अडानी को लाभ पहुंचाने भाजपा ने रची साजिश! सुशील आनंद शुक्ला ने खोली खनन घोटाले की परतें

रायपुर/21 जुलाई 2025 भाजपा ने बहुत सी जानकारी गलत और गुमराह करने वाली अपनी प्रेस वार्ता में दी है. दरअसल उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार और राज्यों की भाजपा सरकारों और अडानी की करतूतों पर पर्दा डालकर भ्रमित करने के लिए गलत जानकारियां दीं हैं। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा सरकारों ने अडानी की गोद में बैठकर फ़ैसले किए और किस तरह से अडानी को ही कोयले की सारी ठेकेदारी सौंप दी। केंद्र की भाजपा सरकार ने राज्य की भाजपा सरकारों को खदान आवंटित किए और राज्य की भाजपा सरकारों ने अडानी को एमडीओ नियुक्त कर दिया। सर्वप्रथम परसा ईस्ट केते बासन और परसा कोल ब्लॉक को अनुमति देने की मांग रमन सिंह सरकार के द्वारा की गई जिस पर मनमोहन सिंह सरकार के रहते हुए अनुमति जारी हुई परंतु बिलासपुर के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव के द्वारा इस अनुभूति को चुनौती दी गई और 24 मार्च 2014 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल प्रधान पीठ दिल्ली ने यह सभी अनुमतियां रद्द कर दी। जितने भी कोल ब्लॉक 2014 के पहले आवंटित हुए थे, उन सभी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने 25 अगस्त 2014 और 24 सितंबर 2014 के फैसले से रद्द कर दिया था। अतः यह कहना कि कोई कोल ब्लॉक मनमोहन सिंह सरकार के द्वारा आवंटित था इसलिए संचालित है, यह सर्वथा गलत और गुमराह करने वाला है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के समय कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए कोई पृथक कानून या सुप्रीम कोर्ट का दिशा निर्देश नहीं था इसलिए पूर्ववर्ती सरकारों के द्वारा जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार भी शामिल है, जिसने इस नीति के तहत 23 कोल ब्लॉक अलॉट किए थे, उन सभी से यह गलतियां हुई। परंतु सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब कानूनी प्रक्रिया साफ हुई तब मोदी की सरकार ने नया कानून बनाया। मोदी की सरकार 31 मार्च 2015 को परसा ईस्ट केते बासन, परसा और केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक हसदेव क्षेत्र में राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को कोयला खनन के लिए और अडानी के साथ संयुक्त उपक्रमों को कोयला खनन के लिए प्रदान किए। सभी आवंटन राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार के निवेदन पर किए गए।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि मोदी सरकार ने अडानी के साथ संयुक्त उपक्रम जिसे सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका था, उसे भी पुनः पुनर्जीवित कर संचालन करने की अनुमति दी। रमन सिंह की सरकार में इन सभी कोयला ब्लॉकों में खनन के लिए राज्य सरकार की सहमति दी और वन और पर्यावरण अनुमति दिलाने में पूरी मदद की। एनजीटी ने इस क्षेत्र में बृहद बायोडायवर्सिटी अध्ययन करने की सिफारिश की और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तथा आईसीएफआरई संस्थान के द्वारा यह अध्ययन करने को कहा। केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की रमन सिंह सरकार ने 2014 से 2018 तक यह अध्ययन कराया ही नहीं।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार ने आते साथ 15 जनवरी 2019 की वन सलाहकार समिति की बैठक में परसा कोल ब्लॉक को अनुमति देने का विरोध किया और कहा कि पहले एनजीटी के द्वारा निर्देशित वृहद अध्ययन कराया जाना चाहिए परंतु मोदी सरकार ने यह अनुरोध नहीं माना और परसा कोल ब्लॉक की प्रथम चरण वन अनुमति 22 फरवरी 2019 और पर्यावरण अनुमति 12 जुलाई 2019 दोनों जारी कर दी। रमन सिंह की सरकार ने लेमरू के हाथी अभ्यारण को भी अधिसूचित नहीं किया और निर्णय को टाल दिया। भूपेश बघेल सरकार ने 7 अक्टूबर 2021 को 1995 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हाथी अभ्यारण अधिसूचित कर बहुत बड़े हिस्से को संरक्षित किया। भूपेश बघेल सरकार के कहने पर केंद्र सरकार की कोयला नीलामी में से हसदेव क्षेत्र के कई ब्लॉक और मांड क्षेत्र के कई कोयला ब्लॉक नीलामी और आवंटन से हटाए गए।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक का भूमि अधिग्रहण केंद्र सरकार ने कोल बेरिंग एक्ट के तहत जब प्रारंभ किया तब भूपेश बघेल सरकार ने 11 जनवरी 2021 को इस पर विधिवत कड़ी आपत्ति दर्ज की। परसा कोल ब्लॉक की वन अनुमति जारी होने के बाद जन विरोध को देखते हुए कांग्रेस सरकार ने केंद्र सरकार को परसा कोल ब्लॉक को भी रद्द करने के लिए विधिवत पत्र जारी किया और अपने रहते तक इस कोल ब्लॉक में पेड़ कटाई या खनन नहीं होने दिया। सितंबर 2023 में भूपेश बघेल सरकार के रहते सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में वन विभाग छत्तीसगढ़ ने शपथ पत्र दाखिल कर कहा कि परसा ईस्ट केते बासन के अलावा किसी और ब्लॉक की आवश्यकता राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को नहीं है अतः परसा या केते एक्सटेंशन में खदान नहीं होना चाहिए। 2023 दिसम्बर में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद विष्णु देव सायं सरकार के शपथ के पहले ही हसदेव क्षेत्र में वन कटाई की अनुमति दे दी गई। जिस परसा कोल ब्लॉक की अनुमति और आवंटन रद्द करने का पत्र भूपेश बघेल सरकार के समय जारी हुआ था उसमें भी खनन और पेड़ कटाई की अनुमति विष्णु देव साय सरकार के रहते दी गई। कांग्रेस सरकार के समय केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक की जनसुनवाई तीन बार स्थगित की गई और उसके भूमि अधिग्रहण का भी विरोध किया गया था परंतु विष्णु देव सहायक सरकार ने न केवल इसकी जनसुनवाई कराई बल्कि इसे अनुमति देने की अनुशंसा के साथ केंद्र सरकार को भेज दिया।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि गारे 2 कोल ब्लॉक तमनार क्षेत्र का मामला है यह कोल ब्लॉक भी मोदी सरकार ने महाराष्ट्र पावर जेनरेशन कंपनी को देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते आवंटित किया है। देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने ही अडानी के साथ संयुक्त उपक्रम बनाकर उसे खनन की अनुमति दी है। इस कोल ब्लॉक की भी पर्यावरण और वन अनुमति केंद्र की मोदी सरकार ने दी है। बिना ग्राम सभा सहमति के वन अनुमति देने का काम केंद्र की मोदी सरकार ने किया है। बिना उचित पुनर्वास योजना और मुआवजा वितरण के गारे 2 कोल ब्लॉक क्षेत्र में अडानी के आतंक से काम प्रारंभ कराया जा रहा है।

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