Category: छत्तीसगढ

  • उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों से नववर्ष 2026 में छत्तीसगढ़ को मिली सड़कों की ऐतिहासिक सौगात, पीएमजीएसवाय-IV में 2225 करोड़ की 774 ग्रामीण सड़कों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों से नववर्ष 2026 में छत्तीसगढ़ को मिली सड़कों की ऐतिहासिक सौगात, पीएमजीएसवाय-IV में 2225 करोड़ की 774 ग्रामीण सड़कों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति

    उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों से नए वर्ष में राज्य को मिली सड़कों की सौगात

    राज्य में पीएमजीएसवाय के चतुर्थ चरण में 22 सौ करोड़ की सड़कों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति

    अब राज्य में गांव-गांव तक पहुंचेंगी सड़कें

    रायपुर : नववर्ष 2026 के शुभारंभ के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य को ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त हुई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाय-IV) के चतुर्थ चरण के अंतर्गत राज्य में 2225 करोड़ रुपये की लागत से 774 ग्रामीण सड़कों के निर्माण हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से प्राप्त हुई है।

    योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में कुल 2427 किलोमीटर लंबाई की 774 सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिससे प्रदेश की 781 ग्रामीण बसाहटें बारहमासी सड़क सुविधा से जुड़ेंगी। इससे अब तक सड़क संपर्क से वंचित दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों के ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा प्राप्त होगी तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार एवं रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय विस्तार होगा।

    पीएमजीएसवाय-IV के दिशा-निर्देशों के अनुसार जनगणना 2011 के आधार पर पात्र बसाहटों का चयन प्राथमिकता क्रम में किया गया है। जिसमें विशेष रूप से धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत आने वाली अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों को प्राथमिकता दी गई है। राज्य के सभी जिलों से प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को प्रेषित किए गए थे, जिन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई।

    पीएमजीएसवाय-IV के अंतर्गत प्रदेश के 24 जिलों में कुल 774 सड़कों को स्वीकृति दी गई है। जिसमें सबसे अधिक 87 सड़कें बस्तर जिले में बनेंगी। इसी तरह कोरिया में 84, जशपुर में 77, सूरजपुर में 76, बलरामपुर में 58, कोरबा में 55, कवर्धा 48, महासमुंद एवं बीजापुर में 44-44, कांकेर में 41, कोण्डागांव में 34, बिलासपुर में 27, सरगुजा में 26, सुकमा में 16, रायगढ़ में 14, दंतेवाड़ा में 12, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 09, गरियाबंद में 07, बालोद में 06, राजनांदगांव में 05, मुंगेली में 06, बेमेतरा एवं धमतरी में 02-02 को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। किसानों को कृषि उपज के परिवहन में सुविधा होगी, विद्यार्थियों को विद्यालयों तक पहुंच आसान होगी तथा ग्रामीण जनता को स्वास्थ्य सेवाओं सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि पीएमजीएसवाय के पूर्व चरणों में अब तक 40 हजार किलोमीटर से अधिक की 8316 सड़कों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। साथ ही विशेष पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विगत दो वर्षों में छः सौ किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर 138 विशेष पिछड़ी जनजातियों की बसाहटों को जोड़ने का कार्य किया जा चुका है।

     उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चतुर्थ चरण के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर पर बसे गांवों को मुख्यधारा से जोड़ना है। सड़कें विकास की रीढ़ हैं और इनके निर्माण से गांवों में समृद्धि और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि स्वीकृत सड़कों का जल्द से जल्द निर्माण प्रारंभ किया जाएगा।

  • कोंडागांव जिले को बड़ी बिजली सौगात: मसोरा 132 केवी उपकेंद्र में 8.5 करोड़ से लगा 63 एमवीए नया ट्रांसफार्मर, 21 हजार मक्का किसानों सहित डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज से स्थायी राहत

    कोंडागांव जिले को बड़ी बिजली सौगात: मसोरा 132 केवी उपकेंद्र में 8.5 करोड़ से लगा 63 एमवीए नया ट्रांसफार्मर, 21 हजार मक्का किसानों सहित डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज से स्थायी राहत

    मक्का किसानों की सुविधा के लिए बढ़ाई बिजली उपकेंद्र की क्षमता

    132 केवी उपकेंद्र मसोरा में 8 करोड़ की लागत से लगा नया ट्रांसफार्मर

    डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को मिलेगी लो-वोल्टेज से स्थायी राहत

    कोंडागांव जिले को बड़ी सौगात, 63 एमवीए अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर उर्जीकृत

    रायपुर : छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज बिजली उपभोक्ताओं और किसानों के लिए अधोसंरचना को निरंतर अपग्रेड कर रही है। इस दिशा में ट्रांसमिशन कंपनी ने मसोरा स्थित 132 केवी अतिउच्च दाब उपकेंद्र में 63 एमवीए का अतिरिक्त ट्रांसफार्मर को ऊर्जीकृत किया। इसका लाभ कोंडागांव जिले के 21 हजार किसानों को मिलेगा, जो ग्रीष्मकाल में फसलचक्र परिवर्तन को अपनाकर मक्के की खेती कर रहे हैं। साथ ही आदिवासी क्षेत्र के डेढ़ लाख उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति हो सकेगी।

    छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला के इस मौके पर कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आदिवासी व वनांचल क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास को कार्य तीव्र गति से किये जा रहे हैं। इसी के तहत कोंडगांव जिले के 132/33 केवी उपकेंद्र मसोरा में 8.5 करोड़ की लागत से स्थापित 63 एमवीए क्षमता का अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर सफलतापूर्वक उर्जीकृत किया गया। इस उपकेंद्र मसोरा में पूर्व से 40 एमवीए क्षमता के दो पावर ट्रांसफॉर्मर कार्यरत थे, जिनसे 33 केवी के कुल 8 फीडर निकलते हैं। इन फीडरों के माध्यम से कोंडागांव जिला के कोंडागांव, फरसगांव एवं माकड़ी ब्लॉक के संपूर्ण क्षेत्र तथा बड़ेराजपुर ब्लॉक के आंशिक क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति की जाती है। वहीं, जिले के केशकाल ब्लॉक का संपूर्ण क्षेत्र एवं बड़ेराजपुर ब्लॉक का शेष भाग 132/33 केवी उपकेंद्र कांकेर से विद्युत आपूर्ति प्राप्त करता है।

    डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के मुख्य अभियंता (जगदलपुर क्षेत्र) श्री टीके मेश्राम ने बताया कि कोंडागांव जिले में रबी सीजन के दौरान मक्के की व्यापक खेती होने के कारण ग्रीष्म ऋतु में सिंचाई हेतु विद्युत मांग अत्यधिक बढ़ जाती थी। इसके परिणामस्वरूप उपकेंद्र मसोरा पर ओवरलोड की स्थिति उत्पन्न होती थी, जिससे पूरे जिले में लो वोल्टेज एवं विद्युत कटौती जैसी समस्याएँ सामने आती थीं। क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं, जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन के समक्ष किसानों ने इस समस्या के निराकरण की मांग भी की थी। अब 63 एमवीए अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर के उर्जीकृत होने से उपकेंद्र मसोरा की कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे जिले में विद्युत आपूर्ति स्थिर, विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण होगी, ग्रीष्म ऋतु में होने वाली लो वोल्टेज एवं कटौती की समस्या से स्थायी निजात मिलेगी तथा कृषि, घरेलू एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ प्राप्त होगा। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि कोंडागांव जिले के समग्र विकास, किसानों की सिंचाई सुविधा, तथा आम नागरिकों के बेहतर जीवन स्तर की दिशा में एक सशक्त कदम है। इस अवसर पर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य अभियंता श्री अब्राहम वर्गीस, श्री संजय तिवारी, अधीक्षण अभियंता श्री एच के सूर्यवंशी, श्री कतलम, कार्यपालन अभियंता श्री पीवी राजेश सहित ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

  • उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को दिए हॉकी किट

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को दिए हॉकी किट

    राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में प्रशिक्षण ले रहे तीनों खिलाड़ी, असेसमेंट कैंप में भारतीय हॉकी कोच श्री पी.आर. श्रीजेश परख रहे खिलाड़ियों को

    रायपुर : उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने बेंग्लुरू स्थित साई (Sports Authority of India) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट के लिए चयनित खिलाड़ियों को हॉकी किट प्रदान किया। उन्होंने आज नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास कार्यालय में गोलकीपर अल्फाज खान को गोलकीपिंग का संपूर्ण किट तथा फॉरवर्ड पोजिशन में खेलने वाली मधु सिदार और दामिनी खुसरो को हाकी स्टिक प्रदान किया। ये तीनों खिलाड़ी बिलासपुर स्थित स्वर्गीय बी.आर. यादव राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में पिछले तीन सालों से हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

    उप मुख्यमंत्री श्री साव ने तीनों खिलाड़ियों के साई के परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में चयन पर खुशी जाहिर करते हुए बधाई दी। उन्होंने तीनों को भविष्य में अच्छे प्रदर्शन और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। जून-2022 से खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बहतराई के आवासीय प्रशिक्षण केंद्र में 67 खिलाड़ी अभी हॉकी का प्रशिक्षण ले रहे हैं। राज्य शासन और प्रशिक्षकों के सहयोग से यहां से लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार हो रहे हैं। हॉकी किट के वितरण के दौरान खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सहायक संचालक श्री ए. एक्का और राज्य प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में हॉकी के वरिष्ठ कोच श्री राकेश टोप्पो भी मौजूद थे।

    रायपुर के अल्फाज खान हाल ही में 12 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक बेंग्लुरू के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल हुए थे। वहां भारतीय हॉकी कोच श्री पी.आर. श्रीजेश ने देशभर के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को परखा। जशपुर की मधु सिदार और बोड़ला (कबीरधाम) की दामिनी खुसरो इसी महीने 16 जनवरी से 23 जनवरी तक आयोजित परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप में शामिल होंगी। इन तीनों खिलाड़ियों ने 15वीं हॉकी इण्डिया जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। इसी आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर परफॉर्मेंस असेसमेंट कैंप के लिए हुआ है। दामिनी खुसरो और मधु सिदार पिछले वर्ष  हुए वेस्ट जोन हॉकी चैम्पियनशिप में विजेता टीम का हिस्सा रही थी। इसमें मधु सिदार सर्वाधिक गोल कर टॉप स्कोरर रही थी।

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं को समर्पित बस्तर पंडुम 2026 के लोगो एवं थीम गीत का विमोचन

    बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच – मुख्यमंत्री श्री साय

    बस्तर पंडुम 2026 बनेगा विश्व–स्तरीय सांस्कृतिक आयोजन

    रायपुर : बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य एवं आकर्षक रूप में किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा में माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में बस्तर पंडुम का लोगो एवं थीम गीत का विमोचन किया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बस्तर पंडुम बस्तर की  सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का  सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि आज माँ दंतेश्वरी के इस पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ हो रहा है। यहाँ बस्तर पंडुम 2026 का लोगो और थीम गीत का विमोचन किया गया है। बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा है। यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकपरंपराओं, कला और विरासत का जीवंत मंच है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान हमारी आदिवासी परंपराओं में है। हम नृत्य, गीत, शिल्प, व्यंजन, वन-औषधि और देवगुडि़यों के माध्यम से इन परंपराओं और संस्कृति को जीते हैं। पिछले वर्ष हमने बस्तर पंडुम की शुरुआत की थी। समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह भी हम सबके बीच आए थे। इस वर्ष हम राष्ट्रपति , केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री तथा भारत में नियुक्त विभिन्न देशों के राजदूतों को भी आमंत्रित कर रहे हैं। पिछली बार बस्तर पंडुम को लेकर बस्तरवासियों का जो उत्साह और जोश देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था। इस बार हम इसे और अधिक भव्य बना रहे हैं, ताकि यहाँ की धरोहर राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर पंडुम की प्रतिस्पर्धाओं में विधाओं की संख्या सात से बढ़ाकर बारह कर दी गई है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ ही शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन-पेय, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। इस बार बस्तर पंडुम प्रतियोगिता का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि बस्तर की संस्कृति को सहेजते हुए नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के माध्यम से विकास का भी प्रतीक बनेगा।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही है। यह उत्सव बताता है कि बस्तर अब संघर्ष से नहीं, बल्कि सृजन और उत्सव से पहचाना जाएगा।

    उन्होंने बस्तरवासियों एवं सभी कलाकार भाई-बहनों से आग्रह किया कि वे अपनी कला के माध्यम से बस्तर का गौरव बढ़ाएँ और अधिक से अधिक संख्या में बस्तर पंडुम के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लें।

    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘पंडुम’ का अर्थ पर्व होता है। बस्तर में खुशियों को बढ़ाने के लिए समय-समय पर विभिन्न पर्व (पंडुम) मनाए जाते हैं। किसी भी पर्व की शुरुआत माता के आशीर्वाद से करने की परंपरा रही है। इसी तारतम्य में बस्तर पंडुम की शुरुआत माँ दंतेश्वरी के मंदिर परिसर से की जा रही है। बस्तर समृद्ध संस्कृति से परिपूर्ण है। यहाँ निवास करने वाली जनजातियों की कला, शिल्प, नृत्य, संगीत और खानपान को समाहित कर बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  बस्तर में शांति स्थापना के प्रयास सफल हो रहे हैं। मार्च 2026 तक लाल आतंक समाप्त होकर रहेगा।

    वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की कला, संस्कृति और परंपरा गर्व का विषय है। इस समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास बस्तर पंडुम के माध्यम से किया जा रहा है। पौराणिक काल में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान दंडकारण्य क्षेत्र में समय व्यतीत किया था। ऐसे पावन क्षेत्र में सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने की पहल सरकार ने की है।

    संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध बस्तर क्षेत्र की विभिन्न विधाओं को बढ़ावा देने और संरक्षित करने के लिए सरकार लगातार दूसरे वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन कर रही है। इस वर्ष बारह विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने मंदिर प्रांगण में ही संभाग के वरिष्ठ मांझी, चालकी, गायता, पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजनों तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकारों के साथ संवाद किया। कार्यक्रम को बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप एवं दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम आटमी ने भी संबोधित किया। इस दौरान बस्तर के पारंपरिक नेतृत्वकर्ता मांझियों और समाज प्रमुखों ने भी बस्तर पंडुम के आयोजन के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

    उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग में 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 29 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 2 से 6 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएँ होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं।इस बार के बस्तर पंडुम में विशेष रूप से भारत में विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया है।

    प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों एवं समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खानपान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुडि़यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

    इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों की 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग के रूप में नामित किया गया है।

    इस अवसर पर सांसद श्री महेश कश्यप, दंतेवाड़ा विधायक श्री चैतराम अटामी, बस्तर आईजी श्री सुंदरराज पी., संस्कृति विभाग के सचिव श्री रोहित यादव, डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से भारतीय ज्ञान परम्परा को नया आयाम: रायपुर में “एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से भारतीय ज्ञान परम्परा को नया आयाम: रायपुर में “एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से भारतीय ज्ञान परम्परा को नया आयाम : दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ शुभारंभ

    रायपुर : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली के एकीकरण पर केंद्रित “एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, रायपुर में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहब ने संयुक्त रूप से किया।

    भारतीय ज्ञान परम्परा अतीत नहीं, भविष्य की राह दिखाने वाली –टंकराम वर्मा

    उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महान विरासत को सुदृढ़ करने वाली नीति है। यह केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र एवं संतुलित शैली प्रस्तुत करती है।उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, महाभारत, आयुर्वेद, योग, गणित, दर्शन, ज्योतिष और खगोल शास्त्र जैसी भारतीय ज्ञान विधाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। गुरुकुल परम्परा में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिकता और समाज सेवा था।

     मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि आधुनिक समय में भारतीय ज्ञान परम्परा को पुनः शिक्षा व्यवस्था में आत्मसात करने की आवश्यकता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी दिशा में सशक्त कदम है। यह नीति प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 2047 विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

    आधुनिकता और संस्कृति का संतुलन ही नई पीढ़ी का मार्ग –गुरु खुशवंत साहेब

     कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आने वाली पीढ़ी को आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का कार्य करती है।

     उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और संस्कारयुक्त बनाया जा सके। यह नीति भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति का गहन अध्ययन और सामूहिक प्रयास आवश्यक – डॉ. अतुल कोठारी

     विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का गहन अध्ययन कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन समय की मांग है। सभी शिक्षाविदों को मिलकर इस नीति को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

    शिक्षाविदों और कुलपतियों की गरिमामयी उपस्थिति

     कार्यक्रम में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग डॉ. संतोष कुमार देवांगन, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेई, पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नोडल अधिकारी, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि एवं प्रदेशभर के महाविद्यालयों के प्राचार्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  • भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले को मुख्यमंत्री साय ने किया नमन, शिक्षा और समानता के संघर्ष को बताया समाज के लिए प्रेरणास्रोत

    भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले को मुख्यमंत्री साय ने किया नमन, शिक्षा और समानता के संघर्ष को बताया समाज के लिए प्रेरणास्रोत

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर किया नमन

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत की प्रथम महिला शिक्षिका महान समाज सुधारक एवं नारी सशक्तिकरण की अग्रदूत स्वर्गीय श्रीमती सावित्रीबाई फुले की जयंती (3 जनवरी) पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में महिला शिक्षा की अलख जगाई, जब समाज में अनेक कुरीतियाँ और बंधन व्याप्त थे। उन्होंने न केवल महिलाओं को शिक्षित होने के लिए प्रेरित किया, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर उन्हें शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए आजीवन संघर्ष किया। छुआछूत, लैंगिक भेदभाव और सामाजिक असमानताओं के विरुद्ध उनका संघर्ष साहस, संकल्प और सामाजिक चेतना का अद्वितीय प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्त्री अधिकारों, समानता और शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले का योगदान अमूल्य तथा अविस्मरणीय है। उनके विचार और कर्म आज भी समाज को प्रगतिशील दिशा देने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सावित्रीबाई फुले के जीवन से प्रेरणा लेते हुए शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें।

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को छेरछेरा पर्व की दी हार्दिक बधाई, सामाजिक समरसता और दानशीलता के इस लोकपर्व को बताया छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों को छेरछेरा पर्व की दी हार्दिक बधाई, सामाजिक समरसता और दानशीलता के इस लोकपर्व को बताया छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकपर्व छेरछेरा के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छेरछेरा महादान, सामाजिक समरसता और दानशीलता का प्रतीक पर्व है, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध, गौरवशाली और मानवीय मूल्यों से ओत-प्रोत परंपरा को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता है। नई फसल घर आने की खुशी में यह पर्व पौष मास की पूर्णिमा को बड़े हर्ष और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी दिन मां शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है, जो अन्न, प्रकृति और जीवन के संरक्षण का संदेश देती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा ग्रहण की थी। इसी परंपरा के अनुरूप छेरछेरा पर्व पर धान के साथ-साथ साग-भाजी, फल एवं अन्य अन्न का दान कर लोग परस्पर सहयोग, करुणा और मानवता का परिचय देते हैं।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छेरछेरा पर्व हमें समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और साझा समृद्धि की भावना को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से इस लोकपर्व को सद्भाव, उल्लास और पारंपरिक मूल्यों के साथ मनाने का आह्वान किया।

  • विश्व खेल मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 वर्षों के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय खेलों का ऐतिहासिक कायाकल्प, खेलो इंडिया से ओलंपिक सपनों तक

    विश्व खेल मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 वर्षों के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय खेलों का ऐतिहासिक कायाकल्प, खेलो इंडिया से ओलंपिक सपनों तक

    विश्व में भारतीय खिलाड़ियों का बढ़ता प्रभाव : भारत में खेलों के सर्वकालीन, सर्वश्रेष्ठ चिंतक, सुधारक – नरेन्द्र मोदी

    रायपुर : समय बड़ी तेजी के साथ निकल रहा है। भारत को पिछले 78 वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में मिली सफलता की चर्चा भरपूर होती है। परंतु खेलकूद एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतिभागियों की 2014 के बाद उपस्थिति पर अपेक्षाकृत ज्यादा जानकारी प्रकाश में आ रही है। वास्तव में यही वे 11 वर्ष हैं जिस दौरान नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने भारत को खेलकूद के विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए 2014 से लगातार प्रयास जारी रखा है।

    विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाले देश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का ना होना अस्वीकार तथा असंभव है। इस विश्वास के साथ भारत के प्रधानमंत्री पद पर सत्तारूढ़ होते ही नरेन्द्र मोदी ने भारत के खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी पहली बार सांसद बने लेफ्टि कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौर को सौंप दिया। जिन्होंने स्वयं 2004 एथेंस के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में निशानेबाजी में हमारे देश के लिए रजत पदक जीता था।

    फिर प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केंद्रीय खेल मंत्री ने उच्च खेल प्रशासनिक एवम् भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के अनुभवी अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन से जुड़े खेल प्रतिभाओं की खोज खबर लेने की योजना बनाई। जिसे खेलो इंडिया नाम देकर 2016-2017 से पूरे भारत में लागू किया गया। इसके जरिए प्रमुखत: भारत के ग्रामीण, वनांचल, पिछड़े इलाके से खेलो इंडिया यूथ गेम्स, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स,खेलो इंडिया बीच गेम्स, खेलो इंडिया विंटर गेम्स आदि के माध्यम से ग्रामीण अंचल की खेल प्रतिभाओं को खोजने, प्रशिक्षित करने का अनविरल प्रयास आरंभ हुआ वह आज भी जारी है।

    ऐसे आयोजन में अलग-अलग आयु वर्ग के युवा भाग लेते हैं। नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में आरंभ खेलो इंडिया कार्यक्रम से खेलों के बुनियादी ढांचे को न सिर्फ मजबूती मिली है। बल्कि इससे युवाओं को भागीदारी और समग्र विकास का अवसर मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत को खेलों की दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश बनाने के लिए न सिर्फ ज़मीनी प्रतिभाओं को चुनने का लक्ष्य दिया बल्कि इसके क्रियान्वयन के लिए 2013-14 के खेल बजट 792.72 करोड़ रुपये के मुकाबले 2025-26 के बजट में 3794 रुपये आबंटित किये गये जो कि 2014-15 की तुलना में 130.0% अधिक है। खेलो इंडिया के अंतर्गत 1000 हजार करोड़ राशि आबंटित की गई जो कि अधोसंरचना निर्माण, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, अत्याधुनिक खेल सामग्री आदि के लिए था.

    इस प्रकार हम पाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को विश्व खेल मंच में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। खेलकूद को भारत के गांव- गांव तक पहुंचाकर देश के नागरिकों को स्वस्थ रखने की उनका यह अचूक प्रयास कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा। खेलकूद में योगासन को बढ़ावा देकर जगह-जगह ओपन खेल व्यायाम शाला खोलकर तथा फिट इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से हमारे देश को “स्वस्थ नागरिक ,प्रतिभाशाली खिलाड़ी “देने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प अत्यंत सराहनीय है। 2025 के आज अंतिम दिन भारतीय खेल परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 2025 में ही उनके द्वारा 2036 के ओलंपिक खेलों के अहमदाबाद में और यही पर 2030 के राष्ट्रमंडल खेल आयोजित किए जाने का संकल्प हम सब देश वासियों के लिए गौरव की बात है. इसीलिए इस बात को स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं की हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 2025 के भारतीय खेल परिदृश्य के सबसे महान विभूति हैं.

  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने एक दिवसीय दंतेवाड़ा प्रवास के दौरान आज बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के पावन मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने मां  दंतेश्वरी के चरणों में नमन करते हुए समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, शांति और सर्वांगीण कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, सांसद श्री महेश कश्यप, विधायक श्री चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी,  संस्कृति सचिव श्री रोहित यादव, आईजी बस्तर श्री सुंदरराज पी., डीआईजी श्री कमलोचन कश्यप, कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव राय सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

  • पॉवर कंपनी मुख्यालय में आधार-सक्षम बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली शुरू, पहले दिन 1274 अधिकारियों-कर्मचारियों ने दर्ज की हाजिरी

    पॉवर कंपनी मुख्यालय में आधार-सक्षम बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली शुरू, पहले दिन 1274 अधिकारियों-कर्मचारियों ने दर्ज की हाजिरी

    पॉवर कंपनी मुख्यालय परिसर में बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली शुरू

    रायपुर : छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज के डंगनिया, रायपुर स्थित मुख्यालय परिसर में आज आधार सक्षम बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली प्रारंभ कर दी गई। इस प्रणाली के अंतर्गत यहां पदस्थ समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुबह 10 बजे उपस्थिति देते वक्त तथा शाम 5.30 बजे कार्यालय छोड़ते वक्त अपने आने एवं जाने की बायोमैट्रिक छाप अंकित करनी होगी।

    राज्य शासन की तर्ज पर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी, छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी तथा छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के संयुक्त कार्यालय परिसर में 7 स्थानों पर बायोमैट्रिक डिवाइसेस लगाई गई हैं। यह सुविधा भी दी गई है कि आधार सक्षम बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली में अपने कार्यालय की निर्धारित परिधि में आकर अपने मोबाइल फोन में डाउनलोडेड ऐप से भी यह कार्य किया जा सकता है। इस प्रणाली के लिए एनआइसी के सॉफ्टवेयर तथा आधार से एल-1 प्रमाणित डिवाइस का उपयोग किया जा रहा है। विद्युत कंपनी मुख्यालय परिसर में आज तीनों कंपनियों के प्रबंध निदेशकगण यथा श्री एस.के. कटियार, श्री आर.के. शुक्ला तथा श्री भीमसिंह कंवर सहित समस्त कार्यपालक निदेशक, मुख्य अभियंता से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक ने अपनी बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज कराई। प्रथम दिन 1,274 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति बहुत ही सुचारू रूप से दर्ज की गई। इसमें किसी तरह का कोई व्यवधान नहीं आया। प्रबंध निदेशक, पारेषण श्री आर.के. शुक्ला की पहल पर श्री ए.एम. परियल, मुख्य अभियंता, मानव संसाधन के कुशल मार्गदर्शन में समर्पित टीम द्वारा अत्यंत अल्प समय में इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में स्थित पॉवर कंपनी के अन्य कार्यालयों में भी यह प्रणाली जल्द ही लागू की जाएगी।