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  • जिला चिकित्सालय जशपुर में पहली बार घेंघा रोग से पीड़ित चार मरीजों का किया गया सफल ऑपरेशन

    जिला चिकित्सालय जशपुर में पहली बार घेंघा रोग से पीड़ित चार मरीजों का किया गया सफल ऑपरेशन

    समदर्शी न्यूज़, जशपुर

    जिला प्रशासन एवं जिला स्वास्थ्य समिति जशपुर के संयुक्त प्रयास से जिला चिकित्सालय जशपुर में 10 दिसम्बर 2023 को निःशुल्क सर्जरी कैम्प का आयोजन किया गया। जिसमें जिले के चिन्हांकित 4 घेंघा रोग से पीड़ित मरीजों का ऑपरेशन रायपुर एनएचएमएमआई से आये डॉ. भारत भूषण एवं टीम के द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।

    जिले में विभिन्न बीमारियों हेतु शिविर का आयोजन किया जा रहा है जिसके तहत माह अप्रैल 2023 को थायरॉइड विकार हेतु कैम्प का आयोजन किया गया था। उक्त शिविर में घेंघा रोग सर्जरी हेतु कुल 7 मरीजों का चिन्हांकन किया गया था, जिनका विभिन्न चरणों में ऑपरेशन पूर्व समस्त जांच जिला चिकित्सालय में ही निःशुल्क कराया गया और 10 दिसम्बर कुल 4 मरीजों का ऑपरेशन प्रथम बार जिला चिकित्सालय जशपुर में किया गया।

  • जिला चिकित्सालय जशपुर में कैंसर संबंधी विकास हेतु निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन 10 दिसम्बर को, कैंसर सर्जन डॉक्टर भारत भूषण देगें अपनी सेवाएं

    जिला चिकित्सालय जशपुर में कैंसर संबंधी विकास हेतु निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन 10 दिसम्बर को, कैंसर सर्जन डॉक्टर भारत भूषण देगें अपनी सेवाएं

    समदर्शी न्यूज़, जशपुर

    जशपुरनगर: जिला प्रशास जशपुर एवं जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त प्रयास से जिला चिकित्सालय में कैंसर संबंधी विकास हेतु 10 दिसम्बर 2023 को निःशुल्क जांच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया जा रहा है। शिविर में कैंसर सर्जन डॉ. भारत भूषण उक्त तिथि को सुबह 11 बजे से 4 बजे तक अपनी सेवाएं देगें।

    शिविर में कैंसर से संबंधित बीमारियों की जांच एवं परामर्श, मुंह में ना ठीक होने वाले छाले, शरीर में गांठ होना और त्वचा के बहार से महसूस होना, मेनोपॉज के बाद भी ब्लीडिंग, स्तन में गांठ होना, पेट का कैंसर, स्तर का कैंसर, हेड एंड नेक कैंसर इत्यादि बीमारियों का जांच किया जाएगा।

    जिला चिकित्सालय जशपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इस प्रकार की बीमारी से ग्रसित लोगों को शिविर में उपस्थित होकर इलाज कराने की अपील की गई है।

  • पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय-रायपुर : नेहरू मेडिकल कॉलेज में आयोजित हुई कविता, भाषण और खेल प्रतियोगिता.

    पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय-रायपुर : नेहरू मेडिकल कॉलेज में आयोजित हुई कविता, भाषण और खेल प्रतियोगिता.

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    रायपुर : वार्षिक महोत्सव इम्पीटस मना रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में शुक्रवार को कविता, भाषण और खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें मेडिकल कॉलेज के छात्र–छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारम्भ लिटरेरी के उद्घाटन से हुई, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. तृप्ति नागरिया (डीन), डॉ.अरविंद नेरल (एचओडी पैथोलॉजी विभाग) सम्मिलित रहे।

    इसके बाद भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, भाषण का नाम विमर्श रखा गया था जिसमें सभी विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। मुख्य अतिथि के तौर पर फार्माकोलॉजी विभाग से डॉ. मंजु अग्रवाल एवं बायोकेमिस्ट्री विभाग से डॉ. देबप्रिय रथ सम्मिलित रहे। भाषण प्रतियोगिता में विकल्पा गुरुंग प्रथम स्थान, गरिमा सिंह द्वितीय स्थान, श्रीयल सुखदेवे ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

    कविता प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. राबिया (पैथोलॉजी), डॉ. शिखा जैसवाल (फार्माकोलॉजी) एवं डॉ. देबप्रिय रथ (बायोकेमिस्ट्री) से सम्मिलित रहे। कविता प्रतियोगिता में शिवांश सिंह प्रथम स्थान, विश्वम्भर पांडेय द्वितीय स्थान, सयनदीप बनर्जी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

    खेल प्रतियोगिता में आउटडोर में वॉलीबॉल एवं बास्केटबाल का बढ़िया खेल देखने को मिला। शाम को क्रिक्रेट का खेल शुरू हुआ। इंडोर इवेंट में चेस-कैरम हुए तथा बैडमिंटन व टेबल टेनिस भी आयोजित हुए। इनके अलावा अद्वैत (फाइन आर्ट्स प्रतियोगिता) में फेस पेंटिंग हुई जिसमें छात्रों ने चेहरे पर अच्छी चित्रकारी दिखाई।

  • मृदा स्वास्थ्य-टिकाऊ खेती का आधार – डॉ.के.डी.महंत

    मृदा स्वास्थ्य-टिकाऊ खेती का आधार – डॉ.के.डी.महंत

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायगढ़

    विश्व मृदा दिवस का सन्देश-मृदा एवं जल जीवन का श्रोत है। कृषि विज्ञान केन्द्र के डॉ.के.डी.महंत ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्व स्तर पर मिट्टी की रक्षा करने और किसानों की मदद करने के प्रयास में एफएओ ने चेतावनी दी कि हर पांच सेकंड में एक फुटबॉल पिच के बराबर पृथ्वी नष्ट हो जाती है। केवल कुछ सेंटीमीटर ऊपरी मिट्टी बनाने और भूमि की बहाली में मदद करने में भी लगभग एक हजार साल लग जाते हैं। स्वस्थ्य मृदा का मतलब है कि मृदा में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों (कार्बनिक पदार्थ) मुख्य एवं सूक्ष्म तत्व की भरपूर मात्रा एवं नमी रोकने की क्षमता हो। जिससे अधिक फसल उत्पादन लिया जा सकें। उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य आधार में पाँच सिद्धांत शामिल हैं जिनमें मृदा कवच, मिट्टी की अशांति को कम करना, पौधों की विविधता,निरंतर जीवित पौधा/पाद और पशुधन एकीकरण। इन सिद्धांतों का उद्देश्य मृदा निर्माण प्रभाव को अधिकतम करते हुए सिस्टम दृष्टिकोण में लागू करना है। मृदा स्वास्थ्य पर्यावरणीय स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य, पौधों के स्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य की अवधारणाओं के अनुरूप है। मानव स्वास्थ्य एक कार्यात्मक अवधारणा है जो हमारी कार्य करने की क्षमता, एक-दूसरे और हमारे पर्यावरण के साथ बातचीत करने और भविष्य में ऐसा करने की क्षमता का वर्णन करती है। विक्टोरिया की प्राकृतिक संपदा के प्रबंधन के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य को समझना, उसकी रक्षा करना और उसमें सुधार करना महत्वपूर्ण है। मृदा स्वास्थ्य मूल रूप से भूमि उत्पादकता और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़ा है।

    मृदा के गुणों के आधार पर मृदा स्वास्थ्य के स्तर का पता चलता है जो कि निम्नलिखित है। मृदा अभिक्रिया इसका अभिप्राय मृदा विलयन की अम्लता, क्षारीयता एवं उदासीनता से है। मृदा विलयन में विभिन्न तत्व आयन्स के रूप में होते है। अम्लीय आयन्स जैसे हाइड्रोजन, नाइट्रेट व सल्फेट आदि तथा क्षारीय आयन्स जैसे हाइड्रोंजन ऑक्साइड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटेशियम आदि मृदा विलयन मे रहते है। यदि मृदा कोलाइड पर हाइड्रोजन आयन्स का सान्द्रण हाइड्रोजन ऑक्साइड से ज्यादा हो तो मृदा अम्लीय होती है और यदि हाइड्रोजन आयन्स का सान्द्रण कम हो तो मृदा क्षारीय होती है तथा बराबर समान संख्या होने पर मृदा अभिक्रिया उदासीन होती है। मृदा स्वास्थ्य का अर्थ मृदा के उन सभी प्रभावों से है जिनके आधार पर फसल का उत्पादन अच्छा हो सके और जिसमें पौधों की वृद्धि एवं विकास के सभी गुण उपस्थित हो तथा जीवों की संख्या और उनकी क्रियाशीलता आदर्श स्तर की हो। इन्ही वांछित गुणों के आधार पर मृदा स्वास्थ्य को निर्धारित करते हैं। मृदा स्वास्थ्य के आधार मृदा स्वास्थ्य का इसकी उर्वराशक्ति और उत्पादकता के सिद्धान्त के कारकों से सीधा संबंध होता है।

  • जशपुर जिले में  पशुओं को खुरहा-चपका रोग से बचने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान  प्रारंभ

    जशपुर जिले में  पशुओं को खुरहा-चपका रोग से बचने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान  प्रारंभ

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    जिले में पशुओं को खुरहा-चपका रोग से बचने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान 01 दिसम्बर 2023 से 15 जनवरी 2024 तक किया जा रहा है। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें से प्राप्त जानकारी अनुसार विभाग के 57 दलों द्वारा टीकाकरण कार्य संपन्न किया जाएगा। जिले को 4,66,453 का लक्ष्य प्राप्त है, जिसमें समस्त गौवंशीय एवं भैसवंशीय पशुओं का एफ. एम. डी. टीकाकरण किया जा रहा है। मुंहपका खुरपका रोग खुर / दो खुरों वाले पशुओं जैसे गाय, भैंस, भेंड़, बकरी, हिरन, सुअर

    तथा अन्य जंगली पशुओं में होने वाला एक अत्यंत संक्रामक एवं घातक विषाणु जनित वायुकोशीय रोग है। गायों और भैंसों को खुरपका रोग काफी प्रभावित करता है। यह काफी तेजी से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। इसे प्रभावित होने वाले जानवर में अत्याधिक तेज बुखार के साथ मुॅह और खुरों पर छाले और घाव बन जाते है । रोग के असर के कारण कुछ जानवर स्थायी रूप से लंगड़ें भी हो सकते है। जिस कारण वे खेती में इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाते। इसका संक्रमण होने के कारण गायों का गर्भपात हो सकता है, और कार्य भी बाधित हो जातें है। ऐसे में इस बीमारी का कोई निश्चित उपचार नही है, इसका बचाव ही इसका उपचार है।

    डॉ. ए. के. मरकाम, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवायें जिला जशपुर ने जानकारी दी है कि इस रोग का कोई निश्चित उपधार नही है, टीकाकरण ही इस बीमारी से बचाव के लिए सर्वोत्तम है। सभी पशु पालकों को अपने पशुओं को एफ. एम. डी. टीका लगवाने का आग्रह किया है। रोग से ग्रसित हो जाने पर पशुओं को पशु चिकित्सक के परामर्श पर दवा देने चाहिए।

  • सीएमएचओ ने सर्वाइकल कैंसर के लक्षण एवं उसके बचाव के संबंध में दी जानकारी

    सीएमएचओ ने सर्वाइकल कैंसर के लक्षण एवं उसके बचाव के संबंध में दी जानकारी

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायगढ़

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.आर.एन.मंडावी ने सर्वाइकल कैंसर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली सबसे गंभीर समस्या है जो महिलाओं में कैंसर से होने वाली मौंतो का प्रमुख कारण है। सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा के अस्तर में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि है। गर्भाशय ग्रीवा महिला प्रजनन प्रणाली का हिस्सा है और गर्भ के निचले हिस्से में स्थित है, जो गर्भ से योनि तक खुलती है। इस कैंसर को बच्चेदानी के कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण के कारण होते है। एचपीवी वायरस का एक समूह है। जो दुनिया भर में बेहद आम है।

    सर्वाइकल कैंसर के सबसे आम लक्षण और शुरूवाती संकेत है जैसे:-पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, संभोग के बाद खून, मैनोपोज के बाद खून बहना, संभोग के दौरान बैचेनी या खून आना, तेज गंध के साथ योनि से स्त्राव, रक्त के साथ योनि से स्त्राव, यूरिन करते समय दर्द महसूस होना।

    सर्वाइकल कैंसर से बचाव:- नियमित रूप से कराएं पैप जांच अगर आप खुद को सर्वाइकल कैंसर से बचाना चाहते है, तो इसके लिये बेहद जरूरी है कि नियमित रूप से पैप जांच कराएं पैप जांच की मदद से आप गर्भाशय ग्रीवा में होने वाली असामान्यताओं का पता लगा पाएंगी। साथ ही इस बारे में अपने डॉक्टर से संपर्क कर कब और किस उम्र में इस टेस्ट को कराना चाहिये। धूम्रपान करने से बचे, जिन महिलाओं की धूम्रपान करने की आदत होती है उनमें इस बीमारी का खतरा और भी बढ़ जाता है कि तंबाकू या उनके उत्पाद के सेवन से सर्विक्स कोशिकाओ के डीएनए को नुकसान पहुंचाते है, जो सर्वाइकल कैंसर में बदल सकता है। इसलिए धूम्रपान से दूरी बनायें रखें। एचपीवी के खिलाफ  लगाएं टीका, एचपीवी के कई प्रकार है जिनमें से कुछ उच्च जोखिम वाले प्रकार पाये जाते है। दो एचपीवी प्रकार (16 और 18) 70 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर और कैंसर से पहले के सर्वाइकल घावों का कारण बनते है। एचपीवी को गुदा, योनी, लिंग और ऑरोफरीनक्स के कैंसर से जोडऩे के प्रमाण भी है, इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिये अपने डॉक्टर से बचाव के लिये एचपीवी के खिलाफ  टीका जरूर लगवाएं। सुरक्षित यौन संबंध का विशेष ध्यान रखें जिससे आप इस गंभीर बीमारी से खुद को काफी हद तक बचा सकते है।

  • हेल्थ न्यूज़ : 57 साल के मरीज की हार्ट अटैक के बाद हृदय की दीवाल फटी एसीआई के हार्ट सर्जरी विभाग में हुई सफल सर्जरी, छ.ग. के शासकीय संस्थान में इस प्रकार की प्रथम सफल सर्जरी

    हेल्थ न्यूज़ : 57 साल के मरीज की हार्ट अटैक के बाद हृदय की दीवाल फटी एसीआई के हार्ट सर्जरी विभाग में हुई सफल सर्जरी, छ.ग. के शासकीय संस्थान में इस प्रकार की प्रथम सफल सर्जरी

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय  के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में हार्ट अटैक के कारण दिल में हुए छेद जिसको मेडिकल भाषा में “वेन्ट्रीकुलर सेप्टल रफ्चर (वी.एस.आर. VSR)’ कहा जाता है,ऐसे मरीज की सफल सर्जरी कर एवं मरीज की जान बचाकर चिकित्सा जगत में नया इतिहास रच दिया गया। यह ऑपरेशन हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्णकांत साहू एवं टीम द्वारा किया गया। ऑपरेशन के 15 दिनों बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। हार्ट सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू एवं टीम की इस शानदार सफलता पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. एस. बी. एस. नेताम ने बधाई दी है।

    डाॅ. साहू बताते हैं, कि यह मरीज आज से कुछ माह पहले उनके ओपीडी में छाती में दर्द की शिकायत से पहुंचे। ईसीजी एवं अन्य जांच से पता चला कि उनको हार्ट अटैक आया है एवं उनको एंजियोग्राफी के लिए तत्काल कार्डियोलाॅजी विभाग में भेज दिया गया। वहां पर एंजियोग्राफी करने से पता चला कि उनके हृदय की मुख्य कोरोनरी आर्टरी (धमनी) में ब्लाक (रूकावट) है जिसको कार्डियोलाजिस्ट द्वारा एन्जियोप्लास्टी (stent स्टेंट लगाने) के बाद एक से दो दिन तक मरीज ठीक रहा परन्तु तीसरे ही दिन उसकी सांस फूलने लगी, पेशाब बनना बंद हो गया, बी.पी. बहुत ही कम (70/40mmHg) हो गया एवं शरीर में पानी भरना प्रांरभ हो गया एवं उसके बाद कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा पुनः इकोकार्डियोग्राफी करने पर पता चला कि उनकी दो वेन्ट्रीकल, लेफ्ट और राइट वेन्ट्रीकल के बीच की दीवाल में हार्ट अटैक के कारण बड़ा सा छेद हो गया था|। इसी छेद को ही वेन्ट्रीकुलर सेप्टल रफ्चर कहते है। यह छेद इसलिए होता है क्योंकि हार्ट अटैक में हृदय की धमनी में थक्का बनने के कारण रक्त प्रवाह में रूकावट आ जाती है, जिससे हृदय की मांसपेशियों में रक्त नहीं पहुँच पाने के कारण गलना प्रांरभ हो जाता है एवं गली हुई मांसपेशियां हृदय के ब्लड प्रेशर को झेल नहीं पातीं और उस स्थान पर छेद हो जाता है। यदि यही छेद हृदय के बाहरी दीवाल में होता है, तो मरीज की मृत्यु कुछ ही मिनटों में हो जाती है।

    इकोकार्डियोग्राफी में पता चला कि यह छेद (V. S. R.) इतना बड़ा था, कि इसमें कोई भी छेद बंद करने वाली डिवाइस नहीं लग सकती थी इसलिए इस मरीज को हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में डाॅ. कृष्णकांत साहू के पास रिफर कर दिया गया। डाॅ. साहू बताते हैं कि इस मरीज की स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब थी। ब्लड प्रेशर 70/40 mmHg एवं आक्सीजन सैचुरेशन (SPO2) 80% हो रहा था। पेशाब का आना बिल्कुल बंद हो गया था। फेफड़ों में सूजन था (पल्मोनरी एडीमा) था एवं हृदय केवल 20 प्रतिशत कार्य कर रहा थ। ऐसे मरीजों की बचने की संभावना बिल्कुल ना के बराबर होती है। इस स्थिति को एक्युट कार्डियक फेल्योर विद पल्मोनरी एडीमा कहा जाता है।

    इस मरीज को आईसीयू में रखकर वेन्टीलेटर एवं दवाईयों के सर्पोट से ब्लड प्रेशर एवं अन्य हीमोडायनेमिक्स को ठीक करने की कोशिश की गई। दवाईयों के प्रांरभ होने से मरीज का ब्ल्ड प्रेशर ठीक हुआ एवं पेशाब आना प्रांरभ हुआ। मरीज के शरीर में लगभग 12 से 13 लीटर पानी जमा हो गया था। वजन 72 किलो से 57 किलो में आ गया। रक्त में क्रिएटिनिन लेवल 7.2mg  से 0.8mg आने में लगभग 58 दिन से भी ज्यादा लग गए। डॉ. साहू के मुताबिक, इस प्रकार के अधिकांश मरीज हम तक पहुंच ही नहीं पाते एवं रास्ते में ही दम तोड़ देते है।

    इस प्रकार हुआ ऑपरेशन

    मरीज एवं उनके रिश्तेदारों को समझा दिया गया था, कि इस प्रकार की बीमारी (वेन्ट्रीकुलर सेप्टल रफ्चर) में बचने की उम्मीद ना के बराबर होती है क्योंकि मरीज का हृदय 20 प्रतिशत ही काम कर रहा था। इस ऑपरेशन में मरीज के हृदय की धड़कन को हार्ट लंग मशीन की सहायता से रोककर बाएं वेन्ट्रीकल को काटकर छेद वाले हिस्से को विशेष प्रकार के कपड़े (जिसको डबल वेल्योर डेक्रान कहा जाता है) से रिपेयर किया गया एवं लेफ्ट वेन्ट्रीकल के मृत दीवाल को काटकर अलग किया गया एवं विशेष तकनीक से लेफ्ट वेन्ट्रीकल की साइज को छोटा किया गया, जिसको “वाल्युम रिडक्सन लेफ्ट वेन्ट्रीकुलोप्लास्टी” कहा जाता है। आपरेशन के पश्चात् मरीज के हृदय को सर्पोट देने के लिए इंट्रा एओर्टिक बलून पंप (IABP machine ) लगाया गया।

    इस प्रकार के ऑपरेशन की सफलता सर्जन की कार्यकुशलता, टीमवर्क एवं ऑपरेशन के बाद मरीज की पोस्ट ऑपरेटिव केयर पर निर्भर करती है।

    यह मरीज ऑपरेशन के बाद 03 दिनों तक वेन्टीलेटर सपोर्ट में रहा एवं ऑपरेशन के 15 दिनों बाद मरीज को अस्पताल से छुटी दे दी गयी। डिस्चार्ज के समय मरीज एवं उनके रिश्तेदारों की आंखों में खुशी के आंसू थे, क्योंकि ऑपरेशन के पहले ही उनको बता दिया गया था कि ऐसी बीमारी वाले मरीज ऑपरेशन के बाद भी नहीं बच पाते। उनके रिश्तेदारों का कहना था कि हमें आपके हार्ट सर्जरी विभाग के डाॅक्टरों पर बहुत विश्वास था और है क्योंकि मरीज सिंचाई विभाग में शासकीय सेवा में कार्यरत् है। तो हम कोई भी बडे़ से बड़े अस्पताल जा सकते थे लेकिन हमको विश्वास यहां के डॉक्टरों पर ज्यादा था। मीडिया के माध्यम से हम लोगों ने एसीआई की ऐसी कई समाचार पढ़ी, देखी और सुनी है जिसमें गंभीर से गंभीर केस में डॉक्टरों ने लोगों की जान बचाई है।

    ऑपरेशन में ये रहे शामिल

    डाॅ. कृष्णकांत साहू (हार्ट सर्जन एवं विभागाध्यक्ष) के साथ, डाॅ. निशांत सिंह चंदेल (हार्ट सर्जन), डाॅ. अजीत सकलेजा(पी.जी), डाॅ. संजय त्रिपाठी (जेआर)

    कार्डियक एनेस्थेटिस्ट- डाॅ. तुषार मालेवार

    परफ्युजनिस्ट – प्रीतम, डिगेश्वर           

    टेक्नीशियन – भूपेन्द्र,हरीश,

    नर्सिंग स्टाॅफ – राजेन्द्र, नरेन्द्र, दुष्यंत, चोवा, मुनेश, सरिता, किरण, प्रियंका, कुसुम, शीबा, तेजेन्द्र।

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर : एचआईवी से पीड़ित व्यक्तियों में तंत्रिका संबधी समस्याओं एवं रोगों का दायरा काफी व्यापक – डॉ. डी. पी. लकड़ा

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर : एचआईवी से पीड़ित व्यक्तियों में तंत्रिका संबधी समस्याओं एवं रोगों का दायरा काफी व्यापक – डॉ. डी. पी. लकड़ा

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के मेडिसिन रोग विभाग द्वारा राज्य स्तरीय वार्षिक सम्मेलन मेडिसिन अपडेट(एचआईवी अपडेट) 2023 का आयोजन अम्बेडकर अस्पताल के फिजियोथेरेपी हाल में शुक्रवार को किया गया। विश्व एड्स दिवस एक दिसंबर के उपलक्ष्य में आयोजित इस राज्य स्तरीय वार्षिक सम्मेलन का विषय एक कदम – एचआईवी नेमेसिस तक था। सुबह 9 से शाम 4 बजे तक आयोजित इस सम्मेलन में विभिन्न प्रकार के सत्रों(सेशन) का आयोजन किया गया जिसके अंतर्गत वैज्ञानिक सत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों के व्याख्यान, चिकित्सा छात्रों द्वारा पेपर एवं पोस्टर प्रेजेंटेशन और सांस्कृतिक गतिविधियां शामिल रहीं।

    मेडिसिन अपडेट 2023 कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन दोपहर 12 बजे डॉ. (प्रो.) जी. बी. गुप्ता(पूर्व कुलपति पंडित दीनदयाल उपाध्याय आयुष विश्वविद्यालय), डॉ. तृप्ति नागरिया (अधिष्ठाता चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर), डॉ. एस. बी. एस. नेताम (अधीक्षक अम्बेडकर अस्पताल), डॉ. आलोक राय एवं डॉ. विनय आर. पंडित (विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग एम्स रायपुर) के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।

    वैज्ञानिक सत्र में अम्बेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अर्चना टोप्पो ने एचआईवी रोगियों के लिए दृष्टिकोण विषय पर सत्र को संबोधित करते हुए बताया कि कोई भी मरीज जो चिकित्सालय में एचआईवी लक्षणों के साथ आते हैं तो उनकी एंटीबॉडी आधारित तीन स्क्रीनिंग टेस्ट होता है। यदि ये जांच पॉजिटिव आती है तो फिर उनको एआरटी (एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी) के लिए एआरटी सेंटर रेफर किया जाता है। अम्बेडकर अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनिता तिवारी ने एआरटी केंद्र संक्षिप्त कामकाज और उपलब्ध सुविधाएं विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि वर्ष 2006 से यहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को एआरटी की सुविधा दी जा रही है। वर्ष 2016 में एआरटी सेंटर अपग्रेड होकर एआरटी प्लस सेंटर बन गया है जहां पर एचआईवी मरीजों को दवाओं के अलावा सरकार द्वारा दी जाने वाली अन्य सुविधाओं के साथ-साथ पोषक आहार भी विभिन्न संस्थाओं के द्वारा प्रदान किया जाता है। एचआईवी रोगियों में एमडीआर टीबी का प्रबंधन विषय पर बोलते हुए रेस्पिरेटरी मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रोशन सिंह राठौड़ ने बताया कि सही दवाओं एवं उनकी निर्धारित खुराक तथा समय पर देखभाल से एचआईवी रोगियों में एमडीआर टीबी का प्रबंधन बेहतर ढंग से किया जा सकता है।

    एम्स में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एवं हेड डॉ. विनय आर. पंडित ने एचआईवी संक्रमण के लिए हालिया प्रबंधन दिशानिर्देश विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि डोलटेग्रेविर नामक दवा में एचआईवी- 2 के विरूद्ध तीव्र वायरल दमन (रैपिड वायरल सप्रेशन) की क्षमता है। दवा की विषाक्तता एवं ड्रग इंटरेक्शन भी काफी कम है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वेणुगोपाल मार्गेकर ने एचआईवी में अवसरवादी संक्रमण के संदर्भ में बताया कि कुपोषित, एचआईवी से पीड़ित मरीज, सूजन आंत्र के रोगी, ल्यूकोपेनिया के रोगी, मधुमेह के रोगी और इम्यूनोसप्रेसेन्ट पर निर्भर मरीज को सामान्य अवसरवादी संक्रमण (कॉमन अपॉरचुनिटिक इन्फेक्शन) होने की संभावना ज्यादा रहती है।

    विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग डॉ. डी. पी. लकड़ा ने एचआईवी संक्रमण में तंत्रिका संबंधी अभिव्यक्तियां (न्यूरोलॉजिकल मेनिफेस्टेशन इन एचआईवी इंफेक्शन) पर व्याख्यान देते हुए बताया कि एचआईवी से पीड़ित व्यक्तियों में तंत्रिका संबधी समस्याओं एवं रोगों (विकारों) का दायरा काफी व्यापक है। रोग प्रतिरोधक क्षमता अनियमित होने से अंतिम चरण में सीडी 4 लिम्फोसाइट्स और मेक्रौफेज में कमी आ जाती है। मेडिसिन की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्राची दुबे ने एचआईवी में पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस विषय तथा प्रोफेसर डॉ. आर. एल. खरे ने एचआईवी रोगियों मे एचबीवी और एचसीवी का प्रबंधन विषय पर व्याख्यान दिया। 

    मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्रवंशी ने सम्मेलन में शामिल हुए सभी लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हिमेश्वरी वर्मा ने किया। पीजी छात्र डॉ. शिरीन श्रीवास्तव, डॉ. बासु कन्नौजे एवं डॉ. विनय कंवर द्वारा पेपर प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन में मेडिसिन विभाग के डॉ. वाई. मल्होत्रा, डॉ. मनीष पाटिल, डॉ. निमेश साहू समेत काफी संख्या में चिकित्सा छात्र शामिल हुए।

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर : एसीआई में पहली बार दाईं तरफ से डाला गया कंडक्शन पेसिंग सिस्टम, प्रदेश में दाईं तरफ से कंडक्शन सिस्टम पेसिंग का यह तीसरा केस

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर : एसीआई में पहली बार दाईं तरफ से डाला गया कंडक्शन पेसिंग सिस्टम, प्रदेश में दाईं तरफ से कंडक्शन सिस्टम पेसिंग का यह तीसरा केस

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के कार्डियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों ने रायपुर निवासी 75 वर्षीय मरीज के हृदय में दाहिनी ओर से कंडक्शन पेसिंग सिस्टम लगाकर असामान्य हृदय की धड़कन को सामान्य किया। एसीआई में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में हुए इस प्रक्रिया में प्रकृति द्वारा प्रदत्त हृदय की आंतरिक तंतु (हिज के बंडल और पुरकिंजे के तंतु) में कंडक्शन पेसिंग सिस्टम का नया तार फिट कर हृदय के ऊपरी चैंबर से निचली चैंबर तक विद्युत तरंगों के प्रवाह को सुगम बनाते हुए हाई रिस्क मरीज के हृदय की धड़कन को सामान्य करने में सफलता प्राप्त की।

    रायपुर निवासी 75 वर्षीय पुरूष मरीज को एक निजी अस्पताल में साल भर पहले पेसमेकर लगाया गया था जो हृदय की धड़कन को नियमित करने के लिए था परंतु तीन महीने बाद ही मरीज के सीने से मवाद निकलने लगा। निजी अस्पताल में पुनः चार बार भर्ती किया गया फिर भी मरीज को बार-बार इन्फेक्शन होता रहा। तत्पश्चात् मरीज एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में डॉ. स्मित श्रीवास्तव के पास पहुंचा जहां डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने मरीज को देखा। उनके पास मरीज के हार्ट की कमजोरी को देखते हुए दो विकल्प थे। पहला तीन तार वाले पेसमेकर का प्रत्यारोपण और दूसरा दो तार वाली उन्नत तकनीक वाले पेसमेकर (कंडक्शन पेसिंग सिस्टम) का प्रत्यारोपण। इस दौरान चुनौतियों को देखते हुए और दोबारा इन्फेक्शन न हो यह ध्यान में रखते हुए डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने मरीज को दो तार वाली पेसमेकर, कंडक्शन सिस्टम पेसिंग तकनीक के साथ,  दाईं तरफ से डालने का निर्णय लिया चूंकि बाईं  तरफ मवाद और पुराना पेसमेकर था। प्रदेश में  दाईं  तरफ से कंडक्शन सिस्टम पेसिंग का यह तीसरा केस है और इन्फेक्शन के साथ कंडक्शन सिस्टम पेसिंग का पहला केस है। पूरे देश में  दाईं तरफ से यह तकनीक बहुत कम चिकित्सकों ने किया है। इसके साथ ही डॉ. स्मित ने मरीज के बेहतरी के लिए एंटी बैक्टीरियल एनवेलप भी पेसमेकर के साथ लगाया। इसके साथ ही साथ  बाईं  तरफ से डाला गया पुराना पेसमेकर और तार भी निकाल दिया गया है।

    ऐसे लगाया कंडक्शन पेसिंग सिस्टम

    डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, सबसे पहले हृदय में जहां पेसमेकर लगाया जाना है वहां तक पहुंचने वाले तारों (कैथेटर) को मेरे द्वारा सुधारा गया। चूंकि जैसा कि पहले बताया गया है  बाईं  (लेफ्ट) ओर से जाकर हृदय में पेसमेकर प्रत्यारोपित करने के लिए अंग्रेजी के सी-शेप में कैथेटर आता है लेकिन यहां पर  दाईं  (राइट) ओर से जाकर हृदय के दाहिने हिस्से में पेसमेकर प्रत्यारोपित करने के लिए कैथेटर को अंग्रेजी के जेड शेप में मोडिफाई किया गया। राइट एट्रियम (दायें आलिंद) में तार डाली गई तत्पश्चात् पेसमेकर को एंटी बैक्टीरियल एनवेलप में डालकर तारों से कनेक्ट किया गया। उसके बाद  बाईं तरफ लगे पेसमेकर और तारों को निकाल लिया गया। अब हृदय पहले की तरह प्राकृतिक रूप से सही तरीके से धड़केगा।

    इस प्रक्रिया में डॉ. स्मित श्रीवास्तव के साथ मेडिकल टीम में डॉ. प्रतीक गुप्ता, डॉ. अनमोल अग्रवाल, डॉ. बलविंदर सिंह, सीनियर टेक्नीशियन आई. पी. वर्मा, खेम सिंह मांडे, जितेन्द्र चेलकर, नर्सिंग स्टाफ आभा, मुक्ता और जॉन शामिल रहे।

    विशेषता : छाती के दहिनी तरफ से Conduction system Pacing करने के लिए catheter को कैथ लैब में अलग से मोडिफाइ किया गया।

  • डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर : एसीआई के कैथ लैब में कार्यरत मेडिकल टीम को रेडिएशन प्रोटेक्शन सिस्टम “एगनेस्ट’ के रूप में मिला सुरक्षा कवच

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर : एसीआई के कैथ लैब में कार्यरत मेडिकल टीम को रेडिएशन प्रोटेक्शन सिस्टम “एगनेस्ट’ के रूप में मिला सुरक्षा कवच

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट के कैथ लैब  में कार्यरत डॉक्टर एवं पूरी टीम को रेडिएशन(विकिरणों) से सुरक्षा प्रदान करने के लिए रेडिएशन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाया है। एगनेस्ट नामक यह सुरक्षा कवच कैथ लैब में कार्यरत मेडिकल टीम को एक्स रे मशीन से निकलने वाली हानिकारक विकिरणों से सुरक्षा प्रदान करता है। एसीआई के कार्डियोलॉजी विभाग एवं कार्डियोलॉजिक्स कंपनी के सहयोग से इसे कैथ लैब में लगाया गया है।   

    डॉक्टर, सहयोगी स्टाफ एवं मरीज को भी देगी सुरक्षा

     विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी विभाग डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने रेडिएशन प्रोटेक्शन सिस्टम (विकिरण सुरक्षा प्रणाली) के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि एगनेस्ट, कैथलैब में कार्यरत पूरी मेडिकल टीम को यहां तक कि प्रोसीजर टेबल में लेटे मरीज को हानिकारक एक्स रे विकिरणों से सुरक्षा प्रदान करेगी। यह सुरक्षा कवच कार्डियोलॉजी प्रोसीजर किये जाने वाले टेबल के साथ चारों तरफ से अटैच है। यह कार्बन माइक्रो फाइबर बेस तथा रेडिएशन एब्जॉर्बिंग मेटलिक एलॉय (बिस्मथ और एंटीमनी धातु) से बना है जो एक्स रे मशीन से निकलने वाले हानिकारक विकिरणों को सोख लेते हैं। इन विकिरणों से यदि बचाव न किया जाये तो भविष्य में कैंसर, मोतियाबिंद एवं अन्य बीमारियां होने की संभावना रहती है। 

    डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, कैथलैब में पूरी प्रक्रिया एक्स रे मशीन की सहायता से की जाती है (एक्स रे गाइडेड प्रोसीजर)। कैथ लैब में प्रतिदिन कार्डियक इंटरवेंशनल प्रक्रिया होती है। पूरी टीम लम्बे समय तक यहां रहती है। ऐसे में पूरी टीम विकिरण के संपर्क में आती है। एगनेस्ट एक व्यापक, स्कैटर रेडिएशन (फैलने वाले विकिरण) सुरक्षा प्रणाली है जो पूरी तरह से आधुनिक कैथ लैब में रेडिएशन के फैलाव एवं बिखराव को रोकने में मदद करती है। यह कैथ लैब में कार्य करने वाली मेडिकल टीम को सुरक्षा प्रदान करते हुए एक्स रे विकिरणों से होने वाले दुष्प्रभाव को कम करती है। इसे सीआर्म एक्स रे मशीन की गति एवं दिशा के अनुसार इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह रोगी की दिशा के अनुसार सरलता से इधर उधर घूम सकता है। यह 91 प्रतिशत रेडिएशन से सुरक्षा देता है।