माननीय श्री शक्ति सिंह राजपूत जिला एवं सत्र न्यायाधीश जांजगीर-चांपा, माननीय श्री शैलेन्द्र चौहान अपर सत्र न्यायधीश जांजगीर, पुलिस अधीक्षक जांजगीर-चांपा श्री विजय कुमार पाण्डेय (IPS), वैज्ञानिक अधिकारी श्रीमती आकांक्षा सिंह की उपस्थिति में कार्यशाला का किया गया आयोजन.
कार्यशाला के दौरान ई-साक्ष्य, ई-समंस, आई.ओ. मितान एवं नवीन कानून के संबंध में दी गई विस्तृत जानकारी.
NDPS की कार्यवाही के दौरान आरोपी के कब्जे से बरामद गांजा को मौके पर ही गवाहों के समक्ष शीलबंद किया जावे.
अपराधिक/मर्ग प्रकरण में जप्त बिसरा एवं NDPS के मामले में जप्त प्रदर्श को समय पर FSL भेजने के संबंध में की गई चर्चा.
विवेचना के दौरान घर या व्यवसायिक स्थान या अन्य जगह की तलाशी लेने पर उसकी कंपलसरी फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी कर प्रकरण में संलग्न करने की दी गई जानकारी.
रासायनिक परीक्षण कराने के लिए सेंचुरेटेड कर टीशु को प्रिजर्व करने, क्रांईम सीन, ई-एविडेंस फोटोग्राफी करना, स्नेक बाईट के प्रकरण में ड्राय-साल्ट में प्रिजर्व करना एवं नये कानून में डिजिटल साक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण है जिसके संबंध में चर्चा की गई.
इस कार्यशाला में जिले के राजपत्रित अधिकारी, थाना/चौकी प्रभारीगण एवं विवेचक गण रहे उपस्थित.
जांजगीर-चांपा. 07 जुलाई 2025 : जांजगीर-चांपा में 06 जुलाई 2025 को पुलिस लाइन में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला ने अपराध जांच और न्याय प्रणाली में तकनीकी नवाचारों की नई दिशा तय की। न्यायाधीशों, पुलिस अधीक्षकों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में ई-साक्ष्य, NDPS एक्ट की सख्ती, ऑन-साइट वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्य की अहमियत पर गहन चर्चा की गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य पुलिसिंग की कार्यशैली को नई भारतीय न्याय प्रणाली के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाना था।
नवीन अपराधिक कानूनों में सम्मिलित की गई तकनीकी प्रक्रियाओं नवाचारों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने के लिए इनका समन्वय पुलिसिंग की बुनियादी कार्यशैली में कैसे किया जायें, इसी उद्देश्य को लेकर दिनांक 06 जुलाई 2025 को पुलिस लाइन जांजगीर के सभा-कक्ष में जिले के पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों का नवीन कानून के क्रियान्वयन के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया।
माननीय श्री शक्ति सिंह राजपूत जिला एवं सत्र न्यायाधीश जांजगीर-चांपा द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि नवीन भारतीय न्याय संहिता आम जनता को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया है, जिससे आम जनता को न्याय मिलने में विलंब न हो, पुलिस एवं न्यायालय के लिए समय निर्धारित किया गया है, महिलाओं से संबंधित अपराधों में दण्ड का प्रावधान करते हुए महिलाओं से संबंधित अपराधों को कठोर बनाया गया है, धारा-4 भारतीय न्याय संहिता में सामुदायिक सेवा, न्याय-व्यवस्था का दंड से न्याय की ओर बढ़ता कदम है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत घर या व्यवसायिक स्थान या अन्य जगह की तलाशी लेगें तो उसकी कंपलसरी फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी की जायेगी, वह न्यायालय में मान्य होगा, इस प्रकार न्यायालय में प्रकरण में विंलब नहीं होगा और जल्द से जल्द आरोपी को सजा भी हो जायेगी, भौतिक साक्ष्यों का संकलन, नये कानून मे क्या प्रावधान किये गए हैं, 7 वर्ष या 7 वर्ष से अधिक की सजा वाले अपराध में फॉरेंसिक टीम का घटना-स्थल पर पहुंचना आवश्यक किया गया है, के संबंध में तथा अपराधिक प्रकरण में जप्ती की प्रक्रिया एवं साक्ष्य के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया। ई-साक्ष्य, ई-समंस, आई.ओ. मितान एवं नवीन कानून (भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम) के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
माननीय श्री शैलेन्द्र चौहान अपर सत्र न्यायधीश जांजगीर द्वारा अपने उद्बोधन में बताया कि NDPS के प्रकरण की कार्यवाही के दौरान विवेचनाधिकारी को गंभीरता से कार्यवाही करते हुए मौके पर ही आरोपी के कब्जे से गवाहों के समक्ष जप्ती कार्यवाही करते हुए मौके पर ही तौल करते हुए प्रदर्श को शीलबंद करना चाहिए।
पुलिस अधीक्षक श्री विजय कुमार पाण्डेय (IPS) ने कार्यशाला के दौरान उपस्थित अधिकारी/कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा पारित नए अपराधिक कानून भारत की न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाओं लेकर आये हैं। इन कानूनों में पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा, महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों के लिए कठोर दण्ड का प्रावधान एवं पुलिस प्रक्रिया में तकनीकी नवाचार जैसे घटना-स्थल का निरीक्षण, तलाशी और जप्ती, पुलिस अधिकारियों द्वारा तलाशी, ब्यान की रिकार्डिंग की विडियोग्राफी तथा केस की डिजिटल ट्रैकिंग सम्मिलित है।
श्रीमती आकांक्षा सिंह वैज्ञानिक तकनीकी अधिकारी FSL जांजगीर द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि नवीन भारतीय न्याय संहिता 01 जुलाई 2024 को लागू किया गया था, जिसे एक वर्ष पूर्ण हो चुके है। ई-कोर्ट, ई-फारेंसिक, ई-जस्टिस सिस्टम को सपोर्ट कर सके, वैज्ञानिक साक्ष्यों का संकलन किस प्रकार से करना है, वैज्ञानिक साक्ष्यों को परीक्षण के लिए पहुंचाने तक चैन ऑफ कस्टडी का ध्यान रखना होता है, इस प्रोसेस में चिकित्सा का महत्वपूर्ण योगदान है, सैम्पल इस प्रकार से कलेक्ट करना है जिससे वो जिस रूप में लिए गए है उसी रूप में परीक्षण के लिए पहुँचे, इसके लिए पैकिंग एवं टाइम का बहुत महत्व है, रासायनिक परीक्षण कराने के लिए सेंचुरेटेड कर टीशु को प्रिजर्व करने, क्रांईम सीन, ई-एविडेंस फोटोग्राफी कर ऑन द स्पॉट एवं ऑनलाईन डालना, स्नेक बाईट के प्रकरण में ड्राय साल्ट में प्रिजर्व करना एवं नये कानून में डिजिटल साक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण है बताया गया।
इस कार्यशाला का सफल संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री उमेश कुमार कश्यप के नेतृत्व में रक्षित निरीक्षक प्रदीप कुमार जोशी द्वारा किया गया। कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात श्री उदयन बेहार, CSP जांजगीर श्रीमति कविता ठाकुर, SDOP चांपा श्री यदुमणि सिदार, DSP विजय पैकरा, DSP श्री प्रदीप कुमार सोरी, DSP श्रीमति सात्यकला रामटेके सहित जिले के थाना चौकी प्रभारीगण उपस्थित रहे।
