जशपुर कलेक्टर ने जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा, लंबित कार्यों को गंभीरता से करने के सख्त निर्देश
जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास ने विगत दिवस लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत संचालित जल जीवन मिशन योजना की समीक्षा की।
उन्होंने 70% से अधिक भुगतान हुए विभिन्न अनुबंधों के ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश देते हुए सभी कार्य अगस्त माह में पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने ठेकेदारों को निर्देश देते हुए कहा कि कार्यों में लापरवाही बरतने पर कार्यों की वसूली आपके अनुबंधों से किए जाएंगे उक्त बैठक में जल जीवन मिशन के 25 ठेकेदार विभागीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर ने कहा जल जीवन मिशन के तहत लोगों तक शुद्ध पेयजल पहचान छत्तीसगढ़ शासन की प्राथमिकता है इसमें कोई लापरवाही नहीं चलेगी।
भारोत्तोलन की अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा में मणिपुर की महिला खिलाड़ियों को क्यों मिलती है सफलता
परखने वाले चाहिए भारत में हर खेल में हैं प्रतिभाएं
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार,टीवी कमेंटेटर, रायपुर. छ.ग.
रायपुर : हमारे देश के खेल इतिहास में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारोत्तोलन खेल में भारत का नाम रौशन करने वाली महिला प्रतिभागियों के राज्य के बारे में जानने की कोशिश की जाए तो हम पाते कि अधिकतर महिला भारोत्तोलक भारत के राज्य विशेष से हैं। भारोत्तोलन के खेल में एक खिलाड़ी को दो तरह से अपने अंदर की खेल शक्ति को दिखाने का अवसर मिलता है, जिसे क्रमशः क्लीन एंड जर्क तथा स्नैच कहते हैं। क्लीन एंड जर्क की विधा में भारोत्तोलक लोहे के राड जिसे बारबेल कहते हैं उसमें निश्चित भार से लदी प्लेट होती है उसको उठाते हैं। इस बारबेल को उठाने का तरीका होता है। इसमें भार को पहले जमीन से कंधों के सामने तक (क्लीन) फिर कंधों से सिर के ऊपर (जर्क) तक ले जाया जाता है। दूसरी विधा स्नैच में भार प्लेट के विभिन्न वजन से लदी हुई बारबेल को एक बार में एक गति से सिर के ऊपर तक उठाया जाता है। दोनों ही विधा में बारबेल को कम से कम तीस सेकंड तक उठाकर रखना पड़ता है। जब निर्णायक हूटर बजाते हैं तब तक बारबेल को फ्लोर में गिराया जाता है। हालांकि आंध्रप्रदेश की रहने वाली भारत की सुश्री कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 के सिडनी ओलंपिक खेलों में पहली बार कांस्य पदक जीतकर इस खेल को भारत में लोकप्रिय बनाया. लेकिन 2000 से 2026 तक के भारतीय खिलाड़ियों के भारोत्तोलन में प्रदर्शन का आकलन किया जाए तो साफ हो जाता है कि हमारे देश में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने वाले महिला भारतोलको में अधिकांश मणिपुर राज्य से हैं। इनमें से हमारे देश की महान खिलाड़ियों में से एक मीरा बाई चानू हैं उन्होंने 2026 के राष्ट्रमंडल खेलों में 2014 से लेकर 2026 तक चार बार भारोत्तोलन में पदक जीता है। जिसमें 2014 में रजत फिर 2018,2022 व 2026 में अपने वजन वर्ग में तिकड़ी लगाते हुए लगातार तीन स्वर्ण पदक जीता है।19 वर्ष की उम्र से लगातार भोरोत्तोलन के खेल से जुड़े रहना और 31 वर्ष की उम्र में अपने देश के लिए विश्व स्पर्धाओं में पदक जीतना किसी भारतीय महिला को महान खिलाड़ी का दर्जा देने के लिए पर्याप्त है। मणिपुर राज्य पुलिस सेवा में कार्यरत मीराबाई ने अब तक राष्ट्रमंडल खेलों के साथ आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों 2020, विश्व चैंपियनशिप 2017, 2022,2025 एशियाई चैंपियनशिप 2020 में पदक हासिल किया है। मीराबाई के अलावा बिंदयारानी देवी, संजीता चानू, एन सोनिया चानू, रेनूबाला चानू, एल.मोनिका देवी, कुंजरानी देवी, सानामाचा चानू ने भी विश्व स्तरीय प्रदर्शन करके अपने देश के लिए पदक हासिल किया है. सौभाग्य से उक्त सभी महिलाएं मणिपुर राज्य से हैं।
अब प्रश्न यहउठता है कि मणिपुर जैसे छोटे राज्य से इतनी प्रतिभाशाली भारोत्तोलक कैसे उभरकर आ सकती हैं। खोज पड़ताल के बाद स्पष्ट है कि ये सभी महिला खिलाड़ी दूरस्थ ग्रामीण व पहाड़ी अंचल में रहती है। इन्हें रोज कई किलोमीटर चलकर स्कूल जाना पड़ता है. रोजमर्रा के जरूरत की सामग्री खरीदने के लिए पहाड़ियों के बीच से रोज गुजरना पड़ता है। कई बार पीने के पानी के लिए पहाड़ियों को पार करके जाना पड़ता है। धार्मिक पूजा पाठ के लिए भी ये कई किलोमीटर पैदल चलते हैं। मीराबाई चानू के जीवन के बारे में अध्ययन करने से पता चला कि वे पहाड़ियों के बीच जंगल जाकर जलाने के लिए लकड़ी बिनती थी और लकड़ी का बड़ा बंडल लेकर घर आती थी, तब घर वालों, शिक्षकों, पड़ोसियों को लगा कि यह इतना वजन उठाकर सब कुछ आसानी से कर सकती है, तब उन्होंने मीराबाई को भारोत्तोलन खेल के लिए प्रोत्साहित किया इस प्रकार जब ग्रामीण पहाड़ी वनांचल क्षेत्र के रहवासी स्वयं होकर आना जाना करते हैं तो उनकी मांस पेशियों में ताकत बढ़ जाती है। इसलिए उत्तर पूर्व की प्रतिभागी भारोत्तोलन में सफल होती है। दूसरी बात जब वे पहाड़ी या जंगल जाती हैं तो कई तरह के वन पक्षियों, वनपशुओं कीड़े मकोड़ों का सामना करती हैं अत: साहसी होती हैं। भारोत्तोलन के खेल में सफलता पाने के लिए शारीरिक शक्ति के साथ साहसी होना जरूरी होता है। ऐसे क्षेत्र के निवासी आज्ञाकारी और मेहनती होते हैं जिसके कारण उन्हें उनके परिश्रम का फल मिलता है वे कामयाब होते हैं। अतः भारत के किसी क्षेत्र के खिलाड़ी की सफलता का आकलन उनके रोजाना की दिनचर्या, गतिविधि से किया जा सकता है . फिर एक खिलाड़ी को प्रतियोगिता के लिए तैयार करने आगे की जिम्मेदारी भारत सरकार के केंद्रीय खेल मंत्रालय के माध्यम से भारतीय खेल प्राधिकरण के अकादमी में सघन प्रशिक्षण द्वारा किया जाता है। छत्तीसगढ़ भी एक अनुसूचित जन जाति बहुल, वनांचल, पहाड़ी, ग्रामीण अंचल में ऊबड़ खाबड़ मार्ग, छोटे छोटे नदी नाले वाला, प्रदेश है . यहाँ पर खेल विभाग और जागरूक नागरिक, मीडिया कर्मी की मदद से खोज की जाए तो एथलेटिक्स, साइक्लिंग, तैराकी, तीरंदाजी , केनोइंग, नौकायन,फुटबाल, कुश्ती,ट्रायथलान, रोलबॉल,स्केटिंग, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, जूडो, मार्शलआर्ट,मलखंभ, आदि खेलो की विश्व स्तरीय प्रतिभाएं निकल सकती हैं .
पूर्व में मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी हृदय साहू को गिरफ्तार कर भेजा जा चुका है जेल, वर्तमान गिरफ्तार आरोपी पलटू दास पूर्व में रह चुका है नक्सल संगठन का सक्रिय सदस्य.
दिनांक 11.06.2026 को सिटी कोतवाली जशपुर पुलिस के द्वारा बूमतेल सरनाटोली जंगल में दो बंदूकधारियों के द्वारा लोगों को डराकर पैसे मांगने की सूचना पर की गई थी घेराबंदी.
पुलिस को देख हथियार छोड़ कर भाग गए थे आरोपी, पुलिस ने मौके से एक इंसास रायफल मैगजीन लगा हुआ, एक कंट्री मेड रायफल मय मैगजीन, एक देसी कट्टा, 06 नग जिंदा कारतूस, 04 नग लोहे का बना बोल्ट, एक हथौड़ी, एक तलवार, एक कैंची सहित आरोपियों के द्वारा छोड़े गए बैग व कुछ दस्तावेजों को जप्त किया था.
मामले में पुलिस के द्वारा आरोपियों के विरुद्ध सिटी कोतवाली जशपुर में आर्म्स एक्ट की धारा 25,27 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया था जांच विवेचना में.
विवेचना के दौरान पुलिस के द्वारा मामले से जुड़े दोनों आरोपियों को चिन्हित कर लिया था, जिनकी पहचान हृदय साहू उर्फ गांगु निवासी ग्राम लूँगा पंचायत केमटे, थाना रायडीह, जिला गुमला झारखंड, व पलटू दास उम्र 36 वर्ष निवासी ग्राम सकरा थाना कुरूमगढ़ जिला गुमला झारखंड के रूप में हुई थी.
नाम गिरफ्तार फरार आरोपी – पलटू दास उम्र 36 वर्ष निवासी ग्राम कुरूम गढ़, जिला गुमला, झारखंड.
जशपुर :जशपुर पुलिस ने अवैध हथियारों के साथ फरार चल रहे आरोपी पलटू दास को तकनीकी विश्लेषण और साइबर इनपुट की मदद से मुंबई से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी पूर्व में नक्सल संगठन से जुड़ा रहा है और पुलिस घेराबंदी के दौरान इंसास रायफल समेत कई हथियार छोड़कर फरार हो गया था। मामले में एक अन्य आरोपी पहले ही जेल भेजा जा चुका है, जबकि अब पुलिस रिमांड में आरोपी से गहन पूछताछ जारी है।
जानकारी के अनुसार मामले का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 11.06.2026 को थाना सिटी कोतवाली जशपुर पुलिस को सूचना प्राप्त हुई थी कि बूमतेल सरनाटोली जंगल क्षेत्र में दो सशस्त्र व्यक्ति हथियारों के बल पर राहगीरों को भयभीत कर उनसे पैसों की मांग कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस द्वारा तत्काल घेराबंदी कर सर्च अभियान चलाया गया। पुलिस को आता देख दोनों आरोपी अपने हथियार एवं अन्य सामान मौके पर छोड़कर जंगल का फायदा उठाते हुए फरार हो गए थे।
पुलिस ने घटना-स्थल से एक इंसास रायफल मैगजीन सहित, एक होममेड रायफल मय मैगजीन, एक देसी कट्टा, 06 नग जिंदा कारतूस, 04 नग लोहे के बोल्ट, एक हथौड़ी, एक तलवार, एक कैंची, आरोपियों के बैग तथा अन्य दस्तावेज बरामद कर जब्त किए थे। मामले में थाना सिटी कोतवाली जशपुर में आर्म्स एक्ट की धारा 25 एवं 27 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
विवेचना के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान हृदय साहू उर्फ गांगु निवासी ग्राम लूँगा, थाना रायडीह, जिला गुमला (झारखंड) तथा पलटू दास (उम्र 36 वर्ष) निवासी ग्राम सकरा, थाना कुरूमगढ़, जिला गुमला (झारखंड) के रूप में की। लगातार प्रयासों के दौरान पुलिस ने आरोपी हृदय साहू को पूर्व में उसके गृहग्राम से गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया था, जबकि दूसरा आरोपी पलटू दास घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था।
फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जशपुर पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। इसी दौरान तकनीकी विश्लेषण एवं साइबर इनपुट व लोगों से प्राप्त सूचना के आधार पर जानकारी मिली कि आरोपी पलटू दास मुंबई में छिपा हुआ है। इस पर डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के निर्देशन में विशेष पुलिस टीम गठित कर मुंबई भेजी गई। पुलिस टीम ने आरोपी को मुंबई से हिरासत में लेकर जशपुर लाया, जहां उससे विस्तृत पूछताछ की गई।
पूछताछ में आरोपी पलटू दास ने अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उसकी पहचान सह-आरोपी हृदय साहू से उसके जीजा के गांव लूँगा में हुई थी। दोनों ने हथियारों के बल पर लोगों को डराकर अवैध रूप से पैसे वसूलने की योजना बनाई। आरोपी अपने साथ इंसास रायफल एवं देसी कट्टा लेकर आया था तथा होममेड रायफल हृदय साहू को दी थी। दोनों जंगल के रास्ते छत्तीसगढ़ पहुंचे, जहां एक युवक एवं युवती को स्वयं को पार्टी का सदस्य बताकर डराया-धमकाया और उनके परिजनों से 30 हजार रुपये मंगवाकर उन्हें छोड़ दिया। इसके बाद दोनों ने उक्त राशि का आपस में बंटवारा कर लिया।
आरोपी ने पूछताछ में यह भी बताया कि जंगल में पुटू (मशरूम) बीनने आई दो युवतियों को भी हथियार दिखाकर डराया तथा उनका भोजन खा लिया। इसके बाद लावा नदी क्षेत्र में घूमते हुए खेत में काम कर रहे लोगों से भी भोजन लिया। इसी दौरान पुलिस का सर्च अभियान शुरू हो गया। पुलिस को आता देख दोनों आरोपी अपने हथियार एवं अन्य सामान छोड़कर जंगल के रास्ते फरार हो गए। लगातार पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पलटू दास मुंबई जाकर छिप गया था।
हथियारों के संबंध में पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह पूर्व में एक नक्सली कमांडर के समूह के संपर्क में रहा था। उसने यह भी बताया कि वर्ष 2012 में जंगल क्षेत्र में चट्टान के नीचे छिपाकर रखे गए हथियार उसने अपने कब्जे में ले लिए थे। इस संबंध में पुलिस द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक रियलमी मोबाइल फोन भी जब्त किया है। पूछताछ के दौरान आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार करने तथा पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक मोरध्वज देशमुख, उपनिरीक्षक नसीरुद्दीन अंसारी, आरक्षक उपेंद्र सिंह एवं नगर सैनिक थानेश्वर देशमुख की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
ठोस कार्ययोजना के उचित क्रियान्वयन से मिली कामयाबी
आलेख … जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर, छ .ग .
रायपुर : खेल स्पर्धाओं के आयोजन को शाबासी तब दी जाती है जब पूरे टूर्नामेंट के दौरान आवास, परिवहन, भोजन और मुकाबला सब कुछ व्यवस्थित अनुशासित ढंग से संपन्न होता है। पुरुषों की फीफा विश्वकप 2026 के आयोजन का जिम्मा जब इतिहास में पहली बार उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के तीन देशों संयुक्त राज्य अमेरिका,कनाडा व मैक्सिको को सौंपी गई तो आयोजनकर्ताओं पर बड़ी चुनौती आ गई। बहुखेल प्रतियोगिता में सबसे प्रमुख आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल है। इसमें 200 से अधिक देश भाग लेते हैं तथा अब 31 कोर गेम्स के अलावा अधिकतम चार और खेलों को शामिल करने की स्वीकृति अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक परिषद दे सकती है। इसी तरह राष्ट्रमंडल खेलों में 70 से अधिक देश इसके अलावा महाद्वीपीय चैंपियनशिप में एशिया, यूरोप, अफ्रीका के 50-50 से अधिक देशों के खिलाड़ी भाग लेते हैं। इन स्पर्धाओं में आम तौर पर 30 से अधिक खेलों के करीब 320 इवेंट होते हैं। जिसमें खिलाड़ियों की संख्या 8 हजार से 12 हजार तक हो सकती है। उपरोक्त बहुखेल टूर्नामेंट में निर्णायकों, विभिन्न देशों के खेल संगठनों के प्रतिनिधियों, प्रशिक्षकों, अतिथियों आदि को मिलाकर लगभग 20 हजार विशिष्टजनों के ठहरने, खान-पान, आने जाने आदि की व्यवस्था आयोजन समिति को करना होता है। बहुखेल चैंपियनशिप और फीफा विश्वकप 2026 के आयोजन में विशेष अंतर यह था कि आम तौर पर बहुखेल स्पर्धा किसी एक देश में होती है जबकि फुटबाल विश्वकप तीन देशों में हुआ। उसमें मान्यता प्राप्त 206 में से 48 टीम ने मुख्य प्रतियोगिता हेतु योग्यता हासिल किया . आयोजक 16 शहरों के आयोजन स्थल में संयुक्त राज्य अमेरिका के 11 कनाडा के 02 तथा मैक्सिको के 03 शहर में मैच खेले गये। तीन अलग-अलग जगह पर मुकाबले होने के कारण खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, प्रशिक्षक दल के सदस्यों, निर्णायकों , खेल संघ के पदाधिकारियों, तकनीकी अधिकारियों, आदि अतिथियों को इस देश से उस देश, उस देश से इस देश तक फिर एक स्टेडियम से दूसरे स्टेडियम तक लाना ले जाना पड़ता था । इस प्रकार पहले चक्र के देशों के खिलाड़ियों व टीम से जुड़े हुए सदस्यों की पूरी व्यवस्था, तत्पश्चात आरंभिक चरण,बाद ने राउंड ऑफ 32,16,
क्वार्टरफायनल,सेमीफायनल और फायनल तक टीम के आवागमन, संचार और देशों के हिसाब से भोजन व्यवस्था करना एवरेस्ट फतह कर लेने से कम नहीं था। विश्वकप 2026 की समाप्ति के बाद व्यवस्था के संबंध में अब तक किसी तरह की गंभीर शिकायत फुटबाल के विश्व स्तर पर सुचारु रूप से संचालन के लिए जिम्मेदार संस्था फीफा को नहीं की गई है। सचमुच आयोजनकर्ताओं के लिए यह एक सुखद और सपने को पूरा होने जैसी खबर है।इसके अलावा पूरे जगत में कही भी 50 से अधिक देशों की होने वाली प्रतियोगिता के आयोजनकर्ताओं के लिए सीखने, जानने, समझने लायक उदाहरण है। फीफा विश्वकप 2026 की सफलता के पीछे की जानकारी गत दिनों फीफा द्वारा सार्वजनिक की गई है। 48 देशों के 1248 खिलाड़ियों की देखरेख और स्टेडियम में सभी 104 मैच को देखने वाले 68 लाख दर्शकों को व्यवस्थित ढंग से स्टेडियम में उनकी जगह तक पहुंचाना, टिकट में अंकित नम्बर के अनुसार सही स्थान पर बैठाना जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी . पूर्व निर्णय और कई बार अभ्यास के अनुसार प्रतियोगिता को संपन्न कराने के लिए पूरे नार्थ अमेरिका महाद्वीप के 645 चुने हुए अधिकारिक स्थानों में करीब तीन लाख स्वीकृत व्यक्तियों ने खुले मन से उच्च स्तरीय सहयोग प्रदान किया। 39 दिनों तक चले 104 मैच वाले इस चैंपियनशिप के लिए फीफा के 2500 व्यक्तियों का कार्यबल,दुनिया भर से चुने और प्रशिक्षित 43000 स्वयं सेवक, 73700 स्वीकृत व्यक्तियों के सुरक्षा दल की मदद ली गई। तीन देशों के 16 शहर में 48 बैस कैंप बनाये गये थे। इसके अलावा सभी स्टेडियम विश्व स्तरीय तैयार किए गये थे जिसमें सर्व सुविधा के साथ अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था सम्मिलित थी। सीधे प्रसारण के लिए डलास शहर में मीडिया सिटी बनाई गई थी। प्रोडक्शन के लिए 5000 कैमरा लगाये गये थे। इस तरह स्पष्ट है कि किसी अंतर्राष्ट्रीय आयोजन को पूर्णतः सफल बनाने के लिए समय पूर्व कार्य योजना बनाई गई। जिसकी तैयारी अभूतपूर्व ढंग से की गई इसी वजह से फीफा का यह आयोजन बिना किसी व्यवधान के पूर्ण हुआ।
रायगढ़ में विकास को मिल रही नई रफ्तार, हर क्षेत्र में मजबूत हो रही सुविधाओं की नींव: वित्त मंत्री ओपी चौधरी
वार्ड 28 पंजरी प्लांट में 33 लाख रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन, वार्ड 9 नवागढ़ी में 8 लाख रुपए के शेड का लोकार्पण
रिंग रोड, नालंदा परिसर, नर्सिंग एवं फिजियोथेरेपी महाविद्यालय सहित शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता
पंजरी प्लांट में ऑक्सीजोन और ओपन जिम की घोषणा, ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत किया पौधारोपण
रायपुर : प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने के साथ रायगढ़ शहर में नागरिक सुविधाओं और अधोसंरचना के विस्तार के लिए भी लगातार योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओपी चौधरी ने आज रायगढ़ प्रवास के दौरान नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि शासन की प्राथमिकता ऐसे विकास कार्यों को धरातल पर उतारना है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिले और रायगढ़ आने वाले वर्षों में आधुनिक, सुविधायुक्त एवं व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित हो।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने वार्ड क्रमांक 28 पंजरी प्लांट में 33 लाख रुपए की लागत से सामुदायिक भवन एवं शासकीय स्कूल में बाउंड्रीवाल निर्माण का भूमिपूजन किया। वहीं वार्ड क्रमांक 9 नवागढ़ी में 8 लाख रुपए की लागत से निर्मित शेड का लोकार्पण किया। इन विकास कार्यों से स्थानीय नागरिकों को सामुदायिक गतिविधियों, शिक्षा एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।
समग्र विकास के साथ नागरिक सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने कहा कि रायगढ़ के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। विकास का उद्देश्य केवल बड़े निर्माण कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसी सुविधाएं विकसित करना है, जिनसे आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि आने वाले वर्षों में रायगढ़ शहर में 10 ऑक्सीजोन विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे शहर में हरित क्षेत्र का विस्तार होगा और नागरिकों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऑक्सीजोन के साथ सार्वजनिक स्थलों पर स्वास्थ्य, व्यायाम एवं मनोरंजन से जुड़ी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जाएगा।
रिंग रोड से मजबूत होगी शहर की अधोसंरचना
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ की बढ़ती जरूरतों और यातायात के दबाव को देखते हुए शहर की अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए बड़े प्रोजेक्ट पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 600 करोड़ रुपए की लागत से रिंग रोड के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। रिंग रोड के निर्माण से शहर के यातायात को बेहतर बनाने के साथ ही भविष्य के अधोसंरचना विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में नालंदा परिसर का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण और सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा जिले में नर्सिंग महाविद्यालय एवं फिजियोथेरेपी महाविद्यालय खोलने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि रायगढ़ में प्रयास विद्यालय पहले से संचालित है और आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि जिलेवासियों को उच्च गुणवत्ता की सुविधाओं के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।
पंजरी प्लांट में ऑक्सीजोन और ओपन जिम की सौगात
पंजरी प्लांट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने क्षेत्रवासियों के लिए पर्यावरण एवं स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण सौगात की घोषणा की। उन्होंने उपभोक्ता फोरम के पास ऑक्सीजोन विकसित करने तथा ओपन जिम स्थापित करने की घोषणा की। इससे क्षेत्र के नागरिकों को हरित वातावरण के साथ व्यायाम एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का आह्वान करते हुए कहा कि हरित रायगढ़ के निर्माण में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर महापौर श्री जीवर्धन चौहान, सभापति श्री डिग्रीलाल साहू, श्री सुरेश गोयल, श्री पावन अग्रवाल, श्री आशीष ताम्रकार सहित पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में ‘हर घर तिरंगा’ और ‘वंदे मातरम्’ अभियान की धूम
7 से 17 अगस्त तक आयोजित होंगे राज्यस्तरीय देशभक्ति कार्यक्रम
रायपुर : देश भर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान 9 से 17 अगस्त 2026 तक मनाया जा रहा है। इस वर्ष यह राष्ट्रव्यापी उत्सव ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के स्मरणोत्सव को समर्पित है, जिससे देशभक्ति का माहौल और अधिक बढ़ गया है । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में इस वर्ष का स्वतंत्रता पर्व जनभागीदारी और राष्ट्रप्रेम का व्यापक जनआंदोलन बनने जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 7 से 17 अगस्त तक प्रदेशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान, ‘वंदे मातरम्’ गायन और विभिन्न सांस्कृतिक व देशभक्ति कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया जाएगा।
9 से 17 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा’ और 7 से 15 अगस्त तक ‘वंदे मातरम्’ गायन
संस्कृति विभाग के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में 9 से 17 अगस्त 2026 तक ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाया जाएगा, जबकि 7 से 15 अगस्त तक ‘वंदे मातरम्’ गायन और संबंधित सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होंगी। 15 अगस्त को ध्वजारोहण के बाद पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर सामूहिक राष्ट्रगान और वंदे मातरम् गायन होगा।
तिरंगा यात्राएं, रैलियां और मैराथन
अभियान के दौरान सभी जिला मुख्यालयों, विकासखंडों, ग्राम पंचायतों और शैक्षणिक संस्थानों में तिरंगा यात्राएं, बाइक व कार रैलियां, मशाल रैलियां तथा तिरंगा मैराथन आयोजित की जाएंगी। इनमें जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों, पुलिस, NCC, NSS, स्काउट-गाइड और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रहेगी।
तिरंगा सेल्फी, कॉन्सर्ट और ऑडियो-वीडियो बूथ
तिरंगा सेल्फी नागरिक अपने घरों पर फहराए गए तिरंगे के साथ सेल्फी लेकर ‘हर घर तिरंगा’ पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। सार्वजनिक स्थलों पर तिरंगा कैनवास, तिरंगा मेले और देशभक्ति कॉन्सर्ट आयोजित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्वदेशी उत्पादों व कारीगरों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। प्रदेशभर में ऑडियो और वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक स्वयं वंदे मातरम् गाकर अपनी रिकॉर्डिंग अपलोड कर सकेंगे।
14 अगस्त को मनाया जाएगा ‘विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस’
14 अगस्त को भारत विभाजन की विभीषिका और स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए विशेष प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इस अवसर पर राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर देशभक्ति गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
एडीबी के सहयोग से ‘अंजोर लाइट’ तकनीकी सहायता परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी
छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के प्रभावी क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग और मूल्यांकन को मिलेगी नई गति
15 करोड़ रुपये की पूर्णतः अनुदान आधारित परियोजना, राज्य सरकार पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त वित्तीय भार
लोक वित्त प्रबंधन, पीपीपी, ग्रीन फाइनेंस, एआई आधारित क्षमता विकास और संस्थागत सुधारों पर रहेगा विशेष फोकस
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद् की बैठक में वित्त विभाग के उस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से ‘Anjor LIGHT (Anjor Linked Implementation & Guidance for Holistic Tracking)’ तकनीकी सहायता परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का पूर्णतः अनुदान (Grant) प्राप्त होगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के प्राथमिकता एजेंडा के प्रभावी क्रियान्वयन, पर्यवेक्षण (Monitoring) एवं मूल्यांकन (Evaluation) को सुदृढ़ बनाएगी।
यह बहु-क्षेत्रीय तकनीकी सहायता परियोजना 1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029 तक तीन वर्षों के लिए संचालित होगी। परियोजना का समन्वय आर्थिक कार्य विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार के माध्यम से किया जाएगा, जबकि राज्य स्तर पर वित्त विभाग नोडल विभाग होगा। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संचालनालय संस्थागत वित्त को सौंपी जाएगी तथा प्रभावी मॉनिटरिंग एवं समन्वय के लिए प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट (PMU) का गठन किया जाएगा।
इस परियोजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के क्रियान्वयन को संस्थागत रूप से सशक्त बनाते हुए राज्य में समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत लोक वित्त प्रबंधन (Public Financial Management) को मजबूत किया जाएगा, विजन दस्तावेज में चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए परियोजना पाइपलाइन तैयार होगी तथा संस्थागत एवं नीतिगत सुधारों का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही आउटकम बजटिंग, रियायती जलवायु वित्त (Concessional Climate Funds), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित संस्थागत क्षमता विकास, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देने तथा पर्यावरण पुनर्स्थापन एवं जलवायु अनुकूल संसाधन प्रबंधन के लिए तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों के लिए प्राथमिकता आधारित निर्माण एवं विकास परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार की जाएगी। बजटिंग और प्रोक्योरमेंट सुधारों के माध्यम से सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। राज्य सरकार को नीतिगत निर्णयों के लिए सतत व्यापक आर्थिक एवं राजकोषीय (Macro-Fiscal) विश्लेषण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (SOEs) की वित्तीय स्थिति, ऋण संधारणीयता तथा लाभप्रदता को मजबूत करने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा तथा हाइब्रिड फाइनेंसिंग तक उनकी पहुंच बढ़ाने हेतु आवश्यक नीतिगत सुधार किए जाएंगे। विजन-2047 के प्राथमिकता क्षेत्रों में कॉन्सेप्ट प्लान, व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Studies) तथा तकनीकी सहायता के माध्यम से नई पीपीपी परियोजनाओं का विकास भी किया जाएगा।
परियोजना से राज्य को अनेक दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होंगे। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के अनुरूप प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण परियोजना पाइपलाइन तैयार होगी। सार्वजनिक वित्त प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा मिलेगा तथा आउटकम आधारित बजटिंग, ग्रीन बजटिंग और जलवायु अनुकूल विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के लिए आवश्यक नीतियां, दिशानिर्देश, फ्रेमवर्क, क्षमता निर्माण और व्यवहार्यता अध्ययन तैयार होने से राज्य में निवेश का अनुकूल वातावरण विकसित होगा।
इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह पूरी तरह एडीबी के अनुदान पर आधारित है। इसके लिए राज्य शासन अथवा भारत सरकार को किसी प्रकार का वित्तीय अंशदान नहीं देना होगा। परिणामस्वरूप राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, जबकि संस्थागत क्षमता निर्माण, निवेश संवर्धन, हरित एवं सतत विकास तथा छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति को नई गति मिलेगी।
रायपुर : छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वर्ष 2020 एवं 2024 बैच के परिवीक्षाधीन अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आदेश के अनुसार अधिकारी लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में फेज-2 प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद 21 अगस्त 2026 से अपने नए पदों पर कार्यभार ग्रहण करेंगे।
जारी आदेश के तहत आईएएस (2020 बैच) के अधिकारी अनिकेत अशोक फंडरे, जो वर्तमान में जशपुर में सहायक कलेक्टर हैं, उन्हें कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के पद पर पदस्थ किया गया है।
वहीं आईएएस (2024 बैच) के अधिकारियों में अरविंद कुमार टी. को बिलासपुर से डभरा (जिला सक्ती), अक्षय चौधरी को रायगढ़ से डोंगरगढ़ (जिला राजनांदगांव), क्षितिज गुरभेले को कोरबा से घरघोड़ा (जिला रायगढ़) तथा विष्णु डेहरे को बस्तर से कटघोरा (जिला कोरबा) में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव द्वारा जारी इस आदेश के साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्धारित तिथि पर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य शासन का यह प्रशासनिक फेरबदल जिला स्तर पर प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी तथा सुचारु बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एसडीओपी जशपुर चंद्रशेखर परमा को भावभीनी विदाई, निमितेश सिंह ने संभाला एसडीओपी जशपुर का पदभार.
डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित जिले के पुलिस अधिकारियों ने दी विदाई एवं किया स्वागत.
छत्तीसगढ़ शासन के स्थानांतरण आदेश के तहत हुआ पदस्थापन,नवपदस्थ एसडीओपी से जनहित एवं उत्कृष्ट पुलिसिंग की अपेक्षा की गई व्यक्त.
जशपुर :जशपुर पुलिस महकमे में प्रशासनिक फेरबदल के तहत एसडीओपी चंद्रशेखर परमा को भावभीनी विदाई दी गई, जबकि निमितेश सिंह ने नए एसडीओपी के रूप में पदभार संभाल लिया। पुलिस कार्यालय में आयोजित गरिमामय समारोह में डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने दोनों अधिकारियों का सम्मान किया। नवपदस्थ एसडीओपी से जनहित, प्रभावी कानून-व्यवस्था और उत्कृष्ट पुलिसिंग को नई मजबूती मिलने की आशा व्यक्त की गई।
ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ शासन, गृह (पुलिस) विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर के आदेश क्रमांक ESTB-102(2)/528/2026 दिनांक 20.07.2026 के अनुसार एसडीओपी जशपुर श्री चंद्रशेखर परमा का स्थानांतरण एसडीओपी सरायपाली के पद पर किया गया है। वहीं नगर पुलिस अधीक्षक (सिविल लाइन), बिलासपुर श्री निमितेश सिंह को एसडीओपी जशपुर के पद पर पदस्थ किया गया है।
इसी क्रम में पुलिस कार्यालय जशपुर में गरिमामय विदाई एवं स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में श्री चंद्रशेखर परमा को उनके स्थानांतरण पर भावभीनी विदाई दी गई तथा श्री निमितेश सिंह का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें एसडीओपी जशपुर का पदभार ग्रहण कराया गया।
इस अवसर पर डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री राकेश कुमार पाटनवार, जिले के समस्त राजपत्रित अधिकारी, एसडीओपीगण, थाना एवं चौकी प्रभारी तथा पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
विदाई समारोह में उपस्थित अधिकारियों ने श्री चंद्रशेखर परमा के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, जनसंपर्क एवं पुलिसिंग को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके उत्कृष्ट कार्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नवीन पदस्थापना हेतु शुभकामनाएं एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं दी।
इस अवसर पर डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह ने नवपदस्थ एसडीओपी श्री निमितेश सिंह का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके अनुभव एवं नेतृत्व में जशपुर अनुविभाग में कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि श्री सिंह आमजन से बेहतर संवाद स्थापित करते हुए अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, त्वरित पुलिस कार्रवाई तथा जनहित में उत्कृष्ट पुलिसिंग को प्राथमिकता देंगे।
नवपदस्थ एसडीओपी श्री निमितेश सिंह ने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा व्यक्त विश्वास के लिए आभार प्रकट करते हुए कहा कि वे जशपुर जिले की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा पुलिस एवं जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करेंगे।
रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण( सीजीएसडीएमए) में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) एवं राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के अधिकारियों के साथ संयुक्त समीक्षा बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित की गई।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमति शम्मी आबिदी ने बताया कि राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मानसून अवधि की तैयारियों तथा आपदा प्रतिक्रिया तंत्र के बारे में बताया। राज्य में बाढ़, अतिवृष्टि, आकाशीय बिजली एवं भूस्खलन जैसी मौसमी आपदाओं की तैयारियों की समीक्षा की। राज्य एवं जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की कार्यप्रणाली तथा समन्वय व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों ने जानकारी दी। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ एवं जिला प्रशासन के मध्य त्वरित प्रतिक्रिया एवं समन्वय को और सुदृढ़ बनाने पर विचार किया गया। इसी तरह से पूर्व चेतावनी प्रणाली सचेत प्लेटफॉर्म एवं सेल ब्रॉडकास्ट आधारित अलर्ट प्रणाली की प्रभावी उपयोग की भी समीक्षा की गई। एनडीएमए के संयुक्त सलाहकार श्री संजीव सही द्वारा राज्य में किये जा रहे आपदा प्रबंधन कार्यों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग पर प्रकाश डाला।
मॉक एक्सरसाइज, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता तथा संसाधनों की उपलब्धता पर चर्चा हुई। इसी तरह से आगामी मानसून अवधि के दौरान संवेदनशील जिलों में बेहतर समन्वय एवं त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने, पूर्व तैयारी को मजबूत करने तथा किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।