दोकड़ा के श्रीजगन्नाथ मंदिर में श्रीपुरी धाम की तर्ज पर दीप प्रज्वलन प्रारंभ, निर्जला एकादशी से भक्तिमय हुआ वातावरण.

श्री जगन्नाथ पूरी धाम की तरह अब दोकड़ा के ऐतिहासिक और प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर में भी भव्य स्तर पर धार्मिक आयोजन और परंपराएं जीवंत की जा रही हैं। यहां निर्जला एकादशी पर्व के अवसर पर शुरू हुआ द्वीप प्रज्वलन कार्यक्रम भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक आकर्षण बन गया है। यह परंपरा न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर रही है, बल्कि स्थानीय श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीजगन्नाथ के चरणों में समर्पित कर रही है।इस अवसर पर भजन संध्या का आयोजन किया गया।

दोकड़ा स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व वर्षों पुराना है। अब यहां श्रीजगन्नाथपुरी धाम की तर्ज पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पूजा-अर्चना की जा रही है। मंदिर समिति और स्थानीय भक्तों के प्रयासों से यहां धार्मिक गतिविधियां तेज़ी से बढ़ रही हैं।

निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर मंदिर शिखर में शुरू हुई दीप प्रज्वलन की परंपरा को भक्तों ने श्रद्धा और आस्था के साथ अपनाया है। सैकड़ों दीपकों से सजा मंदिर परिसर रात के समय अद्भुत आभा से चमक उठा। माना जाता है कि इस दिन जल ग्रहण न कर उपवास रखते हुए भगवान का ध्यान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

इस पावन आयोजन में दोकड़ा ही नहीं, आसपास के गांवों और कस्बों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्री जगन्नाथ स्वामी की सच्चे मन से आराधना करने पर जीवन की नैया पार हो जाती है। मंदिर समिति के अनुसार, हर साल इस आयोजन का विस्तार किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें।

श्री जगन्नाथ मंदिर समिति के ठाकुर पुरुषोत्तम सिंह एवं बलराम भगत ने बताया कि आगामी देव स्नान पूर्णिमा और रथ यात्रा के लिए भव्य तैयारियां चल रही हैं। इस बार भक्तों के सहयोग से एक विशाल रथ का निर्माण किया जाएगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। रथ यात्रा को लेकर क्षेत्र में उत्साह और उल्लास का वातावरण है।

मंदिर समिति  के सहयोग से यह आयोजन सफल हो पाया है। समिति के सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन को हर वर्ष और अधिक भव्य रूप देने का संकल्प लिया गया है। आने वाले वर्षों में यह स्थल भी धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर प्रमुख स्थान बना सकता है। दोकड़ा स्थित श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर अब केवल एक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनता जा रहा है।

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