समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता है. दुनिया की ऐसी कोई समस्या नहीं जिसका उनके पास समाधान नहीं तथा दुनिया का ऐसा कोई विषय नहीं जिनका उन्हें ज्ञान नहीं। उन्होंने वर्ष 2014 में बड़े बदलाव के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और दृढ़ शक्ति के साथ पायदान दर पायदान आगे बढ़ रहे हैं. वे प्रयोग धर्मी भी है, नित नए प्रयोग करते रहते हैं. ऐसा ही अभिनव प्रयोग उन्होंने जनसंवाद के लिए ‘रेडियो’ को माध्यम बना कर किया…
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स्कूल भवनों के मरम्मत के लिए राज्य शासन ने जारी की राशि, जिले के 481 स्कूलों के लिए प्रथम किश्त की राशि 2052.00 लाख रुपए जारी
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की थी घोषणा समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जांजगीर-चांपा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश भर के विद्यालयों के जर्जर भवनों को मरम्मत कर अध्यापन व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने की न सिर्फ बात कही थी, अपितु भवनों की मरम्मत के लिए राशि भी जारी करने की घोषणा की थी। इसी तारतम्य में राज्य शासन द्वारा प्रदेश के सभी जिलों के लिए प्रथम किश्त के रूप में 16864.00 लाख रुपए की राशि जारी कर दी गई है। जांजगीर-चांपा जिले के लिए शासन द्वारा 481 स्कूलों के लिए…
Read Moreनववर्ष पर चिंतन आलेख : बुढ़ापा है एक सुखद परिवर्तन !
समदर्शी न्यूज डेस्क रायपुर : 31 दिसम्बर को जनसमुदाय नववर्ष के स्वागत के लिए उल्लास में डूबे हुये जश्न की तैयारी में दिखा। वहीं वर्ष 2022 का कैलेण्डर अपने अस्तित्व को सदा सदा के लिए समाप्त होने पर आँखें नम करके चेहरा लटकाने के बजाय आत्मसंतोष का भाव लिए हुए अंतिम घड़ी की ओर टकटकी लगाये ताकते दिखा। जो कैलेण्डर रोज रोज तारीख बदलता रहा, उसी कैलेण्डर को 31 दिसम्बर की तारीख ने पूरी तरह से बदल कर रख दिया। जिंदगी का भी यही फलसफा है, जो आज है, वह…
Read More22 दिसम्बर जन्म-दिवस पर विशेष आलेख : छत्तीसगढ़िया वीर सपूत घनश्याम सिंह गुप्त !
समदर्शी न्यूज डेस्क छत्तीसगढ़ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का भी गढ़ है। इस माटी के वीर सपूतों ने देश की आजादी की लड़ाई में फिरंगियों के छक्के छुड़ा दिए थे। ऐसे बहादुर सपूतों में सम्मिलित घनश्याम सिंह गुप्त का जन्म 22 दिस्मबर 1885 को दुर्ग में हुआ था। बालपन से ही उनकी रगों में देशभक्ति का खून दौड़ रहा था। अपने भीतर खौलते हुए खून को उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जमकर प्रदर्शित किया था। आजादी के बाद निर्मित देश के संविधान को हिंदी में अनुवादित करने में आपकी ऐतिहासिक भूमिका…
Read Moreछठ-पर्व चिंतन आलेख : सभ्यता-संस्कृति के संवाहक तालाब
समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर घर के बंद बाथरूम में रखी बाल्टी में भरे पानी से बच्चों को नहलाते हुये जब मैंने बताया कि बचपन में हम तालाब में नहाया करते थे, तो बच्चों ने कौतुहल भरे लहजे में पूछा – पापा जी तालाब क्या-कैसा होता है ? उनके इस प्रश्न से मेरे दिलदिमाग में बिजली सी कौंध गई। तालाब के प्रति बच्चों का अनजानापन मुझे एक अपराध बोध का एहसास करा गया। मुझे लगा अपनी सभ्यता, संस्कृति, रीति-रिवाज और संस्कारों से अनजान बनाने का काम जाने-अनजाने संभवतः हम स्वयं कर…
Read Moreदीपावली पर चिंतन आलेख : मिट्टी के दिए से मनाएं दीपावली !
मिट्टी का दीपक जलते हुए संदेश देता है कि सदैव दूसरों की जिंदगी में आए अंधेरे को दूर करने हाथ बढ़ाना चाहिए ! समदर्शी न्यूज डेस्क, मिट्टी से निर्मित वस्तुओं का मनुष्य के जीवन में जन्मजात नाता जुड़ा होता है। अत्याधुनिक युग आने के बावजूद मिट्टी से निर्मित सुराही के पानी का स्वाद मंहगे फ्रिज का ठंडा पानी नहीं दे पाता। ग्रीष्म काल के आते ही जैसे मिट्टी से निर्मित मटकी की मांग बढ़ जाती है, उसी तरह दीपावली के आगमन के साथ ही मिट्टी के दीए की पूछ परख…
Read More25 सितंबर को पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर विशेष आलेख : पं. दीनदयाल के अंत्योदय से नए भारत का उदय- अशोक बजाज
समदर्शी न्यूज डेस्क अदभूत प्रतिभा के धनी पं. दीनदयाल उपाध्याय उत्कृष्ट लेखक, विचारक, महान राष्ट्र चिंतक एवं 20 वी सदी के आदर्श राजनेता थे। उन्होने देखा कि देश में अमीरी व गरीबी के बीच की खाई दिनों दिन गहरी होती जा रही है। एक ओर जहां बहुसंख्यक लोग गरीबी, बेकारी और भुखमरी से जूझ रहे हैं तो दूसरी ओर समाज में ऐसे भी लोग हैं जिसके पास बेशुमार धन सम्पदा है। देश में एक बड़ा तबका ऐसा भी है जिसकी कमाई सीमित है, अपनी दैनंदिनी की आवश्यकता की आपूर्ति उसके…
Read Moreगणेश चतुर्थी पर चिंतन आलेख : रोते गणेश को हंसाएं कैसे
विगत कई सप्ताह से गणेश स्थापना हेतु मंच एवं पण्डाल के निर्माण एवं सजावट कार्य में जुटे-जुटे थक कर चूर-चूर हो गया था।गणेश जी की स्थापना के उपरान्त थकान मिटाने के लिए घोड़ा बेचकर गहरी नींद में सो रहा था। तभी रात्रि दो बजे के करीब किसी के सिसक-सिसक कर रोने की आवाज से मेरी नींद उचट गई।मैं आंख मलते रोने की आवाज की दिशा में चल पड़ा।आगे जाकर मैंने देखा कि हमारे पण्डाल में विराजे गणेश जी रो रहे हैं।रो-रोकर उन्होंने अपनी आंख और सूंड़ को लाल कर डाला…
Read More9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष आलेख : “आदिवासी भाईयों के मिजाज लाजवाब है,गणित की किताब में वे रखते गुलाब है’’
समाजशास्त्रियों ने भी समाज में बढ़ती हिंसा का बड़ा कारण विकृत होती संस्कृति को बताया है समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर पूरे विश्व में आदिवासियों की एक बहुत बड़ी आबादी निवास करती है अनेक विचारक इन्हें मूल निवासी भी कहते हैं। इनकी प्राचीन कला संस्कृति और मूल अधिकार के संरक्षण की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए पहली बार 09 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र संघ (यू.एन.ओ) की बैठक हुई। इसमें आदिवासियों के हित और विकास को लेकर ब्यापक विचार-विमर्श किया गया। आगे वर्ष 1993 में जिनेवा (स्विटजरलैंड ) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय…
Read Moreनागपंचमी पर विशेष आलेख : मानव मित्र होते हैं सर्प
समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर पर्वों की विविधता भी भारत की विशेष पहचान है। यहां के अधिकांस पर्व प्रकृति और प्राणियों से सम्बद्ध हैं, तथा मानव समुदाय को इनके भक्षक होने के बजाय संरक्षक बनने का संदेश देते हैं।ऐसे ही पर्वों में से एक पर्व नागपंचमी भी है।प्रति वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नांग पंचमी का पर्व देशभर में मनाया जाता है। इस पर्व पर नाग सांपों की पूजन की परम्परा है। सर्पों के प्रति संवेदना दयालुता को बनाये रखने का संदेश यह पर्व देता है।अनाज…
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