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  • विशेष लेख : हरेली तिहार में दिखेगा छत्तीसगढ़ का असली रंग! खेत-खलिहान से लेकर गेड़ी और लोक खेलों तक, सदियों पुरानी परंपराओं का होगा भव्य उत्सव

    विशेष लेख : हरेली तिहार में दिखेगा छत्तीसगढ़ का असली रंग! खेत-खलिहान से लेकर गेड़ी और लोक खेलों तक, सदियों पुरानी परंपराओं का होगा भव्य उत्सव

    छत्तीसगढ़ का लोक-पर्व: हरेली तिहार

    धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

    रायपुर : छत्तीसगढ़ी संस्कृति में लोक-त्योहारों की एक समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें प्रकृति, कृषि और जीव-जंतुओं के प्रति गहरा सम्मान झलकता है। इन्हीं त्योहारों में सबसे पहला और प्रमुख त्यौहार है — हरेली तिहार। सावन माह की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को मनाया जाने वाला यह पर्व छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन, कृषि परंपरा और पर्यावरण-प्रेम का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की पहचान सिर्फ उसकी प्रकृति नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराएँ भी हैं।

    छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में पर्व और त्यौहारों की बहुलता है। प्रत्येक माह कोई न कोई त्यौहार यहाँ लोक मानस को अपने रंग में रंग लेता है। ये त्यौहार जहॉं लोक जीवन में हंसी-खुशी के अवसर उपलब्ध कराती हैं, वहीं खेल और मनोरंजन के अनुकूल साबित होते हैं। प्रकति का यह हरापन छत्तीसगढ़ के लोक जीवन में भी पूरी समाहित है। हरेली, भोजली, जँवारा हो या बसंत पंचमी सभी पर्वों में प्रकृति का मनोरम और इसका अप्रतिम सौंदर्य झलकता है। इस रूप-सौंदर्य में जीवन की चारों अवस्थाओं का उल्लास और उत्साह विविध रंगों में बिखरा हुआ है।

    शायद ‘हरेली’ का हरापन हमारी परंपराओं में हमारे संस्कारों में और हमारे लोक जीवन में प्राकृतिक हरीतिमा का ज्यादा एहसास कराता है। हरेली का यह हरापन सबके जीवन में बिखरे और निखरे यही कामना है। यह भी कामना है कि भौतिकता की चकाचौंध से परे हमारी खेल परंपराएँ जीवित रहे ताकि माटी से जुड़े ग्रामीणजन शारीरिक और मानसिक दृष्टि से सुदृढ़ रहें। माटी की सोंधी-सोंधी महक हमारे लोक गीतो से आती रहे और खेल परंपरा की यह अविरल धारा निरंतर गतिमान रहे।

    1. हरेली शब्द का अर्थ और महत्व

    ‘हरेली’ शब्द ‘हरियाली’ से बना है। सावन के महीने में जब चारों तरफ़ खेतों और मैदानों में हरी-भरी फसलें और हरियाली लहलहाने लगती है, तब किसान इस पर्व को उल्लासपूर्वक मनाते हैं। इसे छत्तीसगढ़ का पहला तिहार माना जाता है, जहाँ से राज्य के प्रमुख लोक-पर्वों की श्रृंखला शुरू होती है।

    2. कृषि उपकरणों और पशुधन की पूजा

    हरेली का दिन मुख्य रूप से कृषकों और कृषि से जुड़े साधनों का धन्यवाद ज्ञापित करने का दिन है:

    •      कृषि यंत्रों की पूजा:- हरेली की जड़ें छत्तीसगढ़ क्षेत्र की कृषि विरासत में गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह एक उत्सव होने के साथ-साथ एक आध्यात्मिक भेंट भी है, लोगों के लिए प्रकृति, बारिश और अपने कृषि कार्य को सम्पन्न करने के बाद किसान अपने औजार, हल, फावड़ा, कुदाल, कुदाली, कुम्हड़ी, बिन्धना, बसुला, हथौड़ी, आरी,असिया, पैसुल, छूरा, खुर्पी आदि को धोकर स्वच्छ मिट्टी (मुरमी) का आसन से सजाकर किसान-किसानिन पूजा सामग्री रखकर धुले हुए चांवल आटे से हाथा लगाकर चन्दन, फूल, धुप-दीप व चीला रोटी से भोग लगाकर श्रीफल अर्पित करते हैं एवं भाव विभोर हो प्रार्थना करते हैं – ‘हे बलराम रूपी हल प्रचण्ड शक्ति के प्रतीक धारापति, आपने कंधा के रूप में माता को संवारा एवं सेवा करने में हमारी सहायता की कृषि कार्य बोनी ब्यासी रोपा के होते ही चहूओर हरियाली छाई इसके लिए कोटिशः धन्यवाद आपका कार्य सम्पन्न हुआ विश्राम करे। हमने आपको बड़ा कष्ट दिया, काम लिया, हमें क्षमा करें। आपकी दया हम पर सदैव बनी रहे, इसी प्रकार अन्य औजारों का कार्यानुसार निवेदन करते गेड़ी की पूजा कर शरीर के सामर्थ पैरो की रक्षा की कामना करते हैं।

    •      पशुधन का सत्कार: पशुधन किसानों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में किसान मिश्रित कृषि प्रणाली अपनाते हैं, जिसमें फसल और पशुधन का संयोजन होता है। छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में लोग कम पढ़े-लिखे और अकुशल होने के कारण अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। बैल छत्तीसगढ़ कृषि की रीढ़ हैं। किसान, विशेषकर सीमांत और लघु किसान, जुताई, ढुलाई और उत्पादन और इनपुट दोनों के परिवहन के लिए बैलों पर निर्भर रहते हैं।

    •      खेती-किसानी के सच्चे साथी यानी गाय और बैलों की विशेष सेवा की जाती है। उन्हें नहला-धुलाकर आरती उतारी जाती है तथा ‘गहूंता’ (आटा, नमक और जड़ी-बूटी से बना पौष्टिक मिश्रण) खिलाया जाता है, ताकि वे रोगों से मुक्त रहें। जड़ी बुटियों से तैयार औषधि को गौठान में ले जाकर अन्डी एवं खम्हार के पत्तों में नमक, चावल या गेहूँ के गोला के साथ दवा डाल कर पशुओं को खिलाया जाता है। अरण्ड, खम्हार का पत्ता औषधि है, जो वायुजनित रोगों को दूर करता है। नमक उत्प्रेक्षण का कार्य करता है, चावल या गेहूँ के कारण दवा अधिक असरकारक बन जाती है। इससे पशु धन निरोग हो जाता है यह एक प्रकार टीकाकरण ही है।

    3. परंपराएं एवं रीति-रिवाज

    •      गेड़ी चढ़ने का आनंद:- इस पर्व में गेंड़ी का काफी महत्व है बांस के मोटे डंडो एवं बांस के पहुये को विशेष विधि से कस कर बांधा जाता है। गेड़ी का उदारण हमें पुराणों में मिलता है। बलदाऊ-कृष्ण अपने सखाओं के साथ गेड़ी चढ़ा करते थे। कृष्ण लीला प्रसंग में इसका उदाहरण मिलता है तथा खेलों का आयोजन भी होते रहे हैं, जिसमें गेड़ी दौड़, पानी पिलाना, एक पैर में खड़े होना, एक पैर में कूदना आदि अनेक खेल का आयोजन प्राचीन काल से अब तक होते आ रहे हैं। बारिश के मौसम में कीचड़ और पानी से भरे रास्तों पर चलने के साधन के रूप में शुरू हुई यह परंपरा आज एक मनोरंजक खेल बन चुकी है।

    •      विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन:-हरेली में गाँव व शहरों में नारियल फेंक प्रतियोगिता भी होती है। सुबह पूजा-अर्चना के बाद गाँव के चौक-चौराहों पर युवाओं की टोली जुटती है और नारियल फेंक प्रतियोगिता का आयोजन की जाती है। नारियल हारने और जीतने का यह सिलसिला देर रात तक चलता है। गाँव-गाँव में गेड़ी दौड़ का आयोजन होता है। कहीं खो-खो तो कहीं फुगड़ी, कहीं बिल्लस, कहीं अत्ती-पत्ती, डंडा पचरंगा खेल का आयोजन होते आ रहे हैं। गाँव का गौठान हो या स्कूल का मैदान, गाँव के बाहर सड़क हो या चौबट्टा लगता है सारे लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सजे रहते हैं।

    •      टोटका और सुरक्षा का विधान:- मान्यतानुसार, इस दिन गाँव को बुरी नज़र और रोगों से बचाने के लिए घर के मुख्य दरवाजों पर नीम की पत्तियाँ बांधी जाती हैं। लोहार द्वारा घरों के चौखट पर नीम की शाखाएं और लोहे की कीलें लगाई जाती हैं। स्थानीय मान्यता है कि इससे घर को बुरी शक्तियों और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। यह प्रथा नीम के ज्ञात औषधीय गुणों और ग्रामीण स्वास्थ्य संबंधी पारंपरिक मान्यताओं में इसकी भूमिका से प्रेरित है।

    •      हरेली तिहार में बनाए जाने वाले ब्यंजन:- मुख्य रूप से गुड़ के चीला, अईरसा, चौसेला और बोबरा जैसे पारंपरिक पकवान बनाए और बांटे जाते हैं। गुलगुला भजिया, गुड़हा चीला, सोहारी, बड़ा, ठेठरी, खुरमी और बोबरा जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान बनाए जाते हैं। इन व्यंजनों का भोग कृषि औजारों और गोधन को लगाया जाता है। इस दिन छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का विशेष आनंद लिया जाता है।

    4. सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश

    हरेली तिहार केवल एक धार्मिक या लोक-अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानव का प्रकृति के साथ अटूट संबंध दर्शाता है। यह पर्व सिखाता है कि जो प्रकृति और पशुधन हमें जीवन और भोजन देते हैं, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारा परम कर्तव्य है।आज के समय में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हरेली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित कर और ‘छत्तीसगढ़िया क्रांति’ के तहत पारंपरिक खेलों (जैसे गेड़ी दौड़) को बढ़ावा देकर इस लोक-सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है।

  • तिरंगे के रंग में रंगेगा पूरा जशपुर! 17 अगस्त तक तिरंगा यात्रा, मैराथन, रैली और तिरंगा मेले से गूंजेगा देशभक्ति का जोश

    तिरंगे के रंग में रंगेगा पूरा जशपुर! 17 अगस्त तक तिरंगा यात्रा, मैराथन, रैली और तिरंगा मेले से गूंजेगा देशभक्ति का जोश

    हर घर तिरंगा अभियान से देशभक्ति के रंग में रंगेगा जशपुर

    17 अगस्त तक होंगे विविध आयोजन

    तिरंगा यात्रा, रैली, दौड़-मैराथन, तिरंगा प्रतिज्ञा, सेल्फी, तिरंगा मेला सहित होंगे अनेक कार्यक्रम

    कलेक्टर ने सभी विभागों को दिए समयबद्ध आयोजन के निर्देश

    जशपुर : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आमजन में देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान की भावना को और मजबूत करने के उद्देश्य से जिले में ‘हर घर तिरंगा’ एवं ‘वंदे मातरम्’ थीम पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार 9 अगस्त से शुरू हुए 17 अगस्त 2026 तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान तथा 7 अगस्त से शुरु 15 अगस्त तक वंदे मातरम् थीम आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिले के सभी संबंधित विभागों, जनपद पंचायतों, नगरीय निकायों, शिक्षण संस्थानों एवं अन्य संस्थाओं को शासन के निर्देशों के अनुरूप अभियान की गतिविधियों का व्यापक स्तर पर आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों, अशासकीय संस्थाओं, पुलिस विभाग, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, खिलाड़ियों एवं आम नागरिकों की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने कहा है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की सभी गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और प्रत्येक कार्यक्रम में अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। जिला प्रशासन द्वारा नागरिकों से अपील की गई है कि वे 9 से 17 अगस्त तक अपने घरों एवं प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराकर तथा विभिन्न आयोजनों में सहभागिता कर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने में सहयोग करें।

    तिरंगा यात्रा, तिरंगा रैली जैसे होंगे विभिन्न गतिविधियां –

    ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के अंतर्गत तिरंगा यात्रा प्रमुख गतिविधियों में शामिल होगी। जिला स्तर पर तिरंगा यात्रा का आयोजन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही विकासखंड, ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर भी तिरंगा यात्राएं आयोजित की जाएंगी। यात्राओं में सभी वर्गों के नागरिकों, युवाओं, महिलाओं, विद्यार्थियों, स्वयं सहायता समूहों, अशासकीय संस्थाओं, पुलिस विभाग, एनसीसी, एनएसएस, जनप्रतिनिधियों एवं खिलाड़ियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। जिले में साइकिल, बाइक एवं कार तिरंगा रैली का आयोजन भी किया जाएगा। विभिन्न संगठनों, युवा स्वयंसेवकों, स्वयं सहायता समूहों तथा पुलिस विभाग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकाय स्तर पर तिरंगा दौड़ एवं मैराथन आयोजित किए जाएंगे। इनमें जनप्रतिनिधियों, विद्यालय -महाविद्यालय के विद्यार्थियों, खिलाड़ियों, पुलिस विभाग, अशासकीय संस्थाओं एवं आम नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। खेल एवं फिटनेस क्षेत्र से जुड़े प्रतिभावान खिलाड़ियों को भी दौड़ एवं मैराथन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

    विद्यालयों और महाविद्यालयों में होंगे देशभक्ति कार्यक्रम –

    ‘हर घर तिरंगा’ के साथ वंदे मातरम् थीम पर विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे। विद्यार्थियों द्वारा तिरंगा यात्रा, देशभक्ति गीत प्रतियोगिता, विचार गोष्ठी, संगोष्ठी तथा छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य प्रतियोगिता जैसे आयोजन किए जाएंगे। राष्ट्रीय कार्यक्रम के अनुरूप राज्य के सभी विद्यालयों में वंदे मातरम् से संबंधित सांगीतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड सहित अन्य संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। अभियान के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में तिरंगा प्रतिज्ञा दिलाई जाएगी। इसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता की भावना को मजबूत करना है। नागरिकों को घरों एवं सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही तिरंगा सेल्फी लेने और उसे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से संबंधित मंच पर साझा करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम स्थलों पर तिरंगा कैनवास भी लगाए जाएंगे, जहां नागरिक भारतीय भाषा में ‘हर घर तिरंगा’ अथवा ‘जय हिंद’ लिखकर अभियान में अपनी सहभागिता दर्ज करा सकेंगे। कैनवास का आकार राष्ट्रीय ध्वज के निर्धारित अनुपात 3:2 के अनुरूप रखने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान के दौरान जिले के स्वतंत्रता सेनानियों, वीरों तथा उनके परिवार के सदस्यों को स्थानीय कार्यक्रमों में आमंत्रित कर सम्मानित किया जाएगा। इससे नई पीढ़ी को देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष और बलिदान की जानकारी प्राप्त होगी तथा राष्ट्रभक्ति की भावना मजबूत होगी।

    तिरंगा मेला और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा मंच –

    जिले में तिरंगा मेला आयोजित कर स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित किया जाएगा। कार्यक्रम स्थलों पर झंडे, वस्त्र, खाद्य पदार्थ सहित अन्य स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए स्टॉल उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे अभियान के साथ स्थानीय उत्पादों एवं महिला समूहों को भी बढ़ावा मिलेगा। हर घर तिरंगा’ एवं वंदे मातरम् थीम पर उद्यान, जिला मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालय, ग्राम स्तर तथा विद्यालय -महाविद्यालयों में विशेष प्रदर्शनियां आयोजित की जाएंगी। नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के इतिहास, महत्व और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों से अवगत कराया जाएगा। 14 अगस्त को वंदे मातरम् पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। साथ ही संध्याकालीन समय में राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् एवं देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके अलावा निजी सहभागिता के माध्यम से ‘वंदे मातरम्’ ऑडियो एवं वीडियो बूथ स्थापित कर नागरिकों को वंदे मातरम् गीत रिकॉर्ड करने तथा अभियान के माध्यम से साझा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

  • विश्व आदिवासी दिवस पर जशपुर में बड़ा जागरूकता अभियान! 100 विद्यार्थियों को कानून, साइबर फ्रॉड, नशा और मानव तस्करी से बचाव की दी जानकारी

    विश्व आदिवासी दिवस पर जशपुर में बड़ा जागरूकता अभियान! 100 विद्यार्थियों को कानून, साइबर फ्रॉड, नशा और मानव तस्करी से बचाव की दी जानकारी

    विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर विधिक साक्षरता शिविर का सफल आयोजन

    जशपुर : नालसा एवं सालसा की योजना के तहत माननीय श्री सत्येन्द्र कुमार साहू, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर जिला जशपुर (छ०ग०) के मार्गदर्शन में विश्व आदिवासी दिवस दिनांक 09.08.2026 के अवसर पर थाना जशपुर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

    शिविर का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय एवं छात्रावास में निवासरत विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, शासन की कल्याणकारी योजनाओं तथा निःशुल्क विधिक सहायता के संबंध में जागरूक करना है।

    उक्त विधिक साक्षरता शिविर कार्यक्रम में माननीय श्री सत्येन्द्र कुमार साहू, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर के द्वारा प्री-मैट्रिक अ.ज.जाति बालक छात्रावास जशपुर में विधिक जागरूकता, बाल विवाह, मानव तस्करी, नशा मुक्ति, बाल श्रम, साइबर फ्रॉड, मोटर यान के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों को विश्व आदिवासी दिवस, संविधान एवं कानून की मूलभूत जानकारी प्रदान करते हुए उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला।

    माननीय कु. चौताली खांडेकर, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी जशपुर के द्वारा मोटर यान, नशीली दवाओं के दुरूपयोग, शिक्षा का अधिकार, गुड टच एवं बैड टच घरेलु हिंसा से महिलाओं का संरक्षण के बारे में विद्यार्थियों जानकारी दी।

    उक्त साक्षरता शिविर में माननीय श्री जनार्दन खरे, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (एफ.टी.सी) जशपुर, माननीय श्रीमती सुमन सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जशपुर, कु० श्वेता बघेल सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर, कु. पूनम नशीने न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी जशपुर, एवं कु. नेहा तिर्की, न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी जशपुर, प्री-मैट्रिक अ.ज.जाति बालक छात्रावास जशपुर के लगभग 100 विद्यार्थी, अधिक्षक तथा कर्मचारीगण भी उपस्थित रहे।

  • आजादी के जश्न को लेकर जशपुर तैयार! 80वें स्वतंत्रता दिवस पर मंत्री राजेश अग्रवाल करेंगे ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगा भव्य सम्मान समारोह

    आजादी के जश्न को लेकर जशपुर तैयार! 80वें स्वतंत्रता दिवस पर मंत्री राजेश अग्रवाल करेंगे ध्वजारोहण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगा भव्य सम्मान समारोह

    जशपुर जिले में 15 अगस्त को गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया जाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस

    पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल स्वतंत्रता दिवस समारोह के होंगे मुख्य अतिथि

    जशपुर : जिले में 15 अगस्त 2026 को 80 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह पूरे गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाया जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण के लिए मुख्य अतिथियों की सूची जारी की गई है। जारी सूची के अनुसार जशपुर जिले में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल स्वतंत्रता दिवस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। मंत्री श्री अग्रवाल 15 अगस्त को जिला मुख्यालय स्थित रणजीता स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराएंगे तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का प्रदेशवासियों के नाम संदेश का वाचन करेंगे।

     स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें मुख्य अतिथि शामिल होंगे। इस अवसर पर मंत्री श्री अग्रवाल शहीद परिवारों को शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित करेंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत भी करेंगे। समारोह में जिले के विभिन्न विभागों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शासकीय अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी मुख्य अतिथि द्वारा प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

  • जांजगीर-चांपा में रिस्पॉन्स टीम की कड़ी निगरानी : अपराध की खबर मिलते ही मौके पर पहुंचेगी पुलिस, रिस्पॉन्स टीम की ताबड़तोड़ कार्रवाई; 154 वारंटी गिरफ्तार, नशे के कारोबार पर नजर.

    जांजगीर-चांपा में रिस्पॉन्स टीम की कड़ी निगरानी : अपराध की खबर मिलते ही मौके पर पहुंचेगी पुलिस, रिस्पॉन्स टीम की ताबड़तोड़ कार्रवाई; 154 वारंटी गिरफ्तार, नशे के कारोबार पर नजर.

    जांजगीर-चांपा जिले में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा गठित रिस्पॉन्स टीम लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। एसपी श्री विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन में दिनांक 23 जुलाई 2025 को शुरू की गई इस टीम द्वारा जिले में सुरक्षा व्यवस्था एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए CSP योगिताबाली खापर्डे के नेतृव में लगातार पेट्रोलिंग और निगरानी की जा रही है।

    रिस्पॉन्स टीम को किसी भी आपातकालीन स्थिति, अपराध अथवा संकट की घड़ी में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैनात किया गया है। 24×7 ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी सूचना मिलते ही तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करते हैं।

    टीम द्वारा लगातार क्षेत्र में भ्रमण एवं निगरानी कर अवैध गांजा, शराब बिक्री, जुआ-सट्टा तथा असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। हॉट- बाजार एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही है।

    रिस्पॉन्स टीम द्वारा थाना जांजगीर एवं चौकी नैला क्षेत्र में फरार वारंटियों की तलाश कर उन्हें पकड़ने में भी सफलता हासिल की गई है। टीम की सक्रियता से अपराधियों में पुलिस का भय और आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा मजबूत हुआ है।

    बैंक, एटीएम एवं सराफा दुकानों के आसपास संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गतिविधियों पर टीम द्वारा सतत निगाह रखी जा रही है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

    रिस्पॉन्स टीम को भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, असामाजिक गतिविधियों की सूचना पर तत्काल प्रतिक्रिया तथा आपराधिक घटनाओं में त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष रूप से सक्रिय रखा गया है।

    * नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना

    * अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करना

    * अपराध एवं अव्यवस्था पर तत्काल नियंत्रण पाना

    * घटना की सूचना पर तत्काल मौके पर पहुंचना

    * संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखना

    * अवैध शराब, गांजा, जुआ-सट्टा के विरुद्ध कार्रवाई करना

  • रायपुर कमिश्नरेट की बड़ी कार्यवाही : 106 ग्राम एमडीएमए, कीमत 20 लाख और राजस्थान कनेक्शन ! रायपुर में पुलिस की दबिश, राजस्थान का अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार, पुलिस खंगाल रही नशे के पूरे सप्लाई नेटवर्क के तार.

    रायपुर कमिश्नरेट की बड़ी कार्यवाही : 106 ग्राम एमडीएमए, कीमत 20 लाख और राजस्थान कनेक्शन ! रायपुर में पुलिस की दबिश, राजस्थान का अंतर्राज्यीय आरोपी गिरफ्तार, पुलिस खंगाल रही नशे के पूरे सप्लाई नेटवर्क के तार.

    कमिश्नरेट में एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट तथा एण्टी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स की टीम द्वारा एनडीपीएस एक्ट के 73 प्रकरणों में कुल 163 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5,47,04,290 /- रूपये (पांच करोड़, सैतालीस लाख, चार हजार, दो सौ नब्बे रूपये) कीमत का गांजा – 588.97 किलोग्राम,   ओसियन ग्रो गांजा – 2.5 ग्राम, प्रतिबंधित नशली टेबलेट – 27875, एमडीएमए – 173 ग्राम, पार्टी पिल्स – 08 नग, कोकीन – 4.55 ग्राम, सिरप – 251 शीशी, डोडा – 0.547 ग्राम, हेरोईन(चिट्टा) – 20.740 ग्राम, ब्राउन शुगर – 0.80 ग्राम, अफीम – 71 ग्राम, नगदी – 13,55,830/- रूपये, चारपहिया वाहन – 08 नग, दोपहिया वाहन – 11 नग, मोबाईल फोन – 81 नग, कट्टा – 01 नग, चाकू – 02 नग किया गया है जप्त.

    रायपुर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा नशे के अवैध कारोबार एवं मादक पदार्थों की तस्करी के विरूद्ध लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 09.08.2026 को एण्टी क्राईम एण्ड साईबर यूनिट की टीम को विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि थाना गंज क्षेत्रांतर्गत तेलघानी नाका ओवरब्रिज के नीचे बिजली ऑफिस के पास एक व्यक्ति मादक पदार्थ एमडीएमए रखा है तथा बिक्री करने की फिराक में है।

    सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) श्री स्मृतिक राजनाला एवं पुलिस उपायुक्त (मध्य क्षेत्र) श्री तारकेश्वर पटेल द्वारा अधीनस्थ अधिकारियों को सूचना का सत्यापन कर सूचना सही पाए जाने पर आरोपी को मादक पदार्थ सहित गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए।

    पुलिस टीम द्वारा आरोपी के पास रखे बैग की तलाशी लेने पर उसमें मादक पदार्थ एमडीएमए बरामद हुआ। पुलिस टीम द्वारा आरोपी से मादक पदार्थ रखने एवं परिवहन करने के संबंध में वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, किंतु आरोपी द्वारा किसी प्रकार का वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया तथा वह पुलिस टीम को गुमराह करने का प्रयास करने लगा।

    आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 106.19 ग्राम मादक पदार्थ एमडीएमए तथा प्रकरण से संबंधित 01 आईफोन जुमला कीमत लगभग 20 लाख रूपये जप्त कर आरोपी के विरूद्ध थाना गंज में अपराध क्रमांक 243/26 धारा 22(ग) नारकोटिक एक्ट का अपराध पंजीबद्ध कर आरोपी के विरूद्ध कार्यवाही की गई।

    प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी द्वारा बताया गया कि वह मादक पदार्थ एमडीएमए को अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर बिक्री करने का कार्य करता है तथा अपने साथियों के कहने पर एमडीएमए की खेप लेकर रायपुर में सप्लाई करने आया था। आरोपी से मादक पदार्थ की खरीदी के स्रोत, सप्लाई करने वाले व्यक्तियों, रायपुर में इसकी सप्लाई प्राप्त करने वाले व्यक्तियों, उसके अन्य साथियों एवं पूरे सप्लाई नेटवर्क के संबंध में विस्तृत पूछताछ की जा रही है। आरोपी से प्राप्त जानकारी के आधार पर मादक पदार्थ के अवैध कारोबार में संलिप्त अन्य व्यक्तियों की पहचान एवं उनकी भूमिका के संबंध में भी जांच की जा रही है।

    गिरफ्तार आरोपी – रामनिवास माचरा पिता भंवरलाल माचरा उम्र 22 वर्ष निवासी ग्राम केरला नाडा बिकमकोर थाना मतोडा जिला फलोदी राजस्थान.

  • छत्तीसगढ़ में बच्चों की सेहत पर बड़ा एक्शन! कुपोषण, एनीमिया और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर सरकार ने कसी कमर, यूनिसेफ के साथ बना मेगा प्लान

    छत्तीसगढ़ में बच्चों की सेहत पर बड़ा एक्शन! कुपोषण, एनीमिया और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर सरकार ने कसी कमर, यूनिसेफ के साथ बना मेगा प्लान

    मुख्य सचिव ने बच्चों के लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक ली

    बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

    जिलों में पोषण कार्यक्रमों के विस्तार पर हुई चर्चा

    रायपुर : मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य में बच्चों के लिए चलाये जा रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर यूनिसेफ और राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागीय अधिकारी की बैठक ली।

     बैठक में राज्य में बच्चों के लिए पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, साफ-सफाई और स्वच्छता सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाये जाने के लिए विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बच्चों में कुपोषण, एनिमिया, विकास में देरी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई है। बच्चों के स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अंतर्गत आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, फोलेट, विटामिन, बी-12 और जिंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यूनिसेफ और विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, एनिमिया नियंत्रण, कुपोषण और बाल विवाह जैसी समस्याओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई।

     अधिकारियों और यूनिसेफ की संयुक्त बैठक में बच्चों के कम्यूनिटी मेनेजमेंट का सभी जिलों तक विस्तार करने, विकलांगता वाले बच्चों के माता-पिता को खानपान संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में टेक होम राशन की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने के साथ-साथ घर पर पोष्टिक भोजन और बच्चों को भोजन खिलाने की बेहतर पद्धतियों को बढ़ावा देने के संबंध में जानकारी दी गई। अनाज, दाल, फल्लियों की उपलब्धता ग्राम पंचायत स्तर पर अनाज बैंक की अवधारणा पर भी चर्चा हुई।

     इसके साथ ही राज्य के किसानों तक विविध एवं पोषक तत्वों से भरपूर फसलों और दालों की पहुंच बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि राज्य में एंटी-मलेरिया अभियान के चलते मलेरिया के रोगियों में उल्लेखनीय कमी आयी है। बच्चों में एनिमिया की स्थिति के बारे में चर्चा हुई। इसके तहत बस्तर में बच्चों मे एनिमिया से निपटने विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जमीन स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन और लोगों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के निर्देश दिए है।

     बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री अब्दुल कैसर हक, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चंपावत, आयुक्त समग्र शिक्षा सुश्री किरण कौशल सहित शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

  • छत्तीसगढ़ में बाढ़ का अलर्ट नहीं, तैयारी का मेगा प्लान! 18 अगस्त को टेबल-टॉप एक्सरसाइज, 20 को होगी बड़ी मॉक ड्रिल

    छत्तीसगढ़ में बाढ़ का अलर्ट नहीं, तैयारी का मेगा प्लान! 18 अगस्त को टेबल-टॉप एक्सरसाइज, 20 को होगी बड़ी मॉक ड्रिल

    छत्तीसगढ़ में बाढ़ से निपटने की तैयारी तेज: 18 अगस्त को टेबल-टॉप और 20 को होगी मॉक ड्रिल

    NDMA ने दी राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में गाइडलाइन्स

    रायपुर : राज्य में संभावित बाढ़ आपदा से निपटने और पूर्व तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस दौरान निर्णय लिया गया कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन की वास्तविक क्षमताओं और अंतर-विभागीय समन्वय को परखने के लिए 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज और 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) का आयोजन किया जाएगा।

    त्वरित राहत व बचाव के लिए तैयारियों का परीक्षण आवश्यक

     राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे टेबल-टॉप एक्सरसाइज की सभी प्रक्रियाओं और एसओपी (SOP) को गहराई से समझें। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा के समय शून्य देरी से राहत और बचाव कार्य संचालित करने के लिए यह पूर्वाभ्यास बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

    अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर

     कॉन्फ्रेंस के दौरान बाढ़ के समय विभिन्न विभागों की सक्रिय भूमिका और समन्वय पर विस्तृत समीक्षा की गई। आपदा के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) तथा पशुपालन विभाग द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्यवाहियों का खाका तैयार किया गया।

    समीक्षा बैठक में पहुंचे प्रमुख विभागों के उच्चाधिकारी

     इस महत्वपूर्ण बैठक में नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल (DRM), स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग सहित पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी इस कॉन्फ्रेंस में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।

  • रायपुर मेडिकल कॉलेज का बड़ा कीर्तिमान! महज 20 दिनों में फेफड़ों की 9 जटिल सर्जरी, 15 साल के बच्चे का भी सफल ऑपरेशन

    रायपुर मेडिकल कॉलेज का बड़ा कीर्तिमान! महज 20 दिनों में फेफड़ों की 9 जटिल सर्जरी, 15 साल के बच्चे का भी सफल ऑपरेशन

    मेडिकल कॉलेज के हार्ट-चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग का एक और कीर्तिमान

     20 दिन में किये फेफड़े की 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी और इस तरह दो महीने में फेफड़े की कुल 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी

    सर्जरी में 15 साल के बच्चे के फेफड़े की लोबेक्टोमी सर्जरी भी हुई जिसमें मरीज को बायें फेफड़े के ऊपरी लोब में था एस्परज़िलोमा नमक फंगस का संक्रमण

    अब तक के सबसे कम उम्र का मरीज जिसके फेफड़े की लोबेक्टमी सर्जरी की गई

    इस ऑपरेशन में शामिल मरीजों की उम्र 15 साल से लेकर 70 साल तक

    रायपुर : पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए मात्र 20 दिनों में 9 तथा इस संख्या को मिलाकर पिछले दो महीनों में कुल 13 लोबेक्टॉमी (फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकालने की सर्जरी) सफलतापूर्वक कर मरीजों को नया जीवन दिया है। इनमें दो आपातकालीन सर्जरी ऐसे मरीजों की की गई, जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की सहायता से की गई इन जटिल सर्जरियों ने न केवल संस्थान की विशेषज्ञता को सिद्ध किया है, बल्कि छत्तीसगढ़ में फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में अम्बेडकर अस्पताल को अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित किया है।

    हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी का मतलब यह होता है कि इसमें मरीज के क्षतिग्रस्त फेफड़े के एक हिस्से को निकाल दिया जाता है। यह सर्जरी अत्यंत ही जटिल सर्जरी होती है। यह सर्जरी इस संस्थान में अत्याधुनिक तकनीक से किया जाता है जिसमें एडवांस्ड लंग स्टैपलर का उपयोग किया जाता है, जिससे भविष्य में इस सर्जरी से होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरल (Bronchopleural Fistula) फिस्टुला बनने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। छत्तीसगढ़ के किसी भी प्राइवेट या सरकारी संस्थान की तुलना में इस संस्थान द्वारा इतने कम समय में इतना ज्यादा लोबेक्टॉमी सर्जरी (फेफड़े की लोबेक्टॉमी सर्जरी) किया जाना इस संस्थान के लिए एक कीर्तिमान है और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।

    छत्तीसगढ़ में लोबेक्टॉमी (फेफड़े की) सर्जरी का प्रमुख कारण फेफड़े में एस्परजिलोमा (Aspergilloma) एवं ब्रोन्किएक्टैसिस है। यह एस्परजिलोमा एक फंगस (Aspergillus niger) एस्परजिलस नाइजर से होता है। यह इन्फेक्शन फेफड़े के टी.बी. वाले मरीजों या ऐसे मरीजों को होता है, जिनकी इम्युनिटी बहुत ही कम हो जाती है।

    एस्परजिलोमा सामान्यतः दायें फेफड़े के ऊपरी लोब (भाग) में सबसे अधिक होता है, क्योंकि यहाँ पर टीबी के बैक्टीरिया एवं एस्परजिलोमा के फंगस को बहुत ही अच्छा वातावरण मिलता है। ब्रोन्किएक्टैसिस भी फेफड़े के टी.बी. संक्रमण के बाद होने वाली सबसे सामान्य बीमारी है, जिसमें फेफड़े के अंदर छोटे-छोटे कैविटी (गुहा) बन जाती हैं एवं इसमें संक्रमण होने के बाद मरीजों को खांसी के समय खून निकलता है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं लंग एब्सिस

    (Lung Abscess) में फेफड़े में बड़ा कैविटी बन जाने से खांसी में खून आने (Hemoptysis) का सबसे बड़ा कारण है।

    वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं फेफड़े का कैंसर भी थूक या बलगम में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। एवं ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़े का कैंसर अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो तो लोबेक्टॉमी ऑपरेशन से इस बीमारी (कैंसर) से पूर्णतः निजात पाया जा सकता है।

    पूरे छ.ग. में फेफड़े की सर्वाधिक सर्जरी इसी हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में होती है, जिसमें प्रमुख रूप से फेफड़े का डिकॉर्टिकेशन सर्जरी, लोबेक्टॉमी (Lobectomy), सेगमेंटेक्टॉमी (Segmentectomy) एवं न्यूमोनेक्टॉमी (Pneumonectomy) जिसमें एक तरफ के दायें या बायें फेफड़े को पूर्णतः निकाल दिया जाता है, इत्यादि।

     सामान्यतः इस संस्थान में साल में 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती है। यही नहीं यहाँ पर फेफड़े की सर्जरी कराने के लिए सिर्फ छ.ग. से ही नहीं बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, उड़ीस , म.प्र. एवं उ.प्र. के भी मरीज आते हैं। जो इस संस्थान के लिए गौरव का विषय है।

    ये सभी ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किया जाता है। अभी भी हमारे विभाग में लोबेक्टॉमी सर्जरी के लिए कुछ मरीज प्रतीक्षारत हैं।

    क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी:

    हमारे शरीर में फेफड़े के दो हिस्से होते हैं, जिसे दायां एवं बायां फेफड़ा कहा जाता है। बायां फेफड़ा दो लोब (भाग) से मिलकर बनता है, जिसको अपर लोब और लोअर लोब कहा जाता है। उसी प्रकार दायें फेफड़े में तीन (3) Lobe (लोब) होते हैं: अपर लोब, मिडिल लोब (Middle Lobe) एवं लोअर लोब।

    यदि फेफड़े को कोई बीमारी जैसे कि एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर (Lung Tumour) किसी एक भाग या लोब तक सीमित होती है तो उस स्थिति में उस भाग को ऑपरेशन द्वारा निकाल दिया जाता है, जिसको मेडिकल भाषा में लोबेक्टॉमी कहा जाता है। इसमें दायें या बायें छाती में चीरा लगाकर संक्रमित फेफड़े को अन्य भागों से अलग किया जाता है एवं विशेष तकनीक एवं लंग स्टेपलर की सहायता से संक्रमित लोब को निकाला जाता है। आधुनिक स्टेपलर प्रयोग करने से फेफड़े के ऑपरेशन के बाद होने वाले कॉम्प्लिकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरलफिस्टुला (Bronchopleural Fistula) में बहुत ही कमी आ जाती है।सामान्यतः 6-8 दिनों बाद मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया जाता है।

  • जब दिल्ली ने सुनी छत्तीसगढ़ की पंडवानी! तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति ने इंडिया हैबिटेट सेंटर में बिखेरी लोक संस्कृति की चमक

    जब दिल्ली ने सुनी छत्तीसगढ़ की पंडवानी! तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति ने इंडिया हैबिटेट सेंटर में बिखेरी लोक संस्कृति की चमक

    जब दिल्ली के मंच पर जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा

    इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का रंग, पांडवानी ने बांधा समां

    रायुपर : छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। महान पांडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। पंडवानी की इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।

    छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत पंडवानी

     इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पांडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत और व्यापकता को सामने रखा।

     कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम में भाग लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।

    तीजन बाई के योगदान को याद किया

     इस प्रस्तुति का केंद्र तीजन बाई की कला यात्रा और पांडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान रही। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से पंडवानी को नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।

     सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम पंडवानी

     तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन और छत्तीसगढ़ की उस परंपरा को याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

    भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास पंडवानी

     धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।

    देश की लोक परंपराओं का साझा मंच

     आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।

     इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है। राजधानी के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी देश की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।