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  • जन संस्कृति मंच का आयोजन : नव जागरण की महान परम्परा का हिस्सा थे प्रेमचंद – जय प्रकाश

    जन संस्कृति मंच का आयोजन : नव जागरण की महान परम्परा का हिस्सा थे प्रेमचंद – जय प्रकाश

    लेखकों ने प्रेमचंद के अवदान को शिद्दत से किया याद

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर

    जन संस्कृति मंच की रायपुर ईकाई द्वारा 31 जुलाई को स्थानीय वृंदावन हॉल में प्रेमचंद जयंती मनाई गई. इस अवसर में उपस्थित लेखकों ने प्रेमचंद के अवदान को बड़ी शिद्दत से याद किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे देश के सुप्रसिद्ध समीक्षक जय प्रकाश ने कहा कि प्रेमचंद यथार्थवादी लेखक थे, लेकिन उन्हें केवल यथार्थवादी लेखन की परम्परा का स्रोत समझना भ्रामक है. वस्तुतः प्रेमचंद भारतीय नवजागरण की महान परंपरा का हिस्सा थे, जो भारतेंदु युग में प्रारंभ हुई थी और भारतीय साहित्य में जिसकी अभिव्यक्ति सबसे पहले उड़िया लेखक फ़क़ीरमोहन सेनापति के उपन्यास में दिखाई देती है. प्रेमचंद को इस रूप में देखने पर ही प्रेमचंद को सही संदर्भों में समझा जा सकता है. इस मौके पर कथाकार हरि भटनागर ने अपनी कहानी सेवड़ी रोटियां और जले आलू तथा जया जादवानी ने बर्फ के फूल का वाचन किया.

    कथाकार हरि भटनागर की कहानी पर टिप्पणी करते हुए समीक्षक जय प्रकाश ने कहा कि इसमें श्रमजीवी वर्ग का अपने द्वारा उत्पादित वस्तु से ही नहीं, समाज और स्वयं से विलगाव भी मार्मिक ढंग से चित्रित हुआ है. यह कहानी चेखोव जैसे कथाकार की ऊँचाई को छूती है. हरि भटनागर ने इसमें विडम्बना की कथा युक्ति का सृजनात्मक उपयोग किया है. जबकि जया जादवानी की कहानी बर्फ़ के फूल’ प्रेम और नैतिकता से जुड़े सवालों को उठाते हुए स्त्री-पुरुष संबंध के एक अनछुए आयाम को उद्घाटित करती है. ढर्रे में चलते जीवन में प्रेम का अधूरापन और उसकी विडंबना यहाँ प्रकट हुई है. कहानी बताती है कि पितृसत्ता स्त्री को मुक्त नहीं कर सकती. पुरुष होने के नाते इस कहानी के नायक शाश्वत का प्रिविलेज वस्तुतः पितृसत्ता का प्रिविलेज है.

    समीक्षक सियाराम शर्मा ने हरि भटनागर की कहानी सेवड़ी रोटियां और जले आलू को मनुष्य के अमानवीयकरण कर दिए जाने की कहानी बताया. उन्होंने कहा कि पूंजीवादी सभ्यता ने जिस बुरे ढंग से मानवीय सारतत्व को निचोड़कर एक यंत्र में तब्दील कर दिया है, कहानी उस यांत्रिकता को खोलकर रख देती है. उन्होंने जया जादवानी की कहानी को सूक्ष्म और संवेदनशील मन की बेजोड़ कहानी बताया. उनकी कहानी प्रेम की आकांक्षा की कहानी है जो कभी भी…किसी भी उम्र में जन्म लेकर विकसित हो सकती है. जया जादवानी की कहानियां मनुष्य को और ज्यादा बेहतर मनुष्य बन जाने के लिए प्रेरित करती है.

    जन संस्कृति मंच की रायपुर ईकाई के अध्यक्ष आनंद बहादुर ने कहा कि समूचे देश में प्रेमचंद की जयंती अगर सघनता और उत्साह के साथ और मनाई गई तो यह अनायास नहीं है. गांधी, टैगोर और मुक्तिबोध की तरह ही प्रेमचंद भी आज फासिज्म तथा सामंतवाद के प्रतिरोध के मजबूत आधार के रूप में देखे जा रहे हैं. प्रेमचंद ने अपने समय में ही सामंतवाद और फासिज्म के उन अवशेषों को देख लिया था जो आजादी के बाद भी बचे रह गए थे.

    उन्होंने कहा कि हरि भटनागर की कहानी सेवड़ी रोटियां और जले आलू’ प्रेमचंद की कहानी कफन की याद तो दिलाती है लेकिन उससे बिल्कुल भिन्न प्रकृति की कहानी है. कफन जहां एक और मानव के दानव हो जाने की कहानी है, वहीं दूसरी ओर हरि भटनागर की कहानी मनुष्य की मानवीय संवेदना के खो जाने की कहानी है. किस प्रकार सिस्टम मनुष्य को यांत्रिक कर उसे संवेदनाविहीन कर देता है,  उससे उसके रंग, स्वाद, सुंदरता आदि के एहसास को छीन लेता है यह इस कहानी का मुख्य कथ्य है. यह कहानी चेखव के डेथ ऑफ ए क्लर्क’ से बहुत कुछ मिलती जुलती रचना है जहां एक क्लर्क व्यवस्था की चक्की में पिसते पिसते इतना यांत्रिक हो जाता है यह आदमी की अस्मिता को खो बैठता है. हरि भटनागर प्रेमचंद की परिपाटी के लेखक न लग कर चेखव की परिपाटी के लेखक लगते हैं.

    आनंद बहादुर ने जया जादवानी की कहानी को मानवीय संबंधों, खासकर स्त्री-पुरुष संबंधों की गहरी पड़ताल करने वाली कहानी बताया. उन्होंने कहा कि वे ऐसे अछूते विषयों पर कलम चलाती हैं जिनके बारे में आम आदमी सोचने का दुस्साहस तक नहीं करता है. विवाहेतर प्रेम और खासकर अधेड़ उम्र के प्रेम को उन्होंने अपनी कहानियों के दायरे में लाया है एक तरह से कहा जाए तो वे बहुत अधिक खतरा उठा कर लिखने वाली लेखिका हैं. स्त्री-पुरुष के संबंधों को वे बाह्य रूप में ही नहीं बरततीं बल्कि बहुत ही गहरी आंतरिक स्तर पर जाकर उनकी विडंबनाओं की पड़ताल करती हैं. खास कर स्त्री मन के हजारों छुपे हुए अवगुनों को खोलती हैं और उन्हें खोलने का उनका जो तरीका है वह भी उनका नितांत व्यक्तिगत है. वे खुद अपने मन में गहरे डूब कर स्त्री के मन की गहराई को तलाशती हैं और वहां से अपने कथानकों को उठाती हैं, इसीलिए वे इतनी सहज और सरल और उनकी भाषा और उनका नैरेटिव टेक्निक प्रभावकारी होता है। बर्फ के फूल कहानी इस बात को मिसाल के तौर पर सामने रखती है कि जया जादवानी क्यों हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण लेखिकाओं में शुमार की जाती हैं.

    युवा समीक्षक भुवाल सिंह ने “प्रेमचंद: कल आज और कल” विषय पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद अंतरात्मा की आवाज पर न्याय का साथ देते थे. अब देश आजाद है. अब संविधान भी है और सुप्रीम कोर्ट भी… लेकिन क्या हम पंच-परमेश्वर जैसी कहानी में उपस्थित रहने वाली न्याय व्यवस्था को देख पा रहे हैं ?  कार्यक्रम का कुशल संचालन अमित चौहान ने एवं आभार प्रदर्शन जन संस्कृति मंच के सचिव मोहित जायसवाल ने किया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में साहित्यिकजन उपस्थित थे.

  • सूखा प्रभावित क्षेत्र सर्वे में भूपेश सरकार किसानों के साथ कर रही है भेदभाव की राजनीति – सांसद गोमती साय

    सूखा प्रभावित क्षेत्र सर्वे में भूपेश सरकार किसानों के साथ कर रही है भेदभाव की राजनीति – सांसद गोमती साय

    आधे गांव दिवाली-आधे गांव होली को चरितार्थ कर रही भूपेश सरकार

    रायगढ़ जिले को सूखा प्रभावित घोषित करे सरकार

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, जशपुर/फरसाबहार

    रायगढ़ सांसद श्रीमती गोमती साय ने छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि इस कांग्रेस सरकार ने एक ही जिले के किसानों के साथ भेदभावपूर्ण आदेश जारी करते हुए जशपुर जिले में आधे गांव दिवाली-आधे गांव होली की कहावत को चरितार्थ कर दिया। जशपुर जिले के बगीचा, फरसाबहार एवं मनोरा तहसील के किसानों की भी वही स्थिति है जो जिले के बाकी तहसीलों के किसानों की है। बगीचा, फरसाबहार एवं मनोरा में बारिश नहीं हुई है। यहाँ के किसानों की भी फसल सूख गई है। किंतु एक ही जिले के किसानों के साथ यह भूपेश बघेल की कांग्रेसी सरकार भेदभाव करते हुए बगीचा, फरसाबहार एवं मनोरा में सूखे का सर्वे नहीं करा रही है। बगीचा, मनोरा एवं फरसाबहार के क्षेत्रीय विधायक यहाँ के किसानों के लिए आवाज क्यों नहीं उठा रहे है ? इनके मुंह पर अब ताला क्यों लगा हुआ है ? बगीचा, मनोरा एवं फरसाबहार तहसील क्षेत्र के किसानों के साथ ये सौतेला व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भूपेश सरकार अगर शीघ्र ही बगीचा, मनोरा एवं फरसाबहार तहसील में सूखे का सर्वे कराने का आदेश जारी नही करती तो मैं सांसद गोमती साय किसानों के लिए सड़क पर उतर कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करूंगी।

    रायगढ़ जिले को सूखा प्रभावित घोषित करे सरकार – सांसद गोमती साय

    रायगढ़ जिले की सभी तहसीलों को भी सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने हेतु सर्वे का आदेश जारी करने की मांग करते हुए रायगढ़ लोकसभा सांसद गोमती साय ने कहा कि रायगढ़ जिले की सभी तहसीलों में भी सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने हेतु सर्वे का आदेश जारी किया जाए क्योंकि रायगढ़ जिले में भी बहुत ही कम बारिश हुई है। किसानों के खेत सूख गए है, खेतों में दरार पड़ गई है। बीज तक के वापसी की कोई उम्मीद नहीं है। ऐसे में प्रदेश सरकार को संवेदनशीलता का आचरण करते हुए किसानों के दर्द को महसूस करते हुए रायगढ़ के किसानों को न्याय भरी राहत देनी चाहिए।

    रायगढ़ जिले के विधायकगण चुप क्यों है ? किसानों के दर्द को अब क्यों महसूस नहीं कर रहे है ? रायगढ़ जिले के सभी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक किसानों की आवाज अपने सरकार के मुखिया तक क्यों नहीं पहुंचा रहे है ? प्रदेश की कांग्रेस सरकार जल्द से जल्द रायगढ़ जिले के किसानों को राहत देने सूखा प्रभावित सर्वे कराए अन्यथा किसानों को न्याय दिलाने सड़क पर जरूर उतरूंगी।

  • जुनून और हौसले से भरे स्वास्थ्य कर्मियों की टीम कोविड टीकाकरण के लिए हर बाधा को पार करते हुए गांव-गांव तक पहुंच रही, कलेक्टर ने जनसामान्य से टीकाकरण के लिए किया आव्हान

    जिले में आज 453 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 17 हजार 369 नागरिकों का टीकाकरण किया गया

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, राजनांदगांव

    जिस दिन से चला हूँ मैं मेरी मंजिल पे है नजर इन आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा..

    यह पंक्तियां स्वास्थ्यकर्मियों के टीकाकरण के प्रति जज्बे को बयां करती है। जिले में शनिवार एवं रविवार को टीकाकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा महाअभियान चलाया गया है। जुनून और हौसले से भरे स्वास्थ्य कर्मियों की टीम कोविड टीकाकरण के लिए हर बाधा को पार करते हुए गांव-गांव तक पहुंच रही है। शहर, गांव, गली, चौराहों, चौपालों हर घर तक टीकाकरण के लिए टीम दस्तक दे रही है। टीकाकरण के लिए जिला प्रशासन ने अपनी ताकत झोंकी है। जिले में गांव के हाट बाजार में तो वहीं मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में भी मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से टीकाकरण लगातार जारी है। जिले में आज 453 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 17 हजार 369 नागरिकों का टीकाकरण किया गया। कलेक्टर श्री डोमन सिंह ने जनसामान्य से टीकाकरण के लिए आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि जिले में कोविड-19 संक्रमण के केस फिर से बढ़ रहे हैं। हमारा जिला अन्य राज्यों की सीमा से लगा हुआ है, जिससे स्थिति संवेदनशील हो जाती है। उन्होंने नागरिकों से कहा कि इस अभियान में ज्यादा से ज्यादा हिस्सा लें और बूस्टर डोज अवश्य लगवाएं। साथ ही जिन्हें पहला या दूसरा डोज नहीं लगाया है वे भी जरूर लगवाएं। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से भी अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे भी बिना डर के आगे आयें और वैक्सीन लगवाएं। टीकाकरण कराकर अपने व अपने परिवार की सुरक्षा का ख्याल रखें और एक जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाएं। उन्होंने सभी अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को युद्ध स्तर पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। जिले को सुरक्षित रखने के लिए इस महाअभियान में हर एक को अपनी सहभागिता निभानी होगी।

    कोविड- 19 संक्रमण से सुरक्षा के लिए टीकाकरण जरूरी है। जिन्होंने कोविड टीका का पहला और दूसरा डोज तथा बूस्टर डोज लगवा लिया है। वे कोविड से सुरक्षित रहे हैं। कोरोना की तीसरी लहर में भी यह देखा गया है कि जिन्होंने भी टीका लगाया है वे सुरक्षित हुए हैं। चौथी लहर की दस्तक को समझते हुए टीकाकरण कराने में ही समझदारी है। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा है कि ऐसे ग्राम पंचायत जो शत-प्रतिशत टीकाकरण करा लेंगे उन्हें सम्मानित किया जायेगा। जिले में आज 453 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 17 हजार 369 नागरिकों का टीकाकरण किया गया। जिसमें 12 वर्ष से 14 वर्ष के 90 बच्चों का कोविड टीकाकरण की पहली डोज व 145 बच्चों को कोविड टीकाकरण की दूसरी डोज लगाया गया। 15 वर्ष से 17 वर्ष के 30 बच्चों का कोविड टीकाकरण की पहली डोज व 135 बच्चों को कोविड टीकाकरण की दूसरी डोज लगाया गया। 18 वर्ष से अधिक 214 नागरिकों को टीकाकरण का पहला डोज व 1365 नागरिकों को टीकाकरण की दूसरी डोज लगाया गया। 106 एचसीडब्ल्यू, 11 फ्रंट लाईन वर्कर व 18 वर्ष से अधिक 15 हजार 273 नागरिकों को प्रीकॉसन डोज लगाया गया।

    अम्बागढ़ चौकी विकासखंड में 75 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 800 नागरिकों को टीकाकरण किया गया। इसी तरह छुईखदान विकासखंड में 60 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 1203 नागरिकों, छुरिया विकासखंड में 65 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 2048 नागरिकों, डोंगरगांव विकासखंड में 38 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 1347 नागरिकों, डोंगरगढ़ विकासखंड में 37 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 2848 नागरिकों, खैरागढ़ विकासखंड में 44 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 2720 नागरिकों, मानपुर विकासखंड में 28 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 803 नागरिकों, मोहला विकासखंड में 50 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 1601 नागरिकों, घुमका विकासखंड में 29 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 2290 नागरिकों तथा नगर पालिक निगम राजनांदगांव में 27 वैक्सीनेशन टीम द्वारा 1709 नागरिकों का टीकाकरण किया गया।

  • राज्य में खाद-बीज और औषधियों की गुणवत्ता की जांच अभियान जारी : बीज-खाद के अमानक नमूनों के लॉटो का विक्रय प्रतिबंधित

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के निर्देशानुसार खाद-बीज एवं पौध संरक्षण औषधि की गुणवत्ता की जांच का अभियान राज्य के सभी जिलों में जारी है। कृषि विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी अपने-अपने इलाकों में लगातार बीज, खाद और औषधियों के सेम्पल ले रहे हैं, जिसकी जांच गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला में की जा रही है। चालू खरीफ सीजन में अब तक  बीज के 80 नमूने तथा रासायनिक उर्वरक के 62 नमूने अमानक पाए गए हैं, जिनके लाट के विक्रय पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के साथ ही संबंधित फर्मों को नोटिस जारी किया गया है।

    कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार चालू खरीफ सीजन में बीज के अब तक 2686 नमूने लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु भेजे गए हैं, जिसमें से 2554 सैंपल मानक स्तर के तथा 80 सैम्पल अमानक पाए गए हैं। बीज के 52 नमूनों का परीक्षण अभी प्रक्रिया में हैं। इसी तरह रासायनिक उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच-पड़ताल के लिए कृषि विभाग के उर्वरक निरीक्षकों द्वारा राज्य के विभिन्न उर्वरक विक्रेता फर्मों से अब तक 1472 नमूने लिए गए हैं, जिसमें से 1135 नमूनों की जांच में 1073 नमूने मानक स्तर के तथा 62 अमानक पाए गए हैं। शेष 315 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त होना शेष है। अमानक बीज एवं खाद के लाट के विक्रय को विभाग द्वारा प्रतिबंधित किए जाने के साथ संबंधित संस्थाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसी तरह कीटनाशक औषधियों के 23 नमूने लिए गए है, जिसमें से 17 नमूने की रिपोर्ट मानक पायी गई है। शेष 4 सेम्पल निरस्त हो गए हैं, जबकि 2 नमूने की गुणवत्ता रिपोर्ट प्राप्त होना बाकी है।

  • किसानों को 4340 करोड़ का ऋण वितरित : अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण जारी

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    चालू खरीफ-सीजन में किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण जारी है। इस साल किसानों को 5800 करोड़ का ऋण दिए जाने का लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 4340 करोड़ 18 लाख रूपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो बीते वर्ष खरीफ सीजन में इसी अवधि का किसानों को प्रदाय 3378 करोड़ 91 लाख रूपए के ऋण का 112 प्रतिशत है।

  • राज्य में 31 लाख 38 हजार हेक्टेयर में हो चुकी खरीफ फसलों की बुआई

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    राज्य में खरीफ फसलों की 31 लाख 37 हजार 860 हेक्टेयर बुआई हो चुकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का 65 प्रतिशत है। अब तक खरीफ फसलों के तहत सर्वाधिक 21 लाख 64 हजार 710 हेक्टेयर में धान की बोता बोनी हुई है, जबकि 44 हजार 530 हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है। इसके अलावा मोटे अनाज की 2 लाख 16 हजार 890 हेक्टेयर में, दलहन की 1 लाख 40 हजार 580 हेक्टेयर में, तिलहन की 82 हजार 930 हेक्टेयर में तथा सब्जी एवं अन्य फसलों की 87 हजार 450 हेक्टेयर में बुआई पूरी कर ली गई है।

    कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में धान की 2 लाख 61 हजार हेक्टेयर में, मक्का की 1 लाख 66 हजार 20 हेक्टेयर में, कोदो-कुटकी की 49 हजार 730 हेक्टेयर में, रागी की 1140 हेक्टेयर में इस प्रकार अनाज की कुल बोनी 28 लाख 26 हजार 900 हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 74 प्रतिशत है। राज्य में दलहन फसलों की कुल बोनी एक लाख 40 हजार 580 हेक्टेयर में हुई है, जिसमें अरहर 85 हजार 720, मूंग 8160 हेक्टेयर में, उड़द 46 हजार 350 हेक्टेयर में तथा कुल्थी की 350 हेक्टेयर में बुआई शामिल है। तिलहन फसलों की बोनी 82 हजार 930 हेक्टेयर में हुई है, जिसमें मंुगफली 38 हजार 310 हेक्टेयर में, तिल 8210 हेक्टेयर, सोयाबीन 36 हजार 410 शामिल है। साग-सब्जी और अन्य फसलों की बुआई 87 हजार 485 हेक्टेयर में पूरी कर ली गई है।

    राज्य में चालू खरीफ सीजन में 5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की प्रचलित किस्मों के स्थान पर सुगंधित धान, जिंक धान, जैविक धान, मक्का, कोदो-कुटकी, दलहन और तिहलन की फसलों के साथ-साथ गन्ना की खेती को बढ़ावा देने के विशेष कार्यक्रम संचालित है। एक लाख 88 हजार 356 हेक्टेयर में प्रचलित धान के बदले अन्य फसलों के खेती के लिए 3 लाख 54 हजार 868 किसानों ने सहमति दी है। अब तक 38 हजार 442 किसानों द्वारा 25 हजार 549 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ना एवं अन्य उद्यानिकी फसलों की बुआई भी पूरी कर ली गई है।

  • प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में होगा विस्तार : महासमुंद मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए 100 सीटों की मिली मान्यता, एनएमसी ने जारी किया लेटर ऑफ इंटेंट

    प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में होगा विस्तार : महासमुंद मेडिकल कॉलेज को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए 100 सीटों की मिली मान्यता, एनएमसी ने जारी किया लेटर ऑफ इंटेंट

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में तीन नए मेडिकल कॉलेज में पिछले साल जहां कांकेर काे एनएमसी (National Medical Commission) से मान्यता मिली थी, वहीं इस बार महासमुंद काे भी मान्यता मिल गई।

    प्रदेश में दाे साल पहले कांकेर, महासमुंद व काेरबा जिले में नए मेडिकल कॉलेज खाेलने की मंजूरी मिली थी। इसके बाद तीनाें ही जिलाें में मेडिकल कॉलेज की तैयारी शुरू हुई। पिछले साल एनएमसी के निरीक्षण के बाद कांकेर काे मान्यता मिली थी।

    इस बार मान्यता की दाैड़ में महासमुंद व काेरबा मेडिकल कॉलेज थे। करीब 2 महीने पहले एनएमसी ने दाेनाें कॉलेज का एक ही दिन वर्चुअल निरीक्षण किया था। उसके बाद से फाइनल रिपाेर्ट का इंतजार चल रहा था।

    शुक्रवार काे एनएमसी ने एक रिपाेर्ट जारी की, जिसमें महासमुंद मेडिकल कॉलेज काे शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए 100 सीट के चिकित्सकीय शिक्षा के लिए मान्यता प्रदान कर दी गई है।

    प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटों में बढ़ोतरी होने से मेडिकल की शिक्षा के साथ ही मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • सेहत : संयमित दिनचर्या और संतुलित खानपान बचाता है कई बीमारियों से

    सेहत : संयमित दिनचर्या और संतुलित खानपान बचाता है कई बीमारियों से

    कीटनाशक, प्रदूषण, मोटापा तथा शारीरिक श्रम व व्यायाम की कमी भी जीवन-शैली से जुड़े रोगों के लिए जिम्मेदार

    मधुमेह, उच्च रक्तचाप व हृदय रोगों के बचने के लिए वसायुक्त खाद्य पदार्थों, जंक-फूड, कोल्डड्रिंक्स, मांसाहार, मद्मपान और धूम्रपान से करें परहेज

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    आधुनिक जीवन-शैली, अनियमित दिनचर्या और खानपान के कारण एक बड़ी आबादी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रही है। किशोर और युवा भी इनकी चपेट में आ रहे हैं। जीवन-शैली से जुड़े इन रोगों के लिए मुख्यतः अनुवांशिक, हमारी खानपान से जुड़ी आदतें और अनियमित दिनचर्या जिम्मेदार हैं। लोगों में वसायुक्त भोजन, फास्ट-फूड, मांसाहार, शराब और धूम्रपान का सेवन बढ़ रहा है। इनके शौकीनों में ज्यादातर किशोर और युवा भी हैं। इसके अलावा फसलों में कीटनाशकों का अधिकाधिक उपयोग, प्रदूषण, शारीरिक श्रम या व्यायाम का अभाव तथा मोटापा भी इन रोगों के मरीजों की संख्या बढ़ा रहा है।

    शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि जीवन-शैली से जुड़े रोगों से बचाव संयमित दिनचर्या और संतुलित खानपान से ही हो सकता है। आज की पीढ़ी खानपान और दिनचर्या के प्रति लगातार लापरवाही बरत रही है। फलस्वरूप कम उम्र में ही लोग उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों का शिकार हो रहे हैं। युवाओं में इन बीमारियों का प्रमुख कारण मोटापा भी है जो जंक-फूड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों, कोल्ड ड्रिंक्स, शराब और मांसाहार के कारण बढ़ रहा है। किशोर व युवा लगातार इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की गिरफ्त में रहते हैं और वे रात में देर तक जागते हैं। इनका प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

    शोध से यह पता चला है कि मानसिक स्वास्थ्य का असर सीधे तौर पर इन जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों में होता है। इन रोगों के उपचार के लिए आजीवन दवाईयां, नियमित रूप से चिकित्सक के परामर्श में रहने, नियंत्रित खानपान और संयमित दिनचर्या अपनाने की जरूरत होती है। आमतौर पर यह देखा जाता है कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों के मरीज बिना चिकित्सक के परामर्श के दवाईयां बंद कर देते हैं। फलस्वरूप उन्हें आपात स्थितियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यह जानलेवा साबित होता है। लोगों को इस बारे में जागरूक होना होगा कि ये बीमारियां जड़ से खत्म नहीं होतीं, बल्कि दवाओं, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम व योग के द्वारा नियंत्रित होती है। अत‌एव सावधानी जरूरी है।

    डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि चूंकि ये बीमारियां मनो-दैहिक यानि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हैं, इसलिए इन रोगों के बचाव में आयुर्वेद और योग कारगर है। इस पद्धति में विभिन्न ऋतुओं के लिए खानपान और दिनचर्या निर्धारित हैं। इन्हें अपनाकर तथा पंचकर्म, रसायन चिकित्सा, आचार रसायन, नियमित व्यायाम, योग व ध्यान के द्वारा जीवन-शैली गत रोगों से बचाव संभव है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों के बचाव के लिए शाकाहारी भोजन जिसमें मिश्रित अनाज की रोटी, अरहर या मूंग की दाल, कोदो या ब्राउन चांवल, करेला, सहजन यानि मुनगा, तरोई, हरी तरकारी, करी पत्ते, अदरक, मेथी, लहसुन, गुणमार, जामुन, आंवला इत्यादि का सेवन करना चाहिए तथा वसायुक्त खाद्य पदार्थ, जंक-फूड, कोल्डड्रिंक्स, मांसाहार, मद्मपान और धूम्रपान का परहेज आवश्यक है। इसके अलावा शक्कर और नमक का संतुलित मात्रा में उपयोग करना चाहिए। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में इन रोगों के बचाव और नियंत्रण के लिए अनेक प्रकार के रसायन और औषधियां भी उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन एवं परामर्श में किया जाना चाहिए।

  • जशपुर जिले में आयुष्मान कार्ड योजना से 16534 हितग्राही हुए लाभांवित : 12 करोड़ 86 लाख रूपये के निःशुल्क ईलाज का मिला लाभ

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    कलेक्टर रितेश कुमार अग्रवाल दिशा निर्देश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सभी विकासखंडों में हितग्राहियो का प्राथमिकता से आयुष्मान कार्ड बनाया जा रहा है। जिले में  01 अगस्त 2022 से  आपके द्वार आयुष्मान अभियान का तृतीय चरण शुरू की जा रही है। इस दौरान 01 अगस्त से 15 अक्टूबर 2022 तक विशेष अभियान चलाकर छूटे हुए लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया जाएगा। जिसके तहत सभी ग्राम पंचायत स्तर सहित स्कूल, थाना एवं अन्य सार्वजनिक स्थल पर भी आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए शिविर लगाया जाएगा। शिविर स्थल पर हितग्राहियो को लाने हेतु मितानीन एवं ग्राम पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी गई है।  साथ ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी सतत् रूप से सहयोग करते हुए कार्ड बनवाने का कार्य पूर्ण कर रहे है।

    मुख्यचिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभियान के तृतीय चरण की शुरूआत के साथ ही हितग्राही स्वयं पंजीयन कर कार्ड बना सकते है। जिले में अब तक 63 प्रतिशत लोगो का आयुष्मान कार्ड बनाया जा चुका है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजनातंर्गत जशपुर जिले के 43 शासकीय चिकित्सालय एवं 2 निजी चिकित्सालय पंजीकृत है। जनवरी 2022 से अब तक लगभग 16534 हितग्राही इस इस योजना से लगभग 12 करोड़ 86 लाख 22 हजार रूपये तक का निःशुल्क ईलाज प्राप्त किए है। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना में जिले के 8,63,060 राशन कार्ड धारी हितग्राहियों  में से  5,46,007 लोगो के वर्तमान में आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। समाजिक आर्थिक एवं जातीय जनगणना एवं राशन कार्ड धारी समस्त परिवार, योजना का लाभ लेने हेतु पात्र परिवार की श्रेणी में शामिल है। सीएमएचओ ने योजना का लाभ लेने हेतु सभी जिलेवासियों को आयुष्मान कार्ड बनवाने के आग्रह किया है। साथ ही  जिन व्यक्तियों का अब तक आयुष्मान कार्ड नहीं बना है वे अपने  नजदीकी कॉमन सर्विस सेन्टर या सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र,  प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से निःशुल्क अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकते है।

  • सौ.कुसुम ताई दाबके विधि महाविद्यालय में कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव हेतु कोरोना टीकाकरण बूस्टर कार्यक्रम का किया गया आयोजन

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ द्वारा सौ.कुसुम ताई दाबके विधि महाविद्यालय में कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव हेतु कोरोना टीकाकरण बूस्टर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की टीम उपस्थित हुई।महाविद्यालय के प्राध्यापकों,विद्यार्थियों, कर्मचारीगण एवं आस-पास के जनों ने बूस्टर डोज़ लगवाया गया।इस अवसर पर प्राचार्य ज़ाकिर अली सर ने जिला प्रशासन की पहल पर घर हरियाली अभियान के तहत महाविद्यालय परिसर में बूस्टर डोज़ लगवाने वालो को हरेली सप्ताह के उपलक्ष्य में वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए पौधा वितरण भी किया।उन्होने कहा कि पौधरोपण के इस महाअभियान में शामिल होते हुए हमारे शहर को सुंदर बनाने के लिए पौधा रोपण अवश्य करें।साथ ही साथ विद्यार्थियों से कहा कि सभी बूस्टर डोज़ अवश्य लगायें।कार्यक्रम संयोजिका डॉ श्रीमती प्रीति सतपथी ने स्वास्थ्य विभाग की टीम का धन्यवाद किया एवम उन्हें भी पौधे वितरण किये।इस आयोजन में 150 से भी अधिक जनों को बूस्टर डोज़ लगाए गए।महाविद्यालय के विद्यार्थियों में आशुतोष तिवारी,काजल जैन,यशोदा पटेल,स्वाति पाल,रूपेश सावरकर,योगेश साहू,नंदन झा,सौरभ उपाध्याय,सुरेश साहू,दिव्यांश व्यास,डिम्पल तिवारी,वैभव देवांगन का विशेष सहयोग रहा।