सौतेली माँ की बेरहमी से हत्या, बेटे को उम्रकैद – कुनकुरी कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

कुनकुरी, 13 सितम्बर 2025 जशपुर जिले के कुनकुरी में न्यायपालिका ने त्वरित न्याय की ऐतिहासिक मिसाल पेश की है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के बाद हत्या जैसे गंभीर अपराध के मामले में महज़ छह माह के भीतर फैसला सुनाते हुए अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

इस मामले की सुनवाई द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, कुनकुरी माननीय श्री बलराम कुमार देवांगन की अदालत में हुई। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने की।


घटना 28 दिसम्बर 2024 की रात लगभग 2:30 बजे की है। ग्राम खुटगांव उरांवपारा, थाना फरसाबहार (जशपुर) में रहने वाला मुनेश्वर राम (40 वर्ष) अपनी सौतेली माँ एतवारी बाई पर गुस्सा हो उठा। विवाद इतना बढ़ा कि उसने घर में रखी धारदार टांगी उठाई और महिला के सिर व शरीर पर कई प्रहार कर दिए। एतवारी बाई की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने अपराध छिपाने के लिए खून से सनी टांगी और अपने कपड़े पास की ईब नदी किनारे झाड़ियों में छिपा दिए।


घटना का खुलासा मृतका के पति और आरोपी के पिता धोधे राम (65 वर्ष) ने किया। उन्होंने देर रात थाना फरसाबहार पहुँचकर पुलिस को पूरी जानकारी दी। तुरंत मौके पर पहुँची टीम ने मर्ग इंटीमेशन दर्ज किया और FIR कायम की।


विवेचना की ज़िम्मेदारी उपनिरीक्षक विवेक कुमार भगत को सौंपी गई। मौके से टॉर्च, टूटी चूड़ियाँ और खून सनी मिट्टी बरामद की गई। आरोपी का मेमोरेण्डम कथन दर्ज कर उसकी निशानदेही पर टांगी, टी-शर्ट और लूंगी बरामद किए गए। जब्त सभी वस्तुओं को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा गया, जहाँ रिपोर्ट में रक्त की पुष्टि हुई। पंचनामा, मौका नक्शा, गवाहों के बयान और वीडियोग्राफी जैसी सभी आवश्यक कानूनी कार्यवाहियाँ की गईं।


जांच पूरी होने के बाद अभियोग पत्र 06 फरवरी 2025 को JMFC कुनकुरी के समक्ष पेश किया गया। बाद में यह मामला सत्र न्यायालय कुनकुरी को सुनवाई हेतु सौंपा गया। सुनवाई के दौरान पाँच अभियोजन साक्षियों के बयान दर्ज किए गए। इनमें मृतका का पति धोधे राम, पड़ोसी और विवेचना अधिकारी शामिल थे। आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए झूठा फँसाए जाने का दावा किया, लेकिन कोई बचाव साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।


माननीय न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद 11 सितम्बर 2025 को निर्णय सुनाया।

  • धारा 103(1) BNS (हत्या): आजीवन कारावास + ₹1000 जुर्माना (अदा न करने पर 6 माह का सश्रम कारावास)
  • धारा 238 BNS (साक्ष्य विलोपन): 3 वर्ष सश्रम कारावास + ₹500 जुर्माना (अदा न करने पर 1 माह का सश्रम कारावास)

अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी। साथ ही आरोपी की 8 माह 13 दिन की न्यायिक अभिरक्षा अवधि को अंतिम सजा में समायोजित करने के निर्देश दिए।


  • मृतका के पति को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत प्रतिकर दिलाने का आदेश।
  • जप्त वस्तुएँ (टांगी, कपड़े, चूड़ियाँ, टॉर्च आदि) अपील अवधि के बाद नष्ट की जाएँगी।
  • जेल अधीक्षक को सजा वारंट के साथ निर्णय की प्रति भेजने के निर्देश दिए गए।

अदालत ने माना कि हत्या का यह अपराध गंभीर और क्षमा योग्य नहीं है, लेकिन “विरलतम से विरल” श्रेणी का नहीं है। इसलिए मृत्युदण्ड देने की आवश्यकता नहीं है।

महत्वपूर्ण यह है कि भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद यह प्रकरण साबित करता है कि अब हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी त्वरित सुनवाई और न्याय संभव है।
घटना से लेकर निर्णय तक महज़ 6 माह का समय लगा, जो न्यायिक सुधार की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

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