कुनकुरी कोर्ट ने अब्दुल हमीद पर चलाया कानून का सबसे बड़ा हथौड़ा : फर्जी नाम बताकर मानसिक रूप से दिव्यांग युवती से दुष्कर्म करने वाले दरिंदे को उम्रकैद, अदालत बोली—ऐसे अपराधियों पर रहम की कोई गुंजाइश नहीं

यह सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली वारदात 18 सितंबर 2023 की है । कुनकुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत रहने वाली एक मानसिक रूप से निःशक्त वयस्क युवती सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच शौच के लिए खेत की तरफ गई थी । जब वह वापस लौट रही थी, तभी रास्ते में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर का मूल निवासी और वर्तमान में लोधमा (कुनकुरी) में रह रहा आरोपी अब्दुल हमीद मोटरसाइकिल लेकर उसका रास्ता रोक खड़ा हो गया । आरोपी ने अपनी असली पहचान छुपाकर पीड़िता को अपना नाम ‘राजू’ बताया और उसे बहला-फुसलाकर व डराकर अपनी बाइक पर बैठा लिया । इसके बाद वह बेबस पीड़िता को गिरहलडीह चुड़िया जंगल ले गया, जहाँ उसने मानसिक निःशक्तता का फायदा उठाकर युवती की इच्छा के विरुद्ध जबरन बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया और मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दी ।

सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने अभियोजन का पक्ष बेहद मजबूती और आक्रामकता से रखा। उन्होंने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि अभियुक्त ने न केवल एक महिला की अस्मत लूटी, बल्कि उसकी मानसिक कमजोरी का फायदा उठाया और प्रतिरूपण (पहचान छुपाकर) द्वारा छल किया। उन्होंने समाज में बढ़ रहे ऐसे अपराधों का हवाला देते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी की उम्र (25 वर्ष) और प्रथम अपराध होने का हवाला देकर रहम की भीख मांगी, लेकिन माननीय न्यायाधीश ने इसे सामाजिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए खारिज कर दिया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने बचाव पक्ष की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया । न्यायाधीश ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला देते हुए बेहद गंभीर टिप्पणी की और कहा कि किसी स्त्री पर हमला या बलात्कार एक मानसिक हिंसा है, जिसका जख्म जीवन पर्यंत रहता है । वर्तमान परिवेश में ऐसी घटनाएं समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं और महिलाओं में भय पैदा करती हैं, इसलिए आरोपी को किसी भी प्रकार की परिवीक्षा या सहानुभूति का लाभ नहीं दिया जा सकता ।

न्यायालय ने मामले को अत्यंत गंभीर पाते हुए आरोपी अब्दुल हमीद को भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत कठोरतम सजा से दंडित किया है । कोर्ट ने आरोपी को धारा 376 (बलात्कार) के तहत आजीवन कारावास और 1,000 रुपये के अर्थदंड, धारा 366 (व्यपहरण) के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड, तथा धारा 419 (पहचान छुपाकर छल करना) के तहत 03 वर्ष का सश्रम कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है । अर्थदंड की राशि न पटाने पर आरोपी को कुल 14 महीने की अतिरिक्त सश्रम जेल काटनी होगी । कोर्ट ने आदेश दिया कि ये सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और आरोपी द्वारा पूर्व में जेल में बिताए गए 318 दिनों की अवधि को इस सजा में समायोजित (Set-off) किया जाएगा ।

कुनकुरी कोर्ट का यह त्वरित और कड़ा निर्णय यह साबित करता है कि पहचान बदलकर मासूमों को शिकार बनाने वाले अपराधियों का ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल की कालकोठरी ही है ।

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