संत अगाथा काथलिक चर्च पाकरटोली पल्ली ने मनाया रजत जयंती समारोह : आस्था, सेवा और विकास का 25 वर्षों का प्रेरणादायक सफर

352 परिवारों की आस्था का संगम, 25 पुरोहित और 38 धर्म बहनों की तपस्या का प्रतीक बना संत अगाथा चर्च

जशपुर, | 13 जून 2025 : पाकरटोली स्थित संत अगाथा काथलिक चर्च ने अपनी स्थापना के 25 गौरवशाली वर्षों को रजत जयंती समारोह के रूप में भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया। यह ऐतिहासिक अवसर चर्च के आस्था-यात्रा, शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिक उत्थान की कहानी को जीवंत करता है। समारोह में मिस्सा पूजा से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक की प्रभावशाली प्रस्तुति रही, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

बिशप एम्मानुएल केरकेट्टा का प्रेरणादायक संदेश

समारोह के मुख्य अनुष्ठाता एवं मुख्य अतिथि, जशपुर धर्मप्रांत के बिशप श्री एम्मानुएल केरकेट्टा ने प्रवचन में कहा कि रजत जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि ईश्वर को धन्यवाद देने और आत्ममंथन करने का एक अवसर है। उन्होंने कहा,

पल्ली का यह सफर आस्था, त्याग और सेवा की मिसाल है। हमारे पूर्वजों ने जो विश्वास बोया, उसे अब फलते-फूलते देखना गौरव का विषय है। शिक्षा, सेवा और आत्मिक निर्माण में और अधिक मजबूती लाने की आवश्यकता है।”

उन्होंने बच्चों की शिक्षा, स्कूल अनुशासन, संस्कार और चरित्र निर्माण पर विशेष बल देते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर मूल्यों के साथ आगे बढ़ाने में पल्ली की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

शुरुआती संघर्षों की यादें : फादर जॉर्ज खलखो

पल्ली के प्रथम पुरोहित फादर जॉर्ज खलखो ने स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि कैसे बिना भवन और सुविधाओं के पेड़ों के नीचे पूजा-अराधना प्रारंभ हुई थी। उन्होंने कहा,

शुरुआत बेहद कठिन थी, परंतु ईश्वर की कृपा और पल्लीवासियों के सहयोग से आज यह पल्ली समृद्ध और आत्मनिर्भर बन चुकी है।”

फादर प्रफुल बड़ा और फादर ऑस्कर सेभीरिन ने भी अपने संदेश में पल्ली को शुभकामनाएं दीं।

पाकरटोली पल्ली का इतिहास और उपलब्धियाँ

तीनतुस तिग्गा द्वारा प्रस्तुत इतिहास में बताया गया कि 12 जून 2000 को पाकरटोली पल्ली, माता पल्ली दुदुला से अलग होकर स्वतंत्र अस्तित्व में आई।

  • वर्ष 2013 में चर्च भवन का निर्माण पूर्ण हुआ और इसे संत अगाथा को समर्पित किया गया।
  • वर्तमान में पल्ली के 8 गाँवों में फैले 352 काथलिक परिवार हैं।
  • इस पल्ली से 25 पुरोहित और 38 धर्म बहनें निकले हैं, जो देश और विदेशों में सेवा दे रहे हैं।

समारोह की झलकियाँ

मिस्सा पूजा की शुरुआत पल्ली नृत्य दल के पारंपरिक प्रवेश नृत्य से हुई। मुख्य यजक पल्ली पुरोहित फादर रेमेजियुस एक्का ने स्वागत भाषण देकर अतिथियों का अभिनंदन किया।
धार्मिक गीतों का मधुर गायन रोनाड और बृजेश के नेतृत्व में पल्ली गायन मंडली द्वारा किया गया।

पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समा

समारोह के दूसरे सत्र में महिला संघ द्वारा अतिथियों का आदिवासी रीति-रिवाजों से स्वागत किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में रंगारंग नृत्य और गीतों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन भूषण खलखो ने किया।

समर्पण और सहयोग की मिसाल

कार्यक्रम की सफलता में पल्ली युवा संघ, महिला संघ, काथलिक सभा और जुबली समिति का विशेष योगदान रहा। अंत में फादर रेमेजियुस एक्का ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा,यह आयोजन हमारी एकता, सेवा भावना और ईश्वरभक्ति की जीवंत अभिव्यक्ति है।”

Related posts