वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का बड़ा दावा: स्कूलों में व्यायाम शिक्षक नहीं तो ‘विकसित भारत 2047’ का खेल सपना अधूरा—टॉप-5 स्पोर्ट्स नेशन बनने के लिए जमीनी सुधार की सख्त जरूरत

विकसित भारत 2047 : खेल में भारत को प्रथम पांच स्थानों तक पहुंचाने का संकल्प

शालाओं में व्यायाम शिक्षकों की नियुक्ति को देनी होगी प्राथमिकता

आलेख .., जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार , टीवी कमेंटेटर, रायपुर.

रायपुर : हमारे देश में पिछले सात आठ वर्षों में अलग-अलग खेल में प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरकर सामने आ रहे हैं। यह हमारे केंद्र सरकार की नीति का स्पष्ट परिणाम है। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा, निशानेबाजी में मनु भाकर कुश्ती में अमन सेहरावत, तीरंदाजी में भजन कौर, अंकिता भगत लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर ,100 मीटर बाधा दौड़ में ज्योति याराजी, 20 किमी. पैदल चाल में प्रियंका गोस्वामी, बैडमिंटन में लक्ष्य सेन, मुक्केबाजी में निखत जरीन लवलीना बोरगोहेन, घुड़सवारी में अंशु अग्रवाल, फाउद मिर्जा , गोल्फ में अदिति अशोक, जुडो में तुलिका मान, तैराकी में श्रीद्धी नटराज, छिनिधी, देसिंधु, भारोत्तोलन में मीराबाई चानू और सायकलिंग में इसो अलबेन, रोनाल्डो सिंह क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी आदि प्रमुख हैं।

उपरोक्त खिलाड़ियों की सफलता के पीछे भारत सरकार के खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (सांईं) तथा कुछ प्राइवेट संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से खोजी गई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण मार्गदर्शन और प्रदत्त सुविधाओं के कारण भारत में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हमारे देश में 2014 मई के बाद खेलकूद में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक पदक प्राप्त करने के की जो कोशिश आरंभ हुई है। उसकी जितनी सराहना की जाए कम है लेकिन इस प्रयास में एक कमी आज भी नजर आती है।

भारत में खेलकूद की शिक्षा के लिए महाविद्यालय और विश्वविद्यालय है। परंतु होनहारों को उसका लाभ मिलता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। आज न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि भारत के कई राज्यों में बी.पी.एड.,एम.पी.एड तथा छोटे शिक्षण केंद्रों में सी.पी.एड. या डी.पी.एड.जैसे शारीरिक शिक्षा से संबंधित प्रमाण पत्र, पत्रोपाधि उपाधि और स्नातकोत्तर उपाधि छात्र छात्राए प्राप्त कर रहे हैं।

अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर वे क्या कर रहे हैं ? जबकि उत्तीर्ण होने वालों की संख्या कोई कम नहीं है ? भारत को अगर खेलमय राष्ट्र बनाना है।तो ऐसे शारीरिक शिक्षा प्राप्त युवाओं की मदद केंद्र व राज्य सरकार को लेनी चाहिए किसी खिलाड़ी को विश्व स्तर पर पदक जीतने लायक बनाना है तो उन सभी को उनकी प्रतिभा के अनुरूप बचपन से ही प्रशिक्षित किया जाना होगा। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी शुरूआती तौर पर शालाओं में पदस्थ शारीरिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को दी जानी चाहिए।

एक तरफ जब भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने आगामी 12 वर्षों में भारत में राष्ट्रमंडल खेल 2030, यूथ ओलंपिक 2030, ओलंपिक खेल 2036, एशियाई खेल 2038 में आयोजित करवाने के पक्षधर हैं तो फिर शालेय शिक्षा से ही बच्चों, किशोरों को उनकी पसंद के खेल की कोचिंग शुरू कर देने से हमारे देश में खेलकूद का व्यापक माहौल बनेगा। इसमें भारतीय खिलाड़ियों को ओलंपिक खेलों के 28 कोर गेम्स पर विशेष ध्यान देकर शाला स्तर से उभरते हुए खिलाडिय़ों को चुनना चाहिए जिन्हें शाला में पदस्थ व्यायाम शिक्षक या राष्ट्रीय खेल संस्थान एनआईएस से सर्टिफिकेट प्रमाण पत्र या खेल प्रशिक्षण में उपाधि प्राप्त कोच के द्वारा कम उम्र से ही खेल की बारिकियों को सिखाना होगा।

 आज छत्तीसगढ़ ही नहीं देशभर की शासकीय या निजी शालाओं में जहां पहली से बारहवीं तक पढ़ाई होती है वहां शारीरिक शिक्षकों या विभिन्न खेलों के कोच की नियुक्ति बहुत जरूरी है। भारत में बड़े आयोजनों से करीब 10वर्ष पूर्व आज हम नन्हें बच्चों को खेल में कैरियर बनाने की शुरुआत करेंगे तब हमारे पास विश्वस्तरीय खिलाड़ी होंगे और तभी वर्तमान सरकार के विकसित 2047 का संकल्प पूरा हो सकेगा,.इस तरह के सुझाओं को खेल प्रशासकों को पूरी गंभीरता से लेना होगा तभी भारत विश्व में पांच स्थानों पर अवश्य ही जगह बना पाएगा।

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