एग्रीस्टेक पंजीयन में तेजी लाएं, लंबित राजस्व प्रकरणों का करें समयबद्ध निराकरण – कलेक्टर श्री व्यास
किसानों और हितग्राहियों को मिले त्वरित लाभ
कलेक्टर ने राजस्व, कृषि और खाद्य विभाग की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में कृषि, राजस्व, सहकारिता एवं खाद्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक लेकर विभिन्न योजनाओं एवं लंबित प्रकरणों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में उन्होंने एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान पंजीयन, लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण, उर्वरकों की उपलब्धता, किसान क्रेडिट कार्ड, उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न वितरण तथा राशनकार्ड हितग्राहियों के ई-केवाईसी सहित विभिन्न विषयों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर श्री प्रदीप साहू, सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा संबंधित विभागों के जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
एग्रीस्टेक पंजीयन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता, लंबित प्रकरणों का शीघ्र करें निराकरण-
कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने बैठक में एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसानों के ऑनलाइन पंजीयन की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि किसानों का पंजीयन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित पंजीयन प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निराकरण किया जाए। उन्होंने कृषि विभाग के एसएडीओ एवं आरएईओ को राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान चलाते हुए पंजीयन कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी एसडीएम को नियमित रूप से प्रगति की निगरानी कर निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा कराने को कहा।
जनहित के राजस्व प्रकरणों में नहीं हो अनावश्यक विलंब –
बैठक में कलेक्टर ने नामांतरण, डायवर्सन, भू-अर्जन, सीमांकन, त्रुटि सुधार, स्वामित्व योजना, आरबीसी 6-4 सहित अन्य लंबित राजस्व प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि आम नागरिकों से जुड़े मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखना स्वीकार्य नहीं होगा। सभी अधिकारी पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए लोगों को समय पर राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराएं।
स्वामित्व योजना और डिजिटल राजस्व सेवाओं की हुई समीक्षा –
कलेक्टर ने स्वामित्व योजना, मसाहती गांव सर्वेक्षण, किसान पुस्तिका में आधार प्रविष्टि, डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से अभिलेख सत्यापन, भू-नक्शों के अद्यतन, भू-बंटन रिकॉर्ड दुरुस्ती तथा त्रुटि सुधार कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को तय समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि नागरिकों को डिजिटल एवं पारदर्शी राजस्व सेवाओं का लाभ मिल सके।
उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखें, किसानों को नहीं हो परेशानी –
कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण एवं समय पर वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की समस्या नहीं आनी चाहिए तथा सभी समितियों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध रहे।
किसान क्रेडिट कार्ड और माइक्रो एटीएम स्थापना में लाएं तेजी –
सहकारिता विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने किसान क्रेडिट कार्ड निर्माण की प्रगति की जानकारी लेते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्राथमिक कृषि साख समितियों में माइक्रो एटीएम स्थापना की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि आगामी धान खरीदी शुरू होने से पहले जिन समितियों में माइक्रो एटीएम उपलब्ध नहीं हैं, वहां तत्काल स्थापना की प्रक्रिया पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि माइक्रो एटीएम की सुविधा उपलब्ध होने से धान विक्रय के बाद किसानों को अपनी राशि आसानी से निकालने में सुविधा मिलेगी। बैठक में मत्स्य एवं दुग्ध उत्पादन समितियों के गठन की प्रगति की भी समीक्षा की गई तथा आवश्यक कार्रवाई शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
राशन वितरण केवल बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से करें –
खाद्य विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने जिले के सभी विकासखंडों में संचालित शासकीय उचित मूल्य दुकानों में खाद्यान्न भंडारण एवं वितरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चावल, शक्कर, नमक सहित सभी आवश्यक खाद्यान्न का शत-प्रतिशत वितरण समय पर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने राशनकार्डधारियों के ई-केवाईसी कार्य में भी तेजी लाने के निर्देश दिए तथा कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों का ई-केवाईसी समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। कलेक्टर श्री व्यास ने निर्देश दिए कि शासकीय उचित मूल्य दुकानों में राशन वितरण केवल बायोमेट्रिक थंब प्रमाणीकरण के माध्यम से किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ओटीपी आधारित वितरण के बजाय बायोमेट्रिक प्रणाली का उपयोग सुनिश्चित किया जाए, जिससे खाद्यान्न वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनी रहे।
