जशपुर में करघे से बदलेगी महिलाओं की किस्मत! आधुनिक मशीनों और ट्रेनिंग से हुनर को मिलेगा बाजार, सैकड़ों दीदियां अब अपने हाथों से गढ़ेंगी आत्मनिर्भरता की नई कहानी!

जशपुर कलेक्टर ने घोलेंगे में वीवर्स ट्रेनिंग एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर का किया निरीक्षण

महिलाओं को आधुनिक हस्तकरघा कपड़ा बनाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण

जशपुर : कलेक्टर रोहित व्यास ने आज जशपुर विकास खंड के ग्राम घोलेंगे में वीवर्स ट्रेनिंग एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सेंटर का निरीक्षण किया। ग्राम पंचायत घोलेंगे में आजीविका परिसर में स्व सहायता समूह की महिलाओं को आधुनिक हस्तकरघा कपड़े बनाने का दिया जा रहा प्रशिक्षण। उन्होंने अवलोकन किया और सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

जिला प्रशासन और एनआरएलम और आदित्य बिरला गुरुप के द्वारा जशपुर की महिलाओं को आधुनिक मशीनें और मार्केट में मांग के अनुसार हस्तकरघा और कपड़े सिलाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में आजीविका से परंपरागत रूप से जुड़े लगभग 35 से 40 परिवारों और स्व सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाओं द्वारा हस्तकरघा कपड़े बनाने और निर्मित शॉल और साड़ी तैयार की जा रही है।

घोलेंग स्थित आजीविका परिसर में हैंडलूम प्रशिक्षण एवं उत्पादन केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। इस केंद्र का उद्देश्य हस्तकरघा क्षेत्र से जुड़े परिवारों को आधुनिक मशीनरी एवं तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, लैब टेस्टिंग, आधुनिक डिजाइन तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करना है।

केंद्र के माध्यम से पारंपरिक हस्तकरघा कला को आधुनिक तकनीक एवं बाजार की आवश्यकताओं से जोड़ते हुए स्थानीय परिवारों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर सृजित करने का प्रयास किया जा रहा है। आदित्य बिरला समूह के प्रबंधन एवं सहयोग से प्रशिक्षण, उत्पादन, डिजाइन विकास तथा बाजार से जुड़ी गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

आदित्य बिरला समूह के प्रतिनिधि एवं प्रशिक्षक सहित स्व सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों दीदियां उपस्थित रहीं। महिलाओं ने पारंपरिक हस्तकरघा कला को संरक्षित करने तथा इसे आधुनिक बाजार से जोड़कर नई पहचान दिलाने के संकल्प के साथ काम कर रही है।

जशपुर की समृद्ध पारंपरिक कला एवं स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने तथा हस्तकरघा से जुड़े परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।

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