छत्तीसगढ़ के नाविक बन सकते हैं ओलंपिक चैंपियन : आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में शामिल केनोइंग में पदक की संभावना
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, रायपुर
रायपुर : केंद्र सरकार 2036 के ओलंपिक खेलों के आयोजन की संभावना को देखते हुए अब पूरे भारत में खेलकूद का वातावरण बनाने की कोशिश कर रहा है। हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी स्वयं भारत की खेल प्रतिभाओं को चुनकर उन्हें उचित प्रशिक्षण दिये जाने के पक्षधर हैं। इसलिए उन्होंने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के नेतृत्व व मार्गदर्शन में इन दिनों भारत में खेलो इंडिया योजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत खेलो इंडिया यूथ गेम्स, खेलो इंडिया बीच गेम्स, खेलों इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, खेलो इंडिया विंटर गेम्स तथा अभी हाल ही में रायपुर में खेलों इंडिया ट्राइबल गेम्स सम्मिलित हैं।
उपरोक्त खेल गतिविधियों के संचालन की जिम्मेदारी भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली को सौंपा गया है। जिसे सांई के पदाधिकारी बखूबी निभा रहे हैं और विभिन्न तरह की खेल प्रतियोगिताएं सुचारू रूप या व्यक्तिगत रूप से संपन्न हो रही है। 2028 लास एंजिल्स के ओलंपिक खेलों में पहली बार 31 कोर गेम्स रखा गया है। 5 खेल को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है। कोर गेम्स में शामिल केनोइंग पानी में पतवार, नाव व नाविक द्वारा खेला जाने वाला खेल है। इस खेल में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद हमारे राज्य की अनेक खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं और शासकीय नौकरी केंद्र या राज्यसरकार या सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थानों में पाया है। परंतु अब सुविधा के अभाव में केनोइंग खेल में फिलहाल कमी आई है। केनोइंग संघ के राज्य के प्रमुख पदाधिकारियों में से एक प्रशांत रघुवंशी राष्ट्रीय स्तर के केनोइंग संघ में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हैं और वे इस खेल का अभ्यास कभी जगदलपुर कभी रायपुर में नियमित रूप से करवाते हैं।
वास्तव में केनोइंग एक ऐसा खेल है जिसकी स्पर्धा झील, बड़े बांध, नदी या नहर में आसानी से आयोजित की जा सकती है। इस खेल में केनोई स्प्रिंट के 10 इवेंट तथा सलालोम के 06 इवेंट होते हैं। स्प्रिंट इवेंट के अंतर्गत सी-1,1000 मीटर के नाव के दौड़ होते हैं।जिसमें एक व्यक्ति,एक नाव में एक पतवार लेकर अपनी नाव को अकेले 1000 मीटर की दूरी तक ले जाता है जो व्यक्ति पहले 1000मीटर की लाइन पार करता है वह विजेता होता है। उसे स्वर्ण, दूसरे स्थान पर आने वाले को रजत और तीसरे स्थान पर आने वाले को कांस्य पदक मिलता है। इसी तरह स्प्रिंट इवेंट के अंतर्गत सी-2,500 मी. कयाक के -1 में 1000 मीटर. के-2,500 मीटर फिर के- 4 याने 4 नाविक एक ही अलग-अलग पतवार से नौका चलाते हैं और हार जीत होती है।
इसी तरह सलालोम में कयाक क्रास में 4 नाविक 4 पतवार के: साथ एक नाव में होते हैं। इस तरह महिला व पुरुष नाविक 8 स्वर्ण, 8 रजत, 8 कांस्य कुल16 स्वर्ण,16 रजत,16 कांस्य पदक दांव पर होते हैं। छत्तीसगढ़ में न तो बांध, ना ही नदी की कमी है। जहां पर कोनोइंग खेल सीखा नहीं जा सकता। छत्तीसगढ़ भारत में ऐसे नाविकों की भी कमी नहीं है। जो नदी नालों या बांध को रोजाना पार करते हैं। इस खेल के बारे में छत्तीसगढ़ भारत के युवा नाविकों, पानी से न डरने वाले लोगों रोज नदी, नाले पार करके स्कूल या ड्यूटी में जाने वालों को बताना, समझाना जरूरी है। इससे ये नाविक छत्तीसगढ़ के साथ ही साथ भारत की तरफ से भाग लेते हुए ओलंपिक खेलों में पदक जीत सकते हैं।
उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इस केनोइंग खेल में योग्यता हासिल करने वाले देशों की संख्या ओलंपिक खेलों में भाग ले रहे 206 देशों में से सिर्फ 58 देश अर्थात कुल 48 पदक के लिए सिर्फ 58 देश के नाविक मुकाबला करते हैं। और करीब 90%पदक यूरोप के नाविक ले जाते हैं. अत: 2036 के ओलंपिक खेलों को देखते हुए केनोइंग पर विशेष ध्यान देना होगा।इस आलेख को गंभीरता से लेकर तैयारी की जाएगी तो इसमें कोई शक नहीं कि छत्तीसगढ़ के नाविक ओलंपिक पदक भारत के लिए जीतकर लाएंगे।
