वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लाडियस की विशेष टिप्पणी: ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में निडरता और साहस ही विजेता बनाते हैं, अल्काराज और रायबाकिना की जीत से मिली प्रेरणा

निडर होकर करें विपक्षी का सामना : आस्ट्रेलियन ओपन 2026, महिला वर्ग में एलेना रायबाकिना, पुरुष वर्ग में कार्लोस अल्काराज विजेता

रायपुर : भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे लोकप्रिय खेल के सामने अन्य खेल और उनके कुछ खिलाडिय़ों की उपलब्धि गुमनामी में खो गई है। इनमें से एक है आस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस के मुकाबले। इसमें सबकी नजरें पुरुष वर्ग के विजेता की ओर लगी रही। इसकी वजह थी सर्बिया के नोवाक जोकाविच जैसे टेनिस के महान पुरुष खिलाड़ी इस बार कैसे खेलेंगे? क्या वे 2026 के पहले ग्रेंडस्लेम टाइटिल पर कब्जा जमा सकेंगे? अगर वे इस बार एकल में चैंपियन बन गये तो टेनिस के इतिहास में 25 टाइटिल जीतने वाले पहले खिलाड़ी होंगे? 38 वर्षीय जोकोविच जहां अपने खेल जीवन के उतार पर हैं वहीं फायनल में पहुंचने वाले स्पेन के कार्लोस अल्काराज पर भी प्रश्न उठा है क्या वे ग्रैंडस्लेम के इस टाइटिल पर कब्जा जमा सकेंगे? ऐसा वे कर पाते हैं तो वे अपने चार वर्ष के छोटे से खेल जीवन में केरियर ग्रेंडस्लेम जितने वाले विश्व के आठवें खिलाड़ी होंगे।

इस सूची में 1935 में फ्रेड पेरी, 1938 में डॉन बज, 1962 में रॉड लेवर ,1964 में रॉय एमरसन,1999 में आंद्रे अगासी,2009 में रोजर फेडरर 2009 में राफेल नडाल,2015 में नोवाक जोकोविच थे . कोई खिलाड़ी आस्ट्रेलियन ओपन, विम्बल्डन, फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन का खिताब जीत लेता है तो उसे कैरियर ग्रैंडस्लेम पूरा करना कहते हैं। एक साल में चारों ग्रैंड स्लैम टाइटिल जीतने वाले को ग्रैंडस्लैम विजेता विजेता पुकारा जाता है. उपरोक्त सूची में से सिर्फ डॉन बज और रोड लेवर सिर्फ दो ऐसे पुरुष खिलाड़ी हैं जिन्होंने टेनिस ले इतिहास में अब तक ग्रैंड स्लैम टाइटिल प्राप्त किया है.इस तरह इन दोनों खिलाडिय़ों के लिए यह मैच बहुत ही महत्वपूर्ण था। अलकारेज सिर्फ छ: ग्रैंडस्लेम जीत चुके हैं जिनमें यूएस ओपन, विम्बल्डन तथा फ्रेंच ओपन का खिताब दो-दो बार जीता है।

बहुत से विद्वानों ने कहा है कि अपने प्रतिद्वंद्वी को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए। विपक्षी का मुकाबला साहस के साथ करना चाहिए। खेल में पिछडऩे के बाद हिम्मत नहीं हारना चाहिए और प्रतिद्वंद्वी को गलती करने के लिए बाध्य करना चाहिए। स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों नहीं बल्कि अपने दिल की आवाज को सुनना चाहिए और अपने अभिभावक तथा कोच की बातों को ध्यान रखना चाहिए। जोकोविच भले ही पराजित हो गए लेकिन उनसे सीखने को मिला कि सिर्फ उम्र या अनुभव के बड़ा होने से आप विजेता नहीं हो सकते और समय आ गया है कि आप अपने टेनिस रेकेट को खूंटी में टांग दें।

विशेष लेख : जसवंत क्लाडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार

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