महात्मा गांधी और खेलकूद : शरीर, मन और समाज के संतुलन का दर्शन, खेल व्यक्तिगत प्रसिद्धि नहीं, सामूहिक भाईचारे का प्रतीक हो” — महात्मा गांधी.

महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) में खेलकूद पर उनके विचार : खेल व्यक्तिगत प्रसिद्धि नहीं, सामूहिक भाईचारे का प्रतीक हो – राष्ट्रपिता महात्मा गांधी. रायपुर : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी केवल स्वतंत्रता संग्राम के नायक ही नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और सादगी के प्रतीक थे। खेलकूद और व्यायाम को लेकर उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में थे। गांधी जी खेल को व्यक्तिगत प्रसिद्धि का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, अनुशासन और सामूहिक भाईचारे का माध्यम मानते थे।…

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विशेष लेख : क्या खेल से ईश्वर की अनुभूति संभव है? स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी क्यों प्रासंगिक हैं

12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जी की जन्म तिथि पर विशेष लेख खेल आध्यात्मिक, मानसिक, शारीरिक दृढ़ता के लिए जरूरी इस जगत  के  सभी  मनुष्यों ने जीवन में खेल के महत्व को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। खेलकूद का अंत जय या पराजय होता है। लेकिन उसका प्रभाव जीवन में गहरा होता है। खिलाड़ी मैदान में प्रतिद्वदी से भिड़ने के लिए उतरता है तो सबसे पहले वह ईश्वर से संघर्ष  करने  की कौशलता और मुकाबला करने में सक्षम होने की प्रार्थना करता है। बाद में तकनीक और रणनीति के बदलाव…

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विशेष लेख : खेलकूद, अनुशासन और राष्ट्रभावना का संगम ; लाल बहादुर शास्त्री के जीवन-दर्शन में स्वस्थ भारत की परिकल्पना

11 जनवरी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्यतिथि : खेलकूद के प्रति शास्त्री जी का दृष्टिकोण मेरे विचार से खेलकूद और मनुष्य का जीवन एक सिक्के के दो पहलू हैं। इस संसार में जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति समाज के किसी ना किसी क्षेत्र से जुड़ा होता है। वह वैज्ञानिक, चिकित्सक, लेखक, विचारक, कृषक, प्रशासक या नेतृत्वकर्ता हो सकता है लेकिन खेलकूद का उसके मन मस्तिष्क में महत्व होता है। हमारे देश के प्रधानमंत्रियों में भी खेल के प्रति लगाव पाया जाता है। भारत के पूर्व…

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विश्व खेल मंच पर भारत का बढ़ता दबदबा: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 11 वर्षों के दूरदर्शी नेतृत्व में भारतीय खेलों का ऐतिहासिक कायाकल्प, खेलो इंडिया से ओलंपिक सपनों तक

विश्व में भारतीय खिलाड़ियों का बढ़ता प्रभाव : भारत में खेलों के सर्वकालीन, सर्वश्रेष्ठ चिंतक, सुधारक – नरेन्द्र मोदी रायपुर : समय बड़ी तेजी के साथ निकल रहा है। भारत को पिछले 78 वर्षों के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में मिली सफलता की चर्चा भरपूर होती है। परंतु खेलकूद एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतिभागियों की 2014 के बाद उपस्थिति पर अपेक्षाकृत ज्यादा जानकारी प्रकाश में आ रही है। वास्तव में यही वे 11 वर्ष हैं जिस दौरान नरेन्द्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने भारत को…

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छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी “शहीद वीरनारायण सिंह” (10 दिसंबर पुण्यतिथि पर विशेष): छत्तीसगढ़ की माटी के प्रथम शहीद का दिवस—वीर नारायण सिंह, जिन्होंने अन्याय के विरुद्ध जनता के पक्ष में इतिहास रचा

जो भरा नहीं है भावों से,जिसमें बहती रसधार नहीं । वह हृदय नहीं है पत्थर है,जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।। (राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त) इतिहास के पन्ने यदि हम पलटें तो देश की आजादी के लिए स्वतंत्रता संग्राम में सभी धर्म, जाति, सम्प्रदाय के लोगों ने बिना किसी भेदभाव के देश भक्ति की भावना से प्रेरित होकर बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था,अपना तन-मन-धन से सर्वस्व न्यौछावर किया था। प्राकृतिक सम्पदा से युक्त गौरवशाली ऐश्वर्य से अभिमण्डित हिमालय से कन्याकुमारी तक के इस भू-भाग पर स्थित माँ भारती अपनी करोड़ों भारतीय…

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विशेष लेख : जशपुर में एडवेंचर टूरिज्म का नया युग — देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर ने बढ़ाया पर्यटन का ग्राफ

जशपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय पर्यटन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में जशपुर अब सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि रोमांचक पर्यटन के लिए भी पहचाना जाने लगा है। जशपुर के “देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर” ने इस दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। यह स्थान अब उन साहसिक यात्रियों का पसंदीदा गंतव्य बन रहा है जो रॉक क्लाइम्बिंग के साथ प्रकृति की शांति को भी महसूस करना चाहते हैं। देशदेखा क्लाइम्बिंग सेक्टर को इस तरह…

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जशपुर की हरियाली में बसा रानीदाह जलप्रपात : गिरते जल की धारा और रहस्यमयी लोककथा आपको तुरंत यात्रा करने के लिए आमंत्रित करती है!

जशपुर : छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की हरी-भरी पहाड़ियों और घने साल के जंगलों के बीच बसी एक प्राकृतिक धरोहर है – रानीदाह जलप्रपात। जशपुर नगर से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित यह झरना न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी गर्व का प्रतीक माना जाता है। हर मौसम में मनमोहक दृश्य रानीदाह की यात्रा शुरू होती है खूबसूरत, हरियाली से ढकी सड़कों से। जैसे ही पर्यटक झरने तक पहुँचते हैं, सामने फैलती हरियाली, चट्टानों से गिरता दूधिया पानी और पक्षियों की…

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विशेष लेख : महतारी वंदन योजना से जशपुर की 2 लाख महिलाएँ हुई सशक्त — 406.77 करोड़ की राशि बनी आत्मनिर्भरता की नींव

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जगा नया आत्मविश्वास और स्वाभिमान, मिली राशि से व्यवसाय कर बन रही आत्मनिर्भर जशपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक समानता की दिशा में अभूतपूर्व कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुरू की गई महतारी वंदन योजना ने महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वाभिमान की नई भावना जागृत की है। इसके साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। महिला स्व-सहायता समूहों को आवश्यक प्रशिक्षण, पूंजी और ऋण सुविधा उपलब्ध…

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विशेष लेख : छत्तीसगढ़ के खेल सितारे पहुंच रहे हैं, मैदान से मेडल तक

आलेख-हीरा देवांगन संयुक्त संचालक रायपुर, 26 जून 2025 : छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन की बदौलत देश के खेल क्षितिज में छत्तीसगढ़ का नाम तेजी से उभर रहा है, इसके चलते नए-नए खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपना जौहर दिखा रहे हैं। राज्य के खिलाड़ियों को मैदानों से निकलकर मेडल तक का सफर तय करने में अब कम वक्त लग रहा है। इसका हालिया उदाहरण बैडमिंटन में आकर्षी कश्यप का है, जिन्होंने अपनी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेरी है। छत्तीसगढ़ में…

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विशेष लेख : वन पट्टों के फौती और नामांतरण की प्रक्रिया अब आसान

आलेख-जी.एस. केशरवानी, उप संचालक रायपुर, 26 जून 2025 : छत्तीसगढ़ सरकार की नई पहल से वन पट्टों के फौती नामांतरण की प्रक्रिया सरल और व्यवस्थित हो गई है। किसी पट्टाधारी की मृत्यु के बाद उसके वैध वारिसों को अधिकार अब आसानी से मिल रहा है। वारिसों के नाम पर पट्टा दर्ज होने से वे न केवल भूमि के वैधानिक स्वामी बन पा रहे हैं, बल्कि शासकीय योजनाओं का लाभ भी उन्हें सुलभता से मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रत्येक वनभूमि पट्टाधारी परिवार को उसका…

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