खेलों भारत नीति:2025 से हम बनेंगे वैश्विक खेल महाशक्ति
भारत के जन-जन में खेल के प्रति लगाव पैदा करने की कोशिश जारी है
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी के खेल कमेंटेटर.
रायपुर : आजादी के 79 वर्षों बाद भी हमारे देश में खेलकूद का ना तो माहौल बन सका है न ही खेलकूद के महत्व को आम लोगों को समझाया जा सका है। सीधी की बात है “खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब, पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब “ऐसे मुहावरों को देश की जनता के मन मस्तिष्क में भर दिया गया हो तो उस देश के रहवासियों का खेलों के प्रति नकारात्मक विचार ही उत्पन्न होगा।
आधुनिक युग में शरीर के चुस्त दुरुस्त रहने का सीधा संबंध बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक खुशहाल रहने से हैं। जब देश-समाज के लोग स्वस्थ और फिट रहेंगे तो प्रगति अपने आप दिखाई देगी। 2000 के पहले भारत की जनता रोटी, कपड़ा, बेरोजगारी और मकान की समस्या से जूझ रही थी उसमें कितनी कामयाबी मिली गरीबी हटाओ अभियान से कितने गरीबों को लाभ पहुंचा यह एक अलग विषय है लेकिन अब देश के लिए कुछ कर गुजरने की बात आई है। देश को खेल विश्व मंच पर स्थापित करने की बात आई है।तो फिर कृषि, उद्योग, संचार,सड़क, शिक्षा, पेयजल, परिवहन, स्वास्थ्य, विज्ञान आदि क्षेत्रों में भारत की प्रगति को देखते हुए खेलकूद में मिली अंतर्राष्ट्रीय सफलता का भी आकलन जरूरी है। इसमें नौजवानों की फौज होते हुए असफलता पाना बेहद अफसोसजनक है।
2014 में केंद्र सरकार में सत्ता पलट होने के बाद माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी उपरोक्त अन्य क्षेत्रों के अलावा लगातार खेलों की ओर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इसमें कोई दो मत नहीं कि मोदी जी के लिए खेल में विश्वस्तर पर भारत की सफलता प्राथमिकता में शामिल है। इसीलिए मोदी जी खेल को भारत की आत्मा में बसा देने के लिए आतुर है। जिसके लिए उन्होंने 2014 के बाद से 2026-27 तक प्रधानमंत्री जी ने केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया के माध्यम से खेलकूद के लिए खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत करीब 6200 करोड़ रुपये, भारतीय खेल प्राधिकरण (सांईं) नई दिल्ली और खेल मंत्रालय नई दिल्ली को आबंटित किया है। खेल प्रशासकों, खेल विशेषज्ञों, पूर्व खिलाड़ियों आदि के माध्यम से विचार विमर्श के पश्चात दिसंबर में खेलो भारत नीति 2025 की घोषणा की गई है।
खेलो भारत नीति 2025 में मुख्य रूप से खेलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ जोड़ा गया है ताकि प्राथमिक शिक्षा से ही विद्यार्थी जीवन में खेल के महत्व को समझ सके। खेल में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना और विदेश में रहने वाले भारतीयों से संपर्क बताए रखना ताकि खेलकूद में चिकित्सा, दवा आत्याधुनिक उपकरणों के महत्व को समझा जा सकेगा। भारत में खेल का माहौल वास्तव में बड़े खेल आयोजनों से बनता है। भारत में 2030 में राष्ट्रमंडल खेल फिर 2036 में ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों के आयोजन की तैयारी भी इस नीति में शामिल है जिससे भारत ने वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो सकेगा। खेलो भारत नीति 2025 के क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए खेल मंत्रालय को करीब 2350 करोड़ रुपये का आवंटन 2026/27 वित्तीय वर्ष के लिए स्वीकृत किया गया है।
कहने का तात्पर्य यही है कि खेलों भारत नीति 2025 सिर्फ कोई कागजी पुलाव नहीं है। भारत की आत्मा में खेलकूद के बसाने के लिए एक ईमानदार प्रयास का प्रमाण है। इसमें विभिन्न खेलों की लीग स्पर्धाओं को और अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन करना शामिल करना है ताकि भारत के बच्चे, किशोर, युवा सभी अपनी-अपनी पसंद के खेलों में भाग ले सके। इसके साथ बचपन से ही खिलाड़ियों को उचित खान-पान की जानकारी, प्रतिबंधित दवा से होने वाली हानि को बतलाना और खेल में भाग लेने के लिए जागरूकता के केंद्र की स्थापना करना ताकि अनुसंधान के द्वारा खिलाड़ियों में कमी की जानकारी मिल सके और उसमें सुधार किया जा सके। इस प्रकार खेलों भारत नीति 2025 में निर्धारित और अन्य लाभप्रद क्रियाकलापों से भारतीय खेल परिदृश्य की तस्वीर बदल जायेगी।
