वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का बड़ा सवाल: 96 साल बाद भी फीफा वर्ल्ड कप से दूर भारत, आखिर भारतीय फुटबॉल की बदहाली का जिम्मेदार कौन?

भारत में फुटबाल के गिरते स्तर को सुधारेगा कौन?

फीफा विश्वकप-2026, अमेरीका, कनाडा, मैक्सिको में खेला जायेगा

आलेख ..जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर, रायपुर, छ.ग.

रायपुर : खेलकूद की दृष्टि से अगले चार माह के दौरान तीन बड़े खेल आयोजन होने जा रहे हैं। सबसे पहले 11 जून से 19 जुलाई 2026 तक फीफा विश्वकप 2026 संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में होगा। फिर बहुखेल की दो स्पर्धाएं होंगी। जिसमें से 2026 के राष्ट्रमंडल खेल स्काटलैंड के ग्लास्गो में 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक संपन्न होगा। तत्पश्चात महाद्वीप खेलों के अंतर्गत एशियाई खेलों का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक जापान के आइची प्रांत तथा नागोया में होगा। कुल मिलाकर आगामी चार माह पूरी तरह खेलमय होगा।

भारत के लिए एशियाई खेल के परिणाम सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसमें से ओलंपिक में शामिल आवश्यक खेलों याने कोर गेम्स में पदक पाने वाले खिलाड़ियों के लिए अगले वर्ष 2028 लास एंजेल्स ओलंपिक में भाग लेने का द्वार खुल जाएगा. 1930 में उरुग्वे (दक्षिण अमरीका महाद्वीप) से विश्वकप फुटबाल स्पर्धा फेडरेशन इंटरनेशनल डी फुटबाल एसोसिएशन (फ्रांसीसी) अर्थात फीफा के अधिकारियों द्वारा पुरुष वर्ग के लिए आरंभ की गई। 1942 तथा 1946 में दूसरे विश्वकप के इस कारण इस प्रतियोगिता को आयोजित कराने में सफलता नहीं मिली लेकिन उसके बाद अब तक यह चैंपियनशिप बिना की व्यवधान के निरंतर संपन्न हो रही है।

इस प्रतियोगिता में संसार के सबसे ज्यादा देश शामिल होते हैं। 2026 में प्रथम 48 स्थान प्राप्त करने के लिए संसार के छह महाद्वीप (भौगोलिक भूभाग) के 211 देशों या संस्थाओं की टीम ने भाग लिया। 1930 से अब तक आयोजित की गई फीफा विश्वकप फुटबाल के 24 संस्करण हो चुके हैं। इसमें ब्राजील 5 बार, जर्मनी, इटली चार-चार, अर्जेंटीना तीन, फ्रांस, उरुग्वे दो- दो बार साथ ही इंग्लैड व स्पेन की फुटबॉल टीम ने एक बार चैंपियनशिप पर कब्जा जमाया है। विजेताओं पर नजर डालने से स्पष्ट है कि यूरोप और दक्षिण अमेरिका महाद्वीपों का फुटबाल में एकाधिकार है। दूसरी तरफ भारतीय टीम ने फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के 96 वर्ष में सिर्फ 1950 में एक बार मुख्य ड्रा में खेलने की पात्रता हासिल की थी। लेकिन किन्हीं कारणों से वह स्पर्धा में शामिल नहीं हो सकी।

फुटबाल में इस बदहाली के लिए फुटबाल खेल संघ के पदाधिकारियों, खेल प्रशासन, खेल प्रशंसक, खिलाड़ी, प्रशिक्षक, अभिभावक सभी समान रूप से दोषी हैं। आज विश्व में फुटबाल की लोकप्रियता फीफा के पदाधिकारियों की दूरदर्शिता व एकता के कारण संभव हुआ है। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने तक हमारे देश में हाकी, फुटबाल, टेनिस, क्रिकेट, वालीबाल, कबड्‌डी, कुश्ती, खो-खो, कैरम, शतंरज और स्थानीय खेल लोकप्रिय थे। आज की परिस्थिति में धीरे-धीरे दूसरे खेलों को ओलंपिक संघ द्वारा मान्यता दिये जाने के फलस्वरूप बैडमिंटन, तीरंदाजी, निशानेबाजी, मुक्केबाजी, तलवारबाजी, हैंडबाल, बास्केटबाल, मार्शल आर्ट से संबंधित खेल, भारोत्तोलन आदि भी लोकप्रिय होते चले गये। और संयोग देखिए पुराने खेल में हमारे देश में जड़ खोखला होता चला गया तथा उपरोक्त नए खेलो में जड़ मजबूत होते चले जा रहे हैं।

और तो और कई नए ऐसे खेलो में भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में भारत का तिरंगा लहराते चले है रहे हैं। 1956 के मेलबोर्न ओलंपिक में चौथे स्थान पर आने वाली एशियाड चैंपियन टीम आज विश्व वरीयता में हमारी फुटबाल टीम 211 देशों में141 वें स्थान पर है। 1880 के आसपास से भारत में खेली जाने वाली फुटबाल को खेल में भारत पिछड़ता जा रहा है। जबकि स्वतंत्रता के पश्चात आरंभ कई खेल आज विश्व रेकिंग में ऊंचाई पर हैं। इसकीवजह अन्य खेलों के रणनीतिकारों की बुद्धिमता पूर्ण निर्णय साथ ही अभिभावकों का योगदान है । फुटबाल जैसे खेल जिसमें खिलाड़ियों को कम खर्च में मैदान ,पोशाक आदि मिल जाते हैं। उसमें हमारे खिलाड़ियों का पिछड़ना बेहद अफसोसजनक है।

2026 के फीफा विश्वकप में 48 टीम ने मुख्य स्पर्धा में भाग लेने हेतु योग्यता हासिल की है। ऐसा भी नहीं है कि नई टीम विश्वकप की मुख्य स्पर्धा के लिए योग्यता हासिल नहीं करती है। 2022 के मुकाबले 22 अन्य टीमों ने इस बार के विश्वकप के लिए योग्यता प्राप्त किया है। विश्व स्तर की बात छोड़िये एशिया महाद्वीप के लिए 48 से 9 स्थान आरक्षित थे। अफसोस उनमें भी भारत प्रथम नौ में नहीं आ सका जबकि एशिया में 46 देशों को फीफा ने मान्यता दी है। भारतीय टीम को एशिया में 25 वीं वरीयता प्राप्त है। भारतीय फुटबाल की दयनीय स्थिति में सुधार के लिए खिलाड़ियों के चयन, प्रशिक्षण में आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत है। पदाधिकारियों के लिए चेतावनी है कि वे फुटबाल के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए ठोस कदम उठाये अन्यथा आने वाली पीढ़ी फुटबाल खेल को ढूंढते रह जायेगी।

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