Author: Sagar Joshi [SAMDARSHI NEWS]

  • जशपुर में करघे से बदलेगी महिलाओं की किस्मत! आधुनिक मशीनों और ट्रेनिंग से हुनर को मिलेगा बाजार, सैकड़ों दीदियां अब अपने हाथों से गढ़ेंगी आत्मनिर्भरता की नई कहानी!

    जशपुर में करघे से बदलेगी महिलाओं की किस्मत! आधुनिक मशीनों और ट्रेनिंग से हुनर को मिलेगा बाजार, सैकड़ों दीदियां अब अपने हाथों से गढ़ेंगी आत्मनिर्भरता की नई कहानी!

    जशपुर कलेक्टर ने घोलेंगे में वीवर्स ट्रेनिंग एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर का किया निरीक्षण

    महिलाओं को आधुनिक हस्तकरघा कपड़ा बनाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण

    जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास ने आज जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे में वीवर्स ट्रेनिंग एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। ग्राम पंचायत घोलेंगे में आजीविका परिसर में स्व सहायता समूह की महिलाओं को आधुनिक हस्तकरघा कपड़े बनाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण। उन्होंने अवलोकन किया और सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

    जिला प्रशासन और एनआरएलम और आदित्य बिरला गुरुप के द्वारा जशपुर की महिलाओं को आधुनिक मशीनें और मार्केट में मांग के अनुसार हस्तकरघा और कपड़े सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में आजीविका से परंपरागत रूप से जुड़े लगभग 35 से 40 परिवारों और स्व सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाओं द्वारा हस्तकरघा कपड़े बनाने और निर्मित शॉल और साड़ी तैयार की जा रही है।

    घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में हैंडलूम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इस केंद्र का उद्देश्य हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े परिवारों को आधुनिक मशीनरी एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, लैब टेस्टिंग, आधुनिक डिजाइन तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना है।

    केंद्र के माध्यम से पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक एवं बाजार की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए स्थानीय परिवारों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर सृजित करने का प्रयास किया जा रहा है। आदित्य बिरला समूह के प्रबंधन एवं सहयोग से प्रशिक्षण, उत्पादन, डिजाइन विकास तथा बाजार से जुड़ी गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    आदित्य बिरला समूह के प्रतिनिधि एवं प्रशिक्षक सहित स्व सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों दीदियां उपस्थित रहीं। महिलाओं ने पारंपरिक हस्तकरघा कला को संरक्षित करने तथा इसे आधुनिक बाजार से जोड़कर नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ काम कर रही है।

    जशपुर की समृद्ध पारंपरिक कला एवं स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने तथा हस्तकरघा से जुड़े परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

  • जशपुर में मेडिकल कॉलेज की तैयारियां तेज! कलेक्टर ने पॉलिटेक्निक कॉलेज का किया निरीक्षण, हॉस्टल से लेकर लाइट-पानी तक हर सुविधा दुरुस्त करने के दिए सख्त निर्देश!

    जशपुर में मेडिकल कॉलेज की तैयारियां तेज! कलेक्टर ने पॉलिटेक्निक कॉलेज का किया निरीक्षण, हॉस्टल से लेकर लाइट-पानी तक हर सुविधा दुरुस्त करने के दिए सख्त निर्देश!

    जशपुर कलेक्टर ने पालीटेक्निक कालेज का किया निरीक्षण

    भवन में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मेडिकल कॉलेज का संचालन किया जाना है संभावित

    भवन के लाइट पंखे और सभी जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

    मेडिकल कालेज के बालक और बालिका छात्रावास में सुरक्षा के साथ पर्याप्त रोशनी की व्यस्था करने के निर्देश

    जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास ने मंगलवार को जशपुर के पालीटेक्निक कालेज का निरीक्षण किया। विदित हैं कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर में मेडिकल कालेज की घोषणा की थी। 50 सीटें निर्धारित किया गया है।

    इसी कड़ी में इस वर्ष मेडिकल कालेज का प्रथम वर्ष शुरू किया जाना संभावित है और जिला प्रशासन के द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पालीटेक्निक कालेज में मेडिकल कालेज संचालित करने के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराया जा रहा है।

    कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान भवनों के लाइट पंखे, शौचालय की साफ सफाई सहित जरूरी बुनियादी व्यस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पानी की पर्याप्त सुविधा और बालिका,बालक छात्रावास में सुरक्षा व्यवस्था, सहित रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

    इसके साथ ही मेडिकल कालेज में डीप फ्रीजर की भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार मेडिकल कॉलेज के डीन,अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • रात-दिन की जंग में जीती जिंदगी! जशपुर जिला अस्पताल में गंभीर हालत में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची की बची जान, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का भी सफल ऑपरेशन—बड़ी राहत!

    रात-दिन की जंग में जीती जिंदगी! जशपुर जिला अस्पताल में गंभीर हालत में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची की बची जान, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का भी सफल ऑपरेशन—बड़ी राहत!

    जिला अस्पताल जशपुर में गंभीर मरीजों का सफल उपचार

    विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और त्वरित उपचार से मरीजों को मिली राहत

    सेप्टिक शॉक में 10 वर्षीय बच्ची की जान बचाई, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सफल ऑपरेशन

    जशपुर : जिला चिकित्सालय जशपुर में गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। चिकित्सकों एवं नर्सिंग टीम की तत्परता, त्वरित चिकित्सकीय निर्णय और बेहतर समन्वय से हाल ही में दो गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया गया। एक ओर सेप्टिक शॉक की गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय पहुंची 10 वर्षीय बच्ची को समय पर उपचार और सतत निगरानी से स्वास्थ्य लाभ मिला, वहीं दूसरी ओर एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के गंभीर मामले में महिला की सफल सर्जरी कर उसे संभावित गंभीर जटिलताओं से बचाया गया। जिला अस्पताल में उपलब्ध इन सेवाओं से मरीजों को उपचार के लिए दूसरे राज्यों अथवा बड़े चिकित्सा संस्थानों में जाने में लगने वाले अतिरिक्त समय और खर्च से राहत मिल रही है।

    सेप्टिक शॉक में पहुंची 10 वर्षीय बच्ची की हालत में सुधार

    पाकड़टोली, जिला गुमला निवासी 10 वर्षीय संध्या कुमारी को 28 अगस्त 2026 को तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती एवं बेहोशी जैसी गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय जशपुर लाया गया। अस्पताल पहुंचने के समय बच्ची का ब्लड प्रेशर एवं ब्लड शुगर काफी कम था। जांच में किडनी एवं लिवर फंक्शन में भी गंभीर असामान्यताएं पाई गईं। चिकित्सकीय परीक्षण के बाद बच्ची की स्थिति को सेप्टिक शॉक की गंभीर अवस्था के रूप में चिन्हित किया गया। बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पुष्पराज प्रधान (MD Pediatrics) के नेतृत्व में तत्काल उपचार शुरू किया गया। उसे IV Fluids, उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स एवं आवश्यक सपोर्टिव उपचार दिया गया। लगातार कम रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए लगभग तीन दिनों तक Vasoactive/Life-saving Support की आवश्यकता पड़ी। उपचार के दौरान चिकित्सकीय एवं नर्सिंग टीम ने बच्ची के ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, चेतना की स्थिति तथा अन्य आवश्यक पैरामीटर्स की लगातार निगरानी की। समय पर उपचार और सतत निगरानी के परिणामस्वरूप बच्ची की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। वर्तमान में बच्ची हेमोडायनामिक रूप से स्थिर है तथा पूरी तरह सचेत एवं ओरिएंटेड है। फिलहाल उसमें कोई डेंजर साइन नहीं है। बच्ची के उपचार में अमृता सिंह, संध्या साविता एक्का, अनुपा मिंज, वसुंधरा साय, प्रमिला भगत, रेशमा किस्पोट्टा, अमीना मिंज एवं अंकिता मिंज ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।

    एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का सफल ऑपरेशन

    इसी तरह ग्राम घरमुंडा, विकासखंड कुनकुरी निवासी चंद्रिका बाई, पति श्रवण कुमार के एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के गंभीर मामले का जिला चिकित्सालय जशपुर में सफल ऑपरेशन किया गया। जांच में पाया गया कि गर्भावस्था सामान्य रूप से गर्भाशय में विकसित होने के बजाय फैलोपियन ट्यूब में विकसित हो रही थी।

    एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह गंभीर एवं आपातकालीन स्थिति का रूप ले सकती है। फैलोपियन ट्यूब के फटने की स्थिति में अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। महिला की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल आवश्यक जांच एवं उपचार शुरू किया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता साय ने तत्काल सर्जिकल उपचार का निर्णय लिया। चिकित्सकीय टीम ने आवश्यक तैयारी के साथ महिला का सफल ऑपरेशन किया और फैलोपियन ट्यूब में विकसित एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का उपचार किया। ऑपरेशन के बाद महिला को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है तथा आवश्यक उपचार एवं देखभाल प्रदान की जा रही है।

    रात्रि में भी मजबूत होगी आपातकालीन सर्जरी की सुविधा

    सिविल सर्जन ने बताया कि जिला चिकित्सालय जशपुर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है। शासन द्वारा आवश्यक डीएफआर की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिससे गंभीर एवं आपातकालीन मामलों में आवश्यकता पड़ने पर रात्रि में भी सर्जरी की जा सकेगी। इससे विशेष रूप से गर्भावस्था से संबंधित आपातकालीन स्थितियों तथा अन्य गंभीर सर्जिकल मामलों में मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के समन्वित प्रयासों से गंभीर मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं जिला चिकित्सालय में ही उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

  • जशपुर में कलेक्टर का सख्त फरमान! अब शिकायतें फाइलों में नहीं रहेंगी लंबित, अफसरों को हर आवेदक को फोन कर बताना होगा समाधान—लापरवाही पर कड़ा संदेश!

    जशपुर में कलेक्टर का सख्त फरमान! अब शिकायतें फाइलों में नहीं रहेंगी लंबित, अफसरों को हर आवेदक को फोन कर बताना होगा समाधान—लापरवाही पर कड़ा संदेश!

    कलेक्टर ने सीएम हेल्प लाइन मुख्यमंत्री जनदर्शन और कलेक्टर जनदर्शन के आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश

    जशपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप संचालित सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान के क्रियान्वयन संबंध में सोमवार को कलेक्टर रोहित व्यास ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा की बैठक में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि इस योजना का जिले में बेहतर क्रियान्वयन किया जाना है। योजना के तहत हितग्राहियों को 31 योजनाओं से लाभान्वित किया जाना है। कलेक्टर ने सीएम हेल्प लाइन के प्राप्त आवेदनों की विस्तार से समीक्षा की और आवेदनों का गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि आवेदन का निराकरण करने के पश्चात संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत फोन करके आवेदन के निराकरण की जानकारी अवश्य दें इसके साथ ही निराकरण से सन्तुष्ट हुए है कि नहीं इसकी भी जानकारी लेने के लिए कहा है।

    इस अवसर पर सभी एसडीएम ,जनपद पंचायत सीईओ और जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे। कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री की घोषणा के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने मंगल भवन, सामुदायिक भवन,सीसी रोड, सांस्कृतिक भवन,खेल मैदान,मिनी स्टेडियम,आदि प्रगतिरत निर्माण कार्यों की जानकारी ली।

    उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्प लाइन, मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन के लंबित आवेदनों का भी गंभीरता से निराकरण करने के निर्देश दिए।

  • छत्तीसगढ़ ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका को किया सुदृढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खनिज विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर दिया जोर

    छत्तीसगढ़ ने भारत के महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र में अपनी भूमिका को किया सुदृढ़, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने खनिज विकास के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता पर दिया जोर

    केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने उद्योग की अधिक भागीदारी का किया आह्वान

    छत्तीसगढ़ के पांच खनिज ब्लॉक महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला में शामिल

    रायपुर : खान मंत्रालय ने आज रायपुर, छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी की 8वीं श्रृंखला पर रोड शो का आयोजन किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में तथा कोयला एवं खान मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे उपस्थित रहे। इस अवसर पर आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू तथा सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह के साथ ही वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और अन्य हितधारक भी उपस्थित रहे।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के समृद्ध खनिज संसाधनों तथा भारत के खनन एवं औद्योगिक विकास में राज्य की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने अधिक निवेश, खनिज संसाधनों के त्वरित विकास तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के माध्यम से राज्य की खनिज क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने हितधारकों को राज्य सरकार की ओर से निवेश को सुगम बनाने और सतत खनिज विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने भारत के आर्थिक विकास, औद्योगिक प्रगति, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इन संसाधनों की खोज और विकास में तेजी लाने तथा उद्योग एवं निवेशकों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनिज मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना भारत की खनिज सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ के मजबूत खनन एवं औद्योगिक आधार तथा नई खनिज मूल्य श्रृंखलाओं के विकास की राज्य की क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश से नए औद्योगिक विकास केंद्रों को बढ़ावा मिल सकता है, सतत अवसंरचना मजबूत हो सकती है और स्थानीय समुदायों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की अवसंरचना, कुशल कार्यबल और संस्थागत सहयोग दीर्घकालिक निवेश के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

    सीएमडीसी के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विशाल खनिज क्षमता का पता लगाने का आह्वान किया तथा तेज परिचालन, पारदर्शी खनन प्रक्रियाओं और प्रौद्योगिकी आधारित खनिज निगरानी के प्रति राज्य के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने आदिवासी टिन संग्राहकों को पारदर्शी तरीके से लाभ पहुंचाने के लिए टिन पोर्टल तथा टिन-युक्त संसाधनों से कोलंबाइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज सहित विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।

    खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने कहा कि नीतिगत सुधारों, पारदर्शी नीलामी और तेज परिचालन से भारत का महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र सुदृढ़ हुआ है तथा अब तक प्रस्तुत 88 महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉकों में से 56 की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 8वीं श्रृंखला में नौ राज्यों में फैले 20 ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें 17 समग्र लाइसेंस और 3 खनन पट्टा ब्लॉक हैं तथा ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, दुर्लभ धातु, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, मोलिब्डेनम, टंगस्टन, पोटाश, फॉस्फोराइट और ग्लॉकोनाइट जैसे खनिज सम्मिलित हैं, जिनमें से पांच ब्लॉक छत्तीसगढ़ में स्थित हैं।

    खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री संदीप कदम ने अपने संबोधन में भारत के आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने खनन से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, परिशोधन और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करने तथा नीलाम किए गए ब्लॉकों के तेजी से संचालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भर महत्वपूर्ण खनिज पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए केंद्र, राज्यों और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग का भी आह्वान किया।

    तकनीकी सत्र की शुरुआत एनएमईडीटी के महानिदेशक श्री पंकज गर्ग की प्रस्तुति से हुई, जो समग्र लाइसेंस धारकों के लिए अन्वेषण व्यय की आंशिक प्रतिपूर्ति की एनएमईडीटी योजना पर आधारित थी। इसके बाद संभावित बोलीदाताओं को 8वीं श्रृंखला के अंतर्गत नीलामी के लिए पेश किए गए खनिज ब्लॉकों और नीलामी व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें एमईसीएल के एचओडी (अन्वेषण) श्री श्रीकांत शर्मा ने खनिज ब्लॉकों और उनकी संभावनाओं, एसबीआईसीएपीएस के सहायक उपाध्यक्ष श्री प्रतिन शर्मा ने खनिज नीलामी प्रक्रिया एवं निविदा दस्तावेज तथा एमएसटीसी के सहायक प्रबंधक श्री पुष्कर हजेला ने ई-नीलामी प्रक्रिया की जानकारी दी।

    सत्र का समापन संभावित बोलीदाताओं के साथ संवाद, उनके प्रश्नों के समाधान और नीलामी प्रक्रिया एवं संबंधित पहलुओं पर स्पष्टीकरण के साथ हुआ।रोड शो सरकार की खनिज अन्वेषण में तेजी लाने, निवेश एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और भारत की महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा एक आत्मनिर्भर और खनिज-सुरक्षित भारत के विजन को आगे बढ़ाता है।

    रोड शो के पश्चात खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र की अध्यक्षता में खनिज ब्लॉक आवंटियों और पसंदीदा बोलीदाताओं के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य आवंटित ब्लॉकों के शीघ्र परिचालन में तेजी लाना रहा। भारत सरकार के खान मंत्रालय तथा छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों ने ब्लॉकों की प्रगति की समीक्षा की, प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की और उनके समयबद्ध समाधान के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया। बैठक ने आवंटियों को कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दे उठाने और आवश्यक सहयोग प्राप्त करने का मंच भी उपलब्ध कराया, जिससे तेज परियोजना क्रियान्वयन, घरेलू खनिज उत्पादन में वृद्धि और भारत की खनिज आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।

  • हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली को आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    हिंसा और नक्सलवाद का महिमामंडन करने वाली मानसिकता भी समाज के लिए घातक : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    मुख्यमंत्री ने कहा – बस्तर अब भय और हिंसा से निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक निजी चैनल के साक्षात्कार के दौरान कहा कि नक्सलवाद के समर्थन में बात करने वाले और कुख्यात नक्सली हिड़मा , जिसने सैकड़ो निर्दोषों की हत्या की, उसे आदर्श मानने वाले ही दिमागी नक्सली हैं ।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के लंबे और पीड़ादायक दौर से बाहर निकलकर शांति, विश्वास और विकास की नई राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, केंद्र और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा बस्तर के लोगों के सहयोग से नक्सलवाद समाप्ति की ओर है। अब आवश्यकता इस बात की भी है कि हिंसा और नक्सलवाद को वैचारिक समर्थन देने तथा उसका महिमामंडन करने वाली मानसिकता को समाज स्पष्ट रूप से अस्वीकार करे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज भी कुछ लोग ऐसे कुख्यात नक्सलियों को अपना आदर्श मानते हैं, जिनके हाथ निर्दोष नागरिकों और सुरक्षाबलों के खून से रंगे रहे हैं। हिड़मा जैसे नक्सलियों ने हिंसा और आतंक के माध्यम से बस्तर की अनेक पीढ़ियों को भय, अभाव और पिछड़ेपन में रखने का काम किया। ऐसे लोगों का महिमामंडन करना, उनके समर्थन में नारे लगाना या उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदूक उठाकर निर्दोष लोगों की जान लेने वाला व्यक्ति किसी समाज का आदर्श नहीं हो सकता। नक्सली हिंसा में बस्तर ने अपने हजारों निर्दोष नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और बहादुर जवानों को खोया है। अनेक परिवारों ने अपनों को खोने का दर्द सहा, बच्चों से उनके माता-पिता छिने और विकास की संभावनाओं को दशकों तक बाधित किया गया। इस पीड़ा को नजरअंदाज कर हिंसा के जिम्मेदार लोगों का गुणगान करना बस्तर के पीड़ित परिवारों और शहीद जवानों के बलिदान का भी अपमान है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद केवल बंदूक और जंगलों तक सीमित चुनौती नहीं है। हिंसा को उचित ठहराने, लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करने और नक्सली हिंसा के जिम्मेदार लोगों को नायक के रूप में स्थापित करने वाली सोच भी उतनी ही चिंताजनक है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा का समर्थन और निर्दोष लोगों की हत्या करने वालों का महिमामंडन किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

    उन्होंने कहा कि आज बस्तर की पहचान बदल रही है। जिस क्षेत्र को कभी नक्सली हिंसा, बारूदी सुरंगों और भय के कारण जाना जाता था, वहां अब स्कूलों की घंटियां सुनाई दे रही हैं, सड़कें बन रही हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच रही हैं, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं तथा दूरस्थ गांव शासन की योजनाओं और विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के युवा अब बंदूक नहीं, किताब, कलम, कौशल और रोजगार चाहते हैं। वे अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं और देश-प्रदेश की प्रगति में भागीदार बनना चाहते हैं। हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर के प्रत्येक युवा को आगे बढ़ने का अवसर मिले और प्रत्येक परिवार तक विकास तथा सुशासन का लाभ पहुंचे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई केवल सुरक्षा की लड़ाई नहीं थी, बल्कि बस्तर के भविष्य को बचाने की लड़ाई थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना इस लड़ाई को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाया है। अब समाज की जिम्मेदारी है कि हिंसा की विचारधारा को किसी भी स्वरूप में महिमामंडित न होने दे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, लोकतंत्र और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। नक्सलवाद और हिंसा के लिए नए छत्तीसगढ़ में कोई स्थान नहीं है। बस्तर की नई पीढ़ी के आदर्श वे लोग होने चाहिए जो शिक्षा, सेवा, परिश्रम, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से समाज को आगे बढ़ा रहे हैं, न कि वे जिन्होंने बंदूक और हिंसा के सहारे निर्दोष लोगों का जीवन छीना।

    उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना केवल सरकार या सुरक्षाबलों की उपलब्धि नहीं, बल्कि वहां के नागरिकों के साहस और विश्वास की जीत है। अब इस शांति को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि की नई पहचान देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की नई इबारत लिख रहा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

    प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा विकसित छत्तीसगढ़

    सुरक्षा के साथ विकास की रणनीति ने बदली बस्तर की तस्वीर, अंतिम छोर तक पहुंच रही शासन की योजनाएं

    नियद नेल्लानार से गांवों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

    बस्तर में पर्यटन, रोजगार और आजीविका के खुल रहे नए द्वार

    मुख्यमंत्री श्री साय ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम में हुए शामिल

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि दशकों तक नक्सलवाद की चुनौती का सामना करने वाला छत्तीसगढ़ आज शांति, विश्वास और विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। नक्सलवाद के अंधेरे से बाहर निकलकर प्रदेश अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, अधोसंरचना, पर्यटन और आजीविका सहित सर्वांगीण विकास के प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत-समृद्ध छत्तीसगढ़ : विकास का नया अध्याय’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी विकसित राज्य बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। प्रदेश के विजन डॉक्यूमेंट के अंतर्गत 10 प्रमुख मिशन निर्धारित किए गए हैं और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संभावनाओं से भरपूर राज्य है। प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है और यहां लोहा, बॉक्साइट, लिथियम, सोना सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र टिन उत्पादक राज्य भी है। प्राकृतिक संसाधनों की इस समृद्धि के साथ प्रदेश की मेहनतकश मानव शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इन क्षमताओं का समुचित उपयोग कर छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में और बड़ी भूमिका निभाएगा।

    सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति से बदली बस्तर की तस्वीर

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद प्रदेश, विशेषकर बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना रहा। वर्ष 2023 में राज्य में सरकार बनने के बाद जनवरी 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय के साथ नई रणनीति पर काम शुरू किया। पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर तालमेल और सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान को निर्णायक गति दी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता मिली है। नई रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि सुरक्षा बलों ने पूरी मजबूती से अभियान चलाते हुए पहले की तुलना में अपने जवानों की क्षति को कम रखा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता ने लगभग चार दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। नक्सली स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और संचार सुविधाओं जैसे विकास कार्यों का विरोध करते थे, जिसके कारण अनेक दूरस्थ क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से कटे रहे। इसलिए सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी।

    ‘नियद नेल्लानार’ ने दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार शुरू से स्पष्ट थी कि केवल नक्सल समस्या को समाप्त करना पर्याप्त नहीं होगा। स्थायी शांति के लिए बस्तर के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक विकास का लाभ पहुंचाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ ‘नियद नेल्लानार’ योजना शुरू की गई। गोंडी भाषा में इसका अर्थ है – ‘आपका अच्छा गांव’।

    उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं। क्षेत्र में 421 से अधिक स्कूल खोले गए हैं और दूरसंचार नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। विकास को और गति देने के लिए सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ भी प्रारंभ किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बस्तर को देश का सबसे सुंदर आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प व्यक्त किया है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के अनुरूप बस्तर के समग्र विकास पर काम कर रही है।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। ‘बस्तर मुन्ने’ कार्यक्रम के माध्यम से शासकीय अमला गांवों में पहुंचकर और वहां ठहरकर लोगों को योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है।

    शांति लौटने के साथ बस्तर में आजीविका और पर्यटन की नई संभावनाएं

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब रोजगार, आजीविका और पर्यटन के नए अवसर भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ समझौता किया गया है। बकरी पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली पूरी दुनिया को आकर्षित कर रही है। बस्तर के धुड़मारास गांव को दुनिया के श्रेष्ठ पर्यटन गांवों में शामिल किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक होम-स्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन और संस्कृति को निकट से अनुभव कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ऋण एवं अनुदान की सुविधा दे रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में पर्यटन को भी शामिल किया गया है। नक्सलवाद की समाप्ति के बाद खाली हो रहे लगभग 70 सुरक्षा कैंपों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

    हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों के लिए खोले पुनर्वास के द्वार

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की रणनीति केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के लिए बेहतर आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तैयार की गई। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि हिंसा छोड़कर लौटने वालों के साथ न्याय होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने हिंसा की जगह संवाद और पुनर्वास को प्राथमिकता दी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए और बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद भी वैचारिक स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ तत्व मौजूद हैं, लेकिन बस्तर में तेजी से पहुंचता विकास और लोगों के जीवन में आ रहा सकारात्मक परिवर्तन ऐसे भ्रम का सबसे प्रभावी उत्तर है।

    युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा और रोजगार पर विशेष जोर

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। प्रत्येक विकासखंड तक उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ी है और आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी जैसे राष्ट्रीय महत्व के प्रतिष्ठित संस्थान प्रदेश में संचालित हो रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। दिल्ली में यूथ हॉस्टल के माध्यम से युवाओं को यूपीएससी की तैयारी में सहयोग दिया जा रहा है। प्रदेश में 34 नालंदा परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए भी सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभाशाली बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बनें।

    नई औद्योगिक नीति से निवेश और रोजगार को मिल रही नई गति

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से छत्तीसगढ़ में उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इनका असर धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि उसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार करना है। इसी उद्देश्य से एक हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने वाले उद्यमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

    “किसान परिवार से मिली मेहनत और जिम्मेदारी की सीख”

    कार्यक्रम में अपनी जीवनयात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और खेती उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। दस वर्ष की आयु में पिता के निधन के बाद परिवार के बड़े बेटे के रूप में कम उम्र में ही उन्हें जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं। बचपन से खेती करते हुए उन्होंने परिश्रम, धैर्य और जिम्मेदारी का महत्व सीखा।

    उन्होंने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। गांव के लोगों के आग्रह पर पहली बार वार्ड पंच का चुनाव लड़ा और जनप्रतिनिधि के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। पांच वर्ष तक पंच के रूप में किए गए कार्यों के आधार पर गांववासियों ने उन्हें निर्विरोध सरपंच चुना। इसके बाद वर्ष 1990 में तपकरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने। अविभाजित मध्यप्रदेश में दो बार विधायक और रायगढ़ से चार बार सांसद के रूप में जनता की सेवा का अवसर मिला।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला और आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है। सार्वजनिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास किया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के सामने संभावनाओं का नया आकाश है। नक्सलवाद की बाधा दूर होने के साथ बस्तर सहित पूरा प्रदेश विकास की नई गति पकड़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग और पर्यटन में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो तथा वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के निर्माण में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ अपनी सशक्त भूमिका निभाए।

    कार्यक्रम में टाइम्स नाउ नवभारत डॉट कॉम के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • TIN पोर्टल खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया TIN पोर्टल का शुभारंभ

    TIN पोर्टल खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया TIN पोर्टल का शुभारंभ

    TIN पोर्टल से टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को मिलेगा पारदर्शी और उचित मूल्य

    LME आधारित मूल्य निर्धारण से बाजार भाव के अनुरूप भुगतान, DBT से सीधे बैंक खाते में पहुंचेगी राशि

    डिजिटल रजिस्ट्रेशन, क्यूआर आधारित सत्यापन, एसएमएस अलर्ट और रियल टाइम मॉनिटरिंग से पूरी प्रक्रिया होगी पारदर्शी

    रायपुर : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज संसाधनों के सतत एवं समावेशी विकास के साथ जनजातीय समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज़) पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्रीय कोयला और खान राज्यमंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, केंद्रीय शहरी आवासन राज्य मंत्री श्री तोखन साहू और सीएमडीसी के चेयरमैन श्री सौरभ सिंह सहित अधिकारीगण मौजूद रहे।

     यह पोर्टल बस्तर संभाग के जनजातीय समुदायों द्वारा संग्रहित टिन अयस्क के क्रय से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समयबद्ध बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। पोर्टल में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है, जिससे टिन संग्राहकों को बाजार की स्थिति के अनुरूप अधिक पारदर्शी मूल्य मिल सकेगा। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विक्रय की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी, भुगतान में देरी की संभावना घटेगी और जनजातीय परिवारों को अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ का अधिक प्रत्यक्ष एवं समयबद्ध लाभ मिलेगा।

    टिन खरीदी की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल, हर चरण की होगी निगरानी

     TIN पोर्टल के माध्यम से टिन अयस्क के संग्रहण से लेकर भुगतान तक प्रत्येक चरण को डिजिटल वर्कफ्लो से जोड़ा गया है। इसमें डिजिटल हितग्राही पंजीयन एवं पहचान, बैंकिंग सेवाओं का एकीकरण, क्यूआर कोड आधारित स्मार्ट सत्यापन, स्मार्ट कार्ड/पहचान सुविधा, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान राशि की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और संपूर्ण ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सीएमडीसी मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था भी विकसित की गई है। पोर्टल के माध्यम से हितग्राहियों को डिजिटल संचार, एसएमएस अलर्ट और भुगतान एवं लेन-देन की स्थिति की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। इससे न केवल संग्राहकों को अपने टिन की बिक्री और भुगतान की जानकारी समय पर मिलेगी, बल्कि सीएमडीसी के लिए स्टॉक, राजस्व, भुगतान और क्रय प्रक्रिया की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी।

    06 टिन क्रय केंद्रों से खरीदी, 03 नए केंद्र प्रस्तावित

     सीएमडीसी द्वारा वर्तमान में बस्तर संभाग में 06 टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी की जा रही है। इनमें दंतेवाड़ा जिले के बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल तथा सुकमा जिले के तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में संचालित क्रय केंद्र शामिल हैं। अधिक से अधिक जनजातीय संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर टिन विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में 03 नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के संग्राहकों को अपने उत्पाद को बाजार तक ले जाने में होने वाली कठिनाइयों में कमी आएगी और अधिक हितग्राही औपचारिक एवं पारदर्शी क्रय व्यवस्था से जुड़ सकेंगे।

    टिन क्रय व्यवस्था में लागू हुई नई SOP, प्रक्रिया होगी सरल और किफायती

     TIN पोर्टल के साथ CMDC द्वारा टिन अयस्क की खरीदी से बिक्री तक की प्रक्रिया के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी तैयार कर लागू की गई है। इसके तहत प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग की व्यवस्था, सैंपल की संख्या को 12 से घटाकर 6 करना, प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम करना तथा परीक्षण परिणामों को लेकर असहमति की स्थिति में री-एनालिसिस का प्रावधान किया गया है। इससे प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होने के साथ परीक्षण एवं विश्लेषण से जुड़ी लागत में भी कमी आएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक विश्लेषण शुल्क को 14,400 रुपए से घटाकर 7,200 रुपए किया गया है तथा इन सुधारों से CMDC को लगभग 10 लाख रुपए वार्षिक तक की संभावित बचत का अनुमान है। क्रय, बिक्री और परिवहन दरों के नियमित निर्धारण से पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता भी बढ़ेगी।

    LME आधारित मूल्य से उचित मूल्य, DBT से सीधे खाते में भुगतान

     TIN पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में LME आधारित मूल्य निर्धारण और DBT भुगतान व्यवस्था शामिल है। इससे टिन के अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए अधिक पारदर्शी मूल्य व्यवस्था विकसित होगी। विक्रय राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से हितग्राहियों को भुगतान के लिए किसी मध्यस्थ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। बैंकिंग प्रणाली से एकीकरण के कारण भुगतान अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय होगा। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था जनजातीय समुदायों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा देगी।

    टिन संग्रहण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में पहल

     बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। वर्ष 2013 में दंतेवाड़ा क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत पांच टिन अयस्क संग्रहण सहकारी समितियों का गठन किया गया था। अब TIN पोर्टल इसी सामुदायिक व्यवस्था को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए टिन संग्रहण को अधिक व्यवस्थित एवं स्थायी आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित करने का प्रयास है। इससे प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ को स्थानीय समुदायों तक सीधे पहुंचाने, उनकी आय बढ़ाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    टिन खरीदी से जनजातीय हितग्राहियों को लगातार मिला आर्थिक लाभ

     CMDC द्वारा जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क की खरीदी के माध्यम से लगातार आर्थिक लाभ पहुंचाया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 90.82 लाख रुपए, जबकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया।

    सरकार और CMDC के लिए भी बनेगा मजबूत डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म

     TIN पोर्टल केवल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह टिन की पूरी मिनरल वैल्यू चेन के डिजिटल प्रबंधन की व्यवस्था है। इससे सरकार को रियल टाइम राजस्व एवं क्रय संबंधी जानकारी प्राप्त होगी, जबकि CMDC को कागजी कार्यवाही कम करने, स्टॉक ट्रैकिंग, ऑडिट अनुपालन, भुगतान और क्रय केंद्रों की निगरानी में सुविधा मिलेगी। प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए भी बेहतर निर्णय लिए जा सकेंगे। इस प्रकार TIN पोर्टल छत्तीसगढ़ के खनिज संसाधनों को जनजातीय आजीविका से जोड़ने वाली ‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ पहल के रूप में सामने आया है। LME आधारित पारदर्शी मूल्य निर्धारण, DBT, डिजिटल पहचान, बैंकिंग एकीकरण, रियल टाइम मॉनिटरिंग और मानकीकृत SOP के माध्यम से इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बस्तर के टिन संग्राहक जनजातीय हितग्राहियों को उनके संसाधनों का अधिकतम, पारदर्शी और समयबद्ध आर्थिक लाभ मिल सके।

    सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति

     कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इस समझौते से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, टिन संकलित करने वाले हितग्राहियों को पारदर्शी भुगतान और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।

  • मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और सीएमडीसी के मध्य हुआ महत्वपूर्ण समझौता

    मुख्यमंत्री की मौजूदगी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय और सीएमडीसी के मध्य हुआ महत्वपूर्ण समझौता

    कटिंग-पॉलिशिंग के आधुनिक प्रशिक्षण के लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय बनेगा नॉलेज पार्टनर, ‘बस्तर ब्रांड’ को मिलेगा बढ़ावा

    कोरंडम से बस्तर को मिलेगी नई पहचान, खनन से मूल्य संवर्धन तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन

    25 वर्षों बाद बीजापुर के कुचनूर में फिर शुरू हुआ कोरंडम खनन, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर

    रायपुर : नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों के दोहन के साथ-साथ उनके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा बीजापुर जिले के कुचनूर क्षेत्र में लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद कोरंडम खदान का पुनः संचालन किया गया है। कोरंडम के खनन से लेकर उसकी कटिंग, पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के उद्देश्य से CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में नया रायपुर स्थित मेफेयर रिज़ॉर्ट में यह महत्वपूर्ण एमओयू सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर के रूप में चयनित किया गया है, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं और शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का उत्खनन

     प्रदेश में कोरंडम खनिज के दोहन एवं विपणन के लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के मध्य गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के ग्राम कुचनूर में कोरंडम खदान संचालित की जा रही है। लगभग 25 वर्षों के अंतराल के बाद फरवरी 2025 से खदान का पुनः संचालन करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम का वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन किया जा रहा है। वर्तमान में खदान से उत्खनित कोरंडम का लगभग 240 किलोग्राम भंडारण है, जिसमें से 157.643 किलोग्राम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए कोरंडम में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड तथा 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम शामिल है।

    खनन के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार

    कुचनूर कोरंडम खदान के संचालन से बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार और CMDC का प्रयास है कि खनिज आधारित गतिविधियों का लाभ केवल खनन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय समुदायों, युवाओं, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों की भागीदारी से आय के नए अवसर सृजित हों।

    कटिंग-पॉलिशिंग के प्रशिक्षण से बढ़ेगा मूल्य संवर्धन

    कोरंडम से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए स्थानीय स्तर पर जेम्स्टोन हैंडलिंग, कटिंग, पॉलिशिंग और अन्य वैल्यू एडिशन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है। आधुनिक तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रत्नों की पहचान और कौशल गतिविधियों में दक्ष बनाया जाएगा। इससे उन्हें रोजगार के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी मिलेंगे।

    ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत आभूषण और रत्न उत्पादों को मिलेगा बाजार

     कुचनूर से प्राप्त उच्च गुणवत्ता वाले कोरंडम को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता से जोड़ने की योजना है। कोरंडम से आभूषण एवं रत्न उत्पाद तैयार कर उनकी ब्रांडिंग और मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे बस्तर की स्थानीय कला, शिल्प और प्राकृतिक खनिज संपदा को एक साथ बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी। स्थानीय इकाइयों, स्टार्टअप्स, शिल्पकारों और निवेशकों की भागीदारी से कोरंडम आधारित नए उद्यम विकसित किए जा सकेंगे।

    नए कोरंडम क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण जारी

    बीजापुर जिले में कोरंडम से जुड़े नए संभावित क्षेत्रों की पहचान, अन्वेषण एवं पूर्वेक्षण का कार्य भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में ग्राम कुचनूर सहित अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर खनन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। धनगोल सहित विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित कर आवेदन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

    पारदर्शी नीलामी से सरकार को राजस्व, बस्तर को मिलेगी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान

    उत्खनित कोरंडम की पारदर्शी तरीके से नीलामी से राज्य सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ बस्तर क्षेत्र के कोरंडम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के साथ स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन होने से खनिज की वास्तविक आर्थिक क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। CMDC की यह पहल ‘खनन से मूल्य संवर्धन, मूल्य संवर्धन से रोजगार और रोजगार से आर्थिक सशक्तिकरण’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य केवल कोरंडम का उत्खनन करना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं और समुदायों को पूरी वैल्यू चेन का भागीदार बनाकर बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बनाना है।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल का शुभारंभ

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल का शुभारंभ

    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों को अब निःशुल्क रेत

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नया रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिज़ॉर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराने के लिए ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों के निर्माण में हितग्राहियों को रेत की उपलब्धता आसान बनाना और उनके पक्के घर के सपने को साकार करने में सहयोग देना है।

    ऑनलाइन और पारदर्शी होगी रेत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया

    ‘ई-रेत संगवारी’ पोर्टल के माध्यम से PMAY-G के पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराई जाएगी। पोर्टल पर पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है, जिससे रेत की मांग, स्वीकृति एवं उपलब्धता की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। इससे हितग्राहियों को रेत प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भागदौड़ और प्रक्रियागत कठिनाइयों से राहत मिलेगी।

    आवास निर्माण में मिलेगी बड़ी राहत

                    प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। आवास निर्माण में रेत एक महत्वपूर्ण निर्माण सामग्री है। ऐसे में पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क रेत उपलब्ध कराने की यह व्यवस्था उनके निर्माण खर्च को कम करने में सहायक होगी और आवास निर्माण को गति मिलेगी। ‘ई-रेत संगवारी’ के माध्यम से सरकार ने आवास योजना के लाभ को निर्माण सामग्री की सुविधा से जोड़ते हुए हितग्राहियों को अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराया है। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए अपने सपनों का पक्का घर बनाना और आसान होगा।

    ‘आपके सपनों का घर, हमारी जिम्मेदारी’

    ई-रेत संगवारी पोर्टल प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के पात्र हितग्राहियों के लिए राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहल है। निःशुल्क रेत, ऑनलाइन प्रक्रिया, पारदर्शिता और सुविधा इसके प्रमुख आधार हैं। यह पहल ग्रामीण परिवारों को आवास निर्माण में आर्थिक राहत देने के साथ उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के सरकार के संकल्प को मजबूत करती है।