विश्व में भारतीय खिलाड़ियों का बढ़ता प्रभाव : भारत में खेलों के सर्वकालीन, सर्वश्रेष्ठ चिंतक, सुधारक – नरेन्द्र मोदी
रायपुर : समय बड़ी तेजी के साथ निकल रहा है। भारत को पिछले 78 वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में मिली सफलता की चर्चा भरपूर होती है। परंतु खेलकूद एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतिभागियों की 2014 के बाद उपस्थिति पर अपेक्षाकृत ज्यादा जानकारी प्रकाश में आ रही है। वास्तव में यही वे 11 वर्ष हैं जिस दौरान नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने भारत को खेलकूद के विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए 2014 से लगातार प्रयास जारी रखा है।
विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाले देश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का ना होना अस्वीकार तथा असंभव है। इस विश्वास के साथ भारत के प्रधानमंत्री पद पर सत्तारूढ़ होते ही नरेन्द्र मोदी ने भारत के खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी पहली बार सांसद बने लेफ्टि कर्नल राज्यवर्द्धन सिंह राठौर को सौंप दिया। जिन्होंने स्वयं 2004 एथेंस के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में निशानेबाजी में हमारे देश के लिए रजत पदक जीता था।
फिर प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केंद्रीय खेल मंत्री ने उच्च खेल प्रशासनिक एवम् भारतीय खेल प्राधिकरण (साईं) के अनुभवी अधिकारियों के साथ मिलकर जमीन से जुड़े खेल प्रतिभाओं की खोज खबर लेने की योजना बनाई। जिसे खेलो इंडिया नाम देकर 2016-2017 से पूरे भारत में लागू किया गया। इसके जरिए प्रमुखत: भारत के ग्रामीण, वनांचल, पिछड़े इलाके से खेलो इंडिया यूथ गेम्स, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स,खेलो इंडिया बीच गेम्स, खेलो इंडिया विंटर गेम्स आदि के माध्यम से ग्रामीण अंचल की खेल प्रतिभाओं को खोजने, प्रशिक्षित करने का अनविरल प्रयास आरंभ हुआ वह आज भी जारी है।
ऐसे आयोजन में अलग-अलग आयु वर्ग के युवा भाग लेते हैं। नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में आरंभ खेलो इंडिया कार्यक्रम से खेलों के बुनियादी ढांचे को न सिर्फ मजबूती मिली है। बल्कि इससे युवाओं को भागीदारी और समग्र विकास का अवसर मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने भारत को खेलों की दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश बनाने के लिए न सिर्फ ज़मीनी प्रतिभाओं को चुनने का लक्ष्य दिया बल्कि इसके क्रियान्वयन के लिए 2013-14 के खेल बजट 792.72 करोड़ रुपये के मुकाबले 2025-26 के बजट में 3794 रुपये आबंटित किये गये जो कि 2014-15 की तुलना में 130.0% अधिक है। खेलो इंडिया के अंतर्गत 1000 हजार करोड़ राशि आबंटित की गई जो कि अधोसंरचना निर्माण, खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, अत्याधुनिक खेल सामग्री आदि के लिए था.
इस प्रकार हम पाते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत को विश्व खेल मंच में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। खेलकूद को भारत के गांव- गांव तक पहुंचाकर देश के नागरिकों को स्वस्थ रखने की उनका यह अचूक प्रयास कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा। खेलकूद में योगासन को बढ़ावा देकर जगह-जगह ओपन खेल व्यायाम शाला खोलकर तथा फिट इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से हमारे देश को “स्वस्थ नागरिक ,प्रतिभाशाली खिलाड़ी “देने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प अत्यंत सराहनीय है। 2025 के आज अंतिम दिन भारतीय खेल परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। 2025 में ही उनके द्वारा 2036 के ओलंपिक खेलों के अहमदाबाद में और यही पर 2030 के राष्ट्रमंडल खेल आयोजित किए जाने का संकल्प हम सब देश वासियों के लिए गौरव की बात है. इसीलिए इस बात को स्वीकार करने में कोई झिझक नहीं की हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 2025 के भारतीय खेल परिदृश्य के सबसे महान विभूति हैं.
