ग्राम पंचायत कण्डोरा में विकास कार्य सिर्फ कागज़ों पर, सीसी रोड-नाली बिना बने ही उड़ गए लाखों रुपये !
कुनकुरी (जशपुर), 28 मई 2025 | विशेष रिपोर्ट – सागर जोशी (संपादक)
“जब विकास की योजनाएँ कागज़ों में दम तोड़ने लगें, जब सड़कें और नालियाँ फ़ाइलों में ही बन जाएं, और जब जनता का पैसा चंद हाथों की जेब गरम करने लगे — तब समझिए कि भ्रष्टाचार ने अपने पैर गांव की चौपाल तक पसार दिए हैं।” छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्राम पंचायत कण्डोरा से जो खुलासे सामने आए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि कैसे एक पंचायत सचिव ने सरकारी व्यवस्था को धता बताते हुए जनता की गाढ़ी कमाई से अपनी ऐशगाहें सजाईं। कागज़ी विकास और जमीनी हकीकत के बीच का फासला यहां सिर्फ अफसोसजनक नहीं, बल्कि आपराधिक है।
जशपुर जिले के विकासखण्ड कुनकुरी के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कण्डोरा में भ्रष्टाचार ने अपनी सारी सीमाएं लांघ दी हैं। पंचायत के सचिव सुशील तिर्की पर पंचायत की योजनागत राशि के करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों रुपये की हेराफेरी और गबन का आरोप ग्रामीणों और पूर्व सरपंच रामदीन द्वारा लगाया गया है। आरोपों के अनुसार विकास कार्यों की राशि का बंदरबांट कर सचिव ने अपनी जेबें भरी हैं और जनता को विकास से वंचित कर दिया है।
कागजों पर हुए विकास कार्य, जमीन पर वीरानी
ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड्स के अनुसार पंचायत में दो स्थानों पर सीसी रोड और नाली निर्माण हेतु लगभग 7 लाख रुपये की राशि पंचायत के खाते में उपलब्ध कराई गई थी। मगर जमीनी हकीकत यह है कि न तो कोई कार्य आरंभ हुआ और न ही कोई निर्माण स्थल दिखाई देता है। वहीं, राशि का आहरण कर लिया गया, जिससे साफ होता है कि फर्जीवाड़ा सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि पूरी योजना में समाहित है।
गौण खनिज मद के 12.80 लाख का ‘गायब खेल‘
सबसे बड़ा मामला सामने आया है गौण खनिज मद की 12 लाख 80 हजार रुपये की राशि का, जो 15 जनवरी को पंचायत के खाते में आई थी। उसी दिन सचिव सुशील तिर्की ने अपनी जेब गरम करने में देर नहीं लगाई। आरोप है कि—
- 1.28 लाख रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर किए, जिसे वह “कमिशन” बता रहे हैं।
- 5 लाख रुपये भरत सिंह नामक व्यक्ति के खाते में डाले।
- 5.72 लाख रुपये एक अज्ञात खाते में ट्रांसफर किए, जिसका नाम तक दस्तावेज़ में दर्ज नहीं है।
इन लेन-देन की कोई ठोस प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और 12 लाख रुपये देखते ही देखते गायब हो गए, जबकि कार्य ज़मीन पर आज भी अधूरे हैं।
फर्जी हस्ताक्षर से निकाली गई राशि, पूर्व सरपंच ने खोली पोल
पूर्व सरपंच रामदीन ने खुद सामने आकर सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि कई फाइलों में उनके फर्जी हस्ताक्षर कर सचिव ने योजनाओं की राशि निकाली। रामदीन ने कहा, “कुछ दस्तावेज़ हाथ लगने के बाद जब मैंने बैंक स्टेटमेंट निकाला, तो सच्चाई सामने आई कि राशि का गबन सचिव द्वारा किया गया है। कार्य स्थल पर जाकर देखा, तो वहां एक ईंट तक नहीं रखी गई थी।”
15वें वित्त की भी राशि हजम
इतना ही नहीं, 15वें वित्त आयोग मद से स्वीकृत दो कार्य — एक नाली (3 लाख) और एक सीसी रोड (3.92 लाख) — की राशि का भी आहरण कर लिया गया, लेकिन कार्य धरातल पर शून्य है। इन कार्यों की फाइलों में भी पूर्व सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए हैं।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जांच की उठी मांग
गांव के लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव सुशील तिर्की ने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया है। उन्होंने फर्जी हस्ताक्षर कर राशि निकालकर भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा कर दी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल सचिव सहित दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और उच्चस्तरीय जांच की जाए।
