जशपुर में न्याय की बड़ी जीत: नाबालिग से बलात्कार और गर्भधारण के मामले में दोषी को आजीवन कारावास, पोक्सो कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
पत्थलगाँव, जशपुर : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में न्याय व्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मज़बूती का अहसास कराया है। पत्थलगाँव स्थित विशेष अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) न्यायालय ने एक गंभीर और झकझोर देने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नाबालिक से बलात्कार और कुकृत्य के दोषी को उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल (आजीवन कारावास) तक के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया है। न्यायालय के इस कड़े रुख से अपराधियों में हड़कंप मच गया है।
विशेष अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) श्री बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाम श्याम लाल यादव से संबंधित विशेष प्रकरण क्रमांक 10/2022 में यह फैसला सुनाया। इस संवेदनशील मामले में शासन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक श्री आर.पी. होता ने ठोस सबूत और अकाट्य तर्क प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी के खिलाफ जुर्म को पूरी तरह सिद्ध पाया।
क्या था पूरा प्रकरण और घटनाक्रम?
यह पूरा मामला जशपुर जिले के थाना बागबहार क्षेत्र का है। अभियोजन की कहानी के अनुसार, 05 अगस्त 2021 को आरोपी श्याम लाल यादव (पिता- राजकुमार यादव, उम्र 21 वर्ष, निवासी- महेशपुर, टोंगरीटोला, थाना बागबहार) ने 16 वर्ष से कम आयु की एक नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसलाकर और शादी करने का झांसा देकर उसके माता-पिता की संरक्षा से अपहरण कर लिया था। आरोपी ने ग्राम चोरनीटोंगरी ले जाकर नाबालिग की सहमति के बिना उसके साथ कई बार जबरन शारीरिक संबंध (बलात्संग) बनाया।
इस गंभीर कुकृत्य के परिणामस्वरूप पीड़िता गर्भवती हो गई। जब काफी समय बीतने के बाद पीड़िता के शारीरिक बदलाव (पेट फूलने) को देखकर उसकी माता ने पूछताछ की, तब इस डरावनी घटना का खुलासा हुआ। परिजनों द्वारा कांसाबेल शासकीय अस्पताल में जाँच कराने पर पीड़िता के 7 माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इसके बाद दिनांक 10 मार्च 2022 को थाना बागबहार में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कर विवेचना शुरू की और 12 मार्च 2022 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
न्यायालय की प्रक्रिया और साक्ष्य
न्यायालय में विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता, उसकी माता-पिता, चिकित्सीय विशेषज्ञों (डॉ. श्रद्धा तिर्की व डॉ. अजीत कुमार बंदे) और विवेचना अधिकारी सहित कुल 16 महत्वपूर्ण साक्षियों का परीक्षण कराया गया। साथ ही, स्कूल की दाखिल-खारिज पंजी (जिसमें पीड़िता की जन्मतिथि 26.05.2007 दर्ज थी) और चिकित्सीय रिपोर्ट को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में रिकॉर्ड पर लिया गया।
बचाव पक्ष के वकीलों (अधिवक्ता श्री आनंद सिन्हा) ने रिपोर्ट दर्ज होने में विलंब और शरीर पर चोट के निशान न होने का हवाला देकर आरोपी को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया। परंतु, माननीय न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न न्यायदृष्टांतों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जहाँ पीड़िता कम उम्र की नासमझ बालिका हो और उसके बयान पूरी तरह विश्वसनीय व अकाट्य हों, वहाँ चिकित्सकीय पुष्टि या एफआईआर में मामूली विलंब से अभियोजन की कहानी पर संदेह नहीं किया जा सकता।
अदालत का कड़ा दंडादेश और सजा का विवरण
पीठासीन न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने मामले की नृशंसता और वर्तमान समाज में बालिकाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की। न्यायालय ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में आरोपी के प्रति किसी भी तरह की सहानुभूति या उदारता बरतना न्यायसंगत नहीं है।
न्यायालय ने आरोपी श्याम लाल यादव को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363, 366 तथा पॉक्सो एक्ट, 2012 की धारा 5(ठ) सहपठित धारा 6 के तहत दोषी करार देते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:
- धारा 363 भा.द.सं. के अंतर्गत: 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000/- रुपये अर्थदंड (अदायगी न करने पर 01 माह अतिरिक्त कारावास)।
- धारा 366 भा.द.सं. के अंतर्गत: 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1,000/- रुपये अर्थदंड (अदायगी न करने पर 01 माह अतिरिक्त कारावास)।
- धारा 5(ठ)/6 पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत: आजीवन कारावास (जो कि उसके जैविक/शेष प्राकृतिक जीवन के अंत तक प्रभावी रहेगा, जिसमें किसी भी प्रकार की छूट या परिहार का लाभ नहीं मिलेगा) तथा 1,000/- रुपये अर्थदंड (अदायगी न करने पर 01 माह अतिरिक्त कारावास)।
सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अलावा, विचारण के दौरान आरोपी द्वारा पूर्व में काटी गई अवधि (12.03.2022 से 16.10.2026 तक कुल 04 वर्ष 07 माह 04 दिन) का दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत ‘सेट-ऑफ’ (समायोजन) दिए जाने का आदेश दिया गया है।
प्रतिकर (मुआवजा) और अन्य निर्देश
पीड़िता को हुई अत्यधिक शारीरिक व मानसिक पीड़ा को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने पॉक्सो एक्ट की धारा 33(8) एवं पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत उचित प्रतिकर दिलाए जाने हेतु सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जशपुर को संस्तुति सहित प्रतिलिपि प्रेषित की है। साथ ही, फैसले की एक प्रति जिला दंडाधिकारी, जशपुर और जेल अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई एवं अनुपालन हेतु भेजी गई है।
