रिजांगला रज कलश यात्रा का छत्तीसगढ़ राज्य में जशपुर जिले से हुआ शुभारंभ : यात्रा देश के समस्त राज्यों का भ्रमण करते हुये 18 नवंबर को पहुचेगी जन्तर-मन्तर

जशपुर, 23 मई 2025/ रिजांगला रज कलश यात्रा का छत्तीसगढ़ राज्य स्थित जशपुर जिले के पावन धरती पर विगत दिवस 22 मई 2025 संध्या समय 04 बजे आगमन झारखण्ड राज्ये से छत्तीसगढ़ राज्य में हुआ।

अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा स्थापित 1924 के पहल से 22 मई को छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर से रिजांगला रज कलश यात्रा का शुभारंभ प्रदेश अध्यक्ष श्री भुनेश्वर यादव जी और प्रदेश उपाध्यक्ष श्री राजकुमार यादव जी के नेतृत्व में हुआ। रिजांगला रज कलश यात्रा देश के समस्त राज्यो का भ्रमण करते हुये 18 नवंबर 2025 को जन्तर-मन्तर पर पहुचेगी।

इस कलश यात्रा के मार्गदर्शक राष्ट्रीय सचिव बी.आर. यादव जी, संयोजक एवं यात्रा राजेश यादव, प्रदेश अध्यक्ष भुनेश्वर यादव, वरि. प्रदेश उपाध्यक्ष देवधारी यादव, संभागीय महामंत्री डी.आर. यादव, सूरजपुर अध्यक्ष मोतीलाल यादव, बिलासपुर अध्यक्ष जितेन्द्र यादव, प्रदेश के पदाधिकारीगण, जिला पदाधिकारीगण और जशपुर जिले से रमेश बारिक, गुप्तेश्वर यादव, हेमंत यादव, लालू यादव एवं समस्त यादव समाज के बंधुगण शामिल हुए।

ज्ञात हो कि सन् 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान 18 नवंबर 1962 की मध्य रात्रि में दिवाली के ठीक 20 दिनों बाद पूर्वी लद्याख के रिजांगला रज के करीब 18000 फुट की ऊंचाई पर जहां का तापमान शून्य से -25 से -30 डिग्री नीचे रहता है। भारत की एक सैनिक चौकी है। इस चौकी पर 13 कुमाऊं बटालियन की चार्ली कंपनी तैनात थी, इस कंपनी में सभी 120 सैनिक अहीर (यादव) थे। 18 नवंबर की मध्य रात्रि में चीनी सेना की दो रेजीमेंट करीब 5000 सैनिक ने रेजांगला की चौकी पर नापाक इरादे से हमला किया 1 कंपनी ने जिसकी सूचना ऊपर के हडक्वार्टर को दिया, हेडक्वार्टर से चौकी खाली करने का आदेश आया। परन्तु इन वीर अहीर सैनिकों ने चौकी खाली करने से साफ मना कर दिया और दादा किशन की सौंगध खाकर चीनियों से लोहा लेने का मन बना लिया। उस काली रात को 120 अहीर सैनिकों ने “दादा किशन‘‘ का जयकार करते हुए 5000 चीनी सैनिको पर टुट पड़े। जिसमें 114 वीर अहीर सैनिको ने अपनी शहादत देते हुए 3000 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। चीनी सैनिकों ने भारतीय वीर अहीर जवानो की वीरता को देखकर अपना सैलूट दिया और बचे हुए सैनिक वापस लौट गये।

रेजांगला की लड़ाई पूरे विश्व में आठ सबसे भीषण लड़ाईयों में से एक है। इन 114 वीर अहीर सैनिकों को भारत माता ने वर्फ की चादर ओढ़ा कर अपने में समा लिया। इस लड़ाई में अहीर जवानों के शहादत के कारण ही लद्याख के चुशूल का सैनिक हवाई अड्डा तथा लेह घाटी आज भारत के नक्शे में प्रसिद्ध है। इन यादव वीर जवानों ने 1962 की दिवाली अपने सगे-सम्बिधियों के साथ नही मनाकर देश की रक्षा के लिए चीनियों के साथ अपने खून की होली खेली। ऐसी बहादुरी पूर्ण लड़ाई विश्व की इतिहास में कही नही मिलता है। ये युद्ध विश्व में अद्वितीय है। इन वीर अहीर जवानों की शहादत को देखकर देश की मशहूर गायक प्रदीप एवं लतामंगेश्कर ने इन वीर जवानों के सम्मान में एक गीता लिखा…. ऐ मेरे वतन के लोगो इन वीर अहीर जवानों की वीरता की कहानी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा दायक है। जिसकी मिसाल आज पूरे विश्व के हर देश के सैनिक इतिहास में दी जाती है।

02 अक्टूबर 2022 को ब्रिगेडियर प्रदीप यदु (छत्तीसगढ़) तथा कैप्टेन रमेश यादव पायलट (हरियाणा) ने रेजांगला के उस स्थान से जहां 114 बीर सैनिको का सामूहिक शहादत हुआ था। इन यादव रणाबाकुरों की रक्त रंजित पवित्र माटि-को अपने साथ लाया ये पवित्र माटी देश के हर देशवासियों के लिए खास कर यादवों के पूज्यनीय है।

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