे हो गए। इसके लिए मैं शासन-प्रशासन और सेवा सेतु केन्द्र की पूरी टीम का हृदय से धन्यवाद देती हूँ।

  • रायगढ़ हाई अलर्ट पर : बाढ़ के खतरे के बीच 24 घंटे हेल्पलाइन, मानसून संकट से निपटने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड में, राहत शिविर और बचाव दल पूरी तरह तैयार, कलेक्टर-एसएसपी का बड़ा एक्शन, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई.

    रायगढ़ हाई अलर्ट पर : बाढ़ के खतरे के बीच 24 घंटे हेल्पलाइन, मानसून संकट से निपटने के लिए प्रशासन अलर्ट मोड में, राहत शिविर और बचाव दल पूरी तरह तैयार, कलेक्टर-एसएसपी का बड़ा एक्शन, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई.

    सक्रिय मानसून के दौरान संभावित बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने, राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा मौसमी एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री मयंक चतुर्वेदी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने आज एसपी कार्यालय में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में नगर निगम, नगर पालिका, राजस्व, स्वास्थ्य, जल संसाधन, विद्युत, पुलिस, नगर सेना सहित सभी संबंधित विभागों की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए व्यापक कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

    बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिजीत बबन पठारे, सीएसपी श्री मयंक मिश्रा, सहायक कलेक्टर श्री गोकुल आर.के, नगर निगम आयुक्त श्री बृजेश सिंह क्षत्रिय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.अनिल कुमार जगत, जल संसाधन विभाग, विद्युत विभाग, नगर सेना, राजस्व विभाग, तहसीलदार तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

    कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि मानसून के दौरान जन-धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभाग पूरी सतर्कता, आपसी समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई की कार्ययोजना के साथ कार्य करें। किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में विलंब या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारियों का पूर्व निर्धारण कर मैदानी स्तर पर पूरी तैयारी सुनिश्चित करे। बैठक में नगर निगम, नगर पालिकाओं से लेकर बाढ़ प्रभावित गांवों एवं जलभराव वाले क्षेत्रों तक की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां पूर्व तैयारी सुनिश्चित करने तथा संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। हीराकुंड बांध के जलभराव से प्रभावित चिन्हित 17 गांवों में विशेष मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए। इन गांवों में जलस्तर की निरंतर निगरानी, समय पर सूचना प्रसारित करने तथा आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की पूरी कार्ययोजना तैयार रखने को कहा गया।

    रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में मानसून के दौरान त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए 48 वार्डों के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा निगम के चारों जोन के लिए विशेष प्रभारी बनाए जाने के निर्देश दिए गए। बैठक में आयुक्त नगर निगम ने भी नगर निगम की तैयारियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि जल निकासी व्यवस्था, नालों की नियमित साफ-सफाई, जलभराव वाले चिन्हित स्थलों पर त्वरित कार्रवाई, पंपों की उपलब्धता, आपातकालीन टीमों की तैनाती तथा राहत एवं बचाव से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। साथ ही निगम क्षेत्र के सभी 48 वार्डों में सतत निगरानी एवं त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था भी बनाई जा रही है।

    कलेक्टर ने मौसमी एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। विशेष रूप से रायगढ़ शहर के वार्ड क्रमांक 17, 19 एवं 20 में डेंगू की रोकथाम एवं जनजागरूकता के लिए विशेष अभियान संचालित करने को कहा गया। इन वार्डों में स्थानीय पार्षदों के माध्यम से व्यापक स्वच्छता एवं जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने जिले के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में आवश्यक जेनरिक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध रखने के सख्त निर्देश दिए। आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि रोकने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। विशेष रूप से जिले के पहाड़ी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

    बैठक में कुनकुनी सड़क मार्ग के जलभराव वाले हिस्से को शीघ्र सुगम बनाने के निर्देश दिए गए। वहीं लैलूंगा विकासखंड के राजपुर पहुंच मार्ग की स्थिति पर भी विशेष चर्चा करते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बरसात के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने तथा विद्युत दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए विद्युत विभाग को पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में जिले में उपलब्ध नाव, मोटरबोट, लाइफ जैकेट, रस्सी, राहत सामग्री एवं अन्य संसाधनों की विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने संभावित बाढ़ एवं जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत शिविरों के लिए स्थानीय सामुदायिक भवनों सहित उपयुक्त भवनों को पहले से चिन्हित करने तथा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी आवश्यक सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। जिले में बाढ़ एवं प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आम नागरिकों की सहायता के लिए जिला बाढ़ नियंत्रण हेल्पलाइन 07762-223750 को 24 घंटे संचालित रखने तथा कर्मचारियों की चौबीसों घंटे ड्यूटी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने सभी थाना प्रभारियों को मानसून के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त, त्वरित पुलिस सहायता तथा प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे। बैठक में शहर की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। प्रमुख स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के रखरखाव, उनकी कार्यशीलता तथा आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त कैमरे लगाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

    रायगढ़ शहर के मध्य स्थित रेलवे अंडरब्रिज (गंधरी पुलिया) को सुरक्षा की दृष्टि से रेलवे प्रशासन द्वारा आवागमन के लिए बंद कर दिया गया है। नगर निगम प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि मानसून के दौरान इस मार्ग पर अनावश्यक आवागमन न करें तथा वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें। प्रशासन ने कहा है कि जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है, जिसका पालन करना सभी नागरिकों के हित में आवश्यक है।

  • अब राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी प्रतिभा को पहचान: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए आवेदन शुरू, 5 से 18 वर्ष के बच्चों से मांगे गए नामांकन

    अब राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी प्रतिभा को पहचान: प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए आवेदन शुरू, 5 से 18 वर्ष के बच्चों से मांगे गए नामांकन

    प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए आवेदन शुरू, प्रतिभाशाली बच्चों से 31 जुलाई तक मांगे गए नामांकन

    रायपुर : देश के बच्चों की असाधारण प्रतिभा और अद्वितीय उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 के लिए नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 तय की गई है।

    राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है सम्मानित

     यह भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक बेहद प्रतिष्ठित पुरस्कार है, जो प्रतिवर्ष देश के राष्ट्रपति द्वारा उन बच्चों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा के दम पर देश का गौरव बढ़ाया है।

    पात्रता और पुरस्कार की श्रेणियां

     इस पुरस्कार के लिए 5 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे आवेदन करने के पात्र हैं। बच्चों को उनके द्वारा निम्नलिखित क्षेत्रों में किए गए असाधारण कार्यों के लिए नामांकित किया जा सकता है। वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, खेल, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिष्ठित पुरस्कार किया जाएगा।

    स्व-नामांकन की भी सुविधा, केवल ऑनलाइन स्वीकार होंगे आवेदन

     प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए इच्छुक बच्चे खुद भी अपना नामांकन कर सकते हैं। इसके अलावा अभिभावक, विभिन्न शैक्षणिक व सामाजिक संस्थाएं या कोई भी अन्य व्यक्ति योग्य बच्चों का नामांकन दर्ज करा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक आवेदक विस्तृत जानकारी और ऑनलाइन फॉर्म भरने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल

    https://awards.gov.in/पर विजिट किया जा सकता है।

    राज्य शासन ने की अधिक से अधिक आवेदन की अपील

     छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने प्रदेश के सभी जिलों के प्रतिभाशाली बच्चों, उनके माता-पिता और शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इन पुरस्कारों के लिए आवेदन करें। इससे राज्य के होनहार बच्चों की छुपी हुई प्रतिभा और उपलब्धियों को राष्ट्रीय मंच पर एक नई पहचान मिल सकेगी।

  • श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों का सपना होगा साकार: अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में मुफ्त पढ़ाई, हॉस्टल और भोजन की सुविधा, आवेदन की अंतिम तिथि 12 जुलाई

    श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों का सपना होगा साकार: अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में मुफ्त पढ़ाई, हॉस्टल और भोजन की सुविधा, आवेदन की अंतिम तिथि 12 जुलाई

    पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना

    मेधावी श्रमिक बच्चों को मिलेगी निःशुल्क आवासीय शिक्षा

    ऑनलाइन आवेदन 12 जुलाई तक

    रायपुर : छत्तीसगढ़ के श्रम विभाग द्वारा संचालित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के होनहार बच्चों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। योजना के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाले मेधावी एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रदेश के उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में पूर्णतः निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

    इन माध्यमों से कर सकते हैं आवेदन

     श्रम विभाग के ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप एवं आधिकारिक वेब पोर्टल द्वारा पात्र विद्यार्थी और उनके अभिभावक निम्नलिखित माध्यमों से आसानी से आवेदन जमा कर सकते हैं। अपने निकटतम विकासखंड की जनपद पंचायत में स्थित श्रम संसाधन केंद्र में जाकर या नजदीकी चॉइस सेंटर के माध्यम से, जिला कार्यालय के श्रम पदाधिकारी के पास जाकर आवेदन जमा कर सकते हैं।

    आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

     आवेदन करते समय विद्यार्थियों को निम्नलिखित दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न करना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार श्रमिक पंजीयन कार्ड (लेबर कार्ड), छात्र-छात्रा का मूल निवास प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा। आधार कार्ड (नियमों के तहत सुरक्षित रूप से आवश्यक), कक्षा 5वीं की उत्तीर्ण अंकसूची (मार्क्सशीट), वर्तमान कक्षा में अध्ययनरत होने का प्रमाण-पत्र संलग्न करना होगा।

    योजना की प्रमुख शर्तें और पात्रता

     योजना का लाभ केवल उन पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को मिलेगा, जिनका श्रमिक पंजीयन आवेदन की तिथि से कम से कम एक वर्ष पूर्व का हो। यह लाभ श्रमिक परिवार की प्रथम दो संतानों को ही देय होगा। विद्यार्थी का शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश लेना अनिवार्य है।

    चयन के बाद मिलेंगी ये विश्वस्तरीय सुविधाएं

     प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच करने के बाद छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित छात्र-छात्राओं को कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक की पूरी पढ़ाई निःशुल्क कराई जाएगी। इसके साथ ही उन्हें उत्कृष्ट विद्यालयों में मुफ्त आवास (हॉस्टल), पौष्टिक भोजन तथा अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि श्रमिक परिवारों के बच्चों को एक बेहतर और प्रतिस्पर्धी शैक्षणिक माहौल मिल सके।

  • डिजिटल पहल का बड़ा असर: ‘सेवा सेतु’ से सिर्फ 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्र, छात्रा का समय पर हुआ कॉलेज प्रवेश

    डिजिटल पहल का बड़ा असर: ‘सेवा सेतु’ से सिर्फ 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्र, छात्रा का समय पर हुआ कॉलेज प्रवेश

    डिजिटल पहल का कमाल : ‘सेवा सेतु’ केंद्र से 24 घंटे में मिला आय प्रमाण पत्र, समय पर हुआ छात्रा का कॉलेज प्रवेश

    रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य शासन की डिजिटल पहल ‘सेवा सेतु पोर्टल’ आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह पोर्टल शासकीय सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले से एक सुखद मामला सामने आया है, जहां सेवा सेतु केंद्र की तत्परता से मात्र 24 घंटे के भीतर एक छात्रा का आय प्रमाण पत्र बन गया और उसका कॉलेज में प्रवेश सुनिश्चित हो सका।

    अंतिम तिथि पास होने से चिंतित था परिवार

     राजनांदगांव जिले के विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम आयबांधा निवासी श्री तोरण लाल अपनी पुत्री निकिता के उच्च शिक्षा (कॉलेज) में प्रवेश को लेकर काफी चिंतित थे। कॉलेज में दाखिले के लिए आय प्रमाण पत्र अनिवार्य था और प्रवेश की अंतिम तिथि बेहद नजदीक आ चुकी थी। समय पर प्रमाण पत्र न मिलने की आशंका से पूरा परिवार परेशान था।

    ऑनलाइन आवेदन के बाद 24 घंटे में समाधान

     इसी दौरान तोरण लाल को डोंगरगांव में स्थित ‘सेवा सेतु केंद्र’ की जानकारी मिली। वे तुरंत आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्र पहुंचे। केंद्र संचालक ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और 22 जून 2026 को उनका ऑनलाइन आवेदन दर्ज किया। डिजिटल प्रक्रिया के त्वरित निराकरण (Fast-track Processing) के चलते मात्र 24 घंटे के भीतर ही आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके चलते निकिता का कॉलेज में प्रवेश बिना किसी बाधा के समय-सीमा के भीतर हो गया।

    समय और धन दोनों की हो रही बचत

     अपनी खुशी साझा करते हुए हितग्राही तोरण लाल ने कहा, “पहले शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए विभिन्न दफ्तरों के कई चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था। लेकिन सेवा सेतु केंद्र की डिजिटल व्यवस्था से हमारा काम बेहद सरल और कम समय में हो गया। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से मेरी बेटी का भविष्य सुरक्षित हुआ है।”

    घर बैठे मिल रहीं 400 से अधिक सेवाएं

     ‘सेवा सेतु पोर्टल’ के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे या अपने नजदीकी केंद्रों पर जाकर जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधी सेवाएं, राशन कार्ड और पेंशन सहित 400 से अधिक शासकीय सेवाओं का लाभ आसानी से उठा रहे हैं। यह व्यवस्था आम जनता को समयबद्ध सेवाएं देने के साथ-साथ उनके समय और धन की बड़ी बचत कर रही है, जिसके लिए नागरिकों ने राज्य सरकार की इस डिजिटल पहल के प्रति आभार व्यक्त किया है।