विजयी होने के लिए खिलाड़ियों में आत्म विश्वास भरते हैं नरेन्द्र मोदी
लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री ने भारतीय खेल तंत्र की विफलता का किया पर्दाफाश
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर. रायपुर, (छ ग).
रायपुर : भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया, खेल मंत्रालय और खेल अधिकारियों, खिलाड़ियों के समक्ष 15 अगस्त 2026 के दिन एक प्रश्न चिन्ह छोड़ दिया। जिसका उत्तर देशवासियों को सकारात्मक रूप से देना चाहिए .जैसा कि हम सब जानते हैं कि मई 2014 से जब से नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में बागडोर संभाला है। तब से वे इस बात के कारण बहुत चिंतित हैं कि आखिर क्या वजह है? जब भारतीय प्रतिभागी बहु खेल स्पर्धा के सारे विधाओं याने कि 360 विधा में से सिर्फ 120 याने एक तिहाई विधा में भाग लेते हैं तो फिर कैसे हमारे खिलाड़ी सम्मान जनक पदक जीतकर बन सकेंगे विश्व विजेता? हमारे देश की आबादी करीब 147 करोड़ हैं परंतु हमारे खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने में फिसड्डी क्यों साबित होते रहे हैं ? प्रधानमंत्री इस बात को बार बार दोहरा रहे हैं,इसमें कोई दो मत नहीं कि हमारे देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं फिर भी हमारे खिलाड़ियों को विपक्षी खिलाड़ी कैसे मात दे देते हैं? यह एक गंभीर प्रश्न है , जिस पर प्रधानमंत्री ने खेल विशेषज्ञों,पूर्व विजेताओं , खेल पत्रकारों आदि से बातचीत की और भारत के ओलंपिक पदक विजेता लेफ्टी.कर. राज्यवर्द्धन सिंह राठौर को केंद्रीय खेल मंत्री नियुक्त किया तथा विभागीय अधिकारियों और भारतीय खेल प्राधिकरण से जुड़े खेल क्षेत्र के समस्त सहयोगियों को एक साथ मिलकर समस्या का हल निकालने का जिम्मा सौंपा। आखिरकार लंबे विचार विमर्श के पश्चात इस बात का रहस्योद्घाटन हुआ कि जमीन से जुड़े खेल प्रतिभाओं की खोजकर उन्हें उचित, कठिन प्रशिक्षण दिया जाए तो भारत में अनेक खेलों के अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं . साथ ही ऐसे उदयीमान खिलाड़ियों तथा उनके अभिभावकों की रूचि खेल के प्रति बनी रहे इसलिए उन्हें खेल से संबंधित आवश्यक खेल सामग्री, पोशाक तथा खान-पान के लिए नकद धनराशि मासिक या वार्षिक आधार पर दिया जाए। इसके अलावा खेल प्रशिक्षण केंद्र में अत्याधुनिक खेल क्षेत्र तथा खेल उपकरण तथा उच्च प्रशिक्षित कोच उपलब्ध कराया जाए जिस अत्याधुनिक जिम, फिजियोथेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ, खेल से संबंधित बीमारियों, शारीरिक कमजोरी के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक आदि उपलब्ध हो। उपरोक्त बातों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतिगत ठोस निर्णय लेते हुए 2017-18 से भारत में खेलो इंडिया कार्यक्रम की शुरुवात की। इसके लिए अब तक करीब 6100 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।जिसके माध्यम से पूरे भारत के खेल संसार में हलचल मचा हुआ है। वैसे भी स्पष्ट है कि जो परिणाम अभी ओलंपिक खेलों व अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में आ रहे हैं। उसे संतोषजनक कहा जा सकता है। खेलो इंडिया को अब 2026 -27 से खेलों इंडिया मिशन का नाम दिया गया है। भारतीय खेल प्राधिकरण को प्रतियोगिता करवाने, प्रशिक्षित प्रशिक्षक उपलब्ध कराने , भारतीय ओलिंपिक संघ से अच्छे संबंध बनाकर चलने आदि के लिए पिछले 12वर्षों में 5150 करोड़ से अधिक राशि आबंटित की जा चुकी है .खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से हमारे देश में प्रधानमंत्री के सपने को साकार करने की कोशिश में सभी प्रबुद्ध जन एक मत हैं। ऐसा करने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट में भाग लेने वाले खिलाड़ियों का हौसला लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत की स्वतंत्रता 1947 से लेकर अब तक के इतिहास में ऐसा कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ जो किसी खास खेल के खिलाड़ियों को नहीं बल्कि सभी खेलों के खिलाड़ियों उनकी सफलता के लिए मीडिया के विभिन्न माध्यम से तत्काल स्वयं आगे बढ़कर बधाई देते हैं। वस्तुत: प्रधानमंत्री के इस तरह के प्यार, दुलार, पुचकार और आर्शीवाद के कारण भारत के उदयीमान विश्व स्तरीय खिलाड़ियों के अंदर किसी भी मुकाबले में जीत हासिल करने की उम्मीद जग रही है . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत माता के लिए अपनी किशोरावस्था, जवानी को दांव पर लगाने वाले खेल प्रतिभाओं के अंदर सफलता रूपी आत्मविश्वास का श्वास फूँक दिया है। बस अब आवश्यकता है जब भी हमारे देश के किसी भी खेल के खिलाड़ी विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में मुकाबला करने मैदान में उतरते हैं, पूरा देश उनकी कामयाबी के लिए अपने ईस्ट देव से प्रार्थना करे। इससे हमारे देश के खिलाड़ियों के अंदर असफलता की दुष्टआत्मा पराजित होगी और भारत माता की जयकारा विश्व में गूंजेगी।
