Category: छत्तीसगढ

  • सुशासन तिहार में प्रतिभा का सम्मान: विष्णुदेव साय ने 93.5% अंक लाने वाले मेधावी छात्र गिरवर पटेल को किया सम्मानित, कहा—युवा ही प्रदेश का भविष्य

    सुशासन तिहार में प्रतिभा का सम्मान: विष्णुदेव साय ने 93.5% अंक लाने वाले मेधावी छात्र गिरवर पटेल को किया सम्मानित, कहा—युवा ही प्रदेश का भविष्य

    सुशासन तिहार: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मेधावी छात्र गिरवर पटेल को किया सम्मानित

    रायपुर : सुशासन तिहार के तहत जारी राज्यव्यापी दौरे के दौरान खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित जन चौपाल में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने का प्रेरक क्षण देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्राम बकरकट्टा के मेधावी छात्र गिरवर पटेल को सम्मानित किया। गिरवर पटेल ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 93.5 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मेरिट सूची में स्थान हासिल किया है। वर्तमान में वे रायपुर स्थित प्रयास आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत हैं।

    मुख्यमंत्री ने गिरवर की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रदेश का नाम रोशन करते हैं और अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बनते हैं। उन्होंने गिरवर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विद्यार्थियों को परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि हर छात्र अपने सपनों को साकार कर सके। गिरवर पटेल का सम्मान न केवल उनकी कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम है, बल्कि यह ग्रामीण अंचल के अन्य विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है।

  • आम के पेड़ तले सजी चौपाल बना भावनाओं का मंच: विष्णुदेव साय ने नवजात का नाम रखा “रविशंकर”, गांव में गूंज उठी खुशियों की तालियां

    आम के पेड़ तले सजी चौपाल बना भावनाओं का मंच: विष्णुदेव साय ने नवजात का नाम रखा “रविशंकर”, गांव में गूंज उठी खुशियों की तालियां

    एक माह के नवजात का मुख्यमंत्री ने किया नामकरण, “रविशंकर” नाम से गूंजा गांव का आंगन

    रायपुर : सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कबीरधाम जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में आगमन एक आत्मीय और भावनात्मक प्रसंग का साक्षी बना। आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर जब मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, तो वहां का वातावरण पूरी तरह से अपनत्व और विश्वास से भर गया। शासन और जनता के बीच की दूरी इस सहज संवाद में पूरी तरह समाप्त होती नजर आई।

    इसी दौरान ग्राम की निवासी श्रीमती ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और अत्यंत विनम्रता से अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण निवेदन था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी, विश्वास और आत्मीय जुड़ाव की गहराई साफ झलक रही थी।

    मुख्यमंत्री ने भी पूरे स्नेह और संवेदनशीलता के साथ इस आग्रह को स्वीकार किया और बच्चे के जन्म दिवस के बारे में जानकारी ली।जब श्रीमती बघेल ने बताया कि बालक का जन्म रविवार के दिन हुआ है, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उस नवजात का नाम “रविशंकर” रखा। नामकरण के इस क्षण ने वहां उपस्थित सभी ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी की चमक बिखेर दी। जैसे ही यह नाम घोषित हुआ, पूरा चौपाल स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और एक उत्सव जैसा माहौल बन गया।

    यह दृश्य जनप्रतिनिधि और आमजन के बीच गहरे विश्वास का प्रतीक भी बन गया।

    इस आत्मीय क्षण ने सुशासन तिहार की मूल भावना को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, जहां शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ा होता है।

    मुख्यमंत्री श्री साय का यह सहज और मानवीय व्यवहार यह दर्शाता है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन से जुड़कर उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना है।

  • “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए… मसाला बढ़िया से डालिए” – जब श्रमिक बहन ने मुख्यमंत्री को सिखाया काम : निर्माण स्थल पर मुख्यमंत्री का श्रमदान: श्रमिक बहनों के साथ की ईंट जोड़ाई

    “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए… मसाला बढ़िया से डालिए” – जब श्रमिक बहन ने मुख्यमंत्री को सिखाया काम : निर्माण स्थल पर मुख्यमंत्री का श्रमदान: श्रमिक बहनों के साथ की ईंट जोड़ाई

    रायपुर : सुशासन तिहार के तहत प्रदेशभर में चल रहे औचक निरीक्षण और जनसंवाद के क्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम जिले के ग्राम लोखन में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने सुशासन के ध्येय को और अधिक जीवंत बना दिया।

    निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल औपचारिक समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने उस प्रक्रिया का हिस्सा बनना चुना, जो आमजन के जीवन को सीधे प्रभावित करती है। उनके इस व्यवहार ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुशासन केवल नीति और कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर उसे महसूस करने और जीने की प्रक्रिया है।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में कार्य कर रहीं श्रमिक बहनों के बीच जाकर कुछ समय उनके साथ ईंट जोड़ाई में हाथ बँटाया। 

    इसी दौरान श्रमिक बहन संगीता ने पूरे आत्मीय अधिकार और सहजता के साथ मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री से कहा – “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए, मसाला बढ़िया से डालिए।” यह संवाद एक सामान्य वाक्य से कहीं अधिक था; इसमें वह विश्वास झलकता है, जो आज सरकार और जनता के बीच विकसित हो रहा है। यह वह स्थिति है, जहाँ आम नागरिक बिना झिझक अपनी बात रखता है और नेतृत्व उसे उसी सहजता से स्वीकार करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जनता के साथ मिलकर धरातल पर साकार करना है। उन्होंने कहा कि जब शासन और जनता के बीच संवाद, विश्वास और सहभागिता का रिश्ता बनता है, तभी विकास की प्रक्रिया प्रभावी और स्थायी बनती है। उनके अनुसार, यही आत्मीयता और साझेदारी सुशासन की सबसे बड़ी ताकत है।

    इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण हों और श्रमिकों के लिए पेयजल, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

    सुशासन तिहार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता, सहभागिता और विश्वास पर आधारित एक जीवंत व्यवस्था बन चुका है। यहाँ सरकार और जनता के बीच दूरी नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और साझेदारी का संबंध है – और यही संबंध प्रदेश के समग्र विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रहा है।

  • निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री को श्रमिकों ने दिया भोजन का न्यौता: साथ बैठकर खाया बोरे बासी और आमा चटनी, भोजन के साथ साथ मुख्यमंत्री लेते रहे योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक

    निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री को श्रमिकों ने दिया भोजन का न्यौता: साथ बैठकर खाया बोरे बासी और आमा चटनी, भोजन के साथ साथ मुख्यमंत्री लेते रहे योजनाओं के क्रियान्वयन का फीडबैक

    जमीन पर भोजन, ज़मीन पर फैसला: पेयजल योजना को जल्द शुरू करने के निर्देश

    पहाड़ी इलाके में पेयजल की दिक्कत पर कहा – प्रोजेक्ट तत्काल स्वीकृत कर धरातल पर शुरू करवाएं काम

    रायपुर : सुशासन तिहार के अंतर्गत आज कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उनका यह दौरा केवल कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज जुड़ाव और संवेदनशील नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बन गया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से वहां कार्यरत श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया और सभी ने उनका आत्मीय स्वागत किया।

    निरीक्षण के दौरान वहां काम कर रही महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को बड़े स्नेह और आग्रह के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस सादगी भरे निमंत्रण को मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए उनसे पूछा कि वे खाने में क्या लेकर आई हैं। महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से पारंपरिक भोजन—बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लेकर आई हैं। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने उसी सहजता से उनके साथ भोजन करने का निर्णय लिया।

    मुख्यमंत्री श्री साय श्रमिकों के बीच जमीन पर बैठ गए और उनके टिफिन से ही भोजन ग्रहण किया। बोरे बासी और आमा चटनी का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी अपनी जीवनशैली और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। 

    भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से बात करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय  ने शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने श्रमिक महिलाओं से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महिलाओं ने भी खुले मन से अपने अनुभव साझा किए, जिससे मुख्यमंत्री को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सीधा फीडबैक मिला।

    जब मुख्यमंत्री ने गांव की प्रमुख समस्याओं के बारे में पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की समस्या लगातार बनी रहती है। बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक कारगर नहीं रह पाते, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की दिक्कत और अधिक बढ़ जाती है। इस समस्या को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और तत्काल समाधान की दिशा में पहल करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से पेयजल व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र के 26 गांवों के लिए एक विशेष पेयजल योजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत दूरस्थ जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की योजना है। यह योजना तकनीकी रूप से तैयार है और इसे जल्द ही क्रियान्वित किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि इस योजना को यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान कर धरातल पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं समय पर और प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि हमारी सुशासन सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

  • एक ग्रामीण का न्योता, मुख्यमंत्री का अपनापन – प्रधानमंत्री आवास से साकार हुआ सपना, मुख्यमंत्री ने कराया गृह प्रवेश ; मुख्यमंत्री श्री साय ने पूछा “आवास कोन भेजिस, मोहन ने कहा – मोदी जी ने”

    एक ग्रामीण का न्योता, मुख्यमंत्री का अपनापन – प्रधानमंत्री आवास से साकार हुआ सपना, मुख्यमंत्री ने कराया गृह प्रवेश ; मुख्यमंत्री श्री साय ने पूछा “आवास कोन भेजिस, मोहन ने कहा – मोदी जी ने”

    रायपुर : कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में आज एक अत्यंत भावनात्मक, आत्मीय और जनसरोकारों से जुड़ा दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने एक सामान्य ग्रामीण के सादे निमंत्रण को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे अपने व्यवहार से एक यादगार क्षण में परिवर्तित कर दिया। गांव में उनके आगमन से जहां उत्साह और जिज्ञासा का माहौल बना हुआ था, वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने शासन और आमजन के बीच के आत्मीय संबंधों को भी जीवंत रूप में सामने रखा।

    ग्राम लोखान निवासी मोहन मरावी के नए पक्के घर का आज गृह प्रवेश कार्यक्रम था। जैसे ही उन्हें यह जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री गांव के दौरे पर हैं, वे बिना देर किए सीधे उनके पास पहुंचे और अपने घर आने का न्योता दे दिया। यह एक ग्रामीण का असाधारण प्रेम भरा अनुरोध था, जिसे मुख्यमंत्री ने उसी सहजता और विनम्रता के साथ स्वीकार किया और उनके घर पहुंचकर इस अवसर को विशेष बना दिया।

    मुख्यमंत्री के मोहन मरावी के घर पहुंचते ही वहां एक आत्मीय और पारिवारिक वातावरण बन गया। उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के पूरे स्नेह और अपनत्व के साथ नारियल फोड़ा, दीप प्रज्वलित किया और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ गृह प्रवेश की रस्म संपन्न कराई। इस दौरान परिवार के सदस्यों के चेहरे पर जो संतोष, गर्व और खुशी झलक रही थी, वह इस बात का प्रतीक थी कि उनके सपनों का घर अब साकार हो चुका है। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने भी इस क्षण को उत्साहपूर्वक देखा और मुख्यमंत्री की सादगीपूर्ण शैली की सराहना की।

    इस आत्मीय संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए मोहन से पूछा—“आवास कोन भेजिस?” इस पर मोहन ने सहजता के साथ उत्तर दिया—“मोदी जी ने।” यह छोटा-सा संवाद पूरे माहौल को भावनात्मक गहराई से भर गया और यह दर्शाता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी का क्रियान्वयन सीधे लोगों के जीवन में किस प्रकार आशा और विश्वास का संचार कर रहा है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने मोहन मरावी और उनके परिवार से विस्तार से बातचीत करते हुए उनके नए घर के निर्माण की प्रक्रिया के बारे में जाना। मोहन ने बताया कि उनका यह घर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त राशि और अपने परिश्रम से तैयार हुआ है। पहले उनका घर कच्चा था, लेकिन वर्ष 2024–25 में आवास स्वीकृत होने के बाद उनके भीतर पक्का घर बनाने का हौसला जागा। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्वयं ईंट बनाकर चार कमरों का सुदृढ़ और व्यवस्थित घर खड़ा किया, जो उनके श्रम, संकल्प और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री ने घर की गुणवत्ता, संरचना और उसमें झलक रही मेहनत की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि जब शासन की योजनाएं वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं और उसमें लोगों की अपनी मेहनत व सहभागिता जुड़ती है, तभी विकास का वास्तविक स्वरूप सामने आता है। उन्होंने इस पहल को आत्मनिर्भरता, जनभागीदारी और सकारात्मक बदलाव का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ही राज्य के समग्र विकास की नींव को मजबूत करते हैं।

    मोहन मरावी ने यह भी बताया कि उन्हें योजना के तहत राशि तीन किस्तों में प्राप्त हुई, जिसका उन्होंने पूरी जिम्मेदारी और समझदारी से उपयोग किया। इसी के परिणामस्वरूप वे अपने परिवार के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक पक्का घर तैयार कर सके।

    मुख्यमंत्री ने पूरे परिवार को नए घर की हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और इस अवसर को गांव के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया, जो यह संदेश देता है कि संकल्प, श्रम और शासन की योजनाओं के समन्वय से हर सपना साकार हो सकता है।

  • सपनों को लक्ष्य बनाकर मेहनत करें, सफलता खुद कदम चूमेगी”: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बलरामपुर-रामानुजगंज के मेधावी छात्रों को किया सम्मानित, उज्ज्वल भविष्य का दिया भरोसा

    सपनों को लक्ष्य बनाकर मेहनत करें, सफलता खुद कदम चूमेगी”: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बलरामपुर-रामानुजगंज के मेधावी छात्रों को किया सम्मानित, उज्ज्वल भविष्य का दिया भरोसा

    सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी – मुख्यमंत्री श्री साय

    बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं-12वीं के मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान

    रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हौसला बुलंद रखना सबसे आवश्यक है।

    बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा व्यक्त की, वहीं कुछ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है।

    उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने इस उपलब्धि के लिए विद्यार्थियों के अभिभावकों एवं शिक्षकों को भी बधाई देते हुए कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे उनके मार्गदर्शन, सहयोग और त्याग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उत्कृष्ट विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री से मिलने का मिला अवसर

    इस अवसर पर जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के श्री कृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की कुमारी प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता, कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

  • वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का बड़ा दावा: स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नहीं तो ‘विकसित भारत 2047’ का खेल सपना अधूरा—टॉप-5 स्पोर्ट्स नेशन बनने के लिए जमीनी सुधार की सख्त जरूरत

    वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का बड़ा दावा: स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नहीं तो ‘विकसित भारत 2047’ का खेल सपना अधूरा—टॉप-5 स्पोर्ट्स नेशन बनने के लिए जमीनी सुधार की सख्त जरूरत

    विकसित भारत 2047 : खेल में भारत को प्रथम पांच स्थानों तक पहुंचाने का संकल्प

    शालाओं में व्यायाम शिक्षकों की नियुक्ति को देनी होगी प्राथमिकता

    आलेख .., जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार , टीवी कमेंटेटर, रायपुर.

    रायपुर : हमारे देश में पिछले सात आठ वर्षों में अलग-अलग खेल में प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरकर सामने आ रहे हैं। यह हमारे केंद्र सरकार की नीति का स्पष्ट परिणाम है। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा, निशानेबाजी में मनु भाकर कुश्ती में अमन सेहरावत, तीरंदाजी में भजन कौर, अंकिता भगत लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर ,100 मीटर बाधा दौड़ में ज्योति याराजी, 20 किमी. पैदल चाल में प्रियंका गोस्वामी, बैडमिंटन में लक्ष्य सेन, मुक्केबाजी में निखत जरीन लवलीना बोरगोहेन, घुड़सवारी में अंशु अग्रवाल, फाउद मिर्जा , गोल्फ में अदिति अशोक, जुडो में तुलिका मान, तैराकी में श्रीद्धी नटराज, छिनिधी, देसिंधु, भारोत्तोलन में मीराबाई चानू और सायकलिंग में इसो अलबेन, रोनाल्डो सिंह क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी आदि प्रमुख हैं।

    उपरोक्त खिलाड़ियों की सफलता के पीछे भारत सरकार के खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (सांईं) तथा कुछ प्राइवेट संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से खोजी गई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण मार्गदर्शन और प्रदत्त सुविधाओं के कारण भारत में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हमारे देश में 2014 मई के बाद खेलकूद में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक पदक प्राप्त करने के की जो कोशिश आरंभ हुई है। उसकी जितनी सराहना की जाए कम है लेकिन इस प्रयास में एक कमी आज भी नजर आती है।

    भारत में खेलकूद की शिक्षा के लिए महाविद्यालय और विश्वविद्यालय है। परंतु होनहारों को उसका लाभ मिलता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। आज न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि भारत के कई राज्यों में बी.पी.एड.,एम.पी.एड तथा छोटे शिक्षण केंद्रों में सी.पी.एड. या डी.पी.एड.जैसे शारीरिक शिक्षा से संबंधित प्रमाण पत्र, पत्रोपाधि उपाधि और स्नातकोत्तर उपाधि छात्र छात्राए प्राप्त कर रहे हैं।

    अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर वे क्या कर रहे हैं ? जबकि उत्तीर्ण होने वालों की संख्या कोई कम नहीं है ? भारत को अगर खेलमय राष्ट्र बनाना है।तो ऐसे शारीरिक शिक्षा प्राप्त युवाओं की मदद केंद्र व राज्य सरकार को लेनी चाहिए किसी खिलाड़ी को विश्व स्तर पर पदक जीतने लायक बनाना है तो उन सभी को उनकी प्रतिभा के अनुरूप बचपन से ही प्रशिक्षित किया जाना होगा। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी शुरूआती तौर पर शालाओं में पदस्थ शारीरिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को दी जानी चाहिए।

    एक तरफ जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने आगामी 12 वर्षों में भारत में राष्ट्रमंडल खेल 2030, यूथ ओलंपिक 2030, ओलंपिक खेल 2036, एशियाई खेल 2038 में आयोजित करवाने के पक्षधर हैं तो फिर शालेय शिक्षा से ही बच्चों, किशोरों को उनकी पसंद के खेल की कोचिंग शुरू कर देने से हमारे देश में खेलकूद का व्यापक माहौल बनेगा। इसमें भारतीय खिलाड़ियों को ओलंपिक खेलों के 28 कोर गेम्स पर विशेष ध्यान देकर शाला स्तर से उभरते हुए खिलाडिय़ों को चुनना चाहिए जिन्हें शाला में पदस्थ व्यायाम शिक्षक या राष्ट्रीय खेल संस्थान एनआईएस से सर्टिफिकेट प्रमाण पत्र या खेल प्रशिक्षण में उपाधि प्राप्त कोच के द्वारा कम उम्र से ही खेल की बारिकियों को सिखाना होगा।

     आज छत्तीसगढ़ ही नहीं देशभर की शासकीय या निजी शालाओं में जहां पहली से बारहवीं तक पढ़ाई होती है वहां शारीरिक शिक्षकों या विभिन्न खेलों के कोच की नियुक्ति बहुत जरूरी है। भारत में बड़े आयोजनों से करीब 10वर्ष पूर्व आज हम नन्हें बच्चों को खेल में कैरियर बनाने की शुरुआत करेंगे तब हमारे पास विश्वस्तरीय खिलाड़ी होंगे और तभी वर्तमान सरकार के विकसित 2047 का संकल्प पूरा हो सकेगा,.इस तरह के सुझाओं को खेल प्रशासकों को पूरी गंभीरता से लेना होगा तभी भारत विश्व में पांच स्थानों पर अवश्य ही जगह बना पाएगा।

  • ‘सड़क से ही दिखेगा विकास’—CM साय का सख्त एक्शन मोड: विष्णुदेव साय ने समीक्षा बैठक में PWD अधिकारी को लगाई कड़ी फटकार, दो टूक—“सही जानकारी लेकर आओ”, मानसून से पहले हर सड़क दुरुस्त करने के दिए सख्त निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई तय

    ‘सड़क से ही दिखेगा विकास’—CM साय का सख्त एक्शन मोड: विष्णुदेव साय ने समीक्षा बैठक में PWD अधिकारी को लगाई कड़ी फटकार, दो टूक—“सही जानकारी लेकर आओ”, मानसून से पहले हर सड़क दुरुस्त करने के दिए सख्त निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई तय

    सरकार का विकास सड़क से ही दिखता है, बारिश के पहले कोई भी रोड ऐसी न हो जिससे लोगों को दिक्कत हो: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने सही जानकारी नहीं होने पर PWD के अधिकारी को फटकार लगाई और कहा कि *मीटिंग से निकलकर बाहर जाओ और अपने सचिव से बात करके सही जानकारी बताओ।

    हम सभी को अपने अपने कार्यालयों को सेवा तीर्थ समझना है, ये सेवा करने के मंदिर हैं: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

    अपने जिले में अपने अधीनस्थ अधिकारियों के काम का मूल्यांकन करें कलेक्टर, जरूरत पड़ने पर करें कठोर कार्रवाई

    मुख्यमंत्री हेल्प जल्द होगी शुरू, टोल फ्री नंबर पे दर्ज होगी समस्या: मुख्यमंत्री

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुशासन तिहार में बलरामपुर प्रवास के दौरान आयोजित समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सख्त संदेश दिया।  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजनाओं की प्रगति के साथ-साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की। बैठक के दौरान उस समय स्थिति गंभीर हो गई, जब लोक निर्माण विभाग का एक अधिकारी सड़क मरम्मत की सही जानकारी प्रस्तुत नहीं कर पाया। इस पर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा, “मीटिंग से बाहर जाइए, अपने सचिव से बात करिए और सही जानकारी लेकर आइए।” इसके बाद बैठक कक्ष में सन्नाटा छा गया और यह स्पष्ट हो गया कि अब कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम सभी जनता के सेवक हैं और अपने-अपने कार्यालयों को सेवा तीर्थ की तरह देखें, जहां आम जनता की सेवा ही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार का विकास सबसे पहले सड़कों पर दिखाई देता है, इसलिए मानसून आने से पहले एक भी सड़क खराब नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि सभी सड़कों की मरम्मत समय-सीमा में पूर्ण की जाए और विशेष रूप से आबादी क्षेत्रों की सड़कों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कार्य में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने घोषणा की कि राज्य के सभी राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा, जिससे नागरिकों को खसरा-नक्शा डिजिटल हस्ताक्षर के साथ घर बैठे उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री हेल्पलाइन” सेवा भी शीघ्र प्रारंभ की जाएगी, जिसमें टोल फ्री नंबर के माध्यम से आमजन अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि राजस्व मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    मुख्यमंत्री ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) निधि के उपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस निधि की अधिकतम राशि खनन प्रभावित गांवों के विकास में खर्च की जानी चाहिए। मुख्यालय के नाम पर इस राशि का उपयोग स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने बलरामपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज संसाधनों के बेहतर और पारदर्शी उपयोग के निर्देश भी दिए।

     मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी नागरिक को पेयजल के लिए भटकना न पड़े और जहां आवश्यकता हो, वहां टैंकर के माध्यम से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गर्मी और बारिश के बीच संभावित मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी करने को कहा, साथ ही किसानों के लिए धान, बीज और खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के आचरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए, उनकी समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना जाए और समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों का नियमित मूल्यांकन करें और आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई से भी न हिचकें।

     बैठक में जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद सरगुजा श्री चिंतामणि महाराज, विधायक सामरी श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा, विधायक प्रतापपुर श्रीमती शकुंतला पोर्ते तथा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनि निकुंज सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • पुलिस जनचौपाल : मोबाइल से जाल, सड़क पर खतरा—पुलिस ने खोले अपराध के नए तरीके, ग्रामीणों में बढ़ी सतर्कता ! नशे और साइबर ठगी पर बड़ा वार—जनचौपाल में पुलिस का सख्त संदेश,अब नहीं बख्शे जाएंगे अपराधी !

    पुलिस जनचौपाल : मोबाइल से जाल, सड़क पर खतरा—पुलिस ने खोले अपराध के नए तरीके, ग्रामीणों में बढ़ी सतर्कता ! नशे और साइबर ठगी पर बड़ा वार—जनचौपाल में पुलिस का सख्त संदेश,अब नहीं बख्शे जाएंगे अपराधी !

    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन पर जिले के सभी थाना क्षेत्रों में लगातार जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में कल थाना तमनार क्षेत्र के ग्राम महलोई में थाना प्रभारी निरीक्षक प्रशांत राव आहेर के नेतृत्व में पुलिस जनचौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। इस जनचौपाल में टीआई प्रशांत राव द्वारा सरल और विस्तृत तरीके से समझाते हुए ग्रामीणों को अपराधों के प्रति सजग और जागरूक किया गया।

    जनचौपाल में थाना प्रभारी ने विशेष रूप से महिला सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नाबालिगों और महिलाओं से संबंधित अपराध जैसे छेड़खानी, घरेलू हिंसा, पॉक्सो एक्ट, मानव तस्करी और अपहरण जैसे मामलों में वर्तमान कानून के तहत कठोर सजा और त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को अच्छे संस्कार दें ताकि वे किसी के बहकावे में न आएं। साथ ही “हेलो सिस्टर” हेल्पलाइन नंबर 9429270533 की जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी महिला पीड़ित को तत्काल पुलिस सहायता और परामर्श उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त डायल 112, पुलिस कंट्रोल रूम 9479193299 सहित थाना प्रभारी एवं वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क नंबर भी साझा किए गए।

    साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे को देखते हुए थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को विशेष रूप से सचेत किया। उन्होंने बताया कि मोबाइल या सोशल मीडिया के माध्यम से अज्ञात व्यक्तियों पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। किसी भी स्थिति में अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या ओटीपी साझा न करें और किसी भी अनजान लिंक या लालच भरे ऑफर से दूर रहें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

    इसके साथ ही सड़क सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया। ग्रामीणों को समझाया गया कि तेज गति से वाहन चलाना, बिना हेलमेट के दोपहिया चलाना और शराब पीकर वाहन चलाना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है। सभी से यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई।

  • विद्यार्थियों के भविष्य का बड़ा आधार बनेगा नालंदा परिसर: विष्णुदेव साय ने बलरामपुर में 4.48 करोड़ के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट का किया निरीक्षण, समय-सीमा और गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

    विद्यार्थियों के भविष्य का बड़ा आधार बनेगा नालंदा परिसर: विष्णुदेव साय ने बलरामपुर में 4.48 करोड़ के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट का किया निरीक्षण, समय-सीमा और गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

    निर्माणाधीन नालंदा परिसर का मुख्यमंत्री श्री साय ने किया निरीक्षण: गुणवत्तापूर्ण एवं समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के दिए निर्देश

    रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर जिला मुख्यालय में 4 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन नालंदा परिसर का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, क्योंकि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने परिसर में उपयोग की जा रही निर्माण सामग्री, कार्य की प्रगति तथा प्रस्तावित सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और गुणवत्ता के सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नालंदा परिसर में आधुनिक ई-लाइब्रेरी, प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित पुस्तकें, समृद्ध अध्ययन सामग्री एवं पत्र-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे युवाओं को एक समग्र और अनुकूल अध्ययन वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने निर्देशित किया कि कार्य में तेजी लाते हुए परिसर को शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि जिले के विद्यार्थियों को इसका लाभ जल्द से जल्द मिल सके।

    उन्होंने निरीक्षण के दौरान परिसर में प्रस्तावित अन्य सुविधाओं की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए और कहा कि नालंदा परिसर राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत युवाओं को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परिसर जिले के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान और अवसर का एक सशक्त केंद्र बनेगा तथा उनके भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।