तपस्या में लीन रहे, मिल ही जाती है मंजिल : फ्रेंच ओपन 2026, एलेक्जेंडर ज्वेरिव (जूनियर) का ग्रेंड स्लेम जीतने का सपना हुआ पूरा
आलेख … जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार, टी वी कॉमेंटेटर, रायपुर.
रायपुर : जिस तरह विभिन्न धर्मों के पालन करने वालों का सपना होता है कि वे जिंदगी में कभी न कभी एक बार अपने ईष्टदेव के लिए प्रसिद्ध स्थल को प्रत्यक्ष रूप से देख सके या भ्रमण कर सके या वहां जाकर धार्मिक रस्म अदा कर सके। ठीक उसी तरह फुटबाल खिलाड़ी के लिए फीफा विश्व कप जीतना, बैडमिंटन खिलाड़ी के लिए आल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियन बनना, अपने पसंदीदा खेलों में विश्वकप जीतना एक लक्ष्य, उद्देश्य, चाहत या स्वप्न होता है. वैसे ही टेनिस में चार ग्रेंड स्लेम में सबसे अधिक महत्वपूर्ण विंबल्डन (1877) का चैंपियन बनना या अन्य तीन ग्रेंड स्लेम फ्रेंच ओपन (1891), ऑस्ट्रेलियन ओपन (1905), यू.एस. ओपन 1881 विजेता बनने की इच्छा प्रत्येक विश्व स्तरीय टेनिस खिलाड़ी में हेाती है। इन्हीं उम्मीदों को लेकर जर्मनी के एलेक्जेंडर ज्वेरिव ने 2013 में अपने जीवन को टेनिस के लिए समर्पित कर दिया। हेमबर्ग जर्मनी में 2013 में जब उनकी उम्र सिर्फ 16 वर्ष की थी तब उन्होंने टेनिस के पेशवर खिलाड़ी के रूप में दमखम दिखाना शुरू किया। 20 अप्रैल 1997 को जन्में ज्वेरिव 6 फीट 6 इंच ऊंचे हैं। कद काठी में तगड़े इस जवान ने 11वर्ष पूर्व जैसे ही टेनिस कोर्ट में कदम रखा तो टेनिस जगत में चारों तरफ चर्चा होने लगी कि अब एक और प्रतिभाशाली टेनिस खिलाड़ी मैदान में आ चुके हैं जो उस समय के प्रमुख तीन खिलाडिय़ों को चुनौती देने में सक्षम हैं। 2012 से 2021 तक के दौर में नोवोक जोकोविच, रोजर फेडरर, राफेल नाडाल जैसे खिलाड़ी ग्रेंड स्लेम के बादशाह होते थे। 2013 से 2023 तक उपरोक्त तीनों खिलाडिय़ों ने टेनिस जगत में अपना साम्राज्य बनाए रखा। इस दौर में इतिहास के पन्नों पर नजर डालने से स्पष्ट हो जाता है कि चौथे खिलाड़ी को ग्रेड स्लेम के फाइनल तक पहुंचने का अवसर नहीं मिलता था फिर कोविड 19 महामारी के पश्चात जेनिक सीनर और कार्लोस अल्काराज उभरकर आये। एक बात और उल्लेखनीय है कि ज्वेरिव के दौर में ही एक और प्रतिभाशाली खिलाड़ी रूस के डेनिएल मेदवेदेव भी हुए। उनका जन्म 11 फरवरी 1996 को हुआ. ये दोनों खिलाड़ी लगभग एक साथ उभरकर आए परंतु दुर्भाग्यशाली रहे. 2020 तक उनका सपना पूरा नहीं हो सका। डेनिएल की विश्व रैंकिंग तो अब नौ है और उन्होंने सिर्फ एक यूएस ग्रैंड स्लेम 2021 में जीता। दूसरी तरफ ज्वेरिव ने भी हिम्मत नहीं हारी और 2013 से लगातार टैनिस में सक्रिय रहते हुए आखिरकार हाल ही में सम्पन्न 2026 के दूसरे ग्रेंड स्लेम फ्रेंच ओपन में पुरुष एकल का खिताब जीत लिया। इस प्रकार उनका ग्रैंड स्लेम जीतने का सपना पूरा हो गया जिसके लिए ज्वेरिव ने पिछले 11 वर्ष तक तपस्या की थी। फिलहाल अपने खेल जीवन में वे विश्व में तीसरे स्थान पर हैं। अभी तक 25 कैरियर टाइटिल जीता है। जहां तक पुरस्कार राशि की बात है ज्वेरिव ने अब तक 627.91 करोड़ रुपये जीते हैं जो कि विश्व में किसी टेनिस खिलाड़ी द्वारा अर्जित राशि के अनुसार चौथा है। ज्वेरिव जैसे टेनिस खिलाड़ी से आज की पीढ़ी के खिलाडिय़ों को सबक लेना चाहिए कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्हें लगातार कोशिश करते रहना चाहिए। हमेशा सकारात्मक सोच के साथ खेल जारी रखना चाहिए और अपने आप पर भरोसा रखना चाहिए कि वे निरंतर मेहनत करेंगे, प्रयास करते रहेंगे तो एक दिन मंजिल तक पहुंच जाएंगे। ज्वेरिव ने कठोर अनुशासन, परिश्रम के साथ ईमानदारी से अपनी कोशिश जारी रखी आखिरकार वे विजेता बने। अत: हिम्मत ना हार चल चला चल के लय पर प्रत्येक खिलाड़ी को आगे बढऩा चाहिए। आज की युवा पीढ़ी के लिए ज्वेरिव की सफलता जीवन में कभी भी निराश नहीं होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
